Harish Prajapati
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Harish Prajapati
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श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👌 अच्छी सोच👍 #🙏सुविचार📿 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव" मनुष्य की प्रवृत्ति का निर्माण प्रारब्ध अनुसार जन्म से ही होता है!़ मनुष्य जन्म से ही अपने साथ सत रज८ तम इन तीन गुणों को लेकर पैदा होता है और सृष्टि की रचना भी इन तीन गुणों में ये तीनों गुण के आधार पर की गई हैग़इस त्रिगुणात्मक * &2 विद्यमान रहते हैं परन्तु हर प्राणी के अन्दर इन तीनों गुणों में से कोई एक गुण अधिक प्रधान होता है जिसके कारण प्राणी का चरित्र और प्रवृत्ति वैसी ही बन जाती है! जिसमें रजोगुण प्रधान होगा वह प्राणी ऐश्वर्य की लालसा रखता है और जिसमें तमोगुण प्रधान होगा वह मनुष्य प्रमादी . क्रोध द्वेष जैसी नकारात्मकता से भरा होता है और जिसमें सतोगुण प्रधान होगा वह मनुष्य सबसे उत्तम होता है जो ईश्वर को मानने वाला सीधा सरलट  सच्चा होता है उदार विनम्र होता है। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव" मनुष्य की प्रवृत्ति का निर्माण प्रारब्ध अनुसार जन्म से ही होता है!़ मनुष्य जन्म से ही अपने साथ सत रज८ तम इन तीन गुणों को लेकर पैदा होता है और सृष्टि की रचना भी इन तीन गुणों में ये तीनों गुण के आधार पर की गई हैग़इस त्रिगुणात्मक * &2 विद्यमान रहते हैं परन्तु हर प्राणी के अन्दर इन तीनों गुणों में से कोई एक गुण अधिक प्रधान होता है जिसके कारण प्राणी का चरित्र और प्रवृत्ति वैसी ही बन जाती है! जिसमें रजोगुण प्रधान होगा वह प्राणी ऐश्वर्य की लालसा रखता है और जिसमें तमोगुण प्रधान होगा वह मनुष्य प्रमादी . क्रोध द्वेष जैसी नकारात्मकता से भरा होता है और जिसमें सतोगुण प्रधान होगा वह मनुष्य सबसे उत्तम होता है जो ईश्वर को मानने वाला सीधा सरलट  सच्चा होता है उदार विनम्र होता है। हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏सुविचार📿 #👌 अच्छी सोच👍
🌺 श्री गणेश - 77 `/0^ "सांब सदाशिव " बुद्धि विवेक पर भरोसा करने पर भी एक अड़चन और ख़तरा हो सकता है क्योंकि मनुष्य का विनाशकाल समय आने पर सर्वप्रथम बुद्धि भ्रष्ट हो सकती है अर्थात जब मनुष्य का प्रतिकूल समय आता है तो मनुष्य को अपनी बुद्धि भी ग़लत रास्ते पर ले जाती है! अतः मनुष्य की प्रवृत्ति   बुद्धि. इच्छा गलत मार्ग का अनुसरण करवा सकती है। हरीश प्रजापति 77 `/0^ "सांब सदाशिव " बुद्धि विवेक पर भरोसा करने पर भी एक अड़चन और ख़तरा हो सकता है क्योंकि मनुष्य का विनाशकाल समय आने पर सर्वप्रथम बुद्धि भ्रष्ट हो सकती है अर्थात जब मनुष्य का प्रतिकूल समय आता है तो मनुष्य को अपनी बुद्धि भी ग़लत रास्ते पर ले जाती है! अतः मनुष्य की प्रवृत्ति   बुद्धि. इच्छा गलत मार्ग का अनुसरण करवा सकती है। हरीश प्रजापति - ShareChat
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🌺 श्री गणेश - "साब सदाशिव " कामनाओं पर लगाम लगाने के लिए एक उपाय सन्तोष का भाव भी होता है यदि मनुष्य सन्तोष का भाव रखे तो सुखी व शान्त रह सकता है जैसे ही सन्तोष का भाव मन में आयेगा उसी क्षण से मनुष्य सुखी तथा शान्त रहने लगता है। हरीश प्रजापति "साब सदाशिव " कामनाओं पर लगाम लगाने के लिए एक उपाय सन्तोष का भाव भी होता है यदि मनुष्य सन्तोष का भाव रखे तो सुखी व शान्त रह सकता है जैसे ही सन्तोष का भाव मन में आयेगा उसी क्षण से मनुष्य सुखी तथा शान्त रहने लगता है। हरीश प्रजापति - ShareChat
