Swami Shri Shrijee Maharaj
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श्रीकृष्ण अवतार सबसे मधुर अवतार है, #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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01:29
श्री राधा नाम ही समस्त श्रुतियों का सार है, श्री राधा ही वेदों का सार है,श्री राधा ही संपूर्ण ब्रह्माण्ड का आधार है । श्री राधा रानी के स्मरण मात्र से ही समस्त पाप, भवरोग अपने आप समाप्त हो जाते हैं । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - श्री राधा नामा ही समस्त श्रुतियों का सारहै श्री राधा ही वेदों का सार है, श्री खाधाही संपूर्ण ब्रह्माण्ड का आधार है 0 श्री साधा रानी के स्मरण मात्र से समस्त पjष्छ भवरोग अपने आप समाप्त हो जाते हैं | श्रीजी महाराज्च श्री राधा नामा ही समस्त श्रुतियों का सारहै श्री राधा ही वेदों का सार है, श्री खाधाही संपूर्ण ब्रह्माण्ड का आधार है 0 श्री साधा रानी के स्मरण मात्र से समस्त पjष्छ भवरोग अपने आप समाप्त हो जाते हैं | श्रीजी महाराज्च - ShareChat
श्रवणं कीर्तनं विष्णोःस्मरणं पादसेवनम्। अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम्॥ (भागवत 7.5.23) भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के नौ प्रकार हैं—श्रवण, कीर्तन, स्मरण, चरण सेवा, पूजा, वंदन, दास भाव, सखा भाव और आत्मसमर्पण। इसमें सबसे प्रमुख है स्मरण, श्रवण करें, कीर्तन करें, पूजा, वंदन, कुछ करें, स्मरण आवश्यक है । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्। अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम्।। ( भाागबतू 7.5.23) श्रीकृष्ण की भक्ति के नौ प्रकार भगवान हैं - श्रवण , कीर्तन, स्मरणा , चरण सेवा , पूजा, वंदन, दास भाव, सखा भाव और आत्मसमर्पण। इसमें सबसे प्रमुख है स्मरण , श्रवण करें, कीर्तन करें, पूजा, वंदन, कुछ करें, स्मरण आवश्यक है श्रीजी महाराज श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्। अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम्।। ( भाागबतू 7.5.23) श्रीकृष्ण की भक्ति के नौ प्रकार भगवान हैं - श्रवण , कीर्तन, स्मरणा , चरण सेवा , पूजा, वंदन, दास भाव, सखा भाव और आत्मसमर्पण। इसमें सबसे प्रमुख है स्मरण , श्रवण करें, कीर्तन करें, पूजा, वंदन, कुछ करें, स्मरण आवश्यक है श्रीजी महाराज - ShareChat
सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥” भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि “सभी धर्मों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र एवं ब्रम्हचर्य, गृहस्थी, वानप्रस्थ, संन्यास ) को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा, इसलिए चिंता मत करो।” श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - सार्वधार्मान् परित्युज्य मामेकं शरणं 5I अहुं त्वां सर्वपापेभ्यो औोक्षयिष्यामि शुच: ]] " HI श्रीकृष्ण कहते हैं कि भगवान वैश्य, "सभी धर्मों (ब्राह्मण , क्षत्रिय, शूद्र एवं ब्रम्हचर्य , गृहस्थी , वानप्रस्थ, संन्यास ) को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा , इसलिए चिंता मत करो।" श्रीजी महाराज सार्वधार्मान् परित्युज्य मामेकं शरणं 5I अहुं त्वां सर्वपापेभ्यो औोक्षयिष्यामि शुच: ]] " HI श्रीकृष्ण कहते हैं कि भगवान वैश्य, "सभी धर्मों (ब्राह्मण , क्षत्रिय, शूद्र एवं ब्रम्हचर्य , गृहस्थी , वानप्रस्थ, संन्यास ) को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा , इसलिए चिंता मत करो।" श्रीजी महाराज - ShareChat
