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कबीर - संत रामपाल जी महाराज अन्नपूर्णीा मुहिम  कलयुग में सतयुग जैसा माहौल कैसे ला रही है? कलयुग में सतयुग की शुरुआत भा 5 १६ महाकला और 38ః परकाया प्रवेश का रहस्य जानने के लिए देखिए कलयुग में सतयुग में शुरुआत Part 5 Factful Debates यूट्यूब चैनल पर Factful Debates YOUTUBE Free Book : CHANNEL 7496801825 0Fa0HNDaates I७7 vido0s 44>೦ಎ संत रामपाल जी महाराज अन्नपूर्णीा मुहिम  कलयुग में सतयुग जैसा माहौल कैसे ला रही है? कलयुग में सतयुग की शुरुआत भा 5 १६ महाकला और 38ః परकाया प्रवेश का रहस्य जानने के लिए देखिए कलयुग में सतयुग में शुरुआत Part 5 Factful Debates यूट्यूब चैनल पर Factful Debates YOUTUBE Free Book : CHANNEL 7496801825 0Fa0HNDaates I७7 vido0s 44>೦ಎ - ShareChat
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कबीर - भवष्यमालक कल्कि अवतार रक्तपात नहीं, केवल 'तत्वज्ञान' की तलवार से अज्ञान का विनाश देखिए आज (१४ मार्च शनिवार) दोपहर १२:०० बजे Factful Debates यूट्यूब चैनल पर भवष्यमालक कल्कि अवतार रक्तपात नहीं, केवल 'तत्वज्ञान' की तलवार से अज्ञान का विनाश देखिए आज (१४ मार्च शनिवार) दोपहर १२:०० बजे Factful Debates यूट्यूब चैनल पर - ShareChat
. ऋषि रामानन्द के आश्रम में दो रूप धारण करना’’ स्वामी रामानन्द जी ने परमेश्वर कबीर जी से कहा कि ‘‘आपने झूठ क्यों बोला?’’ कबीर परमेश्वर जी बोले! कैसा झूठ स्वामी जी? स्वामी रामानन्द जी ने कहा कि आप कह रहे थे कि आपने मेरे से नाम ले रखा है। आपने मेरे से उपदेश कब लिया? बालक रूपधारी कबीर परमेश्वर जी बोले एक समय आप स्नान करने के लिए पँचगंगा घाट पर गए थे। मैं वहाँ लेटा हुआ था। आपके पैरों की खड़ाऊँ मेरे सिर में लगी थी! आपने कहा था कि बेटा राम नाम बोलो। रामानन्द जी बोले-हाँ, अब कुछ याद आया। परन्तु वह तो बहुत छोटा बच्चा था (क्योंकि उस समय पाँच वर्ष की आयु के बच्चे बहुत बड़े हो जाया करते थे तथा पाँच वर्ष के बच्चे के शरीर तथा ढ़ाई वर्ष के बच्चे के शरीर में दुगुना अन्तर हो जाता है)। कबीर परमेश्वर जी ने कहा स्वामी जी देखो, मैं ऐसा था। स्वामी रामानन्द जी के सामने भी खड़े हैं और एक ढाई वर्षीय बच्चे का दूसरा रूप बना कर किसी सेवक की वहाँ पर चारपाई बिछी थी उसके ऊपर विराजमान हो गए। रामानन्द जी ने छः बार तो इधर देखा और छः बार उधर देखा। फिर आँखें मलमल कर देखा कि कहीं तेरी आँखें धोखा तो नहीं खा रही हैं। इस प्रकार देख ही रहे थे कि इतने में कबीर परमेश्वर जी का छोटे वाला रूप हवा में उड़ा और कबीर परमेश्वर जी के बड़े पाँच वर्ष वाले स्वरूप में समा गया। पाँच वर्ष वाले स्वरूप में कबीर परमेश्वर जी रह गए। रामानन्द जी बोले कि मेरा संशय मिट गया कि आप ही पूर्ण ब्रह्म हो। हे परमेश्वर! आपको कैसे पहचान सकते हैं। आप किस जाति में उत्पन्न तथा कैसी वेश भूषा में खड़े हो। हम अज्ञानी प्राणी