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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - आंचलिक శగివ 10-03-2026 HRdy कवयित्री सरोज कंसारी हुईं '{লৌবল{লে' য যম্সানিন नवापाण रजिम। कार्यक्रम र्में सम्मानित होती हुई कवयित्री सरोज।  मात्कान्यूज | नगपाराराजिम  पश्चात सरोज कंसारी ने एक अच्छा নর্নী; বু  যীন कोमल हे कमजोर गरियाबंद जिले में साहित्यिक जगत शक्त का नाम ही नारे हे।॰ को एक॰  गौरवशाली 4 ओजस्वी प्रस्तुति दी। इस गोत ने अघ्याय বব্ক অনমদুর স নাব হালিলি ক f सहित्य संसार எfen गया। ஈ கிபச்சதி प्रति नईप्रेरणा कासंचार किया। सरोज कंसारी को उनकी अविरल = ு ஈ # = साहित्यिक साधना हेतु " रल्नांक्ल  जितेंद्र   सुकुमार   शाहिर  সচ্বম सम्मान से नवाजा गया। वैदिक फ्रकाशन हणद्वार के मीडिया " रत्नांच्ल सहित्य एवं जनकल्याण प्रभारी तथा संपादक कविवर   सूर्य , गरियाबंद  5 गोनरा HPII द्वार नगर अघ्यप्ष ননাসমা (पाण्डुका ) स्थित पावन सिरकट्टी   ओमकुमारी   साहू _ योगिता   सिन्ह्य 4 विमोचन   समाजसेवी डॉ. रर्जेंद्र गदिया  पुस्तक  आश्रम मे आयोजित समारोह  सह्देव   कंसारी  भव्य संतोष   सोनकर बिंद्रानवागढ   विधायक  # 9 मंडल मनोज जनक उद्घाषक  राम प्रुव॰ ने कंसारी को प्रशस्ति पत्र  कल्याणी कंसारी  शिक्षक  और स्मृति चिह्न रभेंट कर सम्मानित  यादव नरेन्द्र साहू गेविंदा कंसारी  किया। रेखा   प्रमेन्द्र कंसारे   प्रिया विजय  नारी शक्ति के गीतों से गूंजा  देवांगन ईशु   कंसारी  ব্ুলঘী  जय ஈ ஈ = आदिनेबधाईदी। 3rm: सम्मान आंचलिक శగివ 10-03-2026 HRdy कवयित्री सरोज कंसारी हुईं '{লৌবল{লে' য যম্সানিন नवापाण रजिम। कार्यक्रम र्में सम्मानित होती हुई कवयित्री सरोज।  मात्कान्यूज | नगपाराराजिम  पश्चात सरोज कंसारी ने एक अच्छा নর্নী; বু  যীন कोमल हे कमजोर गरियाबंद जिले में साहित्यिक जगत शक्त का नाम ही नारे हे।॰ को एक॰  गौरवशाली 4 ओजस्वी प्रस्तुति दी। इस गोत ने अघ्याय বব্ক অনমদুর স নাব হালিলি ক f सहित्य संसार எfen गया। ஈ கிபச்சதி प्रति नईप्रेरणा कासंचार किया। सरोज कंसारी को उनकी अविरल = ு ஈ # = साहित्यिक साधना हेतु " रल्नांक्ल  जितेंद्र   सुकुमार   शाहिर  সচ্বম सम्मान से नवाजा गया। वैदिक फ्रकाशन हणद्वार के मीडिया रत्नांच्ल सहित्य एवं जनकल्याण प्रभारी तथा संपादक कविवर   सूर्य , गरियाबंद  5 गोनरा HPII द्वार नगर अघ्यप्ष ননাসমা (पाण्डुका ) स्थित पावन सिरकट्टी   ओमकुमारी   साहू _ योगिता   सिन्ह्य 4 विमोचन   समाजसेवी डॉ. रर्जेंद्र गदिया  पुस्तक  आश्रम मे आयोजित समारोह  सह्देव   कंसारी  भव्य संतोष   सोनकर बिंद्रानवागढ   विधायक  # 9 मंडल मनोज जनक उद्घाषक  राम प्रुव॰ ने कंसारी को प्रशस्ति पत्र  कल्याणी कंसारी  शिक्षक  और स्मृति चिह्न रभेंट कर सम्मानित  यादव नरेन्द्र साहू गेविंदा कंसारी  किया। रेखा   प्रमेन्द्र कंसारे   प्रिया विजय  नारी शक्ति के गीतों से गूंजा  देवांगन ईशु   कंसारी  ব্ুলঘী  जय ஈ ஈ = आदिनेबधाईदी। 