सुबह की सुंदर शुरुआत बांसुरी वाले के दर्शन के साथ... राधे-राधे! शुभ प्रभात दोस्तों 🌅🌹❤️💫 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏गुरु महिमा😇 #🌺राधा कृष्ण💞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #😊कृष्ण कथाएं
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🌹🙏🌹 प्रातः दर्शन 09/03/2026, जय शीतला माता, गुड़गांव वाली। माता रानी आपके सभी कष्ट दूर करें। शीतला माता की कृपा हमेशा आप पर बनी रहे।🌹🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🌺राधा कृष्ण💞 #😊कृष्ण कथाएं #🌸 जय श्री कृष्ण😇
संसार की होरी बेशक समाप्त हो गई हो।परन्तु जे हमारे बृज की होरी हैं।जे अभी जारी है और लम्बी चलेगी।
लाला मोहते बोलयो बाबा जमुना जी स्नान कू चले।
बाबा :- लाला अभाल नेक देर पहले तो कुण्ड पे स्नान कियो हतो।अब जमुना जी काहे?
लाला :- बाबा मेरो मन है।
बाबा :- ठीक है लाला।जब तेरो इतनो ही मन है तो अवश्य चलेंगे।मैं कुटिया🎪 पे ते वस्त्र ले आऊॅं।
लाला :- बाबा इतनो समय ना हैं।
बस इतनो कहते ही लाला मेरो हाथ पकड़ कर अपने संग खिचतो भयो जमुना जी की ओर ले गयो।
या समय सूर्य की हल्की हल्की तपिश और जमुना जी का ठंडा-ठंडा जल आनंद देने वाले है।
अब लाला ने जमुना जी पहुँच कर मोहते कही :- बाबा एक काम कर इतनी देर में मैं अपने आभूषण उतार कर एक ओर रखूँ तू एक दो डूबकी लगा ले।
मैंने सोची लाला कू पतो कि बाबा जमुना स्नान करेगो तो पहले जमुना जी में खड़े होकर पाठ आदि करेगो।फिर एक डूबकी लगाएगो फिर पाठ करेगो और फिर एक डूबकी लगाएगो।यामारे कह रहयो होगो।
खेर बाबा ने तो अपने नियम करनो ही थो।
मैं नेत्र बंद करके जमुना जी में खड़ो ह के अपनो नियम करने लगो और एक एक करके डूबकी लगाने लगो।
पहले तो कानन में केवल जमुना जी के कलकल करते जल की और आसपास चहकते पक्षियों की आवाज आ रही थी।फिर नेक देर में कछु गोप बालिकाओं के खिलखिलाकर हंसने की आवाज आने लगी।बाबा डूबकी लगाकर जैसे ही बाहर आयो तो यह दृश्य सामने था।लाला अपने मुख में जमुना जल भर कर गोप बालिकाओं पे डाल रहयो है और गोप बालिकाएँ भी इसका भरपूर आनंद ले रही है।
बृज में इस लीला कू कहे है "भर गंडूश मुख ले मारी"
बाबा समझ गयो कि जमुना स्नान को तो केवल बहाना हतो।असल में तो इन गोप बालिकाओं के संग होरी खेलबे को मन हतो।
खेर जो भी हो।चाहे गोप बालिकाओं का मन हतो या हमारे लाला को।परन्तु सुख तो बाबा ने भी पायो है क्योंकि या लाला के मुख रूपी पिचकारी से निकलो अधरामृत के छीटे💦बाबा पे भी पड़े है।
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पिछले चार दिनों से लाला इसी बात को दोहरा रहा है।
असल में हुआ क्या कि शनिवार को मैं और लाला गिरिराज जी की परिक्रमा लगा रहे थे।वहीं परिक्रमा मार्ग पर एक खिलौने बेचने वाला बैठा था।
वो आवाज लगा रहा था :- सौ के दो खिलौने, सौ के दो खिलौने।
वहाँ हमारे लाला को एक हवाईजहाज पसंद आ गया।
लाला कहिबे लगा :- बाबा जे हवाईजहाज लूगो।
मैंने पूछी :- याको काह करेगो लाला ?
लाला :- यामे बैठ के विदेश जाऊगो।
अब हमारा क्या हैं कि हम तो अपने लाला को एक मिनट के लिए भी अपने से दूर नही कर सकते।और यह तो विदेश जाने की बात कर रहा है।
अब आप कहेंगे कि बालक हैं।वो तो केवल खेलने के लिए ही तो मांग रहा है।
परन्तु नहीं साहब।हमनें अपने बालक को ऐसा खेल भी नहीं खेलने देना।जो उसे हमसे दूर करें।
आज खेल खेल में ऐसा खेल खेल रहा है।कल थोड़ा सा समझदार होगा तो सच्ची मे विदेश जाने की जिद्द करेगा।
और हमने देखा हैं जिनके बालक विदेश में है वो चाहे समाज को दिखाने के लिए बाहर से कितने भी खुश रहते हो।कि हमारा बालक विदेश में रह रहा हैं।और ये नकली समाज भी उनको चने के झाड़ पर चढाएं रखता है।
परन्तु ऐसे लोग बांस की तरह अंदर से बिल्कुल खोखले होते है।देखने में तो लगता है कि बहुत मजबूत है।परन्तु थोड़ी सी चोट लगते ही फट (बिखर) जाते है।और उस समय उन्हें समेटने वाला उनके पास अपना कोई नहीं होता।
इसलिए भईया हमनें अपने बालक को ऐसा कोई खेल भी नहीं खेलने देना।
सो हमनें लाला को वह खिलौना हवाईजहाज नहीं दिलवाया।और कह दिया कि पैसे खत्म हो गए।
बस तभी से बार-बार पूछ रहा है :- बाबा पपे मम ?
