DHANRAJ DAIYA
ShareChat
click to see wallet page
@495966573
495966573
DHANRAJ DAIYA
@495966573
पधारो सा! 2 करोड़ लोगां क परिवार म थांको बहुत बहुत
#📈ट्रेंडिंग स्टोरी
📈ट्रेंडिंग स्टोरी - ShareChat
00:49
#📈ट्रेंडिंग स्टोरी
📈ट्रेंडिंग स्टोरी - ShareChat
00:36
#📈ट्रेंडिंग स्टोरी
📈ट्रेंडिंग स्टोरी - ShareChat
00:25
#📈ट्रेंडिंग स्टोरी
📈ट्रेंडिंग स्टोरी - ShareChat
00:19
#📈ट्रेंडिंग स्टोरी
📈ट्रेंडिंग स्टोरी - ShareChat
00:12
#📈ट्रेंडिंग स्टोरी
📈ट्रेंडिंग स्टोरी - ShareChat
00:19
#📈ट्रेंडिंग स्टोरी
📈ट्रेंडिंग स्टोरी - ShareChat
00:15
#📈ट्रेंडिंग स्टोरी
📈ट्रेंडिंग स्टोरी - 8:56 ill 56+ all NR2 Lessons from Great Thinkers मनुष्य स्वयं ही अपने कर्मों का कर्ता है अहिंसा परमो धर्मःः सभी जीवों के प्रति दया भगवान महावीर भाव रखें , घृणा से विनाश होता है। स्वयं से लड़ाईः बाहरी दुश्मन से क्या लड़ना, जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेगा उसे आनंद की प्राप्ति होगी। ही सत्य हैः अपनी आत्मा को न आत्मन्ज्ञान पहचानना ही सबसे बड़ी गलती है। अपने खुद के दुख का कारणः हर मनुष्य दोष (क्रोध, लालच) की वजह से दुखी है॰ न कि के कारण| दूसरों जैन पन्थ के २४वें तीर्थंकर )J D__L__] सच्चा सुखः आत्मा अकेले आती है और (५९९ ईसा पूर्व ५२७ ईसा पूर्व) महावीर (Mahavira) अकेले जाती है॰ कोई किसी का साथ नहीं देता। भगवान जैन धर्म के चौंबीसवें (२४वें) समता भावः जैसा व्यवहार आप अपने लिए तीर्थंकर थे। भगवान महावीर पसंद नहीं करते, वैसा के साथ न करें। दूसरों का जन्म करीब ढाई हजार वर्ष आत्म नियंत्रणः जो व्यक्ति जागरूक (सतर्क) (ईसा से ५९९ वर्ष पूर्व), पहले है, उसे कहीं से भी डर नहीं है। वैशाली गणराज्य के क्षत्रियकुंड भीतर हैंः क्रोध , घमंड, नफरत और में क्षत्रिय परिवार हुआ था। हमारे 213 तीस वर्ष की आयु में महावीर लालच ही असली दुश्मन हैं। IVLr' BEALIN ने संसार से विरक्त होकर राज हो तो भूल त्याग और क्षमाः भला किया वैभव त्याग दिया और संन्यास जाओ, बुरा किया हो तो उसे भी भूल जाओ। धारण कर आत्मकल्याण के भगवान बनोः भगवान का अलग से ೆ पथ पर निकल गये। १२ वर्षो कोई अस्तित्व नहीं है॰ सही प्रयासों से हर जीव की कठिन तपस्या के बाद उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ देवत्व प्राप्त कर सकता है।   LJr BEELIIJ 8:56 ill 56+ all NR2 Lessons from Great Thinkers मनुष्य स्वयं ही अपने कर्मों का कर्ता है अहिंसा परमो धर्मःः सभी जीवों के प्रति दया भगवान महावीर भाव रखें , घृणा से विनाश होता है। स्वयं से लड़ाईः बाहरी दुश्मन से क्या लड़ना, जो स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेगा उसे आनंद की प्राप्ति होगी। ही सत्य हैः अपनी आत्मा को न आत्मन्ज्ञान पहचानना ही सबसे बड़ी गलती है। अपने खुद के दुख का कारणः हर मनुष्य दोष (क्रोध, लालच) की वजह से दुखी है॰ न कि के कारण| दूसरों जैन पन्थ के २४वें तीर्थंकर )J D__L__] सच्चा सुखः आत्मा अकेले आती है और (५९९ ईसा पूर्व ५२७ ईसा पूर्व) महावीर (Mahavira) अकेले जाती है॰ कोई किसी का साथ नहीं देता। भगवान जैन धर्म के चौंबीसवें (२४वें) समता भावः जैसा व्यवहार आप अपने लिए तीर्थंकर थे। भगवान महावीर पसंद नहीं करते, वैसा के साथ न करें। दूसरों का जन्म करीब ढाई हजार वर्ष आत्म नियंत्रणः जो व्यक्ति जागरूक (सतर्क) (ईसा से ५९९ वर्ष पूर्व), पहले है, उसे कहीं से भी डर नहीं है। वैशाली गणराज्य के क्षत्रियकुंड भीतर हैंः क्रोध , घमंड, नफरत और में क्षत्रिय परिवार हुआ था। हमारे 213 तीस वर्ष की आयु में महावीर लालच ही असली दुश्मन हैं। IVLr' BEALIN ने संसार से विरक्त होकर राज हो तो भूल त्याग और क्षमाः भला किया वैभव त्याग दिया और संन्यास जाओ, बुरा किया हो तो उसे भी भूल जाओ। धारण कर आत्मकल्याण के भगवान बनोः भगवान का अलग से ೆ पथ पर निकल गये। १२ वर्षो कोई अस्तित्व नहीं है॰ सही प्रयासों से हर जीव की कठिन तपस्या के बाद उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ देवत्व प्राप्त कर सकता है।   LJr BEELIIJ - ShareChat
#📈ट्रेंडिंग स्टोरी
📈ट्रेंडिंग स्टोरी - ShareChat
00:22
#📈ट्रेंडिंग स्टोरी
📈ट्रेंडिंग स्टोरी - ShareChat
00:19