Harish Prajapati
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श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏सुविचार📿 #👌 अच्छी सोच👍
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " विशाल अथाह सागर जैसा स्वभाव स्थितप्रज्ञ मनुष्य का होता है! नदी में अधिक जल आ जाने से बाढ़ आ जाती है उसकी तूफानी लहरें किनारों को तोड़कर तबाही मचा देती है! ऐसा हाल क्षुद्र या छोटे स्वभाव वाले व्यक्ति का होता है थोड़ी सी सफलता थोड़ा atttw सा धन को वह शान्ति से पचा नहीं पाता और होकर मर्यादा तोड़कर एक ओछे इन्सान जैसा व्यवहार प्रदर्शित करता है! लेकिन स्थितप्रज्ञ मनुष्य एक सागर की भांति चारों तरफ से आ रहे नदियों के जल को अपने में समाहित कर लेता है और शान्त रहता है नदियों का जल उसकी गहराई में गुम हो जाता है फिर भी किनारे नहीं तोड़ता है मर्यादा में ही रहता है सागर के भीतर రగ్ర్ जल का स्तर पहले के समान ही रहता है यही स्थितप्रज्ञ मनुष्य की उचित अवस्था होती है। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " विशाल अथाह सागर जैसा स्वभाव स्थितप्रज्ञ मनुष्य का होता है! नदी में अधिक जल आ जाने से बाढ़ आ जाती है उसकी तूफानी लहरें किनारों को तोड़कर तबाही मचा देती है! ऐसा हाल क्षुद्र या छोटे स्वभाव वाले व्यक्ति का होता है थोड़ी सी सफलता थोड़ा atttw सा धन को वह शान्ति से पचा नहीं पाता और होकर मर्यादा तोड़कर एक ओछे इन्सान जैसा व्यवहार प्रदर्शित करता है! लेकिन स्थितप्रज्ञ मनुष्य एक सागर की भांति चारों तरफ से आ रहे नदियों के जल को अपने में समाहित कर लेता है और शान्त रहता है नदियों का जल उसकी गहराई में गुम हो जाता है फिर भी किनारे नहीं तोड़ता है मर्यादा में ही रहता है सागर के भीतर రగ్ర్ जल का स्तर पहले के समान ही रहता है यही स्थितप्रज्ञ मनुष्य की उचित अवस्था होती है। हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👌 अच्छी सोच👍 #🙏सुविचार📿 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " जिस प्रकार प्रचण्ड वायु के झोँके से दीपक की ज्योति बुझ जाती है ठीक उसी प्रकार काम जनित अविवेक की आंधी से मनुष्य की स्मृति नष्ट-भ्रष्ट हो जाती है और स्मृति नष्ट होते ही बुद्धि का नाश होने में कितना समय लगता है! चेतना की समाप्ति सेजो दशा शरीर की होती है वही दशा बुद्धि के नाश होने पर मनुष्य की हो जाती है अतः बुद्धि नष्ट तो जीवन कष्टमय निश्चित है इसलिए आशक्तिही सर्वनाश का  मूल है। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " जिस प्रकार प्रचण्ड वायु के झोँके से दीपक की ज्योति बुझ जाती है ठीक उसी प्रकार काम जनित अविवेक की आंधी से मनुष्य की स्मृति नष्ट-भ्रष्ट हो जाती है और स्मृति नष्ट होते ही बुद्धि का नाश होने में कितना समय लगता है! चेतना की समाप्ति सेजो दशा शरीर की होती है वही दशा बुद्धि के नाश होने पर मनुष्य की हो जाती है अतः बुद्धि नष्ट तो जीवन कष्टमय निश्चित है इसलिए आशक्तिही सर्वनाश का  मूल है। हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏सुविचार📿 #👌 अच्छी सोच👍
