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#📚कविता-कहानी संग्रह
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📚कविता-कहानी संग्रह - जीवन का प्रवाह ! கfaள) जीवन झरना है... बढ़ना ही बढ़ना, पीछे मुड़कर नहीं देखना, बस चलते रहना। आज को जी लो, हर सांस में खुशियाँ, दिल में मीठा सा संगीत भरना। हर লী বুস, मन को इतना मजबूत बना एक पल भी सोचकर उदास न हो। गम के साये छू भी न पाएं तुम्हें दुख का कभी कोई आभास न हो। हर दिन नया सूरज, हर रात चाँदनी, जीवन को प्यार से जीना, यही है जिंदगी। राहों में अगर कांटे भी मिलें कहीं मुस्कुरा कर उन्हें सहना, यही है बंदगी। बहती हुई धारा सा निर्मल हो मन, उम्मीदों के पंखों से भर लो उड़ान। रुकना नहों है मंजिल से पहले कहीं , हर मुश्किल में ढूंढ लो अपनी पहचान।  सरोज कंसारी कवयित्री, लेखिका, शिक्षिका दुर्गा समिति अध्यक्ष गोबरा नवापारा राजिम, जिला रायपुर ( छग. ) जीवन का प्रवाह ! கfaள) जीवन झरना है... बढ़ना ही बढ़ना, पीछे मुड़कर नहीं देखना, बस चलते रहना। आज को जी लो, हर सांस में खुशियाँ, दिल में मीठा सा संगीत भरना। हर লী বুস, मन को इतना मजबूत बना एक पल भी सोचकर उदास न हो। गम के साये छू भी न पाएं तुम्हें दुख का कभी कोई आभास न हो। हर दिन नया सूरज, हर रात चाँदनी, जीवन को प्यार से जीना, यही है जिंदगी। राहों में अगर कांटे भी मिलें कहीं मुस्कुरा कर उन्हें सहना, यही है बंदगी। बहती हुई धारा सा निर्मल हो मन, उम्मीदों के पंखों से भर लो उड़ान। रुकना नहों है मंजिल से पहले कहीं , हर मुश्किल में ढूंढ लो अपनी पहचान।  सरोज कंसारी कवयित्री, लेखिका, शिक्षिका दुर्गा समिति अध्यक्ष गोबरा नवापारा राजिम, जिला रायपुर ( छग. ) - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - जीवन से मुँह मत मोड़ो़ , बल्कि इसके भँवर में इस तरह कूदो कि तुम्हारी हर धड़कन एक नई रफ़्तार बन जाए में जीवन की चुनौतियों से भागना नहीं चाहिए बल्कि अंधकार और भय की छायाओं को सहजता से मिटा देती उन्हें अपनाना चाहिए और उनमें पूरी तरह से डूब है, और जीवन के हर पल में एक नई चमक भर देती है जो हमें जीने की वजह देती है। और उस चमक में हम खुद २जाना चाहिए। जब हम ऐसा करते हैं॰ तो हमारी प्रत्येक श्वास और हर   धड़कन एक नई ऊर्जा ओर गति से को पहचानते है॰ अपनी ताकत को महसूस करते हें, और भर जाती है। जोवन में गति ही गंतव्य है। हमें बस आगे जीवन के हर मोड़ पर आगे बढ़ने का साहस पाते हैं। बढ़ते रहना है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भो हों। सफल जोवन का आधार  संतुलन है। कर्तव्य पथ पर चलते हुए सजग और उत्साहित रहना अनिवार्य है।जब जीवन से भागना कायरता है, और जीवन के लिए भागना संघर्ष। पर, जीवन में॰ भागना एक साधना है-जहाँ भो समस्याएँ आपको थकाने लगें तो हार मानने के बजाय  गति ही आपका गंतव्य बन जाती है। किनारों की सुरक्षा " शांत चित्त से अपने लक्ष्य को ओर बढ़ें | चिंता को छोड़कर  खोजकर तुम लहरों से बच तो सकते हो, पर समंदर को कठिन परिश्रम पर ध्यान दें क्योकि सक्रियता हो जीवन को जी नर्ही सकते। पलायन अंत है, और प्रवेग ही आरंभ।