आप के साथ वाद-विवाद करके दोषी हो गए, क्षमा करना परमेश्वर कविर्देव, मैं आपका अनजान बच्चा हूँ। रामानन्द जी ने फिर अपनी अन्य शंकाओं का निवारण करवाया। हे कविर्देव! मैं राम-राम कोई मन्त्र शिष्यों को जाप करने को नहीं देता। यदि आपने मुझसे दीक्षा ली है तो वह मन्त्र बताईए जो मैं शिष्य को जाप करने को देता हूँ। कबीर देव ने कहा कि हे स्वामी जी! आप ओम् नाम जाप करने को देते हो तथा ओ3म् भगवते वासुदेवाय नमः का जाप तथा विष्णु स्त्रोत की आवर्ती की भी आज्ञा देते हो। स्वामी रामानंद जी ने कहा कि आपने जो मन्त्र बताया यह तो सही है। एक शंका और है उसका भी निवारण कीजिए। मैं जिसे शिष्य बनाता हूँ उसे एक चिन्ह देता हूँ। वह आपके पास नहीं है। बन्दी छोड़ कबीर देव बोले हे गुरुदेव! आप तुलसी की लकड़ी के एक मणके की कण्ठी (माला) गले में पहनने के लिए देते हो। यह देखो गुरु जी उसी दिन आपने अपनी कण्ठी गले से निकाल कर मेरे गले में पहनाई थी। यह कहते हुए कविर्देव ने अपने कुर्ते के नीचे गले में पहनी वही कण्ठी (माला) सार्वजनिक कर दी तथा कहा कि आप स्वर्ग में जाने की इच्छा का त्याग करो। मेरा ज्ञान सुनो। सनातन परम धाम में जाने की साधना करो। ए स्वामी तुम स्वर्ग की, छांडौ आशा रीति। गरीबदास तुम कारणैं, उतरे शब्दातीत।।485।। सुनि बच्चा में स्वर्ग की कैसैं छांडौं रीति। गरीबदास गुदरी लगी, जनम जात है बीत।।486।। च्यारि मुक्ति बैकुंठ में, जिन की मोरै चाह। गरीबदास घर अगम की, कैसैं पाऊं थाह।।487।। हेम रूप जहाँ धरणि है, रतन जड़े बौह शोभ। गरीबदास बैकुंठ कूं, तन मन हमरा लोभ।।488।। शंख चक्र गदा पदम हैं, मोहन मदन मुरारि। गरीबदास मुरली बजै, सुरगलोक दरबारि।।489।। दूधौं की नदियां बगैं, सेत वृक्ष सुभांन। गरीबदास मंदल मुक्ति, सुरगापुर अस्थान।।490।। रतन जड़ाऊ मनुष्य हैं, गण गंधर्व सब देव। ‌‌। गरीबदास उस धाम की, कैसे छाडूं सेव।।491।। ऋग युज साम अथर्वणं, गावैं चारौं बेद। गरीबदास घर अगम का, कैसे जानो भेद।।492।। च्यारि मुक्ति चितवन लगी, कैसैं बंचूं ताहि। गरीबदास गुप्तारगति, हमकूं द्यौ समझाय।।493।। सुरग लोक बैकुंठ है, यासैं परै न और। गरीबदास षट्शास्त्र, च्यारि बेदकी दौर।।494।। च्यारि बेद गावैं तिसैं, सुरनर मुनि मिलाप। गरीबदास धु्रव पोर जिस, मिटि गये तीनूं ताप।। प्रहलाद गये तिस लोककूं, सुरगा पुरी समूल। गरीबदास हरि भक्ति की, मैं बंचत हूं धूल।।496 बिंद्रावन खेले सही, रज केसर समतूल। गरीबदास उस मुक्ति कूं, कैसैं जाऊं भूल।।497 नारद ब्रह्मा जिस रटैं, गावैं शेष गणेश। गरीबदास बैकुंठ सैं, और परै को देश।।498।। सहंस अठासी जिस जपैं, और तेतीसौं सेव। गरीबदास जासैं परै, और कौन है देव।।