एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#🔯वास्तु दोष उपाय #💰धन के लिए वास्तु टिप्स🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #🔯कुंडली दोष #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 तुरन्त असरकारक धनलाभ उपाय शक्तिशाली अघोर प्रयोग है जो अतिशीघ्र लाभ देगा बुधवार की रात्री ११ बजे से १ बजे के बीच किसी सुनसान स्थान पर जाना है अब सबसे पहले अपको ५ काली मिर्च ,५ साबुत लौंग ५ साबुत हरी इलाइची ५ देसी गुलाब साबुत लेने हैं अब इन्हें ५ भाग मे विभक्त कर लें अब सबसे पहला हिस्सा जिसमे १ इलाइची १ लौंग १ काली मिर्च और १ गुलाब का फूल इसे उत्तर की और फेंकना है अगला हिस्सा दक्षिण की और फेंकना है तीसरा हिस्सा पूर्व की और फेंकना है और चौथा हिस्सा पश्चिम की और फेंकना है अब पांचवा हिस्सा अपने सर से घडी की तरह २१ बार घुमाना है और सर के ऊपर आकाश की और उछाल देना है उछालते ही वहां से हट जाना है जिससे वह आपके ऊपर ना गिरे अब एक चाकू से जहां उछाली गई सामग्री गिरी है उसे चारों और खोदकर एक चक्र बना देना है और चाकू उसके बाहर भूमि पर लिटा दें और अपने घर आ जाएं यह आपने अपनी सारी नकारात्मक शक्तियां को चारों और फेंक दिया है और ऊपर जो ईष्ट शक्ति को आमंत्रित किया है उसे चारों और से घेर दिया है इस क्रिया को करने के बाद जब आप अपने घर वापस आएँगे तो घर मे पूर्णत: सूकून का अनुभव करेंगे और धन का लाभ होने लगेगा
#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 तुरन्त असरकारक धनलाभ उपाय शक्तिशाली अघोर प्रयोग है जो अतिशीघ्र लाभ देगा बुधवार की रात्री ११ बजे से १ बजे के बीच किसी सुनसान स्थान पर जाना है अब सबसे पहले अपको ५ काली मिर्च ,५ साबुत लौंग ५ साबुत हरी इलाइची ५ देसी गुलाब साबुत लेने हैं अब इन्हें ५ भाग मे विभक्त कर लें अब सबसे पहला हिस्सा जिसमे १ इलाइची १ लौंग १ काली मिर्च और १ गुलाब का फूल इसे उत्तर की और फेंकना है अगला हिस्सा दक्षिण की और फेंकना है तीसरा हिस्सा पूर्व की और फेंकना है और चौथा हिस्सा पश्चिम की और फेंकना है अब पांचवा हिस्सा अपने सर से घडी की तरह २१ बार घुमाना है और सर के ऊपर आकाश की और उछाल देना है उछालते ही वहां से हट जाना है जिससे वह आपके ऊपर ना गिरे अब एक चाकू से जहां उछाली गई सामग्री गिरी है उसे चारों और खोदकर एक चक्र बना देना है और चाकू उसके बाहर भूमि पर लिटा दें और अपने घर आ जाएं यह आपने अपनी सारी नकारात्मक शक्तियां को चारों और फेंक दिया है और ऊपर जो ईष्ट शक्ति को आमंत्रित किया है उसे चारों और से घेर दिया है इस क्रिया को करने के बाद जब आप अपने घर वापस आएँगे तो घर मे पूर्णत: सूकून का अनुभव करेंगे और धन का लाभ होने लगेगा
#🔯वास्तु दोष उपाय #💰धन के लिए वास्तु टिप्स🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯कुंडली दोष #✡️सितारों की चाल🌠 समस्त पापनाशक स्तोत्र भगवान वेदव्यास द्वारा रचित अठारह पुराणों में से एक ‘अग्नि पुराण’ में अग्निदेव द्वारा महर्षि वशिष्ठ को दिये गये विभिन्न उपदेश हैं। इसी के अंतर्गत इस पापनाशक स्तोत्र के बारे में महात्मा पुष्कर कहते हैं कि मनुष्य चित्त की मलिनतावश चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन आदि विभिन्न पाप करता है, पर जब चित्त कुछ शुद्ध होता है तब उसे इन पापों से मुक्ति की इच्छा होती है। उस समय भगवान नारायण की दिव्य स्तुति करने से समस्त पापों का प्रायश्चित पूर्ण होता है। इसीलिए इस दिव्य स्तोत्र का नाम *'समस्त पापनाशक स्तोत्र’* है। निम्निलिखित प्रकार से भगवान नारायण की स्तुति करें- पुष्करोवाच विष्णवे विष्णवे नित्यं विष्णवे नमः। नमामि विष्णुं चित्तस्थमहंकारगतिं हरिम्।। चित्तस्थमीशमव्यक्तमनन्तमपराजितम्। विष्णुमीड्यमशेषेण अनादिनिधनं विभुम्।। विष्णुश्चित्तगतो यन्मे विष्णुर्बुद्धिगतश्च यत्। यच्चाहंकारगो विष्णुर्यद्वष्णुर्मयि संस्थितः।। करोति कर्मभूतोऽसौ स्थावरस्य चरस्य च। तत् पापं नाशमायातु तस्मिन्नेव हि चिन्तिते।। ध्यातो हरति यत् पापं स्वप्ने दृष्टस्तु भावनात्। तमुपेन्द्रमहं विष्णुं प्रणतार्तिहरं हरिम्।। जगत्यस्मिन्निराधारे मज्जमाने तमस्यधः। हस्तावलम्बनं विष्णु प्रणमामि परात्परम्।। सर्वेश्वरेश्वर विभो परमात्मन्नधोक्षज। हृषीकेश हृषीकेश हृषीकेश नमोऽस्तु ते।। नृसिंहानन्त गोविन्द भूतभावन केशव। दुरूक्तं दुष्कृतं ध्यातं शमयाघं नमोऽस्तु ते।। यन्मया चिन्तितं दुष्टं स्वचित्तवशवर्तिना। अकार्यं महदत्युग्रं तच्छमं नय केशव।। बह्मण्यदेव गोविन्द परमार्थपरायण। जगन्नाथ जगद्धातः पापं प्रशमयाच्युत।। यथापराह्ने सायाह्ने मध्याह्ने च तथा निशि। कायेन मनसा वाचा कृतं पापमजानता।। जानता च हृषीकेश पुण्डरीकाक्ष माधव। नामत्रयोच्चारणतः पापं यातु मम क्षयम्।। शरीरं में हृषीकेश पुण्डरीकाक्ष माधव। पापं प्रशमयाद्य त्वं वाक्कृतं मम माधव।। यद् भुंजन् यत् स्वपंस्तिष्ठन् गच्छन् जाग्रद यदास्थितः। कृतवान् पापमद्याहं कायेन मनसा गिरा।। यत् स्वल्पमपि