जब गति देती है। से दूर  अपने भोतर विचारों की सकारात्मक क्रांति लाएँ । तुम परिस्थितियों  भागते होे॰ तो तुम मिटने लगते होः खेल में पूरे वेग से दौड़ते हो, तो तुम  अपनों से जुड़ाव रखें सहयोगी बनें और रिश्तों को सहृदय  पर जब तुम जोवन के निखरने लगते हा। निभाएँ । लेकिन अपनी गरिमा और मानसिक शांति का भी मनुष्य जीवन की सार्थकता शारीरिक   मानसिक रखें। समस्याओं से भागें नहीं उनका सामना करेंः মান निहित  यही अनुभव आपको जीने के नए विकल्प देंगे। उम्र चाहे সাথিক্ষ সাঁ মাসানিব্ধ মবুলন স है। जीवन को जो भी हो, अपने भीतर के साहस और जोश को कभी कम चुनौतियों और सांसारिक व्यथाओं के बीच अक्सर हम अपना धैर्य खो देते हें॰ जिससे मार्ग कठिन लगने लगता है न होने दें। संसार को अपनी अच्छाई का प्रदर्शन नहीं करना है किंतु यदि हम मन को सरल और शांत रखकर अपने कर्म चुपचाप अपने सदकर्म में लगे रहना है। आज का समाज के प्रति ईमानदार रहें॰ तो हर दुविधा का समाधान संभव है। निष्काम कर्म और सकारात्मक विचार ही आत्मशुद्धि संवेदनहीन है, लोगों का भला जितना करोगे, उतना ही बुरा  जिज्ञासा " का मार्ग प्रशस्त करते हे। अपनी को जोवित रखे बनते जाओगे .. क्योकि यहा कृतज्ञता को जगह आलोचना और रिश्तों में मधुरता व वफादारी बनाए रखें। याद रखें ही मिलती है। को बिखरने न दें। जब तन द्कौरोमं कास्सस्थ हेोते हॅए स्वअं दूसरां का साथ तो असंभव भी संभव होे जाता है। साहस के साथ हर मोड पर पूरे जोश से आगे बढें। हँसते हुए ये पल जो लो, अतोत को साथ लेकर नहों सुश्री सरोज कंसारी कवयित्री लेखिका शिक्षिका चलना है। आज में जीना है, आज ही हमारे साथ है। जीवन छोटा और अनमोल है॰ पर इसे जोने को समझ हर মসিনি ீ अध्यक्ष मनुष्य को नहीं होती, इसलिए हर क्षण को खुशी से भर लो।  गोबरा नवापारा / राजिम, जिज्ञासा के साथ जोना, अनिश्चित कल को छोड़कर जिला  रायपुर ( छःग ) संपकः +९१ 9१३११ 5४८८० वर्तमान के प्रति उत्सुक रहना ही जीवन को सार्थकता का মুল # | आत्मा का प्रकाश है, जो हताशा के गहन हँसी जीवन से मुँह मत मोड़ो़ , बल्कि इसके भँवर में इस तरह कूदो कि तुम्हारी हर धड़कन एक नई रफ़्तार बन जाए में जीवन की चुनौतियों से भागना नहीं चाहिए बल्कि अंधकार और भय की छायाओं को सहजता से मिटा देती उन्हें अपनाना चाहिए और उनमें पूरी तरह से डूब है, और जीवन के हर पल में एक नई चमक भर देती है जो हमें जीने की वजह देती है। और उस चमक में हम खुद २जाना चाहिए। जब हम ऐसा करते हैं॰ तो हमारी प्रत्येक श्वास और हर   धड़कन एक नई ऊर्जा ओर गति से को पहचानते है॰ अपनी ताकत को महसूस करते हें, और भर जाती है। जोवन में गति ही गंतव्य है। हमें बस आगे जीवन के हर मोड़ पर आगे बढ़ने का साहस पाते हैं। बढ़ते रहना है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भो हों। सफल जोवन का आधार  संतुलन है। कर्तव्य पथ पर चलते हुए सजग और उत्साहित रहना अनिवार्य है।जब जीवन से भागना कायरता है, और जीवन के लिए भागना संघर्ष। पर, जीवन में॰ भागना एक साधना है-जहाँ भो समस्याएँ आपको थकाने लगें तो हार मानने के बजाय  गति ही आपका गंतव्य बन जाती है। किनारों की सुरक्षा " शांत चित्त से अपने लक्ष्य को ओर बढ़ें | चिंता को छोड़कर  खोजकर तुम लहरों से बच तो सकते हो, पर समंदर को कठिन परिश्रम पर ध्यान दें क्योकि सक्रियता हो जीवन को जी नर्ही सकते। पलायन अंत है, और प्रवेग ही आरंभ।