499।। स्वामी रामानंद जी ने कहा कि हे बच्चा! मैं 104 वर्ष का वृद्ध हो चुका हूँ। सारा जीवन स्वर्ग प्राप्ति की साधना करके व्यतीत कर दिया। अब स्वर्ग जाने की आशा कैसे त्यागूँ? बताते हैं कि स्वर्ग में चार मुक्ति प्राप्त होती हैं। मुझे उनकी प्राप्ति की इच्छा है। जो इससे आगे वाले स्थान (अगम घर) सतलोक का (थाह) अंत कैसे प्राप्त करूँ? मेरा तो जीवन अंत होने वाला है। विष्णु जी के लोक की धरती (हेम) हिम यानि बर्फ जैसी सफेद है। रत्न स्थान-स्थान पर लगे हैं जो स्वर्ग की शोभा बढ़ा रहे हैं। श्री कृष्ण मनमोहन यानि श्री विष्णु जी चारों हाथों में शंख, चक्र, गदा तथा पदम लिए हैं। उस स्वर्ग लोक में श्री कृष्ण जी मुरली बजाते हैं। स्वर्ग लोक में दूधों की नदियां बहती हैं। सब वृक्ष (सेत) सफेद हैं, (सुभान) उत्तम हैं। सब मनुष्यों के शरीर में स्थान-स्थान पर तिल के स्थान पर रत्न लगे हैं। गण, गंधर्व तथा सब देवताओं के शरीरों पर भी लाल लगे हैं। उस सुंदर स्वर्ग धाम की (सेव) भक्ति कैसे छोड़ूँ? ऋग, यजु, साम, अथर्वण, ये चारों वेद स्वर्ग तक का ज्ञान देते हैं। उस (अगम घर) सतलोक का भेद मैं कैसे जानूँ? स्वर्ग लोक यानि बैकुण्ठ से परे और कौन-सा देश (लोक) है? मुझे अच्छी तरह समझा। मुझे चार मुक्तियों की (चितवन) लगन लगी है। उसे कैसे छोड़ूँ? चार वेद और (षट्) छः शास्त्रों की दौड़ तो स्वर्ग तक ही है यानि इनमें तो स्वर्ग तक का ज्ञान है। ध्रुव भी स्वर्ग में गया। प्रहलाद भी स्वर्ग में गया। मैं भी उसी भगवान विष्णु की भक्ति करके स्वर्ग जाने की इच्छा कर रहा हूँ। वृंदावन (मथुरा) में श्री कृष्ण रूप में (खेले) रास किया। हमारे लिए उस स्थान की (रज) धूल तो केसर के समान है। हे कबीर जी! उस स्वर्ग जाने वाली मुक्ति को कैसे भूल जाऊँ? नारद मुनि जी, अठासी हजार ऋषि, ब्रह्मा जी, शेष, गणेश आदि स्वर्ग का गुणगान करते हैं। इससे (परे) अन्य कौन-सा देश हो सकता है? तेतीस करोड़ देवता, अठासी हजार ऋषि भी श्री विष्णु की पूजा करते हैं। इससे (परै) अन्य कौन प्रभु हो सकता है? सुनि स्वामी निज मूल गति, कहि समझाऊं तोहि। गरीबदास भगवान कूं, राख्या जगत समोहि।।500।। तीनि लोक के जीव सब, विषय वास भरमाय। गरीबदास हमकूं जपैं, तिसकूं धाम दिखाय।।501।। जो देखैगा धाम कूं, सो जानत है मुझ। गरीबदास तोसैं कहूं, सुनि गायत्रा गुझ।।502।। कृष्ण बिष्णु भगवान कूं, जहडायें हैं जीव। गरीबदास त्रिलोक में, काल कर्म शिर शीव।।503।। सुनि स्वामी तोसैं कहूं, अगम दीप की सैल। गरीबदास पूठे परें, पुस्तक लादें बैल।।504।। पौहमी धरणि अकाश थंभ, चलसी चंदर सूर। गरीबदास रज बिरजकी, कहाँ रहैगी धूर।।505।। तारायण त्रिलोक सब, चलसी इन्द्र कुबेर। गरीबदास सब जात हैं, सुरग पाताल सुमेर।।506।। च्यारि मुक्ति बैकुंठ बट, फना हुआ कई बार। गरीबदास सतलोक को, नहीं जानैं संसार।।507।। कहौ स्वामी कित रहौगे, चौदा भुवन बिहंड। गरीबदास बीजक कह्या, चलत प्राण और पिंड।। सुन स्वामी एक शक्ति है, अरधंगी ¬कार। गरीबदास बीजक तहां, अनेक लोक सिंघार।।509।। जैसे का तैसा रहै, परलो फना प्रान। गरीबदास उसकी शक्तिकूं, बार बार कुरबांन।।510।। कोटि इन्द्र ब्रह्मा जहाँ, कोटि कृष्ण कैलास। गरीबदास शिब कोटि हैं, करौ कौंन की आश।।