यत् स्थूलं कुयोनिनरकावहम्। तद् यातु प्रशमं सर्वं वासुदेवानुकीर्तनात्।। परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं च यत्। तस्मिन् प्रकीर्तिते विष्णौ यत् पापं तत् प्रणश्यतु।। यत् प्राप्य न निवर्तन्ते गन्धस्पर्शादिवर्जितम्। सूरयस्तत् पदं विष्णोस्तत् सर्वं शमयत्वघम्।। (अग्नि पुराणः 172.2-98) माहात्म्यम् – पापप्रणाशनं स्तोत्रं यः पठेच्छृणुयादपि। शारीरैर्मानसैर्वाग्जैः कृतैः पापैः प्रमुच्यते।। सर्वपापग्रहादिभ्यो याति विष्णोः परं पदम्। तस्मात् पापे कृते जप्यं स्तोत्रं सर्वाघमर्दनम्।। प्रायश्चित्तमघौघानां स्तोत्रं व्रतकृते वरम्। प्रायश्चित्तैः स्तोत्रजपैर्व्रतैर्नश्यति पातकम्।। (अग्नि पुराणः 172.17-29) अर्थः पुष्कर बोलेः “सर्वव्यापी विष्णु को सदा नमस्कार है। श्री हरि विष्णु को नमस्कार है। मैं अपने चित्त में स्थित सर्वव्यापी, अहंकारशून्य श्रीहरि को नमस्कार करता हूँ। मैं अपने मानस में विराजमान अव्यक्त, अनन्त और अपराजित परमेश्वर को नमस्कार करता हूँ। सबके पूजनीय, जन्म और मरण से रहित, प्रभावशाली श्रीविष्णु को नमस्कार है। विष्णु मेरे चित्त में निवास करते हैं, विष्णु मेरी बुद्धि में विराजमान हैं, विष्णु मेरे अहंकार में प्रतिष्ठित हैं और विष्णु मुझमें भी स्थित हैं। वे श्री विष्णु ही चराचर प्राणियों के कर्मों के रूप में स्थित हैं, उनके चिंतन से मेरे पाप का विनाश हो। जो ध्यान करने पर पापों का हरण करते हैं और भावना करने से स्वप्न में दर्शन देते हैं, इन्द्र के अनुज, शरणागतजनों का दुःख दूर करने वाले उन पापापहारी श्रीविष्णु को मैं नमस्कार करता हूँ। मैं इस निराधार जगत में अज्ञानांधकार में डूबते हुए को हाथ का सहारा देने वाले परात्परस्वरूप श्रीविष्णु के सम्मुख नतमस्तक होता हूँ। सर्वेश्वरेश्वर प्रभो ! कमलनयन परमात्मन् ! हृषीकेश ! आपको नमस्कार है। इन्द्रियों के स्वामी श्रीविष्णो ! आपको नमस्कार है। नृसिंह ! अनन्तस्वरूप गोविन्द ! समस्त भूत-प्राणियों की सृष्टि करने वाले केशव ! मेरे द्वारा जो दुर्वचन कहा गया हो अथवा पापपूर्ण चिंतन किया गया हो, मेरे उस पाप का प्रशमन कीजिये, आपको नमस्कार है। केशव ! अपने मन के वश में होकर मैंने जो न करने योग्य अत्यंत उग्र पापपूर्ण चिंतन किया है, उसे शांत कीजिये। परमार्थपरायण, ब्राह्मणप्रिय गोविन्द ! अपनी मर्यादा से कभी च्युत न होने वाले जगन्नाथ ! जगत का भरण-पोषण करने वाले देवेश्वर ! मेरे पाप का विनाश कीजिये। मैंने मध्याह्न, अपराह्न, सायंकाल एवं रात्रि के समय जानते हुए अथवा अनजाने, शरीर, मन एवं वाणी के द्वारा जो पाप किया हो, ‘पुण्डरीकाक्ष’, ‘हृषीकेश’, ‘माधव’ – आपके इन तीन नामों के उच्चारण से मेरे वे सब पाप क्षीण हो जायें। कमलनयन ! लक्ष्मीपते ! इन्द्रियों के स्वामी माधव ! आज आप मेरे शरीर एवं वाणी द्वारा किये हुए पापों का हनन कीजिये। आज मैंने खाते, सोते, खड़े, चलते अथवा जागते हुए मन, वाणी और शरीर से जो भी नीच योनि एवं नरक की प्राप्ति कराने वाले सूक्ष्म अथवा स्थूल पाप किये हों, भगवान वासुदेव के नामोच्चारण से वे सब विनष्ट हो जायें। जो परब्रह्म, परम धाम और परम पवित्र हैं, उन श्रीविष्णु के संकीर्तन से मेरे पाप लुप्त हो जायें। जिसको प्राप्त होकर ज्ञानीजन पुनः लौटकर नहीं आते, जो गंध, स्पर्श आदि तन्मात्राओं से रहित है, श्रीविष्णु का वह परम पद मेरे सम्पूर्ण पापों का शमन करे।” माहात्म्यः जो मनुष्य पापों का विनाश करने वाले इस स्तोत्र का पठन अथवा श्रवण करता है, वह शरीर, मन और वाणीजनित समस्त पापों से छूट जाता है एवं समस्त पापग्रहों से मुक्त होकर श्रीविष्णु के परम पद को प्राप्त होता है। इसलिए किसी भी पाप के हो जाने पर इस स्तोत्र का जप करें। यह स्तोत्र पापसमूहों के प्रायश्चित के समान है। कृच्छ्र आदि व्रत करने वाले के लिए भी यह श्रेष्ठ है। स्तोत्र-जप और व्रतरूप प्रायश्चित से सम्पूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं। इसलिए भोग और मोक्ष की सिद्धि के लिए इनका अनुष्ठान करना चाहिए।
#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 समस्त पापनाशक स्तोत्र भगवान वेदव्यास द्वारा रचित अठारह पुराणों में से एक ‘अग्नि पुराण’ में अग्निदेव द्वारा महर्षि वशिष्ठ को दिये गये विभिन्न उपदेश हैं। इसी के अंतर्गत इस पापनाशक स्तोत्र के बारे में महात्मा पुष्कर कहते हैं कि मनुष्य चित्त की मलिनतावश चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन आदि विभिन्न पाप करता है, पर जब चित्त कुछ शुद्ध होता है तब उसे इन पापों से मुक्ति की इच्छा होती है। उस समय भगवान नारायण की दिव्य स्तुति करने से समस्त पापों का प्रायश्चित पूर्ण होता है। इसीलिए इस दिव्य स्तोत्र का नाम *'समस्त पापनाशक स्तोत्र’* है। निम्निलिखित प्रकार से भगवान नारायण की स्तुति करें- पुष्करोवाच विष्णवे विष्णवे नित्यं विष्णवे नमः। नमामि विष्णुं चित्तस्थमहंकारगतिं हरिम्।। चित्तस्थमीशमव्यक्तमनन्तमपराजितम्। विष्णुमीड्यमशेषेण