एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
🔯ज्योतिष - Aeeoescaesmazela मेरे लिए जिंदगी में सबसे कीमती सिर्फ आप हो मेरे महाकाल ऊँ ಕ್ಕೆ ٍ ৫9 4 9 ^ lorobondh |kolesh  5 HVಭmone @त Aeeoescaesmazela मेरे लिए जिंदगी में सबसे कीमती सिर्फ आप हो मेरे महाकाल ऊँ ಕ್ಕೆ ٍ ৫9 4 9 ^ lorobondh |kolesh  5 HVಭmone @त - ShareChat
#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨
🔯ज्योतिष - मेने तो अपना गुरुही महादेव को माना है Il हर हर महादेव || मेने तो अपना गुरुही महादेव को माना है Il हर हर महादेव || - ShareChat
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#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
📕लाल किताब उपाय🔯 - ShareChat
#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯वास्तु दोष उपाय वास्तु दोष और आत्महत्या जिस घर में आत्महत्या होती है उस घर में दो या दो से अधिक वास्तुदोष अवश्य होते हैं। जिनमें से एक घर के ईशान कोण उत्तर पूर्व में होता है और दूसरा दोष नैऋत्य कोण दक्षिण पश्चिम में होता है। इन दिशाओं में भूमिगत पानी की टंकी, कुआं, बोरवेल, बेसमेंट या किसी भी प्रकार से इस कोने का फर्श नीचा हो या घर के दक्षिण दिशा का दक्षिणी कोना या दक्षिण पश्चिम का दक्षिणी भाग का बढ़ा हुआ हो तो वास्तु बुरी तरह प्रभावित होता है। इस दोष के साथ यदि घर के पश्चिम नैऋत्य कोण में मुख्य द्वार हो तो घर के पुरूष सदस्य द्वारा और यदि मुख्य द्वार दक्षिण नैऋत्य कोण में हो तो उस घर की स्त्री द्वारा आत्महत्या करने की संभावना रहती है। दूसरा वास्तुदोष घर के ईशान कोण में होता है। घर का यह कोना अंदर दब जाए, कट जाए, गोल हो जाए या किसी कारण दक्षिण पूर्व की दीवार पूर्व की ओर आगे बढ़ जाए तो घर के पुरूष सदस्य द्वारा और यदि उत्तर पश्चिमी दीवार का का उत्तरी भाग आगे बढ़ा हुआ हो तो स्त्री सदस्य आत्महत्या कर सकती है। घर के दक्षिण नैऋत्य में मार्ग प्रहार हो यानी इस दिशा में कोई रास्ता आकर मिल रहा हो तब स्त्रियां और पश्चिम नैऋत्य में कोई मार्ग आकर घर के द्वार के पास मिल रहा हो तब पुरूष इस प्रकार का कदम उठाते हैं। जमीन के पूर्व आग्नेय कोण को किसी भी चीज से ढकना नहीं चाहिए अन्यथा पुरूषों में निराशा और आत्महत्या की भावना बलवती होती है जबकि वायव्य ढका हुआ हो तब स्त्रियां निराश होकर इस तरह के कदम उठाती हैं। वास्तु के अनुसार इस तरह की घटना से बचने के लिए जरूरी है कि घर बनवाते समय वास्तु के इन दोषों को ध्यान में रखते हुए घर बनवाएं। अगर किराये पर घर ले रहे हैं तो ध्यान रखें कि घर में ऐसे वास्तु दोष न हो ।
