Vinodkumar Mahajan
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Vinodkumar Mahajan
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विश्व विजेता, हिंदु धर्म
मच्छर की रणनीति ? https://globalhinduism.in/?p=3436 #❤️जीवन की सीख *मच्छर ? कान के* *नजदिक आकर क्यों* *चिल्लाते है...??* ✍️ २८५३ *विनोदकुमार महाजन* 🦟🦟🦟🦟 सोचनीय बात...? पापी पेट का सवाल ? वैसे तो हर सजीवों को , ईश्वर ने पेट दिया है और ? पेट भरने की कुछ कला भी अवगत करायी है ! और इसी के तहत पेट भरने के लिये , एक रणनीती बनाकर , अपने शिकार पर हमला करता है ! हर पशुपक्षीयों की यह रणनीती अलग अलग होती है ! इसमें भी कोई शाकाहारी है , कोई मांसाहारी है तो कोई ? रक्त पिपासू ? मच्छर , खटमल जैसा ! इतना सा छोटासा देह होता है मच्छर का ! और उसका दिमाग भी कितना छोटासा होगा ! और उसी छोटेसे दिमाग से , खून चुसने के लिये , रक्त पिने के लिये , पेट भरने के लिये , एक रणनीती बनाता है ! इसिलिए वह छोटासा जीव , हमारा अंदाज लेने के लिये , मतलब ? शिकार सोया है या फिर जागा है ? इसका अचूक अंदाज लेने के लिये , कान के नजदिक आकर जोर से... " गुंई....$$$ " ऐसा विचित्र आवाज निकालता है ! अगर हम जागे हुए है तो ? उसको फटकारते है ? और अगर सो गये है तो ? काम तमाम... मच्छर खून चूसकर चला जाता है और उपर से ? डेंग्यू , मलेरिया के व्हायरस हमारे अंदर छोड देता है ! एक मच्छर भी ? शायद किसीकी जान तक ले सकता है ! इसिलिए तो नाना पाटेकर अपने एक फिल्म में डायलॉग बोलते है... " साला एक मच्छर भी आदमी को हिजडा बना देता है...! " सचमुच में ईश्वर भी कमाल का है ! क्या जरुरत थी आखिर ईश्वर को भी ? ऐसे जीव जंतू बनाने की , उपद्रवी जीव ? क्या जरुरत थी ईश्वर को चौ-याशी लक्ष योनी बनाने की ? क्या जरुरत थी ईश्वर को आखिर संजीव सृष्टी बनाने की ? अथवा महाउपद्व्यापी ? मनुष्य प्राणी बनाने की ? खैर... ईश्वर की लीला ईश्वर ही जाने ! तो मुख्य विषय है... रणनिती... व्यूहरचना... एक छोटासा जीव भी , मच्छर भी ? खून चूसने की रणनीती बनाता है ? तो मनुष्य प्राणी कितनी भयंकर रणनीती अथवा व्यूहरचना बनाता होगा ? छोटेसे दिमाग वाला मनुष्य प्राणी , हाथी , शेर जैसे प्राणीयों को भी ? अजस्त्र और क्रूर प्राणीयों के दिमाग को भी ? अपने कब्जे में करके ? उसे वश में कर देता है , और उनसे भी कार्य करवाता है ! छोटेसे दिमाग का , छोटेसे देह का मनुष्य प्राणी , बडा करामती होता है... और एक जबरदस्त शक्तिशाली रणनीती बनाकर सच्चे धर्म को भी ? अ - धर्म में परिवर्तीत करता है और विश्व पर राज करता है ? सही मायने में संपूर्ण विश्व पर आज कौन राज कर रहा है ? ईश्वराधिष्ठित सनातन हिंदू धर्म ? या फिर और कोई ? बात तो सोचने की है ! अनेक धर्मों में आज विश्व का बॅंटवारा हुवा है , यह वास्तव है ! मगर इसमें सत्य सनातन धर्म कहाॅं पर है ? ईश्वर निर्मित सत्य सनातन धर्म ? संपूर्ण विश्व में सभी धर्मीयों के अनेक देश निर्माण किए गये ? मगर ? संपूर्ण विश्व पटल पर ? एक भी हिंदू राष्ट्र नहीं है ! हिन्दुओं की विस्तार वाद की भूमिका कभी भी नहीं है , और नाही कभी थी ! मगर फिर भी ? अपना , अपने आदर्श संस्कृती का , अस्तित्व बनाये रखने के लिये ? प्रयास करना भी तो जरूरी था ना ? सभी धर्मीयों ने उनके धर्म बढाने की अचूक रणनीती बनायी तो ? हम ? क्यों और कैसे पिछे रह गये ? खुद का अस्तित्व बनाये रखने के लिये ? एक छोटासा मच्छर भी रणनीती बनाता है ? तो ? हम ही पिछे क्यों रह गये ? एक छोटासा प्रश्न ? सभी हिन्दुओं को है ! हमारी रणनीती कहाॅं अधूरी रह गयी और क्यों अधूरी रह गयी ? साम्राज्य वाद का मैं स्विकार नहीं करता हूं और नाही साम्राज्य वाद से संपूर्ण समस्याओं का समाधान या हल होता है ! इसिलिए साम्राज्य वाद का विस्तार यह विचार धारा भी गलत हो सकती है ! मगर क्या ? ईश्वराधिष्ठित समाज रचना और उसी आदर्श सिध्दांतों के अनुसार , संपूर्ण विश्व के मानवी समुह तथा संपूर्ण सजीव सृष्टी का कल्याण ? यह धारणा या विचारधारा गलत हो सकती है ? और अगर सत्य सनातन धर्म में ऐसी सभी के कल्याण की संपूर्ण क्षमता और शक्ती भी है तो ? इसका स्विकार संपूर्ण पृथ्वी निवासी ? मनुष्य प्राणी को करना ही होगा...जी हाँ...! और यही सही और सच्ची विश्व कल्याण की तथा वसुधैव कुटुंबकम् की व्याख्या भी होगी...! मगर इसके लिए तथा इसकी अंतिम जीत के लिये ? एक अचूक , यशस्वी , शक्तिशाली रणनीती बनाकर उसपर अमल करने की जरूरत है ! तीव्र इच्छाशक्ती सभी असंभव कार्यों में ? संभव में बदल देती है ! सोचो... एक छोटासा मच्छर भी ? एक अचूक रणनीती बनाकर यशस्वी होता है तो ? हमारे जैसे सभी ईश्वरी वरदान प्राप्त सनातनीयों को ? हिंदू धर्म प्रेमीयों को ? ईश्वराधिष्ठित समाज रचना का स्विकार करनेवालों को ? असंभव क्या रहेगा...? *भगवान श्रीकृष्ण की* *जय* 🚩🚩🚩👆
हिंदुओं को नामशेष करने का सपना ? https://globalhinduism.in/?p=3429 #❤️जीवन की सीख *हिंदू ? षड्यंत्रों का* *शिकार... ??* ✍️ २८५१ *विनोदकुमार महाजन* 🚩🚩🚩🚩 *हिंदू...* इतिहास के पन्नों में एक परिपूर्ण तथा तेजस्वी समाज के रूप में गौरवान्वीत किया जाता है...! ऐसे तेजस्वी , परोपकारी समाज को सदीयों से , एक भयावह षड्यंत्रों द्वारा , कुछ ( ?? ) आक्रमणकारीयों ने , नामशेष करने की , आदर्श हिंदू संस्कृती को नेस्तनाबूत करने की , संपूर्णतः तबाह , बरबाद करने की अनेक योजनाएं बनायी गयी ! *अनेक लुटारू* और आक्रमणकारी इस देश में आये , देश का अपरीमीत धन वैभव भी लूटा , देश पर अनेक सालों तक राज भी किया और...? सबसे भयानक कार्य यह किया की , यहाँ की आदर्श हिंदू सनातन संस्कृती को , आदर्श जीवन पध्दती को , जमीन में गाडने की , संपूर्णतः तबाह करने की , नामशेष करने की , यहाँ अनेक षड्यंत्रकारीयों द्वारा हमेशा के लिये , जमीन के निचे की यशस्वी योजनाएं बनायी गयी ... परिणाम स्वरूप आज भी अनेक जगहों पर ?? हिंदू समाज , घोर नारकिय जीवन जीने के लिये , मजबूर हुवा है ! सबसे पहले हिंदू संस्कृती नामशेष करने के लिये , उसके , हिंदुओं के , आत्मविश्वास पर हमले किए गये ! उसके आदर्श श्रद्धास्थानों पर हमले करके , उन्हे नामशेष करने की , कुटील योजनाएं बनायी गयी ! धीरे धीरे हमारा अपना अनेक भू प्रदेश ऐसे आसुरी आक्रमणकारीयों ने अपने कब्जे में कर लिया...