एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
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#कुण्डली #वृशिचक_राशि #विवाह_सम्बंधित #vastu #कालसर्पदोष #पितृदोष #कुण्डली #समस्या #समस्यासमाधान #विषयोग #मांगलिक दोष##धार्मिक#हरियाणा# अनुष्ठान#बहल#। यह है प्रमेश जी पांडे चौथी बार सर्व दोष निवारण महाअनुष्ठान में आ रहे हैं और वह भी झारखंड से चलकर बहल हरियाणा अब आगे का आप सोचे कि ऐसा क्या फायदा मिला है जो इतनी दूर से चलकर अनुष्ठान में आ रहे हैं वह भी हर अनुष्ठान में #🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
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#कुण्डली #वृशिचक_राशि #विवाह_सम्बंधित #vastu #कालसर्पदोष #पितृदोष #कुण्डली #समस्या #समस्यासमाधान #विषयोग #मांगलिक दोष##धार्मिक#हरियाणा# अनुष्ठान#बहल#। यह है प्रमेश जी पांडे चौथी बार सर्व दोष निवारण महाअनुष्ठान में आ रहे हैं और वह भी झारखंड से चलकर बहल हरियाणा अब आगे का आप सोचे कि ऐसा क्या फायदा मिला है जो इतनी दूर से चलकर अनुष्ठान में आ रहे हैं वह भी हर अनुष्ठान में #📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
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🔯ज्योतिष - हिंदुत्व की लडाई इसलिए भी सबसे मुश्किल है , क्योंकि इसमें सबसे पहले हिंदू से ही লভনা এভনা ট.!! हिंदुत्व की लडाई इसलिए भी सबसे मुश्किल है , क्योंकि इसमें सबसे पहले हिंदू से ही লভনা এভনা ট.!! - ShareChat
#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
📕लाल किताब उपाय🔯 - हिंदुत्व की लडाई इसलिए भी सबसे मुश्किल है , क्योंकि इसमें सबसे पहले हिंदू से ही লভনা এভনা ট.!! हिंदुत्व की लडाई इसलिए भी सबसे मुश्किल है , क्योंकि इसमें सबसे पहले हिंदू से ही লভনা এভনা ট.!! - ShareChat
#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपायपरीक्षा में अच्छे नंबर कैसे पाएँ परीक्षा का समय नजदीक आते ही युवाओं के दिल की धड़कने बढ़ने लगती है। कितनी ही मेहनत की हो, नर्वस हो जाना आम बात है। कई किशोर तो परीक्षा हॉल में घुसते ही सब भूल जाते हैं। ऐसे में कुछ ज्योति‍षीय उपाय कारगर हो सकते हैं- पढ़ाई के साथ इन्हें भी अपनाएँ और देखें चमत्कार.... * परीक्षा का संबंध स्मरणशक्ति से है, जो बुध की देन है। बुध को मजबूत करने के लिए खूब सलाद और हरी सब्जियाँ खाएँ। गणेश जी के दर्शन करें। गाय को हरी घास खिलाएँ। कुंडली की स्थिति के अनुसार पन्ना पहनने से लाभ होता है। शंखपुष्पी का सेवन भी लाभ देता है। * परीक्षा भवन में मानसिक संतुलन का कारक है चंद्रमा! चंद्रमा का मजबूत होना आत्मविश्वास बढ़ाता है। सफेद वस्तु का सेवन करने से, दान करने से, शिव के दर्शन व शिव चालीसा पढ़ने से, कनिष्ठा ऊँगली में चाँदी का छल्ला पहनने से तथा चाँदी के गिलास में पानी पीने से चंद्र मजबूत होता है। कुंडली में चंद्र की स्थितिनुसार मोती पहनने से लाभ होता है। कुछ अन्य उपाय : * तुलसी के पत्तों को मिश्री के साथ पीसकर प्रतिदिन उसका रस पीने से स्मरणशक्ति बढ़ती है। * इमली के पत्तों को पुष्य नक्षत्र के दिन अपनी पुस्तक में रखें। * पुष्य नक्षत्र में 'योगेश्वर श्रीकृष्ण प्रसन्नो भव:' मंत्र को सुनहरी कैप वाले लाल रंग, लाल स्याही के पेन से 31 बार लिखें, 108 बार जाप करके अपने साथ ले जाएँ। * परीक्षा भवन में जाने से पहले 'गुरु