जब गति देती है। से दूर  अपने भोतर विचारों की सकारात्मक क्रांति लाएँ । तुम परिस्थितियों  भागते होे॰ तो तुम मिटने लगते होः खेल में पूरे वेग से दौड़ते हो, तो तुम  अपनों से जुड़ाव रखें सहयोगी बनें और रिश्तों को सहृदय  पर जब तुम जोवन के निखरने लगते हा। निभाएँ । लेकिन अपनी गरिमा और मानसिक शांति का भी मनुष्य जीवन की सार्थकता शारीरिक   मानसिक रखें। समस्याओं से भागें नहीं उनका सामना करेंः মান निहित  यही अनुभव आपको जीने के नए विकल्प देंगे। उम्र चाहे সাথিক্ষ সাঁ মাসানিব্ধ মবুলন স है। जीवन को जो भी हो, अपने भीतर के साहस और जोश को कभी कम चुनौतियों और सांसारिक व्यथाओं के बीच अक्सर हम अपना धैर्य खो देते हें॰ जिससे मार्ग कठिन लगने लगता है न होने दें। संसार को अपनी अच्छाई का प्रदर्शन नहीं करना है किंतु यदि हम मन को सरल और शांत रखकर अपने कर्म चुपचाप अपने सदकर्म में लगे रहना है। आज का समाज के प्रति ईमानदार रहें॰ तो हर दुविधा का समाधान संभव है। निष्काम कर्म और सकारात्मक विचार ही आत्मशुद्धि संवेदनहीन है, लोगों का भला जितना करोगे, उतना ही बुरा  जिज्ञासा " का मार्ग प्रशस्त करते हे। अपनी को जोवित रखे बनते जाओगे .. क्योकि यहा कृतज्ञता को जगह आलोचना और रिश्तों में मधुरता व वफादारी बनाए रखें। याद रखें ही मिलती है। को बिखरने न दें। जब तन द्कौरोमं कास्सस्थ हेोते हॅए स्वअं दूसरां का साथ तो असंभव भी संभव होे जाता है। साहस के साथ हर मोड पर पूरे जोश से आगे बढें। हँसते हुए ये पल जो लो, अतोत को साथ लेकर नहों सुश्री सरोज कंसारी कवयित्री लेखिका शिक्षिका चलना है। आज में जीना है, आज ही हमारे साथ है। जीवन छोटा और अनमोल है॰ पर इसे जोने को समझ हर মসিনি ீ अध्यक्ष मनुष्य को नहीं होती, इसलिए हर क्षण को खुशी से भर लो।  गोबरा नवापारा / राजिम, जिज्ञासा के साथ जोना, अनिश्चित कल को छोड़कर जिला  रायपुर ( छःग ) संपकः +९१ 9१३११ 5४८८० वर्तमान के प्रति उत्सुक रहना ही जीवन को सार्थकता का মুল # | आत्मा का प्रकाश है, जो हताशा के गहन हँसी - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - का संगीत S{Iq (কবিলা) दौड़ती रहती है ये जिन्दगी पर तू गुजरता है थकने ল ৫ তিল पथ थोड़ा ठहरकर देख लें कुछ क्षण! पर अनजाने मोड़ हैं हर कदम अनदेखे रंग हैं अनसुने गीत हैं रुककर देख सुन और महसूस कर जीवन की हर सांस को। पलकों में बसे हैं कई सपने हृदय में छुपी हैं कई कहानियाँ থাভা ব৪২ স্ুল ল इनकी आहट जीवन को जी ले॰ हर एक क्षण | इन आँखों के सामने से मंजर गुजर रहे हैं तेजी से उनमें ही कहीं छिपा है का असली अर्थ होने तुम्हारे धूल भरी इस राह में एक फूल का खिलना भी उत्सव है निट्टी की सोंधी महक और हवाओं का धीरे से गुजरना ব্ুচ্কাং লিব ৪ী | कोई संदेश है, शायद मंजिल की चाह में रास्तों को अनदेखा मत कर g ٤ अंत तो बस एक तो इन टेढ़े मेढ़े रास्तों का है। T भीतर की बेचौनी को থাভী হানি কা বান ২ अपनी ही धड़कन को बार ध्यान से सुनकर तो देख। एक सरोज कंसारी सुश्री कवयित्रीध्लेखिकाध्शिक्षिका नवापाराध्राजिम. जिला रायपुर॰ (छ.