Jaswant Dass
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#निमंत्रण_संसारको_सम्मानकेसाथ #Bhandara #feast #langar #trending #photooftheday #kashi #banarasi #UP #kabir #KabirisGod #SantRampalJiMaharaj #SatlokAshram #trendingreels #trend #AnnapurnaMuhim #GodKabirNirvanDiwas #कबीर
कबीर - जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पावन सान्निध्य में করনীয মচন সী ক 508 ব ब्विदण ढिवर के उपलक्ष्य में २७ , २८, २९ जनवरी २०२६ को विशाल भण्डारा संत गरीबदास जी महाराज की अमर वाणी का तीन दिवसीय சHao अखंड पाठ Hai स्वतदान शिविर जैसे कई भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। पवित्र महासमागम पर आप सभी सपरिवार सादर आमंत्रित हैं । 5 आयोजन स्थलष सतलाक आश्रम धनाना धाम वहरियाणा ) tinrilo WILಕol (frri tinrio WIಣ @blm) nnlnW`5mಖ (Eflwy 0a सतताक गशम भिचानी (चयाणा 3nrima೦ (nlny dत ಖI sಣrri (muntn सतत्तीक ت ت C1NO I) பrgi ச ೆml    dलापा 9 " uWTuI -l अधिक जानकारी कलिय सम्पर्क कर ३ + 9१ 7496801825 जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पावन सान्निध्य में করনীয মচন সী ক 508 ব ब्विदण ढिवर के उपलक्ष्य में २७ , २८, २९ जनवरी २०२६ को विशाल भण्डारा संत गरीबदास जी महाराज की अमर वाणी का तीन दिवसीय சHao अखंड पाठ Hai स्वतदान शिविर जैसे कई भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। पवित्र महासमागम पर आप सभी सपरिवार सादर आमंत्रित हैं । 5 आयोजन स्थलष सतलाक आश्रम धनाना धाम वहरियाणा ) tinrilo WILಕol (frri tinrio WIಣ @blm) nnlnW`5mಖ (Eflwy 0a सतताक गशम भिचानी (चयाणा 3nrima೦ (nlny dत ಖI sಣrri (muntn सतत्तीक ت ت C1NO I) பrgi ச ೆml    dलापा 9 " uWTuI -l अधिक जानकारी कलिय सम्पर्क कर ३ + 9१ 7496801825 - ShareChat
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कबीर - दिव्य भंडारा [ पूज्य संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सान्निध्य में परमेश्वर कबीर जी के ( ^মিনতা के उपलक्ष्य में विशाल समागम কিলাক: 27, 28, 29 তালনইী 2026 दहेजमुक्त   विवाह থিবিও বিংাল মভাম ப 3771= নিঃখুণক अखड UI6 आध्यात्मका  प्रदशनी नामदीकष आयाजन स्थलः आप सपरिवार सतलाक आश्रम धनाना धाम वहरियाणा)  सत्सीक आसम मुंदका (दिल्सी   ITTETT TTౌTT (GTITITT] TTITTTT TITITT TRT (TNTT] TIFI आमंत्रित हैं! {riln JlLa ಊ lt (TrtnurTI) Ynrrl ೊrIL1 Icr-il (rtrruIl) ' TIuLLIIR HIWII LIIII (IIFI) सादर {Inrilas JIIMT Jrlrl (JIHaTI) Tirrla ಹLMT r iufl T] TITHFI7HIUI 4[]34||4" 1==1` सतनोफ आभम सीत्ाफर (उ्ममदेर ] सतासाय शाप्म सानत ITFEI अपिक जानकारी कलिये सम्पर्क कर 91 7496801825 दिव्य भंडारा [ पूज्य संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सान्निध्य