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#📚कविता-कहानी संग्रह
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📚कविता-कहानी संग्रह - मुश्किल { 8{ কা মামনা' विता कभी धूप ्मन बहार कभी तूफान CT कर सामना है अगर तू मनुष्य तो हर चट्टान ٦»٢ ٦»٧ ٢٢٦٦٢ ١ न वास्ता गरीबी का हो, न लाचारी सामने हो, हर परिस्थिति में ढाल खुद को, विचलित मन का कर सामना | आसान हर काम नहीं असंभव को हर बात क। कर सामना जाना है गर मंजिल तक तो, हर कठिन राह কা কয सामना | मुश्किलों की इतनी हिम्मत नहीं तेरे जो रोक सक कदम जीना है गर जिंग में तो हर कड़वी बात का कर सामना जरूरी नहों कि समय की गति चले तेरी ही चाल में॰ पाना है सफलता तो मेहनत रूपी हथियार से परिस्थितियों করা कर सामना | সবমীৎ ক্রী নীনা স श्काश२  श्कैसेश रहकर कभी न होगा उद्धार तेरा समय की गति रुकी नहीं कभी रहना है गर शान सेतो हर डर कर सामना | কা Ur dT जश्न मिले हर पग पर उससे पहले जरूरी है कि॰ করা মী हार कर सामना | सुश्री सरोज कंसारी लेखिका, कवयित्री शिक्षिका ரf ஒf =Hf अध्यक्षः रायपुर (छत्तीसगढ़ ) नवापारा राजिम नई रोशनी मुश्किल { 8{ কা মামনা' विता कभी धूप ्मन बहार कभी तूफान CT कर सामना है अगर तू मनुष्य तो हर चट्टान ٦»٢ ٦»٧ ٢٢٦٦٢ ١ न वास्ता गरीबी का हो, न लाचारी सामने हो, हर परिस्थिति में ढाल खुद को, विचलित मन का कर सामना | आसान हर काम नहीं असंभव को हर बात क। कर सामना जाना है गर मंजिल तक तो, हर कठिन राह কা কয सामना | मुश्किलों की इतनी हिम्मत नहीं तेरे जो रोक सक कदम जीना है गर जिंग में तो हर कड़वी बात का कर सामना जरूरी नहों कि समय की गति चले तेरी ही चाल में॰ पाना है सफलता तो मेहनत रूपी हथियार से परिस्थितियों করা कर सामना | সবমীৎ ক্রী নীনা স श्काश२  श्कैसेश रहकर कभी न होगा उद्धार तेरा समय की गति रुकी नहीं कभी रहना है गर शान सेतो हर डर कर सामना | কা Ur dT जश्न मिले हर पग पर उससे पहले जरूरी है कि॰ করা মী हार कर सामना | सुश्री सरोज कंसारी लेखिका, कवयित्री शिक्षिका ரf ஒf =Hf अध्यक्षः रायपुर (छत्तीसगढ़ ) नवापारा राजिम नई रोशनी - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - इसोलिए बीजिंग को बटक जब शो जिनपंग न ट्रपसे कहा "जिसे जग कमजोरी कहे, वही करुणा ब्रह्मांड है!" -सुश्री सरोज कंसारी का मूल बल दुनिया अक्सर करुणा को कमजोरी समझती है। लोग  दुर्बलता नहीं, चेतना की चरम, सृष्टि का संतुलन है ये मर्म।  fg सोचते हैं किजो दयालु है॰ नरम है, वह कमजोर है। की सर्वोच्च दशा, ब्रह्मांड का मूल बल यही।  आत्मवल ही इस पूरी दुनिया को चलाने वाली सबसे बसे तो जोवन खिले, हर गन में उजियारा यही। असल में करुणा chhull बड़ी ताकत है।  करुणा कोई बाहरी गुण नहीं | यह आत्मा का स्वभाव होत्ता है। जैसे दीपक का धर्म प्रकाश देना है, वैसे ही चेतना का धर्म करुणा  जो चीज लोगों को कमजोर लगती है, चही सबसे मजबूत चीज है | करुणा से ही ये समाज  होता है। हम जब द्ूसरे के दुख से विचलित होते हैं, तब वास्तव में और करुणा सेये सारा जुड़ता है  जुड़ते हैं। परन्तु और 'स्व' का भेद यहीं भावनाओं के वेग को रोकना संभव नहीं अपने ही मूल स्वरूप से  सुंदर बनता है मानवीय संवेदनाएँ ही जीवन को सद्गति देती हैं । मन की चंचलता को स्थिर सेतु है जो जीव को शिव से॰ fnl ೯I 481 3187 ೩ करुणा वह करने के लिए अंतर्मन में शुद्ध विचारों का होना आवश्यक है। जब मनुष्य को मनुष्यता से मिलाता है।  