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🔥 जब राजा हरिश्चंद्र दान देने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाते थे, तो उनकी नजरें हमेशा नीचे झुक जाती थीं! 😱 सब सोचते थे कि इतने बड़े दानवीर दान करते समय अपनी आँखें नीचे क्यों कर लेते हैं? जब तुलसीदास जी ने इसका असली राज पूछा, तो राजा का जवाब सुनकर सबके होश उड़ गए! 👇✨
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दान का धर्म
राजा हरिश्चंद्र एक बहुत बड़े दानवीर थे। उनकी ये एक खास बात थी कि जब वो दान देने के लिए हाथ आगे बढ़ाते तो अपनी नज़रें नीचे झुका लेते थे। ये बात सभी को अजीब लगती थी कि ये राजा कैसे दानवीर हैं ये दान भी देते हैं और इन्हें शर्म भी आती है। ये बात जब तुलसीदासजी तक पहुँची तो उन्होंने राजा को चार पंक्तियाँ लिख भेजीं जिसमें लिखा था-
ऐसी देनी देन जु कित सीखे हो सेन।
ज्यों ज्यों कर ऊँची करी, त्यों त्यों नीचे नैन॥
इसका मतलब था कि राजा तुम ऐसा दान देना कहाँ से सीखे हो ? जैसे जैसे तुम्हारे हाथ ऊपर उठते हैं वैसे वैसे तुम्हारी नज़रें तुम्हारे नैन नीचे क्यूँ झुक जाते हैं ?
राजा ने इसके बदले में जो जवाब दिया वो जवाब इतना गजब का था कि जिसने भी सुना वो राजा का कायल हो गया। इतना प्यारा जवाब आज तक किसी ने किसी को नहीं दिया। राजा ने जवाब में लिखा-
देनहार कोई और है, भेजत जो दिन रैन।
लोग भरम हम पर करें, तासीं नीचे नैन ॥
मतलब, देने वाला तो कोई और है वो मालिक है वो परमात्मा है वो दिन रात भेज रहा है। परन्तु लोग ये समझते हैं कि मैं दे रहा हूँ। ये सोच कर मुझे शर्म आ जाती है और मेरी आँखें झुक जाती है।
जय जय श्री राधे कृष्ण
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सच्चा दान वही है जो अहंकार को मिटाकर पूरी विनम्रता के साथ किया जाए। जब हम खुद को कर्ता मान लेते हैं तो अभिमान का जन्म होता है, लेकिन जब हम खुद को केवल एक माध्यम समझते हैं, तब हमारी आँखें कृतज्ञता से झुक जाती हैं।
"देने वाला तो वो परमपिता परमात्मा है, हम तो बस एक जरिया हैं... क्या आप भी मानते हैं कि दान करते समय मन में अहंकार नहीं, बल्कि राजा हरिश्चंद्र जैसी विनम्रता होनी चाहिए? आपका क्या विचार है?"
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आज का सवाल:
राजा हरिश्चंद्र दान देते समय अपनी आँखें नीचे क्यों झुका लेते थे?