झूलत श्यामा श्याम देखु सखि #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
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01:29
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु। मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥ मन को मुझमें लगाओ, मेरे भक्त बनो, मेरी पूजा करो — तुम निश्चित ही मुझे प्राप्त करोगे। भागवत कहती है कि मन को एकमात्र भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में लगाने से भगवान की प्राप्ति हो जाएगी, अन्य कोई साधन ईश्वर प्राप्ति नहीं करवा सकते । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - मद्भक्तो मद्याजी मां मन्भना भव नमस्कुरु। मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोडसि मे।J लगाओ , मेरे भक्त बनो , শনব্রী मुझमें मैरी पूजा ` करो = तुम निश्चित ह्री मुझे प्राप्त करोगे ] भाषावत कहती ह्ैकि मुना को एकमात्र भगवान श्रीकुष्णा के चरणों में लगाने से भगवाना कप प्राप्ति हो जाएगी , अन्य कोई साधन ईश्वुर प्राप्ति नहीं करवा सकते श्रीजी महाराज मद्भक्तो मद्याजी मां मन्भना भव नमस्कुरु। मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोडसि मे।J लगाओ , मेरे भक्त बनो , শনব্রী मुझमें मैरी पूजा ` करो = तुम निश्चित ह्री मुझे प्राप्त करोगे ] भाषावत कहती ह्ैकि मुना को एकमात्र भगवान श्रीकुष्णा के चरणों में लगाने से भगवाना कप प्राप्ति हो जाएगी , अन्य कोई साधन ईश्वुर प्राप्ति नहीं करवा सकते श्रीजी महाराज - ShareChat
यो मामेवम् सम्मूढो जानाति पुरुषोत्तमम्। स सर्वविद् भजति मां सर्वभावेन भारत॥” भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि जो मनुष्य मोह (अज्ञान) से रहित होकर मुझे पुरुषोत्तम (सर्वश्रेष्ठ परम पुरुष) के रूप में जानता है, वह सब कुछ जानने वाला हो जाता है और पूरे भाव से मेरी भक्ति करता है। मोह ही हमें अनादिकाल से संसार के बंधन में बांध के रखे हुए है । संसार मेरा है, यह मानना ही मोह की जननी है, ईश्वर मेरा है यह मानना ही मोह से छुटकारा प्राप्त करना है । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - यो मामेवम् सम्मूढो जानाति पुरुषोत्तमम्। स सर्वविद् भजति मां सर्वभावेन भारत II " भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि जो मनुष्य मोह ( अज्ञान ) से रहित होकर मुझे पुरुषोत्तम (सर्वश्रेष्ठ परम पुरुष) के रूप में जानता है, वह सब कुछ जानने वाला हो जाता है और पूरे भाव से मेरी भक्ति करता గేI मोह ही हमें अनादिकाल से संसार के बंधन में बांध के रखे हुए है | संसार मेरा है, यह मानना ही मोह की जननी है, ईश्वर मेरा है यह मानना ही मोह से छुटकारा प्राप्त करना है | श्रीजी महाराज यो मामेवम् सम्मूढो जानाति पुरुषोत्तमम्। स सर्वविद् भजति मां सर्वभावेन भारत II " भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि जो मनुष्य मोह ( अज्ञान ) से रहित होकर मुझे पुरुषोत्तम (सर्वश्रेष्ठ परम पुरुष) के रूप में जानता है, वह सब कुछ जानने वाला हो जाता है और पूरे भाव से मेरी भक्ति करता గేI मोह ही हमें अनादिकाल से संसार के बंधन में बांध के रखे हुए है | संसार मेरा है, यह मानना ही मोह की जननी है, ईश्वर मेरा है यह मानना ही मोह से छुटकारा प्राप्त करना है | श्रीजी महाराज - ShareChat