ब्रह्मांड का सारा खेल संतुलन पर टिका है | जहाँ स्वार्थ गुरुत्व  हम दूसरों का दर्द स्वयं गहसूस करते हैं तब अंतस में करुणा सबको अपनी ओर खींचता है॰ जागती है। किसी की पोडा में स्वयंको रखकर ही  पाते हैं कि॰ ٩٤٢ ITTTE] . ्नकर करण दुख का बोझ कितना भारी होता है। आज जीवन में समर्पण  केन्द्रापसारक बल है जो सबको जोड़कर रखती है। एक के बिना सहयोग, दया और क्षमा को आचरण गें उतारने की सबसे अधिक  दूसरा विनाश है। इसलिए करुणा केवल नैतिकता नहीं, अस्तित्व को अनिवार्यंता है।जिस दिन यह बोध गहरा उतरेगा, उस दिन सेवा आवश्यकता हे मन- मस्तिष्क में सद्ाव रखकर हम हर द्वंद्व से निकल सकते सहज हो जाएगी | फिर करना नहों पडेगा, होने लगेगा | करुणा कोई हैं | अंतर्युद्ध आज को सबसे बड़ी समस्या है। प्रत्येक मन में अनंत कमजोरीं नहीं होती है, सबसे बड़ा बल है। यह हमें जोड़ती तोड़ती नहीं | जब हम ' मैं' से 'हम' को ओर बढ़ते हैँ, तभी समाज  आवश्यकता केवल एकन्दूसरे के जख्मों को सहलाने व्यथाएँ हे बेबस  और साथ होने का एहसास दिलाने को है।  মা ব্র্ত্ত্রী मुस्कान अथवा मौन  होगा। एक छोटा सा सहारा, एक सच्ची  असहाय TI19] साथ भी किसी के टूटे मन को जोड़ सकत्ता है। सेवा बड़े कामों से को देखकर यदि हृदय द्रवित हो और हम सच्चे गन से उनका कष्ट ही नहीं, रोज के छोटे आचरण से भी होती है।  की कोशिश करें॰ तो करुणा हमें गानव-्सेवा की ओर ले दूर करने " जाती है। हर प्राणी के लिए करुणा और सेवा-भाव रखने से जीवन इसलिए करुणा को केवल भाव न रहने दें, उसे कर्म बना लें। से ही तय करें कि प्रत्येक दिन किसी एक जीवन को थोड़ा का हर लम्हा श्रेष्ठ बनता हे 31  जैसे दुख में हम प्रेम और  चाहते हैँ, वैसे ही जरूरत हल्का करेंगे| यही सच्चा धर्म है, यही मानव होने का अर्थ है।जब  राहयोग सच में सुंदर " के समय दूसरों के साथ खड़े होने की आदत डालें | स्वार्थ से आज हर हृदय गें करुणा बसेगी, तभी यह संसार  बनगा। कई रिश्ते बिखर गए हैं | हम अकेले जीवन नहीं जी सकते। सुख- दुख आते-्जाते हैं , और हमारे विकास गें हर कदम पर कई लोगों  सबके लिए स्नेह रखें। सुश्री सरोज कंसारी  का सहयोग होत्ता हे गानवता की सेवा के लिए तत्पर रहें । करुणा के अभाव में ईर्ष्या, द्वेष, बैर , नफरत, कलह लेखिका, कवयित्री एवं और विवाद जन्म लेते हैं । संवेदनहीन होने से हर पल कुछ न कुछ शिक्षिक अध्यक्षः दुर्गा शक्ति समिति  है। किसो शी रिश््ते गें विश्वास और लगाव बनाए रखने की eea पहली शर्त करुणा , सहयोग और सेवा है। गोबरा नवापारा (राजिम ) , जिला रायपुर (छग. ) जग जिसे कहे कमजोरी का श्रम, करुणा तोड़े वो भरम। इसोलिए बीजिंग को बटक जब शो जिनपंग न ट्रपसे कहा "जिसे जग कमजोरी कहे, वही करुणा ब्रह्मांड है!" -सुश्री सरोज कंसारी का मूल बल दुनिया अक्सर करुणा को कमजोरी समझती है। लोग  दुर्बलता नहीं, चेतना की चरम, सृष्टि का संतुलन है ये मर्म।  