ग. ) का संगीत S{Iq (কবিলা) दौड़ती रहती है ये जिन्दगी पर तू गुजरता है थकने ল ৫ তিল पथ थोड़ा ठहरकर देख लें कुछ क्षण! पर अनजाने मोड़ हैं हर कदम अनदेखे रंग हैं अनसुने गीत हैं रुककर देख सुन और महसूस कर जीवन की हर सांस को। पलकों में बसे हैं कई सपने हृदय में छुपी हैं कई कहानियाँ থাভা ব৪২ স্ুল ল इनकी आहट जीवन को जी ले॰ हर एक क्षण | इन आँखों के सामने से मंजर गुजर रहे हैं तेजी से उनमें ही कहीं छिपा है का असली अर्थ होने तुम्हारे धूल भरी इस राह में एक फूल का खिलना भी उत्सव है निट्टी की सोंधी महक और हवाओं का धीरे से गुजरना ব্ুচ্কাং লিব ৪ী | कोई संदेश है, शायद मंजिल की चाह में रास्तों को अनदेखा मत कर g ٤ अंत तो बस एक तो इन टेढ़े मेढ़े रास्तों का है। T भीतर की बेचौनी को থাভী হানি কা বান ২ अपनी ही धड़कन को बार ध्यान से सुनकर तो देख। एक सरोज कंसारी सुश्री कवयित्रीध्लेखिकाध्शिक्षिका नवापाराध्राजिम. जिला रायपुर॰ (छ.ग. ) - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - । रिपोर्टर 2 अंतस की उड़ान ! ( कविता ) रफ्तार आहिस्ता ही सही, पर यह उड़ान अब रुकेगी नहों। मत थक, मत रुकः धैर्य व संतोष की शक्ति हा ऊँचे शिखर तक पहुँचाती है। সপন মীনং সম ৭ নিখাস কষী उस लौ को प्रज्चलित करो कि जोवन का हर कोना एक नई उमंग से खिल उठे। अपने हर कदम को बहने दो निर्मल जल को उस धारा की तरह ! जो पत्थरों से रकराकर भी अपनो पवित्रता व राह नहो बदलती । मन के झरोखों को साफरखो, न वहाँ द्वेष को धूल हो, न छल का 47/ कपट के बंधनों को तोड़कर बस ! निस्वार्थ भाव से आगे बढत चलो। अपनी शख्सियत की खुशबू को इन फिजाओं में ऐसे बिखेरो, जैसे किसी पुराने बाग में मुस्कुराता हुआ कोई गुलाब. जिसकी महक से गुजरने वाला हर 9 सराबोर होे जाए। सरोज कंसारी  कवयित्रो लेखिका शिक्षिका नवापारा राजिम cT रायपुर छग । रिपोर्टर 2 अंतस की उड़ान ! ( कविता ) रफ्तार आहिस्ता ही सही, पर यह उड़ान अब रुकेगी नहों। मत थक, मत रुकः धैर्य व संतोष की शक्ति हा ऊँचे शिखर तक पहुँचाती है। সপন মীনং সম ৭ নিখাস কষী उस लौ को प्रज्चलित करो कि जोवन का हर कोना एक नई उमंग से खिल उठे। अपने हर कदम को बहने दो निर्मल जल को उस धारा की तरह ! जो पत्थरों से रकराकर भी अपनो पवित्रता व राह नहो बदलती । मन के झरोखों को साफरखो, न वहाँ द्वेष को धूल हो, न छल का 47/ कपट के बंधनों को तोड़कर बस ! निस्वार्थ भाव से आगे बढत चलो। अपनी शख्सियत की खुशबू को इन फिजाओं में ऐसे बिखेरो, जैसे किसी पुराने बाग में मुस्कुराता हुआ कोई गुलाब. जिसकी महक से गुजरने वाला हर 9 सराबोर होे जाए। सरोज कंसारी  कवयित्रो लेखिका शिक्षिका नवापारा राजिम cT रायपुर छग - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - धैर्य और संतोषः अंतरात्मा की अजेय सरोज कंसारी शक्ति ! g% नटी सा धैर्य हो और समंदर सा संतोष व्यर्थ को तुलना करने के बजाय अपनी क्षमताओं पर तशी थमेगा जिन्दगी का व्यर्थ का आक्रोश | भरोसा करना सिखाता है। ই,তী সনুষ্প ক্ষী মদ্চলনা यह वह मानसिक संतुलन  के शिखर पर अहंकारी होने से रोकता है और...विफलता  यह जोवन की, यात्रा महज मीलों का फासला तय करना की गर्त में उसे अवसाद से बचाता  नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के शोर को शांत करने की एक है। दार्शनिक दृष्टिकोण से देखें तो साधना है। इस साधना के दो धैर्य   'समय' पर॰ विजय है और सबसे चमकदार रत्न हैं- धैर्य  संतोष 'इच्छाओं' पर।जब ये दोनों  ಊd तथा संतोष। जहाँ धैर्य हमें मिल जाते हैँ॰ तो मनुष्य विपरीत  Sa समय की कसौटी पर टिके परिस्थितियों में भी अडिग रहता है।   