#📕लाल किताब उपाय🔯 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠 #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 वास्तु दोष और आत्महत्या जिस घर में आत्महत्या होती है उस घर में दो या दो से अधिक वास्तुदोष अवश्य होते हैं। जिनमें से एक घर के ईशान कोण उत्तर पूर्व में होता है और दूसरा दोष नैऋत्य कोण दक्षिण पश्चिम में होता है। इन दिशाओं में भूमिगत पानी की टंकी, कुआं, बोरवेल, बेसमेंट या किसी भी प्रकार से इस कोने का फर्श नीचा हो या घर के दक्षिण दिशा का दक्षिणी कोना या दक्षिण पश्चिम का दक्षिणी भाग का बढ़ा हुआ हो तो वास्तु बुरी तरह प्रभावित होता है। इस दोष के साथ यदि घर के पश्चिम नैऋत्य कोण में मुख्य द्वार हो तो घर के पुरूष सदस्य द्वारा और यदि मुख्य द्वार दक्षिण नैऋत्य कोण में हो तो उस घर की स्त्री द्वारा आत्महत्या करने की संभावना रहती है। दूसरा वास्तुदोष घर के ईशान कोण में होता है। घर का यह कोना अंदर दब जाए, कट जाए, गोल हो जाए या किसी कारण दक्षिण पूर्व की दीवार पूर्व की ओर आगे बढ़ जाए तो घर के पुरूष सदस्य द्वारा और यदि उत्तर पश्चिमी दीवार का का उत्तरी भाग आगे बढ़ा हुआ हो तो स्त्री सदस्य आत्महत्या कर सकती है। घर के दक्षिण नैऋत्य में मार्ग प्रहार हो यानी इस दिशा में कोई रास्ता आकर मिल रहा हो तब स्त्रियां और पश्चिम नैऋत्य में कोई मार्ग आकर घर के द्वार के पास मिल रहा हो तब पुरूष इस प्रकार का कदम उठाते हैं। जमीन के पूर्व आग्नेय कोण को किसी भी चीज से ढकना नहीं चाहिए अन्यथा पुरूषों में निराशा और आत्महत्या की भावना बलवती होती है जबकि वायव्य ढका हुआ हो तब स्त्रियां निराश होकर इस तरह के कदम उठाती हैं। वास्तु के अनुसार इस तरह की घटना से बचने के लिए जरूरी है कि घर बनवाते समय वास्तु के इन दोषों को ध्यान में रखते हुए घर बनवाएं। अगर किराये पर घर ले रहे हैं तो ध्यान रखें कि घर में ऐसे वास्तु दोष न हो ।
#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨आइए समझते हैं कुंडली में बनने वाले प्रेतदोष को :- ::::::::::::: :::::::::::::::::::::::: ज्योतिष के अनुसार वे लोग प्रेतों का शिकार बनते हैं जिनकी कुंडली में पिशाच योग बनता है। यह योग जन्म कुंडली में राहु से पापाक्रांत प्रमुख ग्रहों के कारण बनता है। अगर कुंडली में वृश्चिक राशि में राहु के साथ चन्द्रमा होता तब पिशाच योग प्रबल बन जाता है। ये योग व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बनाता है। भृगुसंहिता तथा जन्मकुंडली में प्रेतयोनी प्राप्ति के कारण: * कुंडली द्वारा यह ज्ञात किया जा सकता है कि व्यक्ति इस प्रकार की दिक्कतों का सामना करेगा या नहीं। * कुंडली में बनने वाले कुछ प्रेत बाधा दोष इस प्रकार है: 1. कुंडली के पहले भाव में चंद्र के साथ राहु हो और पांचवे और नौवें भाव में क्रूर ग्रहों की स्थिति हों। इस योग के होने पर जातक या जातिका पर प्रेत-पिशाच या नकारात्मक जीवों का प्रकोप शीघ्र होता है। यदि गोचर में भी यही स्थिति हो तो अवश्य ऊपरी बाधाएं तंग करती है। 2. यदि किसी की कुंडली में शनि या मंगल में से कोई भी ग्रह राहु से आक्रांत होकर सप्तम भाव में हो तो ऐसे लोग भी प्रेत बाधा या ऊपरी हवा आदि से परेशान रहते है। 