ગોવિંદજી ઠાકોર
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ગોવિંદજી ઠાકોર
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सत् कैवल परमात्मा
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ પરમાત્મા. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર વ
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - सन कैवल स्ाहेब ज्छोसक 4 - अद्वैता द्वैत नर्ख्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अंग মত্মক্লব্কীক্ : कीऐ आगु  वरतत ऐक उपजकी। जब हम वरती हवित रुपजकी।।१४ पीछे विखरीत भये eIgale %ेथी भें २ुगाG सर्वनु Gत्पत्ति थाने वतन थेs% छेथेभ 8ह्युं छे. पछीँथी शौ विख्शर्छ गथाा थ्यने q@8s44e- | सार कुवेरस्वामी ने पहले कहाथाकिप्रत्येक अंश, चाहेवह सामान्य हो, विशेषहोयासर्वोच्च, का उद्गम ओरमूल एकही केवलधाम हे। इसके उद्गम केवाद, सभी अंश ब्रह्मभूमिर्मेविलीन हो गए। केवलधाम से अलग होने परवे सभी शुद्ध, अविकसित रूपर्मेथे। ब्रह्मांउर्मे आनेकेवाद, अंशोने स्थूल, सूक्ष्म, कारण, महाकारण ओर सर्वोच्चकारण पिं्डों केसंपर्कर्में आनेकेकारण वस्तुर्ओंका अनुभवकरना शुरूकरदिया, जिससे उनका सहज रूप देहधारी होगया। सत् कैवल परमात्मा Govindji सन कैवल स्ाहेब ज्छोसक 4 - अद्वैता द्वैत नर्ख्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अंग মত্মক্লব্কীক্ : कीऐ आगु  वरतत ऐक उपजकी। जब हम वरती हवित रुपजकी।।१४ पीछे विखरीत भये eIgale %ेथी भें २ुगाG सर्वनु Gत्पत्ति थाने वतन थेs% छेथेभ 8ह्युं छे. पछीँथी शौ विख्शर्छ गथाा थ्यने q@8s44e- | सार कुवेरस्वामी ने पहले कहाथाकिप्रत्येक अंश, चाहेवह सामान्य हो, विशेषहोयासर्वोच्च, का उद्गम ओरमूल एकही केवलधाम हे। इसके उद्गम केवाद, सभी अंश ब्रह्मभूमिर्मेविलीन हो गए। केवलधाम से अलग होने परवे सभी शुद्ध, अविकसित रूपर्मेथे। ब्रह्मांउर्मे आनेकेवाद, अंशोने स्थूल, सूक्ष्म, कारण, महाकारण ओर सर्वोच्चकारण पिं्डों केसंपर्कर्में आनेकेकारण वस्तुर्ओंका अनुभवकरना शुरूकरदिया, जिससे उनका सहज रूप देहधारी होगया। सत् कैवल परमात्मा Govindji - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ સાહેબ. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - सन केवल र्घाहेब அ< अद्वैता द्वैत नर्ख्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अंग ஈகனக कीऐ आगु  वरतत ऐक उपजकी। जब हम वरती हवित रुपजकी।।१४ पीछे विखरीत भये a్alG ஞவி அஅடுad5G 4(அ ed ஒீ@ Belusej8.ueelai @duriovpu21-1 वृत्ति हैषभथु कानी. सार कुवेरस्वामीने पहले कहा थाकि प्रत्येक अंश, चाहेवह सामान्य हो, विशेषहोया सर्वोच्च, का उद्गम ओर मूल एकही केवलधाम हे। इसके उद्गम केवाद, सभी अंश ब्रह्मभूमि र्मेविलीन हो गए। कैवलथाम से अलग होने परवे सभी शुद्ध अविकसित रूपर्मेथे। त्रह्मांउर्मे आनेकेवाद, अंशोने स्थूल, सूक्ष्म, कारण महाकारण ओर सर्वोच्चकारण पिं्ठोंके संपर्कर्मेंआनेकेकारण वस्तुर्ओंका अनुभवकरना शुरूकरदिया, जिससे उनका सहज रूप देहधारी होगया। सत् कैवल परमात्मा Govindiu सन केवल र्घाहेब அ< अद्वैता द्वैत नर्ख्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अंग ஈகனக कीऐ आगु  वरतत ऐक उपजकी। जब हम वरती हवित रुपजकी।।