Aaru Yadav ❤️❤️
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#📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार #👌रियलिटी शो Sabar ki aadat ho jaye to ✨🫰💫
📒 मेरी डायरी - 00 Qadaz Ki 0 09 |0 aye OSond Qasand na ur0 89 dil Sob hqi ! ! J10 00 Qadaz Ki 0 09 |0 aye OSond Qasand na ur0 89 dil Sob hqi ! ! J10 - ShareChat
#💝 शायराना इश्क़ #💿पुराने गाने #🍃अदरक के फायदे #😇मन शांत करने के उपाय Aao kbhi chai pilaya 🫂
💝 शायराना इश्क़ - ShareChat
00:14
#🙌 Never Give Up #👌रियलिटी शो
🙌 Never Give Up - जिंदगी का सच थोड़ा कड़वा है... पर यही सच्चाई है कभी पैसों की कमी रहती है, तो कभी रिश्तों की॰ और जब दोनों मिल जाते हैं, तो सेहत साथ नहीं देती...  पैसे , रिश्ते और सेहत तीनों मिल भी जाएं अगर तो वक्त ही कम पड़ जाता है... ज़िंदगी हमें सब कुछ एक साथ नहीं देती, #@్RT लेकिन जो भी देती है उसी रहना सिखा देती है कभी किस्मत अधूरी रह जाती है, तो कभी ख्वाहिशें ही कम हो जाती हैं. इसलिए शिकायत नहीं, हर हाल में शुक्रिया करना सीखो यही जीने का असली हुनर है. जिंदगी का सच थोड़ा कड़वा है... पर यही सच्चाई है कभी पैसों की कमी रहती है, तो कभी रिश्तों की॰ और जब दोनों मिल जाते हैं, तो सेहत साथ नहीं देती...  पैसे , रिश्ते और सेहत तीनों मिल भी जाएं अगर तो वक्त ही कम पड़ जाता है... ज़िंदगी हमें सब कुछ एक साथ नहीं देती, #@్RT लेकिन जो भी देती है उसी रहना सिखा देती है कभी किस्मत अधूरी रह जाती है, तो कभी ख्वाहिशें ही कम हो जाती हैं. इसलिए शिकायत नहीं, हर हाल में शुक्रिया करना सीखो यही जीने का असली हुनर है. - ShareChat
#🎵जितनी दफा देखूं तुझे🎶 #💝 शायराना इश्क़ #😘रोमांटिक सॉन्ग chai bina chain kha ☕ 🫰
🎵जितनी दफा देखूं तुझे🎶 - ShareChat
00:19
#🎄हरे पेड़ #नीला आसमान 🌌 #🌼 मेरा बगीचा 🌸 #🌼फूलों के पौधे🌱 #🏞 पर्यटन फोटोग्राफी
🎄हरे पेड़ - गांव उजाड़ कर शहर बसाते है, अजीब पागल लोग है, जंगल काट कर, गमले में पेड़ लगाते हैं !! गांव उजाड़ कर शहर बसाते है, अजीब पागल लोग है, जंगल काट कर, गमले में पेड़ लगाते हैं !! - ShareChat
#📒 मेरी डायरी #❤️जीवन की सीख #☝ मेरे विचार #😎मोटिवेशनल गुरु🤘 #🥰Express Emotion
📒 मेरी डायरी - उतनी भी कठिन नहीं है, ज़िदगी लेते हैं | # == बना उसे   उलझा देते है में | हम ego 3< expectations comparison , से जीना सीख लो , সামী 3{R  37 आएगी ~ छोटी - सी चीज़ में सुंदरता नज़र तोहर चाय की चुस्की में , एक किसी दोस्त की हँसी में , किसी अजनबी की मुस्कान में । या कला है , जहाँ कम में নী " सादगी 81" भर जाता भी दिल तुम्हें छोटे - छोटे पलों में खुशी जब तब समझ लेना - दिखने   लगे , जीना सीख गए हो। ") तुम उतनी भी कठिन नहीं है, ज़िदगी लेते हैं | # == बना उसे   उलझा देते है में | हम ego 3< expectations comparison , से जीना सीख लो , সামী 3{R  37 आएगी ~ छोटी - सी चीज़ में सुंदरता नज़र तोहर चाय की चुस्की में , एक किसी दोस्त की हँसी में , किसी अजनबी की मुस्कान में । या कला है , जहाँ कम में নী " सादगी 81" भर जाता भी दिल तुम्हें छोटे - छोटे पलों में खुशी जब तब समझ लेना - दिखने   लगे , जीना सीख गए हो। ") तुम - ShareChat
#☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी #👌रियलिटी शो #❤️जीवन की सीख
☝ मेरे विचार - हू... जिसे सब समझ आता है, "मैं ऐसी लड़की पर हर बात जताना मेरी आदत में नहीं। दो चेहरे लेकर जीना मुझे कभी आया ही नहीं , जो हूँ, जैसी हूँ, वैसी ही सामने रहती हूँ। लोगों से घुलने मिलने में थोड़ा वक़्त लगता है, लेकिन जब किसी को अपना मान लूँ॰.. तो दिल से निभाती हूँ। किसी की करना या सुनना अच्छा नहीं लगता, बुराई ; {us' की बातों से दूर ही रहती हूँ। इसलिए वजह से हर किसी को मैं पसंद इसी शायद नहीं आती. पर जो मुझे सच में जानते हैं, उन्हें पता है- मैं जैसी हूँ॰.. वैसी ही बेमिसाल हूँ।" 100 #Aurul हू... जिसे सब समझ आता है, "मैं ऐसी लड़की पर हर बात जताना मेरी आदत में नहीं। दो चेहरे लेकर जीना मुझे कभी आया ही नहीं , जो हूँ, जैसी हूँ, वैसी ही सामने रहती हूँ। लोगों से घुलने मिलने में थोड़ा वक़्त लगता है, लेकिन जब किसी को अपना मान लूँ॰.. तो दिल से निभाती हूँ। किसी की करना या सुनना अच्छा नहीं लगता, बुराई ; {us' की बातों से दूर ही रहती हूँ। इसलिए वजह से हर किसी को मैं पसंद इसी शायद नहीं आती. पर जो मुझे सच में जानते हैं, उन्हें पता है- मैं जैसी हूँ॰.. वैसी ही बेमिसाल हूँ।" 100 #Aurul - ShareChat
#☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी #❤️जीवन की सीख #🙌 Never Give Up
☝ मेरे विचार - कौन हूँ मैँ कभी हँसती हूँ बेवजह कभी बिना बात रो जाती हूँ सबके बीच होकर भी॰ अकेली सी रह जाती हूँ कभी खुद पर यकीन होता है कभी खुद  से ही डर जाती हूँ आईने में जो दिखती हूँ क्या सच में वही हूँ मैं ? কল্ী মপনী কষী তীনী চুঁ कभी उन्हें ही भूल जाती हूँ दिल जो चाहता है मेरा उसे ही समझ नहीं पाती हू कभी सबको खुश रखती हू कभी खुद से रूठ जाती हूँ के लिए जीते जीते दूसरों खुद को कहीं खो जाती हूँ ये दिल हर रोज़ पूछता हे भी कुछ কমনা 6 चुप रहकर  इस छोटी सी जिंदगी में आखिर कौन हूँ में ? कौन हूँ मैँ कभी हँसती हूँ बेवजह कभी बिना बात रो जाती हूँ सबके बीच होकर भी॰ अकेली सी रह जाती हूँ कभी खुद पर यकीन होता है कभी खुद  से ही डर जाती हूँ आईने में जो दिखती हूँ क्या सच में वही हूँ मैं ? কল্ী মপনী কষী তীনী চুঁ कभी उन्हें ही भूल जाती हूँ दिल जो चाहता है मेरा उसे ही समझ नहीं पाती हू कभी सबको खुश रखती हू कभी खुद से रूठ जाती हूँ के लिए जीते जीते दूसरों खुद को कहीं खो जाती हूँ ये दिल हर रोज़ पूछता हे भी कुछ কমনা 6 चुप रहकर  इस छोटी सी जिंदगी में आखिर कौन हूँ में ? - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #📒 मेरी डायरी #👌रियलिटी शो #☝ मेरे विचार # acha lagta hai
❤️जीवन की सीख - अच्छा लगता है अपने बीते हुए अकेले बैठकर पालो को याद करना कभी कभी बीते पल ही सबसे ज़्यादा सुकून देते हैं। यादों में खो जाना भी एक तरह की शांति है। कुछ पल.. बस दिल में ही अच्छे लगते हैं। अच्छा लगता है ज़िंदगी थोड़ी देर के लिए पीछे मुड़कर देखती है। ٩ यादें भी क्या कमाल की होती हैं और सुकून " दर्द भी देती हैं  भी। अच्छा लगता है अपने बीते हुए अकेले बैठकर पालो को याद करना कभी कभी बीते पल ही सबसे ज़्यादा सुकून देते हैं। यादों में खो जाना भी एक तरह की शांति है। कुछ पल.. बस दिल में ही अच्छे लगते हैं। अच्छा लगता है ज़िंदगी थोड़ी देर के लिए पीछे मुड़कर देखती है। ٩ यादें भी क्या कमाल की होती हैं और सुकून " दर्द भी देती हैं  भी। - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #👌रियलिटी शो #📒 मेरी डायरी #😎मोटिवेशनल गुरु🤘
❤️जीवन की सीख - वो भी क्या दौर था... जब घर छोटा था, पर दिल बहुत बड़े थे, पैसे कम थे, मगर रिश्ते बड़े खरे थे। एक थाली में खाते थे, एक ही छत के नीचे हंसते रोते थे, किसी के दुख में सब साथ होते थे, किसी की खुशी में सब अपने होते थे। सब कुछ है - সাত ঐমা; शोहरत, आराम... पर ना वो साथ है, ना वो अपनापन, हर रिश्ते में आ गया है कोई ना कोई ग़म। भाई-भाई से दूर हो गया, रिश्तों में ज़हर घुल गया, कभी जो जान थे एक॰दूसरे की, आज पैसों के लिए लड़ गया। ये कैसा समय आ गया है, जहां " मैं" जीत गया और "हम" हार गया... काश...फिर से वो दिन लौट आएं, जहां रिश्ते पैसे से नहीं, दिल से निभाए जाएं। वो भी क्या दौर था... जब घर छोटा था, पर दिल बहुत बड़े थे, पैसे कम थे, मगर रिश्ते बड़े खरे थे। एक थाली में खाते थे, एक ही छत के नीचे हंसते रोते थे, किसी के दुख में सब साथ होते थे, किसी की खुशी में सब अपने होते थे। सब कुछ है - সাত ঐমা; शोहरत, आराम... पर ना वो साथ है, ना वो अपनापन, हर रिश्ते में आ गया है कोई ना कोई ग़म। भाई-भाई से दूर हो गया, रिश्तों में ज़हर घुल गया, कभी जो जान थे एक॰दूसरे की, आज पैसों के लिए लड़ गया। ये कैसा समय आ गया है, जहां " मैं" जीत गया और "हम" हार गया... काश...फिर से वो दिन लौट आएं, जहां रिश्ते पैसे से नहीं, दिल से निभाए जाएं। - ShareChat