3rm: सम्मान - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - समय की नदी : वर्तमान में बहने की सरोज कंसारी कला - वर्तमान में जोने की कला सीखें। की नदी बहती रहती है॰ कभी रुती नहीं, समय वर्त्तमान में जीना ही जीव्न को सबसे बड़ी कला कभी थमती नहीं। यह नदी हमें अपने साथ ले जाती हैं। अतीत है और हमें वर्तमान में जोने को कला सिखातो है। और   भविष्य की चिंता को शूलकर लेकिन हम अक्सर इस नदी के प्रवाह को रोकने की हमें   वर्तमान ஈ =  छोड़कर क प्रत्यक कोशिश करते हैं अतोत़ को यादों में डूबे रहते हें या क्योंकि यही एक समय है जो हमारे हाथ में चाहिए भविष्य को चिंता में लगे रहते हैं। గ్ౌ  सरोज कंसारी समय की नदी हमें सिखाती है कि वर्तमान ही एकमात्र समय है जो हमारे हाथ में है। अतीत बदल कवयित्रो लेखिका शिक्षिका नहीं और भविष्य अनिश्चित स्थानः नवापारा- राजिम, सकता परन्तु... वर्तमान हमारे हाथ में है, जिसे हम अपने जिलाः रायपुर छत्तीसगढ़ अनुसार जी सकते हैं | जब हम वर्तमान में जीते हैं, तो हम अपने जीवन को अधिक अर्थपूर्ण और आनंदमय  बनाते हैं । समय की नदी हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में परिवर्तन एकमात्र स्थायो चोज है। कुछ भी स्थायी नहों हैं बदलता रहता है। इसलिए हमें सब कुछ की॰  शक्ति विकसित ஈ বা अपनान बदलाव ননসান # নীন ব্রী चाहिए सीखनो और कल चाहिए।.तो आइए॰ समय की नदी के साथ बहें, और समय की नदी : वर्तमान में बहने की सरोज कंसारी कला - वर्तमान में जोने की कला सीखें। की नदी बहती रहती है॰ कभी रुती नहीं, समय वर्त्तमान में जीना ही जीव्न को सबसे बड़ी कला कभी थमती नहीं। यह नदी हमें अपने साथ ले जाती हैं। अतीत है और हमें वर्तमान में जोने को कला सिखातो है। और   भविष्य की चिंता को शूलकर लेकिन हम अक्सर इस नदी के प्रवाह को रोकने की हमें   वर्तमान ஈ =  छोड़कर क प्रत्यक कोशिश करते हैं अतोत़ को यादों में डूबे रहते हें या क्योंकि यही एक समय है जो हमारे हाथ में चाहिए भविष्य को चिंता में लगे रहते हैं। గ్ౌ  सरोज कंसारी समय की नदी हमें सिखाती है कि वर्तमान ही एकमात्र समय है जो हमारे हाथ में है। अतीत बदल कवयित्रो लेखिका शिक्षिका नहीं और भविष्य अनिश्चित स्थानः नवापारा- राजिम, सकता परन्तु... वर्तमान हमारे हाथ में है, जिसे हम अपने जिलाः रायपुर छत्तीसगढ़ अनुसार जी सकते हैं | जब हम वर्तमान में जीते हैं, तो हम अपने जीवन को अधिक अर्थपूर्ण और आनंदमय  बनाते हैं । समय की नदी हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में परिवर्तन एकमात्र स्थायो चोज है। कुछ भी स्थायी नहों हैं बदलता रहता है। इसलिए हमें सब कुछ की॰  शक्ति विकसित ஈ বা अपनान बदलाव ননসান # নীন ব্রী चाहिए सीखनो और कल चाहिए।.तो आइए॰ समय की नदी के साथ बहें, और - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - बैौद्धिक प्रदूषण को सरल शब्दों गें परिभा भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान का आनंद लेना ! ज में रहने का महत्व! जब हम वर्तमान में जीते चल रहे है। आप किसी का इंतजार मत कीजिए। जोवन  3Tা: ব में आरंभ के साथ ही अंत होना निश्चित हो तभी हम जीवन का सच्चा आनंद ले पाते 8, जlत भविष्य की चिंता अथवा अतीत के गम में इसलिए आज के महत्व को समझिए। उलझने से हम वर्तमान को खो देते हैं। आज में रहना अनावश्यक बातों का बोझ न उतार पाने से तकलीफ होती है। भ्रम से निकलकर हकीकत का आनंद लीजिए।  