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव" दुःख और कष्ट का मूल विषय और भोग ही होते हैं जब प्राणी किसी विषय मोह के आकर्षण में फसकर दिन रा्त उसी मोह का चिन्तन करता रहता हैग़कामना और वासना में कोई रुकावट होने पर क्रोध उत्पन्न होता है और जहां क्रोध हो वहां अविवेक कुविचार अपने पांव पसार लेता है। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव" दुःख और कष्ट का मूल विषय और भोग ही होते हैं जब प्राणी किसी विषय मोह के आकर्षण में फसकर दिन रा्त उसी मोह का चिन्तन करता रहता हैग़कामना और वासना में कोई रुकावट होने पर क्रोध उत्पन्न होता है और जहां क्रोध हो वहां अविवेक कुविचार अपने पांव पसार लेता है। हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👌 अच्छी सोच👍 #🙏सुविचार📿 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " मनुष्य को जीवन में पुरुषार्थ के साथ साथ परमात्मा की भी भक्ति कखनी चाहिए क्योंकि परमात्मा की भक्ति से मन सात्विक और विषयों में अनाशक्ति होने लगती है। हरीश प्रजापति | "सांब सदाशिव " मनुष्य को जीवन में पुरुषार्थ के साथ साथ परमात्मा की भी भक्ति कखनी चाहिए क्योंकि परमात्मा की भक्ति से मन सात्विक और विषयों में अनाशक्ति होने लगती है। हरीश प्रजापति | - ShareChat
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🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " जिनकी बुद्धि शुभ अशुभ आसक्ति से रहित हो जाती है तब ऐसे महापुरुषों को पूर्ण विश्वास हो जाता है कि ईश्वर सदा सर्वदा उनके साथ है इसलिए स्थिर विवेक वाले महापुरुष किसी भी परिस्थितियों में विचलित नहीं होते हैं। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " जिनकी बुद्धि शुभ अशुभ आसक्ति से रहित हो जाती है तब ऐसे महापुरुषों को पूर्ण विश्वास हो जाता है कि ईश्वर सदा सर्वदा उनके साथ है इसलिए स्थिर विवेक वाले महापुरुष किसी भी परिस्थितियों में विचलित नहीं होते हैं। हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👌 अच्छी सोच👍 #🙏सुविचार📿 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " भोग विलास युक्त प्राणी परमात्मा का भक्त कैसे हो सकता है जो विषयों की आशक्ति में लीन रहता हो वह ईश्वर का भक्त नहीं )0 हो सकता केवल भक्ति का प्रदर्शन और ढोंग ही होता है भक्ति का! ऐसे प्राणी मिथ्याचारी ही होते हैंजब तक मनुष्य का मन और आचरण मेल नहीं कर पायेगा वह भक्ति का पाखण्ड ही कहलायेगा।  हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " भोग विलास युक्त प्राणी परमात्मा का भक्त कैसे हो सकता है जो विषयों की आशक्ति में लीन रहता हो वह ईश्वर का भक्त नहीं )0 हो सकता केवल भक्ति का प्रदर्शन और ढोंग ही होता है भक्ति का! ऐसे प्राणी मिथ्याचारी ही होते हैंजब तक मनुष्य का मन और आचरण मेल नहीं कर पायेगा वह भक्ति का पाखण्ड ही कहलायेगा।  हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏सुविचार📿 #👌 अच्छी सोच👍
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " जिसने अपनी इन्द्रियों को ज्ञान और बुद्धि से मन के द्वारा अपने वश में कर लिया हो वह महापुरुष ही स्थिर बुद्धि का होता है न किवो जिसने अपने हठ से इन्द्रियों का निग्रह किया हो अर्थात के द्वारा मनुष्य कठिन व्रत उपवास कठोर नियम समाधि हठ तपस्या आदि अपनाकर शरीर व इन्द्रियों को कमजोर तो कर लिया हो लेकिन उसका मन विषयों की आशक्ति को त्याग नहीं कर पाया हो! इसलिए बुद्धि और ज्ञान से मनुष्य को आशक्ति देखते हुए त्यागनी चाहिए जिससे मन में विषयों को व और भोगते हुए भी आशक्तिन हो। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " जिसने अपनी इन्द्रियों को ज्ञान और बुद्धि से मन के द्वारा अपने वश में कर लिया हो वह महापुरुष ही स्थिर बुद्धि का होता है न किवो जिसने अपने हठ से इन्द्रियों का निग्रह किया हो अर्थात के द्वारा मनुष्य कठिन व्रत उपवास कठोर नियम समाधि हठ तपस्या आदि अपनाकर शरीर व इन्द्रियों को कमजोर तो कर लिया हो लेकिन उसका मन विषयों की आशक्ति को त्याग नहीं कर पाया हो! इसलिए बुद्धि और ज्ञान से मनुष्य को आशक्ति देखते हुए त्यागनी चाहिए जिससे मन में विषयों को व और भोगते हुए भी आशक्तिन हो। हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👌 अच्छी सोच👍 #🙏सुविचार📿 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " आध्यात्म में सर्वप्रथम ज्ञान के द्वारा बुद्धि को स्थिर करो फिर बुद्धि मन को स्थिरता देगी उसके पश्चात मन इन्द्रियों को विषयो से इस प्रकार खींच लेगा जिस प्रकार एक कछुआ ख़तरे की जरा आहट पाते ही अपने पैरों को अपने भीतर समेट लेता है इस ম मनुष्य विषयों से निराशक्त हो सकता है। प्रकार हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " आध्यात्म में सर्वप्रथम ज्ञान के द्वारा बुद्धि को स्थिर करो फिर बुद्धि मन को स्थिरता देगी उसके पश्चात मन इन्द्रियों को विषयो से इस प्रकार खींच लेगा जिस प्रकार एक कछुआ ख़तरे की जरा आहट पाते ही अपने पैरों को अपने भीतर समेट लेता है इस ম मनुष्य विषयों से निराशक्त हो सकता है। प्रकार हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🙏सुविचार📿 #👌 अच्छी सोच👍
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " विषयों भोगों से कहीं अधिक दुःखदायी होती है विषयों की आशक्ति और विषयों की आशक्तिका त्याग केवल इन्द्रियों के निग्रह से नहीं हो सकता आशक्ति का त्याग तो केवल मन के निग्रह से ही होता हैग़जब मन निराशक्त हो जाए तो इन्द्रियां विषयो को भोगती हुई भी विषयों से निराशक्त रह सकती है!़ जैसे कमल का फूल जल के अन्दर रहते हुए भी सूखा रहता है उस पर एक जल की बूंद भी नहीं ठहरती है। हरीश प्रजापति "सांब सदाशिव " विषयों भोगों से कहीं अधिक दुःखदायी होती है विषयों की आशक्ति और विषयों की आशक्तिका त्याग केवल इन्द्रियों के निग्रह से नहीं हो सकता आशक्ति का त्याग तो केवल मन के निग्रह से ही होता हैग़जब मन निराशक्त हो जाए तो इन्द्रियां विषयो को भोगती हुई भी विषयों से निराशक्त रह सकती है!़ जैसे कमल का फूल जल के अन्दर रहते हुए भी सूखा रहता है उस पर एक जल की बूंद भी नहीं ठहरती है। हरीश प्रजापति - ShareChat
#🌺 श्री गणेश #✍️ जीवन में बदलाव #👌 अच्छी सोच👍 #🙏सुविचार📿 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌺 श्री गणेश - "सांब सदाशिव " चलने में पैरों का स्थान का तथा रास्तों का दोष नहीं होता दोष होता है मन का दृष्टिकोण का क्योंकि कदम दृष्टि से नही दृष्टिकोण और मन की सोच अनुसार चलते और उसी रास्ते पर अग्रसर होते हैं जहां मन होगा. मंज़िले वहां मिलती है जहां मन होता है न कि वहां जहां पैर होते हैं। हरीश प्रजापति 4 "सांब सदाशिव " चलने में पैरों का स्थान का तथा रास्तों का दोष नहीं होता दोष होता है मन का दृष्टिकोण का क्योंकि कदम दृष्टि से नही दृष्टिकोण और मन की सोच अनुसार चलते और उसी रास्ते पर अग्रसर होते हैं जहां मन होगा. मंज़िले वहां मिलती है जहां मन होता है न कि वहां जहां पैर होते हैं। हरीश प्रजापति 4 - ShareChat