जो ? आज भी उन ? आसुरीक शक्तियों के हाथ में वही भू प्रदेश कब्जे में है... और हम ? उसके मूक दर्शक साक्षीदार है...! वैभवशाली हिंदू समाज को हीन दीन लाचार बनाने के लिये , आसुरीक शक्तियों द्वारा, अनेक विनाशकारी चक्रव्यूह बनाये गये ! और हमारे समाज को ऐसे चक्रव्यूह में धीरे धीरे फॅंसाया गया ? या फिर ? मजबूरन लटकाया गया ?? इसमें सबसे पहले... ऐसे आदर्श संस्कृती का आचरण करनेवाले को , तन मन धन से संपूर्णतः उध्वस्त करने के लिये, उसको , उसकी आदर्श संस्कृती को समाप्त करने के लिये , अनेक मंदिरों पर हमले करके , उसे नष्ट करके , उसी जगहों पर , अ - सनातन और अ - सभ्य संस्कृती को हमपर जबरन थोंपने का प्रयास किया गया जो ? आज भी एक कलंक के रूप में हमपर लाद दिया गया है ... जो हमारे जैसे राष्ट्र प्रमीयों को , हमेशा के लिये , हतोत्साहीत तथा दुखी करता रहता है ! और ? दुर्देव से ? हमारे ही अनेक सिधेसाधे और भोलेभाले लोग...? *उसी अ धर्मी जगहोंपर जाकर* अपनी मनोकामनाएं पुरी करने के लिये ? निरंतर प्रार्थना करते रहते है ??? कितना भयंकर सामाजिक अंध:पतन और दैव दुर्विलास हो गया है हमारे आदर्श और सुसंस्कृत समाज का...जो...? कंगाल , हताश बनकर ? आक्रमणकारीयों को और उनके सिध्दांतों को पूजने लगा है ? सभी जगहों पर ईश्वर जरूर है और सभी में ईशतत्व मौजूद भी होता है , यह धारणा अच्छी भी है और हमें मंजूर भी है ... *मगर ?* क्या हमें और हमारे संस्कृती को नामशेष करने का सदैव सपना देखने वाले और क्रूर भयानक अत्याचारी हमारे आदर्श हो सकते है ? और हमें ऐसे स्थान पूजनीय हो सकते हैं...?? जिन्होंने हमें भयंकर बरबरता से कुचलने का लगातार प्रयास किया ? मुगलशाही , निजामशाही , आदिलशाही, कुतुबशाही जैसे क्रूर उन्मादीयों ने हमारे देश पर केवल राज ही नहीं किया बल्की हमारा अस्तित्व मिटाने का ही भरसक और लगातार प्रयास किया गया ! डच, फ्रेंच, , पोर्तुगीज इंग्रज जैसे अनेक आक्रमणकारीयों ने भी हमारी संस्कृती तबाह करने की लगातार कोशिश की ! *और दुर्देव से आजादी के बाद* भी ? ( आज भी...? दुर्देव से हमारे वह आदर्श है ?? ) कुछ लोग ( ??? ) *आधुनिक संत* के नाम पर ? *आधुनिक शुक्राचार्य* बनकर , हमारी संस्कृती को नेस्तनाबूत करने का गुप्त तरीका अपनाते रहे ? और ऐसा प्रयास आजादी के बाद भी लगातार आज तक भी ?किया गया...?? *जो भयावह षड्यंत्रों से* *भी महाभयंकर था !* और हमारे सिधेसाधे , भोलेभाले लोग , अनायासे ही उस भयंकर जाल में , विनाशकारी चक्रव्यूह में? फॅंस गये...जिन्होंने गुप्त रूप से आसुरीक शक्तियों को बढावा देने का निरंतर और गुप्त कार्य किया !? और हमारा समाज आज भी ? ऐसे ही कुटील षड्यंत्रकारी को संत मानकर पूजता है ? और विशेष बात यह है की , उस संत को कोई भला बुरा बोलता है , उसकी सच्चाई उजागर करता है , उसके विरूद्ध कोई सत्य बोलता है तो ?? तो ? उस व्यक्ती को ?तत्काल *गुनहगार* के पिंजरे में खडा किया जाता है ? और उल्टा उसे ही आजीवन अपराधी बनाया जाता है ? और हिंदू समाज भी इसे सत्य मानता है ? *सत्यपूजक हिंदू* *समाज ?* *महान संत ? महात्मा ??* को ही भगवान मानता है ? *मतलब ?* सत्यमेव जयते के देश में ? सचमुच में सत्य बोलना भी गुनाह है या फिर सत्य बोलना , सत्याचरण करना भी पाप या अपराध हो गया है ? वास्तव में ? इस देश में ? *असली नायक* बनाये गये... *खलनायक* और ? असली *खलनायक* बन बैठे *नायक ??* [ *अनेक घरों में भी* ? लगभग आज की स्थिती भी ? लगभग ठीक ऐसी ही है ? *समझने वालों को* इषारा भी काफी है...! ] सबकुछ उल्टा पुल्टा हो गया...इस देश में ? सत्य को और सत्य सनातन को गहरे षड्यंत्रों से केवल बदनाम ही नहीं किया गया बल्की संपूर्णतः बरबाद करने का... जालीम माहौल बनाया गया...? और मेरा हतबल , हताश समाज ? इस जाल में बूरी तरह से फॅंस गया ? या फिर जानबूझकर फॅंसाया गया ? जो आज भी उभर नहीं रहा है ?? *कितनी गहरी निद्रा में* है हमारा समाज ? जो अनेक सालों तक, सत्य तक भी नहीं पहूंच सकता है ? असली नायक कौन ? और असली खलनायक कौन ? यह भी पहचान नहीं सकता है ? *और दुर्देव से* ? जो सत्य बताने की , सत्य बोलने की कोशिश भी करता है...उसे ही उल्टा ? *कठोर दंडीत* किया जाता है ?? उसे ही गुनहगार साबीत करके , भयंकर षड्यंत्रों द्वारा संपूर्णतः तबाह किया जाता है...?? *इस देश में ??* आश्चर्य ही आश्चर्य है ना सबकुछ *साथीयों ?* और इसकी अंतिम काट भी सामने दिखाई नहीं देती है ? आजादी के असली महानायक भी अलग रहे और ? फल ? दूसरे ही कोई उठा के ले गये ? और हमारा समाज आज भी गहन निद्रा में है ?? अनेक सालों तक तो यह सिलसिला लगातार जारी था ? जिन्होंने हमें अनेक और भयंकर विनाशकारी षड्यंत्रों से नामशेष करने का लगातार प्रयास जारी रखा ? उसी को ही हम ? हमारा सिधासाधा समाज ? आज तक... *सर्वोच्च सत्तास्थान* पर लगातार ? अनेक सालों तक ? बिठाता रहा ? और उपर से अंदर ही अंदर बरबाद भी होता रहा ? *आश्चर्य है ना ?* विनाशकारी जहरीले साॅंपों को ही देवता मानकर , उन्हे ही पूजकर , जिन्होंने हमारे ही संपूर्ण तबाही का सपना देखा था ? उसे ही हम देवदूत समझ बैठे थे ? आज भी बैठे हुए है...? *आसुरें के गुरू...* आधुनिक शुक्राचार्य को...?? हम नहीं पहचान सकें ? और अगर , सावधान होकर कोई , ऐसी भयावह विनाशकारी निती को जो भी विरोध करता था ? उसे ही नामशेष किया जाता था ? उसका ही नामोनिशाण मिटाया जाता था ? और लगभग आज भी अनेक जगहों पर ठीक ऐसा ही प्रयास लगातार जारी है ? दमनचक्र और दमनकारी निती द्वारा हमारे आदर्श सिध्दांतों को , आदर्श संस्कृती को कुचलने का लगातार प्रयास किया गया यहाँ पर !? आज भी किया जा रहा है ! और ? हमारे ही कुछ नतद्रष्ट लोग ? इसका साथ देते रहते है ? जहाँ इस देश में, सत्य बोलना आज भी लगभग असंभव है वहाॅं ? *सत्यमेव जयते* कैसे हो सकता है ? सच तो यह है की, आज भी इस देश में...? अनेक योग्यता पूर्ण व्यक्तीयों को *जानबूझकर* अपमानित किया जाता है , प्रताडित किया जाता है... और ? जिसकी योग्यता नहीं है , अथवा शून्य है ? योग्यता ही नहीं है ? वह ? सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर सकता है ? और यह सत्य बोलना , ऐसा कहना भी अपराध की श्रेणी में गीना जाता है तो ? यह कैसा लोकतंत्र भी है ? *समस्या गहन है !* ऐसा भयंकर षड्यंत्र और अनाकलनीय, सबकुछ कौन और कैसे बदलेगा ? यह भी अनुत्तरीत है...?? ऐसा कहते है की... " *ईश्वर के घर में देर है* *मगर अंधेर नहीं* *है..."* मगर यहाँ तो हरदिन ? सत्य तडपकर मर रहा है तो ? ईश्वर भी कब और कैसे न्याय देगा ? यह तो समय ही बतायेगा...! मगर एक बात भी सत्य है की... अन्याय और अत्याचार की जब परीसीमा होती है... *तब...?