अर्थात - प्रत्येक क्षण को जीना, प्रत्येक अनुभव को महसूस  चाहे दुख मिले या सुख सब आपके हैं। दोनों ही स्थिति কনো; নথা #্া হিন কা নিল ম অপনানা | हम பன में शांति, संयम साहस, धैर्य और दृढ़ता रखिए। वर्तमान में होते हैं॰ तो हमारा मन शांत रहता है॰ और हम जीवन की छोटी छोटी खुशियों को महसूस कर पाते हैँ। कभी अधिक पाकर काम, क्रोध मद माया, भोग=  मैं मत डूब  हम अपने आसपास के लोगों को बेहतर तरीके से समझ f जाना व सबनकुछ खोकर मायूस मत पाते हैं, और उनके साथ अपने रिश्तों को मजबूत बना पाते रहना। कोई भी चीज एक जगह स्थिर नर्हीं। आज उसकी तो कल आपकी बारी, सबको मौत ही मॅंजिल है। जोवन 84 आज में रहने से हम अपने लक्ष्यों पर फोकस कर के हर एक क्षण का दिल से स्वागत कीजिए। जब हम बहुत दूर की सोचते हैं और आज को महत्व  पाते हैं॰ और अपने जीवन को एक दिशा दे पाते हें। यह नहों देते, तो बहुत बड़ी भूल करते हैं । सभी के हिस्से को हमें आत्मनविकास का अवसर भो देता है, और हम अपने जीवन को अधिक अर्थपूर्ण बना पाते हैं। हम अपने डर अपनी जिंदगी होती है। अपने अनुसार वो तय करते हैं॰ और अनिश्चितताओं को दूर कर पाते है, और अपने सपनों सभो को प्राथमिकता अपने सुख और स्वार्थ में होती है। को ओर बढ पाते हैं । जीवन अनिश्चित है, व हमको प्रत्येक  आप किसो के विषय में अपने अनुसार कल्पनाएँ मत कोजिए। अंदर किसी की गहराई में क्या पल रहा है, आप  क्षण को महत्व देना चाहिए। न तो किसी के लिए रुकना  चाहिए और न हो किसी के लिए अपनी खुशियों को रोकना " नहों जानते। बाहर के बर्ताव सेहो किसी पर आँख बंद कर यकीन मत कोजिए। बस खुद का सही मूल्यांकन  चाहिए। बस, अपने दिल को सुनें और अपने सपनों की कोजिए। हर पल को जी लीजिए जीवन में जो मिला है ओर बढ़ें | आज में रहने से हम अपने जीवन को एक नया  अर्थ दे पाते हैं, और हम अपने आप को अधिक खुश और उसे दिल को गहराई सेप्यार करें। किसो सेधोखा मत Tlfoju संतुष्ट महसूस करते हैं। निभाइए हर रिश्ते को बिना किसी स्वार्थ के। जीवन अपनी गति में बहता है, हम अपनी ख्व़ाहिशों जीवन के हर पल में कुछ सपने , उद्देश्य और अच्छी सोच लेकर  के साथ सफर करते हैं। सुबह से रात के बीच बहुत सी ఛా] अपनी दिशा की ओर। चाहे कितनी भी॰ रुकावटें हों, पीछे मुड़कर मत देखना। उस तरफ जहाँ से  अधूरी कहानियाँ होती हैं, जिन्हें पूर्ण करने को एक चाहत  होती है। आँखों में सपने , दिल में प्यार, मन में उत्साह होता  आपको दर्द मिला। भूलकर सारे गम़, आज के हो जाइए।  