रहने का साहस देता है॰ वर्हीं धैर्य तथा संतोष कोई जन्मजात Haq 84 गुण नही बल्कि निरंतर अभ्यास से से मृगतृष्णाओं प्राप्त होने वाली मानसिक अवस्थाएँ चचाकर वतमान क परमानंद ম প্বিন কানো ৪1 हैं। हमें अपने लक्ष्यों के प्रति सचेत धैर्य केवल प्रतीक्षा करने रहना चाहिए लेकिन उनकी प्राप्ति का नाम नहीं है, बल्कि प्रतीक्षा  के लिए बेचैन नर्हों। जिब हम फल Fi छोड़कर केवल कर्म की के दौरान अपने उत्साह और की विश्वास को जीवित रखने की पवित्रता पर ध्यान देते है॰ तब हमारे  ಹcl ೯| ೩೯ ೩೯ 'f ೯ 51 जीवन में उस शाति का उदय होता हे बीज को वृक्ष बनने तक का संघर्ष सहने की क्षमता देती है। जिसे 'परम सुख' कहा गया है। ओर , संतोष का अर्थ 'प्रयासों का त्याग' नही बल्कि எரி धैर्य व संतोष का॰ दीप जलाए चल परिणामों का स्वीकार' है। यदि हम प्रकृति की ओर दृष्टि डालें तो वह धैर्य का कांटों भरी राहों में भी॰ तू खुशियों के फूल खिलाए चल। सबसे बड़ा जीवंत प्रमाण है। एक ऋतु के बाद दूसरी ऋतु बस तू अपने भीतर के इस विश्वास को जगाए चल।  का आना, एक नन्हे से बीज का अंकुरित होकर विशाल वटवृक्ष बनना या पर्वत से निकली नदी का मीलों का पथरीला रास्ता तय कर सागर में भिलना- यह सब बिना किसी जल्दबाजी के होता है। प्रकृति सभी को सिखाती है कि 'समय से पूर्व और भाग्य से अधिक' कुछ नहीं मिलता। जब मनुष्य प्रकृति के भीतर  इस नियम को आत्मसात कर लेता है॰ तो उसके কা उद्वेग शांत हो जाता है। को नींव हैं। कड़े सुश्री सरोज कंसारी  धैर्य और संतोष বমন্ষী सफलती परिश्रम के बाद भी जब अपेक्षित परिणाम तुरंत प्राप्त नहीं कवयित्री लेखिका शिक्षिका होते तब ' धैर्य' ही उसे टूटने से बचाता है और निरंतर  स्थानः नवापारा/ राजिम, जिलाः रायपुर ( छत्तीसगढ़ अभ्यास की प्रेरणा देता है। वहों संतोष' उसे दूसरों से धैर्य और संतोषः अंतरात्मा की अजेय सरोज कंसारी शक्ति ! g% नटी सा धैर्य हो और समंदर सा संतोष व्यर्थ को तुलना करने के बजाय अपनी क्षमताओं पर तशी थमेगा जिन्दगी का व्यर्थ का आक्रोश | भरोसा करना सिखाता है। ই,তী সনুষ্প ক্ষী মদ্চলনা यह वह मानसिक संतुलन  के शिखर पर अहंकारी होने से रोकता है और...विफलता  यह जोवन की, यात्रा महज मीलों का फासला तय करना की गर्त में उसे अवसाद से बचाता  नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के शोर को शांत करने की एक है। दार्शनिक दृष्टिकोण से देखें तो साधना है। इस साधना के दो धैर्य   'समय' पर॰ विजय है और सबसे चमकदार रत्न हैं- धैर्य  संतोष 'इच्छाओं' पर।जब ये दोनों  ಊd तथा संतोष। जहाँ धैर्य हमें मिल जाते हैँ॰ तो मनुष्य विपरीत  Sa समय की कसौटी पर टिके परिस्थितियों में भी अडिग रहता है।   रहने का साहस देता है॰ वर्हीं धैर्य तथा संतोष कोई जन्मजात Haq 84 गुण नही बल्कि निरंतर अभ्यास से से मृगतृष्णाओं प्राप्त होने वाली मानसिक अवस्थाएँ चचाकर वतमान क परमानंद ম প্বিন কানো ৪1 हैं। हमें अपने लक्ष्यों के प्रति सचेत धैर्य केवल प्रतीक्षा करने रहना चाहिए लेकिन उनकी प्राप्ति का नाम नहीं है, बल्कि प्रतीक्षा  के लिए बेचैन नर्हों। जिब हम फल Fi छोड़कर केवल कर्म की के दौरान अपने उत्साह और की विश्वास को जीवित रखने की पवित्रता पर ध्यान देते है॰ तब हमारे  ಹcl ೯| ೩೯ ೩೯ 'f ೯ 51 जीवन में उस शाति का उदय होता हे बीज को वृक्ष बनने तक का संघर्ष सहने की क्षमता देती है। जिसे 'परम सुख' कहा गया है। ओर , संतोष का अर्थ 'प्रयासों का त्याग' नही बल्कि எரி धैर्य व संतोष का॰ दीप जलाए चल परिणामों का स्वीकार' है। यदि हम प्रकृति की ओर दृष्टि डालें तो वह धैर्य का कांटों भरी राहों में भी॰ तू खुशियों के फूल खिलाए चल। सबसे बड़ा जीवंत प्रमाण है। एक ऋतु के बाद दूसरी ऋतु बस तू अपने भीतर के इस विश्वास को जगाए चल।  