* क्रांती होती है... जहाँ सत्य बोलना अथवा सत्य आचरण करना भी गुनाह अथवा अपराध समझा जाता है तब...? अ - सत्य वादीयों के ? बूरे दिन जल्दी ही आरंभ होने वाले है... ऐसा ही समझा जाना चाहिए ! घना अंधेरा जादा समय तक नहीं रूक सकता है... ठीक ऐसे ही... अधर्म का अंधियारा भी जादा दिन नहीं रूकने वाला है... एक दिन निश्चित ही सत्य का सुर्योदय होकर ही रहता है... *और वह दिन...?* सत्य सनातन धर्म के वैश्विक जीत का ही दिन होगा... सत्य ? परेशान जरूर हो सकता है... मगर पराभूत नहीं...! कभी भी नहीं ! *विश्वास रखिए...* *क्योंकी ?* सत्य की आवाज कोई भी और कभी भी नहीं दबा सकता है...! सत्य को जमीन में गाड भी दिया तो भी ? सौ प्रतिशत शक्ती से , उपरी छलांग लगाकर , सत्य तो ? उपर उठकर आता ही है ! फिर चाहे उसे कोई कितना भी निचे दबाने का प्रयास करें ! *यही अंतिम सत्य भी है...!!* और इसी सिध्दांतों के अनुसार , संपूर्ण धरती पर , जमीन के गाडे हुए सभी सत्य सनातन के आदर्श सिध्दांत भी एक दिन , बहुत ही शक्ती से और तेजी से , उपर उठकर आयेंगे ही आयेंगे ! और ? यह दिन भी ? दूर नहीं है !! संपूर्ण धरती पर , फिरसे मंदिरों में आरतीयों की , मंगल ध्वनी सुनायी देगी... यह त्रिकालाबाधित सत्य भी है...!! यह आशावाद नहीं बल्की वास्तव है ! *ईश्वर निर्मित सत्य* *सनातन धर्म की जय* *हो...* *भगवान श्रीकृष्ण की* *जय !!* 🚩🚩🚩🚩
सावधानी हटी ? दुर्घटना घटी ?? https://globalhinduism.in/?p=3425 #❤️जीवन की सीख *गुप्त रूप में रहकर कार्य* *आगे बढना* *है...?* ✍️ २८५० *विनोदकुमार महाजन* 👓👓👓👓 समय बहुत कठीण है चारों ओर से गुप्त हितशत्रू घात लगाके बैठा हुवा है शत्रू की रणनीती तय है , शक्तिशाली भी है हमारे संपूर्ण बरबादी का गुप्त षड्यंत्र उसके पास है...उसके पास... संपूर्ण सहयोग करने वाला शक्तिशाली संगठन भी है और ? उनकी ? एकता भी है... और हमारे अंदर ? ना एकता है ना मुसिबतों में सहयोग करने वाला कोई व्यक्ती है ना कोई ? हमारे पिछे खडे रहनेवाला शक्तिशाली संगठन है ? अकेले लडो और ? मर जाओ... यही लगभग चारो ओर की भयावह स्थिती है... इसिलिए ? गुप्त रूप में रहकर कार्य आगे बढना होगा... नरो वो कुंजरो की शक्तिशाली रणनीती बनाकर... एक एक कदम आगे बढना होगा... और हर कदम बडी सावधानी से और ? फूंक फूंक कर चलना होगा... साप भी मरे लाठी ना टूटे यह रणनीती बनानी होगी... यहाँ तो ? हमारे अपनो का ही भरौसा नहीं है... कौन साथ देगा ? कौन धोका देगा ? कौन घात करेगा ? यह पता नहीं है... हर जगहों पर सत्ता और संपत्ती के लालची , धोकेबाज जयचंद बैठे हुए है... तो ? विश्वास भी किसपर करें ? और कैसे करें ? कार्य आगे बढना मतलब ? चक्रवात तूफान में दिया जलाने जैसा है... देव धर्म देश के लिये ? आज तक ? अनेक अंदर गये ? छुडाने वाला कोई ना मिला... यह स्थिती है... सत्य वादी परेशान है , सत्य तडप रहा है... और लडाई में ? साथ देनेवाला ही कोई नहीं है तो ? यह लडाई जीतेंगे कैसे ? यहाँ जान की बाजी लगाकर... सत्य की रक्षा करनेवाले बाजीगर नहीं मिलेंगे बल्की ? सत्य की लडाई में ? सहयोग देने का वचन देने वाले भी ? मौका मिलते ही भागनेवाले ही मिलेंगे... इसिलिए ? दूसरों के भरौसे पर नहीं बल्की ? खुद के भरौसे पर और ? खुद के शक्तिशाली रणनीती के आधार पर ? ईश्वर को साक्षी रखकर ? हर एक कदम आगे बढाना है... अंधेरे में तीर चलाने से कुछ भी नहीं होगा... अर्जून की तरह ? पाणी में मछली की ऑंख देखकर ? अचूक तीर चलाना होगा... जो केवल और केवल मछली की ऑंख ही फोडेगा... राम का अचूक बाण ढूंडना होगा जो ? अचूक रामबाण ? साबित होगा... पाणी गहरा है... तैरने का अनुभव नहीं है तो ? डूबकर मरना ही पडेगा ना ? इसके लिए ? तैरना सिखना होगा... पाणी का अचूक अंदाज लेना पडेगा... जीत की अचूक रणनीती बनानी पडेगी... तैरने के लिये सब ? प्रेरीत करेंगे... मगर डूबते समय ? बचानेवाला कोई नहीं आयेगा... सब दूरसे , किनारे से ? तमाशा देखने वाले मिलेंगे... गहरे पाणी में छलांग लगाकर ? बचाने वाला ? कोई भी नहीं आयेगा...कोई भी नहीं... हाहाकारी , उन्मादीयों का इरादा भयावह है... उन्मत्त कली का भयावह विनाशकारी साम्राज्य ? चारों ओर फैला हुवा है ? चारों ओर अधर्म की भयावह आग लगी हुई है... सत्य जीतना लगभग ? नामुमकीन सा है... फिर भी जीतना है... जीतना ही है... बुलंद इरादों से मैदान में उतरना है... धर्म संकट भयानक है.. अधर्मीयों के रणनीती का शक्तिशाली बोलबाला है... फिर भी जीतना है... जीतना ही है... यशस्वी और गुप्त तथा शक्तिशाली रणनीती बनाकर , धर्म संकट हटाना है... धर्म रक्षा के लिये ? श्रीकृष्ण , आचार्य चाणक्य , विक्रमादित्य , राजा शिवछत्रपती , बाजीराव पेशवा जैसी अचूक और ? यशस्वी रणनीती ? बनानी है... समय भयावह है... जंगल में ? चारों ओर ? विनाशकारी आग ? लग चुकी है... संपूर्ण धरती का ? चीत्र और चरित्र ? भयावह है ? ईश्वरी आराधना से ? कठोर तपस्या से ? जंगल की अधर्म की विनाशकारी आग ? बुझानी है... और...? किसी का नाम ? ना लेकर ? कानून के दायरें में रहकर ? किसी षड्यंत्र में ना फॅंसकर ? जीत पक्की करनी है और ? धर्म ध्वजा ? फिरसे लहरानी है... संपूर्ण विश्व पर... राक्षसी राज की अंतिम काट ? धर्म ध्वजा लहराने की अंतिम निती ?? ठंडा दिमाग है और ठंडे दिमाग की शक्तिशाली ? रणनिती... एक एक कदम ? एक एक दिन ? विजय की ओर ? बढायेंगे... भगवान के भगवे का राज ? चारो ओर फैलायेंगे... *जय श्रीकृष्ण...* 🚩🚩🚩🚩
ईश्वरोवाच https://globalhinduism.in/?p=3423 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 *मेरा परिवार...!!!* ✍️ २८४९ *विनोदकुमार महाजन* 👆👆👆👆 *मेरा परिवार...* संपूर्ण ब्रम्हांड मेरा परिवार है... संपूर्ण सजीव सृष्टी मेरा परिवार है... सभी पशुपक्षी , सभी पेड पौधे , संपूर्ण मानव समुह , संपूर्ण साकार निराकार ब्रह्म , मेरा परिवार है... संपूर्ण चेतन अचेतन शक्तियां , मेरा परिवार है... *आप सभी मेरे परिवार* *के ही सदस्य* *हो...* *अनेक बार...