अनादिनिधनं विभुम्।। विष्णुश्चित्तगतो यन्मे विष्णुर्बुद्धिगतश्च यत्। यच्चाहंकारगो विष्णुर्यद्वष्णुर्मयि संस्थितः।। करोति कर्मभूतोऽसौ स्थावरस्य चरस्य च। तत् पापं नाशमायातु तस्मिन्नेव हि चिन्तिते।। ध्यातो हरति यत् पापं स्वप्ने दृष्टस्तु भावनात्। तमुपेन्द्रमहं विष्णुं प्रणतार्तिहरं हरिम्।। जगत्यस्मिन्निराधारे मज्जमाने तमस्यधः। हस्तावलम्बनं विष्णु प्रणमामि परात्परम्।। सर्वेश्वरेश्वर विभो परमात्मन्नधोक्षज। हृषीकेश हृषीकेश हृषीकेश नमोऽस्तु ते।। नृसिंहानन्त गोविन्द भूतभावन केशव। दुरूक्तं दुष्कृतं ध्यातं शमयाघं नमोऽस्तु ते।। यन्मया चिन्तितं दुष्टं स्वचित्तवशवर्तिना। अकार्यं महदत्युग्रं तच्छमं नय केशव।। बह्मण्यदेव गोविन्द परमार्थपरायण। जगन्नाथ जगद्धातः पापं प्रशमयाच्युत।। यथापराह्ने सायाह्ने मध्याह्ने च तथा निशि। कायेन मनसा वाचा कृतं पापमजानता।। जानता च हृषीकेश पुण्डरीकाक्ष माधव। नामत्रयोच्चारणतः पापं यातु मम क्षयम्।। शरीरं में हृषीकेश पुण्डरीकाक्ष माधव। पापं प्रशमयाद्य त्वं वाक्कृतं मम माधव।। यद् भुंजन् यत् स्वपंस्तिष्ठन् गच्छन् जाग्रद यदास्थितः। कृतवान् पापमद्याहं कायेन मनसा गिरा।। यत् स्वल्पमपि यत् स्थूलं कुयोनिनरकावहम्। तद् यातु प्रशमं सर्वं वासुदेवानुकीर्तनात्।। परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं च यत्। तस्मिन् प्रकीर्तिते विष्णौ यत् पापं तत् प्रणश्यतु।। यत् प्राप्य न निवर्तन्ते गन्धस्पर्शादिवर्जितम्। सूरयस्तत् पदं विष्णोस्तत् सर्वं शमयत्वघम्।। (अग्नि पुराणः 172.2-98) माहात्म्यम् – पापप्रणाशनं स्तोत्रं यः पठेच्छृणुयादपि। शारीरैर्मानसैर्वाग्जैः कृतैः पापैः प्रमुच्यते।। सर्वपापग्रहादिभ्यो याति विष्णोः परं पदम्। तस्मात् पापे कृते जप्यं स्तोत्रं सर्वाघमर्दनम्।। प्रायश्चित्तमघौघानां स्तोत्रं व्रतकृते वरम्। प्रायश्चित्तैः स्तोत्रजपैर्व्रतैर्नश्यति पातकम्।। (अग्नि पुराणः 172.17-29) अर्थः पुष्कर बोलेः “सर्वव्यापी विष्णु को सदा नमस्कार है। श्री हरि विष्णु को नमस्कार है। मैं अपने चित्त में स्थित सर्वव्यापी, अहंकारशून्य श्रीहरि को नमस्कार करता हूँ। मैं अपने मानस में विराजमान अव्यक्त, अनन्त और अपराजित परमेश्वर को नमस्कार करता हूँ। सबके पूजनीय, जन्म और मरण से रहित, प्रभावशाली श्रीविष्णु को नमस्कार है। विष्णु मेरे चित्त में निवास करते हैं, विष्णु मेरी बुद्धि में विराजमान हैं, विष्णु मेरे अहंकार में प्रतिष्ठित हैं और विष्णु मुझमें भी स्थित हैं। वे श्री विष्णु ही चराचर प्राणियों के कर्मों के रूप में स्थित हैं, उनके चिंतन से मेरे पाप का विनाश हो। जो ध्यान करने पर पापों का हरण करते हैं और भावना करने से स्वप्न में दर्शन देते हैं, इन्द्र के अनुज, शरणागतजनों का दुःख दूर करने वाले उन पापापहारी श्रीविष्णु को मैं नमस्कार करता हूँ। मैं इस निराधार जगत में अज्ञानांधकार में डूबते हुए को हाथ का सहारा देने वाले परात्परस्वरूप श्रीविष्णु के सम्मुख नतमस्तक होता हूँ। सर्वेश्वरेश्वर प्रभो ! कमलनयन परमात्मन् ! हृषीकेश ! आपको नमस्कार है। इन्द्रियों के स्वामी श्रीविष्णो ! आपको नमस्कार है। नृसिंह ! अनन्तस्वरूप गोविन्द ! समस्त भूत-प्राणियों की सृष्टि करने वाले केशव ! मेरे द्वारा जो दुर्वचन कहा गया हो अथवा पापपूर्ण चिंतन किया गया हो, मेरे उस पाप का प्रशमन कीजिये, आपको नमस्कार है। केशव ! अपने मन के वश में होकर मैंने जो न करने योग्य अत्यंत उग्र पापपूर्ण चिंतन किया है, उसे शांत कीजिये। परमार्थपरायण, ब्राह्मणप्रिय गोविन्द ! अपनी मर्यादा से कभी च्युत न होने वाले जगन्नाथ ! जगत का भरण-पोषण करने वाले देवेश्वर ! मेरे पाप का विनाश कीजिये। मैंने मध्याह्न, अपराह्न, सायंकाल एवं रात्रि के समय जानते हुए अथवा अनजाने, शरीर, मन एवं वाणी के द्वारा जो पाप किया हो, ‘पुण्डरीकाक्ष’, ‘हृषीकेश’, ‘माधव’ – आपके इन तीन नामों के उच्चारण से मेरे वे सब पाप क्षीण हो जायें। कमलनयन ! लक्ष्मीपते ! इन्द्रियों के स्वामी माधव ! आज आप मेरे शरीर एवं वाणी द्वारा किये हुए पापों का हनन कीजिये। आज मैंने खाते, सोते, खड़े, चलते अथवा जागते हुए मन, वाणी और शरीर से जो भी नीच योनि एवं नरक की प्राप्ति कराने वाले सूक्ष्म अथवा स्थूल पाप किये हों, भगवान वासुदेव के नामोच्चारण से वे सब विनष्ट हो जायें। जो परब्रह्म, परम धाम और परम पवित्र हैं, उन श्रीविष्णु के संकीर्तन से मेरे पाप लुप्त हो जायें। जिसको प्राप्त होकर ज्ञानीजन पुनः लौटकर नहीं आते, जो गंध, स्पर्श आदि तन्मात्राओं से रहित है, श्रीविष्णु का वह परम पद मेरे सम्पूर्ण पापों का शमन करे।” माहात्म्यः जो मनुष्य पापों का विनाश करने वाले इस स्तोत्र का पठन अथवा श्रवण करता है, वह शरीर, मन और वाणीजनित समस्त पापों से छूट जाता है एवं समस्त पापग्रहों से मुक्त होकर श्रीविष्णु के परम पद को प्राप्त होता है। इसलिए किसी भी पाप के हो जाने पर इस स्तोत्र का जप करें। यह स्तोत्र पापसमूहों के प्रायश्चित के समान है। कृच्छ्र आदि व्रत करने वाले के लिए भी यह श्रेष्ठ है। स्तोत्र-जप और व्रतरूप प्रायश्चित से सम्पूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं। इसलिए भोग और मोक्ष की सिद्धि के लिए इनका अनुष्ठान करना चाहिए।