का आना, एक नन्हे से बीज का अंकुरित होकर विशाल वटवृक्ष बनना या पर्वत से निकली नदी का मीलों का पथरीला रास्ता तय कर सागर में भिलना- यह सब बिना किसी जल्दबाजी के होता है। प्रकृति सभी को सिखाती है कि 'समय से पूर्व और भाग्य से अधिक' कुछ नहीं मिलता। जब मनुष्य प्रकृति के भीतर  इस नियम को आत्मसात कर लेता है॰ तो उसके কা उद्वेग शांत हो जाता है। को नींव हैं। कड़े सुश्री सरोज कंसारी  धैर्य और संतोष বমন্ষী सफलती परिश्रम के बाद भी जब अपेक्षित परिणाम तुरंत प्राप्त नहीं कवयित्री लेखिका शिक्षिका होते तब ' धैर्य' ही उसे टूटने से बचाता है और निरंतर  स्थानः नवापारा/ राजिम, जिलाः रायपुर ( छत्तीसगढ़ अभ्यास की प्रेरणा देता है। वहों संतोष' उसे दूसरों से - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - संघर्ष से शिखर तक ! (प्रेरक ओजस्वी कविता) चुनौतियों का हंसकर अभिनंदन करना सीखो गहराई में भी खुशियाँ बुनना सीखो " दर्द से भिड़कर तुम पाना सीखो, तूफाँ बुलंदी हर गिरने से तक जाना सीखो । পমল লঃয কী তভ कांटों से भी महक फैलाना सीखो, उलझ कर की राख से भी आग जलाना सीखो! मुसीबत वो जिंदगी भी क्या जो परेशानियों से लड़ पाये चुनौती के लिए खुद को सबल हर बनाना सीखो ! थक कर बैठना मंजिल अपमान है CT पहचान है। लगा दाो दांव पर जा तुम्हारी अंगारों पर चलकर ही निखरता है सोना, में भी मुस्कुराना ही असली शान है। मुसीबतों न हार की फिक्र हो॰ न जीत का गुमान हो, बस कर्म के समंदर में डूबी তান ৪ী | বুদ্কাযী दो खुद मिटा को लक्ष्य की खातिर इस कदर कि पत्थर भी कह उठे, ष्ये तो फौलादी इंसान हैष सरोज कंसारी g೫ कवयित्रीध्लेखिकाध्शिक्षिका नवापाराध्राजिम. जिला रायपुर॰ (छ.ग. ) संघर्ष से शिखर तक ! (प्रेरक ओजस्वी कविता) चुनौतियों का हंसकर अभिनंदन करना सीखो गहराई में भी खुशियाँ बुनना सीखो " दर्द से भिड़कर तुम पाना सीखो, तूफाँ बुलंदी हर गिरने से तक जाना सीखो । পমল লঃয কী তভ कांटों से भी महक फैलाना सीखो, उलझ कर की राख से भी आग जलाना सीखो! मुसीबत वो जिंदगी भी क्या जो परेशानियों से लड़ पाये चुनौती के लिए खुद को सबल हर बनाना सीखो ! थक कर बैठना मंजिल अपमान है CT पहचान है। लगा दाो दांव पर जा तुम्हारी अंगारों पर चलकर ही निखरता है सोना, में भी मुस्कुराना ही असली शान है। मुसीबतों न हार की फिक्र हो॰ न जीत का गुमान हो, बस कर्म के समंदर में डूबी তান ৪ী | বুদ্কাযী दो खुद मिटा को लक्ष्य की खातिर इस कदर कि पत्थर भी कह उठे, ष्ये तो फौलादी इंसान हैष सरोज कंसारी g೫ कवयित्रीध्लेखिकाध्शिक्षिका नवापाराध्राजिम. जिला रायपुर॰ (छ.ग. ) - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - हनुमान जयंतीः शक्ति व भक्ति सरोज कंसारी का पर्व %ி वाली बाधाओं को करते हैं और हमें सही मार्ग पर नुमान जयन्ती भगवान श्रीराम के परम भक्त के चलने काध्रेरणा देते है किसतस्ेहेजीन मेॅशंाम्िही जिन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व चैत्र सफलता ९माह की पूर्णिमा को आता है। इस दिवस विशेष पूजा- प्राप्त होती है।