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एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#🔯ज्योतिष
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
#🔯वास्तु दोष उपाय
#🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨
#🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
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#📕लाल किताब उपाय🔯
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
#✡️ज्योतिष समाधान 🌟
#✡️सितारों की चाल🌠
#🐍कालसर्प दोष परिहार
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#🔯ज्योतिष
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#अधिकांश_ब्राह्मणो_की_दयनिय_हालत_जिम्मेदार_कौन????? १) यजमान की सैलरी 30 हजार हो गई लेकिन फिर भी सत्यनारायण कथा करने वाले ब्राह्मण को 101 रुपये देगे । २) दस लाख शादी मे खर्च करेगे पर शादी करवाने वाले ब्राह्मण को 1100 रुपये रो रो कर देगे । ३) बिस लाख का घर बनाएगे पर वास्तु पुजन करवाने वाले ब्राह्मण को 1100 रुपये देगे । ४) बच्चे का भूत भविष्य वर्तमान सब जानना है और ज्योतिशी को देगे 101 रुपये । ५) लाखो का बिजनेस शुरु करना है लेकिन शुभ मुहुर्त बताने वाले ब्राह्मण को देगे 51 रुपये । सारे काम करवाकर कम दक्षिणा देकर आखिर मे ब्राह्मण को #लुटेरे की उपाधी भी देगे । ....जय परशुराम
#🔯वास्तु दोष उपाय
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#🐍कालसर्प दोष परिहार
#अधिकांश_ब्राह्मणो_की_दयनिय_हालत_जिम्मेदार_कौन????? १) यजमान की सैलरी 30 हजार हो गई लेकिन फिर भी सत्यनारायण कथा करने वाले ब्राह्मण को 101 रुपये देगे । २) दस लाख शादी मे खर्च करेगे पर शादी करवाने वाले ब्राह्मण को 1100 रुपये रो रो कर देगे । ३) बिस लाख का घर बनाएगे पर वास्तु पुजन करवाने वाले ब्राह्मण को 1100 रुपये देगे । ४) बच्चे का भूत भविष्य वर्तमान सब जानना है और ज्योतिशी को देगे 101 रुपये । ५) लाखो का बिजनेस शुरु करना है लेकिन शुभ मुहुर्त बताने वाले ब्राह्मण को देगे 51 रुपये । सारे काम करवाकर कम दक्षिणा देकर आखिर मे ब्राह्मण को #लुटेरे की उपाधी भी देगे । ....जय परशुराम
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*💥कैसे और कब होता है भाग्य उदय💥* व्यक्ति जीवन में सफल हो तो जीवन में खुशियां अपने आप आ ही जाती हैं लेकिन असफल होने पर सारे सुख-साधन व्यर्थ और जीवन नीरस लगने लगता है। जीवन में ऊर्जा आत्मविश्वास बनकर हमारे व्यक्तित्व में झलकती है तो सफलता बनकर करियर में। जितना हमारे व्यवक्तिगत गुण और संस्कार महत्व रखते हैं, उतना ही महत्व रखता है हमारा भाग्य और हमारे आसपास के वातावरण में मौजूद अदृश्य ऊर्जाशक्तियां। हकीकत में धन ध+न का रहस्य वे ही समझ पाएं है जो ध यानी भाग्य और न यानी जोखिम दोंनो को साथ लेकर चलते रहे हैं। जन्म कुंडली में जिस स्थान पर धनु और वृश्चिक राशियां होंगी उसी स्थान से धन कमाने के रास्ते खुलेंगे। जब जोखिम है तो भाग्य को आगे आना ही है, जब तक जोखिम नहीं है तब तक भाग्य भी नहीं है। गुरु सोना है तो मंगल पीतल अब होता यह है की ऐसी अवस्था में जब भी मंगल और गुरु की युति हो जाती है तो पीतल सोने की चमक को दबाने लगता है। सोने में मिलावट होनी शुरू हो जाती है अर्थात काबिल होते हुए भी आपकी क्षमताओं का उचित मूल्यांकन नहीं होता। आपसे कम गुणी लोग आपको ओवरटेक करके आगे निकल जाते हैं और