में परमेश्वर कबीर जी के ( ^মিনতা के उपलक्ष्य में विशाल समागम কিলাক: 27, 28, 29 তালনইী 2026 दहेजमुक्त   विवाह থিবিও বিংাল মভাম ப 3771= নিঃখুণক अखड UI6 आध्यात्मका  प्रदशनी नामदीकष आयाजन स्थलः आप सपरिवार सतलाक आश्रम धनाना धाम वहरियाणा)  सत्सीक आसम मुंदका (दिल्सी   ITTETT TTౌTT (GTITITT] TTITTTT TITITT TRT (TNTT] TIFI आमंत्रित हैं! {riln JlLa ಊ lt (TrtnurTI) Ynrrl ೊrIL1 Icr-il (rtrruIl) ' TIuLLIIR HIWII LIIII (IIFI) सादर {Inrilas JIIMT Jrlrl (JIHaTI) Tirrla ಹLMT r iufl T] TITHFI7HIUI 4[]34||4" 1==1` सतनोफ आभम सीत्ाफर (उ्ममदेर ] सतासाय शाप्म सानत ITFEI अपिक जानकारी कलिये सम्पर्क कर 91 7496801825 - ShareChat
#निमंत्रण_संसारको_सम्मानकेसाथ 4Days Left For Nirvan Diwas #कबीर
कबीर - दिव्य भंडारा पूज्य संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सान्निध्य में परमेश्वर कबीर जी के ஈGuG के उपलक्ष्य में विशाल समागम दिनांकः २७ , २८, २९ जनवश २०२६ अमृतमयी वाणी का अखंड पाठ संत गरीबदास जी की ٥3 दहेजमुक्त থিবিও বিংাল' মভায {7নান [dgja अखड पठ आध्यात्मक নালনাঙা पदशनी Gs तत्वदशी संत ण्मणल जी महारज़ढे आयोजन स्थलः आप सपरिवार सतलाक आश्रम धनाना धाम वहरियाणा )  सतलौक आश्रम मुंदका (दिल्सी)  सतसोक आसम फी।पंगाग ) सतसाक गाश्म कनादाम (ऐनयाणा )  सादर आमंत्रित हैं! {Ilcilu JTI!a r 1t ( ZtHtnTI) ' Tntrln Irm1 [cr il (ritrui) ' Trrtilin Myl tr ml (mlm)' चेतत ( मध्यपयेरा सतसोय गासम पयसापृी Or 2 মশমা TITHFI7IUTI 4[]44|4 CHT तीताफा  ர ஈH எ মবনবি মামস (TTTILTI]  सानरयान अपिक जानकारी ळलिये सम्पर्क कर 91 7496801825 दिव्य भंडारा पूज्य संत रामपाल जी महाराज जी के पावन सान्निध्य में परमेश्वर कबीर जी के ஈGuG के उपलक्ष्य में विशाल समागम दिनांकः २७ , २८, २९ जनवश २०२६ अमृतमयी वाणी का अखंड पाठ संत गरीबदास जी की ٥3 दहेजमुक्त থিবিও বিংাল' মভায {7নান [dgja अखड पठ आध्यात्मक নালনাঙা पदशनी Gs तत्वदशी संत ण्मणल जी महारज़ढे आयोजन स्थलः आप सपरिवार सतलाक आश्रम धनाना धाम वहरियाणा )  सतलौक आश्रम मुंदका (दिल्सी)  सतसोक आसम फी।पंगाग ) सतसाक गाश्म कनादाम (ऐनयाणा )  सादर आमंत्रित हैं! {Ilcilu JTI!a r 1t ( ZtHtnTI) ' Tntrln Irm1 [cr il (ritrui) ' Trrtilin Myl tr ml (mlm)' चेतत ( मध्यपयेरा सतसोय गासम पयसापृी Or 2 মশমা TITHFI7IUTI 4[]44|4 CHT तीताफा  ர ஈH எ মবনবি মামস (TTTILTI]  सानरयान अपिक जानकारी ळलिये सम्पर्क कर 91 7496801825 - ShareChat
#पहचान_अविनाशी_प्रभु_की अंधविश्वास तोड़ना आसान नहीं, पर कबीर साहेब ने करके दिखाया। यह लीला केवल परमात्मा ही कर सकते हैं। #कबीर अधिक जानकारी के लिए Sant Rampal Ji Maharaj App डाउनलोड करें। 4Days Left For Nirvan Diwas
