एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
ShareChat
click to see wallet page
@55873084
55873084
एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल यंत्र मंत्र तंत्र विशेषज्ञ
@55873084
मुझे ShareChat पर फॉलो करें! Radhe Radhe
काला जादू हटाने के उपाय-भूत-प्रेत निवारक - ज्योतिषीय सामग्री मनुष्य जब भूत-प्रेत अथवा नजर, हाय या किसी दुष्ट आत्मा के जाल में फंस जाता है तब उसकी समस्या का समाधान करना दुष्कर कार्य होता है। ऐसे में बाधित व्यक्तियों को ज्योतिषीय सामग्रियों के धारण या पूजन से अवश्य लाभ मिलता है। नजर सुरक्षा लाॅकेट - स्वास्थ्यवर्द्धक और जीवन की बाधाओं को हटाने वाला लाॅकेट है। बुरी नजर से बचाव करता है। तंत्र-मंत्र-जादू, टोने के दुष्प्रभाव को काटता है व शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या की अवधि में, विशेष रूप से शुभ रहता है। नजर दोष निवारक लाॅकेट पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से धारण करने पर धारक की सभी पराबाधाओं का निवारण होता है। इसके चमत्कारिक प्रभाव से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में वृद्धि होती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार धारक को आशा और उन्नति की ओर लेकर जाता है। बाधामुक्ति कवच बाधामुक्ति कवच पांचमुखी, तेरहमुखी तथा गणेश रुद्राक्ष के संयुक्त मेल से बनाया गया है। तेरह मुखी रुद्राक्ष विश्वेश्वर का प्रतीक होने के कारण सभी बाधाओं को नष्ट करता है। पांचमुखी रुद्राक्ष, - महारुद्र स्वरूप है और पाप, ताप आदि अशुभ बाधाओं से रक्षा करता है। गणेश रुद्राक्ष विघ्नेश्वर का स्वरूप होने के कारण जीवन में आने वाली सभी विघ्न-बाधाओं को दूर करता है। इस बाधामुक्ति कवच को धारण करने से धारणकर्ता के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं का निराकरण होता है। काले घोड़े की नाल - घर में मुख्य दरवाजे पर काले घोड़े की नाल लगाने से नजर दोष दूर होता है। जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनि की ढैय्या, शनि की साढ़ेसाती, शनि की दशा चल रही हो, उन व्यक्तियों के लिए शनि उपाय करना विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकता है। घोड़े की नाल शीघ्र सफलता प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है। मोटर वाहन में सामने लगाकर प्रतिष्ठित किया जाये, तो दुर्घटना की आशंका कम होती है। काले घोड़े की नाल की अंगूठी काले घोड़े की नाल की अंगूठी नीच कर्मों से दूर रखती है तथा भूत-प्रेत, टोना, टोटका, नजर दोष आदि से बचाती है। घोड़े की नाल अंगूठी - एवं परिवार में कलह-पीड़ा नहीं होती। यह नौकरी पेशावालों के लिए भी उपयोगी है। ज्योतिष के अनुसार शनि जीवन में कई बार ढैय्या, साढ़ेसाती, महादशा व अंतर्दशा के रूप में प्रभावी होते हैं। इस स्थिति में काले घोड़े की नाल अंगूठी में धारण करना शनि दोषों का निवारण करता है। काले हकीक की माला - काले हकीक की माला घर से दरिद्रता दूर करने के लिए काले हकीक की माला को पूजा घर में स्थित माता लक्ष्मी के चित्र पर चढ़ा दें। ऐसा करने से साधक की आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होना शुरू हो जाएगा। काले हकीक की माला पर हनुमान मंत्र का जप करने से शत्रु बाधा और प्रेत बाधा का निवारण होता है। जन्म पत्रिका में शनि अकारक होने पर तथा शनि से संबंधित वस्तुओं के व्यापारियों को शनि उपासना नियमित रूप से करनी चाहिए। काले हकीक की माला पर शनि के मंत्र का जप करना अत्यंत लाभकारी रहता है। बगलामुखी यंत्र - बगलामुखी यंत्र बगलामुखी यंत्र द्वारा शत्रुओं पर विजय व वांछित सफलता प्राप्त हो सकती है। बगलामुखी यंत्र बुरी शक्तियों से बचाव के लिए अचूक यंत्र है। बगलामुखी यंत्र अकाल मृत्यु, दंगा फसाद, आपरेशन आदि से बचाव करता है। इसे गले में पहनने के साथ-साथ पूजा घर में रख सकते हैं। अपनी सफलता के लिए कोई भी व्यक्ति इस यंत्र का उपयोग कर सकता है। भैरव यंत्र - के सहयोग से आप भैरव जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। भैरव यंत्र भूत-प्रेत, काले जादू के प्रभाव को दूर करने में सहयोग करता है, तंत्र-मंत्र की नकारात्मक शक्तियों से व्यक्ति को बचा कर रखता है तथा सकारात्मक शक्तियों की शुभता बनाए रखता है। श्री भैरव यंत्र स्वास्थ्य सुख देने वाला यंत्र है। इस यंत्र से आप अपने ऋण, रोग पर विजय प्राप्त करने में सफल हो सकते है। व्यावसायिक समस्याओं का निवारण करने में भी भैरव यंत्र लाभकारी सिद्ध होता है। श्री भैरव यंत्र के सभी शुभ फल प्राप्त करने के लिए इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी चाहिए। बाधामुक्ति यंत्र - संपूर्ण बाधामुक्ति यंत्र शत्रुओं पर विजय, मुकद्दमे में जीत, रुके कार्यों में सफलता और बुरी नजर से बचाव के लिए संपूर्ण बाधामुक्ति यंत्र बहुत प्रभावशाली है। इससे जातक का चोट, दुर्घटना, दुर्भाग्य आदि से बचाव होता है। जातक का प्रभामंडल उज्जवल होता है। संपूर्ण बाधामुक्ति यंत्र में महामृत्युंजय यंत्र, बगलामुखी यंत्र, नवग्रह यंत्र, वशीकरण यंत्र, वाहन दुर्घटना नाशक यंत्र, शनि यंत्र, राहु और केतु यंत्र, वास्तु दोष निवारण यंत्र, गणपति यंत्र और कालसर्प यंत्र सम्मिलित हैं। गीता यंत्र संपूर्ण जगत में श्रीमदभगवत गीता का पाठ अति लाभप्रद है। गीता यंत्र - गीता पाठ करने वालों को यह यंत्र अवश्य ही अपने पास रखना चाहिए। यंत्र के सम्मुख गीता पाठ करने से सहस्त्रोगुण से अधिक फल मिलता है। पाठ करने में असमर्थता होने पर यंत्र के सम्मुख शुद्ध मन से तुलसी या पंचमुखी रूद्राक्ष की माला पर जप करना विशेष लाभ देता है। गीता यंत्र पर प्रतिदिन ग्यारह की संख्या में बिल्वपत्र अर्पण करने से लक्ष्मी जी संतुष्ट होकर लाभवृद्धि करती हैं। घर में शांति का वातावरण बना रहता है। गीता यंत्र की उपासना से भूत-प्रेत एवं पितृ दोष की शांति होती है तथा गीता यंत्र की उपासना से विद्या प्राप्ति होती है। श्री हनुमान जी कृपा यंत्र जो व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करना चाहता है। उसे प्रतिदिन इस यंत्र का पूजन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त जिन व्यक्तियों की कुंडली में मांगलिक योग हो, उन व्यक्तियों के लिए इस यंत्र का पूजन करना लाभकारी सिद्ध हो सकता है। श्री हनुमान कृपा यंत्र - श्री हनुमान कृपा यंत्र के नियमित पूजन से सभी प्रकार की ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। ऊपरी बाधा, नजर, टोना-टोटका, भूत-प्रेत आदि की शांति एवं इनसे होने वाले कष्टों से बचने के लिए लोबान, गंधक, राई एवं काली मिर्च को हनुमान यंत्र के ऊपर से 7 बार फेर कर घर के प्राणियों के पास रखने से ऊपरी बाधाएं नष्ट होती हैं। ग्यारहमुखी रुद्राक्ष साक्षात रुद्र है। यह 11 रुद्रों एवं भगवान शंकर के ग्यारहवें अवतार संकटमोचन महावीर बजरंगबली का प्रतीक है। इसे धारण करने वाले व्यक्ति