लहरें कितनी भी ऊंची क्यों न हों, माँ की ममता से बड़ी नहीं हो सकतीं।यह तस्वीर देखकर मन भावुक हो गया! तस्वीरें तो बहुत देखी है मैंने, पर जबलपुर के बरगी बांध से आई इस तस्वीर ने आज कलेजे के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। यह महज़ एक हादसा नहीं, एक माँ के बलिदान की वो दास्तां है जिसे देख कर पत्थर भी रो पड़े
जबलपुर के बरगी बांध से आई इस तस्वीर ने रूह को कंपा दिया है।जब मौत सामने खड़ी थी और लहरें निगलने को बेताब थीं, तब एक माँ ने हार नहीं मानी। उसने अपनी लाइफ जैकेट खुद के लिए नहीं, बल्कि अपने 4 साल के कलेजे के टुकड़े को बचाने के लिए पहनी और उसे अपने सीने से ऐसे सटा लिया कि मौत भी उन्हें जुदा न कर सकी।जब मौत क्रूज़ पर सवार होकर आई और लहरें काल बनकर झपटीं, तो उस माँ के पास शायद अपनी जान बचाने के चंद मौके थे। पर एक माँ... जो खुद को भूल सकती है, अपने बच्चे को लहरों के हवाले कैसे कर देती?
जब पानी की गहराई से माँ-बेटे के पार्थिव शरीर निकाले गए, तो दोनों एक ही लाइफ जैकेट में लिपटे हुए थे। माँ ने अपनी आखिरी सांसों की डोर से अपने 4 साल के मासूम को सीने से बांध रखा था। वह ठंडी पड़ चुकी बाहें अब भी अपने लाल को सुरक्षा का अहसास करा रही थीं। मानो कह रही हों,डरो मत बेटा, जब तक माँ है, तुम्हें कुछ नहीं होने देगी।कहते हैं मौत सबको अलग कर देती है, पर यहाँ माँ की ममता ने मौत को भी हरा दिया। वह खुद तो चली गई, पर जाते-जाते दुनिया को बता गई कि माँ होना किसे कहते हैं।ये तस्वीर नहीं, कलेजे पर लगा एक घाव है। उस माँ के चरणों में कोटि-कोटि नमन, जिसने अपनी ममता के लिए जान की बाजी लगा दी।
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