Radha Rani
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#🙏गुरु महिमा😇 #😊कृष्ण कथाएं #🌺राधा कृष्ण💞 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🌸 जय श्री कृष्ण😇
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00:23
🌿 भक्त की पुकार पर जब कन्हैया स्वयं भोग लेने आए वृंदावन के समीप बसे एक छोटे से गाँव में गोकुलदास नाम का एक गरीब किसान रहता था। उसके पास न धन था, न ही कोई ऐश्वर्य… लेकिन उसके हृदय में बसे थे स्वयं श्रीकृष्ण — अटूट प्रेम और अडिग विश्वास के साथ। हर दिन वह अपने खेत में मेहनत करता, और जो भी अन्न मिलता, उसका पहला भाग वह अपने ठाकुरजी को अर्पित करता। उसके घर में एक छोटी-सी तुलसी-मंची थी, जहाँ मिट्टी की मूर्ति में वह अपने कन्हैया को सजाता और बड़े प्रेम से भोग लगाता। गाँव के लोग उसका मज़ाक उड़ाते— “अरे गोकुलदास! ये मिट्टी का भगवान क्या खाएगा तुम्हारा भोग?” गोकुलदास बस मुस्कुरा देता— “तुम्हें नहीं दिखता, पर मेरे कन्हैया हर अर्पण स्वीकार करते हैं…” 🌑 वो रात जिसने सब बदल दिया… एक दिन ऐसा आया जब उसके घर में एक दाना भी नहीं बचा। खेत सूख चुके थे… बच्चे भूखे सो गए… पत्नी की आँखों में आँसू थे। लेकिन गोकुलदास फिर भी तुलसी के पास बैठा और बोला— “हे कन्हैया! आज मैं तुम्हें कुछ भी नहीं दे सकता… पर मेरा प्रेम तो हमेशा तुम्हारा है…” उसकी आँखों से आँसू बहते रहे… और वह भूखा ही सो गया। ✨ आधी रात का चमत्कार रात के सन्नाटे में अचानक दरवाज़े पर दस्तक हुई… जब दरवाज़ा खुला, तो सामने एक अद्भुत ग्वालबाल खड़ा था— सिर पर मोरपंख, चेहरे पर दिव्य मुस्कान, और हाथ में माखन से भरा मटका। वह बोला— “माँ! गोकुलदास काका ने मुझे इतना प्रेम दिया है… क्या मैं उन्हें भूखा देख सकता हूँ?” इतना कहकर उसने पूरा भंडार अन्न और माखन से भर दिया… और मुस्कुराते हुए अदृश्य हो गया। 🌅 सुबह का आश्चर्य सुबह जब गाँववालों ने देखा कि गोकुलदास का घर अन्न से भरा है, तो सब चौंक गए। “ये सब कैसे हुआ?” गोकुलदास की पत्नी ने आँसू भरी आँखों से कहा— “कल रात… तुम्हारे कन्हैया खुद आए थे…” यह सुनते ही गोकुलदास दौड़कर तुलसी के पास गया— “प्रभु! आपने तो मेरी लाज रख ली…” 🙏 💫 कथा का सार (Heart Touching Message) 👉 सच्चे प्रेम और विश्वास से किया गया भोग कभी व्यर्थ नहीं जाता। 👉 जब दुनिया साथ छोड़ देती है, तब भगवान स्वयं साथ निभाते हैं। 👉 भक्ति में दिखावा नहीं, सच्चा समर्पण ही सबसे बड़ा धन है। 👉 अगर आप भी मानते हैं कि भगवान अपने भक्तों की पुकार जरूर सुनते हैं, तो “जय श्रीकृष्ण” लिखकर अपनी श्रद्धा प्रकट करें 🙏 👉 इस कथा को शेयर करें ताकि हर किसी के दिल में विश्वास जागे ❤️ #जयश्रीकृष्ण #भक्ति_की_शक्ति #कन्हैया_लीला #वृंदावन #भक्त_और_भगवान #KrishnaBhakti #DivineMiracle #FaithOverFear #BhaktiStory #🤗जया किशोरी जी🕉️ #😊कृष्ण कथाएं #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌺राधा कृष्ण💞 #🙏गुरु महिमा😇
🤗जया किशोरी जी🕉️ - ভানর पूण घरभूखा था... तब आधी रात को कन्हैया कन खुद माखन लेकर पहुँचे!  ভানর पूण घरभूखा था... तब आधी रात को कन्हैया कन खुद माखन लेकर पहुँचे! - ShareChat
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🙏गुरु महिमा😇 - राधैराधै  रधैराधै a k s h aY s i r 8 9 राधैराधै  रधैराधै a k s h aY s i r 8 9 - ShareChat
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00:28