धन कहां से बचना है जब व्यय के रूप में मंगल व रोग के रूप में शुक्र लग्न में बनने वाले धनपति योग को तबाह करने पर तुल जाते हैं तो पैसा आने से पहले उसके जाने का रास्ता तैयार रहता है। ऐसी अवस्था में किसी वशिष्ट विद्वान के परामर्श से सवा सात रत्ती का पुखराज धारण करें। प्रतिदिन माथे पर चन्दन का तिलक लगाएं, शुक्र को हावी न होने दें अर्थात महंगी बेकार की वस्तुएं न खरीदें ,खाने पीने ,पार्टी दावत,व महंगे परिधानों पर बेकार खर्च न करें। कुंडली में लग्न से नवां भाव भाग्य स्थान होता है। भाग्य स्थान से नवां भाव अर्थात भाग्य का भी भाग्य स्थान पंचम भाव होता है। द्वितीय व एकादश धन को कण्ट्रोल करने वाले भाव होते हैं। तृतीय भाव पराक्रम का भाव है.अततः कुंडली में जब भी गोचरवश पंचम भाव से धनेश, आएश, भाग्येश व पराक्रमेश का सम्बन्ध बनेगा वो ही समय आपके जीवन का शानदार समय बनकर आएगा। ये सम्बन्ध चाहे ग्रहों की युति से बने चाहे आपसी दृष्टि से बनें।
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#📕लाल किताब उपाय🔯
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
#✡️ज्योतिष समाधान 🌟
#✡️सितारों की चाल🌠
#🐍कालसर्प दोष परिहार
*💥कैसे और कब होता है भाग्य उदय💥* व्यक्ति जीवन में सफल हो तो जीवन में खुशियां अपने आप आ ही जाती हैं लेकिन असफल होने पर सारे सुख-साधन व्यर्थ और जीवन नीरस लगने लगता है। जीवन में ऊर्जा आत्मविश्वास बनकर हमारे व्यक्तित्व में झलकती है तो सफलता बनकर करियर में। जितना हमारे व्यवक्तिगत गुण और संस्कार महत्व रखते हैं, उतना ही महत्व रखता है हमारा भाग्य और हमारे आसपास के वातावरण में मौजूद अदृश्य ऊर्जाशक्तियां। हकीकत में धन ध+न का रहस्य वे ही समझ पाएं है जो ध यानी भाग्य और न यानी जोखिम दोंनो को साथ लेकर चलते रहे हैं। जन्म कुंडली में जिस स्थान पर धनु और वृश्चिक राशियां होंगी उसी स्थान से धन कमाने के रास्ते खुलेंगे। जब जोखिम है तो भाग्य को आगे आना ही है, जब तक जोखिम नहीं है तब तक भाग्य भी नहीं है। गुरु सोना है तो मंगल पीतल अब होता यह है की ऐसी अवस्था में जब भी मंगल और गुरु की युति हो जाती है तो पीतल सोने की चमक को दबाने लगता है। सोने में मिलावट होनी शुरू हो जाती है अर्थात काबिल होते हुए भी आपकी क्षमताओं का उचित मूल्यांकन नहीं होता। आपसे कम गुणी लोग आपको ओवरटेक करके आगे निकल जाते हैं और धन कहां से बचना है जब व्यय के रूप में मंगल व रोग के रूप में शुक्र लग्न में बनने वाले धनपति योग को तबाह करने पर तुल जाते हैं तो पैसा आने से पहले उसके जाने का रास्ता तैयार रहता है। ऐसी अवस्था में किसी वशिष्ट विद्वान के परामर्श से सवा सात रत्ती का पुखराज धारण करें। प्रतिदिन माथे पर चन्दन का तिलक लगाएं, शुक्र को हावी न होने दें अर्थात महंगी बेकार की वस्तुएं न खरीदें ,खाने पीने ,पार्टी दावत,व महंगे परिधानों पर बेकार खर्च न करें। कुंडली में लग्न से नवां भाव भाग्य स्थान होता है। भाग्य स्थान से नवां भाव अर्थात भाग्य का भी भाग्य स्थान पंचम भाव होता है। द्वितीय व एकादश धन को कण्ट्रोल करने वाले भाव होते हैं। तृतीय भाव पराक्रम का भाव है.अततः कुंडली में जब भी गोचरवश पंचम भाव से धनेश, आएश, भाग्येश व पराक्रमेश का सम्बन्ध बनेगा वो ही समय आपके जीवन का शानदार समय बनकर आएगा। ये सम्बन्ध चाहे ग्रहों की युति से बने चाहे आपसी दृष्टि से बनें।
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