511।। कोटि बिष्णु जहाँ बसत हैं, उस शक्ति के धाम। गरीबदास गुल बौहत हैं, अलफ बस्त निहकाम।। शिब शक्ति जासै हुए, अनंत कोटि अवतार। गरीबदास उस अलफकूं, लखै सो होय करतार।। सतपुरूष हम स्वरूप है, तेज पुंज का कंत। गरीबदास गुलसैं परै, चलना है बिन पंथ।।514।। बिना पंथ उस कंतकै, धाम चलन है मोर। गरीबदास गति ना किसी, संख सुरग पर डोर।। #GodNightFriday #TrueWorship_EndsSuffering Sa True Story YouTube #कबीर
कबीर - मुक्तिबोध पेज (२९२-२९३) कबीर देव द्वारा 4 ऋषि रामानन्द के आश्रम में दो रूप धारण करना ७१ SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI SUPREMEGOD ORG in @SAINTRAMPALJIM MAHARAJ SAINT RAMPAL Jl मुक्तिबोध पेज (२९२-२९३) कबीर देव द्वारा 4 ऋषि रामानन्द के आश्रम में दो रूप धारण करना ७१ SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI SUPREMEGOD ORG in @SAINTRAMPALJIM MAHARAJ SAINT RAMPAL Jl - ShareChat
ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी सतभक्ति करने वाले की आयु बढ़ा देते हैं और यदि कोई रोगी मृत्यु के भी निकट है तो भी उसको निरोग करके सौ वर्ष तक कि आयु भी प्रदान कर सकते हैं। भक्ति न करने वाले और मनमानी पूजाएं करने वाले को काल के दूत ले जाते हैं जबकि सतभक्ति करने वाले को परमात्मा विमान में बैठाकर अमरलोक यानी सतलोक ले जाते हैं। जो व्यक्ति मनुष्य जन्म प्राप्त करके भक्ति नहीं करता, वह चौरासी लाख योनियों में कष्ट उठाता है। कुत्ता रात में ऊपर की ओर मुंह करके बहुत रोता है। इसलिए पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नाम लेकर सतभक्ति करनी चाहिए। सतभक्ति से शांतिदायक तथा अमर स्थान (सनातन परम धाम) प्राप्त हो जाता है (जिसके बारे में गीता जी के अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा है) जहाँ जाने के पश्चात् साधक फिर लौटकर संसार में कभी नहीं आता। #TrueWorship_EndsSuffering #SaTrueStoryYouTubeChannel #worship #faith #cancer #fyp #coloncancer #healthcare #stroke #digitalhealth #cancertreatment #healthsecrets #meditation #waheguru #harharmahadev #shiv #viralreels #कबीर
कबीर - अनेक गुरु 25 बनाये लेकिन कोई लाभ नहींहो रहा था सतगुरु की হ২০ স 31ট ২1 सतभाक्ति सै हु९ अनैकौों लाभा ] अधिक जानकारी के लिए देखें VSII SA SATRUE STORY YOUTUBE GHAIIEL Story True Story संत रामपाल जी महाराज जी से Sant Rampal Ji Maharaj App Download कीजिये निःशुल्क नामदीक्षा व निःशुल्क पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : +91 7496801823 Googk Play अनेक गुरु 25 बनाये लेकिन कोई लाभ नहींहो रहा था सतगुरु की হ২০ স 31ট ২1 सतभाक्ति सै हु९ अनैकौों लाभा ] अधिक जानकारी के लिए देखें VSII SA SATRUE STORY YOUTUBE GHAIIEL Story True Story संत रामपाल जी महाराज जी से Sant Rampal Ji Maharaj App Download कीजिये निःशुल्क नामदीक्षा व निःशुल्क पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : +91 7496801823 Googk Play - ShareChat
