✍🏻"गुरुवर - मेरी दूसरी मां" 🪔✨
#मां ने जन्म दिया इस जग में,
गुरु ने नाम-दान दे जीवन सँवारा।।
#मां ने उंगली पकड़ चलना सिखाया,
गुरु ने हाथ पकड़ भव-सागर से तारा।।
#मां की ममता आंचल में बसती,
गुरु की ममता वचनों में बसती।।
#मां बिना बोले हर दर्द समझ जाती,
गुरु बिना मांगे मोक्ष का मार्ग दिखा जाते।।
#मां ने रोटी देके भूख मिटाई,
गुरु ने ब्रह्म-ज्ञान दे तृष्णा मिटाई।।
#मां ने संस्कारों से सींचा हमको,
गुरु ने सुमिरन से जोड़ा हमको।।
#डांट में दोनों का निस्वार्थ प्यार छुपा,
गुस्से में दोनों का आशीर्वाद छुपा।।
#मां कहती है "बेटा संभल के चलना",
गुरु कहते हैं "बेटा नाम जपते चलना"।।
आज ‘मातृ दिवस’ के पावन अवसर पर,
मां के साथ अपने सद्गुरु को भी शत-शत नमन।।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
संध्या शर्मा "श्रेष्ठ"
औझर (मध्य प्रदेश) #🥰Express Emotion #🙏गुरु महिमा😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌷शुभ रविवार
✍🏻"गुरुवर - मेरी दूसरी मां" 🪔✨
#मां ने जन्म दिया इस जग में,
गुरु ने नाम-दान दे जीवन सँवारा।।
#मां ने उंगली पकड़ चलना सिखाया,
गुरु ने हाथ पकड़ भव-सागर से तारा।।
#मां की ममता आंचल में बसती,
गुरु की ममता वचनों में बसती।।
#मां बिना बोले हर दर्द समझ जाती,
गुरु बिना मांगे मोक्ष का मार्ग दिखा जाते।।
#मां ने रोटी देके भूख मिटाई,
गुरु ने ब्रह्म-ज्ञान दे तृष्णा मिटाई।।
#मां ने संस्कारों से सींचा हमको,
गुरु ने सुमिरन से जोड़ा हमको।।
#डांट में दोनों का निस्वार्थ प्यार छुपा,
गुस्से में दोनों का आशीर्वाद छुपा।।
#मां कहती है "बेटा संभल के चलना",
गुरु कहते हैं "बेटा नाम जपते चलना"।।
आज ‘मातृ दिवस’ के पावन अवसर पर,
मां के साथ अपने सद्गुरु को भी शत-शत नमन।।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
संध्या शर्मा "श्रेष्ठ"
औझर (मध्य प्रदेश)
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🥰Express Emotion #🌷शुभ रविवार
✍🏻"गुरुवर - मेरी दूसरी मां" 🪔✨
#मां ने जन्म दिया इस जग में,
गुरु ने नाम-दान दे जीवन सँवारा।।
#मां ने उंगली पकड़ चलना सिखाया,
गुरु ने हाथ पकड़ भव-सागर से तारा।।
#मां की ममता आंचल में बसती,
गुरु की ममता वचनों में बसती।।
#मां बिना बोले हर दर्द समझ जाती,
गुरु बिना मांगे मोक्ष का मार्ग दिखा जाते।।
#मां ने रोटी देके भूख मिटाई,
गुरु ने ब्रह्म-ज्ञान दे तृष्णा मिटाई।।
#मां ने संस्कारों से सींचा हमको,
गुरु ने सुमिरन से जोड़ा हमको।।
#डांट में दोनों का निस्वार्थ प्यार छुपा,
गुस्से में दोनों का आशीर्वाद छुपा।।
#मां कहती है "बेटा संभल के चलना",
गुरु कहते हैं "बेटा नाम जपते चलना"।।
आज ‘मातृ दिवस’ के पावन अवसर पर,
मां के साथ अपने सद्गुरु को भी शत-शत नमन।।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
संध्या शर्मा "श्रेष्ठ"
औझर (मध्य प्रदेश)