जयंती के दिन मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना " की जाती है। लोग वहां जाकर मूर्ति पर सिंदूर और फूल अर्चना की जाती है जिसमें भक्त अपने प्रभु को प्रसन्न चढ़ाते हैं और उनकी पूजा करते हैं॰ जिससे उनकी লিব विभिन्न प्रकार के भोग तथा प्रसाद चढ़ाते करने के हैं । उनका जन्म अंजना तथा केसरी के घर हुआ था। उन्हें मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । कहानी हमें सिखाती है कि भक्ति और शक्ति का शिव का ११वां रुद्रावतार माना जाता है। उनकी भगवान भगवान शिव को घोर तपस्या को थी, संयोजन ही जीवन में सफलता दिलाता है। वह भगवान সানা ওতনা भगवान शिव शंकर ने उन्हें वरदान जिससे प्रसन्न होकर , राम के प्रति अपनी अनन्य भक्ति के लिए विख्यात है और भक्तों के लिए एक आदर्श हैं | जयंती के अवसर पर लोग  दिया था कि वह अंजना के कोख से जन्म लेंगे। अपने घरों में भी पूजा- अर्चना करते हैं | वे मूर्ति या तस्वीर  हनुमान जो महाराज ! भगवान राम के परमभक्त थे। को साफ-सुथरे स्थान पर रखते हैं और उनकी पूजा करते उन्होंने सारा जीवन राम के नाम पर समर्पित कर दिया था।  पूर्ण होती हैं।  उनकी भक्ति और प्रेम को देखकर राम ने उन्हें अपना हैं जिससे उनकी मनोकामनाएं भक्ति से व्यक्ति को अपने जीवन में आने वाली सबसे बड़ा भक्त माना था पराक्रम को असंख्य गाथाएं चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। वह हमें प्रचलित हैं। उन्होंने लंका दहन में महत्वपूर्ण भूमिका सिखाते हैं कि भक्ति और शक्ति के साथ हम किसी भी निभाई और राम को सेना के लिए मार्ग प्रशस्त किया पर विजय प्राप्त करने में कठिनाई को पार कर सकते हैं और जीवन में सफलता নিমম मदद राम का रावण हैं। जयंती का पर्व हमें भक्ति और शक्ति I प्राप्त कर सकत का स्मरण कराता है। यह पर्व हमें अपने जीवन में भक्ति राम के प्रति भक्ति अनन्य थी। वह राम को अपने जीवन का आधार मानते थे और उनके लिए कुछ भी करने और शक्ति का संयोजन करने को प्रेरणा देता है। को तैयार रहते थे। उनकी भक्ति और प्रेम को देखकर राम ने उन्हें अपना सबसे बड़ा भक्त माना था। जयती के दिन अपने प्रभु की विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं भक्त और व्रत रखते हैं | रामायण, रामचरित मानस, सुंदरकाण्ड  पाठ हनुमान चालीसा, हनुमान बाहुक आदि का पाठ करने से प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं बूंदी का भोग लगाने तथा जरूरतमंद लोगों को प्रसाद खिलाने से प्रसन्न होते हैं और आपको मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह एक ऐसा पर्व है जिसमें भक्त अपने प्रभु के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम को प्रकट करते हैं | कई नाम हैं   जिनमें से बजरंगबली मारुति, अंजनीपुत्र और पवनपुत्र प्रमुख हैं। वह अपनी शक्ति और भक्ति के लिए सुश्री सरोज कंसारी प्रसिद्ध हैं और भक्तों के लिए एक आदर्श हैं । पूजा अर्चना करने से मनुष्य को मानसिक शाति एवं कवयित्री / लेखिका शिक्षिका नवापारा/ राजिम, जिला - रायपुर, आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। वह हमारे जीवन में आने ಖ1.) हनुमान जयंतीः शक्ति व भक्ति सरोज कंसारी का पर्व %ி वाली बाधाओं को करते हैं और हमें सही मार्ग पर नुमान जयन्ती भगवान श्रीराम के परम भक्त के चलने काध्रेरणा देते है किसतस्ेहेजीन मेॅशंाम्िही जिन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व चैत्र सफलता ९माह की पूर्णिमा को आता है। इस दिवस विशेष पूजा- प्राप्त होती है।