* मेरे परिवार में सात्विक राजस तामसी शक्तियों का कलह होता है... *भयंकर कलह* मैं सबकुछ चुपचाप देखता रहता हूं न्याय अन्याय सबकुछ देखकर भी मौन रहता हूं... जब तामसी आसुरीक शक्तियां , सज्जन शक्ती को परेशान करती है , प्रताडीत करती है , अपमानित करती है , सज्जन शक्ती को नामशेष करने की , जमीन में गाडने की , निरंतर योजनाएं बनाती है तब भी ? मैं मौन , शांत , स्थितप्रज्ञ बनकर , क्रूर आसुरीक शक्तियों का तमाशा... दूरसे देखता रहता हूं...? आसुरीक शक्तियों को सुधारने का बारबार मौका भी देता हूं ... हमेशा साम दाम दंड भेद निती द्वारा , उन्हे असली रास्ता दिखाने का निरंतर प्रयास करता रहता हूं... अनेक मार्गों से , दृश्य अदृश्य मार्गों द्वारा , उन्हें समझाने की निरंतर कोशिश भी करता हूं... कभी नैसर्गिक आपत्ती भेजकर , कभी अनाकलनीय बिमारीयां भेजकर... और मैं यह तमाशा दूरसे देखता रहता हूं... निराकार रूप में... सूर असूर शक्ती ... सृष्टी का एक भाग सृष्टी रचना का एक महत्वपूर्ण भाग सृष्टी संतुलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा... मगर जब ? सज्जन शक्ती ? आसुरी शक्तियों से , परेशान होती है , त्राही माम् होती है...? तब मैं अंदर से परेशान होता हूं , बैचैन और अस्वस्थ होता हूं... फिर भी... बिगडी हुई संतांनों को सुधारने का बारबार मौका देता रहता हूं... मेरा दाईत्व मैं निरंतर निभाता रहता हूं... दुष्ट दुरात्मा दुर्योधन को मैंने कृष्ण शिष्टाई करके ठीक ऐसा ही संदेश दिया था... नहीं सुधरा ना दुर्योधन ? तो उसका अंत भी कैसे हुवा ? सब को पता है... सनातन धर्म... मेरा सनातन धर्म... मैंने ही बनाया हुवा , आदर्श सिध्दांतों का ब्रम्हांडीय संस्कार... जो पशुपक्षीयों पर प्रेम करना सिखाता है जो संपूर्ण ब्रम्हांड पर प्रेम करना सिखाता है जो निष्पाप जीवों पर प्रेम करना सिखाता है जो आदर्श ईश्वरी सिध्दांतों पर चलना सिखाता है जो मानवता सिखाता है जो मेरी ही... गौमाता , गंगामाता , गीतामाता , धरतीमाता पर प्रेम करना सिखाता है , उनकी रक्षा करना सिखाता है... संपूर्ण सृष्टी की रक्षा के लिये , सृष्टी संतुलन के लिये , संपूर्ण सजीवों का पालकत्व देकर जब मैं ? *जब मैं* मनुष्य प्राणी को , संपूर्ण ज्ञान और बुद्धी देकर धरती पर भेजता हूं... और जब मनुष्य प्राणी इसका आदर्श आचरण करता है तब मैं ? आनंदीत होता हूं... मगर यही मनुष्य प्राणी जब ? मनुष्यत्व को त्यागकर , ईश्वरी सिध्दांतों को छोडकर , तमो गुण धारण करके , आसुरीक तथा हाहाकारी राक्षसी शक्तियों का स्विकार करता है और ? हाहाकार , उन्माद फैलाने लगता है तब मैं ? बहुत दुखी रहता हूं , अंदर ही अंदर परेशान रहता हूं... विशेषतः जब मेरी ही सज्जन शक्ती त्रस्त हो जाती है तो ? मैं मन ही मन भयंकर दुखी होता हूं... और जब ? मेरी गौमाता ? साक्षात कामधेनू ? प्रत्यक्ष स्वर्ग से देहरूप धारण करके , विश्व कल्याण हेतू , धरती पर अवतरीत होने वाली दिव्यात्मा होती है...? और ? भयंकर क्रूर मनुष्य ? उसे ही , मेरी गौमाता को ही ? ?? मारकर ? उसका... भोजन बनाकर खाता है ? मैंने उसे पर्याप्त मात्रा में ? दूसरा भोजन उपलब्ध कराने पर भी ? *तो मैं ?* अंदर से केवल दुखी नहीं होता हूं बल्की अंदर से भयंकर क्रोधित हो जाता हूं... मेरे ही परम भक्त प्रल्हाद जैसे अनेक भक्तों के रक्षा हेतू उसके, प्रल्हाद के ही क्रूर , आसुरीक , तामसी पिता को...? नारसिंव्ह बनकर टरटरा फाडने के लिये ? और तामसी शक्तियों पर अंतिम प्रहार करने के लिये ? मैं धरती पर , दिव्य देह धारण करके , अवतरीत होता हूं ... कभी राम बनकर , कभी कृष्ण बनकर , कभी परशुराम बनकर , कभी भयंकर उग्र नारसिंव्ह बनकर... *मैं आता ही रहता हूं...* समय कौनसा है ? कैसा है ? इसपर मैं... निर्धारित करता हूं की , देह कब ? कौनसा और कैसा धारण करना है ? हे धरती निवासी , दुष्ट तामसी ,आसुरीक बुद्धी मनुष्य प्राणी... मैंने तो तुझे धरती पर , सृष्टी कल्याण तथा विश्व कल्याण हेतू भेजा था... सर्वोच्च सनातन धर्म के प्रचार प्रसार हेतू भेजा था... *और तू ...?* भयंकर उन्मादी बनकर , भयंकर हाहाकार फैलाकर , सभी का जीना ही मुश्किल कर रहा है तो...? अब मुझे ? *आना ही पडेगा...* कब ? कहां ?? कौनसा देह धारण करके ??? यह तो समय ही बतायेगा... *मगर मैं जरूर आऊंगा...* *[ ईश्वरोवाच...]* *श्रीकृष्णार्पणमस्तु* 🚩🚩🚩🕉️
स्वप्न दृष्टांत https://globalhinduism.in/?p=3420 #❤️जीवन की सीख *स्वप्न दृष्टांत...?* ✍️ २८४८ *विनोदकुमार महाजन* 🫣🫣🫣🫣 स्वप्न आणी स्वप्न दृष्टांत , हे जवळ जवळ प्रत्येकाच्या आयुष्याचा एक महत्वपूर्ण भाग असतो‌‌ . वेगवेगळ्या स्वप्नांचे वेगवेगळे अर्थ असतात. यालाच आपण स्वप्न दृष्टांत ही म्हणतो. पण ब-याच जणांना अनेक वेळा स्वप्न दृष्टांताचा अर्थबोध होत नाही. ब-याच वेळा अगदी निरर्थक स्वप्ने पडतात. स्वप्नात कशाचा कशाला ताळमेळ नसतो. अगदीच विचित्र स्वप्ने पडतात. तर ब-याच वेळा , " *मनी वसे ते स्वप्नी* *दिसे..."* असे ही असू शकते. ब-याच वेळा जे आपण दिवसा मनात चिंतीतो , मनात जे विचार करतो , ब-याच वेळा त्याचा संबंध ही स्वप्नाशी असतो. पण स्वप्न दृष्टांत नेमके कशे व काय असतात , ते पाहूया. अनेक वेळा असे होते की , आपण ज्याच्यावर दिवसा अथवा जागृत अवस्थेत कधी विचारही केलेला नसतो , अशी अनेक असंबद्ध स्वप्ने आपल्याला पडत असतात. ब-याच वेळा आपल्याला त्याचा नीटसा अर्थबोध ही होत नाही , आणी मग आपण गोंधळून , गांगारून अथवा घाबरून जातो. स्वप्नात आग दिसणे , पाणी दिसणे , साप दिसणे , भूते खेते दिसणे अथवा मृत्यू दिसणे अशा अनेक प्रकारची स्वप्ने पडतात. आणी प्रत्येक स्वप्नांचा वेगवेगळा अर्थ ही असतो. कांहीं स्वप्ने ही अत्यंत भितीदायक व भेसुर असतात.तर अनेक स्वप्ने ही आनंदीत करणारी पण असतात. अनेक वेळा स्वप्नात धनलाभ होणारे अथवा भाग्योदय होणारे संकेत ही मिळतात. आपण कांही स्वप्नांचा गूढ अर्थ समजावून घेण्याचा प्रयत्न करतो , पण त्याचा निटसा अर्थ आपणास समजू शकत नाही. त्याचा अर्थ आपण शोधत बसतो. ब-याच वेळा आपले पूर्वज आपल्या स्वप्नात येऊन बोलतात.तर ब-याच वेळा आपले मृत्यू पावलेले मित्रही स्वप्नात येऊन संभाषण करतात . ते आपल्याशी आत्म्याद्वारे संपर्क करून , आपणास संदेश देण्याचा प्रयत्न करत असतात. पण आपणास त्याचा अर्थ बोध न झाल्यामुळे आपण बुचकळ्यात पडतो. आपले कांही मृत नातेवाईक , पितर , मित्र आपणास भविष्यातील अनेक चांगल्या कींवा वाईट गोष्टींचा अथवा भविष्यात घडणाऱ्या शुभ अशुभ घटनांचा संकेत आपणास स्वप्नात येऊन देत असतात. आणी हे थोतांड नव्हे अथवा अंधविश्वास ही नव्हे तर एक वास्तव आहे.सत्य आहे. अनेक वेळा अतिशय वाईट स्वप्ने आपला सतत पाठलाग करत असतात. एखादा पुर्वज सर्पयोनीमध्ये , पिशाच योनिमध्ये अडकला असेल आणी त्याला आपल्याकडून मोक्ष अथवा गती हवी असेल तरी असे आत्मे आपणास स्वप्नात संपर्क करत असतात. पितृदोषांचे सुध्दा अनेक संकेत स्वप्नात मिळतात. आत्म्यांना आपले विचार व्यक्त करायला अथवा आपल्याशी संपर्क साधायला , त्यांचे देहाचे माध्यम संपलेले असते , म्हणून ते स्वप्न दृष्टांत देऊन आपले विचार अथवा मनोगत व्यक्त करत असतात. कांहीं वेळा कुणीतरी आपल्यावर " ब्लैक मैजीक " करत असते. ते ही स्वप्नातून आपल्याला दिसते , जाणवते. अशा अवस्थेत भयावह व अनेक असंबद्ध स्वप्ने पडतात. तर अनेक वेळा आपल्याला अनेक देवीदेवतांची स्वप्ने पडतात.ब-याच वेळा आपले सद्गुरू स्वप्नात येऊन आपल्याला मार्गदर्शन करत असतात.