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##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट ही किवाड़ हे प्रभु आपका नाम पहरेदार है, आपका ध्यान (सुरक्षा कवच) है। जब चारों ओर से प्रभु का नाम और ध्यान कर रहा हो, तो कोई भी विकार या व्याधि शरीर को हानि रक्षा नहीं पहुँचा सकती। हरि शरणं नाम पाहरू दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट ही किवाड़ हे प्रभु आपका नाम पहरेदार है, आपका ध्यान (सुरक्षा कवच) है। जब चारों ओर से प्रभु का नाम और ध्यान कर रहा हो, तो कोई भी विकार या व्याधि शरीर को हानि रक्षा नहीं पहुँचा सकती। - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं मुक होइ बाचाल पंगु चढइ गिरिबर गहन जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन जिनकी कृपा से गूंगा बोलने लगता है और लंगड़ा दुर्गम पर्वत को पार कर जाता है, वे दयालु प्रभु मुझ पर द्रवित हों। जीवन में जब आत्मविश्वास की कमी हो और जब रास्ते बंद दिख रहे हों, तब यह चौपाई आत्मबल देती है। हरि शरणं मुक होइ बाचाल पंगु चढइ गिरिबर गहन जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन जिनकी कृपा से गूंगा बोलने लगता है और लंगड़ा दुर्गम पर्वत को पार कर जाता है, वे दयालु प्रभु मुझ पर द्रवित हों। जीवन में जब आत्मविश्वास की कमी हो और जब रास्ते बंद दिख रहे हों, तब यह चौपाई आत्मबल देती है। - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं की दी हुई वह सुगंध है, जो "प्रसन्नता परमात्मा आपके व्यक्तित्व में तब आती है जब आप दूसरों के दुखों को दूर करने का प्रयास करते हैं।" सभी प्रभु प्रेमियों को सुबह की राम राम हरि शरणं की दी हुई वह सुगंध है, जो "प्रसन्नता परमात्मा आपके व्यक्तित्व में तब आती है जब आप दूसरों के दुखों को दूर करने का प्रयास करते हैं।" सभी प्रभु प्रेमियों को सुबह की राम राम - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर तुलसी 49 सुंदर केकिहि बचन सुधा सम असनि अहि तुलसीदास जी कहते हैं कि सुंदर वेश देखकर न केवल मूर्ख बल्कि चतुर मनुष्य भी धोखा खा जाते हैं। उदाहरण के लिए, मोर को देखो, वह दिखने में कितना सुंदर है और उसकी बोली भी मीठी लगती है, लेकिन उसका आहार सांपं है। अर्थात बाहरी सुंदरता पर नहीं, गुणों पर ध्यान देना चाहिए। हरि शरणं देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर तुलसी 49 सुंदर केकिहि बचन सुधा सम असनि अहि तुलसीदास जी कहते हैं कि सुंदर वेश देखकर न केवल मूर्ख बल्कि चतुर मनुष्य भी धोखा खा जाते हैं। उदाहरण के लिए, मोर को देखो, वह दिखने में कितना सुंदर है और उसकी बोली भी मीठी लगती है, लेकिन उसका आहार सांपं है। अर्थात बाहरी सुंदरता पर नहीं, गुणों पर ध्यान देना चाहिए। - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - गायत्ीतीर्थ शान्तिकुञ्ज  अनियंत्रित इन्द्रियों की दासता ऐसी है , जैसे कठपुतली में बन्धे हुए सूक्ष्म तन्तु। जिधर को तन्तु हिले , उधर ही को कठपुतली ने हाथ पाँव हिलाए। स्वयं कठपुतली का कोई अस्तित्व नहीं है। उसी प्रकार इंद्रियों के दास का क्या ठिकाना! अखण्ड ज्योति , जुलाई 1 1957 हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी जवमी शचार 1926; ` 2016 . दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial WWW.awgp..rg' 8439014110 YOUfUBE Shantikunj Rishi Chintan गायत्ीतीर्थ शान्तिकुञ्ज  अनियंत्रित इन्द्रियों की दासता ऐसी है , जैसे कठपुतली में बन्धे हुए सूक्ष्म तन्तु। जिधर को तन्तु हिले , उधर ही को कठपुतली ने हाथ पाँव हिलाए। स्वयं कठपुतली का कोई अस्तित्व नहीं