#TrueWorship_EndsSuffering यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 और अध्याय 5 मंत्र 32 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा सभी पापों का नाश कर देते हैं। कबीर परमेश्वर की भक्ति से जीवन सुखमय बन जाता है। अधिक जानकारी के लिए देखिए SA True Story youtube channel #कबीर
कबीर - چ٥ संत रामपाल जी कैसे कीशरण ग्रहण नर्ही करते तो पूय परिवार होे जाता ೊaro बचाया Aorti Devi; Gumlc10.09 महाराज जी ने आरती देवी संत रामपाल जी और उनके परिवार को बर्बाद होने से। SA अधिक जानकारी YouTube के लिए देखें Channel Story True ப4 ப-11 4 பI1 چ٥ संत रामपाल जी कैसे कीशरण ग्रहण नर्ही करते तो पूय परिवार होे जाता ೊaro बचाया Aorti Devi; Gumlc10.09 महाराज जी ने आरती देवी संत रामपाल जी और उनके परिवार को बर्बाद होने से। SA अधिक जानकारी YouTube के लिए देखें Channel Story True ப4 ப-11 4 பI1 - ShareChat
#TrueWorship_EndsSuffering संत रामपाल जी महाराज से नाम लेकर मर्यादा में रहकर सतभक्ति करने से शुभ संस्कार बढ़ते हैं और दुख का समय भी सुख में बदलने लगता है। अधिक जानकारी के लिए देखिए SA True Story youtube channel #कबीर
कबीर - डेरा ब्यास भी नहीं छुड़ा पाया मेरे पापा का नशा Durge Sohu Bolod 8:47 सतभक्ति से भिले अजब गजब सख जानिए कैसे संत रामपाल जी महाराज जी से नाम लेने से दुर्गा बहन के पिता हुए नशा मुक्त। VSli संत रामपाल जी महाराज जी से SA Sant Rampal Ji Maharaj App Download कीजिये निःशुल्क नामदीक्षा च निःशुल्क True Story +91 7496801823  पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : Gouge fny   6 डेरा ब्यास भी नहीं छुड़ा पाया मेरे पापा का नशा Durge Sohu Bolod 8:47 सतभक्ति से भिले अजब गजब सख जानिए कैसे संत रामपाल जी महाराज जी से नाम लेने से दुर्गा बहन के पिता हुए नशा मुक्त। VSli संत रामपाल जी महाराज जी से SA Sant Rampal Ji Maharaj App Download कीजिये निःशुल्क नामदीक्षा च निःशुल्क True Story +91 7496801823  पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : Gouge fny   6 - ShareChat
पत्थर में भगवान् सिद्ध करने वाले धर्म गुरुओं से बचें, पहले जिन्होंने किया उसे क्या मिला ये भी देखें। ध्यान रहे मनुष्य जीवन चौरासी लाख योनियाँ भुगतने के बाद प्राप्त होता है। #GodNightWednesday #कबीर
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कबीर कथा करो करतार की, सुनो कथा करतार । आन कथा सुनिये नहीं, कह कबीर विचार ।। #GodMorningWednesday #BigMistakeOf_DrBRAmbedkarJi कबीर जी ने उपदेश दिया है कि भक्त को चाहिए, वह केवल परमात्मा की चर्चा ही सुने और परमात्मा की चर्चा ही करे। अन्य कोई चर्चा नहीं सुननी चाहिए #कबीर