भविष्यकालीन अनेक योजना ते स्वप्नातून सांगत असतात. आपले आत्मतत्त्व किती जागृत आहे यावर तुमच्या सद्गुरूंचे अथवा ईश्वराचे , ईश्वरी शक्तिंचे स्वप्नातील मार्गदर्शन अवलंबून असते. जेवढी तुमची श्रद्धा उच्च कीटीची असेल तेवढी जास्त ईश्वरी शक्ती कडून प्रत्यक्ष अथवा स्वप्नातून तुमच्या वर कृपा होत असते व ईश्वरी वरदान अथवा गुरूकृपा प्राप्त होत असते. झोपेमध्ये देह निद्रिस्त असला तरी आपली चेतना व आत्मतत्त्व जागृत असते , त्यामुळे अशा स्थितीमध्ये अलौकिक , पारलौकिक शक्ती आपल्याशी संपर्क साधण्याचा प्रयत्न करत असतात. विशेषतः पहाटे तीन ते पाच या ब्रम्ह मुहुर्तावर विशेष अलौकिक शक्ती आपल्याशी संपर्क साधून आपले पुढील आयुष्याची दिशा ठरवत असतात. म्हणूनच या वेळी अनेक देवीदेवतांचे अलौकिक दर्शन आपणास घडत असते.व ते परम हितकारक व भाग्य वृध्दी साठी उपयोगी असते. मला स्वतःला नेहमी स्वप्नात अनेक देवीदेवतांची दर्शने तर होतातच , अनेक वेळा पुढील मार्गदर्शन अथवा भविष्यात घडणाऱ्या अनेक घटनांचे संकेत ही मला देवीदेवतांकडून मिळतात. माझी अनेक स्वप्ने प्रत्यक्षात उतरेलीली अथवा खरी झालेली मला नेहमीच अनुभूती येते. माझे सद्गुरू आण्णा यांनी गुरू दत्तात्रेयासकट मला दर्शन देऊन माझ्या डोक्यावर वरदहस्त ठेवला आहे.शिवाय शेगांवचे गजानन महाराज , सज्जन गडावरील कल्याण स्वामी महाराज यांनी माझ्या डोक्यावर वरदहस्त ठेवला आहे. मला नेहमी भविष्यकालीन अनेक घटना स्वप्नात दिसतात. आजारी व्यक्तींना अशीच अनेक चित्रविचित्र तर कधी भयावह स्वप्ने ही पडत असतात.पण त्याचा संबंध आपल्या देहातील वेदनेमुळे येत असतो. तर ब-याच वेळा आजारी व्यक्तींना भविष्य कालीन चांगल्या वाईट गोष्टींचा ही स्वप्नं दृष्टांत होत असतो. विशेषतः एखाद्याचा मृत्यू जवळ आला असेल तरी सुद्धा त्याला तसे स्वप्न दृष्टांत मिळतातच. स्वप्न दृष्टांततावर फार मोठा लेख लिहीता येईल अथवा मोठे पुस्तक प्रकाशित करता येईल. ( कोणी प्रकाशक असल्यास माझ्याशी संपर्क साधावा ) वेळ मर्यादेमुळे हा लेख इथेच थांबवतो आहे. माझ्या खालील व्हाट्सअप नंबर वर संपर्क करावा. व्हाट्सअप नंबर +91 8329894106 💐💐💐💐
देवाला काळजी https://globalhinduism.in/?p=3410 #❤️जीवन की सीख *तुझी काळजी ? देवच* *करतोय रे...!!* ✍️२८४५ *विनोदकुमार महाजन* 🌹🌹🌝✅ होय... अगदी प्रत्येक जीवाची काळजी ? तो प्रभू परमात्मा करतो आहे. निरंतर करतो आहे. प्रत्येक सजीवाचा जन्मही त्याच्या हातात , आणी प्रत्येकाचा मृत्यू सुध्दा ? त्याच्याच हातात. सगळ्या विश्वाचा पसारा तो चालवतो.अथक आणी अव्याहतपणे. कोणत्या जीवाचा , कुठे , कधी , कसा आणी कोणत्या योनिमध्ये जन्म होणार आहे , आणी ? कोणाचा कधी , कुठे , कसा ? मृत्यू पण होणार आहे ? याचा अचूक हिशोब त्याच्याकडे आहे. अचूक टायमिंग त्याच्याकडे आहे. त्याच टायमिंग कधिही चुकत नाही. त्याच्या अचूक टायमिंग प्रमाणे अगदी चंद्र सुर्य सुध्दा अचूकपणे उगवतात आणी मावळतात ? त्याच सृष्टी चक्र अचुकपणे चालवण्यासाठी , सजीव सृष्टी चक्र चालवण्यासाठी. चंद्र सुर्य कधी म्हणतात का हो ? की मी आज सुट्टीवर जाणार आहे म्हणून ? मी आज फार दमलो थकलो रे बाबा , आजच्या दिवस मी पूर्ण विश्रांती घेतो... असं कधी ते म्हणतात का ? नाही. कारण त्यांना अचूकपणे सृष्टीचा गाडा चालवायचा आहे. प्रत्येक जीवाची त्यांना काळजी आहे. अगदी प्रत्येकाच्या खाण्यापिण्याची पण त्याला काळजी आहे. म्हणूनच म्हणतात ना ? " *चोच आहे तिथे ? चारा* *आहे. "* *प्रत्येक जीवाचा करीतो* *सांभाळ.* अगदी तुमची माझी सुध्दा तो काळजी करतो. अगदी रात्रंदिवस काळजी करतो. म्हणूनच तर आपल्याला वेळच्या वेळी तहान लागते , भूक लागते.झोप सुध्दा त्याच्या इच्छेनेच लागते. अगदी प्रत्येकाला. मग ? किती छान , सुंदर आयुष्य दिलंय बरं त्या भगवंतानं आपल्याला. आपली किती चिंता करतो ? अगदी पावलोपावली. "*तुझी चींता त्याशी ?* *सर्व आहे. "* आणी एखादा खुळा जीव ? एखादा खुळा मनुष्य प्राणी ? मोठ्या अहंकाराने विचारतो...? " *कुठाय रे तो भगवंत* *दाखव बरं* *मला , तरच विश्वास* *ठेवतो मी . "* तुझे आहे तुजपाशी परी जागा चुकलाशी... वेड्या जीवा. *तुझी चींता तोची वाहतो* *आहे.* *रात्रंदिवस...* तुझा जन्म जसा त्याच्या हातात आहे ? तसाच ? तुझा मृत्यू सुध्दा ? कुठे आहे ? कसा आहे ? कधी आहे ? पुढचा जन्म कोणत्या योनीत आहे ? याचा अचूक हिशोब त्याच्याकडे आहे. मग ? " *आता कशाला फुकाची* *बात...बघ* *उडून चालली* *आयुष्याची रात..."* मित्रांनो , सगळं गणीत , आपल्या आयुष्याच सगळं *आयुष्याच पॅकेज* त्याच्याच हातात आहे. मग उगीचच कशाला ? माझं माझं म्हणून रात्रंदिवस उर बडवून घ्यायचा ? माझं घरं , माझा पैसा , माझी प्राॅपर्टी , माझी लेकरं बाळ ? *माझं माझं कबाड ओझं* वेड्या जीवा... हे देह सुद्धा तुझा नाही. त्याचं बोलावणं आलं की ? सगळं एका सेकंदात सोडून जायचं आहे...आणी त्याच्या शक्तिशी ? एकरूप व्हायचं आहे. मगं मागं उरतं तरी काय ? मागं उरतं ते सत्य...सत्याचं आणी सत्य सनातन धर्माचं कार्य... त्याची किर्ती दिगंत राहते. म्हणूनच तर म्हणतात ना ? " *त्याच्या इच्छेशिवाय* *काडी* *सुद्धा हालत नाही. "* अगदी वारा , ऊन , पाऊस सुध्दा ? अगदी सगळी पंचमहाभूते सुद्धा ? त्याचे इच्छेनुसार च चालतात . मग एकंदर काय तर ? *तुझी चींता त्याशी सर्व* *आहे...* त्याच्या चरणांवर सर्वस्व समर्पण केल की ? आपण सुटलो. *जय हरी विठ्ठल* 🙏🙏✅🚩
विश्व मानवसमुह के लिए ? https://globalhinduism.in/?p=3408 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 *अंतिम सत्य ?* ✍️ २८४४ *विनोदकुमार महाजन* 🚩🚩🚩🚩 हे विश्व मानव... असली शांती चाहते हो तो ? सनातन का स्विकार करो ! असली सुख समाधान चाहते हो तो ? सनातन का स्विकार करो ! मानव देह का कल्याण चाहते हो तो ? सनातन का स्विकार करो ! असली विश्व बंधुत्व चाहते हो तो ? सत्य सनातन का स्विकार करो ! ईश्वरी शक्तियों से अनुसंधान चाहते हो तो ? सनातन धर्म का स्विकार करो ! ईश्वर की प्राप्ति चाहते हो तो ? सनातन का स्विकार करो ! ईश्वर जैसा आनंदी जीवन चाहते हो तो ? सनातन का स्विकार करो ! *ईश्वर निर्मित यही* *एकमेव धर्म है !* *सत्य सनातन धर्म* ! जो अंतिम सत्य तक पहुंचाता भी है ! मनुष्य जन्म का असली उद्देश भी बताता है ! पशुपक्षीयों पर प्रेम करने को भी सिखाता है ! भूतदया भी सिखाता है ! वसुधैव कुटुंबकम् का असली मतितार्थ भी बताता है ! गौमाता से प्रेम करने को भी सिखाता है ! सिध्द पुरुष भी बनाता है ! नर का नारायण और नारी की नारायणी भी बनाता है ! मृत्यू के बाद का आत्मतत्त्व भी बताता है ! *इसिलिए...?* संपूर्ण विश्व मानव को ? ईश्वर निर्मित सत्य सनातन हिंदू धर्म से जुडने से ही ? जन्म जन्मानंतर का कल्याण होगा ! यह सनातन धर्म, आत्मा परमात्मा का मीलन भी सिखाता है ! अदृश्य जगत के अनेक रहस्य भी बताता है ! सत्य का वास्तव ज्ञान भी सिखाता है ! नर देह का कल्याण भी बताता है ! इसिलिए केवल और केवल... एकमात्र अंतिम सत्य ? *वैदिक सनातन हिंदू धर्म* ही है ...!! यह सनातन धर्म , अनेक सिध्द पुरूषों को , साधू संतों को , महापुरूषों को, महात्माओं को भी , धरती पर विश्व कल्याण हेतू भेजता है ! सनातन धर्म में अनेक देवी देवता भी मनुष्य रूप लेकर , दिव्य देह धारण करके , विश्व कल्याण हेतू, धरती पर अवतरीत होते है...! *बारबार...युगे युगे...* *चलो सत्य सनातन की* *ओर !* आत्मकल्याण के लिये ? केवल एक ही सही रास्ता है... सत्य सनातन धर्म ! *सत्य सनातन धर्म की* *त्रिवार जयजयकार* *हो !* *जय जगन्नाथ* 🚩🚩🚩🚩
