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#📚कविता-कहानी संग्रह
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📚कविता-कहानी संग्रह - बस हौसला रख , आगे बढ़ते चलना ! कविता बस हौसला रखना है जिंदगी में लड़ना, बढना व हँसना है। के लिए जिंदगी को समझने बस इतना सा करना होता है जोने को खातिर हर गम को हँसकर ही सहना होता है। जिंदगी को राहों में आती है मुश्किलें यहाँ कई, ক্িনু  हर मुश्किल का हल हमें खुद ही करना होता है॰॰ याद रखो॰ बस हौसला रखना है जिंदगी में लड़ना, बढना व हँसना है। हर पग पर जिंदगी लेती है कठिन इम्तिहान कई बिन इम्तिहान दिए जीवन में पार कोई तूपान कहाँ करता है? ব্ধী ব্রুপন;  जो सह न सके काँटों उसे फूलों को महक कहाँ मिलती है? मंजिल तक पहुँचने की खातिर तो, पथरीली राहों पर भी चलना होता है। क्योंकि॰ बस हौसला रखना है जिंदगी में लड़ना, बढ़नाव हँसना है। कहते हैं जो लिखा भाग्य में वही हर बार होता है पर सच तो यह है कि कर्म के बिना भाग्य का वजूद कहाँ होता है? कुछ भी नहों हैं मुश्किलें यहाँ, गर उत्साह का सफर होता है कर्मशील इंसान के आगे तो जमों क्या, आसमां भी नतमस्तक होता है। हाँ बस हौसला रखना है जिंदगी में लड़ना, बढना व हँसना है। सरोज कंसारी लेखिका, कवयित्री व अध्यापिका  दुर्गा शक्ति समिति  अध्यक्षः नवापारा राजिम ( रायपुर, छग. ) बस हौसला रख , आगे बढ़ते चलना ! कविता बस हौसला रखना है जिंदगी में लड़ना, बढना व हँसना है। के लिए जिंदगी को समझने बस इतना सा करना होता है जोने को खातिर हर गम को हँसकर ही सहना होता है। जिंदगी को राहों में आती है मुश्किलें यहाँ कई, ক্িনু  हर मुश्किल का हल हमें खुद ही करना होता है॰॰ याद रखो॰ बस हौसला रखना है जिंदगी में लड़ना, बढना व हँसना है। हर पग पर जिंदगी लेती है कठिन इम्तिहान कई बिन इम्तिहान दिए जीवन में पार कोई तूपान कहाँ करता है? ব্ধী ব্রুপন;  जो सह न सके काँटों उसे फूलों को महक कहाँ मिलती है? मंजिल तक पहुँचने की खातिर तो, पथरीली राहों पर भी चलना होता है। क्योंकि॰ बस हौसला रखना है जिंदगी में लड़ना, बढ़नाव हँसना है। कहते हैं जो लिखा भाग्य में वही हर बार होता है पर सच तो यह है कि कर्म के बिना भाग्य का वजूद कहाँ होता है? कुछ भी नहों हैं मुश्किलें यहाँ, गर उत्साह का सफर होता है कर्मशील इंसान के आगे तो जमों क्या, आसमां भी नतमस्तक होता है। हाँ बस हौसला रखना है जिंदगी में लड़ना, बढना व हँसना है। सरोज कंसारी लेखिका, कवयित्री व अध्यापिका  दुर्गा शक्ति समिति  अध्यक्षः नवापारा राजिम ( रायपुर, छग. ) - ShareChat