fg सोचते हैं किजो दयालु है॰ नरम है, वह कमजोर है। की सर्वोच्च दशा, ब्रह्मांड का मूल बल यही।  आत्मवल ही इस पूरी दुनिया को चलाने वाली सबसे बसे तो जोवन खिले, हर गन में उजियारा यही। असल में करुणा chhull बड़ी ताकत है।  करुणा कोई बाहरी गुण नहीं | यह आत्मा का स्वभाव होत्ता है। जैसे दीपक का धर्म प्रकाश देना है, वैसे ही चेतना का धर्म करुणा  जो चीज लोगों को कमजोर लगती है, चही सबसे मजबूत चीज है | करुणा से ही ये समाज  होता है। हम जब द्ूसरे के दुख से विचलित होते हैं, तब वास्तव में और करुणा सेये सारा जुड़ता है  जुड़ते हैं। परन्तु और 'स्व' का भेद यहीं भावनाओं के वेग को रोकना संभव नहीं अपने ही मूल स्वरूप से  सुंदर बनता है मानवीय संवेदनाएँ ही जीवन को सद्गति देती हैं । मन की चंचलता को स्थिर सेतु है जो जीव को शिव से॰ fnl ೯I 481 3187 ೩ करुणा वह करने के लिए अंतर्मन में शुद्ध विचारों का होना आवश्यक है। जब मनुष्य को मनुष्यता से मिलाता है।  ब्रह्मांड का सारा खेल संतुलन पर टिका है | जहाँ स्वार्थ गुरुत्व  हम दूसरों का दर्द स्वयं गहसूस करते हैं तब अंतस में करुणा सबको अपनी ओर खींचता है॰ जागती है। किसी की पोडा में स्वयंको रखकर ही  पाते हैं कि॰ ٩٤٢ ITTTE] . ्नकर करण दुख का बोझ कितना भारी होता है। आज जीवन में समर्पण  केन्द्रापसारक बल है जो सबको जोड़कर रखती है। एक के बिना सहयोग, दया और क्षमा को आचरण गें उतारने की सबसे अधिक  दूसरा विनाश है। इसलिए करुणा केवल नैतिकता नहीं, अस्तित्व को अनिवार्यंता है।जिस दिन यह बोध गहरा उतरेगा, उस दिन सेवा आवश्यकता हे मन- मस्तिष्क में सद्ाव रखकर हम हर द्वंद्व से निकल सकते सहज हो जाएगी | फिर करना नहों पडेगा, होने लगेगा | करुणा कोई हैं | अंतर्युद्ध आज को सबसे बड़ी समस्या है। प्रत्येक मन में अनंत कमजोरीं नहीं होती है, सबसे बड़ा बल है। यह हमें जोड़ती तोड़ती नहीं | जब हम ' मैं' से 'हम' को ओर बढ़ते हैँ, तभी समाज  आवश्यकता केवल एकन्दूसरे के जख्मों को सहलाने व्यथाएँ हे बेबस  और साथ होने का एहसास दिलाने को है।  মা ব্র্ত্ত্রী मुस्कान अथवा मौन  होगा। एक छोटा सा सहारा, एक सच्ची  असहाय TI19] साथ भी किसी के टूटे मन को जोड़ सकत्ता है। सेवा बड़े कामों से को देखकर यदि हृदय द्रवित हो और हम सच्चे गन से उनका कष्ट ही नहीं, रोज के छोटे आचरण से भी होती है।  की कोशिश करें॰ तो करुणा हमें गानव-्सेवा की ओर ले दूर करने " जाती है। हर प्राणी के लिए करुणा और सेवा-भाव रखने से जीवन इसलिए करुणा को केवल भाव न रहने दें, उसे कर्म बना लें। से ही तय करें कि प्रत्येक दिन किसी एक जीवन को थोड़ा का हर लम्हा श्रेष्ठ बनता हे 31  जैसे दुख में हम प्रेम और  चाहते हैँ, वैसे ही जरूरत हल्का करेंगे| यही सच्चा धर्म है, यही मानव होने का अर्थ है।