3. उक्त योगों की दशा-अंतर्दशा और गोचर में भी इन योगों की उपस्थिति हो तो समझ लें कि जातक या जातिका इस कष्ट से अवश्य परेशान होगा। इस कष्ट से मुक्ति के लिए पितृ शांति कराना चाहिए। 4. कुंडली में चंद्र नीच का हो और चंद्र राहु संबंध बन रहा हो, साथ ही भाग्य स्थान पाप ग्रहों के प्रभाव में हों तो भी प्रेत बाधा बनते हैं। 5. प्रेत-बाधा अक्सर उन लोगों को कष्ट देता है जो ज्योतिषीय नजरिये से कमजोर ग्रह वाले होते हैं। इन लोगों में मानसिक रोगियों की संख्या ज्यादा होती है। 6. वैसे तो कुंडली में किसी भी राशि में राहु और चंद्र का साथ होना अशुभ और प्रेत बाधा देने वाला माना जाता है लेकिन वृश्चिक राशि में जब चंद्रमा नीच स्थिति में हो जाता है यानि अशुभ फल देने वाला हो जाता है तो इस स्थिति को ज्यादा कष्टकारी माना जाता है। राहु और चंद्रमा मिलकर व्यक्ति को मानसिक रोगी भी बना देते हैं। प्रेत बाधा दोष राहु द्वारा निर्मित योगों में नीच योग है। प्रेतबाधा दोष जिस व्यक्ति की जन्मकुंडली में होता है उसमें इच्छा शक्ति की कमी रहती है। इनकी मानसिक स्थिति कमजोर रहती है, ये आसानी से दूसरों की बातों में आ जाते हैं और उनके अनुसार बुरे कर्म करने लगते हैं। इनके मन में निराशाजनक विचारों का आगमन होता रहता है। स्वयं ही अपना तथा अपनों का नुकसान कर बैठते हैं। 7. लग्न चंद्रमा व भाग्य भाव की स्थिति अच्छी न हो तो व्यक्ति हमेशा शक करता रहता है। उसको लगता रहता है कि कोई उसका विनाश करने में लगा हुआ है और किसी भी इलाज पर उसे भरोसा नहीं होता। 8. जिन व्यक्तियों का जन्म राक्षस गण में हुआ हो, उन व्यक्तियों पर भी प्रेतबाधा का प्रभाव आसानी से होने की संभावनाएं बनती हैं। इस प्रकार परेशानियों से मुक्ति हेतु नारायण बलि, नागबलि, रुद्राभिषेक अर्थात पितृ शांति विद्वान आचार्य से किसी नदी के तट पर देवता के मंदिर प्रांगण में कराना चाहिए । #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯वास्तु दोष उपाय
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 आइए समझते हैं कुंडली में बनने वाले प्रेतदोष को :- ::::::::::::: :::::::::::::::::::::::: ज्योतिष के अनुसार वे लोग प्रेतों का शिकार बनते हैं जिनकी कुंडली में पिशाच योग बनता है। यह योग जन्म कुंडली में राहु से पापाक्रांत प्रमुख ग्रहों के कारण बनता है। अगर कुंडली में वृश्चिक राशि में राहु के साथ चन्द्रमा होता तब पिशाच योग प्रबल बन जाता है। ये योग व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बनाता है। भृगुसंहिता तथा जन्मकुंडली में प्रेतयोनी प्राप्ति के कारण: * कुंडली द्वारा यह ज्ञात किया जा सकता है कि व्यक्ति इस प्रकार की दिक्कतों का सामना करेगा या नहीं। * कुंडली में बनने वाले कुछ प्रेत बाधा दोष इस प्रकार है: 1. कुंडली के पहले भाव में चंद्र के साथ राहु हो और पांचवे और नौवें भाव में क्रूर ग्रहों की स्थिति हों। इस योग के होने पर जातक या जातिका पर प्रेत-पिशाच या नकारात्मक जीवों का प्रकोप शीघ्र होता है। यदि गोचर में भी यही स्थिति हो तो अवश्य ऊपरी बाधाएं तंग करती है। 