धन चाहिए https://globalhinduism.in/?p=3400 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 *अच्छे कार्यों के लिये ?* *पैसा ? कोई भी नहीं* *देगा...??* ✍️ २८४१ *विनोदकुमार महाजन* 💰🪙💵💷 *दुनिया धन से चलती है!* और दुनियादारी में धन ही सबसे बडा और सबसे उपर होता है ! इसिलिए दुनिया ना प्रेम से चलती है , ना ही सत्य से चलती है अथवा ना ही इमानदारी से चलती है ! केवल धन से चलती है ! इसिलिए धन और धन की खनखनाहट का बहुत ही महत्व हर एक के जीवन में होता ही है ! धन चाहिए धन ! हर एक को धन चाहिए ! पैसा , डाॅलर , मनी से क्या नहीं मिल सकता है ? सबकुछ मिल सकता है ! सभी प्रकार के सुख , धन से मिलते है ! इसिलिए हर एक को धन चाहिए ही चाहिए ! धन काला हो या गोरा , भला हो या बुरा , आखिर धन चाहिए ! ऐसी सामाजिक धारणा भी होती है ! अच्छे जीवन के लिये ? धन चाहिए ! ऐशो आराम की जीवनपद्धती के लिये ? धन चाहिए ! समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिये ? धन चाहिए ! संन्मान से जीने के लिये ? धन चाहिए ! सभी प्रकार की बाधाओं को, कष्ट को मिटाने के लिये ? धन चाहिए ! सभी कार्यों के लिये और उसकी सफलता के लिये ? धन चाहिए ! सामाजिक कार्य के लिये , धार्मिक कार्य के लिये ? धन चाहिए ! मगर यह धन आयेगा कैसे और कहाॅं से ? आज हर एक व्यक्ती धन वैभव कमाने के होड में तो लगा हुवा है ! बच्चों को ? धन चाहिए ! युवाकों को ? धन चाहिए ! वयस्कों को ? धन चाहिए ! स्र्ती पुरूष सभी को ? धन चाहिए ! जो धन = वान होता है ? उसीका ही होता है = मान संन्मान ? देश के सभी धर्मीयों को ? ( केवल हिंदू छोडकर ?? 👆🤫🤔🫣 ) उनके धार्मिक कार्य‌‌‌ के लिये ? धन देने के लिये ? उनका ? धर्म बढाने के लिये ? अनेक देश ? फंडिंग करते है... निरंतर... लगातार...! मगर ? हिंदुओं के धार्मीक कार्य बढाने के लिये ? कौन धन देगा ? कोई भी नहीं ! शायद ? सभी नैतिक अनैतिक कार्यों के लिये ? धन मिलेगा ! जैसे ? गैरकृत्य करने के लिये? दंगा फसाद करने के लिये ? अधर्म बढाने के लिये ? धन मिलेगा ! बहू मात्रा में धन मिलेगा ! मगर अच्छे , सच्चे कार्यों के लिये ? लगभग हर एक को ? धन के लिये ? तरसना पडेगा ! कोई भी सहयोग नहीं करेगा...?? आखिर धन वैभव भी तो ? नशीब से ही मिलता है ? ऐसा कहते है ! मगर सोने की चिडिया वाले हिंदू देश में आज ? हिंदुत्व के कार्य के लिये भी ? धन नहीं मिलता है ? धन के लिये ? बहुत तरसना और तडपना पडता है ? लगभग हर एक ? ( नब्बे प्रतिशत ?? ) हिंदू ? गरीब ? निर्धन ? हो गये ? या बनाये गये ? सुनियोजित षड्यंत्रों द्वारा ? ऐसा कैसे उल्टा पुल्टा हो गया ? राजा विक्रमादित्य के समय में हर हिंदू सधन , संपन्न , धनवान था ? तो आज ? देश की और ? हिंदुओं की ? इतनी दुर्दशा कैसे हो गयी ? धन वैभव देने वाली माता महालक्ष्मी का यह देश ? आखिर इतना कंगाल कैसे बन गया ? किसने बनाया ? या फिर ? माता महालक्ष्मी ही इस देश में ? रूष्ट हो गयी ? और आखिर अंतिम प्रश्न तो है ही...की.. हमारे देश को ? हमारे देश के लगभग हर हिंदू को ? धन वैभव संपन्न कैसे बनाएंगे ? उनके नेक , सच्चे , अच्छे धार्मिक कार्यों के लिये ? धन की बरसात ? कैसे करायेंगे ? ऐसी कोई तो भी तरकीब ? सोचनी ? निकालनी होगी की...? मेरा हर हिंदू बांधव धन संपन्न हो ? सुखी समाधानी आनंदी हो ? धर्म कार्य बढाने के लिये ? हर एक हिंदू के पास ? विपूल धन वैभव हो ? क्या यह सबकुछ ? ऐसा सबकुछ ? हो सकेगा ? जी , जरूर हो सकेगा ! भगीरथ राजा ने ? भागीरथी नदी को अथक प्रयास से धरती पर प्रकट किया है ? जो भागीरथी गंगा आज भी इसका प्रमाण है ! ऐसी चमत्कारी भूमी में ? क्या सचमुच में असंभव भी कुछ रहेगा ? बिल्कुल नहीं ! मगर हमें फिरसे जरूरत है ? भगीरथ राजा जैसे महान पुण्यात्मा की जो ? परमात्मा को भी बता सके की ? मेरे देश का और संपूर्ण विश्व का ? ईश्वर पूजक ? मेरा हिंदू बांधव ? धन वैभव संपन्न होना चाहिए ! ऐश्वर्य संपन्न होना चाहिए ! साथ में सुसंस्कृत भी , संस्कृती पूजक भी ! साथ में ? आदर्श संस्कृती के पुनरूत्थान का वैभवशाली ? भारत भी ? बनना चाहिए ! मगर ऐसे दिव्य संकल्प के पुर्ती के लिये ? आखिर आगे आयेगा कौन ? विष्णू लक्ष्मी कुबेर यक्ष की यह महान भूमी को ? फिरसे ? वैभवशाली बनायेगा कौन ? तीव्र इच्छाशक्ती होगी तो ? असंभव भी संभव में बदलेगा ! चलो , आज हम सब मिलकर कम से कम आज ऐसा भव्य दिव्य और सभी के संपूर्ण कल्याण का सर्वोच्च संकल्प तो करते है ? सब मिलकर ? या फिर इसमें , इस पवित्र संकल्प में भी ?आपसी लडाई झगडा , आपसी बैर और जातीवाद का भयंकर और जालीम जहर भी रहेगा ? क्योंकी हमारे भारतीयों की , हर काम में टांग अडाने की आदत जो है ? फिर कार्य अच्छा हो या ना हो ? धन वैभव की खनखनाहट सभी के आंखों की पट्टी ? शायद ? खोलती ही है ...होगी भी ! धन वैभव से मोहित होनेवाला शायद धरती पर कोई मानव प्राणी नहीं होगा ? मगर यहाँ , हमारे इस देश में ? होता क्या है की ?, हर एक व्यक्ती केवल अपनी अपनी ही सोचता है और ? सारी शक्ती अपने खुद के लिये ? खुद को पैसा कमाने के लिये ही ? सोचता है ! केवल अपने परिवार का ही सोचता है ! मगर, खुदगर्ज समाज जब सामाजिक न्याय के लिये प्रेरीत होता है ? सामाजिक उत्थान के लिये प्रयत्नशील रहता है ? आपसी मतभेद , जातिभेद भूलकर एक छत्र ? भगवा छत्र ?तब ? महाक्रांती होती है ! मगर स्वार्थी , मतलबी लोग , समाज और ऐसी समाज रचना थोडे ही महाक्रांती का बिगुल बजायेगी ? लगभग हर एक को यहाँ खुद की , अपनी अपनी पडी है...! धन कमाना है तो ? केवल खुद के लिये और ? खुद के परिवार के लिये ? केवल खुद को और खुद के परिवार को ही ?