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🥰Express Emotion
#🌞 Good Morning🌞 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🥰Express Emotion
#🙏गुरु महिमा😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌞 Good Morning🌞 #🥰Express Emotion
✍🏻 गुरु का दरबार..।। ✨🌹
( गुरु के चरण,प्रजा का कल्याण )
#जय जयकार हो त्रिवेणी धाम की,
जहां साक्षात हरि के दास विराजें।
संत शिरोमणि राम रिछपाल जी,
जिनके दर्शन से कटते पाप के फंदे।।
#वो दाढ़ी नहीं तप का सागर है,
वो चंदन नहीं ब्रह्म का तेज है।
नैनों में करुणा की गंगा बहे,
वाणी में वेदों का सार बसे।।
#दर्शन की आस लिए राजस्थान
के मुख्यमंत्री आए,
भजन लाल नाम, भक्ति भाव
लाए।
सिंहासन छोड़, शीश झुकाने
आए,
चंदन तिलक, तुलसी माला लाए।।
#ठाकुर जी के आगे जोड़े हाथ,
गुरु चरणों में रखा माथ।
धन्य हुआ राजस्थान का भाग्य,
जब शासक ने पकड़ा संत का
हाथ।।
#गुरुवर ने जब हाथ बढ़ाया,
आशीष बनकर हरि कृपा बरसाया।
वो हाथ नहीं था, कल्पवृक्ष की
छांव,
जिसने छुआ, उसके मिट गए
सब घाव।।
#नैनों से बह चली करुणा की धार,
रोम-रोम बोला जय गुरुदेव अपार।
मौन में गूंजा वेद का सार,
"जा वत्स, तेरा हर संकल्प हो
साकार"।।
#धन्य हुआ वो राजसिंहासन,
जब झुका संत चरणों में शासन।
जहां गुरु की कृपा, वहां स्वयं
नारायण,
जहां झुके राजा, वहां बसे श्री
भगवान।।
#एक ओर राजदंड, एक ओर
जप माला,
पर दोनों का लक्ष्य एक - भव से
उबारने वाला।
प्रजा की सेवा ही प्रभु की पूजा,
यही पाठ पढ़ाया गुरुवर ने
दूजा।।
#धन्य धरा, धन्य वो शासक महान,
जिसने गुरु को माना अपना भगवान।
त्रिवेणी धाम की रज माथे लगाए,
जन-जन का भाग्य स्वयं ठाकुर
जी जगाए।।
#जहां संत की कृपा,वहां
हरि का वास,
जहां राजा झुके, वहां पूरे
सब काम
त्रिवेणी धाम की यही पहचान
भक्ति से मिलता है वरदान।।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
- संध्या शर्मा "श्रेष्ठ"
औझर (मध्य प्रदेश)
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌷शुभ रविवार
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 Cm भजन लाल जी #🙏गुरु महिमा😇 #🌷शुभ रविवार #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
#नर्सिंग भगवान #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🕉️सनातन धर्म🚩 #👩🎨WhatsApp प्रोफाइल DP
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🚗🧗🏻भारत भ्रमण व सफर प्रेमी🚂⛰ #😍खूबसूरत पर्यटन स्थल🏝 #🥰Express Emotion #👩🎨WhatsApp प्रोफाइल DP
#🌷शुभ रविवार #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💝 शायराना इश्क़ #✍मेरे पसंदीदा लेखक