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#पहचान_अविनाशी_प्रभु_की 5Days Left For Nirvan Diwas #कबीर
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#SacrificedAll_LostMoksha धर्म के नाम पर डर और लालच फैलाया गया। गरीबदास जी ने इस पाखंड का खुलकर विरोध किया। अधिक जानकारी के लिए Sant Rampal Ji Maharaj App डाउनलोड करें। God KabirJi Nirvan Diwas #कबीर
कबीर - गलाभीकटाया ; मोक्षनहींपाया कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दै दान। काशी करौत ले मरै, तौ भी नरक निदान।। जो व्यक्ति गाय दान करते हैं यानि धर्म करते हैं।वे यदि तिलभर माँस मछली या अन्य किसी जीव का खाएगा तो उसका वह गऊ दान का धर्म समाप्त हो जाएगा | चाहे वह काशी में करौंत से गला भी कटा ले तो भी वह नरक में गिरेगा | जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Sant Rampal Ji YOUTUBE fite Buuk : Maharaj CHANNEL 749uube5  Vnl Rmlahದ गलाभीकटाया ; मोक्षनहींपाया कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दै दान। काशी करौत ले मरै, तौ भी नरक निदान।। जो व्यक्ति गाय दान करते हैं यानि धर्म करते हैं।वे यदि तिलभर माँस मछली या अन्य किसी जीव का खाएगा तो उसका वह गऊ दान का धर्म समाप्त हो जाएगा | चाहे वह काशी में करौंत से गला भी कटा ले तो भी वह नरक में गिरेगा | जगतगुरु तत्त्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Sant Rampal Ji YOUTUBE fite Buuk : Maharaj CHANNEL 749uube5  Vnl Rmlahದ - ShareChat
#गला_भी_कटाया_मोक्ष_नहींपाया Actions performed without understanding the scriptures are futile. A guru is one who provides evidence from the scriptures. God Kabir Nirvan Diwas #कबीर
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#गला_भी_कटाया_मोक्ष_नहींपाया Kabir Sahib also rejected the illusion of place. The path of devotion is simple, but it must be true. God Kabir Nirvan Diwas #कबीर
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#GodNightTuesday #Annapurna_Muhim_SantRampalJi . नानक साहेब जी प्रभु कबीर साहिब जी का मिलना साहिब मेरा एको है। एको है भाई एको है। आपे रूप करे बहु भांती नानक बपुड़ा एव कह।। जो तिन कीआ सो सचु थीआ,अमृत नाम सतगुरु दीआ।। गुरु पुरे ते गति मति पाई। बूडत जगु देखिआ तउ डरि भागे। सतिगुरु राखे से बड़ भागे, नानक गुरु की चरणों लागे। मैं गुरु पूछिआ अपणा साचा बिचारी राम। उपरोक्त वाणीया गुरूग्रंथ साहिब मे से अलग अलग स्थान से ली है। अमृतवाणी में श्री नानक साहेब जी स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि साहिब एक ही है तथा मेरे गुरु जी ने मुझे उपदेश नाम मन्त्रा दिया, वही नाना रूप धारण कर लेता है अर्थात् वही सतपुरुष है वही जिंदा रूप बना लेता है। वही