A) उन्हें दान देने में शर्म आती थी 🫣
B) वो अपनी प्रजा से डरते थे 😨
C) अहंकार से बचने और भगवान को असली दाता मानने के कारण 🙏 #hindu #🔊सुन्दर कांड🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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🔥 जब नारद जी ने उस औरत को थप्पड़ मारा, तो सीधा भगवान विष्णु के गाल लाल हो गए! 😱 क्या आप जानते हैं भगवान ने थप्पड़ क्यों खाया? कहानी के अंत में जो हुआ वो आपकी सोच बदल देगा! 🙏✨
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विष्णु अर्पण
कुछ पण्डितों ने एक औरत को कहा- घर में तू विष्णुजी की फोटो रख ले और रोटी खाने से पहले उनके आगे रोटी की थाली रख कर कहना है- 'विष्णु अर्पण' अगर पानी पीना है तो पहले विष्णुजी के आगे रख कर कहना है- 'विष्णु अर्पण'
उस औरत की आदत हो गई कि जो भी काम करती पहले मन में यह यह कहती की 'विष्णु अर्पण' फिर वह काम - करती थी। आदत इतनी पक्की हो गई कि एकदिन घर का कूड़ा इक्कठा किया और फेंकते हुए कहा- 'विष्णु अर्पण'। वहीं पास से नारद मुनि जा रहे थे। उन्होंने जब यह सुना तो उस औरत को थप्पड़ मारकर कहा- विष्णुजी को कूड़ा अर्पण कर रही विष्णुजी के प्रेम में रंगी औरत थप्पड़ पड़ते ही बोली- 'विष्णु अर्पण'। अब तो नारदजी ने दूसरे गाल पर थप्पड़ मारते हुए कहा कि थप्पड़ भी 'विष्णु अर्पण' कह रही है। लेकिन वह औरत यही कहती रही 'विष्णु अर्पण' ।
नारद मुनि क्रोध करते हुए विष्णु पूरी में चले गए, वहाँ देखते है कि विष्णुजी के दोनों गालों पर उँगलियों के निशान बने हुए हैं, पूछने लगे- 'भगवान यह क्या हो गया। आप के चेहरे पर यह निशान कैसे पड़े?'
विष्णुजी बोले- 'नारद थप्पड़ मारो भी तुम और पूछो भी तुम।' नारदजी बोले- 'प्रभु मैं आपको थप्पड़ कैसे मार सकता हूँ?'
विष्णुजी बोले- 'नारद जिस औरत ने कूड़ा फेंकते हुए यह कहा था- 'विष्णु अर्पण' और तुमने उसे थप्पड़ मारा तो वह थप्पड़ उसने मुझे अर्पण कर दिया था।' ये उसी अर्पित थप्पड़ के निशान हैं जो आपने उसे मारे थे।
जय जय श्री राधे कृष्ण
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जब भक्ति निस्वार्थ और अटूट हो, तो भक्त का हर दर्द भगवान खुद सहते हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि हम जो कुछ भी समर्पित करते हैं, भगवान उसे प्रेमवश स्वीकार कर लेते हैं—चाहे वो खुशी हो या गम।
"जब थप्पड़ पड़ा तो औरत ने फिर से 'विष्णु अर्पण' क्यों कहा? क्या आप भी हर परिस्थिति में भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं?"
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आज का सवाल:
नारद जी ने उस औरत को थप्पड़ क्यों मारा था?
A) उसे सताने के लिए 😡
B) कूड़ा अर्पण करने पर क्रोधित होकर 🗑️
C) भगवान की परीक्षा लेने के लिए 🧐 #hindu #🔊सुन्दर कांड🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🔥 जब ठाकुर जी ने राधा रानी से उनके पैर धोने को कहा, तो राधा जी ने जो जवाब दिया उसे सुनकर कृष्ण भी दंग रह गए! क्या आप जानते हैं राधा रानी ने मना क्यों किया? 🦶💖✨
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प्रेमभाव
एक बार ठाकुर जी और राधा रानी रास के बाद निधिवन से वापिस आ रहे थे। आते आते अचानक ठाकुर जी की नजर राधा रानी के चरणों पर पड़ी, राधा रानी के चरणों में बृज रज लगी थी। यमुना किनारे पंहुच कर ठाकुर जी ने राधा रानी से कहा किशोरी जी आपके चरणों में बृज रज लगी है आप यमुना जल में अपने चरण धो लीजिए तो राधा रानी ने साफ मना कर दिया। बार बार ठाकुर जी चरण धोने को कहते और राधा रानी मना कर देती। जब ठाकुर जी ने इसका कारण पूछा तो राधा रानी ने बहुत सुंदर जवाब दिया कि जो एक बार मेरे चरणों से लग जाए मैं उसे कभी दूर नहीं करती।
प्रेम से बोलो राधे राधे
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ब्रज की धूल का महत्व और राधा रानी के अनन्य प्रेम की यह सुंदर झांकी आपके हृदय को छू लेगी। कान्हा के प्रेम में डूबी किशोरी जी का यह उत्तर निस्वार्थ समर्पण की पराकाष्ठा है।
"एक बार चरणों से लग जाने पर राधा रानी कभी साथ नहीं छोड़तीं... क्या आप भी आज राधा रानी के चरणों में अपनी हाजिरी लगाना चाहेंगे? कमेंट में 'राधे राधे' लिखकर बताएं कि आपको यह प्रसंग कैसा लगा?"