#🔯वास्तु दोष उपाय #💰धन के लिए वास्तु टिप्स🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #🔯कुंडली दोष #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 वैवाहिक जीवन मे कलह एवं तनाव व सास बहू की रोज रोज की कलह से मुक्ति के ऊपाय मित्रो मेरे पास रोज कई भाई बहनो का फोन आता है मेरे घर मे कलह बहुत हैl मेरी बहू मेरी बात नही सुनती मेरे पति मेरी बात नही मानते मेरी सासू जी का वर्ताव मेरे प्रति ठीक नही एसे ही ना जाने कितने सवाल? तो आज मै इस समस्या के सरल ऊपाय आप सभी मित्रो के बीच ला रहा हूl एक राम और सीता जी की बड़ी तस्वीर घर में लेकर आए और उसे दीवार पर लगाएं, फिर जब भी आपमें झगड़ा हो तो कम से कम 5 मिनट तक बिल्कुल चुप होकर उस तस्वीर की तरफ देखते रहें और मन में विचार करें कि हमारा विवाहित जीवन भी इन दोनों के समान आत्मसूर्पण भाव से युक्त हो – अपने आप आपकी समस्या दूर होने लगेगी । ज्यादातर औरतें अपनी सास से बैर रखती हैं अथवा उन्हें सास ही ऐसी मिलती है कि सास ही उससे बैर रखती है। अर्थात् औरत ही औरत की शत्रु बन जाती हैं। इस परिस्थिति में पुरुष त्रिशंकु बन जाता है और किसकी तरफ जाए यह सोचकर परेशान हो जाता है इस परिस्थति से बचने के लिए बृहस्पतिवार के दिन भोजपत्र पर गायत्री मंत्र चंदन से लिखें और उसके 2 ताबीज बनाकर पीले कपड़े में एक अपनी माता के और एक पत्नी के दांयी भुजा पर बांध दें । रोज एक तांबे के लोटे में जल भरें और पहले अपनी माता के हाथ से तथा बाद में पत्नी के हाथ से उसे स्पर्श कराकर तुलसी के पौधे में डाल दें। *रविवार को नहीं डालें* । रोज एक रोटी में गुड़ और चने डालकर शाम को अपनी माता व पत्नी से स्पर्श कराकर शाम को गाय को दें। रोज दो तुलसी के पते पानी से धोकर पूजा में रखें और 21 बार गायत्री मंत्र पढकर एक पता माता को व एक पत्नी को खिलाए । सास बहू की कलह से परेशान हैं तो रोज सुबह अपने मटके में जहां पीने का पानी हो, उमसें 2 बूंद गंगाजल गायत्री मंत्र पढ़ते हुए डाल दे पति पत्नी में कलेश दूर करने के लिए और वैवाहिक जीवन सुखी बनाने के लिए आपको चाहिए कि आप श्री गणेश जी और आदि शक्ति दुर्गा देवी की उपासना करे. सोते समय पूर्व की और सिर रखकर सोने से तनाव में कमी आती है. ऐसा करने से आपमें सकारात्मक उर्जा का संचार होता है. चींटियों को शक्कर डालने से समस्याओं का निवारण होता है. भोजपत्र पर लाल कलम से पति का नाम लिखकर तथा “हं हनुमंते नमः” का 21 बार उच्चारण करते हुए उस पत्र को घर के किसी कोने में रख दें ऎसा करने से धीरे धीरे दांपत्य जीवन में उत्पन्न कलहपूर्ण वातावरण दूर हो जाएगा. हनुमान मंदिर में भगवान को चोला चढाएं एवं सिंदूर चढाएं ऎसा करने से परेशानियों से राहत प्राप्त होगी. ऎसा प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार के दिन करें. गेंदे का फूल पर कुंकुम लगाकर उसे किसी देव स्थान में मूर्ति के समक्ष रखने से रिश्तों में आया तनाव एवं मतभेद दूर होते हैं. छोटी कन्या को मीठी वस्तु खिलाने एवं भेंट इत्यादि देने से आपके संकटों का निवारण होता है. यदि पति-पत्नी के मध्य तनाव अधिक बढ़ जाए तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में अपने सर के ऊपर 3 बार घुमाकर फेंक देंने से तनाव दूर होगा. पांच गोमती चक्र को लाल सिंदूर की डिब्बी में घर में रखने से दाम्पत्य जीवन में सुख-शांती रहती है. इसके अतिरिक्त प्रात: काल दैनिक कार्यों से निवृत होकर साफ - स्वच्छ वस्त्र पहनकर मंदिर या घर पर शिवलिंग के सम्मुख पूजा करें एवं निम्न मंत्र *“ऊँ नम: सम्भवाय च मयो भवाय च नम:। शंकराय च नम: शिवाय च शिवतराय च।।:”* का जाप करना चाहिए तत्पश्चात शिवलिंग पर जलाभिषेक करें ऎसा करने से आपको वैवाहिक जीवन में सुख एवं शाति प्राप्त होगी. घर मे उत्पन्न कलह क्लेश को समाप्त करने हेतु तथा पति- पत्नी के बीच वैमनस्यता को दूर करने के लिए चाहिए कि रात को सोते समय पत्नी पति के तकिये में सिंदूर की एक पुड़िया और पति पत्नी के तकिये में कपूर रखे. प्रातः काल उठकर सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर फेंक दें तथा कपूर को निकाल कर उस कमरे जला दें. ऎसा करने से भी लाभ मिलता है. ससुराल में सुखी रहने के लिए कन्या अपने हाथ से हल्दी की साबुत गांठें, पीतल का एक टुकड़ा और थोड़ा-सा गुड़ ससुराल की दिशा की ओर फेंक दें ऎसा करने से ससुराल में सुख एवं शांति का वास रहता है ।