सभी प्रकार के सुख चाहिए ? बस... लगभग हर एक के जीवन का मकसद यही होता है.. यह मकसद पुरा हुवा तो ? जीवन सार्थक हुवा..!? बाकी समाज जाये भाड में ...! इसीसे समाजोन्नती और राष्ट्रोद्धार थोडे ही होगा ? तो साथीयों, आवो चलो कुछ नया सोचते है... नया संकल्प करते है ... एक इतिहास बनाते है ... कम से कम ऐसा प्रयास तो करते है...!! सभी का कल्याण हो ! सभी का मंगल हो ! वसुधैव कुटुंबकम् का अर्थ सभी को समझे ! तो ? ऐसा होनेपर ? भारत को विश्व गुरू होने से कौन रोकेगा ? इसके लिए चाहिए ? सामुहिक तीव्र इच्छाशक्ती की और ? अथक प्रयत्न वाद तथा परिश्रम की जरूरत ! दिव्यत्व ही भव्यत्व होता है ! और विश्व कल्याण के लिये ? संपूर्ण समाज को खुद के पिछे ? खींचकर ले आना ही ? असली नेतृत्व होता है ! इसिलिए सबसे पहले ? देश को और देशवासिओं को ? कंगाल बनानेवालों को सबक सिखानी होगी ! तीव्र इच्छाशक्ती के बलपर... एक छोटासा देश... इस्रायल ? इतनी उंची उडान भर सकता है तो ? हमारे लिये ? असंभव क्या है ? दियास्वप्न देखने से संकल्प पूरे नहीं होते है तो ? अच्छे संकल्प , अचूक रणनीती और अथक प्रयास से संकल्प जरूर पूरे होते ही है ! चलो नये समाज की ओर ! संपन्न भारत की ओर ! *आज मैं* *सर्वव्यापी ईश्वर को* *साक्षी रखकर* *यह शपथ लेता हूं और* *संकल्प करता हूं* *की , मेरे देश का हर* *हिंदू और विश्व का* *संपूर्ण हिंदू समाज* *धनवान तथा* *धनसंपन्न बनाने* *के लिये , मैं* *निरंतर , लगातार ,* *चौबिसों घंटे प्रयास जारी* *रखुंगा !* *सभी के अखंड कल्याण* *से ही मेरा* *कल्याण भी संभव* *होगा !* *सभी की आर्थिक* *संपन्नता और* *सांस्कृतिक संपन्नता यह* *मेरे जीवन का* *और ? हर एक हिंदू* *बांधव का दायित्व* *है...जो हम जल्द अती* *जल्द पूरा करके* *ही रहेंगे !* ( सभी हिंदुओं को आज यह शपथ लेनी पडेगी और ऐसा शुभ संकल्प करना ही पडेगा ! *एक सामुहिक प्रार्थना* जीवन की दशा और दिशा बदल देती है ! ) *बोलो लक्ष्मी नारायण* *की त्रीवार* *जयजयकार हो...* 💰💰💰✅
दु:ख ? एकट्याचे ?? https://globalhinduism.in/?p=3397 #❤️जीवन की सीख *दु:ख शेवटी एकट्यालाच* *भोगावे लागते...?* ✍️ २८४० *विनोदकुमार महाजन* 🫣🫣🫣🫣 दु:ख हे शेवटी प्रत्येकाच्या वाट्याला येतेच येते. आणी ते दु:ख पण शेवटी एकट्यालाच भोगावे लागते. प्रत्येकाला कांहीं ना कांहीं दुःख असतेच. आणी दु:ख म्हणजे ? भयंकर कष्टदायक आयुष्य. प्रत्येकाचे दुःख वेगवेगळे असते.आणी प्रत्येकाच्या सुखदुःखाच्या व्याख्या आणी अपेक्षाही वेगवेगळ्या असतात. पण ? दु:ख नेहमी स्वतःचेच मोठे वाटते.आणी ? परदु:ख शीतल ? दुसरा किती सुखी आणी आपणच किती दुःखी अशी सगळ्यांचीच साधारणपणे धारणा असते. पण एक मात्र नक्की खरे आहे की , प्रत्येकालाच आपल्या दु:खात नक्कीच कुणाची तरी सहानुभूती हवी असते. दु:खात कुणीतरी आपली आत्मीयतेने चौकशी करावी , मायेच्या चार शब्दांचा आधार देणारे कुणीतरी असावे , असे प्रत्येकाला वाटणे स्वाभाविक आहे.आणी तो मनुष्य स्वभाव ही आहे. आत्मीयता , प्रेम , माया , ममत्व पशुपक्षानांही समजते.मग आपण तर मनुष्य आहोत.आपणालाही दुःखाच्या प्रसंगात कुणाचा तरी मायेचा आधार असावा असे वाटते. पण शेवटी काय तर ? दु:ख हे शेवटी आपल्याला एकट्यालाच भोगावे लागते.त्यात वाटेकरी कोणीही नसतो.आणी शक्यतो दु:खात वाटेकरी होण्याची कुणाची इच्छा पण नसते. म्हणूनच की काय ? दु:खी माणसाला प्रत्येक जण जवळजवळ टाळण्याचाच प्रयत्न करत असतो. श्रीमंत असो , गरीब असो , दुःख हे शेवटी प्रत्येकाला असतेच. अगदी वैभवाच्या , ऐश्वर्याच्या राशीत दररोजच लोळतो आहे आणी ? त्याला दुःख नाही , असे कधिही होऊ शकत नाही.त्यालाही कांहीं ना कांहीं तरी दु:ख हे असतेच. फक्त एक आहे की , दु:खाच्या प्रसंगात आपल्याला एक तरी खंबीर आधार हवा असतो.अगदी खंबीरपणे पाठीशी उभे राहणारा कुणीतरी हवा असतो. प्रारब्ध भोग...हे ही दु:खाचे महत्वाचे कारण आहे. पण ब-याच वेळा आपला अवाजवी अहंकार अथवा माणसं पारखण्याची आपली चूक...हे ही अनेक वेळा दुःखाचे कारण होऊ शकते. पुर्वीची माणसं एकमेकांना सुखदुःखात खंबीर आधार द्यायची.संकटात धावून यायची. पण अलीकडे काळ अगदी पार बदलून गेला आहे. एकमेकांबद्दलची सहानुभूती , प्रेम , माया , ममत्व जणू संपतच चाललंय की काय ? असं वाटू लागलंय. शुष्क आणी कोरडी ह्रदये आणी फक्त पैशासाठी आणी स्वार्थासाठीची नातिगोती . हल्ली माणसं मनानं एकमेकांपासून दूरावत तर आहेतच , कुणी कुणाचं ऐकण्याच्या मनस्थितीत ही कुणी नाही.कुणी कुणाची विचारपूस करायला तयार नाही.कुणी कुणाची आत्मीयतेने चौकशी ही करायला तयार नाही , अशी सामाजिक परिस्थिती निर्माण होते आहे. परदेशात गेलेल्या मुलांचे आईवडील एकटे आणी एकाकी जीवन जगत आहेत.त्यांना कुणाचा तरी मानसिक आधार हवा आहे , पण तो ही मिळायला तयार नाही ? अशी बिकट आणी केवीलवाणी सामाजिक स्थिती बनते आहे. बरं... एकटं जीवन जगणाऱ्या दोघांनाही कुणी समाजात , पाव्हण्यारावळ्यात आधार द्यायला तयार नाही. एखाद्याचा आयुष्याचा जोडीदार कायमचाच सोडून ( निधन झाले ) निघून गेला तर ? त्या एकट्या माणसाची अजून भयंकर बिकट स्थिती निर्माण होते आहे. आतल्या आत विचारांचे असह्य काहूर आणी जीवघेणा संघर्ष. आणी अशातच सामाजिक जाणीवा ही बोथट होत चालल्या आहेत.संवेदना संपत चालल्या आहेत. मग दु:खात कोण आधार देणार ? कमीत कमी ( अगदी फुकटचा ) मानसिक आधार तरी ? पण तो ही जवळजवळ दुरापास्त होत चालला आहे. आत्मा हरवलेली की आत्मा मेलेली माणसे ? की आत्मतत्त्व विसरलेली माणसे ? दु:खात आधार नाही मिळाला की मनाची खंत... आणी मग सुरू होते , एकाकी असह्य जीवन. दु:ख कुणापाशी बोलायला , मन हलके करायला ही जागा नाही ? अशी दयनीय सामाजिक अवस्था. जवळपास प्रत्येक ठिकाणी हेच विदारक चित्र ? एकत्र कुटुंब व्यवस्था नष्ट झाली.फ्लॅट संस्कृती वाढत चालली.अनायासे एकाकीपण ही वाढत चालले. मनाची कोंडी , आतल्या आत घुसमट वाढत चालली. आजची फार दयनीय सामाजिक अवस्था आहे. खेड्यातली परिस्थिती जरा वेगळी आहे असे वाटत होते.पण आता खेडी सुध्दा झपाट्याने बदलत चालली आहेत. प्रेम , आत्मीयता तिथेही संपत चालली आहे , असे वाटते आहे. प्रेम , आत्मीयता तिथेही संपत चालली आहे की काय असे वाटू लागले आहे. हेवे , दावे , द्वेष , मत्सर टोकाचा वाढतो आहे.कुढ्या मनोवृत्ती ची माणसे वाढत आहेत. अशातच गट तट वाढत जात आहेत. आपसी इर्षा , टोकाचा जीवघेणा कलह याचा जागोजागी उद्रेक होतो आहे. पण ? एखाद्याचं वैयक्तिक दुःख , त्याची असह्य तडफड आणी त्याला आधार देण्याची मानसिकता , याच्याशी कुणालाच कांहीही घेणंदेणं नसावं , असं वाटू लागलं आहे. बरं...