![🕉️सनातन धर्म🚩 - संत का आशीष राजा का प्रणाम ( गुरु के चरण प्रजा का कल्याण ` न्रिवेणी ध्ा।म की रज पाबन जहां तपस्वी संत राम रिछपाल जी ( गुरुजी } चिराजे। दाढ़ी र्मे सदिर्यों का अनूभव माथ प चंदन मुख पर तज समाया। आं्खा र्म बस ह यूर्गा को कहाना लिए घिवणी धाम शाभा पाया | राजस्थान के सेबक मुख्यमंत्ी भजन लाल आए माथे पे केसरिया तिलक ؟؟ ٧ न राज का घमंड, न सत्ता का मान बस श्रद्धा लकर पहच गुरु क द्वार। ठाकुर जी के दर्शन की आस लिए गुरुबर से आशीष की प्यास लिए।। झुके ्है बो चरणों र्मे भक्ति भाव से॰ फकीर है संत क गांच र्म। राजााभी | गुरुबर ने जब हाथ बढ़ाया - आशीष बनकर स्नह समाया। | कंपित स्वर स कछ ना बाल नयन के जल से ही सब कछ तोले। | बोले नर्ही कुछ , बस नयन बरसे जा बेटा , प्रजा का दुख तू हर ले।। ' ओर राजजधर्म एक ओर एक संत बचन , दोर्नो का संगम। जहां शासक झुके संतो के द्वार _ बहां बसती है ठाकूर की सरकार। | जहां गुरुवर का मिलता आशीवाद बहां हर बिगड़ी बनती जाए।। एक ओर सत्ता एक ओर संत , दोर्नो का मकसद एक ही अंत। प्रभ का नाम _ जननजन का काल्याण ঘঙী } সমলী Hutx: का काम। | धन्य है बो धरती जहां संत बसते , धन्य है बो शासक जो चरणोंर्मे झुकते IL न्रिवेणी धाम से जो आशीष लेकर जाए उसका हर काम ठ।ाकूर जी बनाए।। राजजस्थान की माटी कहे बारंबार संत का आशीष , ठाकुर का प्यार। भजन लाल को मिला गरु का आशीष - अब होगा प्रदेश का नव निर्माण। ] संप्या शर्मा" श्रेष्ठ " संत का आशीष राजा का प्रणाम ( गुरु के चरण प्रजा का कल्याण ` न्रिवेणी ध्ा।म की रज पाबन जहां तपस्वी संत राम रिछपाल जी ( गुरुजी } चिराजे। दाढ़ी र्मे सदिर्यों का अनूभव माथ प चंदन मुख पर तज समाया। आं्खा र्म बस ह यूर्गा को कहाना लिए घिवणी धाम शाभा पाया | राजस्थान के सेबक मुख्यमंत्ी भजन लाल आए माथे पे केसरिया तिलक ؟؟ ٧ न राज का घमंड, न सत्ता का मान बस श्रद्धा लकर पहच गुरु क द्वार। ठाकुर जी के दर्शन की आस लिए गुरुबर से आशीष की प्यास लिए।। झुके ्है बो चरणों र्मे भक्ति भाव से॰ फकीर है संत क गांच र्म। राजााभी | गुरुबर ने जब हाथ बढ़ाया - आशीष बनकर स्नह समाया। | कंपित स्वर स कछ ना बाल नयन के जल से ही सब कछ तोले। | बोले नर्ही कुछ , बस नयन बरसे जा बेटा , प्रजा का दुख तू हर ले।। ' ओर राजजधर्म एक ओर एक संत बचन , दोर्नो का संगम। जहां शासक झुके संतो के द्वार _ बहां बसती है ठाकूर की सरकार। | जहां गुरुवर का मिलता आशीवाद बहां हर बिगड़ी बनती जाए।। एक ओर सत्ता एक ओर संत , दोर्नो का मकसद एक ही अंत। प्रभ का नाम _ जननजन का काल्याण ঘঙী } সমলী Hutx: का काम। | धन्य है बो धरती जहां संत बसते , धन्य है बो शासक जो चरणोंर्मे झुकते IL न्रिवेणी धाम से जो आशीष लेकर जाए उसका हर काम ठ।ाकूर जी बनाए।। राजजस्थान की माटी कहे बारंबार संत का आशीष , ठाकुर का प्यार। भजन लाल को मिला गरु का आशीष - अब होगा प्रदेश का नव निर्माण। ] संप्या शर्मा" श्रेष्ठ " - ShareChat 🕉️सनातन धर्म🚩 - संत का आशीष राजा का प्रणाम ( गुरु के चरण प्रजा का कल्याण ` न्रिवेणी ध्ा।