Swami Shri Shrijee Maharaj
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एते चांशकलाः पुंसः कृष्णस्तु भगवान् स्वयम्॥ — श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान के सभी अवतार ब्रह्मा, विष्णु, शिव, मत्स्य, कच्छप, वामन,इत्यादि सभी अवतार भगवान के अंश या कला हैं, परंतु श्रीकृष्ण स्वयं भगवान हैं। श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - एते चांशकलाषठ पुंसः कृष्णस्त्वु भुणवान स्वयमू0 श्रीमद्ाणावत महापुराण कषुणुवाना कै साभी] अवतार ब्रह्मुप, विष्णु शिव, मत्स्य, कच्छष् बामुन्ा इत्यादि साभी अवतार भुणुवान कै औश ख्॒ः कलाा हैं , परत्नु श्रीकृष्ण ত্রেত্রী ঞতত্ন ঔ] श्रीजी भहाराज् एते चांशकलाषठ पुंसः कृष्णस्त्वु भुणवान स्वयमू0 श्रीमद्ाणावत महापुराण कषुणुवाना कै साभी] अवतार ब्रह्मुप, विष्णु शिव, मत्स्य, कच्छष् बामुन्ा इत्यादि साभी अवतार भुणुवान कै औश ख्॒ः कलाा हैं , परत्नु श्रीकृष्ण ত্রেত্রী ঞতত্ন ঔ] श्रीजी भहाराज् - ShareChat
संसार की प्राप्ति की इच्छा ही भगवत्प्राप्ति में बाधक है । हमारे हृदय में अनंत इच्छाएं व्याप्त हैं, एक समाप्त होती है हम दूसरे की प्राप्ति के पीछे लग जाते हैं । यह इच्छाएं जब तक रहेंगी, तब तक ईश्वर प्राप्ति, सुख, आनंद, पीस नहीं प्राप्त हो सकता । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - संसार की प्राप्ति की इच्छा ही भगवत्प्राप्ति में बाधक है हमारे हृदय में अनंत इच्छाएं व्याप्त हैं, एक समाप्त होती है हम की प्राप्ति दूसरे ; के पीछे लग जाते हैं | यह इच्छाएं जब तक रहेंगी , तब तक ईश्वर प्राप्ति, सुख, आनंद, पीस नहीं प्राप्त हो सकता | श्रीजी महाराज संसार की प्राप्ति की इच्छा ही भगवत्प्राप्ति में बाधक है हमारे हृदय में अनंत इच्छाएं व्याप्त हैं, एक समाप्त होती है हम की प्राप्ति दूसरे ; के पीछे लग जाते हैं | यह इच्छाएं जब तक रहेंगी , तब तक ईश्वर प्राप्ति, सुख, आनंद, पीस नहीं प्राप्त हो सकता | श्रीजी महाराज - ShareChat
भगवान का प्रेम और संसार की प्राप्ति, यह दोनों एक साथ नहीं हो सकते । भक्ति, प्रेम और सेवा प्राप्त करने के लिए हमें संसार छोड़ना ही होगा । मन हमारा संसार चाहता है, उसे समझाकर ईश्वर में लगाना होगा । यह इतना सरल नहीं होगा, अभ्यास द्वारा ही संभव होगा । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - भगवान का प्रेम और संसार की प्राप्ति, यह दोनों एक साथ नहीं हो भक्ति, प्रेम और सेवा प्राप्त सकते करने के लिए हमें संसार छोड़ना ही होगा मन हमारा संसार चाहता है, उसे समझाकर ईश्वर में लगाना होगा यह इतना सरल नहीं होगा, अभ्यास द्वारा ही संभव होगा | श्रीजी महाराज भगवान का प्रेम और संसार की प्राप्ति, यह दोनों एक साथ नहीं हो भक्ति, प्रेम और सेवा प्राप्त सकते करने के लिए हमें संसार छोड़ना ही होगा मन हमारा संसार चाहता है, उसे समझाकर ईश्वर में लगाना होगा यह इतना सरल नहीं होगा, अभ्यास द्वारा ही संभव होगा | श्रीजी महाराज - ShareChat
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णान् अन्यानि संयाति नवानि देही॥ भगवद्गीता कहती है कि जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नए धारण करता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर छोड़कर नए शरीर धारण करती है। श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - aRRsoffPaerfsP FాifTuఞTfFRISqRIIUTI ভীতালি  विहाख " तथन शरीराणि अन्यानि सयाति नवानि दैहौ0 है कि जैसै मनुष्य  అఇద్ేగౌ कहती बस्त्र त्यागकर नए धार७्ा पुराने करता है, वैसै ही आत्मा शरीर पुराने छोड़कर नए शरीर धारणा करती है। श्रीजी महाराज aRRsoffPaerfsP FాifTuఞTfFRISqRIIUTI ভীতালি  विहाख " तथन शरीराणि अन्यानि सयाति नवानि दैहौ0 है कि जैसै मनुष्य  అఇద్ేగౌ कहती बस्त्र त्यागकर नए धार७्ा पुराने करता है, वैसै ही आत्मा शरीर पुराने छोड़कर नए शरीर धारणा करती है। श्रीजी महाराज - ShareChat