जब  राहयोग सच में सुंदर " के समय दूसरों के साथ खड़े होने की आदत डालें | स्वार्थ से आज हर हृदय गें करुणा बसेगी, तभी यह संसार  बनगा। कई रिश्ते बिखर गए हैं | हम अकेले जीवन नहीं जी सकते। सुख- दुख आते-्जाते हैं , और हमारे विकास गें हर कदम पर कई लोगों  सबके लिए स्नेह रखें। सुश्री सरोज कंसारी  का सहयोग होत्ता हे गानवता की सेवा के लिए तत्पर रहें । करुणा के अभाव में ईर्ष्या, द्वेष, बैर , नफरत, कलह लेखिका, कवयित्री एवं और विवाद जन्म लेते हैं । संवेदनहीन होने से हर पल कुछ न कुछ शिक्षिक अध्यक्षः दुर्गा शक्ति समिति  है। किसो शी रिश््ते गें विश्वास और लगाव बनाए रखने की eea पहली शर्त करुणा , सहयोग और सेवा है। गोबरा नवापारा (राजिम ) , जिला रायपुर (छग. ) जग जिसे कहे कमजोरी का श्रम, करुणा तोड़े वो भरम। - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - विचारों की निर्मलता ही जीवन की असली सूंदरता व हर समस्या का सरोज कंसारी समाधान है -g9 चुनौती के छिपे हुए कारणों मानसिक उथल पुथल और उसके समस्या को गहराई में उतरकर उसके कारणों और भावनाओं को समझना ही समाधान की पहली सीढ़ी है। हमारी पौछे की मानवीय भावनाओं को बारीकी से समझते हैं, तो सोच ही हमारे जीवन की दिशा तय करती है। प्राचीन ग्रंथों में समाधान का मार्ग किसी दैवीय उजाले की तरह स्वयं प्रशस्त हा जाता है भावं तद् भवतिर (जैसी आपकी भावना कहा गया हे= रयट या सोच होगी वैसा ही आप बनते हैं)। हमारा मस्तिष्क एक अंतर्मन की परछाई हो हमारी असल पहचान है, द्पण की तरह है॰ जिसमें हमारे विचारों का प्रतिबिंब Hi दिखाई देता है सकारात्मकता हमें हर विपरीत परिस्थिति से सोच अगर हो साफ तो हर राह बड़ी आसान हे। लडने का साहस देती है। सही सोच हमें अपने सपनों को पूरा कदमों से नहीं, दिल को प्रेरणा से तय होते हैं सफर , यह जीवन में संतुष्टि लाती है करने के लिए ग्रेरित करती है। जड़ों को जो समझ ले, वही गाता समाधान है। और आपसी संबंधों को मजबूत बनाती है। इसी वैचारिक यात्रा के मध्य हमें यह दिव्य बोध होता है नकारात्मक विचार व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकते हैं । कि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और गहरे सफर शारीरिक यह मानसिक शाति को छीनकर अवसाद की ओर धकेलते ऊजा हैं ।रिश्तों में कड़वहटः संशय और नकारात्मकता से आपसी या केचल भौतिक कदमों से नहीं, चल्फि आंत्तरिक हमारी  प्रेरणा असीम संवेदनाओं और शुद्ध भावनाओं के बल पर तय  तालमेल बिगड़ जाता है हमेशा अपने ध्यान को अच्छी और होते हैं | बाहरी दुनिया में हम चाहे कितनी भी दूरी नाप लें किंतु নিমাং रचनात्मक बातों पर केंद्रित करें। जब भी मन में बुरे आएं॰ उन्हें तर्क के साथ सकारात्मकता में बदलें। मन को शांत आत्मिक संतुष्टि का मार्ग भीतर से ही होकर गुजरता है और एकाग्र करने के लिए नियमित ध्यान का सहारा लें। और सजगता के द्वारा अपनी इसलिए जब हम आत्म मथन सकारात्मक ऊजा से भरपूर लोगों के साथ अधिक समय सोच के दर्पण को विकारों से मुक्त और सर्वथा स्वच्छ रखेंगे , हमारा मन और विचार ही हमारे भाग्य के निमार्ता है से जुड़े इन खूबसूरत संवेदनशील रास्तों पर बिताएं तभी हम दिल शास्त्रों का यह कथन पूर्णतः सत्य है- बिना भटके, एक सही, संतुलित और सार्थक दिशा में निरंतर रमन एव मनुष्याणा मनुष्य के बंधन और मोक्ष यानी आगे बढ पाएंगे। अंततः सोच की यही निमलता ही हमारे कारणं बन्धमोक्षयोःरै (मन ही उसको सफलता और असफलता का कारण है)। जब हम जोवन की वास्तविक नियति और सफलता को तय करती है । अपनी सोच का