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आज का सवाल:
राधा रानी ने अपने चरणों की धूल धोने से मना क्यों किया?
A) धूल सुंदर लग रही थी 🌸
B) वो यमुना किनारे नहीं जाना चाहती थीं 🌊
C) जो एक बार चरणों से लग जाए उसे वो दूर नहीं करतीं ❤️ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🔊सुन्दर कांड🕉️ #hindu
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कसाई भी रो पड़ा जब बकरे ने खोला अपनी पिछली 499 मौतों का खौफनाक राज!
😱 आखिर क्यों वो कटने से पहले हंस रहा था? 🐐🔥
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कर्म की सजा
भोज के लिए एक व्यक्ति ने एक बार एक बकरे की बलि चढ़ाने की तैयारी आरम्भ की। उसके बेटे बकरे को नदी में स्नान कराने ले गये। नहाने के समय बकरा एकाएक बड़ी जोर से हँसने लगा; फिर तत्काल दुःख के आँसू बहाने लगा। उसके विचित्र व्यवहार से चकित हो कर बेटों ने उससे जब ऐसा करने का कारण जानना चाहा तो बकरे ने कहा कि कारण वह उनके पिता के सामने ही बताएगा।
व्यक्ति के सामने बकरे ने यह बतलाया कि उसने भी एक बार एक बकरे की बलि चढ़ायी थी, जिसकी सज़ा वह आज तक पा रहा था। तब से चार सौ निन्यानवे जन्मों में उसका गला काटा जा चुका है और अब उसका गले कटने की अंतिम बारी है। इस बार उसे एक बुरे कर्म का अंतिम दंड भुगतना था, इसलिए वह प्रसन्न होकर हँस रहा था। किन्तु वह दुःखी हो कर इसलिए रोया था कि अगली बार से तुम्हारे भी सिर पाँच सौ बार काटे जायेंगे।
व्यक्ति ने उसकी बात को गंभीरता से लिया और उसके बलि की योजना स्थगित कर दी तथा अपने बेटों से उसे पूर्ण संरक्षण की आज्ञा दी। किन्तु बकरे ने व्यक्ति से कहा कि ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि कोई भी संरक्षण उसके कर्मों के पाप को नष्ट नहीं कर सकते। कोई भी प्राणी अपने कर्मों से मुक्त नहीं हो सकता।
जब बेटे उस बकरे को ले कर उसे यथोचित स्थान पर पहुँचाने जा रहे थे। तभी रास्ते में किनारे एक पेड़ के शाखा पर नर्म-नर्म पत्तों को देख ज्योंही बकरे ने अपना सिर ऊपर किया, तभी एक वज्रपात हुआ और पेड़ के ऊपर पहाड़ी पर स्थित एक बड़े चट्टान के कई टुकड़े छिटके। एक बड़ा टुकड़ा उस बकरे के सिर पर इतनी ज़ोर से आ लगा कि पलक झपकते ही उसका सिर धड़ से अलग हो गया।
जय श्री राम
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यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारे द्वारा किया गया हर छोटा-बड़ा कार्य लौटकर हमारे पास जरूर आता है। अनजाने में किया गया पाप भी अपना फल दिए बिना नहीं छोड़ता। इसलिए किसी भी जीव को कष्ट देने से पहले उसके परिणामों के बारे में जरूर सोचें। 📿✨
500 बार गला कटने का दर्द क्या आप सह पाएंगे? 😱 क्या आपको लगता है कि इंसान अपने बुरे कर्मों के फल से कभी बच सकता है?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। 🙏
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क्या आप पुनर्जन्म और कर्म के सिद्धांत में विश्वास रखते हैं? 🧐
हाँ, पूरी तरह से ✅
नहीं, यह सब अंधविश्वास है ❌
पता नहीं, सोच रहा हूँ 🤔 #🔊सुन्दर कांड🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #hindu
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💰😳 “जिसे वो अपनी कमाई समझ रहा था… वो असल में किसी और के भाग्य का हिसाब निकला!”