भविष्य के प्रति चिंतित होकर बेचैनी पालकर मत रखें। ये है। जीवन की जिम्मेदारियों के साथ ही हम विभिन्न द्वन्दों से घिरे होते हैं। जिन्दगी को मॅजिल नर्ही॰ एक अनवरत यात्रा मानो, और समय के साथ सब कुछ घटित होता है। हम देखते हैं हर क्षण को जी भर के जीओ। सुनते है॰ कुछ प्रतिक्रियाएँ देते हैं, कल्पनाएँ करते हैँ पर होता वहीं है जो होना है। समय रुकता नहीं, धीरे धीरे होता है। कुछ हम खो देते हैं, कहीं रुक जाते है মান बदलाव कभी आगे बढ़ जाते हैं। पर जो जीवन के लिए॰ . असीम सुश्री सरोज  কমা कवयित्री लेखिका शिक्षिका इच्छाएँ पालकर रखे होते हैं, उसके विपरीत बहुत कुछ होता है। स्थानः नवापारा - राजिम, जिलाः रायपुर, ( छत्तीसगढ़ ) सोच का एक सागर होता है हमारे पास जिसमें तिनका-तिनका खुशियाँ मिलतो हैं । कल जो हो गया, अगर  HIa : +91 91311 54880 उसे भूल नहीं पा रहे तो सबक लेकर आगे बढ़ते चलें। कोई नही रुकेगा आपके लिए सभी अपनी मजिल की ओर बैौद्धिक प्रदूषण को सरल शब्दों गें परिभा भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान का आनंद लेना ! ज में रहने का महत्व! जब हम वर्तमान में जीते चल रहे है। आप किसी का इंतजार मत कीजिए। जोवन  3Tা: ব में आरंभ के साथ ही अंत होना निश्चित हो तभी हम जीवन का सच्चा आनंद ले पाते 8, जlत भविष्य की चिंता अथवा अतीत के गम में इसलिए आज के महत्व को समझिए। उलझने से हम वर्तमान को खो देते हैं। आज में रहना अनावश्यक बातों का बोझ न उतार पाने से तकलीफ होती है। भ्रम से निकलकर हकीकत का आनंद लीजिए।  अर्थात - प्रत्येक क्षण को जीना, प्रत्येक अनुभव को महसूस  चाहे दुख मिले या सुख सब आपके हैं। दोनों ही स्थिति কনো; নথা #্া হিন কা নিল ম অপনানা | हम பன में शांति, संयम साहस, धैर्य और दृढ़ता रखिए। वर्तमान में होते हैं॰ तो हमारा मन शांत रहता है॰ और हम जीवन की छोटी छोटी खुशियों को महसूस कर पाते हैँ। कभी अधिक पाकर काम, क्रोध मद माया, भोग=  मैं मत डूब  हम अपने आसपास के लोगों को बेहतर तरीके से समझ f जाना व सबनकुछ खोकर मायूस मत पाते हैं, और उनके साथ अपने रिश्तों को मजबूत बना पाते रहना। कोई भी चीज एक जगह स्थिर नर्हीं। आज उसकी तो कल आपकी बारी, सबको मौत ही मॅंजिल है। जोवन 84 आज में रहने से हम अपने लक्ष्यों पर फोकस कर के हर एक क्षण का दिल से स्वागत कीजिए। जब हम बहुत दूर की सोचते हैं और आज को महत्व  पाते हैं॰ और अपने जीवन को एक दिशा दे पाते हें। यह नहों देते, तो बहुत बड़ी भूल करते हैं । सभी के हिस्से को हमें आत्मनविकास का अवसर भो देता है, और हम अपने जीवन को अधिक अर्थपूर्ण बना पाते हैं। हम अपने डर अपनी जिंदगी होती है। अपने अनुसार वो तय करते हैं॰ और अनिश्चितताओं को दूर कर पाते है, और अपने सपनों सभो को प्राथमिकता अपने सुख और स्वार्थ में होती है। को ओर बढ पाते हैं । जीवन अनिश्चित है, व हमको प्रत्येक  आप किसो के विषय में अपने अनुसार कल्पनाएँ मत कोजिए। अंदर किसी की गहराई में क्या पल रहा है, आप  क्षण को महत्व देना चाहिए। न तो किसी के लिए रुकना  चाहिए और न हो किसी के लिए अपनी खुशियों को रोकना " नहों जानते। बाहर के बर्ताव सेहो किसी पर आँख बंद कर यकीन मत कोजिए। बस खुद का सही मूल्यांकन  चाहिए। बस, अपने दिल को सुनें और अपने सपनों की कोजिए। हर पल को जी लीजिए जीवन में जो मिला है ओर बढ़ें | आज में रहने से हम अपने जीवन