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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - जिंदगी' बहती 'তানন हर पग पर हर पल का , एक नया इम्तिहान है ज़िंदगी। मुस्कुराकर गम को पी जाना , जीने का अंदाज़ है ज़िंदगी ? धूप-छाँव के खेल सरीखी , हर मोड़ पर नई चुनौती है। करुणा , प्यार व स्दावना की बहती हुई पावन नदी है ज़िंदगी? थोड़ी खुशियाँ , थोड़े से ग़म , खोने व पाने का हिसाब है। धैर्य के संग जो बहता जाए , उसी अनमोल सफर का नाम है जिंदगी? समझ गए तो सुलझी हुई पहेली , ना समझे तो उलझन है। आओ मिलकर हँसते गाते चलें , बस चलते रहने का नाम ही जिंदगी है? सरोज कंसारी -{9T लेखिका , कवयित्री व शिक्षिका दुर्गा शक्ति समिति, 3ংস8্া: नवापारा राजिम , ( रायपुर , छ.ग. ) जनहित ईंडिया |[8]174 आजमगढू गुरूवार ०४ जून २०२६ जिंदगी' बहती 'তানন हर पग पर हर पल का , एक नया इम्तिहान है ज़िंदगी। मुस्कुराकर गम को पी जाना , जीने का अंदाज़ है ज़िंदगी ? धूप-छाँव के खेल सरीखी , हर मोड़ पर नई चुनौती है। करुणा , प्यार व स्दावना की बहती हुई पावन नदी है ज़िंदगी? थोड़ी खुशियाँ , थोड़े से ग़म , खोने व पाने का हिसाब है। धैर्य के संग जो बहता जाए , उसी अनमोल सफर का नाम है जिंदगी? समझ गए तो सुलझी हुई पहेली , ना समझे तो उलझन है। आओ मिलकर हँसते गाते चलें , बस चलते रहने का नाम ही जिंदगी है? सरोज कंसारी -{9T लेखिका , कवयित्री व शिक्षिका दुर्गा शक्ति समिति, 3ংস8্া: नवापारा राजिम , ( रायपुर , छ.ग. ) जनहित ईंडिया |[8]174 आजमगढू गुरूवार ०४ जून २०२६ - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - 6:42 LE 46 .Ill ೯ 0 NR(I)q.. 3 June 2026 6HI9I IuMl U (মীমল কী বীহানী! (कविता) हे मनुज, है मुसाफिर ( Tౌ जिन्दगी एक सफर है। तेरे हौसले में ही तो रौशनी है हर मुश्किल बाद एक नई जिंदगी है। লুন;  বী जो ठान लिया मुकम्मल होगा बस धीरज रख ये सफर भी आसान होगा | हर जज्बा अंदर ही होता 8 बस उसे जगाने की देर है। मुश्किलों से नजरें मिलाकर चलोगे तो रास्ते खुद ब- खुद बन जाएंगे | भी हुनर है सभलना खुश रहने का हुनर खुद में पालो नया सृजन कर, जिंदगी को संभालो। कुछ डर कर न रुकना तू आगे बढ़ते UITTT हर अंधेरी रात के सवेरा है आना| बाद स्वरचित काव्य कृ सुश्री सरोज कंसारी कवयित्री, लेखिका एवं शिक्षिका शक्ति समिति दुर्गा अध्यक्षरू गोबरा नवापाराध्राजिम॰ (रायपुर). छग 6:42 LE 46 .Ill ೯ 0 NR(I)q.. 3 June 2026 6HI9I IuMl U (মীমল কী বীহানী! (कविता) हे मनुज, है मुसाफिर ( Tౌ जिन्दगी एक सफर है। तेरे हौसले में ही तो रौशनी है हर मुश्किल बाद एक नई जिंदगी है। লুন;  বী जो ठान लिया मुकम्मल होगा बस धीरज रख ये सफर भी आसान होगा | हर जज्बा अंदर ही होता 8 बस उसे जगाने की देर है। मुश्किलों से नजरें मिलाकर चलोगे तो रास्ते खुद ब- खुद बन जाएंगे | भी हुनर है सभलना खुश रहने का हुनर खुद में पालो नया सृजन कर, जिंदगी को संभालो। कुछ डर कर न रुकना तू आगे बढ़ते UITTT हर अंधेरी रात के सवेरा है आना| बाद स्वरचित काव्य कृ सुश्री सरोज कंसारी कवयित्री, लेखिका एवं शिक्षिका शक्ति समिति दुर्गा अध्यक्षरू गोबरा नवापाराध्राजिम॰ (रायपुर). छग - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - उत्सुकता से मुस्कुराते रहना (कविता ) पल भर भी खुद को तुम निराश न रखना, खुद में तुम सदा उल्लस भरते रहना। मन में कोई चिंता नहीं, बस उत्सुकता हो, हौसलों की उड़ान तुम बस भरते ही रहना।  