🌸🔥 “घर में पैसा बढ़ा… तो उसे लगा मेहनत रंग लाई, लेकिन नारद मुनि ने जो सच बताया वो रुला देगा…”
🪔💫 “हर इंसान कमाता खुद है… पर खाता किसके भाग्य से है, ये जानकर अहंकार टूट जाएगा!”
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"मनुष्य का 'भाग्य'
एक आदमी ने नारदमुनि से पूछा मेरे भाग्य में कितना धन है? नारदमुनि ने कहा भगवान विष्णु से पूछकर कल बताऊंगा। नारदमुनि ने कहा-1 रुपया रोज तुम्हारे भाग्य में है। आदमी बहुत खुश रहने लगा, उसकी जरूरतें 1 रुपये में पूरी हो जाती थी। एक दिन उसके मित्र ने कहा मैं तुम्हारे सादगी भरे जीवन को देखकर बहुत खुश और प्रभावित हुआ हूँ और अपनी बहन की शादी तुमसे करना चाहता हूँ।
आदमी ने कहा मेरी कमाई 1 रुपया रोज की है इसको ध्यान में रखना। इसी में से ही गुजर बसर करना पड़ेगा तुम्हारी बहन को मित्र ने कहा कोई बात नहीं मुझे रिश्ता मंजूर है।
अगले दिन उस आदमी की कमाई 11 रुपया हो गई। उसने नारदमुनि से पूछा की हे मुनिवर मेरे भाग्य में 1 रुपया लिखा है फिर 11 रुपये क्यों मिल रहे हैं ? नारदमुनि ने कहा- तुम्हारा किसी से रिश्ता या सगाई हुई है क्या? हाँ हुई है, उसने जवाब दिया। तो यह तुम्हको 10 रुपये उसके भाग्य के मिल रहे है, इसको जोड़ना शुरू करो तुम्हारे विवाह में काम आएंगे नारद जी ने जवाब दिया।
एक दिन की पत्नी गर्भवती हुई और उसकी कमाई 31 रुपये होने लगी। फिर उसने नारदमुनि से पूछा हे मुनिवर मेरी और मेरी पत्नी के भाग्य के 11 रुपये मिल रहे थे लेकिन अभी 31 रुपये क्यों मिल रहे है। क्या मैं कोई अपराध कर रहा हूँ या किसी लुटेश पे हो रहा हूँ? मुनिवर ने कहा- यह तेरे बच्चे के भाग्य के 20 रुपये मिल रहे है।
हर मनुष्य को उसका प्रारब्ध (भाग्य) मिलता है। किसके भाग्य से घर में धन दौलत आती है हमको नहीं पता लेकिन मनुष्य अहंकार करता है कि मैंने बनाया, मैंने कमाया, मेरा है, मेरी मेहनत है, मैं कमा रहा हूँ, मेरी वजह से हो रहा है। मगर वास्तव में किसी को पता नहीं की हम किसके भाग्य का खा रहे हैं, इसलिए अपनी उपलब्धियों पर अहंकार कभी नहीं करना चाहिए।
🌸जय श्री कृष्ण🌸"
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🌸💰 कभी-कभी घर में आने वाला धन हमारी मेहनत से नहीं… किसी अपने के भाग्य से आता है।
🪔 अहंकार इंसान को अंधा बना देता है, लेकिन सच्चाई जानने के बाद सिर अपने आप झुक जाता है।
🙏 जय श्री कृष्ण ❤️
💭😳 “जिसे तुम अपनी मेहनत का फल समझते हो… कहीं वो किसी अपने के भाग्य का असर तो नहीं?”
अगर आज आपके घर में सुख-शांति है, तो क्या आपने कभी सोचा वो किसके भाग्य से है? ✨
📊🙏 Poll Time
❓क्या आप मानते हैं कि परिवार के भाग्य से घर में धन आता है?
