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#🤗जया किशोरी जी🕉️
🤗जया किशोरी जी🕉️ - ShareChat {Omesh Patet सर्व सुंदरी राधा umesh patel ना जानूं में भजन साधना, ना जानूं कोई बस इतना जानूं है किशोरी , विधि विधान सदा रहे तेरे चरणन में मेरे प्राण. 000 ShareChat {Omesh Patet सर्व सुंदरी राधा umesh patel ना जानूं में भजन साधना, ना जानूं कोई बस इतना जानूं है किशोरी , विधि विधान सदा रहे तेरे चरणन में मेरे प्राण. 000 - ShareChat
#🤗जया किशोरी जी🕉️
🤗जया किशोरी जी🕉️ - श्री लाड़ली  सरकांर जी की कृपा बरसाना धाम में एक बहुत गरीब वृद्घा रहती थी। उसका कोई अपना नहीं బT; बस लाड़ली जू सरकार " एक ही सहारा था - "मेरी वह रोज़ सुबह उठकर प्रेम सेने कहती - "राधे राधे मेरी किशोरी , आज भी अपनी दासी का ध्यान रखना. बरसाना में कई दिनों तक तेज वर्षा हुई। एक बार वृद्घा के घर में जन्न का एक दाना भी नहीं बचा।  भूखी होकर भी उसने कहा "आज भी पहले मेरी लाड़ली जू खाएंगी , ক্িং ম স্ত্রাক্তমী |" धाम THN वह खाली थाली लेकर बैठ गई और रोते रोते सरकार नाम जपने लगी - श्री लाड़ली ` যধী राधे... राधे. . थोड़ी देर बाद दरवाज़े पर दस्तक हुई। एक छोटी सी सुंदर बालिका , लाल ओढ़े , हाथ में भोजन की T टोकरी लिए खडी थी। उसने मुस्कुराकर कहा " मैं्यों , आज लाड़ली जी ने तुम्हारे लिए प्रसाद भेजा है। वृद्घा ने प्रेम से भोजन लिया। जब वह धन्यवाद कहने बाहर आई, तब वहां कोई नहीं था॰ सिर्फ हल्की सी सुगंध और कानों में गुंँजता  "अपने भक्त को भूखा मधुर स्वर कैसे रहने देती. बरसाने वाली श्री लाड़ली सरकार अपने भकों का साथ कभी नहीं छोड़तीं | जो सच्चे मन से " राधे राधे" पुकारता है, लाड़ली जू उसकी हर पुकार ೯| सुनती श्री लाड़ली  सरकांर जी की कृपा बरसाना धाम में एक बहुत गरीब वृद्घा रहती थी। उसका कोई अपना नहीं బT; बस लाड़ली जू सरकार " एक ही सहारा था - "मेरी वह रोज़ सुबह उठकर प्रेम सेने कहती - "राधे राधे मेरी किशोरी , आज भी अपनी दासी का ध्यान रखना. बरसाना में कई दिनों तक तेज वर्षा हुई। एक बार वृद्घा के घर में जन्न का एक दाना भी नहीं बचा।  भूखी होकर भी उसने कहा "आज भी पहले मेरी लाड़ली जू खाएंगी , ক্িং ম স্ত্রাক্তমী |" धाम THN वह खाली थाली लेकर बैठ गई और रोते रोते सरकार नाम जपने लगी - श्री लाड़ली ` যধী राधे... राधे. . थोड़ी देर बाद दरवाज़े पर दस्तक हुई। एक छोटी सी सुंदर बालिका , लाल ओढ़े , हाथ में भोजन की T टोकरी लिए खडी थी। उसने मुस्कुराकर कहा " मैं्यों , आज लाड़ली जी ने तुम्हारे लिए प्रसाद भेजा है। वृद्घा ने प्रेम से भोजन लिया। जब वह धन्यवाद कहने बाहर आई, तब वहां कोई नहीं था॰ सिर्फ हल्की सी सुगंध और कानों में गुंँजता  "अपने भक्त को भूखा मधुर स्वर कैसे रहने देती. बरसाने वाली श्री लाड़ली सरकार अपने भकों का साथ कभी नहीं छोड़तीं | जो सच्चे मन से " राधे राधे" पुकारता है, लाड़ली जू उसकी हर पुकार ೯| सुनती - ShareChat