श्री राधा कृष्ण के युगल चरण का निरन्तर स्मरण होना चाहिए ।उनकी युगल झांकी, उनकी नित्य लीला, उनकी अष्टायामी सेवा में निरन्तर अपने चित्त को लगाना चाहिए श्रीजी महाराज #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - श्री राधाकुष्ण के युगल चरण निरन्तर स्मरण हरीनाचाहिए @ उनकी युगल झाकी॰ उनकी नित्य लीला, छनकी अष्टायामी सेवामें निरन्तर अपने चित्तको लगाना ঘ্রাষ্ভিত্ব श्रीजी भहाराज श्री राधाकुष्ण के युगल चरण निरन्तर स्मरण हरीनाचाहिए @ उनकी युगल झाकी॰ उनकी नित्य लीला, छनकी अष्टायामी सेवामें निरन्तर अपने चित्तको लगाना ঘ্রাষ্ভিত্ব श्रीजी भहाराज - ShareChat
राम नाम मणि दीप धरु जीह देहरी द्वार। तुलसी भीतर बाहेरहुँ, जौं चाहसि उजियार॥ गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं कि यदि भीतर और बाहर दोनों ओर प्रकाश चाहते हो, तो जीभ रूपी द्वार पर राम-नाम का मणि दीपक रखो। सदैव प्रभु का स्मरण करो, बोलो तो केवल भगवद विषय ही बोलो । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - राम नाम मणि दीप धरु जीह देहरी GRI भीतर बाहेरहुँ, जौं चाहसि तुलसी उजियार।। गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं कि यदि भीतर और बाहर दोनों ओर प्रकाश चाहते हो, तो जीभ रूपी द्वार पर राम-्नाम का मणि दीपक रखो। सदैव प्रभु का स्मरण करो , बोलो तो केवल भगवद विषय ही बोलो श्रीजी महाराज राम नाम मणि दीप धरु जीह देहरी GRI भीतर बाहेरहुँ, जौं चाहसि तुलसी उजियार।। गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं कि यदि भीतर और बाहर दोनों ओर प्रकाश चाहते हो, तो जीभ रूपी द्वार पर राम-्नाम का मणि दीपक रखो। सदैव प्रभु का स्मरण करो , बोलो तो केवल भगवद विषय ही बोलो श्रीजी महाराज - ShareChat
वास्तविक महापुरुष अपने आप को सदैव छिपाते हैं, वे आपके सामने ऐसी एक्टिंग कर देंगे कि आप उन्हें घोर संसारी मानकर वापस चले जाओगे । संत बड़े अटपटे होते हैं, उनके बहिरंग व्यवहार को ब्रह्मादिक भी नहीं समझ सकते तो हम अल्पज्ञ, मायाधीन जीव क्या ही पहचानेंगे । श्रीजी महाराज #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - वास्तविक महापुरुष अपने आप को सदैव छिपाते हैं, वे आपके सामने ऐसी एक्टिंग कर देंगे कि आप उन्हें घोर संसारी मानकर वापस चले जाओगे | संत बड़े अटपटे होते हैं, उनके बहिरंग व्यवहार को ब्रह्मादिक भी नहीं समझ सकते तो हम अल्पज्ञ, मायाधीन जीव क्या ही पहचानेंगे [ श्रीजी महाराज वास्तविक महापुरुष अपने आप को सदैव छिपाते हैं, वे आपके सामने ऐसी एक्टिंग कर देंगे कि आप उन्हें घोर संसारी मानकर वापस चले जाओगे | संत बड़े अटपटे होते हैं, उनके बहिरंग व्यवहार को ब्रह्मादिक भी नहीं समझ सकते तो हम अल्पज्ञ, मायाधीन जीव क्या ही पहचानेंगे [ श्रीजी महाराज - ShareChat
ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥ इस संसार में जो कुछ भी है, वह सब ईश्वर से व्याप्त है। त्याग की भावना से भोग करो और किसी के धन की लालसा मत करो। श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्। इस संसार में जो कुछ भी है, वह सब ईश्वर से व्याप्त है। त्याग की भावना से भोग करो और किसी के धन की লালমা মন বরহী| श्रीजी महाराज ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्। इस संसार में जो कुछ भी है, वह सब ईश्वर से व्याप्त है। त्याग की भावना से भोग करो और किसी के धन की লালমা মন বরহী| श्रीजी महाराज - ShareChat
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