धाणक रूप में भी विराजमान होकर आम व्यक्ति अर्थात् भक्त की भूमिका करता है। शास्त्रा विरुद्ध पूजा करके सारे जगत् को जन्म-मृत्यु व कर्मफल की आग में जलते देखकर जीवन व्यर्थ होने के डर से भाग कर मैंने गुरु जी के चरणों में शरण ली। बलिहारी गुरु आपणे दिउहाड़ी सदवार। जिन माणस ते देवते कीए करत न लागी वार। आपीनै आप साजिओ आपीनै रचिओ नाउ। दुयी कुदरति साजीऐ करि आसणु डिठो चाउ। दाता करता आपि तूं तुसि देवहि करहि पसाउ। तूं जाणोइ सभसै दे लैसहि जिंद कवाउ करि आसणु डिठो चाउ। भावार्थ है कि पूर्ण परमात्मा जिंदा का रूप बनाकर बेई नदी पर आए अर्थात् जिंदा कहलाए तथा स्वयं ही दो दुनिया ऊपर तथा नीचे को रचकर ऊपर सत्यलोक में आकार में आसन पर बैठ कर चाव के साथ अपने द्वारा रची दुनियाँ को देख रहे हो तथा आप ही स्वयम्भू अर्थात् माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते, स्वयं प्रकट होते हो। यही प्रमाण पवित्र यजुर्वेद अध्याय 40 मं. 8 में है कि कविर् मनीषि स्वयम्भूः परिभू व्यवधाता, भावार्थ है कि कबीर परमात्मा सर्वज्ञ है। तथा अपने आप प्रकट होता है। वह सनातन अर्थात् सर्वप्रथम वाला प्रभु है। वह सर्व ब्रह्मण्डों का अर्थात् भिन्न-भिन्न सर्व लोकों का रचनहार है। एहू जीउ बहुते जन्म भरमिआ,ता सतिगुरु शबद सुणाइया भावार्थ है कि श्री नानक साहेब जी कह रहे हैं कि मेरा यह जीव बहुत समय से जन्म तथा मृत्यु के चक्र में भ्रमता रहा अब पूर्ण सतगुरु ने वास्तविक नाम प्रदान किया। श्री नानक जी के पूर्व जन्म सतयुग में राजा अम्ब्रीष, त्रोतायुग में राजा जनक हुए थे और फिर नानक जी हुए तथा अन्य योनियों के जन्मों की तो गिनती ही नहीं है। इस निम्न लेख में प्रमाणित है कि कबीर साहेब तथा नानक जी की वार्ता हुई है। यह भी प्रमाण है कि राजा जनक विदेही भी श्री नानक जी थे तथा श्री सुखदेव जी भी राजा जनक का शिष्य हुआ था। पराण संगली पंजाबी लीपी संपादक: डाॅ. जगजीत सिह खानपुरी पब्लिकेशन ब्यूरो पंजाबी युनिवर्सिटी, पटियाला। प्रकाशित सन् 1961 के पृष्ठ न. 399 से सहाभार गोष्टी बाबे नानक और कबीर जी की उह गुरुजी चरनि लागि करवै,बीनती को पुन करीअहु देवा अगम अपार अभै पद कहिए, सो पाईए कित सेवा।। मुहि समझाई कहहु गुरु पूरे, भिन्न-भिन्न अर्थ दिखावहु। जिह बिधि परम अभै पद पाईये, सा विधि मोहि बतावहु। मन बच करम कृपा करि दीजै, दीजै शब्द उचारं।। कहै कबीर सुनहु गुरु नानक, मैं दीजै शब्द बीचारं।। (नानक जी) नानक कह सुनों कबीर जी, सिखिया एक हमारी। तन मन जीव ठौर कह ऐकै, सुंन लागवहु तारी।। करम अकरम दोऊँ तियागह, सहज कला विधि खेलहु। जागत कला रहु तुम निसदिन, सतगुरु कल मन मेलहु।। तजि माया र्निमायल होवहु, मन के तजहु विकारा। नानक कह सुनहु कबीर जी, इह विधि मिलहु अपारा। (कबीर जी) गुरुजी माया सबल निरबल जन तेरा,क्युं अस्थिर मन होई काम क्रोध व्यापे मोकु, निस दिन सुरति निरत बुध खोई।। मन राखऊ तवु पवण सिधारे, पवण राख मन जाही। मन तन पवण जीवैं होई एकै, सा विधि देहु बुझााई।। (नानक जी) दिृढ करि आसन बैठहु वाले, उनमनि ध्यान लगावहु। अलप-अहार खण्ड कर निन्द्रा, काम क्रोध उजावहु।। नौव दर पकड़ि सहज घट राखो, सुरति निरति रस उपजै। गुरु प्रसादी जुगति जीवु राखहु, इत मंथत साच निपजै।