को एक नया  अर्थ दे पाते हैं, और हम अपने आप को अधिक खुश और उसे दिल को गहराई सेप्यार करें। किसो सेधोखा मत Tlfoju संतुष्ट महसूस करते हैं। निभाइए हर रिश्ते को बिना किसी स्वार्थ के। जीवन अपनी गति में बहता है, हम अपनी ख्व़ाहिशों जीवन के हर पल में कुछ सपने , उद्देश्य और अच्छी सोच लेकर  के साथ सफर करते हैं। सुबह से रात के बीच बहुत सी ఛా] अपनी दिशा की ओर। चाहे कितनी भी॰ रुकावटें हों, पीछे मुड़कर मत देखना। उस तरफ जहाँ से  अधूरी कहानियाँ होती हैं, जिन्हें पूर्ण करने को एक चाहत  होती है। आँखों में सपने , दिल में प्यार, मन में उत्साह होता  आपको दर्द मिला। भूलकर सारे गम़, आज के हो जाइए।  भविष्य के प्रति चिंतित होकर बेचैनी पालकर मत रखें। ये है। जीवन की जिम्मेदारियों के साथ ही हम विभिन्न द्वन्दों से घिरे होते हैं। जिन्दगी को मॅजिल नर्ही॰ एक अनवरत यात्रा मानो, और समय के साथ सब कुछ घटित होता है। हम देखते हैं हर क्षण को जी भर के जीओ। सुनते है॰ कुछ प्रतिक्रियाएँ देते हैं, कल्पनाएँ करते हैँ पर होता वहीं है जो होना है। समय रुकता नहीं, धीरे धीरे होता है। कुछ हम खो देते हैं, कहीं रुक जाते है মান बदलाव कभी आगे बढ़ जाते हैं। पर जो जीवन के लिए॰ . असीम सुश्री सरोज  কমা कवयित्री लेखिका शिक्षिका इच्छाएँ पालकर रखे होते हैं, उसके विपरीत बहुत कुछ होता है। स्थानः नवापारा - राजिम, जिलाः रायपुर, ( छत्तीसगढ़ ) सोच का एक सागर होता है हमारे पास जिसमें तिनका-तिनका खुशियाँ मिलतो हैं । कल जो हो गया, अगर  HIa : +91 91311 54880 उसे भूल नहीं पा रहे तो सबक लेकर आगे बढ़ते चलें। कोई नही रुकेगा आपके लिए सभी अपनी मजिल की ओर - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह
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📚कविता-कहानी संग्रह - जीवन का चक्र : जन्म, मृत्यु और सरोज कंसारी पुनर्जन्म का रहस्य " जोवन का चक्रः एक अंतहीन यात्रा मात्र एक धार्मिक विश्वास नहीं पुनर्जन्म होता, बल्कि सृष्टि के उस अटूट नियम का हिस्सा होता है.. जहाँ कुछ भी कभी समाप्त  नहीं होताः बस उसका स्वरूप बदल जाता है।जैसा कि कविता में लिखा हैः मिटता  नहीं है कुछ भी॰ बस रूप बदल जाता है॰ পিল जेसे सरिता का H # जल जाता है। নহা वस्त्र   पुराने त्याग कर नया स्वीकारो तुम  मृत्यु अंत नहीं पथ का॰ बस एक नया f  दिन के लिए तरोताजा करती है, वैसे ही मृत्यु आत्म जन्मः एक नई संभावना को पुराने और जर्जर शरीर से मुक्त कर, एक नई केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं॰ बल्कि ভ |9 एक चेतना का नए परिवेश से जुड़ाव है। जिस तरह के लिए तैयार करती है। यह पंचतत्वों का अपने वस्त्र त्यागकर नए धारण करते है वसे ही स्रोत में मिल जाना है। पुराने  हम चुनती है ताकि वह अपने अधूरे  थक गई॰थी देह पुरानी, बोझ यादों का भारी था आत्मा एक नया मंच नींद ये गहरी नहीं है, येतो नई तैयारी था। को पूरा कर सके। अनुभवों  रह गए पंचतत्व मिल गए स्वयं में॰ ज्योति ज्योति कर्मों का दर्पण দুনতন্স: पुनर्जन्म का रहस्य हमारे ' कर्मों ' में