म की रज पाबन जहां तपस्वी संत राम रिछपाल जी ( गुरुजी } चिराजे। दाढ़ी र्मे सदिर्यों का अनूभव माथ प चंदन मुख पर तज समाया। आं्खा र्म बस ह यूर्गा को कहाना लिए घिवणी धाम शाभा पाया | राजस्थान के सेबक मुख्यमंत्ी भजन लाल आए माथे पे केसरिया तिलक ؟؟ ٧ न राज का घमंड, न सत्ता का मान बस श्रद्धा लकर पहच गुरु क द्वार। ठाकुर जी के दर्शन की आस लिए गुरुबर से आशीष की प्यास लिए।। झुके ्है बो चरणों र्मे भक्ति भाव से॰ फकीर है संत क गांच र्म। राजााभी | गुरुबर ने जब हाथ बढ़ाया - आशीष बनकर स्नह समाया। | कंपित स्वर स कछ ना बाल नयन के जल से ही सब कछ तोले। | बोले नर्ही कुछ , बस नयन बरसे जा बेटा , प्रजा का दुख तू हर ले।। ' ओर राजजधर्म एक ओर एक संत बचन , दोर्नो का संगम। जहां शासक झुके संतो के द्वार _ बहां बसती है ठाकूर की सरकार। | जहां गुरुवर का मिलता आशीवाद बहां हर बिगड़ी बनती जाए।। एक ओर सत्ता एक ओर संत , दोर्नो का मकसद एक ही अंत। प्रभ का नाम _ जननजन का काल्याण ঘঙী } সমলী Hutx: का काम। | धन्य है बो धरती जहां संत बसते , धन्य है बो शासक जो चरणोंर्मे झुकते IL न्रिवेणी धाम से जो आशीष लेकर जाए उसका हर काम ठ।ाकूर जी बनाए।। राजजस्थान की माटी कहे बारंबार संत का आशीष , ठाकुर का प्यार। भजन लाल को मिला गरु का आशीष - अब होगा प्रदेश का नव निर्माण। ] संप्या शर्मा" श्रेष्ठ " संत का आशीष राजा का प्रणाम ( गुरु के चरण प्रजा का कल्याण ` न्रिवेणी ध्ा।म की रज पाबन जहां तपस्वी संत राम रिछपाल जी ( गुरुजी } चिराजे। दाढ़ी र्मे सदिर्यों का अनूभव माथ प चंदन मुख पर तज समाया। आं्खा र्म बस ह यूर्गा को कहाना लिए घिवणी धाम शाभा पाया | राजस्थान के सेबक मुख्यमंत्ी भजन लाल आए माथे पे केसरिया तिलक ؟؟ ٧ न राज का घमंड, न सत्ता का मान बस श्रद्धा लकर पहच गुरु क द्वार। ठाकुर जी के दर्शन की आस लिए गुरुबर से आशीष की प्यास लिए।। झुके ्है बो चरणों र्मे भक्ति भाव से॰ फकीर है संत क गांच र्म। राजााभी | गुरुबर ने जब हाथ बढ़ाया - आशीष बनकर स्नह समाया। | कंपित स्वर स कछ ना बाल नयन के जल से ही सब कछ तोले। | बोले नर्ही कुछ , बस नयन बरसे जा बेटा , प्रजा का दुख तू हर ले।। ' ओर राजजधर्म एक ओर एक संत बचन , दोर्नो का संगम। जहां शासक झुके संतो के द्वार _ बहां बसती है ठाकूर की सरकार। | जहां गुरुवर का मिलता आशीवाद बहां हर बिगड़ी बनती जाए।। एक ओर सत्ता एक ओर संत , दोर्नो का मकसद एक ही अंत। प्रभ का नाम _ जननजन का काल्याण ঘঙী } সমলী Hutx: का काम। | धन्य है बो धरती जहां संत बसते , धन्य है बो शासक जो चरणोंर्मे झुकते IL न्रिवेणी धाम से जो आशीष लेकर जाए उसका हर काम ठ।ाकूर जी बनाए।। राजजस्थान की माटी कहे बारंबार संत का आशीष , ठाकुर का प्यार। भजन लाल को मिला गरु का आशीष - अब होगा प्रदेश का नव निर्माण। ] संप्या शर्मा" श्रेष्ठ " - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_167315_346ef15a_1777807160716_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=716_sc.jpg)