4। (कबीर जी) कबीर कवन सुखम कवन स्थूल कवन डाल कवन है मूल गुरु जी किया लै बैसऊ, किआ लेहहु उदासी। कवन अग्नि की धुणी तापऊ कवन मड़ी महि बासी।। (नानक जी) नानक ब्रह्म सुखम सुंन असथुल, मन है पवन डाल है मूल करम लै सोवहु सुरति लै जागहु, ब्रह्म अग्नि ले तापहु। निस बासर तुम खोज खुजावहु,सुंन मण्डल ले डूम बापहु6 (सतगुरु कहै सुनहे रे चेला, ईह लछन परकासे) (गुरु प्रसादि सरब मैं पेखहु, सुंन मण्डल करि वासे) (कबीर जी) सुआमी जी जाई को कहै, ना जाई वहाँ क्या अचरज होई जाई। मन भै चक्र रहऊ मन पूरे, सा विध देहु बताई।। नानक जी अपना अनभऊ कहऊ गुरुजी, परम ज्योति किऊं पाई। ससी अर चड़त देख तुम लागे, ऊहाँ कीटी भिरणा होता। नानक कह सुनहु कबीरा, इत बिध मिल परम तत जोता। (कबीर जी) धन धन धन गुरु नानक, जिन मोसो पतित उधारो। निर्मल जल बतलाइया मो कऊ, राम मिलावन हारो।9 (नानक जी) जब हम भक्त भए सुखदेवा, जनक विदेह किया गुरुदेवा। कलिमहि जुलाहा नामकबीरा,ढूंडथे चित भईआ न थीरा। बहुतभांति कर सिमरनकीना,इहै मन चंचल तबहुन भिना। जब करि ज्ञान भए उदासी, तब न काटि कालहि फांसी।। जबहम हारपरे सतिगुरु दुआरे,दे गुरु नामदान लीए उधारे (कबीर जी) सतगुरु पुरुख सतिगुरु पाईया,सतिनाम लै रिदै बसाईआ। जात कमीना जुलाहाअपराधि,गुरुकृपा ते भगति समाधी। मुक्ति भइआ गुरु सतिगुरु बचनी, गईया सु सहसा पीरा। जुग नानक सतिगुरु जपीअ, कीट मुरीद कबीरा।। सुनि उपदेश सम्पूर्ण सतगुरु का, मन महि भया अनंद। मुक्ति का दाता बाबा नानक, रिंचक रामानन्द।। ऊपर लिखी वाणी ‘प्राण संगली‘ नामक पुस्तक से लिखी हैं। इसमें स्पष्ट लिखा है कि वाणी संख्या 9 तक दोहों में पूरी पंक्ति के अंतिम अक्षर मेल खाते हैं। परन्तु वाणी संख्या 10 की पाँच पंक्तियां तथा वाणी संख्या 11 की पहली दो पक्तियां चैपाई रूप में हैं तथा फिर दो पंक्तियां दोहा रूप में है तथा फिर वाणी संख्या 12 में केवल दो पंक्तियां हैं जो फिर दोहा रूप में है। इससे सिद्ध है कि वास्तविक वाणी को निकाला गया है जो वाणी कबीर साहेब जी के विषय में श्री नानक जी ने सतगुरु रूप में स्वीकार किया होगा। नहीं तो दोहों में चलती आ रही वाणी फिर चैपाईयों में नहीं लिखी जाती। फिर बाद में दोहों में लिखी है। यह सब जान-बूझ कर प्रमाण मिटाने के लिए किया है। वाणी संख्या 10 की पहली पंक्ति ‘जब हम भक्त भए सुखदेवा, जनक विदेही किया गुरुदेवा‘ स्पष्ट करती है कि श्री नानक जी कह रहे हैं कि मैं जनक रूप में था उस समय मेरा