को सांसारिक ऐश्वर्य और संतान सुख प्राप्त होता है और उसकी सारी ऊपरी बाधाएं दूर होती हैं। तेरहमुखी रुद्राक्ष साक्षात इंद्र का स्वरूप है। यह कार्तिकेय के समान समस्त प्रकार के ऐश्वर्य देता है और कामनाओं की पूर्ति करता है। इसे धारण करने से व्यक्ति सभी प्रकार की धातुओं एवं रसायनों की सिद्धि का ज्ञाता हो जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार कामदेव को भी तेरहमुखी रुद्राक्ष का देवता माना गया है। इसका प्रभाव शुक्र ग्रह के समान होता है। यह निःसंतान को संतति प्रदान करने वाला, सुख, शांति, सफलता एवं आर्थिक समृद्धि प्रदायी रुद्राक्ष है। पंद्रहमुखी रुद्राक्ष भगवान पशुपतिनाथ का स्वरूप माना गया है। यह धारक के आर्थिक एवं आध्यात्मिक स्तर को उठाकर उसे सुख, संपदा, मान- सम्मान-प्रतिष्ठा एवं शांति प्रदान करता है। पंद्रहमुखी रूद्राक्ष विशेष रूप से नजर दोष और भूत बाधा से मुक्ति प्राप्ति के लिए धारण किया जाता है। बीसमुखी रुद्राक्ष को जनार्दन स्वरूप कहा गया है। इसे धारण करने से भूत, पिशाच आदि का भय नहीं रहता। साथ ही क्रूर ग्रहों का अशुभ प्रभाव भी नहीं पड़ता है। वह श्रद्धा एवं तंत्र विद्या के जरिए विशेष सफलता प्राप्त करता है। उसे सर्पादि विषधारी प्राणियों का भी भय नहीं होता है। #🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯वास्तु दोष उपाय
🔯ज्योतिष - uc uc - ShareChat
काला जादू हटाने के उपाय-भूत-प्रेत निवारक - ज्योतिषीय सामग्री मनुष्य जब भूत-प्रेत अथवा नजर, हाय या किसी दुष्ट आत्मा के जाल में फंस जाता है तब उसकी समस्या का समाधान करना दुष्कर कार्य होता है। ऐसे में बाधित व्यक्तियों को ज्योतिषीय सामग्रियों के धारण या पूजन से अवश्य लाभ मिलता है। नजर सुरक्षा लाॅकेट - स्वास्थ्यवर्द्धक और जीवन की बाधाओं को हटाने वाला लाॅकेट है। बुरी नजर से बचाव करता है। तंत्र-मंत्र-जादू, टोने के दुष्प्रभाव को काटता है व शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या की अवधि में, विशेष रूप से शुभ रहता है। नजर दोष निवारक लाॅकेट पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से धारण करने पर धारक की सभी पराबाधाओं का निवारण होता है। इसके चमत्कारिक प्रभाव से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में वृद्धि होती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार धारक को आशा और उन्नति की ओर लेकर जाता है। बाधामुक्ति कवच बाधामुक्ति कवच पांचमुखी, तेरहमुखी तथा गणेश रुद्राक्ष के संयुक्त मेल से बनाया गया है। तेरह मुखी रुद्राक्ष विश्वेश्वर का प्रतीक होने के कारण सभी बाधाओं को नष्ट करता है। पांचमुखी रुद्राक्ष, - महारुद्र स्वरूप है और पाप, ताप आदि अशुभ बाधाओं से रक्षा करता है। गणेश रुद्राक्ष विघ्नेश्वर का स्वरूप होने के कारण जीवन में आने वाली सभी विघ्न-बाधाओं को दूर करता है। इस बाधामुक्ति कवच को धारण करने से धारणकर्ता के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं का निराकरण होता है। काले घोड़े की नाल - घर में मुख्य दरवाजे पर काले घोड़े की नाल लगाने से नजर दोष दूर होता है। जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनि की ढैय्या, शनि की साढ़ेसाती, शनि की दशा चल रही हो, उन व्यक्तियों के लिए शनि उपाय करना विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हो सकता है। घोड़े की नाल शीघ्र सफलता प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है। मोटर वाहन में सामने लगाकर प्रतिष्ठित किया जाये, तो दुर्घटना की आशंका कम होती है। काले घोड़े की नाल की अंगूठी काले घोड़े की नाल की अंगूठी नीच कर्मों से दूर रखती है तथा भूत-प्रेत, टोना, टोटका, नजर दोष आदि से बचाती है। घोड़े की नाल अंगूठी - एवं परिवार में कलह-पीड़ा नहीं होती। यह नौकरी पेशावालों के लिए भी उपयोगी है। ज्योतिष के अनुसार शनि जीवन में कई बार ढैय्या, साढ़ेसाती, महादशा व अंतर्दशा के रूप में प्रभावी होते हैं। इस स्थिति में काले घोड़े की नाल अंगूठी में धारण करना शनि दोषों का निवारण करता है। काले हकीक की माला - काले हकीक की माला घर से दरिद्रता दूर करने के लिए काले हकीक की माला को पूजा घर में स्थित माता लक्ष्मी के चित्र पर चढ़ा दें। ऐसा करने से साधक की आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होना शुरू हो जाएगा। काले हकीक की माला पर हनुमान मंत्र का जप करने से शत्रु बाधा और प्रेत बाधा का निवारण होता है। जन्म पत्रिका में शनि अकारक होने पर तथा शनि से संबंधित वस्तुओं के व्यापारियों को शनि उपासना नियमित रूप से करनी चाहिए। काले हकीक की माला पर शनि के मंत्र का जप करना अत्यंत लाभकारी रहता है। बगलामुखी यंत्र - बगलामुखी यंत्र बगलामुखी यंत्र द्वारा शत्रुओं पर विजय व वांछित सफलता प्राप्त हो सकती है। बगलामुखी यंत्र बुरी शक्तियों से बचाव के लिए अचूक यंत्र है। बगलामुखी यंत्र अकाल मृत्यु, दंगा फसाद, आपरेशन आदि से बचाव करता है। इसे गले में पहनने के साथ-साथ पूजा घर में रख सकते हैं। अपनी सफलता के लिए कोई भी व्यक्ति इस यंत्र का उपयोग कर सकता है। भैरव यंत्र - के सहयोग से आप भैरव जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। भैरव यंत्र भूत-प्रेत, काले जादू के प्रभाव को दूर करने में सहयोग करता है, तंत्र-मंत्र की नकारात्मक शक्तियों से व्यक्ति को बचा कर रखता है तथा सकारात्मक शक्तियों की शुभता बनाए रखता है। श्री भैरव यंत्र स्वास्थ्य सुख देने वाला यंत्र है। इस यंत्र से आप अपने ऋण, रोग पर विजय प्राप्त करने में सफल हो सकते है। व्यावसायिक समस्याओं का निवारण करने में भी भैरव यंत्र लाभकारी सिद्ध होता है। श्री भैरव यंत्र के सभी शुभ फल प्राप्त करने के लिए इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी चाहिए। बाधामुक्ति यंत्र - संपूर्ण बाधामुक्ति यंत्र शत्रुओं पर विजय, मुकद्दमे में जीत, रुके कार्यों में सफलता और बुरी नजर से बचाव के लिए संपूर्ण बाधामुक्ति यंत्र बहुत प्रभावशाली है। इससे जातक का चोट, दुर्घटना, दुर्भाग्य आदि से बचाव होता है। जातक का प्रभामंडल उज्जवल होता है। संपूर्ण बाधामुक्ति यंत्र में महामृत्युंजय यंत्र, बगलामुखी यंत्र, नवग्रह यंत्र, वशीकरण यंत्र, वाहन दुर्घटना नाशक यंत्र, शनि यंत्र, राहु और केतु यंत्र, वास्तु दोष निवारण यंत्र, गणपति यंत्र और कालसर्प यंत्र सम्मिलित हैं। गीता यंत्र संपूर्ण जगत में श्रीमदभगवत गीता का पाठ अति लाभप्रद है। गीता यंत्र - गीता पाठ करने वालों को यह यंत्र अवश्य ही अपने पास रखना चाहिए। यंत्र के सम्मुख गीता पाठ करने से सहस्त्रोगुण से अधिक फल मिलता है। पाठ करने में असमर्थता होने पर यंत्र के सम्मुख शुद्ध मन से तुलसी या पंचमुखी रूद्राक्ष की माला पर जप करना विशेष लाभ देता है। गीता यंत्र पर प्रतिदिन ग्यारह की संख्या में बिल्वपत्र अर्पण करने से लक्ष्मी जी संतुष्ट होकर लाभवृद्धि करती हैं। घर