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##राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा
#राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा - ।|श्रीहरिः |l अज्ञानी जीव मान-बड़ाईरूपी जहरीले भावों को सुन्दर सुहावने समझकर उनसे लिपटे रहते हैं। दयामय परमात्मा दया करके उनके कल्याण के लिये इनका नाश करते हैं। मान-बड़ाई के सुख का नाश करना एक प्रकार से शाप के रूप में महान् वरदान है। (अमूल्य शिक्षा. पृष्ठ संख्या ९७) श्रद्धेय सेठजी श्री जयदयाल जी गोयन्दका ।|श्रीहरिः |l अज्ञानी जीव मान-बड़ाईरूपी जहरीले भावों को सुन्दर सुहावने समझकर उनसे लिपटे रहते हैं। दयामय परमात्मा दया करके उनके कल्याण के लिये इनका नाश करते हैं। मान-बड़ाई के सुख का नाश करना एक प्रकार से शाप के रूप में महान् वरदान है। (अमूल्य शिक्षा. पृष्ठ संख्या ९७) श्रद्धेय सेठजी श्री जयदयाल जी गोयन्दका - ShareChat
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#राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा - Ilefler:II| संसार को अपना मानने से धोखा ही होगा। संसार का सहारा टिकनेवाला नहीं है, एक दिन छूट जायगा -इसमें किञ्चिन्मात्र भी सन्देह नहीं है। (सब साधनों का सार, पृष्ठ संख्या ६३) श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज Ilefler:II| संसार को अपना मानने से धोखा ही होगा। संसार का सहारा टिकनेवाला नहीं है, एक दिन छूट जायगा -इसमें किञ्चिन्मात्र भी सन्देह नहीं है। (सब साधनों का सार, पृष्ठ संख्या ६३) श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज - ShareChat
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#राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा - Il%fl6R:Il जिसका मन काम के द्वारा हरा गया है उसके विद्या, तप, संन्यास, एकान्तवास और वाणी का संयम आदि सभी निष्फल हैं। (दैनिक कल्याण - सूत्र, पृष्ठ संख्या ७७) पूज्य भाईजी हनुमानप्रसादजी पोद्दार Il%fl6R:Il जिसका मन काम के द्वारा हरा गया है उसके विद्या, तप, संन्यास, एकान्तवास और वाणी का संयम आदि सभी निष्फल हैं। (दैनिक कल्याण - सूत्र, पृष्ठ संख्या ७७) पूज्य भाईजी हनुमानप्रसादजी पोद्दार - ShareChat
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#राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा - Ilefler: II| कहते हैं -मा शुचः  भगवान् चिन्ताएँ छोड़ दो। हम भगवान् के q शरण हो गये तो अब भगवान् जाने, ক্যানান ক্রূা ক্রূাম আন ! (सब साधनों का सार, पृष्ठ संख्या ६९) श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज Ilefler: II| कहते हैं -मा शुचः  भगवान् चिन्ताएँ छोड़ दो। हम भगवान् के q शरण हो गये तो अब भगवान् जाने, ক্যানান ক্রূা ক্রূাম আন ! (सब साधनों का सार, पृष्ठ संख्या ६९) श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज - ShareChat
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#राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा - ಖ೯R: | | 11 भगवान् की शरण ही एकमात्र उपाय है। बिना प्रेम के भगवान् की प्राप्ति नहीं होती। सत्संग के बिना साधन तेज नहीं होता। सत्संग न मिले तो गीता सत्संग ही है। (त्याग की महिमा, पृष्ठ संख्या १२०) -श्रद्धेय सेठजी श्रीजयदयालजी गोयन्दका ಖ೯R: | | 11 भगवान् की शरण ही एकमात्र उपाय है। बिना प्रेम के भगवान् की प्राप्ति नहीं होती। सत्संग के बिना साधन तेज नहीं होता। सत्संग न मिले तो गीता सत्संग ही है। (त्याग की महिमा, पृष्ठ संख्या १२०) -श्रद्धेय सेठजी श्रीजयदयालजी गोयन्दका - ShareChat
