Saroj Kansari
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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - इंसानियत की राख! ( कविता ) खौफ का वो मंजर देखा जबलपुर हादसा गवाह बना उस गहरी सिस्टम को लाचारी का जहाँ चंद पैसों की खातिर मानवता मर गई लहरों का वो शोर व डरी हुई आँखें एक माँ ने काल के सामने भी हार न मानी अंत तक अपनी सीने से चिपकाए रखा खुद का मासूम बालक इंसानियत ्मानवता की राख पर खडा ये कैसा शहर का प्रशासन जहाँ सुरक्षा की फाइलें अलमारी में सोती रहीं और मासूमों की चीखें पानी में दफन हो गई कुछ है यहाँ _ TTT सब संवेदनाओं की भारी कमी है बस.. बुझ गए घरों के कई चिराग  अब बस बाकी रह गई है आँखों में नमी। सरोज कंसारी सुश्री  कवयित्री /लेखिका/शिक्षिका दुर्गा शक्ति समिति 3ಬ೫ गोबरा नवापारा राजिम रायपुर UT श्रीगंगानगर इंसानियत की राख! ( कविता ) खौफ का वो मंजर देखा जबलपुर हादसा गवाह बना उस गहरी सिस्टम को लाचारी का जहाँ चंद पैसों की खातिर मानवता मर गई लहरों का वो शोर व डरी हुई आँखें एक माँ ने काल के सामने भी हार न मानी अंत तक अपनी सीने से चिपकाए रखा खुद का मासूम बालक इंसानियत ्मानवता की राख पर खडा ये कैसा शहर का प्रशासन जहाँ सुरक्षा की फाइलें अलमारी में सोती रहीं और मासूमों की चीखें पानी में दफन हो गई कुछ है यहाँ _ TTT सब संवेदनाओं की भारी कमी है बस.. बुझ गए घरों के कई चिराग  अब बस बाकी रह गई है आँखों में नमी। सरोज कंसारी सुश्री  कवयित्री /लेखिका/शिक्षिका दुर्गा शक्ति समिति 3ಬ೫ गोबरा नवापारा राजिम रायपुर UT श्रीगंगानगर - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - मेरा स्वमाव है , पुरस्कार नर्ही ! सरोज कंसारी खुशी सुश्री 1m+7484 Tப 7 7TI 517 5 1 "೪ಇಞಗ್ಂಗನಕ್ =7875=`     9া { "1 சசபிபா#ர ஈ19141# ٩ ٥ ٥   ٢  Tr { 1141 Hm p १a] - 1- { =~~51-= 111 1124ಗ 1 aa 5ಭ 72 { +715" n " {11ಬ/40 371-1+10:-1 n 1   +  0 = a 77| 7 x ದ =117` 4 6'ಬ 1 ररपरी  577 71 ~ -+- বার  a   a a   मेरा स्वमाव है , पुरस्कार नर्ही ! सरोज कंसारी खुशी सुश्री 1m+7484 Tப 7 7TI 517 5 1 "೪ಇಞಗ್ಂಗನಕ್ =7875=`     9া { "1 சசபிபா#ர ஈ19141# ٩ ٥ ٥   ٢  Tr { 1141 Hm p १a] - 1- { =~~51-= 111 1124ಗ 1 aa 5ಭ 72 { +715" n {11ಬ/40 371-1+10:-1 n 1   +  0 = a 77| 7 x ದ =117` 4 6'ಬ 1 ररपरी  577 71 ~ -+- বার  a   a a - ShareChat
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📚कविता-कहानी संग्रह - ননবী কী তুঝান! (কবিনা) नजर पढ़ना हुनर है अगर, खोल दे अंतर्मन का हर दर। भावों का समंदर अथाह हर पल जिंदगी इम्तिहान। रूह छू ले, अश्क बन बहे प्यार मिले तो छलक पड़े। वीरान राह पर सहम जाए, खामोश रहकर सब कह जाए। खुशी में राज, गम में ढाल को कर दे दिल से बाहर। 30  थामे, वादे निभाए पलकों में तूफ़न छुपाए। में सिमटा ये जहान, नजर सोच बदलो तो गुलिस्तान।  जज़्बात का कोई मोल नहीं, ये किसी के गुलाम नहीं। सरोज कंसारी कवयित्री लेखिका शिक्षिका दुर्गा शक्ति समिति अध्यक्ष गोबरा नवापारा राजिम, रायपुर, छग. ননবী কী তুঝান! (কবিনা) नजर पढ़ना हुनर है अगर, खोल दे अंतर्मन का हर दर। भावों का समंदर अथाह हर पल जिंदगी इम्तिहान। रूह छू ले, अश्क बन बहे प्यार मिले तो छलक पड़े। वीरान राह पर सहम जाए, खामोश रहकर सब कह जाए। खुशी में राज, गम में ढाल को कर दे दिल से बाहर। 30  थामे, वादे निभाए पलकों में तूफ़न छुपाए। में सिमटा ये जहान, नजर सोच बदलो तो गुलिस्तान।  जज़्बात का कोई मोल नहीं, ये किसी के गुलाम नहीं। सरोज कंसारी कवयित्री लेखिका शिक्षिका दुर्गा शक्ति समिति अध्यक्ष गोबरा नवापारा राजिम, रायपुर, छग. - ShareChat
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