है। उसी प्रकार इंद्रियों के दास का क्या ठिकाना! अखण्ड ज्योति , जुलाई 1 1957 हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी जवमी शचार 1926; ` 2016 . दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial WWW.awgp..rg' 8439014110 YOUfUBE Shantikunj Rishi Chintan - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - अपनी दुनियाँ अपनी दृष्टि में अपने आप में, अपने अंतःकरण में एक जबरदस्त लोक  गोजूद  । उस लोक की स्थिति इतनी महत्त्वपूर्ण हे कि उसके  सामने ओर शुवः लोक तुच्छ निःसंदेह बाहर की शूलोक  परिस्थितियाँ मनुष्य को आंदोलित तरंगित तथा विचलित करती हैं॰ परंतु संसार के समस्त पदार्थों द्वारा जितना भला या बुरा प्रभाव होता है, उससो अनेक गुना प्रभाव अपने निज के विचारों तथा विश्वासों द्वारा होता है गीता में कहा है कि मनुष्य स्वयं अपना मित्र और स्वयं ही अपना शत्रु है कोई मित्र इतनी सहायता नहीं कर सकता, जितनी कि मनुष्य स्वयं अपनी सहायता कर सकता है। इसी प्रकार कोई उतनी शत्रुता नहीं कर सकता दूसरा  जितनी कि मनुष्य खुद अपने आप अपने से शत्रुता करता है अपनी कल्पना शक्ति, विचार और विश्वास के आधार पर मनुष्य अपनी एक दुनियाँ निर्माण करता है। वही दुनियाँ उसे वास्तविक सुख दुःख दिलाया करती है मनुष्य के मन में प्रचंड शक्ति भरी हुई है। वह इस शक्ति द्वारा अपने लिए अत्यंत अनिष्टकर अथवा अत्यंत उपयोगी तथ्य निर्मित कर सकता है | हर मनुष्य की अपनी एक अलग दुनियाँ होती है दुनियाँ जैसी होती है, बाहर भीतरी मन को की दुनियाँ भी उसी के अनुरूप दिखाई देने लगती है। अखण्ठ न्योति सितंबर १९४७ पृष्ठ ५ अपनी दुनियाँ अपनी दृष्टि में अपने आप में, अपने अंतःकरण में एक जबरदस्त लोक  गोजूद  । उस लोक की स्थिति इतनी महत्त्वपूर्ण हे कि उसके  सामने ओर शुवः लोक तुच्छ निःसंदेह बाहर की शूलोक  परिस्थितियाँ मनुष्य को आंदोलित तरंगित तथा विचलित करती हैं॰ परंतु संसार के समस्त पदार्थों द्वारा जितना भला या बुरा प्रभाव होता है, उससो अनेक गुना प्रभाव अपने निज के विचारों तथा विश्वासों द्वारा होता है गीता में कहा है कि मनुष्य स्वयं अपना मित्र और स्वयं ही अपना शत्रु है कोई मित्र इतनी सहायता नहीं कर सकता, जितनी कि मनुष्य स्वयं अपनी सहायता कर सकता है। इसी प्रकार कोई उतनी शत्रुता नहीं कर सकता दूसरा  जितनी कि मनुष्य खुद अपने आप अपने से शत्रुता करता है अपनी कल्पना शक्ति, विचार और विश्वास के आधार पर मनुष्य अपनी एक दुनियाँ निर्माण करता है। वही दुनियाँ उसे वास्तविक सुख दुःख दिलाया करती है मनुष्य के मन में प्रचंड शक्ति भरी हुई है। वह इस शक्ति द्वारा अपने लिए अत्यंत अनिष्टकर अथवा अत्यंत उपयोगी तथ्य निर्मित कर सकता है | हर मनुष्य की अपनी एक अलग दुनियाँ होती है दुनियाँ जैसी होती है, बाहर भीतरी मन को की दुनियाँ भी उसी के अनुरूप दिखाई देने लगती है। अखण्ठ न्योति सितंबर १९४७ पृष्ठ ५ - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - 281 अज को सद्चिन्त ~iii: 925835: ११-०३ १०१६ शतिकुनव्हीः খ6 আান্মাম3সী' হী ঈহিন সঁমিন .80390!51/0 अपने   जवन भैं उङ चीनों को स्थीन नही ठिससे समज^ का अहितत शेता हो . उनका   सार समयः श्रम श्रैष्ठता के अभिवर्धन »» ٢٤٨٢ ٤ / ٩ 3٨٠ gA Te शक्त का दुरपयोग इन्द्रियों की भोज लिप्सा पवर्ति के लिर नही करते वे अपनी शरीरिक কা ख मनसिक   शक्त्तिरों का उपरोग श्रेoता की Jik dcd # d & | अखण्ड ज्योति मार्च १t७t, ृब४ १७ Shantikunj WhatsApp - 8439014110 हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा हम बदलेंगे, युग बदलेगा awgpofficial  Shantikunj Rishi Chintan