छिपा है। यह समाई है एक ईश्वरीय न्याय प्रणाली है। जहाँ हम अपने पिछले शून्य से फिर सृजन को ओर, आत्मा मुस्काई  अनुभवों के बीज बोते हैं तथा नवीन जीवन में उनकी  सरोज कंसारी फ्सल काटते हैं। यह चक्र हमें सिखाता है॰ कि आज कवयित्रीलेखिका शिक्षिका हम जो कर रहे हैं॰ वही हमारे कल का आधार बनेगा। स्थानः नवापारा- राजिम  इसो भाव कोये पक्तियाँ जीवंत करती हैं छत्तीसगढ़ जिलाः रायपुर  बोया जो बीज बीते कल॰ वो आज बनके आएगा मिट्टी   में  मिल ক্ি   ম कर   भी अस्तित्व मुस्काएगा | सांसों की ये डोर भले ही, टूट जाए मंजिल पर, अधूरा रह गया जो सफर फिर से पुकारा जाएगा। मृत्युः एक ठहराव अंत नहीं मृत्यु को अक्सर डर के रूप में देखा जाता है किन्तु वास्तविकता में यह एक विश्राम ' है। जैसे दिन- भर की थकान के उपरांत गहरी नींद हमें अगले दैनिकअजय उजाला प्रकाशित लेखा जीवन का चक्र : जन्म, मृत्यु और सरोज कंसारी पुनर्जन्म का रहस्य जोवन का चक्रः एक अंतहीन यात्रा मात्र एक धार्मिक विश्वास नहीं पुनर्जन्म होता, बल्कि सृष्टि के उस अटूट नियम का हिस्सा होता है.. जहाँ कुछ भी कभी समाप्त  नहीं होताः बस उसका स्वरूप बदल जाता है।जैसा कि कविता में लिखा हैः मिटता  नहीं है कुछ भी॰ बस रूप बदल जाता है॰ পিল जेसे सरिता का H # जल जाता है। নহা वस्त्र   पुराने त्याग कर नया स्वीकारो तुम  मृत्यु अंत नहीं पथ का॰ बस एक नया f  दिन के लिए तरोताजा करती है, वैसे ही मृत्यु आत्म जन्मः एक नई संभावना को पुराने और जर्जर शरीर से मुक्त कर, एक नई केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं॰ बल्कि ভ |9 एक चेतना का नए परिवेश से जुड़ाव है। जिस तरह के लिए तैयार करती है। यह पंचतत्वों का अपने वस्त्र त्यागकर नए धारण करते है वसे ही स्रोत में मिल जाना है। पुराने  हम चुनती है ताकि वह अपने अधूरे  थक गई॰थी देह पुरानी, बोझ यादों का भारी था आत्मा एक नया मंच नींद ये गहरी नहीं है, येतो नई तैयारी था। को पूरा कर सके। अनुभवों  रह गए पंचतत्व मिल गए स्वयं में॰ ज्योति ज्योति कर्मों का दर्पण দুনতন্স: पुनर्जन्म का रहस्य हमारे ' कर्मों ' में छिपा है। यह समाई है एक ईश्वरीय न्याय प्रणाली है। जहाँ हम अपने पिछले शून्य से फिर सृजन को ओर, आत्मा मुस्काई  अनुभवों के बीज बोते हैं तथा नवीन जीवन में उनकी  सरोज कंसारी फ्सल काटते हैं। यह चक्र हमें सिखाता है॰ कि आज कवयित्रीलेखिका शिक्षिका हम जो कर रहे हैं॰ वही हमारे कल का आधार बनेगा। स्थानः नवापारा- राजिम  इसो भाव कोये पक्तियाँ जीवंत करती हैं छत्तीसगढ़ जिलाः रायपुर  बोया जो बीज बीते कल॰ वो आज बनके आएगा मिट्टी   में  मिल ক্ি   ম कर   भी अस्तित्व मुस्काएगा | सांसों की ये डोर भले ही, टूट जाए मंजिल पर, अधूरा रह गया जो सफर फिर से पुकारा जाएगा। मृत्युः एक ठहराव अंत नहीं मृत्यु को अक्सर डर के रूप में देखा जाता है किन्तु वास्तविकता में यह एक विश्राम ' है। जैसे दिन- भर की थकान के उपरांत गहरी नींद हमें अगले दैनिकअजय उजाला प्रकाशित लेखा - ShareChat
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