आईना सा़फ रखते हैं और समस्या की जड़ पहुँचते हैं, तो समाधान खुद-ब-खुद रास्ता ढूंढ लेता है dcha हमारो सोच का आईना और कुछ नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन की वह गहरी परछाई है जो हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व को सुश्री सरोज कंसारी  संचालित करती है लेखिका, कवयित्रो एवं जहाँ सकारात्मक विचार एक प्रकाश पुंज को तरह हमें उन्नति और सफलता के सर्वोच्च शिखर पर शिक्षिक जाते हैं॰ वहों नकारात्मकता का अंधकार हमारी आंतरिक दुर्गा शक्ति समिति अध्यक्षः प्रगति और हौसलों को थाम देता है । जीवन को जटिल उलझनों गोबरा नवापारा ( राजिम) , अचूक सूत्र यहो है कि हम समस्याओं  जिला-रायपुर (छःग. ) सुलझान का एकमात्र से भागने के बजाय उनकी गहराई में उतरें। जब हम किसी विचारों की निर्मलता ही जीवन की असली सूंदरता व हर समस्या का सरोज कंसारी समाधान है -g9 चुनौती के छिपे हुए कारणों मानसिक उथल पुथल और उसके समस्या को गहराई में उतरकर उसके कारणों और भावनाओं को समझना ही समाधान की पहली सीढ़ी है। हमारी पौछे की मानवीय भावनाओं को बारीकी से समझते हैं, तो सोच ही हमारे जीवन की दिशा तय करती है। प्राचीन ग्रंथों में समाधान का मार्ग किसी दैवीय उजाले की तरह स्वयं प्रशस्त हा जाता है भावं तद् भवतिर (जैसी आपकी भावना कहा गया हे= रयट या सोच होगी वैसा ही आप बनते हैं)। हमारा मस्तिष्क एक अंतर्मन की परछाई हो हमारी असल पहचान है, द्पण की तरह है॰ जिसमें हमारे विचारों का प्रतिबिंब Hi दिखाई देता है सकारात्मकता हमें हर विपरीत परिस्थिति से सोच अगर हो साफ तो हर राह बड़ी आसान हे। लडने का साहस देती है। सही सोच हमें अपने सपनों को पूरा कदमों से नहीं, दिल को प्रेरणा से तय होते हैं सफर , यह जीवन में संतुष्टि लाती है करने के लिए ग्रेरित करती है। जड़ों को जो समझ ले, वही गाता समाधान है। और आपसी संबंधों को मजबूत बनाती है। इसी वैचारिक यात्रा के मध्य हमें यह दिव्य बोध होता है नकारात्मक विचार व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकते हैं । कि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और गहरे सफर शारीरिक यह मानसिक शाति को छीनकर अवसाद की ओर धकेलते ऊजा हैं ।रिश्तों में कड़वहटः संशय और नकारात्मकता से आपसी या केचल भौतिक कदमों से नहीं, चल्फि आंत्तरिक हमारी  प्रेरणा असीम संवेदनाओं और शुद्ध भावनाओं के बल पर तय  तालमेल बिगड़ जाता है हमेशा अपने ध्यान को अच्छी और होते हैं | बाहरी दुनिया में हम चाहे कितनी भी दूरी नाप लें किंतु নিমাং रचनात्मक बातों पर केंद्रित करें। जब भी मन में बुरे आएं॰ उन्हें तर्क के साथ सकारात्मकता में बदलें। मन को शांत आत्मिक संतुष्टि का मार्ग भीतर से ही होकर गुजरता है और एकाग्र करने के लिए नियमित ध्यान का सहारा लें। और सजगता के द्वारा अपनी इसलिए जब हम आत्म मथन सकारात्मक ऊजा से भरपूर लोगों के साथ अधिक समय सोच के दर्पण को विकारों से मुक्त और सर्वथा स्वच्छ रखेंगे , हमारा मन और विचार ही हमारे भाग्य के निमार्ता है से जुड़े इन खूबसूरत संवेदनशील रास्तों पर बिताएं तभी हम दिल शास्त्रों का यह कथन पूर्णतः सत्य है- बिना भटके, एक