WWW awgp org Shantikunj Video  I0t[ TuLD 281 अज को सद्चिन्त ~iii: 925835: ११-०३ १०१६ शतिकुनव्हीः খ6 আান্মাম3সী' হী ঈহিন সঁমিন .80390!51/0 अपने   जवन भैं उङ चीनों को स्थीन नही ठिससे समज^ का अहितत शेता हो . उनका   सार समयः श्रम श्रैष्ठता के अभिवर्धन »» ٢٤٨٢ ٤ / ٩ 3٨٠ gA Te शक्त का दुरपयोग इन्द्रियों की भोज लिप्सा पवर्ति के लिर नही करते वे अपनी शरीरिक কা ख मनसिक   शक्त्तिरों का उपरोग श्रेoता की Jik dcd # d & | अखण्ड ज्योति मार्च १t७t, ृब४ १७ Shantikunj WhatsApp - 8439014110 हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा हम बदलेंगे, युग बदलेगा awgpofficial  Shantikunj Rishi Chintan WWW awgp org Shantikunj Video  I0t[ TuLD - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - 5499920263,2&2 ೩iicen + ಕೀ೫ಳ Ribc rqidie crote  ೯೫-೧ ೩ %4790144!9 ald & & f6 ollaat # 31484977` మా औनिश्यकताओं को स्थन दिया जािय् जिससे स्वयं के साथ ही॰ सनाज का उपकार हो आकांक्षाओं  से पीछा कुड़क२ सादा अनाविशयक नीनन की २f् नीत्ि अपताई  जार | यद्ि नेहान्वकोक्षाओं को ध२ण न्ही किया ढा सकता के^ दैड़ा त` ना सकता है ण २` आकोंक्षाओ  तिरर्थक ' खवं अनुपयुक्त है अखण्ड ज्यत मार्च १८७८ पष १७ Shantikunj WhatsApp - 8439014110 हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा हम बदलेंगे, युग बदलेगा awgpufficial Shantikunj Rishi Chintan WwWawgp org Shantikunj Video  Yol@ FuLO 5499920263,2&2 ೩iicen + ಕೀ೫ಳ Ribc rqidie crote  ೯೫-೧ ೩ %4790144!9 ald & & f6 ollaat # 31484977` మా औनिश्यकताओं को स्थन दिया जािय् जिससे स्वयं के साथ ही॰ सनाज का उपकार हो आकांक्षाओं  से पीछा कुड़क२ सादा अनाविशयक नीनन की २f् नीत्ि अपताई  जार | यद्ि नेहान्वकोक्षाओं को ध२ण न्ही किया ढा सकता के^ दैड़ा त` ना सकता है ण २` आकोंक्षाओ  तिरर्थक ' खवं अनुपयुक्त है अखण्ड ज्यत मार्च १८७८ पष १७ Shantikunj WhatsApp - 8439014110 हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा हम बदलेंगे, युग बदलेगा awgpufficial Shantikunj Rishi Chintan WwWawgp org Shantikunj Video  Yol@ FuLO - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं राम नाम रति राम गति, राम नाम बिस्वास सुमिरत सुभ मंगल कुसल, दुहुँ दिसि तुलसीदास  तुलसीदास कहते हैं कि जिसका राम नाम में प्रेम है, राम ही विश्वास  जिसकी एकमात्र गति है और राम नाम में ही जिसका है, उसके लिए राम नाम का स्मरण करने से ही दोनों ओर (इस लोक में और परलोक में) शुभ मंगल और कुशल है। हरि शरणं राम नाम रति राम गति, राम नाम बिस्वास सुमिरत सुभ मंगल कुसल, दुहुँ दिसि तुलसीदास  तुलसीदास कहते हैं कि जिसका राम नाम में प्रेम है, राम ही विश्वास  जिसकी एकमात्र गति है और राम नाम में ही जिसका है, उसके लिए राम नाम का स्मरण करने से ही दोनों ओर (इस लोक में और परलोक में) शुभ मंगल और कुशल है। - ShareChat
##जय मां गायत्री जय गुरुवर
#जय मां गायत्री जय गुरुवर - हरि शरणं मिटिहैं पाप सब, जोइ कहु राम अघाय तुलसी जैसे तरुवर परसिये , सीतल होय सुभाय जिस प्रकार किसी घने वृक्ष की छाया में जाने मात्र से शरीर शीतल हो जाता है, उसी प्रकार तृप्त होकर (सच्चे मन से। राम नाम जपने से मनुष्य के सारे पाप और संताप मिट जाते हैं। हरि शरणं मिटिहैं पाप सब, जोइ कहु राम अघाय तुलसी जैसे तरुवर परसिये , सीतल होय सुभाय जिस प्रकार किसी घने वृक्ष की छाया में जाने मात्र से शरीर शीतल हो जाता है, उसी प्रकार तृप्त होकर (सच्चे मन से। राम नाम जपने से मनुष्य के सारे पाप और संताप मिट जाते हैं। - ShareChat