जयंती के दिन मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना " की जाती है। लोग वहां जाकर मूर्ति पर सिंदूर और फूल अर्चना की जाती है जिसमें भक्त अपने प्रभु को प्रसन्न चढ़ाते हैं और उनकी पूजा करते हैं॰ जिससे उनकी লিব विभिन्न प्रकार के भोग तथा प्रसाद चढ़ाते करने के हैं । उनका जन्म अंजना तथा केसरी के घर हुआ था। उन्हें मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । कहानी हमें सिखाती है कि भक्ति और शक्ति का शिव का ११वां रुद्रावतार माना जाता है। उनकी भगवान भगवान शिव को घोर तपस्या को थी, संयोजन ही जीवन में सफलता दिलाता है। वह भगवान সানা ওতনা भगवान शिव शंकर ने उन्हें वरदान जिससे प्रसन्न होकर , राम के प्रति अपनी अनन्य भक्ति के लिए विख्यात है और भक्तों के लिए एक आदर्श हैं | जयंती के अवसर पर लोग  दिया था कि वह अंजना के कोख से जन्म लेंगे। अपने घरों में भी पूजा- अर्चना करते हैं | वे मूर्ति या तस्वीर  हनुमान जो महाराज ! भगवान राम के परमभक्त थे। को साफ-सुथरे स्थान पर रखते हैं और उनकी पूजा करते उन्होंने सारा जीवन राम के नाम पर समर्पित कर दिया था।  पूर्ण होती हैं।  उनकी भक्ति और प्रेम को देखकर राम ने उन्हें अपना हैं जिससे उनकी मनोकामनाएं भक्ति से व्यक्ति को अपने जीवन में आने वाली सबसे बड़ा भक्त माना था पराक्रम को असंख्य गाथाएं चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। वह हमें प्रचलित हैं। उन्होंने लंका दहन में महत्वपूर्ण भूमिका सिखाते हैं कि भक्ति और शक्ति के साथ हम किसी भी निभाई और राम को सेना के लिए मार्ग प्रशस्त किया पर विजय प्राप्त करने में कठिनाई को पार कर सकते हैं और जीवन में सफलता নিমম मदद राम का रावण हैं। जयंती का पर्व हमें भक्ति और शक्ति I प्राप्त कर सकत का स्मरण कराता है। यह पर्व हमें अपने जीवन में भक्ति राम के प्रति भक्ति अनन्य थी। वह राम को अपने जीवन का आधार मानते थे और उनके लिए कुछ भी करने और शक्ति का संयोजन करने को प्रेरणा देता है। को तैयार रहते थे। उनकी भक्ति और प्रेम को देखकर राम ने उन्हें अपना सबसे बड़ा भक्त माना था। जयती के दिन अपने प्रभु की विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं भक्त और व्रत रखते हैं | रामायण, रामचरित मानस, सुंदरकाण्ड  पाठ हनुमान चालीसा, हनुमान बाहुक आदि का पाठ करने से प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं बूंदी का भोग लगाने तथा जरूरतमंद लोगों को प्रसाद खिलाने से प्रसन्न होते हैं और आपको मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यह एक ऐसा पर्व है जिसमें भक्त अपने प्रभु के प्रति अपनी भक्ति और प्रेम को प्रकट करते हैं | कई नाम हैं   जिनमें से बजरंगबली मारुति, अंजनीपुत्र और पवनपुत्र प्रमुख हैं। वह अपनी शक्ति और भक्ति के लिए सुश्री सरोज कंसारी प्रसिद्ध हैं और भक्तों के लिए एक आदर्श हैं । पूजा अर्चना करने से मनुष्य को मानसिक शाति एवं कवयित्री / लेखिका शिक्षिका नवापारा/ राजिम, जिला - रायपुर, आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। वह हमारे जीवन में आने ಖ1.) - ShareChat