#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 वैवाहिक जीवन मे कलह एवं तनाव व सास बहू की रोज रोज की कलह से मुक्ति के ऊपाय मित्रो मेरे पास रोज कई भाई बहनो का फोन आता है मेरे घर मे कलह बहुत हैl मेरी बहू मेरी बात नही सुनती मेरे पति मेरी बात नही मानते मेरी सासू जी का वर्ताव मेरे प्रति ठीक नही एसे ही ना जाने कितने सवाल? तो आज मै इस समस्या के सरल ऊपाय आप सभी मित्रो के बीच ला रहा हूl एक राम और सीता जी की बड़ी तस्वीर घर में लेकर आए और उसे दीवार पर लगाएं, फिर जब भी आपमें झगड़ा हो तो कम से कम 5 मिनट तक बिल्कुल चुप होकर उस तस्वीर की तरफ देखते रहें और मन में विचार करें कि हमारा विवाहित जीवन भी इन दोनों के समान आत्मसूर्पण भाव से युक्त हो – अपने आप आपकी समस्या दूर होने लगेगी । ज्यादातर औरतें अपनी सास से बैर रखती हैं अथवा उन्हें सास ही ऐसी मिलती है कि सास ही उससे बैर रखती है। अर्थात् औरत ही औरत की शत्रु बन जाती हैं। इस परिस्थिति में पुरुष त्रिशंकु बन जाता है और किसकी तरफ जाए यह सोचकर परेशान हो जाता है इस परिस्थति से बचने के लिए बृहस्पतिवार के दिन भोजपत्र पर गायत्री मंत्र चंदन से लिखें और उसके 2 ताबीज बनाकर पीले कपड़े में एक अपनी माता के और एक पत्नी के दांयी भुजा पर बांध दें । रोज एक तांबे के लोटे में जल भरें और पहले अपनी माता के हाथ से तथा बाद में पत्नी के हाथ से उसे स्पर्श कराकर तुलसी के पौधे में डाल दें। *रविवार को नहीं डालें* । रोज एक रोटी में गुड़ और चने डालकर शाम को अपनी माता व पत्नी से स्पर्श कराकर शाम को गाय को दें। रोज दो तुलसी के पते पानी से धोकर पूजा में रखें और 21 बार गायत्री मंत्र पढकर एक पता माता को व एक पत्नी को खिलाए । सास बहू की कलह से परेशान हैं तो रोज सुबह अपने मटके में जहां पीने का पानी हो, उमसें 2 बूंद गंगाजल गायत्री मंत्र पढ़ते हुए डाल दे पति पत्नी में कलेश दूर करने के लिए और वैवाहिक जीवन सुखी बनाने के लिए आपको चाहिए कि आप श्री गणेश जी और आदि शक्ति दुर्गा देवी की उपासना करे. सोते समय पूर्व की और सिर रखकर सोने से तनाव में कमी आती है. ऐसा करने से आपमें सकारात्मक उर्जा का संचार होता है. चींटियों को शक्कर डालने से समस्याओं का निवारण होता है. भोजपत्र पर लाल कलम से पति का नाम लिखकर तथा “हं हनुमंते नमः” का 21 बार उच्चारण करते हुए उस पत्र को घर के किसी कोने में रख दें ऎसा करने से धीरे धीरे दांपत्य जीवन में उत्पन्न कलहपूर्ण वातावरण दूर हो जाएगा. हनुमान मंदिर में भगवान को चोला चढाएं एवं सिंदूर चढाएं ऎसा करने से परेशानियों से राहत प्राप्त होगी. ऎसा प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार के दिन करें. गेंदे का फूल पर कुंकुम लगाकर उसे किसी देव स्थान में मूर्ति के समक्ष रखने से रिश्तों में आया तनाव एवं मतभेद दूर होते हैं. छोटी कन्या को मीठी वस्तु खिलाने एवं भेंट इत्यादि देने से आपके संकटों का निवारण होता है. यदि पति-पत्नी के मध्य तनाव अधिक बढ़ जाए तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में अपने सर के ऊपर 3 बार घुमाकर फेंक देंने से तनाव दूर होगा. पांच गोमती चक्र को लाल सिंदूर की डिब्बी में घर में रखने से दाम्पत्य जीवन में सुख-शांती रहती है. इसके अतिरिक्त प्रात: काल दैनिक कार्यों से निवृत होकर साफ - स्वच्छ वस्त्र पहनकर मंदिर या घर पर शिवलिंग के सम्मुख पूजा करें एवं निम्न मंत्र *“ऊँ नम: सम्भवाय च मयो भवाय च नम:। शंकराय च नम: शिवाय च शिवतराय च।।:”* का जाप करना चाहिए तत्पश्चात शिवलिंग पर जलाभिषेक करें ऎसा करने से आपको वैवाहिक जीवन में सुख एवं शाति प्राप्त होगी. घर मे उत्पन्न कलह क्लेश को समाप्त करने हेतु तथा पति- पत्नी के बीच वैमनस्यता को दूर करने के लिए चाहिए कि रात को सोते समय पत्नी पति के तकिये में सिंदूर की एक पुड़िया और पति पत्नी के तकिये में कपूर रखे. प्रातः काल उठकर सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर फेंक दें तथा कपूर को निकाल कर उस कमरे जला दें. ऎसा करने से भी लाभ मिलता है. ससुराल में सुखी रहने के लिए कन्या अपने हाथ से हल्दी की साबुत गांठें, पीतल का एक टुकड़ा और थोड़ा-सा गुड़ ससुराल की दिशा की ओर फेंक दें ऎसा करने से ससुराल में सुख एवं शांति का वास रहता है ।
#🔯वास्तु दोष उपाय #💰धन के लिए वास्तु टिप्स🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯कुंडली दोष #✡️सितारों की चाल🌠 नहाने के पानी का ये प्राचीन उपाय करने से दूर हो सकती है दरिद्रता नहाने के पानी का ये प्राचीन उपाय करने से दूर हो सकती है दरिद्रता : नहाने से स्वास्थ्य लाभ और पवित्रता मिलती है। सभी प्रकार के पूजन कर्म आदि नहाने के बाद ही किए जाते हैं, इस कारण स्नान का काफी अधिक महत्व है। पुराने समय में सभी ऋषि-मुनि नदी में नहाते समय सूर्य को जल अर्पित करते थे और मंत्रों का जप करते थे। इस प्रकार के उपायों से अक्षय पुण्य मिलता है और पाप नष्ट होते हैं। ज्योतिष में धन संबंधी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, जो अलग-अलग समय परकिए जाते हैं। नहाते समय करने के लिए एक उपाय बताया गया है। इस उपाय को सही विधि से हर रोज किया जाए तो निकट भविष्य में सकारात्मक फल