ग्रह गए पढ़न रघुराई। अल्पकाल विद्या सब आई।' चौपाई का 108 बार जाप करने से सफलता मिलती है। * पढ़ाई में मन न लगने पर मंगलवार के‍ दिन मसूर की लाल दाल लाल कपड़े की थैली में डालकर पॉकेट में रखें, पढ़ने में रुचि जागेगी। * 'ऊँ ह्रीं अर्हंणमो क्रुद्ध बुद्धिणं' या 'वद्‍ वद्‍ वागवादिनी नम:' मंत्र का 108 बार लगातार 14 दिन तक जाप करें तथा सरस्वती का ध्यान कर उन्हें लाल पुष्प व लाल वस्त्र चढ़ाएँ... सफलता निश्चित मिलती है। यह कार्य वसंत‍ पंचमी से प्रारंभ करें या किसी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से प्रारंभ करें। * गुरु के सान्निध्य में बैठे, माता-पिता की सेवा करें, गाय को गुड़-चने की दाल खिलाएँ तथा इष्‍ट का ध्यान करें। विशेष नोट : इन उपायों के साथ मेहनत करना भी जरूरी है। #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
#📕लाल किताब उपाय🔯 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी परीक्षा में अच्छे नंबर कैसे पाएँ परीक्षा का समय नजदीक आते ही युवाओं के दिल की धड़कने बढ़ने लगती है। कितनी ही मेहनत की हो, नर्वस हो जाना आम बात है। कई किशोर तो परीक्षा हॉल में घुसते ही सब भूल जाते हैं। ऐसे में कुछ ज्योति‍षीय उपाय कारगर हो सकते हैं- पढ़ाई के साथ इन्हें भी अपनाएँ और देखें चमत्कार.... * परीक्षा का संबंध स्मरणशक्ति से है, जो बुध की देन है। बुध को मजबूत करने के लिए खूब सलाद और हरी सब्जियाँ खाएँ। गणेश जी के दर्शन करें। गाय को हरी घास खिलाएँ। कुंडली की स्थिति के अनुसार पन्ना पहनने से लाभ होता है। शंखपुष्पी का सेवन भी लाभ देता है। * परीक्षा भवन में मानसिक संतुलन का कारक है चंद्रमा! चंद्रमा का मजबूत होना आत्मविश्वास बढ़ाता है। सफेद वस्तु का सेवन करने से, दान करने से, शिव के दर्शन व शिव चालीसा पढ़ने से, कनिष्ठा ऊँगली में चाँदी का छल्ला पहनने से तथा चाँदी के गिलास में पानी पीने से चंद्र मजबूत होता है। कुंडली में चंद्र की स्थितिनुसार मोती पहनने से लाभ होता है। कुछ अन्य उपाय : * तुलसी के पत्तों को मिश्री के साथ पीसकर प्रतिदिन उसका रस पीने से स्मरणशक्ति बढ़ती है। * इमली के पत्तों को पुष्य नक्षत्र के दिन अपनी पुस्तक में रखें। * पुष्य नक्षत्र में 'योगेश्वर श्रीकृष्ण प्रसन्नो भव:' मंत्र को सुनहरी कैप वाले लाल रंग, लाल स्याही के पेन से 31 बार लिखें, 108 बार जाप करके अपने साथ ले जाएँ। * परीक्षा भवन में जाने से पहले 'गुरु ग्रह गए पढ़न रघुराई। अल्पकाल विद्या सब आई।' चौपाई का 108 बार जाप करने से सफलता मिलती है। * पढ़ाई में मन न लगने पर मंगलवार के‍ दिन मसूर की लाल दाल लाल कपड़े की थैली में डालकर पॉकेट में रखें, पढ़ने में रुचि जागेगी। * 'ऊँ ह्रीं अर्हंणमो क्रुद्ध बुद्धिणं' या 'वद्‍ वद्‍ वागवादिनी नम:' मंत्र का 108 बार लगातार 14 दिन तक जाप करें तथा सरस्वती का ध्यान कर उन्हें लाल पुष्प व लाल वस्त्र चढ़ाएँ... सफलता निश्चित मिलती है। यह कार्य वसंत‍ पंचमी से प्रारंभ करें या किसी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से प्रारंभ करें। * गुरु के सान्निध्य में बैठे, माता-पिता की सेवा करें, गाय को गुड़-चने की दाल खिलाएँ तथा इष्‍ट का ध्यान करें। विशेष नोट : इन उपायों के साथ मेहनत करना भी जरूरी है।