में शांति का वातावरण बना रहता है। गीता यंत्र की उपासना से भूत-प्रेत एवं पितृ दोष की शांति होती है तथा गीता यंत्र की उपासना से विद्या प्राप्ति होती है। श्री हनुमान जी कृपा यंत्र जो व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करना चाहता है। उसे प्रतिदिन इस यंत्र का पूजन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त जिन व्यक्तियों की कुंडली में मांगलिक योग हो, उन व्यक्तियों के लिए इस यंत्र का पूजन करना लाभकारी सिद्ध हो सकता है। श्री हनुमान कृपा यंत्र - श्री हनुमान कृपा यंत्र के नियमित पूजन से सभी प्रकार की ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। ऊपरी बाधा, नजर, टोना-टोटका, भूत-प्रेत आदि की शांति एवं इनसे होने वाले कष्टों से बचने के लिए लोबान, गंधक, राई एवं काली मिर्च को हनुमान यंत्र के ऊपर से 7 बार फेर कर घर के प्राणियों के पास रखने से ऊपरी बाधाएं नष्ट होती हैं। ग्यारहमुखी रुद्राक्ष साक्षात रुद्र है। यह 11 रुद्रों एवं भगवान शंकर के ग्यारहवें अवतार संकटमोचन महावीर बजरंगबली का प्रतीक है। इसे धारण करने वाले व्यक्ति को सांसारिक ऐश्वर्य और संतान सुख प्राप्त होता है और उसकी सारी ऊपरी बाधाएं दूर होती हैं। तेरहमुखी रुद्राक्ष साक्षात इंद्र का स्वरूप है। यह कार्तिकेय के समान समस्त प्रकार के ऐश्वर्य देता है और कामनाओं की पूर्ति करता है। इसे धारण करने से व्यक्ति सभी प्रकार की धातुओं एवं रसायनों की सिद्धि का ज्ञाता हो जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार कामदेव को भी तेरहमुखी रुद्राक्ष का देवता माना गया है। इसका प्रभाव शुक्र ग्रह के समान होता है। यह निःसंतान को संतति प्रदान करने वाला, सुख, शांति, सफलता एवं आर्थिक समृद्धि प्रदायी रुद्राक्ष है। पंद्रहमुखी रुद्राक्ष भगवान पशुपतिनाथ का स्वरूप माना गया है। यह धारक के आर्थिक एवं आध्यात्मिक स्तर को उठाकर उसे सुख, संपदा, मान- सम्मान-प्रतिष्ठा एवं शांति प्रदान करता है। पंद्रहमुखी रूद्राक्ष विशेष रूप से नजर दोष और भूत बाधा से मुक्ति प्राप्ति के लिए धारण किया जाता है। बीसमुखी रुद्राक्ष को जनार्दन स्वरूप कहा गया है। इसे धारण करने से भूत, पिशाच आदि का भय नहीं रहता। साथ ही क्रूर ग्रहों का अशुभ प्रभाव भी नहीं पड़ता है। वह श्रद्धा एवं तंत्र विद्या के जरिए विशेष सफलता प्राप्त करता है। उसे सर्पादि विषधारी प्राणियों का भी भय नहीं होता है। #📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
📕लाल किताब उपाय🔯 - uc uc - ShareChat
कई दम्पति शादी के कई साल बाद तक संतान सुख,पुत्र-रतन के लिए तरसते रहते हैं,टेस्ट करवाते हैं, कोई शारीरिक कमी नहीं डॉक्टर्स को समझ आती,इलाज करवाते हैं,परन्तु परेशानी दूर नहीं होती, ज्योतिष नज़र से देखे तो इसके कई कारण हो सकते हैं, पितृ-दोष,काल-सर्प दोष, पांचवे भाव का पीड़ित होना | पाप-ग्रहों की दृष्टि | संतान-सुख से तरस रहे दम्पति सलाह के लिए संपर्क कर सकते हैं, दोनों कुंडलियों को देख कर ही बताया जायेगा, मनोकामना पूर्ति के लिए मन्त्र-जाप भी उपाय है | #🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपाय
🔯ज्योतिष - ೨1 সিছ 351 Mviu సన్ి్  ೨1 সিছ 351 Mviu సన్ి్ - ShareChat
कई दम्पति शादी के कई साल बाद तक संतान सुख,पुत्र-रतन के लिए तरसते रहते हैं,टेस्ट करवाते हैं, कोई शारीरिक कमी नहीं डॉक्टर्स को समझ आती,इलाज करवाते हैं,परन्तु परेशानी दूर नहीं होती, ज्योतिष नज़र से देखे तो इसके कई कारण हो सकते हैं, पितृ-दोष,काल-सर्प दोष, पांचवे भाव का पीड़ित होना | पाप-ग्रहों की दृष्टि | संतान-सुख से तरस रहे दम्पति सलाह के लिए संपर्क कर सकते हैं, दोनों कुंडलियों को देख कर ही बताया जायेगा, मनोकामना पूर्ति के लिए मन्त्र-जाप भी उपाय है | #📕लाल किताब उपाय🔯 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
📕लाल किताब उपाय🔯 - ೨1 সিছ 351 Mviu సన్ి్  ೨1 সিছ 351 Mviu సన్ి్ - ShareChat
*बिना खर्च के ऐसे करें कुंडली में पितृ दोष को दूर* लक्षणों के आधार पर पितृ दोष होने का अनुमान लगाया जा सकता है। संपन्नता होते हुए भी घर में अशांति और क्लेश। संतान प्राप्ति न होना। रोग, दुर्घटनाओं व शुभ कार्यों में लगातार विघ्न होते रहना। ज्योतिष पर विश्वास करें तो पितृ दोष एक ऐसा दोष है, जिसके कारण व्यक्ति अकारण और बेवजह की समस्याओं और परेशानियों से घिरा रहता है। इस दोष के निवारण के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है पितृ पक्ष। जिसमें आप मामूली खर्च या यूं कहें कि बिना किसी खर्च समस्या का समाधान कर सकते हैं। *क्या है पितृ दोष* -जन्म कुंडली के आधार पर यदि राहू 2, 5, 9, 12वें भाव में है तो जातक पितृ दोष से पीड़ित है। -परिवार के सिर्फ एक सदस्य की कुंडली में भी पितृ दोष होने पर उसका प्रभाव अन्य सदस्यों पर भी पड़ता है। -यदि व्यक्ति की जन्म कुंडली नहीं है, तो लक्षणों के आधार पर पितृ दोष होने का अनुमान लगाया जा सकता है। संपन्नता होते हुए भी घर में अशांति और क्लेश। संतान प्राप्ति न होना। रोग, दुर्घटनाओं व शुभ कार्यों में लगातार विघ्न होते रहना। *कैसे करें निवारण* -पितृ पक्ष पितृ दोष के निवारण के लिए सबसे उपयुक्त समय माना गया है। -पूर्णिमा से प्रारंभ होकर अमावस्या तक चलने वाले पितृ पक्ष में 16 दिन तक गाय को दो रोटी (घी, शक्कर के साथ) खिलाने से पितृ दोष की शांति होती है। -इन 16 दिन में गीता के 18 अध्याय पढ़ने से पितरों को शांति मिलती है। जिससे पितृ दोष दूर होता है। इसलिए 16 दिन तक सुबह उठकर स्नान कर एक कलश जल का भरें। घी का दीपक जलाकर अपने पितरों का स्मरण कर गीता का पाठ करें। -कनागत के दिनों में पूरे परिवार के साथ गंगा स्नान करने से भी पितृ दोष की शांति होती है। -नाले, नालियों के पास गूलर व पीपल के उगे पेड़ों को पवित्र स्थान पर लगाकर उनकी देखभाल करने से भी पितृ दोष की शांति होती है। #🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯वास्तु दोष उपाय
🔯ज्योतिष - ) ) - ShareChat
