आप सभी को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏 #🌺राधा कृष्ण💞 #🙏गुरु महिमा😇 #😊कृष्ण कथाएं #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️
. "श्रीकृष्ण का बन्धन"
एक गोपी के घर लाला (श्री कृष्ण) माखन खा रहे थे। उसी समय गोपी ने लाला को पकड लिए। तब कन्हैया बोले–‘तेरे धनी की सौगंध खा कर कहता हूँ, अब फिर कभी भी तेरे घर में नहीं आऊँगा।’
गोपी ने कहा–‘मेरे धनी की सौगंध क्यों खाता है ?’ गोपी और ज्यादा खीझ जाती है और लाला को धमकाती है–‘परन्तु तू मेरे घर आया ही क्यों ?’
कन्हैया ने कहा–‘अरी सखी ! तू रोज कथा में जाती है, फिर भी तू मेरा-तेरा छोडती नहीं–इस घर का मै धनी हूँ, यह घर मेरा है।’
गोपी को आनन्द हुआ कि मेरे घर को कन्हैया अपना घर मानता है, कन्हैया तो सबका मालिक है, सभी घर उसी के हैं। उसको किसी कि आज्ञा लेने कि जरूरत नहीं।
गोपी कहती है–‘तुने माखन क्यों खाया ?’
लाला ने कहा–‘माखन किसने खाया है ? इस माखन में चींटी चढ़ गई थी तो उसे निकलने को हाथ डाला था इतने में ही तू टपक पड़ी।’
गोपी कहती है–‘परन्तु लाला ! तेरे ओंठो के ऊपर भी तो माखन चिपका हुआ है ?’
कन्हैया ने कहा–‘चींटी निकालता था, तभी ओंठो के ऊपर भी मक्खी बैठ गई, उसको उड़ाने लगा तो माखन ओंठो पर लग गया होगा।’
कन्हैया जैसे बोलते हैं, ऐसा बोलना किसी को आता नहीं। कन्हैया जैसे चलते हैं, वैसे चलना भी किसी को आता नहीं।
गोपी ने लाला को घर में खम्भे के साथ डोरी से बाँध दिया, कन्हैया का श्रीअंग बहुत ही कोमल है गोपी ने जब डोरी कस कर बाँधी तो लाला की आँख में पानी आ गया।
गोपी को दया आई, उसने लाला से पूछा–‘लाला ! तुझे कोई तकलीफ है क्या ?’
लाला ने गर्दन हिला कर कहा–‘मुझे बहुत दुःख हो रहा है, डोरी जरा ढीली करो।’
गोपी ने विचार किया कि लाला को डोरी से कस कर बाँधना ठीक नहीं, मेरे लाला को दुःख होगा। इसलिए गोपी ने डोरी थोड़ी ढीली रखी–मैंने तो सखियों को खबर देने के लिये लाला को बाँधा है।
जीवन की भक्ति से तुम लाला को बाँधो परन्तु किसी से कहना नहीं, तुम खूब भक्ति करो, परन्तु उसे प्रकाशित मत करो, भक्ति प्रकाशित हो जाएगी तो भगवान सटक जायेंगे, भक्ति का प्रकाश होने से भक्ति बढ़ती नहीं, भक्ति में आनद आता नहीं।
बाल कृष्ण सूक्ष्म शरीर करके डोरी से बाहर निकल गए और गोपी को अँगूठा दिखा कर कहा–‘तुझे बाँधना ही कहा आता है ?’
गोपी कहती है–‘तो मुझे बता तो सही, किस तरह से बाँधना चाहिए ?’
गोपी को तो लाला के साथ खेल करना था, लाला गोपी को बाँधते है। योगीजन मन से श्री कृष्ण का स्पर्श करते है तो समाधि लग जाती है। यहाँ तो गोपी को प्रत्यक्ष श्री कृष्ण का स्पर्श हुआ है। गोपी लाला के दर्शन में तल्लीन हो जाती है। लाला ने गोपी को बाँध दिया। गोपी कहती है–‘लाला छोड़ ! छोड़ !’
लाला कहते हैं–‘मुझे बाँधना आता है, छोड़ना तो आता ही नहीं।’
यह जीव एक ऐसा है, जिसको छोड़ना आता है, चाहे जितना प्रगाढ़ सम्बन्ध हो परन्तु स्वार्थ सिद्ध होने पर उसको भी छोड़ सकता है। परमात्मा एक बार बाँधने के बाद छोड़ते नही।
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"जय जय श्री राधे"
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‘श्रीजी की चरण सेवा’
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यूँ पलके बिछा कर तेरा इंतज़ार करते है,
यह वो गुनाह है जो
हम बार बार करते है,
जलकर हसरत की राह पर चिराग,
हम सुबह और शाम तेरे मिलने का इंतज़ार करते है. #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #😊कृष्ण कथाएं #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🌺राधा कृष्ण💞 #🙏गुरु महिमा😇
बाबा ने लाला कू कई बार कह लइ कि लाला मोहे अपनी एश्विर्य वारी लीला मती दिखायो कर।परन्तु लाला है कि अपनी प्रभुता दिखाए बिना ना मानतो।
अब देखों लाला ने बाबा कू आवाज लगाई :- बाबा ओ बाबा देख मेरे पाव में चोट लग गई।देख तो कितनो रक्त बह रहयो है।
इतनी बात सुनते ही बाबा तुरन्त दोड़यो।और अपनी धोती में ते वस्त्र फाड़कर लाला के बहते रक्त पर लगाने लगो।
बाबा :- लाला तोहे कितनी बार कही है नंगे पांव मती डोले कर।देख कितनो रक्त बह गयो।चल जल्दी ते कुटिया🎪 में चल।यापे औषधि बनाकर बांध दुंगो तो रक्त रुक जाएगो।
इतना कहकर बाबा लाला कू गोद में उठाने लगो तो बाबा की बात सून लाला मंद-मंद मुस्कुरा दियो।
लाला कू मुस्कुराते देख बाबा कू लगो कि लाला अपनी पीड़ा छूपाइबे की कोशिश कर रहयो है।
बाबा ज्यौं ही लाला कू उठाइबे लगयो तो बाबा ने देखयो कि वा त्रिभंगी के तीसरो चरण प्रकृट ह गयो है।अर्थात लाला अपने दोनों चरण तो धरती पे धरो बैठो है और माया ते प्रकृट किये अपने तीसरे चरण कू बाबा के हाथ में दे राखयो है।जामे ते रक्त बह रहयो है।(जैसा कि आप तस्वीर में देख रहे हैं)
लाला की यह लीला देख बाबा रोष भरें स्वर में बोलयो :- लाला तोहे कितनी बार मना करी है कि बाबा कू डराइबे वारे काम मती कियो कर।
लाला :-बाबा तू मेरी चिंता करें हैं।या बात कू देखकर मोहे सुख मिले हैं।
बाबा :- लाला काऊ दिन तेरे या सुख के चक्कर में बाबा के प्राण निकर जाएगे।तोहे पतो है कि बाबा ते तो तेरो स्वेद (पसीनो) भी ना देखों जाए है और तू बाबा कू रक्त दिखा के डरा रहयो है।
लाला :- बाबा जिसे तू डर कहें है।मैं उसे प्रेम कहूँ हूँ।और मैं चाहूँ हूँ कि यह डर रूपी प्रेम सदा तेरे में बनो रहे।और तेरो स्नेह यो ही मोहे मिलतो रहे।
****(जय जय श्री राधे)**** #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏गुरु महिमा😇 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #😊कृष्ण कथाएं #🌺राधा कृष्ण💞
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