कबीर - कबीर करतार की कथा تاشل  की,सुनो कथा करतार | कबीर कथा करो करतार नहीं , कह कबीर विचार Il सुनिये आन कथा कबीर जी ने उपदेश दिया है कि भक्त को चाहिए, की चर्चा ही सुने वह केवल परमात्मा ম্ুন্ন্ী ক্রাষ্টিট और परमात्मा की qfee अन्य कोई चर्चा नहीं बंदीछोड़ सतगुरूु रामपाल जी महाराज Follow us on: SALOKASHRAMMUNDLA OFFCIALE SANUNDKADELHI SADELHIMUNDKA कबीर करतार की कथा تاشل  की,सुनो कथा करतार | कबीर कथा करो करतार नहीं , कह कबीर विचार Il सुनिये आन कथा कबीर जी ने उपदेश दिया है कि भक्त को चाहिए, की चर्चा ही सुने वह केवल परमात्मा ম্ুন্ন্ী ক্রাষ্টিট और परमात्मा की qfee अन्य कोई चर्चा नहीं बंदीछोड़ सतगुरूु रामपाल जी महाराज Follow us on: SALOKASHRAMMUNDLA OFFCIALE SANUNDKADELHI SADELHIMUNDKA - ShareChat
#GodNightTuesday #BigMistakeOf_DrBRAmbedkarJi . ज्ञान चर्चा धर्म दास व कबीर साहिब जी धर्मदास जी ने कहा कि हे प्रभु! हे जिन्दा! तत्त्वदर्शी सन्त की क्या पहचान है तथा प्रमाणित सद्ग्रन्थों में कहाँ प्रमाण है? आपका ज्ञान आत्मा के आर-पार हो रहा है। गीता का शब्दा शब्द यथार्थ भावार्थ आप जी के मुख कमल से सुनकर युगों की प्यासी आत्मा कुछ तृप्त हो रही है तथा गदगद हो रही है। जिन्दा परमेश्वर जी ने कहा कि परमेश्वर ने बताया कि पहले तो लक्षण सुन तत्त्वदर्शी सन्त अर्थात् पूर्ण ज्ञानी सत्गुरु के गुरू के लक्षण चार बखाना, प्रथम वेद शास्त्र को ज्ञाना। दूजे हरि भक्ति मन कर्म बानी, तीसरे समदृष्टि कर जानी। चौथे वेद विधि सब कर्मा, यह चार गुरु गुण जानो मर्मा। भावार्थ! जो तत्त्वदर्शी सन्त होगा उसमें चार मुख्य गुण होते हैं। जो निम्नलिखित है। 1. वह वेदों तथा अन्य सभी ग्रन्थों का पूर्ण ज्ञानी होता है। 2. दूसरे वह परमात्मा की भक्ति मन-कर्म-वचन से स्वयं करता है, केवल वक्ता-वक्ता नहीं होता, उसकी करणी और कथनी में अन्तर नहीं होता। 3. वह सर्व अनुयाईयों को समान दृष्टि से देखता है। ऊँच-नीच का भेद नहीं करता। 4. चौथे वह सर्व भक्तिकर्म वेदों के अनुसार करता तथा करवाता है अर्थात् शास्त्रनुकूल भक्ति साधना करता तथा करवाता है। यह ऊपर का प्रमाण तो सूक्ष्म वेद में है जो परमेश्वर ने अपने मुखकमल से बोला है। अब आप जी को श्रीमद्भगवत गीता में प्रमाण दिखाते हैं कि तत्त्वदर्शी सन्त की क्या पहचान बताई है? श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 में स्पष्ट है कि ऊर्धव मूलम् अधः शाखम् अश्वत्थम् प्राहुः अव्ययम्। छन्दासि यस्य प्रणानि, यः तम् वेद सः वेदवित्।। ऊपर को मूल (जड़) वाला, नीचे को तीनों गुण रुपी शाखा वाला उल्टा लटका हुआ संसार रुपी पीपल का वृक्ष जानो, इसे अविनाशी कहते हैं क्योंकि उत्पत्ति-प्रलय चक्र सदा चलता रहता है जिस कारण से इसे अविनाशी कहा है। इस संसार रुपी वृक्ष के पत्ते आदि छन्द हैं अर्थात् भाग (च्ंतजे) हैं। (य तम् वेद) जो इस संसार रुपी वृक्ष के सर्वभागों को तत्त्व से जानता है, (सः) वह (वेदवित्) वेद के तात्पर्य