१४ पीछे विखरीत भये a్alG ஞவி அஅடுad5G 4(அ ed ஒீ@ Belusej8.ueelai @duriovpu21-1 वृत्ति हैषभथु कानी. सार कुवेरस्वामीने पहले कहा थाकि प्रत्येक अंश, चाहेवह सामान्य हो, विशेषहोया सर्वोच्च, का उद्गम ओर मूल एकही केवलधाम हे। इसके उद्गम केवाद, सभी अंश ब्रह्मभूमि र्मेविलीन हो गए। कैवलथाम से अलग होने परवे सभी शुद्ध अविकसित रूपर्मेथे। त्रह्मांउर्मे आनेकेवाद, अंशोने स्थूल, सूक्ष्म, कारण महाकारण ओर सर्वोच्चकारण पिं्ठोंके संपर्कर्मेंआनेकेकारण वस्तुर्ओंका अनुभवकरना शुरूकरदिया, जिससे उनका सहज रूप देहधारी होगया। सत् कैवल परमात्मा Govindiu - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ પરમાત્મા. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - ಟರಪ್ರರೊತ सव अद्वैता द्वैत नर्खेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अँग ११३ तेही अरस ऐही कीये जो बरनन  रहन सदाई। खुदके पुनि पुनि प्रसरन करीत कालको , जबँते हवील उमाई।।१३ ٥١٩١٤ ते रथंतशीक्षनु % वर्ऐॉन g्र्थु तभi gता uौd २EIने भाटे २७ छे. %्या२ Gभञ 4el थाथ छे. त्थारे त्थारे sloनl ५२ा२े 8२ छे. ٦ जेसा कि ऊपर वर्णित हे, महाशून्य र्में स्थित महान कैवलघाम ्मे, परम केवल पुरुष, महान आत्मा के रूप र्मे, पूर्ण चेतना र्में| शाश्वत रूप से निवास करते हे। जब भी वे उत्तेजित होते ्हेॅ॰ वे अपने शुद्घ संकल्प के ब्रह्मांड की यात्रा करते ्हे। साथ बारबार सत् कैवल परमात्मा Govindji ಟರಪ್ರರೊತ सव अद्वैता द्वैत नर्खेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अँग ११३ तेही अरस ऐही कीये जो बरनन  रहन सदाई। खुदके पुनि पुनि प्रसरन करीत कालको , जबँते हवील उमाई।।१३ ٥١٩١٤ ते रथंतशीक्षनु % वर्ऐॉन g्र्थु तभi gता uौd २EIने भाटे २७ छे. %्या२ Gभञ 4el थाथ छे. त्थारे त्थारे sloनl ५२ा२े 8२ छे. ٦ जेसा कि ऊपर वर्णित हे, महाशून्य र्में स्थित महान कैवलघाम ्मे, परम केवल पुरुष, महान आत्मा के रूप र्मे, पूर्ण चेतना र्में| शाश्वत रूप से निवास करते हे। जब भी वे उत्तेजित होते ्हेॅ॰ वे अपने शुद्घ संकल्प के ब्रह्मांड की यात्रा करते ्हे। साथ बारबार सत् कैवल परमात्मा Govindji - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ સાહેબ. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - Il आध सक्रत स्वराज करू्पेश केवल करताववे दृसामि उवाचछ @3F424 அவ்த पडयपढ में र्साम्रथ सदू जेही; ಿತಹತೊ ಋಶಔಕತiದ; uತ ಔತವ ಕತಣ II3Il   =ச QQeQaeeeiaas elle-dc Gial Ba ؟