कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥
भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तुम कर्मों के फल के कारण मत बनो और न ही कर्म न करने में आसक्त हो। आसक्ति रहित कर्म हमें करना है, मन को ईश्वर में पूर्णतः लगाकर शरीर से संसार के कर्म करें ।
श्रीजी महाराज #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