को जानने वाला है अर्थात् वह तत्त्वदर्शी सन्त है। जैसा कि गीता अध्याय 4 श्लोक 32 में कहा है कि परम अक्षर ब्रह्म स्वयं पृथ्वी पर प्रकट होकर अपने मुख कमल से तत्त्वज्ञान विस्तार से बोलते हैं। परमेश्वर ने अपनी वाणी में अर्थात् तत्त्वज्ञान में बताया है कि कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है, क्षर पुरुष वाकि डार। तीनों देवा शाखा हैं, पात रुप संसार।। जमीन से बाहर जो वृक्ष का हिस्सा है, उसे तना कहते हैं। तना तो जानों अक्षर पुरुष, तने से कई मोटी डार निकलती हैं। उनमें से एक मोटी डार जानों क्षर पुरुष। उस डार से तीन शाखा निकलती हैं, उनको जानों तीनों देवता रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी तथा तमगुण शिव-शंकर जी और इन शाखाओं को पत्ते लगते हैं, उन पत्तों को संसार जानो। गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में सांकेतिक विवरण है। तत्त्वज्ञान में विस्तार से कहा गया है। पहले गीता ज्ञान के आधार से ही जानते हैं। गीता अध्याय 15 श्लोक 2 में कहते हैं कि संसार रुपी वृक्ष की तीनों गुण (रजगुण ब्रह्माजी, सतगुण विष्णु जी तथा तमगुण शंकर जी) रुपी शाखाएं है। ये ऊपर (स्वर्ग लोक में) तथा नीचे (पाताल लोक) फैली हुई हैं। यह कहाँ प्रमाण है कि रजगुण ब्रह्मा है, सतगुण विष्णु तथा तमगुण शंकर है? 1. श्री मार्कण्डेय पुराण (सचित्रा मोटा टाईप गीता प्रैस गोरखपुर से प्रकाशित) के 123 पृष्ठ पर कहा है कि रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु तथा तमगुण शंकर, तीनों ब्रह्म की प्रधान शक्तियाँ है, ये ही तीन देवता हैं। ये ही तीन गुण हैं। 2. श्री देवी महापुराण संस्कृत व हिन्दी अनुवाद (श्री वैंकटेश्वर प्रैस बम्बई से प्रकाशित में तीसरे स्कंद अध्याय 5 श्लोक 8 में लिखा है कि शंकर भगवान बोले, हे मात! यदि आप हम पर दयालु हैं तो मुझे तमोगुण, ब्रह्मा रजोगुण तथा विष्णु सतोगुण युक्त क्यों किया? उपरोक्त प्रमाणों से सिद्ध हुआ कि रजगुण ब्रह्मा जी, सतगुण विष्णु जी तथा तमगुण शंकर जी हैं। तीनों शाखाएं ऊपर नीचे फैली हैं, का तात्पर्य है कि गीता का ज्ञान पृथ्वी लोक पर बोला जा रहा था। तीनों देवता की सत्ता तीन लोकों में है। 1. पृथ्वी लोक, 2. स्वर्ग लोक तथा 3. पाताल लोक। ये तीन मन्त्र हैं, एक-एक विभाग के मन्त्र हैं। रजगुण विभाग के श्री ब्रह्मा जी, सतगुण विभाग के श्री विष्णु जी तथा तमगुण विभाग के श्री शिव जी। गीता अध्याय 15 श्लोक 3 में कहा है कि हे अर्जुन! इस संसार रुपी वृक्ष का स्वरुप जैसे यहाँ अर्थात् तेरे और मेरे गीता के ज्ञान की चर्चा में नहीं पाया जाता अर्थात् मैं नहीं बता पाऊँगा क्योंकि इसके आदि और अन्त का मुझे अच्छी तरह ज्ञान नहीं है। इसलिए इस अतिदृढ़ मूल वाले अर्थात् जिस संसार रुपी वृक्ष की मूल है। वह परमात्मा भी अविनाशी है तथा उनका स्थान सत्यलोक, अलख लोक, अगम लोक तथा अकह लोक, ये चार ऊपर के लोक भी अविनाशी हैं। इन चारों