सही, संतुलित और सार्थक दिशा में निरंतर रमन एव मनुष्याणा मनुष्य के बंधन और मोक्ष यानी आगे बढ पाएंगे। अंततः सोच की यही निमलता ही हमारे कारणं बन्धमोक्षयोःरै (मन ही उसको सफलता और असफलता का कारण है)। जब हम जोवन की वास्तविक नियति और सफलता को तय करती है । अपनी सोच का आईना सा़फ रखते हैं और समस्या की जड़ पहुँचते हैं, तो समाधान खुद-ब-खुद रास्ता ढूंढ लेता है dcha हमारो सोच का आईना और कुछ नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन की वह गहरी परछाई है जो हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व को सुश्री सरोज कंसारी  संचालित करती है लेखिका, कवयित्रो एवं जहाँ सकारात्मक विचार एक प्रकाश पुंज को तरह हमें उन्नति और सफलता के सर्वोच्च शिखर पर शिक्षिक जाते हैं॰ वहों नकारात्मकता का अंधकार हमारी आंतरिक दुर्गा शक्ति समिति अध्यक्षः प्रगति और हौसलों को थाम देता है । जीवन को जटिल उलझनों गोबरा नवापारा ( राजिम) , अचूक सूत्र यहो है कि हम समस्याओं  जिला-रायपुर (छःग. ) सुलझान का एकमात्र से भागने के बजाय उनकी गहराई में उतरें। जब हम किसी - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - दैनिक छत्तीसगढ़ राजधनी रिपोर्टर 2 ठहरकर देखो सफर में ( कविता ) जिंदगी के सफर में कहाँ होता है कुछ खत्म ? एक के बाद एक नया तैयार रहता है जख्म जिंदगी के दस्तूरों से बिखर जाता है हर ख्वाब। रिश्तों की बुनियाद में मिलता है हर वक्त दर्द। समय की धार में बीत जाती है जो बात। यादों की धुंधली रह जाती है सौगात " जिम्मेदारियों के बोझ से थक जाता है मन। अपनों के साये में उलझ जाता है अंतर्मन। मंजिल की तलाश में चलते हैं आजीवन। खुशियों के इंतजार में टूटते हैं हर पल। किसी बात की कसक रह जाती है हृदय में। अपनी जिंदगी कहाँ जी पाते हैं हम ? भागते दौड़ते फिरिते हो, ठहरकर देखोगे तो- तकं पहुँचते खुद को देख लोगे। সনিল सरोज कंसारी शिक्षिका एवं कवयित्री दुर्गा शक्ति समिति अध्यक्षः नवापारा राजिम, रायपुर ( छत्तीसगढ़ दैनिक छत्तीसगढ़ राजधनी रिपोर्टर 2 ठहरकर देखो सफर में ( कविता ) जिंदगी के सफर में कहाँ होता है कुछ खत्म ? एक के बाद एक नया तैयार रहता है जख्म जिंदगी के दस्तूरों से बिखर जाता है हर ख्वाब। रिश्तों की बुनियाद में मिलता है हर वक्त दर्द। समय की धार में बीत जाती है जो बात। यादों की धुंधली रह जाती है सौगात " जिम्मेदारियों के बोझ से थक जाता है मन। अपनों के साये में उलझ जाता है अंतर्मन। मंजिल की तलाश में चलते हैं आजीवन। खुशियों के इंतजार में टूटते हैं हर पल। किसी बात की कसक रह जाती है हृदय में। अपनी जिंदगी कहाँ जी पाते हैं हम ? भागते दौड़ते फिरिते हो, ठहरकर देखोगे तो- तकं पहुँचते खुद को देख लोगे। সনিল सरोज कंसारी शिक्षिका एवं कवयित्री दुर्गा शक्ति समिति अध्यक्षः नवापारा राजिम, रायपुर ( छत्तीसगढ़ - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - 'নি:হান কী Tুঁত' (কবিনা) कभी किसी मोड़ पर गर हो, विपरीत स्थिति কা মামনা | धैर्य ಖT gT, का दामन हिम्मत कभी न हारना ६ रिश्तों की कड़ी 7 टूटने जब সোং স তক্ক থাস ললা | घेरें निराशा के बादल कभी, बरस लेना ६ आशा बन बोझिल करना कभी मन को 7 সমভা ঠনা | समझना कुछ कुछ क्रोध की अग्नि को त्याग कर मन शांत सरोवर बना लेना ६ जिंदगी के इस अंतर्द्वंद में॰ उलझनें मिलकर सुलझा लेना । हाथ अपनों का, थाम कर उम्मीदों का बना लेना ६ { सरोज कंसारी सुश्री लेखिका, कवयित्री एवं शिक्षिका शक्ति समिति ತ'f' 3&&5 (राजिम) . गोबरा qTqII जिला रायपुर (छ.