ब्रज के खेतों में सुनहरी धूप खिली थी। कुंभनदास जी, जिनका रोम-रोम श्रीनाथजी के प्रेम में रचा-बसा था, अपने खेत में खड़े थे। उनका मन फसल काटने में नहीं, बल्कि उस "लाला" (बालकृष्ण) में अटका था, जो उनके हर श्वास में बसते थे। अचानक, एक मधुर स्वर गूंजा, "कुंभन... मुझे भूख लगी है! पर आज मुझे मंदिर के राजसी छप्पन भोग नहीं चाहिए। मुझे तुम्हारे घर का वो सोंधा स्वाद चाहिए।" कुंभनदास जी मुस्कुराए, उनकी आँखें भर आईं। "मेरे प्रभु को क्या चाहिए?" श्रीनाथजी ने नटखटपन से उत्तर दिया, "एक सीधा-सादा भोज! ज्वार की महेरी (दलिया), ताजा दही, दूध, बेजर की सोंधी रोटियाँ, टेटी (कैर) की सब्जी और केरड़े का तीखा अचार... बस इतना ही, इससे ज्यादा कुछ नहीं!" सरल तैयारी कुंभनदास जी की भतीजी कलेवा (भाथा) लेकर खेत पर पहुँची। अपने चाचा की आँखों में दिव्य चमक देखकर वह समझ गई कि आज कोई अलौकिक लीला होने वाली है। "काका," उसने कहा, "मैं बेजर का आटा, टेटी की सब्जी और अचार तो लाई हूँ, पर दूध घर पर गर्म हो रहा है।" "बेटी, आज दही मत जमाना," कुंभनदास जी ने उत्सुकता से कहा। "जल्दी से घर जा, पिसा हुआ ज्वार और दूध की गरम हांडी ले आ। आज सखाओं ने मेरे ही खेत में 'उजाणी' (भोज) रखी है!" चाचा के स्वभाव से परिचित भतीजी बिना कुछ पूछे घर की ओर दौड़ पड़ी। इधर कुंभनदास जी ने झोपड़ी के पीछे चूल्हा तैयार किया। हाथ-पंखे से कोयले सुलगाए, आटे में नमक और जल मिलाकर उसे गूँथा और अपने हाथों से थपथपाकर रोटियाँ बनाने लगे। रोटी की हर थपक उनके हृदय की धड़कन थी, और तवे पर फूलती हर रोटी एक प्रार्थना। वन-भोज (छाक लीला) जल्द ही ग्वाल-बाल (सखा) आ पहुँचे, हर कोई अपने घर से भोजन की एक-एक हांडी लाया था। लेकिन त्रिलोकी के नाथ, श्रीनाथजी ने सीधे कुंभनदास जी के घर से आई हांडी को अपने पास रख लिया। एक घने, छायादार पेड़ के नीचे 'छाक लीला' शुरू हुई। * वहाँ खिलखिलाहट थी। * वहाँ दिव्य खेल थे। * और वहाँ एक-दूसरे का जूठा खाने का निस्वार्थ प्रेम था। जब सब भोजन के लिए बैठे, तो सबने अपनी-अपनी हांडी से पकवान परोसे। लेकिन जब सबने श्रीनाथजी की हांडी से चखा—वही जिसे कुंभनदास जी ने तैयार किया था—तो सब ठिठक गए। वह केवल भोजन नहीं था, वह अमृत था। साधारण बेजर की रोटी और टेटी की सब्जी का स्वाद स्वर्ग के व्यंजनों से भी अधिक दिव्य था। आनंद का गायन तृप्त होकर श्रीनाथजी ने कुंभनदास जी की ओर देखा और धीरे से बोले, "कुंभन, मेरे लिए कुछ गाओ।" परमानंद की अवस्था में कुंभनदास जी ने 'सारंग राग' में कीर्तन छेड़ दिया "ब्रज में बड़ो मेवा यह टेटी... बेजर की रोटी के संग इसका स्वाद अनूठा है।" अगर आपको कथा संग्रह की पोस्ट पसंद आती है तो आज ही सब्सक्राइब करें कथा संग्रह उन्होंने गाया कि कैसे घर-घर से अलग-अलग स्वाद की 'छाक' आई है—खट्टी, मीठी, नमकीन—और कैसे वे सब प्रभु के प्रेम में एक हो गई हैं। कीर्तन समाप्त हुआ, तो उपवन में एक गहरा सन्नाटा छा गया। श्रीनाथजी और सखा चुपचाप अपनी दिव्य लीलाओं में लौट गए। पर कुंभनदास जी वहीं पेड़ के नीचे समाधि में खोए रहे। वे संसार को भूल गए। वे अपने शरीर को भूल गए। अब वे न किसान थे, न कवि; वे बस एक ऐसी आत्मा थे जो प्रभु की उपस्थिति की खुशबू में डूबी थी। सूरज ढल गया, तारे निकल आए, पर कुंभनदास जी निश्चल बैठे रहे, अपने हृदय के मंदिर में उस 'छाक लीला' का आनंद लेते हुए। #🌺राधा कृष्ण💞 #😊कृष्ण कथाएं #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️
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00:31
अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएं 🌺🌺🌺🙏🙏🙏🌺🌺🌺 राधे कृष्णा 🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #😊कृष्ण कथाएं #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌺राधा कृष्ण💞
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00:27