हम भी कह देते हैं कि हाँ लाला पपे मम।
अब बालक की तो आदत होती हैं कि एक ही बात को बार-बार दोहराने की।सो कुछ दिन ओर दोहराएगा और फिर भूल जाएंगा।परन्तु हम उसे अपने से दूर करनेवाला कोई खिलौना भी नहीं दिलवाएंगे।
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तेरे कुल पे लग रहो दाग,
मै तो संग होरी ना खेलु....
तेरे दो दो मैया बाप
मै तोह संग होरी ना खेलु
एक मैया तेरी जेलन मे,
और दूजो बिलोए छाछ (1)
मै तोह संग....
द्रौपदी तेरी एक बहना है,
वो तोह पांच पति की नार (2)
मै तोह संग....
एक बुआ तुम्हारी कुंती हैं,
वाने क्वारी ने जायो लाल (3)
मै तोह संग....
चीर चुरावे माखन चुरावे,
तू तो चौरन को सरदार (4)
मै तोह संग....
तेरी एक बहन सुभद्रा है,
वो तो अर्जुन संग गई भाग (5)
मै तोह संग....
राधा संग तूने प्रेम कियो है,
तूने रुक्मणि लियो भगाये,(6)
मै तोह संग....
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*आप सभी भाई बहन को होलिका दहन की हार्दिक शुभकामनाएं* 🙏
मुकुंद माधव गोविन्द बोल:!
केशव माधव हरि हरि बोल:!
राम राम बोल हरि: नाम बोल!
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🙏होली है होली है 🙏
प्रहलाद के समान,दृढ़ विश्वास भक्ति
{श्रोता}-प्रहलाद जी का जैसे भगवान के नाम पर और भगवान के ऊपर दृढ़ विश्वास और श्रद्धा था,ऐसे अपने लोगों के श्रद्धा - विश्वास कैसे उत्पन्न होगा ?
[स्वामीजी]---वो बात मान लो। प्रहलाद जी के बात बैठ गई भगवान की!
पिताजी बहुत दुःख दियो, त्रास दी पर,(प्रहलादजी को जंच गई) रक्षा करने वाला वो एक ही है,वो ही!
आज वह होली है।
पिताजी की बहिन थी, प्रहलादजी की बुआ। तो वो कहे कि मैं अग्नि में स्नान करती हूं, मैं लेकर बैठजाऊं,तो प्रहलाद जी को गोदी में लेकर बैठगई,आग लगा दी! तो वह तो जल गई, प्रहलादजी हैं, ज्युं के त्यूं ही रहा!
तो आज वो होली है। आज के दिन या बात हुई।
हमारे यहां कहते हैं कि आज प्रहलाद जी कष्टमें हैं। आज रसोई नहीं बनावेंगे!कल उत्सव मनाएंगे! इस वास्ते कल अच्छा उत्सव मनाया जाय!
तो वह विश्वास आप कर लो। ठाकुरजी पहले से आजकल सस्ते हैं। थोड़े में ही पास कर देते हैं! विश्वास करलो तो सब काम बने, जरूर।
कृपा जबर्दस्ती करते हैं भगवान्। आप ख्याल रखो तो आपके जीवन में कई बाते मिलती हैं! तो भगवान पर विश्वास बढ़ाओ अपने! भगवान रक्षा करते हैं, सब विश्वास करो!
तो आज रात्रि में वह मुहूर्त है-होलिका।उस समय होलिका मना ली! होलिका मर गई, प्रहलाद जी बच गए!
तो अपने भगवान पर विश्वास बढ़ाओ!
[{परम श्रद्धेय स्वामी रामसुखदास जी महाराज के मुखारविंद से"होली का सत्संग"प्रहलाद जी का भगवान में दृढ़ विश्वास}]
गीता प्रकाशन, गोरखपुर से प्रकाशित पुस्तक - सत्संग के अमृत कण पृष्ठ संख्या - २०७}]
हरि: नारायण नारायण! हरि: हरि:
श्रीमन नारायण नारायण हरि: हरि:
भजमन नारायण नारायण हरि: हरि: #😊कृष्ण कथाएं #🌺राधा कृष्ण💞 #🙏गुरु महिमा😇 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🌸 जय श्री कृष्ण😇