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🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " जैसे दीपक की लौ हमेशा स्थिर रहकर नही जल सकती उसको वायु का झोंका ही हिला देता हैग़इसी प्रकार मनुष्य के मन के दीपक की लौ इच्छाओं और कामनाओं की हवा से स्थिर नहीं रह पाता है!एक कामना की पूर्ति के पश्चात दूसरी कामना जन्म ले लेती है जिससे मनुष्य कामनाओं के भंवरजाल में फसता जाता है अतः मनुष्य को कामनाओं इच्छाओं पर लगाम लगानी चाहिए तभी उसका मन स्थिर रह सकता है। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " जैसे दीपक की लौ हमेशा स्थिर रहकर नही जल सकती उसको वायु का झोंका ही हिला देता हैग़इसी प्रकार मनुष्य के मन के दीपक की लौ इच्छाओं और कामनाओं की हवा से स्थिर नहीं रह पाता है!एक कामना की पूर्ति के पश्चात दूसरी कामना जन्म ले लेती है जिससे मनुष्य कामनाओं के भंवरजाल में फसता जाता है अतः मनुष्य को कामनाओं इच्छाओं पर लगाम लगानी चाहिए तभी उसका मन स्थिर रह सकता है। हरीश प्रजापति - ShareChat
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🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " स्थितप्रज्ञ महापुरूष सुख दुःख में भी आत्मिक शांति प्राप्त कर लेता है! परम आनन्द में लीन रहने से सुख दुःख उसे विचलित नहीं करते। स्थितप्रज्ञ मनुष्य का मन उस दीपक की लौ की भांति होती है जो कभी हिलती डुलती नहीं स्थिर रहती है। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " स्थितप्रज्ञ महापुरूष सुख दुःख में भी आत्मिक शांति प्राप्त कर लेता है! परम आनन्द में लीन रहने से सुख दुःख उसे विचलित नहीं करते। स्थितप्रज्ञ मनुष्य का मन उस दीपक की लौ की भांति होती है जो कभी हिलती डुलती नहीं स्थिर रहती है। हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏सुविचार📿 #👌 अच्छी सोच👍
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " किसी कलाकार या सामान्य व्यक्ति से अज्ञानता वश हुई चूक का उपहास उड़ानें से व्यक्ति का दुःख अधिक ही होता है साथ ही उसका आत्मविश्वास टूटने लगता है जबकि उसको समझाते हुए ढांढस बंधाने से उसका दुःख कम किया जा सकता है जिससे उसके मनोबल को टूटने से बचाया जा सकता है! अतः किसी का उपहास नही उड़ाना चाहिए यह समय है मित्रों आज किसी के लिए है तो कल किसी और के लिए परिस्थितियां उत्पन्न कर सकता है কলে নভ নলনানমনষ্টে हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " किसी कलाकार या सामान्य व्यक्ति से अज्ञानता वश हुई चूक का उपहास उड़ानें से व्यक्ति का दुःख अधिक ही होता है साथ ही उसका आत्मविश्वास टूटने लगता है जबकि उसको समझाते हुए ढांढस बंधाने से उसका दुःख कम किया जा सकता है जिससे उसके मनोबल को टूटने से बचाया जा सकता है! अतः किसी का उपहास नही उड़ाना चाहिए यह समय है मित्रों आज किसी के लिए है तो कल किसी और के लिए परिस्थितियां उत्पन्न कर सकता है কলে নভ নলনানমনষ্টে हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👌 अच्छी सोच👍 #🙏सुविचार📿 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " धन यदि वैभवशाली जीवन देता है तो साथ में ही जिम्मेदारी ला्ता है अतः मनुष्य को धन सिर्फ जीवन की आवश्यकताओं को पूर्ती का माध्यम समझना चाहिएग़यदि पद में प्रतिष्ठा और शक्ति होती है तो यह अपने साथ चुनौतियां अवश्य लाता है अतः मनुष्य को नैतिकता के साथ निर्णय लेने की क्षमता होगी तो ही पद की गरिमा सुरक्षित रह सकती है!