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#राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा - I|श्रीहरिः|| कुटुम्ब की चिन्ता में ही आसक्त न रहो और न भगवान् के भजन को कभी भूलो, भगवान् पर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास करो। (दैनिक कल्याण सूत्र, पृष्ठ संख्या ७७) पूज्य भाईजी हनुमानप्रसादजी पोद्दार I|श्रीहरिः|| कुटुम्ब की चिन्ता में ही आसक्त न रहो और न भगवान् के भजन को कभी भूलो, भगवान् पर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास करो। (दैनिक कल्याण सूत्र, पृष्ठ संख्या ७७) पूज्य भाईजी हनुमानप्रसादजी पोद्दार - ShareChat
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#राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा - परम पूज्य श्री भाईजी चाहिए। (भक्तको) वाद-विवाद नहीं करना भक्ति के साधकों के लिये यह सूत्र बड़े ही महत्त्व का है। भक्त को तर्क-्वितर्क में की कोई भी आवश्यकता नहीं| यह पडने चाहिये कि मेरा तो हरेक क्षण समझना अपने प्रियतम भगवान् के भजन के लिये काम में समर्पण हो चुका, उसे মুসই लगाने का अधिकार ही नहीं है। (प्रेम दर्शन, पृष्ठ संख्या १३७) पूज्य भाईजी हनुमानप्रसादजी पोद्दार परम पूज्य श्री भाईजी चाहिए। (भक्तको) वाद-विवाद नहीं करना भक्ति के साधकों के लिये यह सूत्र बड़े ही महत्त्व का है। भक्त को तर्क-्वितर्क में की कोई भी आवश्यकता नहीं| यह पडने चाहिये कि मेरा तो हरेक क्षण समझना अपने प्रियतम भगवान् के भजन के लिये काम में समर्पण हो चुका, उसे মুসই लगाने का अधिकार ही नहीं है। (प्रेम दर्शन, पृष्ठ संख्या १३७) पूज्य भाईजी हनुमानप्रसादजी पोद्दार - ShareChat
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#राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा - I|श्रीहरिः|| जैसे जलमें डूबने  उतरानेवाले के लिये मजबूत नौका ही परम आश्रय है वैसे ही डूबनेवाले जीवों के लिये सच्चे भवसागर में संत ही एकमात्र आश्रय हैं। (दैनिक कल्याण सूत्र, पृष्ठ संख्या ३७) qr पूज्य भाईजी हनुमानप्रसादजी I|श्रीहरिः|| जैसे जलमें डूबने  उतरानेवाले के लिये मजबूत नौका ही परम आश्रय है वैसे ही डूबनेवाले जीवों के लिये सच्चे भवसागर में संत ही एकमात्र आश्रय हैं। (दैनिक कल्याण सूत्र, पृष्ठ संख्या ३७) qr पूज्य भाईजी हनुमानप्रसादजी - ShareChat
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#राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा - श्रीहरिः। | M भगवान् में मन, वाणी -इन दो को लगा दो, मन से ध्यान, वाणी से नामजप करो। दो भी न लगाओ तो एक केवल मन लगाओ। ध्यान ही करो। सकाम, निष्काम, प्रेम, वाणी, शरीर किसीकी शर्त न लगाओ। (त्याग की महिमा, पृष्ठ संख्या १२२) -श्रद्धेय सेठजी श्रीजयदयालजी गोयन्दका श्रीहरिः। | M भगवान् में मन, वाणी -इन दो को लगा दो, मन से ध्यान, वाणी से नामजप करो। दो भी न लगाओ तो एक केवल मन लगाओ। ध्यान ही करो। सकाम, निष्काम, प्रेम, वाणी, शरीर किसीकी शर्त न लगाओ। (त्याग की महिमा, पृष्ठ संख्या १२२) -श्रद्धेय सेठजी श्रीजयदयालजी गोयन्दका - ShareChat
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#राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा राधे कृष्णा - Il%f}6f:II भगवान् के शरण होकर भगवान् का भजन, ध्यान, नामजप, कीर्तन आदि करें तो अनेक जन्मों की बिगड़ी हुई बात आज ही नहीं , अभी इसी क्षण सुधर जाय ! आज तो बड़ा होता है। रात्रि के बारह बजेतक आज कहलाता है। परन्तु भगवान् की शरण लेनेपर तो अभी, क्षण उद्धार हो जाय। इसी (सब साधनों का सार, पृष्ठ संख्या ६९) श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज Il%f}6f:II भगवान् के शरण होकर भगवान् का भजन, ध्यान, नामजप, कीर्तन आदि करें तो अनेक जन्मों की बिगड़ी हुई बात आज ही नहीं , अभी इसी क्षण सुधर जाय ! आज तो बड़ा होता है। रात्रि के बारह बजेतक आज कहलाता है। परन्तु भगवान् की शरण लेनेपर तो अभी, क्षण उद्धार हो जाय। इसी (सब साधनों का सार, पृष्ठ संख्या ६९) श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज - ShareChat