#📕लाल किताब उपाय🔯 #🐍कालसर्प दोष परिहार #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 *बिना खर्च के ऐसे करें कुंडली में पितृ दोष को दूर* लक्षणों के आधार पर पितृ दोष होने का अनुमान लगाया जा सकता है। संपन्नता होते हुए भी घर में अशांति और क्लेश। संतान प्राप्ति न होना। रोग, दुर्घटनाओं व शुभ कार्यों में लगातार विघ्न होते रहना। ज्योतिष पर विश्वास करें तो पितृ दोष एक ऐसा दोष है, जिसके कारण व्यक्ति अकारण और बेवजह की समस्याओं और परेशानियों से घिरा रहता है। इस दोष के निवारण के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है पितृ पक्ष। जिसमें आप मामूली खर्च या यूं कहें कि बिना किसी खर्च समस्या का समाधान कर सकते हैं। *क्या है पितृ दोष* -जन्म कुंडली के आधार पर यदि राहू 2, 5, 9, 12वें भाव में है तो जातक पितृ दोष से पीड़ित है। -परिवार के सिर्फ एक सदस्य की कुंडली में भी पितृ दोष होने पर उसका प्रभाव अन्य सदस्यों पर भी पड़ता है। -यदि व्यक्ति की जन्म कुंडली नहीं है, तो लक्षणों के आधार पर पितृ दोष होने का अनुमान लगाया जा सकता है। संपन्नता होते हुए भी घर में अशांति और क्लेश। संतान प्राप्ति न होना। रोग, दुर्घटनाओं व शुभ कार्यों में लगातार विघ्न होते रहना। *कैसे करें निवारण* -पितृ पक्ष पितृ दोष के निवारण के लिए सबसे उपयुक्त समय माना गया है। -पूर्णिमा से प्रारंभ होकर अमावस्या तक चलने वाले पितृ पक्ष में 16 दिन तक गाय को दो रोटी (घी, शक्कर के साथ) खिलाने से पितृ दोष की शांति होती है। -इन 16 दिन में गीता के 18 अध्याय पढ़ने से पितरों को शांति मिलती है। जिससे पितृ दोष दूर होता है। इसलिए 16 दिन तक सुबह उठकर स्नान कर एक कलश जल का भरें। घी का दीपक जलाकर अपने पितरों का स्मरण कर गीता का पाठ करें। -कनागत के दिनों में पूरे परिवार के साथ गंगा स्नान करने से भी पितृ दोष की शांति होती है। -नाले, नालियों के पास गूलर व पीपल के उगे पेड़ों को पवित्र स्थान पर लगाकर उनकी देखभाल करने से भी पितृ दोष की शांति होती है।
📕लाल किताब उपाय🔯 - ) ) - ShareChat
श्री रामचरित मानस के सिद्ध ‘मन्त्र’ नियम- मानस के दोहे-चौपाईयों को सिद्ध करने का विधान यह है कि किसी भी शुभ दिन की रात्रि को दस बजे के बाद अष्टांग हवन के द्वारा मन्त्र सिद्ध करना चाहिये। फिर जिस कार्य के लिये मन्त्र-जप की आवश्यकता हो, उसके लिये नित्य जप करना चाहिये। वाराणसी में भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मन्त्र-शक्ति प्रदान की है-इसलिये वाराणसी की ओर मुख करके शंकरजी को साक्षी बनाकर श्रद्धा से जप करना चाहिये। अष्टांग हवन सामग्री १॰ चन्दन का बुरादा, २॰ तिल, ३॰ शुद्ध घी, ४॰ चीनी, ५॰ अगर, ६॰ तगर, ७॰ कपूर, ८॰ शुद्ध केसर, ९॰ नागरमोथा, १०॰ पञ्चमेवा, ११॰ जौ और १२॰ चावल। जानने की बातें- जिस उद्देश्य के लिये जो चौपाई, दोहा या सोरठा जप करना बताया गया है, उसको सिद्ध करने के लिये एक दिन हवन की सामग्री से उसके द्वारा (चौपाई, दोहा या सोरठा) १०८ बार हवन करना चाहिये। यह हवन केवल एक दिन करना है। मामूली शुद्ध मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर अग्नि रखकर उसमें आहुति दे देनी चाहिये। प्रत्येक आहुति में चौपाई आदि के अन्त में ‘स्वाहा’ बोल देना चाहिये। प्रत्येक आहुति लगभग पौन तोले की (सब चीजें मिलाकर) होनी चाहिये। इस हिसाब से १०८ आहुति के लिये एक सेर (८० तोला) सामग्री बना लेनी चाहिये। कोई चीज कम-ज्यादा हो तो कोई आपत्ति नहीं। पञ्चमेवा में पिश्ता, बादाम, किशमिश (द्राक्षा), अखरोट और काजू ले सकते हैं। इनमें से कोई चीज न मिले तो उसके बदले नौजा या मिश्री मिला सकते हैं। केसर शुद्ध ४ आने भर ही डालने से काम चल जायेगा। हवन करते समय माला रखने की आवश्यकता १०८ की संख्या गिनने के लिये है। बैठने के लिये आसन ऊन का या कुश का होना चाहिये। सूती कपड़े का हो तो वह धोया हुआ पवित्र होना चाहिये। मन्त्र सिद्ध करने के लिये यदि लंकाकाण्ड की चौपाई या दोहा हो तो उसे शनिवार को हवन करके करना चाहिये। दूसरे काण्डों के चौपाई-दोहे किसी भी दिन हवन करके सिद्ध किये जा सकते हैं। सिद्ध की हुई रक्षा-रेखा की चौपाई एक बार बोलकर जहाँ बैठे हों, वहाँ अपने आसन के चारों ओर चौकोर रेखा जल या कोयले से खींच लेनी चाहिये। फिर उस चौपाई को भी ऊपर लिखे अनुसार १०८ आहुतियाँ देकर सिद्ध करना चाहिये। रक्षा-रेखा न भी खींची जाये तो भी आपत्ति नहीं है। दूसरे काम के लिये दूसरा मन्त्र सिद्ध करना हो तो उसके लिये अलग हवन करके करना होगा। एक दिन हवन करने से वह मन्त्र सिद्ध हो गया। इसके बाद जब तक कार्य सफल न हो, तब तक उस मन्त्र (चौपाई, दोहा) आदि का प्रतिदिन कम-से-कम १०८ बार प्रातःकाल या रात्रि को, जब सुविधा हो, जप करते रहना चाहिये। कोई दो-तीन कार्यों के लिये दो-तीन चौपाइयों का अनुष्ठान एक साथ करना चाहें तो कर सकते हैं। पर उन चौपाइयों को पहले अलग-अलग हवन करके सिद्ध कर लेना चाहिये। १॰ विपत्ति-नाश के लिये “राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।” २॰ संकट-नाश के लिये “जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।। जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।। दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।” ३॰ कठिन क्लेश नाश के लिये “हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू॥” ४॰ विघ्न शांति के लिये “सकल विघ्न व्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥” ५॰ खेद नाश के लिये “जब तें राम ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए॥” ६॰ चिन्ता की समाप्ति के लिये “जय रघुवंश बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृशानू॥” ७॰ विविध रोगों तथा उपद्रवों की शान्ति के लिये “दैहिक दैविक भौतिक तापा।राम राज काहूहिं नहि ब्यापा॥” ८॰ मस्तिष्क की पीड़ा दूर करने के लिये “हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।” ९॰ विष नाश के लिये “नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।” १०॰ अकाल मृत्यु निवारण के लिये “नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट। लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।” ११॰ सभी तरह की आपत्ति के विनाश के लिये / भूत भगाने के लिये “प्रनवउँ पवन कुमार,खल बन पावक ग्यान घन। जासु ह्रदयँ आगार, बसहिं राम सर चाप धर॥” १२॰ नजर झाड़ने के लिये “स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।” १३॰ खोयी हुई वस्तु पुनः प्राप्त करने के लिए “गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।” १४॰ जीविका प्राप्ति केलिये “बिस्व भरण पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।” १५॰ दरिद्रता मिटाने के लिये “अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारि के।।” १६॰ लक्ष्मी प्राप्ति के लिये “जिमि सरिता सागर महुँ जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।। तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।” १७॰ पुत्र प्राप्ति के लिये “प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।’ १८॰ सम्पत्ति की प्राप्ति के लिये “जे सकाम नर सुनहि जे गावहि।सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।” १९॰ ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त करने के लिये “साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।।” २०॰ सर्व-सुख-प्राप्ति के लिये सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई।। २१॰ मनोरथ-सिद्धि के लिये “भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि।।” २२॰ कुशल-क्षेम के लिये “भुवन चारिदस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।।” २३॰ मुकदमा जीतने के लिये “पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।” २४॰ शत्रु के सामने जाने के लिये “कर सारंग साजि कटि भाथा। अरिदल दलन चले रघुनाथा॥” २५॰ शत्रु को मित्र बनाने के लिये “गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।” २६॰ शत्रुतानाश के लिये “बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप विषमता खोई॥” २७॰ वार्तालाप में सफ़लता के लिये “तेहि अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा॥” २८॰ विवाह के लिये “तब जनक पाइ वशिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै। मांडवी श्रुतकीरति उरमिला, कुँअरि लई हँकारि कै॥” २९॰ यात्रा सफ़ल होने के लिये “प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदयँ राखि कोसलपुर राजा॥” ३०॰ परीक्षा / शिक्षा की सफ़लता के लिये “जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥ मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥” ३१॰ आकर्षण के लिये “जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥” ३२॰ स्नान से पुण्य-लाभ के लिये “सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग। लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग।।” ३३॰ निन्दा की निवृत्ति के लिये “राम कृपाँ अवरेब सुधारी। बिबुध धारि भइ गुनद गोहारी।। ३४॰ विद्या प्राप्ति के लिये गुरु गृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥ ३५॰ उत्सव होने के लिये “सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं। तिन्ह कहुँ सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु।।” ३६॰ यज्ञोपवीत धारण करके उसे सुरक्षित रखने के लिये “जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग। पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।” ३७॰ प्रेम बढाने के लिये सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥ ३८॰ कातर की रक्षा के लिये “मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहिं अवसर सहाय सोइ होऊ।।” ३९॰ भगवत्स्मरण करते हुए आराम से मरने के लिये रामचरन दृढ प्रीति करि बालि कीन्ह तनु त्याग । सुमन माल जिमि कंठ तें गिरत न जानइ नाग ॥ ४०॰ विचार शुद्ध करने के लिये “ताके जुग पद कमल मनाउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ।।” ४१॰ संशय-निवृत्ति के लिये “राम कथा सुंदर करतारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी।।” ४२॰ ईश्वर से अपराध क्षमा कराने के लिये ” अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमा मंदिर दोउ भ्राता।।” ४३॰ विरक्ति के लिये “भरत चरित करि नेमु तुलसी जे सादर सुनहिं। सीय राम पद प्रेमु अवसि होइ भव रस बिरति।।” ४४॰ ज्ञान-प्राप्ति के लिये “छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा।।” ४५॰ भक्ति की प्राप्ति के लिये “भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपासिंधु सुखधाम। सोइ निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम।।” ४६॰ श्रीहनुमान् जी को प्रसन्न करने के लिये “सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपनें बस करि राखे रामू।।” ४७॰ मोक्ष-प्राप्ति के लिये “सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। काल सर्प जनु चले सपच्छा।।” ४८॰ श्री सीताराम के दर्शन के लिये “नील सरोरुह नील मनि नील नीलधर श्याम । लाजहि तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम ॥” ४९॰ श्रीजानकीजी के दर्शन के लिये “जनकसुता जगजननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की।।” ५०॰ श्रीरामचन्द्रजी को वश में करने के लिये “केहरि कटि पट पीतधर सुषमा सील निधान। देखि भानुकुल भूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।” ५१॰ सहज स्वरुप दर्शन के लिये “भगत बछल प्रभु कृपा निधाना। बिस्वबास प्रगटे भगवाना।।” #🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ #🔯नक्षत्रों के प्रभाव✨ #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #🔯वास्तु दोष उपाय
🔯ज्योतिष - आदतें जो गुरु को अनुकूल करें ]- पवित्र नदि्यों में स्नान कर्रे।  हल्दी, केसर का तिलक लगाएं।  २ मस्तक पर ३- धर्म , देवता , धर्मग्रंथों मंदिर  वृक्ष का कभी अनादर न करें। पूजनीय  की आदत डालें। ४ सत्संग उपदेश  सुनने  ६- गौसेवा करें माफी मांगना सीखे ,दयालु बने धार्मिक बने 6 स्त्रियों को पति औऱ पुत्र से अच्छा व्यवहार करना चाहिए। ७- मंदिर जाते रहे ,घर मे यज्ञ अनुष्ठान समय अनुसार होते रहने चाहिए। में एक तीर्थ धाम इच्छानुसार जाना चाहिए। ৪  মাল ९ अपने कुल देवता कुल देवी को प्रसन्न रखें। १०- भोजन में ऋतुओं के अनुसार पपीता हल्दी, केला चना, बेसन के लड्डू, अनार,आम , केसर, पीली दाल गुड़, आदि लेते रहें। ११- घर मे गेंदे के फूल लगा सकतें हैं केले के पेड़ को गुरुवार को सींचना चाहिए। 122 १९- घर मे खुद का पुस्तकालय बनाकर स्वयं अध्यन करना चाहिए।  ]४ नाक, कान की सफाई का खास खयाल रखें। १८- बिना बात के दुसरो को उपदेश देना अहँकार, भाषणबाजी इनसे बचना चाहिए। १६ जीवन मे जितने जल्दी एक गुरु बना लो उतना अच्छा। आदतें जो गुरु को अनुकूल करें ]- पवित्र नदि्यों में स्नान कर्रे।  हल्दी, केसर का तिलक लगाएं।  २ मस्तक पर ३- धर्म , देवता , धर्मग्रंथों मंदिर  वृक्ष का कभी अनादर न करें। पूजनीय  की आदत डालें। ४ सत्संग उपदेश  सुनने  ६- गौसेवा करें माफी मांगना सीखे ,दयालु बने धार्मिक बने 6 स्त्रियों को पति औऱ पुत्र से अच्छा व्यवहार करना चाहिए। ७- मंदिर जाते रहे ,घर मे यज्ञ अनुष्ठान समय अनुसार होते रहने चाहिए। में एक तीर्थ धाम इच्छानुसार जाना चाहिए। ৪  মাল ९ अपने कुल देवता कुल देवी को प्रसन्न रखें। १०- भोजन में ऋतुओं के अनुसार पपीता हल्दी, केला चना, बेसन के लड्डू, अनार,आम , केसर, पीली दाल गुड़, आदि लेते रहें। ११- घर मे गेंदे के फूल लगा सकतें हैं केले के पेड़ को गुरुवार को सींचना चाहिए। 122 १९- घर मे खुद का पुस्तकालय बनाकर स्वयं अध्यन करना चाहिए।  ]४ नाक, कान की सफाई का खास खयाल रखें। १८- बिना बात के दुसरो को उपदेश देना अहँकार, भाषणबाजी इनसे बचना चाहिए। १६ जीवन मे जितने जल्दी एक गुरु बना लो उतना अच्छा। - ShareChat
