Swami Shri Shrijee Maharaj
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ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥ इस संसार में जो कुछ भी है, वह सब ईश्वर से व्याप्त है। त्याग की भावना से भोग करो और किसी के धन की लालसा मत करो। श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्। इस संसार में जो कुछ भी है, वह सब ईश्वर से व्याप्त है। त्याग की भावना से भोग करो और किसी के धन की লালমা মন বরহী| श्रीजी महाराज ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्। इस संसार में जो कुछ भी है, वह सब ईश्वर से व्याप्त है। त्याग की भावना से भोग करो और किसी के धन की লালমা মন বরহী| श्रीजी महाराज - ShareChat
https://youtu.be/jK2OzvBKkeM?si=eOvX62HxyTwkysqw #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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https://youtu.be/uiB2Qq1ho1A?si=r_mQ7OWR4upnXvSF #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया। उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः॥ भगवद ज्ञान को प्राप्त करने के लिए गुरु के पास जाओ, विनम्रता से प्रश्न करो और सेवा करो। तत्त्व को जानने वाले गुरुदेव तुम्हें ज्ञान का उपदेश देंगे। श्रीजी महाराज #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया। उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः|l भगवद ज्ञान को प्राप्त करने के लिए पास जाओ , विनम्रता से प्रश्न g೯ಈ ' करो और सेवा करो। तत्त्व को जानने वाले गुरुदेव तुम्हें ज्ञान का उपदेश देंगे। श्रीजी महाराज तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया। उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः|l भगवद ज्ञान को प्राप्त करने के लिए पास जाओ , विनम्रता से प्रश्न g೯ಈ ' करो और सेवा करो। तत्त्व को जानने वाले गुरुदेव तुम्हें ज्ञान का उपदेश देंगे। श्रीजी महाराज - ShareChat
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥ भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तुम कर्मों के फल के कारण मत बनो और न ही कर्म न करने में आसक्त हो। आसक्ति रहित कर्म हमें करना है, मन को ईश्वर में पूर्णतः लगाकर शरीर से संसार के कर्म करें । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - कर्मण्येवाधिकारस्ते खा फलेषु कदाचन। कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते Cా' संगोउ्स्त्वकर्मणि० श्रीकृष्णपीता में कहते हैंकि भृगवान ढुष्ह्ारा अधिकारकैवल कर्म करने में ह्ै उसकै फलों में कभी नही ] इसलिए तुमा कर्मीकै फल के कारणा यन बनो औरन हीकर्म नकरे में आसक्तहौ। आसक्ति रहित कर्म हर्मैंकसना है, मन को ईश्वरमैं पूर्णनः लगोकरशरीरसे संसारकै कर्म करें ] श्रीजी महाराज कर्मण्येवाधिकारस्ते खा फलेषु कदाचन। कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते Cా' संगोउ्स्त्वकर्मणि० श्रीकृष्णपीता में कहते हैंकि भृगवान ढुष्ह्ारा अधिकारकैवल कर्म करने में ह्ै उसकै फलों में कभी नही ] इसलिए तुमा कर्मीकै फल के कारणा यन बनो औरन हीकर्म नकरे में आसक्तहौ। आसक्ति रहित कर्म हर्मैंकसना है, मन को ईश्वरमैं पूर्णनः लगोकरशरीरसे संसारकै कर्म करें ] श्रीजी महाराज - ShareChat
न जायते म्रियते वा कदाचिन् नायं भूत्वा भविता वा न भूयः। अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥ गीता कहती है कि आत्मा कभी जन्म नहीं लेती और न ही मरती है। यह नित्य, शाश्वत और अजर-अमर है; शरीर के नष्ट होने पर भी इसका नाश नहीं होता। श्रीजी महाराज #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - जायते म्रियते चाJ कदाचिन् 7 नायं भूत्वा भविता वा न भूयः/ अजो नित्यः शाश्वतोड्यं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे।। गीता कहती है कि आत्मा कभी जन्म नहीं लेती और न ही मरती है। यह नित्य , शाश्वत और अजर-अमर है; शरीर के नष्ट होने पर भी इसका नहीं होता। নথ श्रीजी महाराज जायते म्रियते चाJ कदाचिन् 7 नायं भूत्वा भविता वा न भूयः/ अजो नित्यः शाश्वतोड्यं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे।। गीता कहती है कि आत्मा कभी जन्म नहीं लेती और न ही मरती है। यह नित्य , शाश्वत और अजर-अमर है; शरीर के नष्ट होने पर भी इसका नहीं होता। নথ श्रीजी महाराज - ShareChat