करते रहना है कर्म, राहें सजाते जाना, जिंदगो को अपनी तुम खूबसूरत बनाते जाना। राहों में सबके बस फूल बिखेरते जाना, देखना, फिर सामने मंजिल दिखने लगेगी।  शांति में ही छिपी हुई असीम शक्ति है हर कर्म का फ्ल यही॰ हर दर्द का मर्म यही है। तंदुरुस्त मन से ही जीवन को महकाना है कल क्या होगा ये सोचकर आज को बेकार न करना। दूर की न सोचो, वर्तमान का ही सदुपयोग करो, गमगीन माहौल में खुद को उलझाया न करो। बना रहे हर पल हसीन, हर समस्या का हल होगा, चाहे कैसी हो परिस्थिति, फिरर भी तुम मुस्कुराया करो। जी लो अब वर्तमान को तुम जी भर के, अशांत यह मन फि कभी न हो सकेगा| है तुम्हें बस अपनी ही धुन में॰ थिरकना बीोती बातों का बोझ अब ढोना न पड़ेगा। जो चुभन दे गुजरा कल उसे भूल जाओ अब तो बस वर्तमान को ही जीना सीख जाओ। ये शांत मन ही जीवन में सब ठीक रखता है जो हर परिस्थिति से हँसकर गुजरता है।  चिंताओं को छोड़, मन में उत्सुकता जगाता है में उल्लास भर जाता है। मन जोवन शात सरोज कंसारी  लेखिका, कवयित्री व शिक्षिका  दुर्गा शक्ति समिति अध्यक्षः नवापारा राजिम ः  ( रायपर छग उत्सुकता से मुस्कुराते रहना (कविता ) पल भर भी खुद को तुम निराश न रखना, खुद में तुम सदा उल्लस भरते रहना। मन में कोई चिंता नहीं, बस उत्सुकता हो, हौसलों की उड़ान तुम बस भरते ही रहना।  करते रहना है कर्म, राहें सजाते जाना, जिंदगो को अपनी तुम खूबसूरत बनाते जाना। राहों में सबके बस फूल बिखेरते जाना, देखना, फिर सामने मंजिल दिखने लगेगी।  शांति में ही छिपी हुई असीम शक्ति है हर कर्म का फ्ल यही॰ हर दर्द का मर्म यही है। तंदुरुस्त मन से ही जीवन को महकाना है कल क्या होगा ये सोचकर आज को बेकार न करना। दूर की न सोचो, वर्तमान का ही सदुपयोग करो, गमगीन माहौल में खुद को उलझाया न करो। बना रहे हर पल हसीन, हर समस्या का हल होगा, चाहे कैसी हो परिस्थिति, फिरर भी तुम मुस्कुराया करो। जी लो अब वर्तमान को तुम जी भर के, अशांत यह मन फि कभी न हो सकेगा| है तुम्हें बस अपनी ही धुन में॰ थिरकना बीोती बातों का बोझ अब ढोना न पड़ेगा। जो चुभन दे गुजरा कल उसे भूल जाओ अब तो बस वर्तमान को ही जीना सीख जाओ। ये शांत मन ही जीवन में सब ठीक रखता है जो हर परिस्थिति से हँसकर गुजरता है।  चिंताओं को छोड़, मन में उत्सुकता जगाता है में उल्लास भर जाता है। मन जोवन शात सरोज कंसारी  लेखिका, कवयित्री व शिक्षिका  दुर्गा शक्ति समिति अध्यक्षः नवापारा राजिम ः  ( रायपर छग - ShareChat
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