Swami Shri Shrijee Maharaj
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हृषीकेश हृषीकेश सर्वे हर्षातिपादिते। नमामि भगवंतं तं राधाकान्तं राधिका।" हृषीकेश (श्री कृष्ण) जो हर जगह हर्ष और प्रेम फैलाते हैं, उनके चरणों में नतमस्तक हूँ, जो राधा के प्रियतम हैं और राधा के साथ उनकी भक्ति सर्वश्रेष्ठ है। श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - हृषीकेश हृषीकेश सर्वे हृर्षाातिपादिते। F[F[[F[ भागवंतं तं राधाकान्तं राधिका। " हृषीकेश (श्री कृष्ण) जो हर जगह हर्ष और प्रेम फैलाते हैं, उनके चरणों में नतमस्तक हूँ, जो राधा के प्रियतम हैं और राधा के साथ उनकी भक्ति सर्वश्रेष्ठ है। श्रीजी महाराज हृषीकेश हृषीकेश सर्वे हृर्षाातिपादिते। F[F[[F[ भागवंतं तं राधाकान्तं राधिका। " हृषीकेश (श्री कृष्ण) जो हर जगह हर्ष और प्रेम फैलाते हैं, उनके चरणों में नतमस्तक हूँ, जो राधा के प्रियतम हैं और राधा के साथ उनकी भक्ति सर्वश्रेष्ठ है। श्रीजी महाराज - ShareChat
अन्याभिलाषिता-शून्यं ज्ञान-कर्माद्यनावृतम्। आनुकूल्येन कृष्णानुशीलनं भक्तिरुत्तमा॥ रूप गोस्वामी कहते हैं कि भक्ति सभी अन्य इच्छाओं से रहित, ज्ञान और कर्म आदि से ढकी हुई नहीं, और केवल भगवान कृष्ण की प्रसन्नता के लिए की जाने वाली सेवा ही उत्तम भक्ति है। श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - अन्याभिलाषिता शून्यं ज्ञान कर्माद्यनावृतम्। आनुकूल्येन कृष्णानुशीलनं भक्तिरुत्तमााI| गौौस्वामी कहते हैं कि भक्ति q सभी अन्य इच्छाओं से रहित, ज्ञान आदि से ढकी हुई नहीं, और कर्म और केवल भगवान कृष्ण की লিৎ प्रसन्नता के की जाने वाली सेवा ही उत्तम भक्ति है। श्रीजी महाराज अन्याभिलाषिता शून्यं ज्ञान कर्माद्यनावृतम्। आनुकूल्येन कृष्णानुशीलनं भक्तिरुत्तमााI| गौौस्वामी कहते हैं कि भक्ति q सभी अन्य इच्छाओं से रहित, ज्ञान आदि से ढकी हुई नहीं, और कर्म और केवल भगवान कृष्ण की লিৎ प्रसन्नता के की जाने वाली सेवा ही उत्तम भक्ति है। श्रीजी महाराज - ShareChat
श्री राधा रानी का रूपध्यान कीजिए,मन को संसार से हटाकर किशोरीजी में लगाएं । अभ्यास करें, मन लगने लगेगा, अभ्यास से सबकुछ संभव है। मन मायिक है, संसार की ओर ही भागता है, तत्त्वज्ञान द्वारा इसे भगवद भक्ति में लगाया जा सकता है । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - श्री राधा रानी का रूपध्यान कीजिए मन को संसार से हटाकर किशोरीजी में लगाएं अभ्यास करें, मन लगने लगेगा , अभ्यास से सबकुछ संभव 81| मन मायिक है सीसारकी ओरही भागता 8 तत्त्वज्ञान द्वारा इसे भगवद भक्ति में గీ [ लगाया जासकता श्रीजी महाराज श्री राधा रानी का रूपध्यान कीजिए मन को संसार से हटाकर किशोरीजी में लगाएं अभ्यास करें, मन लगने लगेगा , अभ्यास से सबकुछ संभव 81| मन मायिक है सीसारकी ओरही भागता 8 तत्त्वज्ञान द्वारा इसे भगवद भक्ति में గీ [ लगाया जासकता श्रीजी महाराज - ShareChat
श्री राधा रानी श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति हैं । श्री राधा रानी की कृपा से ही श्रीकृष्ण ने ब्रज गोपियों को सर्वश्रेष्ठ महारास रस का पान कराया । श्री कृष्ण रोम रोम से राधा राधा रटते रहते हैं । अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक श्रीकृष्ण भी नित्य गहवर वन की खोर में श्री राधा रानी की चरण सेवा करते हैं । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - श्री राधा रानी श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति हैं श्री राधा रानी श्रीकृष्ण  की कृपा से ही ন সত गोपियों को सर्वश्रेष्ठ महारास रस श्री कृष्ण रोम रोम पा़न कराया राधा राधा रटते रहते हैं | अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक श्रीकृष्ण नित्य गहवर वन की खोर में श्री राधा रानी की चरण सेवा करते हैं श्रीजी महाराज श्री राधा रानी श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति हैं श्री राधा रानी श्रीकृष्ण  की कृपा से ही ন সত गोपियों को सर्वश्रेष्ठ महारास रस श्री कृष्ण रोम रोम पा़न कराया राधा राधा रटते रहते हैं | अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक श्रीकृष्ण नित्य गहवर वन की खोर में श्री राधा रानी की चरण सेवा करते हैं श्रीजी महाराज - ShareChat