प्राप्त हो सकते हैं। जानिए उपाय की विधि… प्रतिदिन नहाने से पहले बाल्टी में पानी भरें और इसके बाद अपनी तर्जनी उंगली (इंडेक्स फिंगर) से पानी पर त्रिभुज का चिह्न बनाएं। त्रिभुज बनाने के बाद एक अक्षर का बीज मंत्र ‘ह्रीं’ उसी चिह्न के बीच वाले स्थान पर लिखें। साथ ही, अपने इष्ट देवी-देवता से परेशानियों दूर करने की प्रार्थना करें। नहाते समय करें मंत्रों का जप शास्त्रों में दिन के सभी आवश्यक कार्यों के लिए अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं। नहाते समय भी हमें मंत्र जप करना चाहिए। स्नान करते समय किसी मंत्र का पाठ किया जा सकता है या कीर्तन या भजन या भगवान का नाम लिया जा सकता है। ऐसा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। नहाते समय इस मंत्र का जप करना श्रेष्ठ रहता है… मंत्र: गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।। नदी में नहाते समय पानी पर ऊँ लिखें यदि कोई व्यक्ति किसी नदी में स्नान करता है तो उसे पानी पर ऊँ लिखकर पानी में तुरंत डुबकी मार लेना चाहिए। ऐसा करने से नदी स्नान का पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है। इसके अलावा आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा भी समाप्त हो जाती है। इस उपाय से ग्रह दोष भी शांत होते हैं। यदि आपके ऊपर किसी की बुरी नजर है तो वह भी उतर जाती है। अगर आप शुल्क सहित अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करना चाहते हो तो संपर्क करे कुंडली शुल्क 351 मो न 8708198423
#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 नहाने के पानी का ये प्राचीन उपाय करने से दूर हो सकती है दरिद्रता नहाने के पानी का ये प्राचीन उपाय करने से दूर हो सकती है दरिद्रता : नहाने से स्वास्थ्य लाभ और पवित्रता मिलती है। सभी प्रकार के पूजन कर्म आदि नहाने के बाद ही किए जाते हैं, इस कारण स्नान का काफी अधिक महत्व है। पुराने समय में सभी ऋषि-मुनि नदी में नहाते समय सूर्य को जल अर्पित करते थे और मंत्रों का जप करते थे। इस प्रकार के उपायों से अक्षय पुण्य मिलता है और पाप नष्ट होते हैं। ज्योतिष में धन संबंधी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, जो अलग-अलग समय परकिए जाते हैं। नहाते समय करने के लिए एक उपाय बताया गया है। इस उपाय को सही विधि से हर रोज किया जाए तो निकट भविष्य में सकारात्मक फल प्राप्त हो सकते हैं। जानिए उपाय की विधि… प्रतिदिन नहाने से पहले बाल्टी में पानी भरें और इसके बाद अपनी तर्जनी उंगली (इंडेक्स फिंगर) से पानी पर त्रिभुज का चिह्न बनाएं। त्रिभुज बनाने के बाद एक अक्षर का बीज मंत्र ‘ह्रीं’ उसी चिह्न के बीच वाले स्थान पर लिखें। साथ ही, अपने इष्ट देवी-देवता से परेशानियों दूर करने की प्रार्थना करें। नहाते समय करें मंत्रों का जप शास्त्रों में दिन के सभी आवश्यक कार्यों के लिए अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं। नहाते समय भी हमें मंत्र जप करना चाहिए। स्नान करते समय किसी मंत्र का पाठ किया जा सकता है या कीर्तन या भजन या भगवान का नाम लिया जा सकता है। ऐसा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। नहाते समय इस मंत्र का जप करना श्रेष्ठ रहता है… मंत्र: गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।। नदी में नहाते समय पानी पर ऊँ लिखें यदि कोई व्यक्ति किसी नदी में स्नान करता है तो उसे पानी पर ऊँ लिखकर पानी में तुरंत डुबकी मार लेना चाहिए। ऐसा करने से नदी स्नान का पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है। इसके अलावा आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा भी समाप्त हो जाती है। इस उपाय से ग्रह दोष भी शांत होते हैं। यदि आपके ऊपर किसी की बुरी नजर है तो वह भी उतर जाती है। अगर आप शुल्क सहित अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करना चाहते हो तो संपर्क करे कुंडली शुल्क 351 मो न 8708198423
#🔯वास्तु दोष उपाय #💰धन के लिए वास्तु टिप्स🔯 #✡️सितारों की चाल🌠 #🔯कुंडली दोष #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 जन्म कुण्डली (Birth Chart in Jyotish) या गोचर में जब ग्रहों का शुभ फल प्राप्त न हो रहा हों या फिर पाप ग्रहों के प्रभाव में होने के कारण जब ग्रह व्यक्ति के लिये अनिष्ट या अरिष्ट का कारण बन रहे हों तो ग्रहों से संबन्धित उपाय (Remedies related to Planets Through Astrology) करने से व्यक्ति के कष्टों में कमी की संभावनाएं बनती है. जब किसी व्यक्ति का स्वयं का जन्म या फिर उसकी संतान का जन्म अशुभ योगों में अर्थात गण्डमूळ, गण्डान्त, अभुक्तमूल आदि अशुभ नक्षत्रों (Gandmoola, Gandant, Abhuktamoola as inauspicious Nakshatras at the time of birth) में हुआ हों तो व्यक्ति के कुशलता व आयु वृ्द्धि के लिये शान्ति उपाय किये जाते है. व्यक्ति के जीवन की घटनाओं को ग्रह विशेष रुप से प्रभावित करते है. जैसे:- जब कोई व्यक्ति बहुत मेहनत कर रहा है. परन्तु योग्य होने पर भी उसे पदोन्नति की प्राप्ति नहीं हो रही है तो इस स्थिति में एकादश भाव के स्वामी ग्रह के उपाय करने से या फिर मंगल के उपाय (Remedies for Mars) करने से मनोवांछित फल प्राप्त होने की संभावना बनती है. इस प्रकार कारक ग्रह के उपाय करने पर संबन्धित उद्धेश्य की प्राप्ति होती है. आईये देखे की कुण्डली या गोचर में जब मंगल से अनिष्ट (remedies for Mars during transit) होने की संभावना हों तो कौन से उपाय किये जा सकते है. 