#🔯ज्योतिष #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨गुप्त रोग और कुंडली मित्रों आज का विषय थोड़ा हटकर है और हो सकता है की कुछ को उचित न लगे लेकिन सुखो विवहिल जीवन का आधार अन्य बातों के साथ साथ यौन सुख भी होता है । जब पति य पत्नी मे इन से सम्बंधित कोई रोग हो तो सुखी वैवाहिक जीवन जीने मे बाधा आती है । ऐसे ही कुछ ज्योतिषीय योग पढ़ने को मिले है जो आपके साथ संझा कर रहा हूँ। ऐसा माना जाता है की अच्छे काम संबंधों के लिये आठवां भाव राहु शनि के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए । स्त्री की कुंडली मे सप्तम और पुरुष की कुंडली मे अष्ठम भाव को मुख्य भूमिका है । यदि इनमे कोई पाप ग्रह हो या इन भावों को देख रहा हो तो गुप्त रोग की संभावना होती है । स्त्री की कुंडली मे सप्तम भाव मे मेष या विरश्चिक राशि हो और शनि उसे देख रहा हो तो स्त्री की योनि मे रोग होते है । इसि प्रकार सप्तम भाव मे मकर या कुम्भ राशि हो और मंगल उसे देख रहा हो तो भी ऐसी जातिका को गुप्त रोग की सम्भावना होती है । सप्तम मे शनि को मंगल देख रहा हो य मंगल को शनि देख रहा हो तो भी गुप्त रोग ले योग बन जाते है । सप्तम भाव मे स्त्री की कुंडली मे शुक्र चन्द्र मंगल हो तो स्त्री का आचरण संदेहजनक होता है । नीच राशि मे मंगल सप्तम या अष्ठम भाव मे हो तो लड़की को मासिक धर्म सम्बंधित बीमारी देता है । यदि लड़की की कुंडली मे सप्तम भाव मे बुद्ध शनि हो तो उसका पति शारीरिक रूप से कमज़ोर होता है । पुरुष की कुंडली मे अष्ठम भाव मे शुक्र हो और उसे शनि या मंगल देख रहे हो तो जातक को वीर्य दोष या हस्तमैथुन की गलत आदत होति है शुक्र मंगल दोनो अष्ठम मे हो और उसे शनि देख रहा हो तो भी ये योग घटित होता है । शुक्र शनि या शुक्र राहु को इस भाव अष्ठम मेनगल देख रहा हो तो भी ये योग बन जाता है । सिंह और कन्या लग्न मे अष्ठम भाव और अष्ठमेस पर पाप ग्रह का प्रभाव भी गुप्त रोग देता है । अष्ठम भाव मे पाप ग्रह पर पाप ग्रह की नजर भी गुप्त रोग देती है । शिकर मंगल अष्ठम मे और उस पर शनि की दिरस्टि भी गुप्त रोग देती है । लग्न मे शनि राहु और शुक्र नीच अस्त या अंशगत हो तो भी गुप्त रोग हो जाता है । शुक्र अस्त होकर शनि बुद्ध के साथ हो तो भी ये योग बन जाता है । चन्द्र राहु शनि या चन्द्र केतु शनि या चन्द्र मंगल शनि की युति भी गुप्त रोग के योग बनाती है । शुक्र चन्द्र शनि या शुक्र चन्द्र राहु या शुक्र चन्द्र केतु की युति भी गुप्त रोग देती है । बलि शुभ ग्रह की दिरस्टि होने से इनमे से कोई भी योग कम या भंग हो सकता है । केंद्र मे बलि शुभ ग्रह हो तो भी ये योग के प्रभाव कम हो जाते है । नपुंसकता योग के कम या भंग हो रहा हो तो आंशिक नपुंसकता भी हो सकती है ।। यदि ऊपर लिखीत योगों मे से कोई भी ग्रह सवगरहि हो या अपने घर को देख रहा हो तो भी ये योग भंग हो जाते है । । चूंकि आजकल तालाक का मुख्य कारण ये भी होते है इसिलिय संछिप्त मे प्रकाश डालने की कोशिश की है पूर्ण रूप से तो पूरी कुंडली के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है और ये जरूरी नही की ये योग होने से किसी को ये रोग अवश्य ही होंगे इनमे अन्य ग्रहों की सिथति और ग्रहों का बलाबल महत्व रखता है । हां यदि आप शादी करने जा रहे हो तो अपने होने वाले जीवन साथी की कुंडली की जांच द्वारा उनके बारे मे कुछ जान अवश्य सकते हो । #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅
#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✡️सितारों की चाल🌠 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी गुप्त रोग और कुंडली मित्रों आज का विषय थोड़ा हटकर है और हो सकता है की कुछ को उचित न लगे लेकिन सुखो विवहिल जीवन का आधार अन्य बातों के साथ साथ यौन सुख भी होता है । जब पति य पत्नी मे इन से सम्बंधित कोई रोग हो तो सुखी वैवाहिक जीवन जीने मे बाधा आती है । ऐसे ही कुछ ज्योतिषीय योग पढ़ने को मिले है जो आपके साथ संझा कर रहा हूँ। ऐसा माना जाता है की अच्छे काम संबंधों के लिये आठवां भाव राहु शनि के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए । स्त्री की कुंडली मे सप्तम और पुरुष की कुंडली मे अष्ठम भाव को मुख्य भूमिका है । यदि इनमे कोई पाप ग्रह हो या इन भावों को देख रहा हो तो गुप्त रोग की संभावना होती है । स्त्री की कुंडली मे सप्तम भाव मे मेष या विरश्चिक राशि हो और शनि उसे देख रहा हो तो स्त्री की योनि मे रोग होते है । इसि प्रकार सप्तम भाव मे मकर या कुम्भ राशि हो और मंगल उसे देख रहा हो तो भी ऐसी जातिका को गुप्त रोग की सम्भावना होती है । सप्तम मे शनि को मंगल देख रहा हो य मंगल को शनि देख रहा हो तो भी गुप्त रोग ले योग बन जाते है । सप्तम भाव मे स्त्री की कुंडली मे शुक्र चन्द्र मंगल हो तो स्त्री का आचरण संदेहजनक होता है । नीच राशि मे मंगल सप्तम या अष्ठम भाव मे हो तो लड़की को मासिक धर्म सम्बंधित बीमारी देता है । यदि लड़की की कुंडली मे सप्तम भाव मे बुद्ध शनि हो तो उसका पति शारीरिक रूप से कमज़ोर होता है । पुरुष की कुंडली मे अष्ठम भाव मे शुक्र हो और उसे शनि या मंगल देख रहे हो तो जातक को वीर्य दोष या हस्तमैथुन की गलत आदत होति है शुक्र मंगल दोनो अष्ठम मे हो और उसे शनि देख रहा हो तो भी ये योग घटित होता है । शुक्र शनि या शुक्र राहु को इस भाव अष्ठम मेनगल देख रहा हो तो भी ये योग बन जाता है । सिंह और कन्या लग्न मे अष्ठम भाव और अष्ठमेस पर पाप ग्रह का प्रभाव भी गुप्त रोग देता है । अष्ठम भाव मे पाप ग्रह पर पाप ग्रह की नजर भी गुप्त रोग देती है । शिकर मंगल अष्ठम मे और उस पर शनि की दिरस्टि भी गुप्त रोग देती है । लग्न मे शनि राहु और शुक्र नीच अस्त या अंशगत हो तो भी गुप्त रोग हो जाता है । शुक्र अस्त होकर शनि बुद्ध के साथ हो तो भी ये योग बन जाता है । चन्द्र राहु शनि या चन्द्र केतु शनि या चन्द्र मंगल शनि की युति भी गुप्त रोग के योग बनाती है । शुक्र चन्द्र शनि या शुक्र चन्द्र राहु या शुक्र चन्द्र केतु की युति भी गुप्त रोग देती है । बलि शुभ ग्रह की दिरस्टि होने से इनमे से कोई भी योग कम या भंग हो सकता है । केंद्र मे बलि शुभ ग्रह हो तो भी ये योग के प्रभाव कम हो जाते है । नपुंसकता योग के कम या भंग हो रहा हो तो आंशिक नपुंसकता भी हो सकती है ।। यदि ऊपर लिखीत योगों मे से कोई भी ग्रह सवगरहि हो या अपने घर को देख रहा हो तो भी ये योग भंग हो जाते है । । चूंकि आजकल तालाक का मुख्य कारण ये भी होते है इसिलिय संछिप्त मे प्रकाश डालने की कोशिश की है पूर्ण रूप से तो पूरी कुंडली के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जा सकता है और ये जरूरी नही की ये योग होने से किसी को ये रोग अवश्य ही होंगे इनमे अन्य ग्रहों की सिथति और ग्रहों का बलाबल महत्व रखता है । हां यदि आप शादी करने जा रहे हो तो अपने होने वाले जीवन साथी की कुंडली की जांच द्वारा उनके बारे मे कुछ जान अवश्य सकते हो ।