श्रीकृष्ण ही प्रेम का वास्तविक स्वरूप है, श्रीकृष्ण ही प्रेम करने योग्य हैं । संसार अशुद्ध है, मायिक है, यहां प्रेम शब्द का अर्थ ही कोई नहीं जानता । प्रेम दिव्य, अनिर्वचनीय, असीमित होता है, ऐसा प्रेम केवल श्रीकृष्ण से ही प्राप्त हो सकता है ।
श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