🟢 हाँ, बिल्कुल
🔵 मेहनत सबसे बड़ी है
🟠 दोनों का असर होता है
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🤔 क्या सोने की लंका भी राख का ढेर बन सकती है? 🔥
😮 आपके घर को अयोध्या या लंका, कौन बना रहा है? 😲
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सुमति और कुमति क्या है
किसी ने तुलसी दास जी से पूछा — महाराज ! सम्पूर्ण रामायण का सार क्या है ? क्या कोई चौपाई ऐसी है जिसे हम सम्पूर्ण रामायण का सार कह सकते हैं ? तुलसी दास जी ने कहा;
जहां सुमति तह सम्पति नाना
जहां कुमति तहँ विपत्ति आना
जहां सुमति होती है, वहां हर प्रकार की सम्पत्ति, सुख सुविधाएं होती है और जहां कुमति होती है, वहां विपत्ति, दुःख और कछ पीछा नहीं छोड़ते । सुमति थी अयोध्या में । भाई-भाई में प्रेम था, पिता और पूत में प्रेम था, राजा-प्रजा में प्रेम था, सास-बहू में प्रेम था और मालिक-सेवक में प्रेम था, तो उजड़ी हुई अयोध्या फिर से बस गई ।
कुमति थी लंका में । एक भाई मे दूसरे भाई को लात मारकर निकाल दिया । कुमति और अनीति के कारण सोने की लंका राख का ढेर हो गई ।
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📖 जीवन का सच्चा सार: सुमति और कुमति का प्रभाव
आज की दौड़ती-भागती ज़िंदगी में हम सुख-समृद्धि की तलाश में रहते हैं, लेकिन क्या हम अपने परिवार और समाज में 'सुमति' (सद्बुद्धि और एकता) लाने का प्रयास करते हैं? यह कहानी हमें सिखाती है कि सुमति ही वह कुंजी है जो उजड़ी हुई अयोध्या को भी फिर से बसा सकती है, जबकि 'कुमति' (दुर्बुद्धि और कलह) सोने की लंका को भी राख का ढेर बना सकती है। आइए, अपने भीतर और अपने परिवेश में सुमति को अपनाएं और जीवन को खुशहाल बनाएं। #रामायण #सच्चाज्ञान
🤔 जब भाई ही बन जाए दुश्मन, तब क्या सोने की लंका भी धूल बन जाती है? 🔥
🤫 सुमति और कुमति: आपके घर को क्या बना रही है? अयोध्या या लंका? 😲
🧐 क्या आपने कभी महसूस किया है कि जब आपके घर में एकता और प्रेम (सुमति) होती है, तो हर काम सफल होता है, और जब अशांति (कुमति) होती है, तो सब कुछ बिगड़ने लगता है?
पोल:
🗳️ सुमति और कुमति में से आपके अनुसार जीवन में किसका अधिक प्रभाव है?