श्री रामचरित मानस के सिद्ध ‘मन्त्र’ नियम- मानस के दोहे-चौपाईयों को सिद्ध करने का विधान यह है कि किसी भी शुभ दिन की रात्रि को दस बजे के बाद अष्टांग हवन के द्वारा मन्त्र सिद्ध करना चाहिये। फिर जिस कार्य के लिये मन्त्र-जप की आवश्यकता हो, उसके लिये नित्य जप करना चाहिये। वाराणसी में भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मन्त्र-शक्ति प्रदान की है-इसलिये वाराणसी की ओर मुख करके शंकरजी को साक्षी बनाकर श्रद्धा से जप करना चाहिये। अष्टांग हवन सामग्री १॰ चन्दन का बुरादा, २॰ तिल, ३॰ शुद्ध घी, ४॰ चीनी, ५॰ अगर, ६॰ तगर, ७॰ कपूर, ८॰ शुद्ध केसर, ९॰ नागरमोथा, १०॰ पञ्चमेवा, ११॰ जौ और १२॰ चावल। जानने की बातें- जिस उद्देश्य के लिये जो चौपाई, दोहा या सोरठा जप करना बताया गया है, उसको सिद्ध करने के लिये एक दिन हवन की सामग्री से उसके द्वारा (चौपाई, दोहा या सोरठा) १०८ बार हवन करना चाहिये। यह हवन केवल एक दिन करना है। मामूली शुद्ध मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर अग्नि रखकर उसमें आहुति दे देनी चाहिये। प्रत्येक आहुति में चौपाई आदि के अन्त में ‘स्वाहा’ बोल देना चाहिये। प्रत्येक आहुति लगभग पौन तोले की (सब चीजें मिलाकर) होनी चाहिये। इस हिसाब से १०८ आहुति के लिये एक सेर (८० तोला) सामग्री बना लेनी चाहिये। कोई चीज कम-ज्यादा हो तो कोई आपत्ति नहीं। पञ्चमेवा में पिश्ता, बादाम, किशमिश (द्राक्षा), अखरोट और काजू ले सकते हैं। इनमें से कोई चीज न मिले तो उसके बदले नौजा या मिश्री मिला सकते हैं। केसर शुद्ध ४ आने भर ही डालने से काम चल जायेगा। हवन करते समय माला रखने की आवश्यकता १०८ की संख्या गिनने के लिये है। बैठने के लिये आसन ऊन का या कुश का होना चाहिये। सूती कपड़े का हो तो वह धोया हुआ पवित्र होना चाहिये। मन्त्र सिद्ध करने के लिये यदि लंकाकाण्ड की चौपाई या दोहा हो तो उसे शनिवार को हवन करके करना चाहिये। दूसरे काण्डों के चौपाई-दोहे किसी भी दिन हवन करके सिद्ध किये जा सकते हैं। सिद्ध की हुई रक्षा-रेखा की चौपाई एक बार बोलकर जहाँ बैठे हों, वहाँ अपने आसन के चारों ओर चौकोर रेखा जल या कोयले से खींच लेनी चाहिये। फिर उस चौपाई को भी ऊपर लिखे अनुसार १०८ आहुतियाँ देकर सिद्ध करना चाहिये। रक्षा-रेखा न भी खींची जाये तो भी आपत्ति नहीं है। दूसरे काम के लिये दूसरा मन्त्र सिद्ध करना हो तो उसके लिये अलग हवन करके करना होगा। एक दिन हवन करने से वह मन्त्र सिद्ध हो गया। इसके बाद जब तक कार्य सफल न हो, तब तक उस मन्त्र (चौपाई, दोहा) आदि का प्रतिदिन कम-से-कम १०८ बार प्रातःकाल या रात्रि को, जब सुविधा हो, जप करते रहना चाहिये। कोई दो-तीन कार्यों के लिये दो-तीन चौपाइयों का अनुष्ठान एक साथ करना चाहें तो कर सकते हैं। पर उन चौपाइयों को पहले अलग-अलग हवन करके सिद्ध कर लेना चाहिये। १॰ विपत्ति-नाश के लिये “राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।” २॰ संकट-नाश के लिये “जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।। जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।। दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।” ३॰ कठिन क्लेश नाश के लिये “हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू॥” ४॰ विघ्न शांति के लिये “सकल विघ्न व्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥” ५॰ खेद नाश के लिये “जब तें राम ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए॥” ६॰ चिन्ता की समाप्ति के लिये “जय रघुवंश बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृशानू॥” ७॰ विविध रोगों तथा उपद्रवों की शान्ति के लिये “दैहिक दैविक भौतिक तापा।राम राज काहूहिं नहि ब्यापा॥” ८॰ मस्तिष्क की पीड़ा दूर करने के लिये “हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।” ९॰ विष नाश के लिये “नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।” १०॰ अकाल मृत्यु निवारण के लिये “नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट। लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।” ११॰ सभी तरह की आपत्ति के विनाश के लिये / भूत भगाने के लिये “प्रनवउँ पवन कुमार,खल बन पावक ग्यान घन। जासु ह्रदयँ आगार, बसहिं राम सर चाप धर॥” १२॰ नजर झाड़ने के लिये “स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।” १३॰ खोयी हुई वस्तु पुनः प्राप्त करने के लिए “गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।” १४॰ जीविका प्राप्ति केलिये “बिस्व भरण पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।” १५॰ दरिद्रता मिटाने के लिये “अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारि के।।” १६॰ लक्ष्मी प्राप्ति के लिये “जिमि सरिता सागर महुँ जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।। तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।” १७॰ पुत्र प्राप्ति के लिये “प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।’ १८॰ सम्पत्ति की प्राप्ति के लिये “जे सकाम नर सुनहि जे गावहि।सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।” १९॰ ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त करने के लिये “साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।।” २०॰ सर्व-सुख-प्राप्ति के लिये सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई।। २१॰ मनोरथ-सिद्धि के लिये “भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि।।” २२॰ कुशल-क्षेम के लिये “भुवन चारिदस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।।” २३॰ मुकदमा जीतने के लिये “पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।” २४॰ शत्रु के सामने जाने के लिये “कर सारंग साजि कटि भाथा। अरिदल दलन चले रघुनाथा॥” २५॰ शत्रु को मित्र बनाने के लिये “गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।” २६॰ शत्रुतानाश के लिये “बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप विषमता खोई॥” २७॰ वार्तालाप में सफ़लता के लिये “तेहि अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा॥” २८॰ विवाह के लिये “तब जनक पाइ वशिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै। मांडवी श्रुतकीरति उरमिला, कुँअरि लई हँकारि कै॥” २९॰ यात्रा सफ़ल होने के लिये “प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदयँ राखि कोसलपुर राजा॥” ३०॰ परीक्षा / शिक्षा की सफ़लता के लिये “जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥ मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥” ३१॰ आकर्षण के लिये “जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥” ३२॰ स्नान से पुण्य-लाभ के लिये “सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग। लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग।।” ३३॰ निन्दा की निवृत्ति के लिये “राम कृपाँ अवरेब सुधारी। बिबुध धारि भइ गुनद गोहारी।। ३४॰ विद्या प्राप्ति के लिये गुरु गृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥ ३५॰ उत्सव होने के लिये “सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं। तिन्ह कहुँ सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु।।” ३६॰ यज्ञोपवीत धारण करके उसे सुरक्षित रखने के लिये “जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग। पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।” ३७॰ प्रेम बढाने के लिये सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥ ३८॰ कातर की रक्षा के लिये “मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहिं अवसर सहाय सोइ होऊ।।” ३९॰ भगवत्स्मरण करते हुए आराम से मरने के लिये रामचरन दृढ प्रीति करि बालि कीन्ह तनु त्याग । सुमन माल जिमि कंठ तें गिरत न जानइ नाग ॥ ४०॰ विचार शुद्ध करने के लिये “ताके जुग पद कमल मनाउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ।।” ४१॰ संशय-निवृत्ति के लिये “राम कथा सुंदर करतारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी।।” ४२॰ ईश्वर से अपराध क्षमा कराने के लिये ” अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमा मंदिर दोउ भ्राता।।” ४३॰ विरक्ति के लिये “भरत चरित करि नेमु तुलसी जे सादर सुनहिं। सीय राम पद प्रेमु अवसि होइ भव रस बिरति।।” ४४॰ ज्ञान-प्राप्ति के लिये “छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा।।” ४५॰ भक्ति की प्राप्ति के लिये “भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपासिंधु सुखधाम। सोइ निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम।।” ४६॰ श्रीहनुमान् जी को प्रसन्न करने के लिये “सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपनें बस करि राखे रामू।।” ४७॰ मोक्ष-प्राप्ति के लिये “सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। काल सर्प जनु चले सपच्छा।।” ४८॰ श्री सीताराम के दर्शन के लिये “नील सरोरुह नील मनि नील नीलधर श्याम । लाजहि तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम ॥” ४९॰ श्रीजानकीजी के दर्शन के लिये “जनकसुता जगजननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की।।” ५०॰ श्रीरामचन्द्रजी को वश में करने के लिये “केहरि कटि पट पीतधर सुषमा सील निधान। देखि भानुकुल भूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।” ५१॰ सहज स्वरुप दर्शन के लिये “भगत बछल प्रभु कृपा निधाना। बिस्वबास प्रगटे भगवाना।।” #📕लाल किताब उपाय🔯 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🐍कालसर्प दोष परिहार #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
📕लाल किताब उपाय🔯 - कड़वा सच किसी भी व्यक्ति को ज्यादा सुधारना चाहोगे तो वो आपका दुश्मन बन जायेगा R gfaar @ कड़वा सच किसी भी व्यक्ति को ज्यादा सुधारना चाहोगे तो वो आपका दुश्मन बन जायेगा R gfaar @ - ShareChat
#😎मज़ेदार पोस्ट 🤩 श्री रामचरित मानस के सिद्ध ‘मन्त्र’ नियम- मानस के दोहे-चौपाईयों को सिद्ध करने का विधान यह है कि किसी भी शुभ दिन की रात्रि को दस बजे के बाद अष्टांग हवन के द्वारा मन्त्र सिद्ध करना चाहिये। फिर जिस कार्य के लिये मन्त्र-जप की आवश्यकता हो, उसके लिये नित्य जप करना चाहिये। वाराणसी में भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मन्त्र-शक्ति प्रदान की है-इसलिये वाराणसी की ओर मुख करके शंकरजी को साक्षी बनाकर श्रद्धा से जप करना चाहिये। अष्टांग हवन सामग्री १॰ चन्दन का बुरादा, २॰ तिल, ३॰ शुद्ध घी, ४॰ चीनी, ५॰ अगर, ६॰ तगर, ७॰ कपूर, ८॰ शुद्ध केसर, ९॰ नागरमोथा, १०॰ पञ्चमेवा, ११॰ जौ और १२॰ चावल। जानने की बातें- जिस उद्देश्य के लिये जो चौपाई, दोहा या सोरठा जप करना बताया गया है, उसको सिद्ध करने के लिये एक दिन हवन की सामग्री से उसके द्वारा (चौपाई, दोहा या सोरठा) १०८ बार हवन करना चाहिये। यह हवन केवल एक दिन करना है। मामूली शुद्ध मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर अग्नि रखकर उसमें आहुति दे देनी चाहिये। प्रत्येक आहुति में चौपाई आदि के अन्त में ‘स्वाहा’ बोल देना चाहिये। प्रत्येक आहुति लगभग पौन तोले की (सब चीजें मिलाकर) होनी चाहिये। इस हिसाब से १०८ आहुति के लिये एक सेर (८० तोला) सामग्री बना लेनी चाहिये। कोई चीज कम-ज्यादा हो तो कोई आपत्ति नहीं। पञ्चमेवा में पिश्ता, बादाम, किशमिश (द्राक्षा), अखरोट और काजू ले सकते हैं। इनमें से कोई चीज न मिले तो उसके बदले नौजा या मिश्री मिला सकते हैं। केसर शुद्ध ४ आने भर ही डालने से काम चल जायेगा। हवन करते समय माला रखने की आवश्यकता १०८ की संख्या गिनने के लिये है। बैठने के लिये आसन ऊन का या कुश का होना चाहिये। सूती कपड़े का हो तो वह धोया हुआ पवित्र होना चाहिये। मन्त्र सिद्ध करने के लिये यदि लंकाकाण्ड की चौपाई या दोहा हो तो उसे शनिवार को हवन करके करना चाहिये। दूसरे काण्डों के चौपाई-दोहे किसी भी दिन हवन करके सिद्ध किये जा सकते हैं। सिद्ध की हुई रक्षा-रेखा की चौपाई एक बार बोलकर जहाँ बैठे हों, वहाँ अपने आसन के चारों ओर चौकोर रेखा जल या कोयले से खींच लेनी चाहिये। फिर उस चौपाई को भी ऊपर लिखे अनुसार १०८ आहुतियाँ देकर सिद्ध करना चाहिये। रक्षा-रेखा न भी खींची जाये तो भी आपत्ति नहीं है। दूसरे काम के लिये दूसरा मन्त्र सिद्ध करना हो तो उसके लिये अलग हवन करके करना होगा। एक दिन हवन करने से वह मन्त्र सिद्ध हो गया। इसके बाद जब तक कार्य सफल न हो, तब तक उस मन्त्र (चौपाई, दोहा) आदि का प्रतिदिन कम-से-कम १०८ बार प्रातःकाल या रात्रि को, जब सुविधा हो, जप करते रहना चाहिये। कोई दो-तीन कार्यों के लिये दो-तीन चौपाइयों का अनुष्ठान एक साथ करना चाहें तो कर सकते हैं। पर उन चौपाइयों को पहले अलग-अलग हवन करके सिद्ध कर लेना चाहिये। १॰ विपत्ति-नाश के लिये “राजिव नयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुखदायक।।” २॰ संकट-नाश के लिये “जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।। जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।। दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।” ३॰ कठिन क्लेश नाश के लिये “हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू॥” ४॰ विघ्न शांति के लिये “सकल विघ्न व्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥” ५॰ खेद नाश के लिये “जब तें राम ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए॥” ६॰ चिन्ता की समाप्ति के लिये “जय रघुवंश बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृशानू॥” ७॰ विविध रोगों तथा उपद्रवों की शान्ति के लिये “दैहिक दैविक भौतिक तापा।राम राज काहूहिं नहि ब्यापा॥” ८॰ मस्तिष्क की पीड़ा दूर करने के लिये “हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।” ९॰ विष नाश के लिये “नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।” १०॰ अकाल मृत्यु निवारण के लिये “नाम पाहरु दिवस निसि ध्यान तुम्हार कपाट। लोचन निज पद जंत्रित जाहिं प्रान केहि बाट।।” ११॰ सभी तरह की आपत्ति के विनाश के लिये / भूत भगाने के लिये “प्रनवउँ पवन कुमार,खल बन पावक ग्यान घन। जासु ह्रदयँ आगार, बसहिं राम सर चाप धर॥” १२॰ नजर झाड़ने के लिये “स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।” १३॰ खोयी हुई वस्तु पुनः प्राप्त करने के लिए “गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।” १४॰ जीविका प्राप्ति केलिये “बिस्व भरण पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।” १५॰ दरिद्रता मिटाने के लिये “अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारि के।।” १६॰ लक्ष्मी प्राप्ति के लिये “जिमि सरिता सागर महुँ जाही। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।। तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।” १७॰ पुत्र प्राप्ति के लिये “प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान। सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।’ १८॰ सम्पत्ति की प्राप्ति के लिये “जे सकाम नर सुनहि जे गावहि।सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।” १९॰ ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त करने के लिये “साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।।” २०॰ सर्व-सुख-प्राप्ति के लिये सुनहिं बिमुक्त बिरत अरु बिषई। लहहिं भगति गति संपति नई।। २१॰ मनोरथ-सिद्धि के लिये “भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि।।” २२॰ कुशल-क्षेम के लिये “भुवन चारिदस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।।” २३॰ मुकदमा जीतने के लिये “पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।” २४॰ शत्रु के सामने जाने के लिये “कर सारंग साजि कटि भाथा। अरिदल दलन चले रघुनाथा॥” २५॰ शत्रु को मित्र बनाने के लिये “गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।” २६॰ शत्रुतानाश के लिये “बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप विषमता खोई॥” २७॰ वार्तालाप में सफ़लता के लिये “तेहि अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयउ भृगुकुल कमल पतंगा॥” २८॰ विवाह के लिये “तब जनक पाइ वशिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै। मांडवी श्रुतकीरति उरमिला, कुँअरि लई हँकारि कै॥” २९॰ यात्रा सफ़ल होने के लिये “प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदयँ राखि कोसलपुर राजा॥” ३०॰ परीक्षा / शिक्षा की सफ़लता के लिये “जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥ मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥” ३१॰ आकर्षण के लिये “जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥” ३२॰ स्नान से पुण्य-लाभ के लिये “सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग। लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग।।” ३३॰ निन्दा की निवृत्ति के लिये “राम कृपाँ अवरेब सुधारी। बिबुध धारि भइ गुनद गोहारी।। ३४॰ विद्या प्राप्ति के लिये गुरु गृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल विद्या सब आई॥ ३५॰ उत्सव होने के लिये “सिय रघुबीर बिबाहु जे सप्रेम गावहिं सुनहिं। तिन्ह कहुँ सदा उछाहु मंगलायतन राम जसु।।” ३६॰ यज्ञोपवीत धारण करके उसे सुरक्षित रखने के लिये “जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग। पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।” ३७॰ प्रेम बढाने के लिये सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥ ३८॰ कातर की रक्षा के लिये “मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहिं अवसर सहाय सोइ होऊ।।” ३९॰ भगवत्स्मरण करते हुए आराम से मरने के लिये रामचरन दृढ प्रीति करि बालि कीन्ह तनु त्याग । सुमन माल जिमि कंठ तें गिरत न जानइ नाग ॥ ४०॰ विचार शुद्ध करने के लिये “ताके जुग पद कमल मनाउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ।।” ४१॰ संशय-निवृत्ति के लिये “राम कथा सुंदर करतारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी।।” ४२॰ ईश्वर से अपराध क्षमा कराने के लिये ” अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमा मंदिर दोउ भ्राता।।” ४३॰ विरक्ति के लिये “भरत चरित करि नेमु तुलसी जे सादर सुनहिं। सीय राम पद प्रेमु अवसि होइ भव रस बिरति।।” ४४॰ ज्ञान-प्राप्ति के लिये “छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा।।” ४५॰ भक्ति की प्राप्ति के लिये “भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपासिंधु सुखधाम। सोइ निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम।।” ४६॰ श्रीहनुमान् जी को प्रसन्न करने के लिये “सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपनें बस करि राखे रामू।।” ४७॰ मोक्ष-प्राप्ति के लिये “सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। काल सर्प जनु चले सपच्छा।।” ४८॰ श्री सीताराम के दर्शन के लिये “नील सरोरुह नील मनि नील नीलधर श्याम । लाजहि तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम ॥” ४९॰ श्रीजानकीजी के दर्शन के लिये “जनकसुता जगजननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की।।” ५०॰ श्रीरामचन्द्रजी को वश में करने के लिये “केहरि कटि पट पीतधर सुषमा सील निधान। देखि भानुकुल भूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।” ५१॰ सहज स्वरुप दर्शन के लिये “भगत बछल प्रभु कृपा निधाना। बिस्वबास प्रगटे भगवाना।।”
😎मज़ेदार पोस्ट 🤩 - कड़वा सच किसी भी व्यक्ति को ज्यादा सुधारना चाहोगे तो वो आपका दुश्मन बन जायेगा R gfaar @ कड़वा सच किसी भी व्यक्ति को ज्यादा सुधारना चाहोगे तो वो आपका दुश्मन बन जायेगा R gfaar @ - ShareChat
#🔯ज्योतिष #🔯दैनिक वास्तु टिप्स✅ जय श्री महाकाल मैं पहले तो सबसे पहले अगर किसको मेरी बात का बुरा लगे तो वह मुझे अनफ्रेंड कर सकता है आजकल फेसबुक पर टीवी पर ट्विटर पर इंस्टाग्राम पर युटुब चैनल पर जो यह मेरे भाई पंडित है या नहीं है मुझे नहीं पता है बाकी इतने एस्ट्रोलॉजर भरे हुए हैं जिनको यह नहीं पता कि ज्योतिष क्या है और क्या एस्ट्रोलॉजी है और लोगों को भ्रम में डाल रहे हैं और अपनी जेब पैसे से भर रहे हैं कल तक एक चाय बनाने वाला अचानक से पंडित बन जाता है उसे यह नहीं पता कि पंडिताई होती क्या है आजकल लड़कियां और लड़के एस्ट्रोलॉजर बने हुए हैं जिनको यह नहीं पता कि ज्योतिष है क्या वह खुद तो नर्क में जाना है लेकिन दूसरों को भी साथ में नरक में ले जाने की कोशिश कर रहा है आजकल का माहौल यह है ₹10000 टीवी चैनल वाले को दो टीवी पर आ जाओ और फेमस हो जाओ और लोगों को दो तीन उपाय बता दो और उनसे बड़ा कोई ज्योतिषी नहीं है हिंदुस्तान के अंदर ऐसे ज्योतिषियों को बाहर कर देना चाहिए क्योंकि इनकी वजह से हर चीज का माहौल बिगड़ रहा है पाठशाला में दो-तीन महीने गए और ऐसे विद्वान पंडित बन गए कि उनके बराबर का कोई विद्वान पंडित नहीं है तो ऐसी मेरे भाई पहले तो पूरा ज्ञान ले पंचांग का उसके बाद में लोगों को राय दें क्योंकि ज्योतिष एक सर्वोत्तम विद्या है और आप जैसे लोग पाखंडी इसको खराब ना करें आपकी अति मेहरबानी होगी और मैं भी कोई ज्यादा जानकार नहीं हूं लेकिन मैं इस वजह से बोल रहा हूं कि आज के माहौल के अंदर ऐसे ज्योतिषी देश को भ्रम में डालकर गलत काम ना करें एस्ट्रो मनोज कौशिक बहल हरियाणा 8708198423 9416361308#🔯वास्तु दोष उपाय #🔯वास्तु दोष उपाय #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