1. मंगल की वस्तुओं से स्नान (Remedy for Mars Through Bathing) मंगल से संबन्धित वस्तुओं से स्नान करने पर इसके अशुभ प्रभाव को दूर किया जा सकता है. कुण्डली में मांगलिक योग (Manglik Yoga in Astrological Chart) के लिये भी मंगल स्नान किया जा सकता है. इस स्नान के लिये पानी में बेलगीरी (Boil belgiri in a water and mix in the bathing water as a Remedy for Mars) डाल कर उबाल लिया जाता है. उबले हुए पानी व वस्तु को सामान्य जल में मिलाकर स्नान किया जाता है. मंगल की वस्तुओं से स्नान करने पर वस्तु का प्रभाव व्यक्ति पर प्रत्यक्ष रुप से पडता है. यह उपाय शुभ मुहूर्त समय पर करने पर उतम फल प्राप्त होते है (perform remedy in the auspicious Muhurtha). यह स्नान करते समय मंगल मंत्र का ध्यान करना चाहिए. 2. मंगल की वस्तुओं का दान (Astrological Remedy for Mars Through Donation) जब व्यक्ति मंगल की वस्तुओं से स्नान न कर पायें तो उसके लिये वस्तुओं का दान करना लाभकारी रहता है. मंगल की वस्तुओं में सभी लाल रंग की वस्तुएं, गुड्, लाल फूल, गेहूं, लाल दाल का दान करने से मंगल की शुभता में वृ्द्धि होती है (donate red color products such as red flowers, red dal and wheat for auspiciousness of Mars) . दान का कार्य जिस व्यक्ति के लिये किया जा रहा है उस व्यक्ति को अगर संभव हों तो अपने हाथों से दान करना चाहिए. इस कार्य को करने से पहले अपने बडों का आशिर्वाद लेना पर उपाय के फलों में वृ्द्धि होती है. यह दान मंगलवार के दिन करना चाहिए. तथा दान की वस्तुओं को लेते समय इस कार्य पर हो रहे धन व्यय को लेकर परेशान नहीं होना चाहिए. अपनी खुशी व सामर्थय के अनुसार ही दान करना चाहिए. व इस कार्य को अपने सम्मान का विषय नहीं बनाना चाहिए. दूसरों के सामने इसका बार-बार वर्णन करने पर विपरीत फलों की प्राप्ति की संभावनाएं बनती है. 3. हनुमान चालीसा का पाठ (Recitation of Hanumana Chalisa for Jyotish Remedy for Mars) मंगल ग्रह के उपायों में हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है. यह पाठ करने पर मंगल ग्रह की शान्ति होती है (Recite Hanumana Chalisa for Mars positivity) . तथा इसके अशुभ प्रभाव को दूर किया जा सकता है. मंगलवार के दिन इस पाठ को करने से मंगल के अनिष्ट में कमी होती है. हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले व्यक्ति को इस दिन अपने मन में बुरे विचार नहीं लाने चाहिए. क्रोध, वाद-विवाद से इस दिन दूर ही रहना चाहिए (Do not involve in the disputes on the day of performing Astrological Remedy for Mars). तथा वैवाहिक जीवन में संयम से काम लेना उतम फल देता है. 4. मंगल के मंत्र का जाप करना (Mars Astrological Remedy by Chanting Mantra) ग्रहों का मंत्र जाप करने से भी ग्रह की शान्ति की जा सकती है. मंगल ग्रह की शान्ति के लिये " ऊँ भौ भौमाय नम:" का जाप किया जा सकता है. राम नाम का पाठ करने पर भी मंगल की अशुभता में कमी होती है. इस मंत्र का जाप प्रतिदिन या फिर प्रत्येक मंगलवार के दिन एक माला अर्थात 108 बार या अधिक किया जा सकता है (Chanting should be done for 108 times or more for the auspiciousness of Mars) . मंत्र का पूर्ण उच्चारण करना चाहिए. 5. मंगल यन्त्र धारण करना (Remedy by Establishment of Mars Yantra) मंगल के उपायों कि श्रेणी में अगला उपाय मंगल यन्त्र (Mangal Yantra) निर्माण व इसकी स्थापना का है. मंगल यन्त्र (Mangal Yantra) को तांबे के ताम्र पत्र पर या फिर भोज पत्र पर तथा विशेष परिस्थिति में इसे कागज पर भी बनाया जा सकता है. इनमें से किसी वस्तु पर इस यन्त्र को बनाने के लिये अनार की कलम व लाल चंदन, केसर, कस्तूरी की स्याही से इसका निर्माण किया जाता है (use pomegranate quill, red sandalwood, saffron and musk for making this Yantra). यन्त्र निर्माण मंगलवार के दिन करना शुभ रहता है. मंगल यन्त्र के नौ खानों में निम्न अंक स्थापित किये जाते है. मंगल यन्त्र निम्न प्रकार का होता है. मंगल यन्त्र की संख्याऔं का योग किसी भी प्रकार किया जाये 21 ही आता है (the total sum of this Yantra is 21 from every side). विशेष परिस्थितियों में इस यन्त्र को बनवाकर धारण भी किया जा सकता है. अन्यथा इसे व्यवसायिक स्थल में इसे लगाने से शत्रुओं पर विजय प्राप्ति में सहयोग प्राप्त होता है.