٤؟٤ 284 2184] ककीशडदाा eघीथे भने %७ शभर्थ Rூப Ga க &ஸ aaono ಊ38 91 6.533 [31ವಞ3 सना कैवल साहेब शुथ प्रभात ಊಂಣೊಞರu3] Govidji Il आध सक्रत स्वराज करू्पेश केवल करताववे दृसामि उवाचछ @3F424 அவ்த पडयपढ में र्साम्रथ सदू जेही; ಿತಹತೊ ಋಶಔಕತiದ; uತ ಔತವ ಕತಣ II3Il   =ச QQeQaeeeiaas elle-dc Gial Ba ؟٤؟٤ 284 2184] ककीशडदाा eघीथे भने %७ शभर्थ Rூப Ga க &ஸ aaono ಊ38 91 6.533 [31ವಞ3 सना कैवल साहेब शुथ प्रभात ಊಂಣೊಞರu3] Govidji - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ પરમાત્મા. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - GஏSவேடுஏ 3@R@) अद्वैता द्वैत दर्खेद चिंतामणी ग्नथ अखँंड कैवलधामकी सत्य पहैच्चानकौ अँगः१३ निहालन काल सहीत कीन कोई। ज्तबा दवर्नहुतशेून्युननी  जब उतईत कोउ सरजन , ऐकल अरस अमोई। ।१२ ಖಸ್ತ್ರರ[ಠ 92u2 iaeds 8 eaedlsui sla &led] [ತ[@ u[@ Sl೫ ಭ3] ಠ (9 ೧೮[೩ ತ[ಇ್ಡನ೫iಿ' 2<- 2430 ی<لام ೩೦- (ತ[2 ೫S@[ 450} सार मृत्युलोक र्मे किसी भी प्रकार की अचल जब या चल वस्तु का निर्माण नर्ही ಕ ೯್ಕ" q चौदह लोकों के देवी देवताओं  और उन सभी पर शासन करने वाले समय र्मे, किसी भी प्राणी का निर्माण नर्ही हुआ। [ೇಕೆಗ್] तब महाशून्य र्मे, कैवल पुरुष चेतना के रूप र्में कैवललोक र्में अकेले थे। सतू केवल परमात्मा Govundju GஏSவேடுஏ 3@R@) अद्वैता द्वैत दर्खेद चिंतामणी ग्नथ अखँंड कैवलधामकी सत्य पहैच्चानकौ अँगः१३ निहालन काल सहीत कीन कोई। ज्तबा दवर्नहुतशेून्युननी  जब उतईत कोउ सरजन , ऐकल अरस अमोई। ।१२ ಖಸ್ತ್ರರ[ಠ 92u2 iaeds 8 eaedlsui sla &led] [ತ[@ u[@ Sl೫ ಭ3] ಠ (9 ೧೮[೩ ತ[ಇ್ಡನ೫iಿ' 2<- 2430 ی<لام ೩೦- (ತ[2 ೫S@[ 450} सार मृत्युलोक र्मे किसी भी प्रकार की अचल जब या चल वस्तु का निर्माण नर्ही ಕ ೯್ಕ" q चौदह लोकों के देवी देवताओं  और उन सभी पर शासन करने वाले समय र्मे, किसी भी प्राणी का निर्माण नर्ही हुआ। [ೇಕೆಗ್] तब महाशून्य र्मे, कैवल पुरुष चेतना के रूप र्में कैवललोक र्में अकेले थे। सतू केवल परमात्मा Govundju - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ સાહેબ. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - कवष रक्रत स्वरज कल्पेश केवल कर्ता त्व दसाभि ]० कृपासिंधु उवाचः अज उमीयापति द्वार नंदके, गये दरस वछ हरना; तेतो नही कोई गये न आये, वरथा कीये विवखा॰ II3 [ भावर्थु @lellleeigleiae2s] 83[೯t[  Is8aru &9 3 cell d2 %i52 -e1 / ے3 दर्शन ४२वा तथा वाछिश्डाजुी @२@ा 8२व० जथा Gdl ஒ1 dt  கினஆீ ஒி 2ி sSulle. 529 ಅ. वर्रन ২০ @ গপত 9থাা 422193 eid 530121131? GGCGTEI(ేGT शुकष ध्रकषान आपका दिन आनंदित रहे। Govindji कवष रक्रत स्वरज कल्पेश केवल कर्ता त्व दसाभि ]० कृपासिंधु उवाचः अज उमीयापति द्वार नंदके, गये दरस वछ हरना; तेतो नही कोई गये न आये, वरथा कीये विवखा॰ II3 [ भावर्थु @lellleeigleiae2s] 83[೯t[  Is8aru &9 3 cell d2 %i52 -e1 / ے3 दर्शन ४२वा तथा वाछिश्डाजुी @२@ा 8२व० जथा Gdl ஒ1 dt  கினஆீ ஒி 2ி sSulle. 