2. यदि किसी की कुंडली में शनि या मंगल में से कोई भी ग्रह राहु से आक्रांत होकर सप्तम भाव में हो तो ऐसे लोग भी प्रेत बाधा या ऊपरी हवा आदि से परेशान रहते है। 3. उक्त योगों की दशा-अंतर्दशा और गोचर में भी इन योगों की उपस्थिति हो तो समझ लें कि जातक या जातिका इस कष्ट से अवश्य परेशान होगा। इस कष्ट से मुक्ति के लिए पितृ शांति कराना चाहिए। 4. कुंडली में चंद्र नीच का हो और चंद्र राहु संबंध बन रहा हो, साथ ही भाग्य स्थान पाप ग्रहों के प्रभाव में हों तो भी प्रेत बाधा बनते हैं। 5. प्रेत-बाधा अक्सर उन लोगों को कष्ट देता है जो ज्योतिषीय नजरिये से कमजोर ग्रह वाले होते हैं। इन लोगों में मानसिक रोगियों की संख्या ज्यादा होती है। 6. वैसे तो कुंडली में किसी भी राशि में राहु और चंद्र का साथ होना अशुभ और प्रेत बाधा देने वाला माना जाता है लेकिन वृश्चिक राशि में जब चंद्रमा नीच स्थिति में हो जाता है यानि अशुभ फल देने वाला हो जाता है तो इस स्थिति को ज्यादा कष्टकारी माना जाता है। राहु और चंद्रमा मिलकर व्यक्ति को मानसिक रोगी भी बना देते हैं। प्रेत बाधा दोष राहु द्वारा निर्मित योगों में नीच योग है। प्रेतबाधा दोष जिस व्यक्ति की जन्मकुंडली में होता है उसमें इच्छा शक्ति की कमी रहती है। इनकी मानसिक स्थिति कमजोर रहती है, ये आसानी से दूसरों की बातों में आ जाते हैं और उनके अनुसार बुरे कर्म करने लगते हैं। इनके मन में निराशाजनक विचारों का आगमन होता रहता है। स्वयं ही अपना तथा अपनों का नुकसान कर बैठते हैं। 7. लग्न चंद्रमा व भाग्य भाव की स्थिति अच्छी न हो तो व्यक्ति हमेशा शक करता रहता है। उसको लगता रहता है कि कोई उसका विनाश करने में लगा हुआ है और किसी भी इलाज पर उसे भरोसा नहीं होता। 8. जिन व्यक्तियों का जन्म राक्षस गण में हुआ हो, उन व्यक्तियों पर भी प्रेतबाधा का प्रभाव आसानी से होने की संभावनाएं बनती हैं। इस प्रकार परेशानियों से मुक्ति हेतु नारायण बलि, नागबलि, रुद्राभिषेक अर्थात पितृ शांति विद्वान आचार्य से किसी नदी के तट पर देवता के मंदिर प्रांगण में कराना चाहिए ।
#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपायफ्री फ्री फ्री जय श्री महाकाल जय श्री श्याम आपके जीवन में या घर में प्रतिदिन क्लेश रहता है या कोई भी परेशानी है जैसे घर के अंदर नेगेटिव एनर्जी का बास भूत प्रेत बाधा या किया कराया कि किसी भी प्रकार की परेशानी या किसी भी प्रकार की कोई बीमारी है और दवाई असर नहीं कर रही है तो आप हमसे मिलकर इस चीज का उपाय जान सकते हैं लेकिन आपको हमारे पास आकर मिलना होगा हमारा पता है मनोज कौशिक नियर मानव कल्याण हॉस्पिटल बहल भिवानी हरियाणा मोबाइल नंबर 870 8198 423 94163 61508 इस पोस्ट को आगे शेयर करें ताकि अन्य लोगों का भी भला हो सके #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
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