*आप सभी भाई बहन को होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनाएं* 🙏
मुकुंद माधव गोविन्द बोल:!
केशव माधव हरि हरि बोल:!
राम राम बोल हरि: नाम बोल!
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🙏होली है होली है 🙏
प्रहलाद के समान,दृढ़ विश्वास भक्ति
{श्रोता}-प्रहलाद जी का जैसे भगवान के नाम पर और भगवान के ऊपर दृढ़ विश्वास और श्रद्धा था,ऐसे अपने लोगों के श्रद्धा - विश्वास कैसे उत्पन्न होगा ?
[स्वामीजी]---वो बात मान लो। प्रहलाद जी के बात बैठ गई भगवान की!
पिताजी बहुत दुःख दियो, त्रास दी पर,(प्रहलादजी को जंच गई) रक्षा करने वाला वो एक ही है,वो ही!
आज वह होली है।
पिताजी की बहिन थी, प्रहलादजी की बुआ। तो वो कहे कि मैं अग्नि में स्नान करती हूं, मैं लेकर बैठजाऊं,तो प्रहलाद जी को गोदी में लेकर बैठगई,आग लगा दी! तो वह तो जल गई, प्रहलादजी हैं, ज्युं के त्यूं ही रहा!
तो आज वो होली है। आज के दिन या बात हुई।
हमारे यहां कहते हैं कि आज प्रहलाद जी कष्टमें हैं। आज रसोई नहीं बनावेंगे!कल उत्सव मनाएंगे! इस वास्ते कल अच्छा उत्सव मनाया जाय!
तो वह विश्वास आप कर लो। ठाकुरजी पहले से आजकल सस्ते हैं। थोड़े में ही पास कर देते हैं! विश्वास करलो तो सब काम बने, जरूर।
कृपा जबर्दस्ती करते हैं भगवान्। आप ख्याल रखो तो आपके जीवन में कई बाते मिलती हैं! तो भगवान पर विश्वास बढ़ाओ अपने! भगवान रक्षा करते हैं, सब विश्वास करो!
तो आज रात्रि में वह मुहूर्त है-होलिका।उस समय होलिका मना ली! होलिका मर गई, प्रहलाद जी बच गए!
तो अपने भगवान पर विश्वास बढ़ाओ!
[{परम श्रद्धेय स्वामी रामसुखदास जी महाराज के मुखारविंद से"होली का सत्संग"प्रहलाद जी का भगवान में दृढ़ विश्वास}]
गीता प्रकाशन, गोरखपुर से प्रकाशित पुस्तक - सत्संग के अमृत कण पृष्ठ संख्या - २०७}]
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श्रीमन नारायण नारायण हरि: हरि:
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सखी आज खेलूंगी होरी रे रसिया
कान्हा पिया मोरै मन में बसिया
खेलूंगी होरी रे रसिया.....
सास ननद कोऊ रोक न पावैंगे
जेठ, ससुर कछु कह नहीं पावैंगे
कोकिल तन कूहै डाल डाल अमिया
खेलूंगी होरी रे रसिया.....
मत्त मयूर मन बरखा में निरतत
प्राण पपीहा पिय बाट में विहरत
सूनी सेज मैनें जागी जागी रतियां
खेलूंगी होरी रे रसिया.....
सारे रंग भर पिय पै डारूं
भर भर पिचकारी वाहै मारूं
नैनन सौं गोपाल निहारूं
देत कृष्णांगी गलबहियां
खेलूंगी होरी रे रसिया.....
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फुलेरा दूज की हार्दिक शुभकामनाएं |💐🌹🎉💖🌸🌺 #🌺राधा कृष्ण💞 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #😊कृष्ण कथाएं #🙏गुरु महिमा😇 #🌸 जय श्री कृष्ण😇
यह कथा ना तो आपको किसी ग्रंथ में मिलेगी और ना ही आज से पहले आपने सुनी होगी।इसलिए एक दम सावधान होकर पढ़े और लीला का आनंद लें।
जैसा चिन्तन रहेगा भाव भी वैसा ही बनेगा।
कल सारा दिन भगवान् शिव के विवाह की कथाओं का कानों से श्रवण और मन से लीलाओं का चिन्तन चलता रहा।
अब आपको यह भी पता है यदि मन में कोई भी लीला चल रही है तो उस लीला में लाला और बाबा तो होंगे ही।क्योंकि लीला चाहे कोई भी हो।वो लाला और बाबा के इर्दगिर्द घुमती रहती है।
तो कल भोले बाबा की बारात में बाबा कू भी लाला के संग निमंत्रण था।भोले बाबा का विशेष आग्रह था कि लाला कू संग अवश्य लाए।
अब आपको यह भी पता है कि अभी कुछ वर्ष पहले तक ऐसी प्रथा थी कि बारात में माताएं नहीं जाती थी।जब कि यह जो लीला चल रही है वो द्वापर युग की है।
इसलिए जशोदा ने भोले बाबा के विशेष आग्रह पर ना चाहते हुए अपनी गोद के लाला कू बाबा के संग भेज दियो।
अब भोले बाबा के विवाह की कथा तो आप सबने सुनी ही होगी कि कैसे भोले बाबा बारात लेकर महाराज हिमालय के द्वार पर आते है और कैसे नैना मईया भोले बाबा का स्वरूप देखकर भयभीत होकर मूर्छित हो जाती है।और फिर कैसे भगवान् नारायण के कहने पर भोले बाबा अपनी वेशभूषा परिवर्तन करते है।और देवर्षि नारद नैना मईया को समझाते हैं।
बस इसी सब में काफी लम्बा समय निकल जाता है।और जैसा कि हमनें आपको बताया कि लाला अभी गोद का है।उसे अधिक देर तक जशोदा मईया की गोद से दूर रहने का अभ्यास नहीं है।और अभी वो है भी मईया के दूध पर।
अब अधिक विलम्ब होने के कारण लाला का रुदन प्रारंभ हो गया।धीरे-धीरे रुदन का स्वर इतना तेज हो गया कि भीतर भवन में बैठी महाराज हिमालय की कन्या (माता पार्वती) के कानों में पड़ने लगा।उन्होंने एक दासी के द्वारा लाला कू अपने भवन में बुला भेजा।दासी ने बाबा से लाला कू ले जाकर माता पार्वती की गोद में दे दिया।
माता पार्वती ने सभी दासियों से कहा :- हमें एकांत चाहिए।
सभी दासियाॅं वहाँ से चली जाती है।
और तभी माता पार्वती लाला कू अपने वक्षस्थल से लगाकर दूध पान करवाती है।
और उधर जब देवर्षि नारद माता नैना को समझा रहे होते हैं तो वो माता नैना को इस दृश्य के भी दर्शन करवाते हैं।जो इस समय माता पार्वती के भवन में चल रहा है।
माता नैना इस दृश्य को देखकर स्तम्भ सी रह जाती है कि एक कुंवारी कन्या के वक्षो से दूध कैसे आ सकता है।
तब देवर्षि नारद उन्हें समझाते हैं कि जिसे वो केवल अपनी पुत्री और कुॅंवारी कन्या समझ रही है वो कोई सामान्य स्त्री नहीं बल्कि जगत माता है जो पूरे विश्व का पालन पोषण करती है।
देवर्षि की बात सुन माता नैना अपने आपको ध्यान मानती है कि स्वयं जगत माता मेरे घर में मेरी पुत्री के रूप में आई है और मुझे जगत माता और जगत पिता का गठबंधन करवाने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है।
****(जय जय श्री राधे)**** #🙏गुरु महिमा😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #😊कृष्ण कथाएं #🌺राधा कृष्ण💞