529 ಅ. वर्रन ২০ @ গপত 9থাা 422193 eid 530121131? GGCGTEI(ేGT शुकष ध्रकषान आपका दिन आनंदित रहे। Govindji - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ પરમાત્મા. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - GஏSபேபடுஏ Qid अद्वेना द्वेन नर्खेद चिंनामणी घ्रीथ अ्खंड कैवलधामकी सत्य पहनैचानकौ औँग४१३ ிஈரி जमी आसमान सक्त सेती। पंचतत्व गुँनतीसेती१ पुनि पुरुष नही ज्योत कुन ٥١٩١٤ yed, ~l1- slecl-W ui2l dral, 7q1 2131, ?l8 &1Ga &I- %l 2424] নিইওণ  வழு வஞfவகுட ~ Gலட@் alel-l d el vg1-l?| Yereev सार 3f सृष्टि के आरंभ र्मे, यदि पृथ्वी, जल, वायु और आकाश सहित पोँच महा तर्त्वों की रचना के बाद रजस, सतोस और तमोगुणी ब्रह्मा, विष्णु ओर महेश, साथ ही आर्दिम शक्ति महामाया और ज्योति के रंगहीन रूप की रचना न हुई हो, तो अन्य सामान्य तर्त्वों और विभिन्न रचनार्ओं का क्या औचित्य है? सत कैवल परमात्मा Govidi GஏSபேபடுஏ Qid अद्वेना द्वेन नर्खेद चिंनामणी घ्रीथ अ्खंड कैवलधामकी सत्य पहनैचानकौ औँग४१३ ிஈரி जमी आसमान सक्त सेती। पंचतत्व गुँनतीसेती१ पुनि पुरुष नही ज्योत कुन ٥١٩١٤ yed, ~l1- slecl-W ui2l dral, 7q1 2131, ?l8 &1Ga &I- %l 2424] নিইওণ  வழு வஞfவகுட ~ Gலட@் alel-l d el vg1-l?| Yereev सार 3f सृष्टि के आरंभ र्मे, यदि पृथ्वी, जल, वायु और आकाश सहित पोँच महा तर्त्वों की रचना के बाद रजस, सतोस और तमोगुणी ब्रह्मा, विष्णु ओर महेश, साथ ही आर्दिम शक्ति महामाया और ज्योति के रंगहीन रूप की रचना न हुई हो, तो अन्य सामान्य तर्त्वों और विभिन्न रचनार्ओं का क्या औचित्य है? सत कैवल परमात्मा Govidi - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ સાહેબ. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - क॒ध एक्त Cवरज करूणेश केवल करता त्व दृक्षाभ्नि `D कृपाद्षिदटक उवाच ೆತಹ ಶಾಕನತ ನT; अज उमीयापति तेतो नही कोई गये न धये॰ वॅट्था कीये विवखा. `२[ थावार्थ @ೊ aeBeims3u ஜமீ 884pu 8 3 &al deu &52 d-u / & Seeீgg GQhS 839 @ಋ ಖdಿಬಟೊಟಟಾ cతstaజ ఃdaEg శల SE 093 9ir 53ಖ 3lಇ3 [ सतू कैवल साहेव शुकष प्रभात आपका दिन मंगरलमय रहे। Govindji क॒ध एक्त Cवरज करूणेश केवल करता त्व दृक्षाभ्नि `D कृपाद्षिदटक उवाच ೆತಹ ಶಾಕನತ ನT; अज उमीयापति तेतो नही कोई गये न धये॰ वॅट्था कीये विवखा. `२[ थावार्थ @ೊ aeBeims3u ஜமீ 884pu 8 3 &al deu &52 d-u / & Seeீgg GQhS 839 @ಋ ಖdಿಬಟೊಟಟಾ cతstaజ ఃdaEg శల SE 093 9ir 53ಖ 3lಇ3 [ सतू कैवल साहेव शुकष प्रभात आपका दिन मंगरलमय रहे। Govindji - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ પરમાત્મા. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - सन कैवल स्ाहेब जन्मासक अद्वैना द्वैन दर्खेद चिंन्ायणी छ्रीथ अर्खंड कैवलधामकी पहुचानको औंग:१३ फह्ा धलुज धस्थान ६नोपक धचन ढूना ६दू सीई धखिल ६श वितपनक वत्न् GIFErGEu% எனி ٥٩١٤ dஅஃ@ ஆழவ அஞூவுவு அவி ஒடூ  02 গ৫[ণ '@rz 28el &d eied-l | @ ೩[9ತv dd~ 3ல இ  அழூவூ 1(2 ஆிடு ஒவடு1 9 सार महान कैवलधाम ब्रह्मांड के मध्य में स्थित एक विशाल, अचल और शाश्वत स्थान है। यह सभी का मूल निवास और जन्मस्थान हे, जिसर्में सामान्य , विशेष और अति विशेष अंश भी शामिल है। क्योकि सभी अंश कैवल कर्ता के छठे पहलू से उत्पन्न हुए हैं॰ कैवलधाम से ब्रह्मांड र्में आए है और महाप्रलय के दौरान कैवलधाम र्मे ही लौटकर विलीन हो जाएंगे | इसलिए, इसे सभी अंर्शों का मूल निवास स्थान माना जाता है। सतू कैवल परमात्मा Govindji सन कैवल स्ाहेब जन्मासक अद्वैना द्वैन दर्खेद चिंन्ायणी छ्रीथ अर्खंड कैवलधामकी पहुचानको औंग:१३ फह्ा धलुज धस्थान ६नोपक धचन ढूना ६दू सीई धखिल ६श वितपनक वत्न् GIFErGEu% எனி ٥٩١٤ dஅஃ@ ஆழவ அஞூவுவு அவி ஒடூ  02 গ৫[ণ '@rz 28el &d eied-l | @ ೩[9ತv dd~ 3ல இ  அழூவூ 1(2 ஆிடு ஒவடு1 9 सार महान कैवलधाम ब्रह्मांड के मध्य में स्थित एक विशाल, अचल और शाश्वत स्थान है। यह सभी का मूल निवास और जन्मस्थान हे, जिसर्में सामान्य , विशेष और अति विशेष अंश भी शामिल है। क्योकि सभी अंश कैवल कर्ता के छठे पहलू से उत्पन्न हुए हैं॰ कैवलधाम से ब्रह्मांड र्में आए है और महाप्रलय के दौरान कैवलधाम र्मे ही लौटकर विलीन हो जाएंगे | इसलिए, इसे सभी अंर्शों का मूल निवास स्थान माना जाता है। सतू कैवल परमात्मा Govindji - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ સાહેબ. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - Il आध सक्रत स्वराज कल्पेश केवल कर्ता ्त्व दमामि ]l ausషaqfaraTడad (~GuRI uRaees] ೩೮ 9 53*181  (eid [3la ೬ರರಸ್ೊತರತೂ ಪ@ಿರನಿಸ;, अनहुनकी अरचीढी _ उपमा सोइ క్రై@ెశేా: নীনব্ধী আন তনাব্ষ্ট জুবুতঙ্কৎ; ভষী ফ্রনউড়্টু; IIহII Cச $೫ೆ @9L  5[ಸ Guಬ ೫[u1 @ அழS3் 9 এগ্া ঐ ২৪্  গুম্ভীEন 89 ಈ[ 2aldcl ಅ ढैभा ट्र्धनी ५७८ टेशभात्रा थागनी नथी 111 dell d ccld-l 2u% 43 ddl ald g %elg} ৪ ঈথী ২থথ ২৫থী লডি 42123 ela 530121312 ನೊತರರನೂತೆ शुकष प्रभ्रात आपका दिन आनंदित रहे। Govindji Il आध सक्रत स्वराज कल्पेश केवल कर्ता ्त्व दमामि ]l ausషaqfaraTడad (~GuRI uRaees] ೩೮ 9 53*181  (eid [3la ೬ರರಸ್ೊತರತೂ ಪ@ಿರನಿಸ;, अनहुनकी अरचीढी _ उपमा सोइ క్రై@ెశేా: নীনব্ধী আন তনাব্ষ্ট জুবুতঙ্কৎ; ভষী ফ্রনউড়্টু; IIহII Cச $೫ೆ @9L  5[ಸ Guಬ ೫[u1 @ அழS3் 9 এগ্া ঐ ২৪্  গুম্ভীEন 89 ಈ[ 2aldcl ಅ ढैभा ट्र्धनी ५७८ टेशभात्रा थागनी नथी 111 dell d ccld-l 2u% 43 ddl ald g %elg} ৪ ঈথী ২থথ ২৫থী লডি 42123 ela 530121312 ನೊತರರನೂತೆ शुकष प्रभ्रात आपका दिन आनंदित रहे। Govindji - ShareChat