मनं... विश्वासाने कुणापाशी हलकं करावं , मनातलं दुःख कुणापाशी बोलावं तर ? दु:खात आधार मिळणं दूरच , गैरफायदा घेणारे , टिंगल टवाळी करणारे , मागे निंदा करणारांची संख्याही प्रचंड वाढते आहे. मग दु:ख बोलायचे तरी कुणापाशी ? दु:ख दुसऱ्याला सांगीतल्याने ते हलके होते , असे म्हणतात. पण अशी मन हलके करण्यासाठी एक ही जागाच अख्या जगात शिल्लकच राहीली नसेल तर मग शेवटी बोलणार कुणापाशी ? अशी सार्वजनिक स्थिती वरचेवर वाढत चालली आहे. अलिकडे सामाजिक संघटनांमध्ये तरी आत्मियता कुठे जाणवते ? सगळा मोठेपणाचा आणी अहंकाराचा बाजारच वाटतो. अथवा पैशांचे खेळ. मग दु:खात आत्मीयता कुठून भेटणार ? संकटात कोरडी सहानुभूती नको असते तर खंबीर मानसिक आधार हवा असतो. आणी तोच नेमका मिळत नाही. मग चालू होते , मनाची घुसमट.आणी त्या घुसमटीला वाट करून देण्यासाठीची वेगवेगळी उपाय योजना. पण एवढं जरी झालं तरी , एक मात्र नक्की खरे आहे की , संकटात , दुःखात कुणी आधार देवू अथवा न देवू , ईश्वर मात्र नक्कीच खंबीर आधार पण देतो.आणी प्रत्येक दुःखात खंबीरपणे अगदी चोवीस तास पाठीशी उभा पण राहतो. पण ? त्यासाठी सुद्धा ईश्वराला आर्ततेने हाक मारता आली पाहिजे. ईश्वरावर खरंखुरं प्रेम करता आलं पाहिजे. त्यासाठी त्या अद्भुत शक्तिवर अतूट विश्वास प्रेम आणी श्रध्दा असायला हवी. मग बघा संपूर्ण आयुष्यच कसं बदलून जातंय ते. संपूर्ण आयुष्यच उजळून टाकण्याची व आयुष्य बदलण्याची शक्ती ईश्वरी तत्वामध्ये आहे , याची नित्य आणी दिव्य प्रचिती तुम्हाला पावलोपावली येईल. हा माझा स्वानुभव आहे. मग ? तुम्हाला दु:खात आधार शोधण्याची गरज लागणार नाही तर ? तुम्ही स्वतःच इतरांच्या दुःखात आधार वड बनाल. फक्त धन वैभवासाठी देवाला हाक मारायची आणी ? धन वैभव मिळालं की देवाला विसरून जायचं ? आणी धन वैभव नाही मिळालं की ? देवाला चार शिव्या द्यायच्या ? असलं स्वार्थी , मतलबी प्रेम काय कामाचं ? असली स्वार्थी मानसिकता जवळजवळ आज ब-याच ठिकाणी पहायला मिळते आहे. देव कांहीं बाजारचा भाजिपाला नाही , अथवा देव कुणाचा नोकरही नाही , हाक मारली की आला ? गरज लागली की ? देवाची आठवण येणार ? आणी ? सुखाचे चार दिवस आले की ? कोण भगवंत ? आधी दाखवा मला ... असलं अहंकरी , उन्मत्त प्रेम ? देवाला कसे आवडेल ? देव तर ? भावाचा भुकेला... केवळ एकदाच देवाचे नाव घेऊन तो कसा भेटेल ? म्हणून तर तुकाराम महाराज म्हणतात... " *जन्मोजन्मी आम्ही* *बहुपुण्य केले... तेंव्हा या* *विठ्ठले कृपा* *केली..."* तर एकंदर जीवनाचे सार काय तर...? माणसाचा नव्हे तर ? देवाचा आधार शोधावा. तोच खरा आणी अंतिम आधार असतो. *बाकी सब भुलभूलैय्या ** *है* *निःशंक होई रे मना...* *भिऊ नकोस मी तुझ्या* *पाठीशी आहे...* *श्री स्वामी समर्थ* 🌹🌹✅🕉️ व्हाट्सअप नंबर +91 8329894106 ( भारत देश )
ईश्वरी तेज https://globalhinduism.in/?p=3394 #❤️जीवन की सीख *क्या ? तुम्हारे अंदर आग* *है ??* ✍️ २८३९ *विनोदकुमार महाजन* 🔥🔥🔥🔥 मेरे प्यारे भारत देश वासियों ? क्या तुम्हारे अंदर सचमुच में आग है ?? देशप्रेम की आग , ज्वाला , लाव्हा तुम्हारे अंदर है ? अन्याय अत्याचार के विरूद्ध तुम्हारे अंदर आग है ?? अगर अंदर आग नहीं है तो? देशप्रेम की यह आग फिरसे जलानी होगी ! जलानी ही है... एक नया इतिहास बनाने के लिये... *क्यों ??* क्योंकी जरा सोचना तो होगा ही.... हमारे शूर वीर राजे संभाजी को तडपातडपाकर हैवानों ने मारा ... हमारे राजा शिवछत्रपती को अनेक नरकयातनाएं दी गई ... हमारे महाराणा प्रताप को भयंकर तडपाया ... हमारे पृथ्वीराज चौहान को धोके से मारा ... हमारे गुरू गोविंदसिंग को और उनके परिवार को क्रूर हैवानों ने तडपातडपाकर मारा... और भी ऐसे अनेक महात्माओं को , महापुरूषों को जिन्होंने तडपातडपाकर मारा...याद करो उनकी शहादत... और ? याद करो उन क्रूर अत्याचारी हैवानों को , सैतानों को , भयावह राक्षसों को ? जिन्होंने हमारे छोटे छोटे मासूम बच्चों को भी ? जींदा जलाया , निष्पाप जीवों को भी तडपातडपाकर मारा , उनका छोटासा शरीर भी क्रूरता से चीर डाला ?? *क्या ?* ऐसे भयानक जालिमों को हम माफ करेंगे ? ऐसे भयावह अत्याचारीयों के नाम आज भी हमारे गली , गांव , नगर , शहर को दिये गये है ? और हम मूक दर्शक बनकर , तेजोहीन बनकर यह सब तमाशा खुलेआम देख रहे है ?? क्यों ?? हमारा आत्मसन्मान , हमारा आत्मतेज कहाॅं गायब हो गया है...? या फिर हमारे अंदर खून है भी या नहीं ? हमारे अंदर आग है भी या नहीं ? हमारे अंदर का धधगता ईश्वरी तेज , हमारे अंदर की प्रतिशोध की धधगती ज्वाला मर मर गई है क्या ? साथीयों , अब हमें हीन दीन लाचार नहीं रहना है बल्की ? अंदर का धधगता ईश्वरी तेज जगाना है , अंदर की आग जलानी है... और...? अत्याचारीयों के नामोनिशाण सदा के लिये मिटाने है ! सोचो , गौर से सोचो... हमारे महादेव...देवों के भी देव... उच्च कोटी का हमारा श्रध्दास्थान... साक्षात महादेव का वास्तव्य स्थान ? *मान सरोवर ?* खुद के बाप की जागीर समझकर ? दूसरे देश को जानबूझकर देने वाला कौन था...?किसने दिया यह हमारा आदर्श श्रध्दास्थान दूसरों को ? *किसने दिया ?* *क्यों दिया ?* *किसके अधिकार पर* *दिया ?* हमारा आत्मसन्मान मारने के लिये ...? हमारे श्रध्दास्थानों को नामशेष करने के लिये ? हमारे आदर्श ईश्वरी सिद्धांत मिटाने के लिये ? हमारे ही नाक के उपर ? हमारा *मान सरोवर* दूसरों को दिया ? *आखिर किसने और* *क्यों ?* और हम ? लाचार बनकर हीन दीन बनकर यह भयावह अत्याचार सहते रहे ?? भयंकर क्रूर तथा अत्याचारी, षड्यंत्रकारी लोगों को ही हम आज तक सर्वोच्च सत्तास्थान पर बिढाते रहे ?? *आश्चर्य है ना ?* इतने मुर्ख या निद्रिस्त रहे हम ? जो हमारा नामोनिशाण मिटाना चाहता है , जो हमारे मठ मंदिर तथा हमारी आदर्श संस्कृती जमीन के निचे सदा के लिये दफनाना चाहता है ? उसे ही हम सर्वोच्च सत्तास्थान पर ? लगातार ? बिठाते आ रहे है ? *शर्म करो...शर्म करो...* अभी भी समय हाथ में है...अभी भी नींद से जागो... अंदर की आग जागृत करो... *धर्म के लिये,* *हमारे देवता तूल्य* *आदर्श ,* शेर शिवाजी , शेर संभाजी जैसे शुरों जैसों का समर्पित जीवन जीना , अत्याचार के विरूद्ध सदैव धधगती आग , तेज जागृत रखना ही ?हमारा ...हम सभी भारतवासियों का... असली जीवन होता है... और यही हमारे जीवन का उद्दीष्ट भी होना चाहिए... जागो हिंदू जागो... जागो शूर विरों जागो.. जागो तेजस्वी ईश्वर पूत्रों जागो... अधर्म का अंधियारा हटाना है... धर्म का उजाला लाना है... *भगवान के भगवे का* *राज ? चारों ओर* *बढाना है...* *हिंदवी स्वराज्य* संपूर्ण विश्व में फैलाना है... सत्य सनातन धर्म की त्रिवार जयजयकार हो... *हर हर महादेव* *राजा शिवछत्रपती की* *जय* 🔥🔥🔥🚩