़ यदि स्वतंत्रता अपनी इच्छानुसार जीवन है तो यह मनुष्य के लिए परिस्थितियां उत्पन्न करता है अतः मनुष्य को स्वतंत्रता का अनैतिक लाभ न उठाकर अपना आत्मविकास करना चाहिए न कि मनमाना आचरण। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " धन यदि वैभवशाली जीवन देता है तो साथ में ही जिम्मेदारी ला्ता है अतः मनुष्य को धन सिर्फ जीवन की आवश्यकताओं को पूर्ती का माध्यम समझना चाहिएग़यदि पद में प्रतिष्ठा और शक्ति होती है तो यह अपने साथ चुनौतियां अवश्य लाता है अतः मनुष्य को नैतिकता के साथ निर्णय लेने की क्षमता होगी तो ही पद की गरिमा सुरक्षित रह सकती है!़ यदि स्वतंत्रता अपनी इच्छानुसार जीवन है तो यह मनुष्य के लिए परिस्थितियां उत्पन्न करता है अतः मनुष्य को स्वतंत्रता का अनैतिक लाभ न उठाकर अपना आत्मविकास करना चाहिए न कि मनमाना आचरण। हरीश प्रजापति - ShareChat
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🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " नवीन विचारो की उत्पत्ति गम्भीरता गहरी सोच और शान्ति से ही संभव होती है गपशप और मुंहफटता से नहीं। हरीश प्रजापति| "सांब सदाशिव " नवीन विचारो की उत्पत्ति गम्भीरता गहरी सोच और शान्ति से ही संभव होती है गपशप और मुंहफटता से नहीं। हरीश प्रजापति| - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👌 अच्छी सोच👍 #🙏सुविचार📿 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " चुनौतियां तथा परिस्थितियां एक प्रकार की परीक्षा ही होती हैं और जिनमें सामर्थ्य होती है चुनौतियों का सामना करने की उनके जीवन में अवश्य आती हैग़जो मनुष्य ईमानदार सत्यनिष्ठ कर्तव्यनिष्ठ और ईश्वर के प्रति निष्ठावान हो उसके जीवन में चुनौतियां तथा परिस्थितियां जरूरआ जाती है इसका कारण बस इतना सा है कि सोने को ही परखा जाता है लोहे को नहीग़जो अमूल्य है, बहुमूल्य है और गुणवान है उसकी ही परीक्षा ली जाती है। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " चुनौतियां तथा परिस्थितियां एक प्रकार की परीक्षा ही होती हैं और जिनमें सामर्थ्य होती है चुनौतियों का सामना करने की उनके जीवन में अवश्य आती हैग़जो मनुष्य ईमानदार सत्यनिष्ठ कर्तव्यनिष्ठ और ईश्वर के प्रति निष्ठावान हो उसके जीवन में चुनौतियां तथा परिस्थितियां जरूरआ जाती है इसका कारण बस इतना सा है कि सोने को ही परखा जाता है लोहे को नहीग़जो अमूल्य है, बहुमूल्य है और गुणवान है उसकी ही परीक्षा ली जाती है। हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏सुविचार📿 #👌 अच्छी सोच👍
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " दुःख भोगते हुए भी जिसके मन में उद्वेग नहीं होता और नही सुख की कोई लालसा रखता है तथा जिसके हृदय में क्रोध लोभ मोह भय आदि विकारों के लिए कोई स्थान नहीं होता वो मनुष्य स्थितप्रज्ञ होता है। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " दुःख भोगते हुए भी जिसके मन में उद्वेग नहीं होता और नही सुख की कोई लालसा रखता है तथा जिसके हृदय में क्रोध लोभ मोह भय आदि विकारों के लिए कोई स्थान नहीं होता वो मनुष्य स्थितप्रज्ञ होता है। हरीश प्रजापति - ShareChat