शिष्य श्री सुखदेव ऋषि हुए थे। इस वाणी संख्या 10 को नानक जी की ओर से कही मानी जानी चाहिए तो स्पष्ट है कि नानक जी कह रहे है कि मैं हार कर गुरू कबीर के चरणों में गिर गया उन्होंने नाम दान करके उद्धार किया। वास्तव में यह 10 नं. वाणी कही अन्य वाणी से है। यह पंक्ति भी परमेश्वर कबीर साहेब जी की ओर से वार्ता में लिख दिया है। क्योंकि परमेश्वर कबीर साहेब जी ने अपनी शक्ति से श्री नानक जी को पिछले जन्म की चेतना प्रदान की थी। तब नानक जी ने स्वीकार किया था कि वास्तव में मैं जनक था तथा उस समय सुखदेव मेरा भक्त हुआ था। वाणी संख्या 11 में चार पंक्तियां हैं जबकि वाणी संख्या 10 में पाँच पंक्तियां लिखी हैं। वास्तव में प्रथम पंक्ति ‘जब हम भक्त भए सुखदेवा . ‘ वाली में अन्य तीन पंक्तियां थी, जिनमें कबीर परमेश्वर को श्री नानक जी ने गुरु स्वीकार किया होगा। उन्हें जान बूझ कर निकाला गया लगता है। Visit Annapurna Muhim YouTube #कबीर
कबीर - নানক যামব নী কী নিল থ কবীয যা৪ব का जाप करत थ। फिर उन्हें बई नटी पर कबीर साहेब न पहल श्री नीनकदवजी एक औकारआम) मन्न दर्शन दे कर सतलोक ( सच्चखण्ड) दिखाया तथा अपने सतपुरूष रूप को दिखाया व सतनाम का जाप दिया। तब नानक नी की काल लोक स मुक्ति हुई। गुरु ग्रन्य साहिब क राग " सिरी " महला 1 पृष्ठ नं॰ २४ पर शब्द नं॰ २९ फाही सुरत मलूकी वेस , उह ठगवाड़ा ठगी देस।। खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतारा। एक(मन रूपी) कुत्ता तथा इसके साथ दा (आशा तृष्णा रूपी) अनावर्यक भकती उ्मंग उठती कुतिया रहती हैं तथा सदा नई नई आशाएँ उत्पन्नव्याती है) होती हैं। इनको मारने का तरीकाजो सत्यनाम तया बिना) झुठा कुड़ ) साधन( मुठ मुरदार) था। मुझे धाणक के रूप में हक्का कबीर (सत कबीर) तत्व ज्ञान मुझ वास्तविक उपासना बताई परमात्मा मिला। उन्ह satlokashramorg @Satlokashram @Satlokashram001 নানক যামব নী কী নিল থ কবীয যা৪ব का जाप करत थ। फिर उन्हें बई नटी पर कबीर साहेब न पहल श्री नीनकदवजी एक औकारआम) मन्न दर्शन दे कर सतलोक ( सच्चखण्ड) दिखाया तथा अपने सतपुरूष रूप को दिखाया व सतनाम का जाप दिया। तब नानक नी की काल लोक स मुक्ति हुई। गुरु ग्रन्य साहिब क राग " सिरी " महला 1 पृष्ठ नं॰ २४ पर शब्द नं॰ २९ फाही सुरत मलूकी वेस , उह ठगवाड़ा ठगी देस।। खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतारा। एक(मन रूपी) कुत्ता तथा इसके साथ दा (आशा तृष्णा रूपी) अनावर्यक भकती उ्मंग उठती कुतिया रहती हैं तथा सदा नई नई आशाएँ उत्पन्नव्याती है) होती हैं। इनको मारने का तरीकाजो सत्यनाम तया बिना) झुठा कुड़ ) साधन( मुठ मुरदार) था। मुझे धाणक के रूप में हक्का कबीर (सत कबीर) तत्व ज्ञान मुझ वास्तविक उपासना बताई परमात्मा मिला। उन्ह satlokashramorg @Satlokashram @Satlokashram001 - ShareChat