नयनं गलदश्रुधारया वदनं गदगदरुद्धया गिरा।पुलकैर्निचितं वपुः कदा तव नाम-ग्रहणे भविष्यति।। ६।। हे प्रभु ! आपका नाम लेने पर कब मेरे नेत्रोंसे अश्रुओं की धारा बहेगी, कब आपका नामोच्चारण मात्र से ही मेरा कंठ गद गद होकर अवरुद्ध हो जायेगा और मेरा शरीर रोमांचित हो उठेगा । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - नयन गलदश्रुधारया बदनं गदगदरुद्धया गिरा।पुलकैर्निचित वपुः कदा तव नाम ग्रहणे भविष्यति। [ ६।| हे प्रभु ! आपका नाम लेने पर कब मेरे नेत्रोंसे की धारा बहेगी , अश्रुओं : कब आपका नामोच्चारण मात्र से ही मेरा कंढ गद जद होकर अवरुद्ध हो जायेगा और मेरा शरीर रोमांचित हो उठेगा श्रीजी महाराज नयन गलदश्रुधारया बदनं गदगदरुद्धया गिरा।पुलकैर्निचित वपुः कदा तव नाम ग्रहणे भविष्यति। [ ६।| हे प्रभु ! आपका नाम लेने पर कब मेरे नेत्रोंसे की धारा बहेगी , अश्रुओं : कब आपका नामोच्चारण मात्र से ही मेरा कंढ गद जद होकर अवरुद्ध हो जायेगा और मेरा शरीर रोमांचित हो उठेगा श्रीजी महाराज - ShareChat
हृषीकेश हृषीकेश सर्वे हर्षातिपादिते। नमामि भगवंतं तं राधाकान्तं राधिका।" हृषीकेश (श्री कृष्ण) जो हर जगह हर्ष और प्रेम फैलाते हैं, उनके चरणों में नतमस्तक हूँ, जो राधा के प्रियतम हैं और राधा के साथ उनकी भक्ति सर्वश्रेष्ठ है। श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - हृषीकेश हृषीकेश सर्वे हृर्षाातिपादिते। F[F[[F[ भागवंतं तं राधाकान्तं राधिका। " हृषीकेश (श्री कृष्ण) जो हर जगह हर्ष और प्रेम फैलाते हैं, उनके चरणों में नतमस्तक हूँ, जो राधा के प्रियतम हैं और राधा के साथ उनकी भक्ति सर्वश्रेष्ठ है। श्रीजी महाराज हृषीकेश हृषीकेश सर्वे हृर्षाातिपादिते। F[F[[F[ भागवंतं तं राधाकान्तं राधिका। " हृषीकेश (श्री कृष्ण) जो हर जगह हर्ष और प्रेम फैलाते हैं, उनके चरणों में नतमस्तक हूँ, जो राधा के प्रियतम हैं और राधा के साथ उनकी भक्ति सर्वश्रेष्ठ है। श्रीजी महाराज - ShareChat
अन्याभिलाषिता-शून्यं ज्ञान-कर्माद्यनावृतम्। आनुकूल्येन कृष्णानुशीलनं भक्तिरुत्तमा॥ रूप गोस्वामी कहते हैं कि भक्ति सभी अन्य इच्छाओं से रहित, ज्ञान और कर्म आदि से ढकी हुई नहीं, और केवल भगवान कृष्ण की प्रसन्नता के लिए की जाने वाली सेवा ही उत्तम भक्ति है। श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - अन्याभिलाषिता शून्यं ज्ञान कर्माद्यनावृतम्। आनुकूल्येन कृष्णानुशीलनं भक्तिरुत्तमााI| गौौस्वामी कहते हैं कि भक्ति q सभी अन्य इच्छाओं से रहित, ज्ञान आदि से ढकी हुई नहीं, और कर्म और केवल भगवान कृष्ण की লিৎ प्रसन्नता के की जाने वाली सेवा ही उत्तम भक्ति है। श्रीजी महाराज अन्याभिलाषिता शून्यं ज्ञान कर्माद्यनावृतम्। आनुकूल्येन कृष्णानुशीलनं भक्तिरुत्तमााI| गौौस्वामी कहते हैं कि भक्ति q सभी अन्य इच्छाओं से रहित, ज्ञान आदि से ढकी हुई नहीं, और कर्म और केवल भगवान कृष्ण की লিৎ प्रसन्नता के की जाने वाली सेवा ही उत्तम भक्ति है। श्रीजी महाराज - ShareChat
श्री राधा रानी का रूपध्यान कीजिए,मन को संसार से हटाकर किशोरीजी में लगाएं । अभ्यास करें, मन लगने लगेगा, अभ्यास से सबकुछ संभव है। मन मायिक है, संसार की ओर ही भागता है, तत्त्वज्ञान द्वारा इसे भगवद भक्ति में लगाया जा सकता है । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - श्री राधा रानी का रूपध्यान कीजिए मन को संसार से हटाकर किशोरीजी में लगाएं अभ्यास करें, मन लगने लगेगा , अभ्यास से सबकुछ संभव 81| मन मायिक है सीसारकी ओरही भागता 8 तत्त्वज्ञान द्वारा इसे भगवद भक्ति में గీ [ लगाया जासकता श्रीजी महाराज श्री राधा रानी का रूपध्यान कीजिए मन को संसार से हटाकर किशोरीजी में लगाएं अभ्यास करें, मन लगने लगेगा , अभ्यास से सबकुछ संभव 81| मन मायिक है सीसारकी ओरही भागता 8 तत्त्वज्ञान द्वारा इसे भगवद भक्ति में గీ [ लगाया जासकता श्रीजी महाराज - ShareChat