ग.) 'নি:হান কী Tুঁত' (কবিনা) कभी किसी मोड़ पर गर हो, विपरीत स्थिति কা মামনা | धैर्य ಖT gT, का दामन हिम्मत कभी न हारना ६ रिश्तों की कड़ी 7 टूटने जब সোং স তক্ক থাস ললা | घेरें निराशा के बादल कभी, बरस लेना ६ आशा बन बोझिल करना कभी मन को 7 সমভা ঠনা | समझना कुछ कुछ क्रोध की अग्नि को त्याग कर मन शांत सरोवर बना लेना ६ जिंदगी के इस अंतर्द्वंद में॰ उलझनें मिलकर सुलझा लेना । हाथ अपनों का, थाम कर उम्मीदों का बना लेना ६ { सरोज कंसारी सुश्री लेखिका, कवयित्री एवं शिक्षिका शक्ति समिति ತ'f' 3&&5 (राजिम) . गोबरा qTqII जिला रायपुर (छ.ग.) - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
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📚कविता-कहानी संग्रह - डर से आगे ( कविता ) वक़्त की इन आँधियों से, लड़ना हमको आता है, के कुछ दीप जलाना, धर्म हमारा कहलाता है खुशियों डरने से क्या होगा पथिक ! अब डर के आगे जाना है कर्मपथ पर चलकर हमको, फिर से जीत दिखाना है। अकर्मण्यों का जीवन जग में॰ केवल मृत्यु समान है की पगडंडी ही, वीर की असली पहचान है। चुनौतियों सुखनदुख की इस नदिया में, साहस ही पतवार है काँटों के बीच रहकर भी, पूलों सा हमें मुस्काना है। उलझनों को पार कर, जीवन सफ्ल बनाना है, गम की गठरी छोड़कर, खुशियों को अपनाना है। भी दूर ٤, बैठ न जाना थक कर तुम, मंजिल अब विपरीत धाराओं को पाना अपना छोर है। चीर, धैर्य की राह पर चलकर ही, हिम्मत को बढ़ाना है, संघर्ष ही जीवन का नाम, लड़ते ही हमें जाना है। भी तुम, औरों का साहस अंधियारों के बीच बढ़ाओ, अटूट ध्यान, खुद का इतिहास बनाओ। लक्ष्य पर रख ஈக்ரி लेखिका कवयित्री शिक्षिका अध्यक्षः दुर्गा शक्ति समिति गोबरा नवापारा राजिम 7ಾ97,8T. डर से आगे ( कविता ) वक़्त की इन आँधियों से, लड़ना हमको आता है, के कुछ दीप जलाना, धर्म हमारा कहलाता है खुशियों डरने से क्या होगा पथिक ! अब डर के आगे जाना है कर्मपथ पर चलकर हमको, फिर से जीत दिखाना है। अकर्मण्यों का जीवन जग में॰ केवल मृत्यु समान है की पगडंडी ही, वीर की असली पहचान है। चुनौतियों सुखनदुख की इस नदिया में, साहस ही पतवार है काँटों के बीच रहकर भी, पूलों सा हमें मुस्काना है। उलझनों को पार कर, जीवन सफ्ल बनाना है, गम की गठरी छोड़कर, खुशियों को अपनाना है। भी दूर ٤, बैठ न जाना थक कर तुम, मंजिल अब विपरीत धाराओं को पाना अपना छोर है। चीर, धैर्य की राह पर चलकर ही, हिम्मत को बढ़ाना है, संघर्ष ही जीवन का नाम, लड़ते ही हमें जाना है। भी तुम, औरों का साहस अंधियारों के बीच बढ़ाओ, अटूट ध्यान, खुद का इतिहास बनाओ। लक्ष्य पर रख ஈக்ரி लेखिका कवयित्री शिक्षिका अध्यक्षः दुर्गा शक्ति समिति गोबरा नवापारा राजिम 7ಾ97,8T. - ShareChat
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