में एक ही परमात्मा भिन्न-भिन्न रुप बनाकर सिंहासन पर विराजमान हैं। इसलिए इसको ‘‘सुदृढ़मूलम्’’ अति दृढ़ मूल वाला कहा है। इसे तत्त्वज्ञान रुपी शस्त्रा से काटकर अर्थात् तत्त्वदर्शी सन्त से तत्त्वज्ञान समझकर। फिर गीता अध्याय 15 श्लोक 4 में कहा है कि उसके पश्चात् परमेश्वर के उस परमपद अर्थात् सत्यलोक की खोज करनी चाहिए, जहाँ जाने के पश्चात् साधक फिर लौटकर संसार में कभी नहीं आते। जिस परमेश्वर से संसार रुपी वृक्ष की प्रवृत्ति विस्तार को प्राप्त हुई है अर्थात् जिस परमेश्वर ने सर्व संसार की रचना की है। उसी परमेश्वर की भक्ति को पहले तत्त्वदर्शी सन्त से समझो! गीता ज्ञान दाता अपनी भक्ति को भी मना कर रहा है। गीता अध्याय 15 श्लोक 16-17 में तीन प्रभु बताये हैं। क्षर पुरुष, अक्षर पुरुष ये दोनों नाशवान हैं। तीसरा परम अक्षर पुरुष है जो संसार रुपी वृक्ष का मूल है। वह वास्तव में अविनाशी है। जड़ से ही वृक्ष के सर्व भागों ‘‘तना, डार-शाखाओं तथा पत्तों‘‘ को आहार प्राप्त होता है। वह परम अक्षर पुरुष ही तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण-पोषण करता है। उसी मालिक की पूजा करनी चाहिए। इस विवरण में तत्त्वदर्शी सन्त की पहचान तथा गीता ज्ञान दाता की अल्पज्ञता अर्थात् तत्त्वज्ञानहीनता स्पष्ट है। #कबीर
कबीर - শুক্কিনথ এভা 392-393 qof; க लक्षण गुरू के लक्षण चार बखाना , प्रथम वेद शास्त्र को ज्ञाना (ज्ञाता) ] दूजे हरि भक्ति मन कर्म बानी , तीसरे समदृष्टि कर जानी। चौथे वेद विधि सब कर्मा , यह चार गुरु गुण जानो मर्मा। SPIRITUAL LEADER SANTRAMPAL J [Oh@ SUPREMEGOD.ORG @SAINTRAMPALJIM SAITPAMPAL J MAHARAJ শুক্কিনথ এভা 392-393 qof; க लक्षण गुरू के लक्षण चार बखाना , प्रथम वेद शास्त्र को ज्ञाना (ज्ञाता) ] दूजे हरि भक्ति मन कर्म बानी , तीसरे समदृष्टि कर जानी। चौथे वेद विधि सब कर्मा , यह चार गुरु गुण जानो मर्मा। SPIRITUAL LEADER SANTRAMPAL J [Oh@ SUPREMEGOD.ORG @SAINTRAMPALJIM SAITPAMPAL J MAHARAJ - ShareChat
🌺 🌺 हरि के नाम बिन, राजा ऋषभ होय । मिट्टी लदे कुम्हार के, घास न नीरे कोय ।। भगवान की भक्ति न करने से राजा गधे का शरीर प्राप्त करता है कुम्हार के घर मिट्टी ढोता है। घास स्वयं जंगल में खाकर आता है। देखें साधना चैनल प्रतिदिन शाम07:30 बजे #कबीर
कबीर - कबीर নিন; हरि के नाम राजा ऋषमहोय | मिट्टी लदे कुम्हार के , घास न नीरे कोय ।I भगवान की भक्ति न करने से राजा गधे का शरीर कुम्हार के घर प्राप्त करता है मिट्टी ढोता है। घास स्वयं जंगल में खाकर आता है। सत रामपाल जी महाराज SupremeGod.org Satlok Ashram BETUL कबीर নিন; हरि के नाम राजा ऋषमहोय | मिट्टी लदे कुम्हार के , घास न नीरे कोय ।I भगवान की भक्ति न करने से राजा गधे का शरीर कुम्हार के घर प्राप्त करता है मिट्टी ढोता है। घास स्वयं जंगल में खाकर आता है। सत रामपाल जी महाराज SupremeGod.org Satlok Ashram BETUL - ShareChat