A) 🤔 सुमति (सद्बुद्धि) - प्रेम और एकता के लिए
B) 😥 कुमति (दुर्बुद्धि) - सतर्कता और सीख के लिए
C) ✅ दोनों का महत्व #🔊सुन्दर कांड🕉️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #hindu













![🔊सुन्दर कांड🕉️ - और कुमती क्या है ؟٩ किसी ने तुलसी दास जी से पूछा - সমাযাস ! सम्पूर्ण रामायण का सार क्या है ? क्या कोई चौपाई ऐसी है जिसे हम सम्पूर्ण रामायण का दास जी ने कहाः सार कह सकते हैं ? तुलसी तह सम्पत्ति नाना जहां सुमति గడ faud 3IIHT जहां कुमति होती है, वहां हर प्रकार की सम्पत्ति, सुमति 6 सुख सुविधाएं होती है और जहां होती है कुमति वहां विपत्ति, दुःख और कछ पीछा नहीं छोड़ते | थी अयोध्या में | भाई-भाई में प्रेम था, सुमति पिता और पूत में प्रेम था, राजा-प्रजा में प्रेम था, सास-बहू में प्रेम था और मालिक सेवक में प्रेम था, तो उंजड़ी हुई अयोध्या फिर से बस गई | थी लंका में | एक भाई मे दूसररे भाई को॰ कुमति लात मारकर निकाल दिया और अनीति कुमति के कारण सोने की लंका राख का देर हो गई | @pradiptgyan] pradiptgyan com और कुमती क्या है ؟٩ किसी ने तुलसी दास जी से पूछा - সমাযাস ! सम्पूर्ण रामायण का सार क्या है ? क्या कोई चौपाई ऐसी है जिसे हम सम्पूर्ण रामायण का दास जी ने कहाः सार कह सकते हैं ? तुलसी तह सम्पत्ति नाना जहां सुमति గడ faud 3IIHT जहां कुमति होती है, वहां हर प्रकार की सम्पत्ति, सुमति 6 सुख सुविधाएं होती है और जहां होती है कुमति वहां विपत्ति, दुःख और कछ पीछा नहीं छोड़ते | थी अयोध्या में | भाई-भाई में प्रेम था, सुमति पिता और पूत में प्रेम था, राजा-प्रजा में प्रेम था, सास-बहू में प्रेम था और मालिक सेवक में प्रेम था, तो उंजड़ी हुई अयोध्या फिर से बस गई | थी लंका में | एक भाई मे दूसररे भाई को॰ कुमति लात मारकर निकाल दिया और अनीति कुमति के कारण सोने की लंका राख का देर हो गई | @pradiptgyan] pradiptgyan com - ShareChat 🔊सुन्दर कांड🕉️ - और कुमती क्या है ؟٩ किसी ने तुलसी दास जी से पूछा - সমাযাস ! सम्पूर्ण रामायण का सार क्या है ? क्या कोई चौपाई ऐसी है जिसे हम सम्पूर्ण रामायण का दास जी ने कहाः सार कह सकते हैं ? तुलसी तह सम्पत्ति नाना जहां सुमति గడ faud 3IIHT जहां कुमति होती है, वहां हर प्रकार की सम्पत्ति, सुमति 6 सुख सुविधाएं होती है और जहां होती है कुमति वहां विपत्ति, दुःख और कछ पीछा नहीं छोड़ते | थी अयोध्या में | भाई-भाई में प्रेम था, सुमति पिता और पूत में प्रेम था, राजा-प्रजा में प्रेम था, सास-बहू में प्रेम था और मालिक सेवक में प्रेम था, तो उंजड़ी हुई अयोध्या फिर से बस गई | थी लंका में | एक भाई मे दूसररे भाई को॰ कुमति लात मारकर निकाल दिया और अनीति कुमति के कारण सोने की लंका राख का देर हो गई | @pradiptgyan] pradiptgyan com और कुमती क्या है ؟٩ किसी ने तुलसी दास जी से पूछा - সমাযাস ! सम्पूर्ण रामायण का सार क्या है ? क्या कोई चौपाई ऐसी है जिसे हम सम्पूर्ण रामायण का दास जी ने कहाः सार कह सकते हैं ? तुलसी तह सम्पत्ति नाना जहां सुमति గడ faud 3IIHT जहां कुमति होती है, वहां हर प्रकार की सम्पत्ति, सुमति 6 सुख सुविधाएं होती है और जहां होती है कुमति वहां विपत्ति, दुःख और कछ पीछा नहीं छोड़ते | थी अयोध्या में | भाई-भाई में प्रेम था, सुमति पिता और पूत में प्रेम था, राजा-प्रजा में प्रेम था, सास-बहू में प्रेम था और मालिक सेवक में प्रेम था, तो उंजड़ी हुई अयोध्या फिर से बस गई | थी लंका में | एक भाई मे दूसररे भाई को॰ कुमति लात मारकर निकाल दिया और अनीति कुमति के कारण सोने की लंका राख का देर हो गई | @pradiptgyan] pradiptgyan com - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_822855_24331ac1_1778383702020_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=020_sc.jpg)