वृंदावन वाले श्रीकृष्ण को ही हमें अपना प्रियतम मानना है,द्वारिका और मथुरा वाले श्रीकृष्ण नहीं । वृंदावन की गोपी ही समर्था रति का प्रेम प्राप्त करके गोलोक में कुंज में सेवा प्राप्त कर सकेगी । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - वृंदावन वाले श्रीकृष्ण को ही हमें अपना प्रियतम मानना है, द्वारिका और मथुरा वाले श्रीकृष्ण नहीं वृंदावन की गोपी ही समर्था रति का प्रेम प्राप्त करके गोलोक में कुंज में सेवा प्राप्त कर सकेगी | श्रीजी महाराज वृंदावन वाले श्रीकृष्ण को ही हमें अपना प्रियतम मानना है, द्वारिका और मथुरा वाले श्रीकृष्ण नहीं वृंदावन की गोपी ही समर्था रति का प्रेम प्राप्त करके गोलोक में कुंज में सेवा प्राप्त कर सकेगी | श्रीजी महाराज - ShareChat
सबके भीतर श्रीकृष्ण का वास है,इसीलिए किसी को अपनी वाणी या व्यवहार द्वारा दुःखी न करें । दूसरे को दुःख पहुंचाना, अर्थात् अपने इष्ट को दुःखी करना । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - सबके भीतर श्रीकृष्ण का वास है,इसीलिए किसी को अपनी वाणी दुःखी या व्यवहार द्वारा न करें ।दूसरे को दुःख पहुंचाना , अर्थात् अपने इष्ट को दुःखी करना श्रीजी महाराज सबके भीतर श्रीकृष्ण का वास है,इसीलिए किसी को अपनी वाणी दुःखी या व्यवहार द्वारा न करें ।दूसरे को दुःख पहुंचाना , अर्थात् अपने इष्ट को दुःखी करना श्रीजी महाराज - ShareChat
गुरु पूर्ण प्रयास करते हैं किसी भी साधक को आगे बढ़ाने के लिए, लेकिन जब साधक ही नहीं बढ़ना चाहेगा तो गुरु क्या कर लेंगे । गुरु केवल वेद, शास्त्र की बात हमें बता सकता है, उस मार्ग पर चलना हमें होगा । हम किन्तु, परन्तु यदि लगाए, तो हमारा पतन हुआ । गुरु की प्रत्येक बात शत प्रतिशत मानना होगा, गुरु साक्षात् हरि का ही स्वरूप हैं, यह हमेशा स्मरण रखना होगा । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - गुरु पूर्ण प्रयास करते हैं किसी भी साधक को आगे बढ़ाने के लिए, लेकिन जब साधक ही नहीं बढ़ना चाहेगा तो गुरु क्या कर लेंगे ] गुरु केवल वेद, शास्त्र की बात हमें बता सकता है, उस मार्ग पर चलना हमें होगा | हम किन्तु, परन्तु यदि লযাৎ নী ৪সাবা এনন ভ্ভুঞ্জা ! যুত की प्रत्येक बात शत प्रतिशत मानना होगा , गुरु साक्षात् हरि का ही हैं, यह हमेशा स्मरण रखना ৈত্ हागा श्रीजी महाराज गुरु पूर्ण प्रयास करते हैं किसी भी साधक को आगे बढ़ाने के लिए, लेकिन जब साधक ही नहीं बढ़ना चाहेगा तो गुरु क्या कर लेंगे ] गुरु केवल वेद, शास्त्र की बात हमें बता सकता है, उस मार्ग पर चलना हमें होगा | हम किन्तु, परन्तु यदि লযাৎ নী ৪সাবা এনন ভ্ভুঞ্জা ! যুত की प्रत्येक बात शत प्रतिशत मानना होगा , गुरु साक्षात् हरि का ही हैं, यह हमेशा स्मरण रखना ৈত্ हागा श्रीजी महाराज - ShareChat