श्री जगन्नाथ पुरी के पास रहने वाला रघु केवट अत्यंत दयालु और भगवद भक्त था। मछली पकड़ना उसका पैतृक व्यवसाय था, किंतु जीव-हिंसा से उसका मन ग्लानि से भर जाता था। एक दिन जब उसने एक तड़पती हुई मछली में साक्षात नारायण के दर्शन किए, तो उसने मछली की रक्षा की और सदैव के लिए हिंसा का त्याग कर दिया। रघु की इस निस्वार्थ दया और अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए। रघु अब पूर्णतः भक्ति में लीन रहने लगा और उसकी ख्याति एक सिद्ध महात्मा के रूप में फैल गई। कथा का सबसे मर्मस्पर्शी क्षण तब आता है जब स्वयं भगवान जगन्नाथ, मंदिर के राजसी भोग को छोड़कर रघु की साधारण कुटिया में उसके हाथ से भोजन ग्रहण करने पहुँच जाते हैं। उधर मंदिर के 'भोग मंडप' के दर्पण में प्रभु का प्रतिबिंब दिखना बंद हो जाता है, जिससे राजा और पुजारी व्याकुल हो उठते हैं। अंततः, भगवान स्वप्न में राजा को बताते हैं कि वे अपने भक्त रघु के प्रेम के वशीभूत होकर उसकी कुटिया में हैं। राजा स्वयं रघु को ससम्मान पुरी लेकर आते हैं, और भक्त की उपस्थिति मात्र से मंदिर में प्रभु का सान्निध्य पुनः लौट आता है। यह कथा सिद्ध करती है कि ईश्वर मंदिर की भव्यता में नहीं, बल्कि भक्त के कोमल भाव और जीव-दया में बसते हैं। राधे राधे मार्गदर्शक - श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज प्रेरणास्त्रोत - श्री श्री १००८ श्री स्वामी हरिहरानंद जी महाराज , होलीपुरा #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🌺राधा कृष्ण💞 #😊कृष्ण कथाएं #🙏गुरु महिमा😇
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - भक् बँधा जब भाव में, छूटी कुल की रीत। मंदिर सूना " पड़ गया, जीत गई फिर प्रीत।। भोग मण्डप ك भक् बँधा जब भाव में, छूटी कुल की रीत। मंदिर सूना " पड़ गया, जीत गई फिर प्रीत।। भोग मण्डप ك - ShareChat
एक गाँव में कृष्णा बाई (सुखिया) नाम की निर्धन वृद्धा रहती थी, जो दूसरों के घरों में काम करके अपना जीवन यापन करती थी। वह भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थी और प्रतिदिन मेहनत से माला बनाकर उन्हें अर्पित करती थी। उसकी अटूट भक्ति देख भगवान ने उसे स्वप्न में आने वाले प्रलय की चेतावनी दी और गाँव छोड़ने को कहा। जब कृष्णा बाई गाँव छोड़कर जाने लगी, तो गाँव वालों ने उसका उपहास किया। गाँव की सीमा पर पहुँचते ही भगवान ने उसे याद दिलाया कि वह माला बनाने वाली 'सुई' झोपड़ी में ही भूल आई है। सुई के प्रति भगवान की यह चिंता देख वह पुनः गाँव की ओर दौड़ी और सुई लेकर सुरक्षित बाहर आई। जैसे ही वह और उसे ले जाने वाला भक्त गाड़ीवान सुरक्षित स्थान पर पहुँचे, पूरा गाँव जलमग्न हो गया। सीख: यह कथा सिखाती है कि भगवान अपने भक्त की छोटी-से-छोटी वस्तु (सुई) तक का ध्यान रखते हैं। जब तक भक्त की एक सुई भी गाँव में थी, भगवान ने प्रलय को रोक कर रखा। उनकी कृपा और सुरक्षा अपने भक्तों पर सदैव बनी रहती है। मार्गदर्शक - श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज प्रेरणास्त्रोत - श्री श्री १००८ श्री स्वामी हरिहरानंद जी महाराज , होलीपुरा #🌺राधा कृष्ण💞 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏गुरु महिमा😇 #😊कृष्ण कथाएं #🌸 जय श्री कृष्ण😇
🌺राधा कृष्ण💞 - নিমক্ষী মু্ ক্ী ক্িক্ক ম, ঠক্ক নানা ঔ কাল | कितना उस निज भक्त को, प्रेम करें गोपाल II भक्त की रक्षा , भगवान की इच्छा। pmtym নিমক্ষী মু্ ক্ী ক্িক্ক ম, ঠক্ক নানা ঔ কাল | कितना उस निज भक्त को, प्रेम करें गोपाल II भक्त की रक्षा , भगवान की इच्छा। pmtym - ShareChat
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