श्रीकृष्ण की निष्काम भक्ति करके उनकी नित्य सेवा प्राप्त करना ही जीव का एकमात्र लक्ष्य है । यह निष्काम भक्ति गुरु द्वारा बताए हुए उपदेश द्वारा ही की जाएगी, उनकी आज्ञा पालन द्वारा ही विशुद्ध भक्ति संभव है । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - श्रीकृष्ण की निष्काम भक्ति करके उनकी नित्य सेवा प्राप्त करना ही जीवका एकमात्र लक्ष्य है । यह निष्काम भक्ति गुरुद्वारा बताए हुए उपदेश द्वारा ही की जाएगी , उनकी विशुद्ध  आज्ञा पालन द्वारा ही भक्ति सीभव है श्रीजी महाराज श्रीकृष्ण की निष्काम भक्ति करके उनकी नित्य सेवा प्राप्त करना ही जीवका एकमात्र लक्ष्य है । यह निष्काम भक्ति गुरुद्वारा बताए हुए उपदेश द्वारा ही की जाएगी , उनकी विशुद्ध  आज्ञा पालन द्वारा ही भक्ति सीभव है श्रीजी महाराज - ShareChat
बडे भाग मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन गावा॥ गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं कि मनुष्य शरीर पाना बहुत सौभाग्य की बात है, यह मनुष्य शरीर देवताओं के लिए भी दुर्लभ है । इस मानव देह में ही हम भक्ति करके भगवान को प्राप्त कर सकते हैं, अन्य किसी देह में भक्ति करने की छूट नहीं है । केवल मानव देह ही कर्म योनि है, बाकि सारी योनियां भोग योनियां हैं । श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - बडे भाग मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन गावा।I गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं कि मनुष्य शरीर पाना बहुत सौभाग्य की बात है, यह मनुष्य शरीर देवताओं के लिए भी दुर्लभ है मानच दैह्न थें ही हम भक्ति करके इस भगवान को प्राप्त कर सकते हैं अन्य किसी देह में भक्ति करने की छूट नहीं है | केवल मानव देह ही कर्म योनि ह्ै॰ बाकि सारी योनियां బuifui గే / बडे भाग मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सब ग्रंथन गावा।I गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं कि मनुष्य शरीर पाना बहुत सौभाग्य की बात है, यह मनुष्य शरीर देवताओं के लिए भी दुर्लभ है मानच दैह्न थें ही हम भक्ति करके इस भगवान को प्राप्त कर सकते हैं अन्य किसी देह में भक्ति करने की छूट नहीं है | केवल मानव देह ही कर्म योनि ह्ै॰ बाकि सारी योनियां బuifui గే / - ShareChat
मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते। श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः॥ भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—जो मन को मुझमें लगाकर श्रद्धा से भक्ति करते हैं, वे श्रेष्ठ हैं। संसार में मन का राग नहीं होना चाहिए, केवल ईश्वर में हो । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गुरु महिमा😇 - नित्ययुक्ता मय्यावेश्य मनो ये मां उपासते। श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः|| श्रीकुष्णा  ক্রমন ৯-তী মন rlerfr को भक्ति मुझमें - GTTTICK श्रद्धा से करते हैं, वे श्रेष्ठ हैं। संसार में मन का राग नहीं होना चाहिए, केवल ईश्वर में हो। श्रीजी महाराज नित्ययुक्ता मय्यावेश्य मनो ये मां उपासते। श्रद्धया परयोपेतास्ते मे युक्ततमा मताः|| श्रीकुष्णा  ক্রমন ৯-তী মন rlerfr को भक्ति मुझमें - GTTTICK श्रद्धा से करते हैं, वे श्रेष्ठ हैं। संसार में मन का राग नहीं होना चाहिए, केवल ईश्वर में हो। श्रीजी महाराज - ShareChat
ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः। अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते॥ तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्। भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम्॥ भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि हे पार्थ ! जो लोग अपने सभी कर्म मुझे अर्पित करके, अनन्य रूप से केवल मुझे ही परम मानकर मेरी भक्ति करते हैं, मैं उन्हें मृत्यु रूपी संसार सागर से शीघ्र पार कराता हूँ। श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः | अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते।। तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्। भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम् Il जो लोग अपने सभी कर्म मुझे अर्पित करके, मुझे ही परम मानकर मेरी भक्ति करते हैं, मैं उन्हें मृत्यु रूपी संसार सागर से शीघ्र पार कराता हूँ श्रीजी महाराज ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः | अनन्येनैव योगेन मां ध्यायन्त उपासते।। तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्। भवामि नचिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम् Il जो लोग अपने सभी कर्म मुझे अर्पित करके, मुझे ही परम मानकर मेरी भक्ति करते हैं, मैं उन्हें मृत्यु रूपी संसार सागर से शीघ्र पार कराता हूँ श्रीजी महाराज - ShareChat
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च। निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥ सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः। मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः॥ जो किसी से द्वेष नहीं करता, सबके प्रति मित्रभाव और दया रखता है, अहंकार रहित है, सुख-दुःख में समान रहता है—ऐसा भक्त मुझे अत्यंत प्रिय है। श्रीजी महाराज #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - अद्वेष्टा सर्वभूताना मैत्रः करुण एव च। निर्ममो निरहुङ्कारः समदुःखसुखः क्षमीI सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः| मय्यर्पितमनोबुद्धि्यों मद्भक्तः स मे Iqu:Il जो किसी से द्वेष नहीं करता, सबके प्रति मित्रभाव और दया रखता है, अहंकार रहित है, सुख दुःख में समान रहता है - ऐसा भक्त मुझे अत्यंत प्रिय ! श्रीजी महाराज अद्वेष्टा सर्वभूताना मैत्रः करुण एव च। निर्ममो निरहुङ्कारः समदुःखसुखः क्षमीI सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः| मय्यर्पितमनोबुद्धि्यों मद्भक्तः स मे Iqu:Il जो किसी से द्वेष नहीं करता, सबके प्रति मित्रभाव और दया रखता है, अहंकार रहित है, सुख दुःख में समान रहता है - ऐसा भक्त मुझे अत्यंत प्रिय ! श्रीजी महाराज - ShareChat
चित्त की वृत्तियां जैसे काम, क्रोध, लोभ और मोह जब तक पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हो जाएंगी, तब तक शांति, सुख की एक झलक भी प्राप्त नहीं होगी । जब तक यह वृत्तियां हमारे अंत: करण में रहेंगी, यह हमें अशांत करती रहेंगी । इन्हें समाप्त करने का एकमात्र उपाय यही है कि हम अपने मन को ईश्वर में लगाएं । श्रीजी महाराज #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - चित्त की वृत्तियां जैसे काम , क्रोध , लोभ और मोह का जब तक पूर्ण " रूप से समाप्त नहीं हो जाएंगी , तब तक शांति, सुख की एक झलक भी प्राप्त नहीं होगी | जब तक यह afui अंतः करण में रहेंगी , हमारे यह हमें अशांत करती रहेंगी | श्रीजी महाराज चित्त की वृत्तियां जैसे काम , क्रोध , लोभ और मोह का जब तक पूर्ण " रूप से समाप्त नहीं हो जाएंगी , तब तक शांति, सुख की एक झलक भी प्राप्त नहीं होगी | जब तक यह afui अंतः करण में रहेंगी , हमारे यह हमें अशांत करती रहेंगी | श्रीजी महाराज - ShareChat