Vikram Kumar
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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #🥰Express Emotion #👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP #❤️जीवन की सीख
✍मेरे पसंदीदा लेखक - बनना प्रेम की एक धुन , भी रहॅना बनो दया का गान इस जग में सहजता की अफसर सरल पहचान भी रहना सफलता मिल जो जाए तो ये बातें भूल मत जाना चाहे हाकिम बनो अफसर चाहे हाकिम मगर इंसान भी रहना मगर &( न अपनी इस सरलता को , झटके में बदल देना सदा ही सादगी के भाव और भी रहना মথা করী নল ননা उड़ाना ना कभी उपहास किसी लाचार से मन का कभी भी बनना न बंधक किसी संकीर्ण बंधन का बसना हर किसी के दिल में भी रहना सबकी जान बनो अफसर चाहे हाकिम मगर इंसान भी रहना ক নান কী যুঁ बनाए वर्षों बेकार मत करना किसी से बदजुबानी या गलत व्यवहर मत करना मिले अवसर तो उस करतार के में झुक ; चरणों জনা जहा पर रुक जाए सस्कार वहीं पे खुद भी रुक जाना बन जाओ कठिन जितने भी रहना मगर आसान बनो अफसर चाहे हाकिम मगर इंसान भी रहना बनो अफसर चाहे हाकिम भी रहना मगर इसान विक्रम कुमार মনীহা, বথালী बनना प्रेम की एक धुन , भी रहॅना बनो दया का गान इस जग में सहजता की अफसर सरल पहचान भी रहना सफलता मिल जो जाए तो ये बातें भूल मत जाना चाहे हाकिम बनो अफसर चाहे हाकिम मगर इंसान भी रहना मगर &( न अपनी इस सरलता को , झटके में बदल देना सदा ही सादगी के भाव और भी रहना মথা করী নল ননা उड़ाना ना कभी उपहास किसी लाचार से मन का कभी भी बनना न बंधक किसी संकीर्ण बंधन का बसना हर किसी के दिल में भी रहना सबकी जान बनो अफसर चाहे हाकिम मगर इंसान भी रहना ক নান কী যুঁ बनाए वर्षों बेकार मत करना किसी से बदजुबानी या गलत व्यवहर मत करना मिले अवसर तो उस करतार के में झुक ; चरणों জনা जहा पर रुक जाए सस्कार वहीं पे खुद भी रुक जाना बन जाओ कठिन जितने भी रहना मगर आसान बनो अफसर चाहे हाकिम मगर इंसान भी रहना बनो अफसर चाहे हाकिम भी रहना मगर इसान विक्रम कुमार মনীহা, বথালী - ShareChat
प्रेम #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💓 मोहब्बत दिल से #💝 शायराना इश्क़
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - प्रेम दुनिया में सबसे हसीं चीज है प्रेम अंतस में सबके बसी चीज है ना ही बंगला न कोठे न कोई भी शय ঈম प्रेम दुनिया की सबसे बड़ी चीज है प्रेम में पड़के राधाजी रानी बनीं प्रेमियों की अमर वो निशानी बनीं प्रेम ने जाने कितनों को जीवन दिया प्रेम ही था कि मीरा दीवानी बनी கி सबसे बड़ी चीज है इससे बढ़के न तीरथ है दुजा सुनो प्रेम ही है दीवानों की पूजा सुनो और भी हैं बहुत सारे भाव यहां प्रेम सा ना हुआ कुछ न होगा सुनो प्रेम छाया है ठंडी खिली धूप है प्रेम ही भावनाओं का स्वरूप है प्रेम से ही चली है ये दुनिया सदा प्रेम अल्लाह ईश्वर का ही रूप है डोर सांसों की एक दरमियाँ डाल दे सादगी में भी रंगीनियां डाल दे प्रेम ने ही बनाया है सुंदर ये जग प्रेम वो है जो पत्थर में जां डाल दे प्रेम सत्कर्म , सत्संग , सद्माव है प्रेम के इस जहाँ में कुई भाव हैं प्रेम माता पिता प्रेम भाई बहन प्रेम हर एक रिश्ते का प्रभाव है विक्रम कुमार मनोरा , वैशाली प्रेम दुनिया में सबसे हसीं चीज है प्रेम अंतस में सबके बसी चीज है ना ही बंगला न कोठे न कोई भी शय ঈম प्रेम दुनिया की सबसे बड़ी चीज है प्रेम में पड़के राधाजी रानी बनीं प्रेमियों की अमर वो निशानी बनीं प्रेम ने जाने कितनों को जीवन दिया प्रेम ही था कि मीरा दीवानी बनी கி सबसे बड़ी चीज है इससे बढ़के न तीरथ है दुजा सुनो प्रेम ही है दीवानों की पूजा सुनो और भी हैं बहुत सारे भाव यहां प्रेम सा ना हुआ कुछ न होगा सुनो प्रेम छाया है ठंडी खिली धूप है प्रेम ही भावनाओं का स्वरूप है प्रेम से ही चली है ये दुनिया सदा प्रेम अल्लाह ईश्वर का ही रूप है डोर सांसों की एक दरमियाँ डाल दे सादगी में भी रंगीनियां डाल दे प्रेम ने ही बनाया है सुंदर ये जग प्रेम वो है जो पत्थर में जां डाल दे प्रेम सत्कर्म , सत्संग , सद्माव है प्रेम के इस जहाँ में कुई भाव हैं प्रेम माता पिता प्रेम भाई बहन प्रेम हर एक रिश्ते का प्रभाव है विक्रम कुमार मनोरा , वैशाली - ShareChat
#📲मेरा पहला पोस्ट😍 भगवान
📲मेरा पहला पोस्ट😍 - न आता चांद रातों में, दिन में धूप न खिलता बिना उनके इशारे के यहां कुछ नहीं मिलता पर होता दुनिया में जो है ही বা वो है भगवान की मर्ज़ी নিনা মণনান ক্রী মড়ী ক पत्रा भी नहीं हिलता 3e सारे नीचे हैं उससे , वो ही बस चरम पर है मिलता है वो उसको बस जो उसके धरम पर है देता वो ही है सबको , उसी से पाया है सबकुछ दुनिया का हरेक रंग-रूप उसके ही करम पर है वो चाहे तो पल भर में, सूखे को हरा कर दे बड़े को कर दे छोटा और ৪ী৫ কী নড়া কং ঔ उसके हाथ है संसार में चले जाना आन। वो चाहे मार दे , चाहे तो मुर्दे को खडा कर दे विक्रम कुमार मनोरा , वैशाली न आता चांद रातों में, दिन में धूप न खिलता बिना उनके इशारे के यहां कुछ नहीं मिलता पर होता दुनिया में जो है ही বা वो है भगवान की मर्ज़ी নিনা মণনান ক্রী মড়ী ক पत्रा भी नहीं हिलता 3e सारे नीचे हैं उससे , वो ही बस चरम पर है मिलता है वो उसको बस जो उसके धरम पर है देता वो ही है सबको , उसी से पाया है सबकुछ दुनिया का हरेक रंग-रूप उसके ही करम पर है वो चाहे तो पल भर में, सूखे को हरा कर दे बड़े को कर दे छोटा और ৪ী৫ কী নড়া কং ঔ उसके हाथ है संसार में चले जाना आन। वो चाहे मार दे , चाहे तो मुर्दे को खडा कर दे विक्रम कुमार मनोरा , वैशाली - ShareChat