#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #💰आर्थिक समस्याओं का समाधान🔯 जन्म कुण्डली (Birth Chart in Jyotish) या गोचर में जब ग्रहों का शुभ फल प्राप्त न हो रहा हों या फिर पाप ग्रहों के प्रभाव में होने के कारण जब ग्रह व्यक्ति के लिये अनिष्ट या अरिष्ट का कारण बन रहे हों तो ग्रहों से संबन्धित उपाय (Remedies related to Planets Through Astrology) करने से व्यक्ति के कष्टों में कमी की संभावनाएं बनती है. जब किसी व्यक्ति का स्वयं का जन्म या फिर उसकी संतान का जन्म अशुभ योगों में अर्थात गण्डमूळ, गण्डान्त, अभुक्तमूल आदि अशुभ नक्षत्रों (Gandmoola, Gandant, Abhuktamoola as inauspicious Nakshatras at the time of birth) में हुआ हों तो व्यक्ति के कुशलता व आयु वृ्द्धि के लिये शान्ति उपाय किये जाते है. व्यक्ति के जीवन की घटनाओं को ग्रह विशेष रुप से प्रभावित करते है. जैसे:- जब कोई व्यक्ति बहुत मेहनत कर रहा है. परन्तु योग्य होने पर भी उसे पदोन्नति की प्राप्ति नहीं हो रही है तो इस स्थिति में एकादश भाव के स्वामी ग्रह के उपाय करने से या फिर मंगल के उपाय (Remedies for Mars) करने से मनोवांछित फल प्राप्त होने की संभावना बनती है. इस प्रकार कारक ग्रह के उपाय करने पर संबन्धित उद्धेश्य की प्राप्ति होती है. आईये देखे की कुण्डली या गोचर में जब मंगल से अनिष्ट (remedies for Mars during transit) होने की संभावना हों तो कौन से उपाय किये जा सकते है. 1. मंगल की वस्तुओं से स्नान (Remedy for Mars Through Bathing) मंगल से संबन्धित वस्तुओं से स्नान करने पर इसके अशुभ प्रभाव को दूर किया जा सकता है. कुण्डली में मांगलिक योग (Manglik Yoga in Astrological Chart) के लिये भी मंगल स्नान किया जा सकता है. इस स्नान के लिये पानी में बेलगीरी (Boil belgiri in a water and mix in the bathing water as a Remedy for Mars) डाल कर उबाल लिया जाता है. उबले हुए पानी व वस्तु को सामान्य जल में मिलाकर स्नान किया जाता है. मंगल की वस्तुओं से स्नान करने पर वस्तु का प्रभाव व्यक्ति पर प्रत्यक्ष रुप से पडता है. यह उपाय शुभ मुहूर्त समय पर करने पर उतम फल प्राप्त होते है (perform remedy in the auspicious Muhurtha). यह स्नान करते समय मंगल मंत्र का ध्यान करना चाहिए. 2. मंगल की वस्तुओं का दान (Astrological Remedy for Mars Through Donation) जब व्यक्ति मंगल की वस्तुओं से स्नान न कर पायें तो उसके लिये वस्तुओं का दान करना लाभकारी रहता है. मंगल की वस्तुओं में सभी लाल रंग की वस्तुएं, गुड्, लाल फूल, गेहूं, लाल दाल का दान करने से मंगल की शुभता में वृ्द्धि होती है (donate red color products such as red flowers, red dal and wheat for auspiciousness of Mars) . दान का कार्य जिस व्यक्ति के लिये किया जा रहा है उस व्यक्ति को अगर संभव हों तो अपने हाथों से दान करना चाहिए. इस कार्य को करने से पहले अपने बडों का आशिर्वाद लेना पर उपाय के फलों में वृ्द्धि होती है. यह दान मंगलवार के दिन करना चाहिए. तथा दान की वस्तुओं को लेते समय इस कार्य पर हो रहे धन व्यय को लेकर परेशान नहीं होना चाहिए. अपनी खुशी व सामर्थय के अनुसार ही दान करना चाहिए. व इस कार्य को अपने सम्मान का विषय नहीं बनाना चाहिए. दूसरों के सामने इसका बार-बार वर्णन करने पर विपरीत फलों की प्राप्ति की संभावनाएं बनती है. 3. हनुमान चालीसा का पाठ (Recitation of Hanumana Chalisa for Jyotish Remedy for Mars) मंगल ग्रह के उपायों में हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है. यह पाठ करने पर मंगल ग्रह की शान्ति होती है (Recite Hanumana Chalisa for Mars positivity) . तथा इसके अशुभ प्रभाव को दूर किया जा सकता है. मंगलवार के दिन इस पाठ को करने से मंगल के अनिष्ट में कमी होती है. हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले व्यक्ति को इस दिन अपने मन में बुरे विचार नहीं लाने चाहिए. क्रोध, वाद-विवाद से इस दिन दूर ही रहना चाहिए (Do not involve in the disputes on the day of performing Astrological Remedy for Mars). तथा वैवाहिक जीवन में संयम से काम लेना उतम फल देता है. 4. मंगल के मंत्र का जाप करना (Mars Astrological Remedy by Chanting Mantra) ग्रहों का मंत्र जाप करने से भी ग्रह की शान्ति की जा सकती है. मंगल ग्रह की शान्ति के लिये " ऊँ भौ भौमाय नम:" का जाप किया जा सकता है. राम नाम का पाठ करने पर भी मंगल की अशुभता में कमी होती है. इस मंत्र का जाप प्रतिदिन या फिर प्रत्येक मंगलवार के दिन एक माला अर्थात 108 बार या अधिक किया जा सकता है (Chanting should be done for 108 times or more for the auspiciousness of Mars) . मंत्र का पूर्ण उच्चारण करना चाहिए. 5. मंगल यन्त्र धारण करना (Remedy by Establishment of Mars Yantra) मंगल के उपायों कि श्रेणी में अगला उपाय मंगल यन्त्र (Mangal Yantra) निर्माण व इसकी स्थापना का है. मंगल यन्त्र (Mangal Yantra) को तांबे के ताम्र पत्र पर या फिर भोज पत्र पर तथा विशेष परिस्थिति में इसे कागज पर भी बनाया जा सकता है. इनमें से किसी वस्तु पर इस यन्त्र को बनाने के लिये अनार की कलम व लाल चंदन, केसर, कस्तूरी की स्याही से इसका निर्माण किया जाता है (use pomegranate quill, red sandalwood, saffron and musk for making this Yantra). यन्त्र निर्माण मंगलवार के दिन करना शुभ रहता है. मंगल यन्त्र के नौ खानों में निम्न अंक स्थापित किये जाते है. मंगल यन्त्र निम्न प्रकार का होता है. मंगल यन्त्र की संख्याऔं का योग किसी भी प्रकार किया जाये 21 ही आता है (the total sum of this Yantra is 21 from every side). विशेष परिस्थितियों में इस यन्त्र को बनवाकर धारण भी किया जा सकता है. अन्यथा इसे व्यवसायिक स्थल में इसे लगाने से शत्रुओं पर विजय प्राप्ति में सहयोग प्राप्त होता है.