ગોવિંદજી ઠાકોર
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ગોવિંદજી ઠાકોર
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सत् कैवल परमात्मा
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ પરમાત્મા #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - सत् कैवल साहेब अमव सव अद्वैता द्वैत न्र्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अंगः२६ बौद्री न्िीज उअई्त कही सबतयुनकरी तुँनिवे अंसकैही तेही६ नही उतईत कोउ कतॉ, करीत नवेर सबेही।।१६ ২ণ৭৪ सर्वनाथे नि%ख{ाध % Sहय[ ते%थiंतना [elllstalseleceelevislfent sgadsaistosdt 4ழ!9.<2வ नृथी तेनो @ सार कैवलधाम मेनिवास करने वाले केवल पुराण पुरुष वही हैंजिनका वर्णन पहले किया जा चुका हे।वे समस्त तर्त्वों ्में प्रथम हैेंऔर समस्त सृष्टि केमूल कारण हैें।वे सृष्टिसे पूर्व विद्यमान थे औरप्रलयकेसमयकेभी कारण हैं। अतःप्रलय केबादभीवे अकेलेही इस यात्रा के दौरान मृत्युलोक या रहेँगे । अतः देवलोकर्में हमारा कोई अन्य स्वामी नहीं है। कुबेरस्वामी ने सर्वथा न्यायसंगत निर्णय लेकरहर्में यहतथ्य दिखाया है। सत्ू कैवल परमात्मा सत् कैवल साहेब अमव सव अद्वैता द्वैत न्र्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अंगः२६ बौद्री न्िीज उअई्त कही सबतयुनकरी तुँनिवे अंसकैही तेही६ नही उतईत कोउ कतॉ, करीत नवेर सबेही।।१६ ২ণ৭৪ सर्वनाथे नि%ख{ाध % Sहय[ ते%थiंतना [elllstalseleceelevislfent sgadsaistosdt 4ழ!9.<2வ नृथी तेनो @ सार कैवलधाम मेनिवास करने वाले केवल पुराण पुरुष वही हैंजिनका वर्णन पहले किया जा चुका हे।वे समस्त तर्त्वों ्में प्रथम हैेंऔर समस्त सृष्टि केमूल कारण हैें।वे सृष्टिसे पूर्व विद्यमान थे औरप्रलयकेसमयकेभी कारण हैं। अतःप्रलय केबादभीवे अकेलेही इस यात्रा के दौरान मृत्युलोक या रहेँगे । अतः देवलोकर्में हमारा कोई अन्य स्वामी नहीं है। कुबेरस्वामी ने सर्वथा न्यायसंगत निर्णय लेकरहर्में यहतथ्य दिखाया है। सत्ू कैवल परमात्मा - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ સાહેબ. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - आध सक्रत स्वराज कर्पेश केवल कर्तः व्व दमामि ]० 55 9~49&;15; ఢొటరెటేడే জ धीक धीक धधम धचख्ज तुमक्रुट फसु ज्ग्त फनाइ. II६Il =ச @allesje Rleia:?s ढेवताथयी कृढ्ट्टा दी७५ क्दवदी ६्नृदिभषप्रीार्थिना ड२वू खव्वे சஹீ்ீ 9 அஒ2 ஒவு ಅ ?ತಖಿನೂ शुधी 818447,4a;uaawiia 7u 83 ್ಣೇಣನ್ಟ  m518r ? Mಷm3 2ಷ್ಐ 84R e cl? 24727384,821 5841? 242eefu/ eul[+a a3 Stఊome aREII वाघद् ஒ க3Sஸிவ3 யணலிதீிஜய்சீat argeaiaటక tర 42123 elid s3r1310213 साना कैवल र्ाहेब 99ಾ [ಳuG आपका दिन मंगलमय रहे। Govindji आध सक्रत स्वराज कर्पेश केवल कर्तः व्व दमामि ]० 55 9~49&;15; ఢొటరెటేడే জ धीक धीक धधम धचख्ज तुमक्रुट फसु ज्ग्त फनाइ. II६Il =ச @allesje Rleia:?s ढेवताथयी कृढ्ट्टा दी७५ क्दवदी ६्नृदिभषप्रीार्थिना ड२वू खव्वे சஹீ்ீ 9 அஒ2 ஒவு ಅ ?ತಖಿನೂ शुधी 818447,4a;uaawiia 7u 83 ್ಣೇಣನ್ಟ  m518r ? Mಷm3 2ಷ್ಐ 84R e cl? 24727384,821 5841? 242eefu/ eul[+a a3 Stఊome aREII वाघद् ஒ க3Sஸிவ3 யணலிதீிஜய்சீat argeaiaటక tర 42123 elid s3r1310213 साना कैवल र्ाहेब 99ಾ [ಳuG आपका दिन मंगलमय रहे। Govindji - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ પરમાત્મા. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - कैवल स्ाहेब CGI अमत ঐম্যল) अद्वैता द्वैत नर्ख्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहेचानको अंग४१३ जवते ऐक भोवनके उतपन , आपन अंश सवेही। पुनि उपावन ऐक पति निज, वतनही ऐक तवेही।११५ ~కele थेzcl भाटे खापएो Aधl थेs% धlभभi Gcua थथेढा छीथे. वषी Gc५a &२न२ ध९० uglelse@.deladjdd-elsc0 HR कुबेरस्वामी कहते हेकिइसी कारण से, सभी तत्व, जिनर्मेंवे स्वयं भीशामिल हैं, एकही केवलधाम से उत्पन्न हुए हैं। इसके इन सभी के सृजनकर्ता स्वयं ঔলানা; कैवलकर्ताही हैं। अतः, प्रत्येकतत्वका मूल स्थान एकही औरनिश्चित है। ऐसा कहाजा सकता है। सत्ू कैवल परमात्मा कैवल स्ाहेब CGI अमत ঐম্যল) अद्वैता द्वैत नर्ख्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहेचानको अंग४१३ जवते ऐक भोवनके उतपन , आपन अंश सवेही। पुनि उपावन ऐक पति निज, वतनही ऐक तवेही।११५ ~కele थेzcl भाटे खापएो Aधl थेs% धlभभi Gcua थथेढा छीथे. वषी Gc५a &२न२ ध९० uglelse@.deladjdd-elsc0 HR कुबेरस्वामी कहते हेकिइसी कारण से, सभी तत्व, जिनर्मेंवे स्वयं भीशामिल हैं, एकही केवलधाम से उत्पन्न हुए हैं। इसके इन सभी के सृजनकर्ता स्वयं ঔলানা; कैवलकर्ताही हैं। अतः, प्रत्येकतत्वका मूल स्थान एकही औरनिश्चित है। ऐसा कहाजा सकता है। सत्ू कैवल परमात्मा - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ સાહેબ. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - Il आध सक्रत स्वराज करूपेश कैवल कर्ता त्वदमाभैि ]] ಮತಟ್ರತಾತ್ತಾ এ্ইঙ্ীড্ঙ্ঘঙ্ঞ্টজভীীক্টম্বভুভ্ঙ্ঘভ্ঐ্ট वीनढाकैजैह्ीवहीनविडडी ढीनकरुदुष्टवनायै॰ D५० ஸச @aleilieias| ద 24eq8-e-feqgeuis@si-I/ eue4e 8e-detiadaqeleda8qe81 இிதவீதிலிBி Sி ிக3e? stgediassru31*12/ केवल साहेब I शुकष ध्रथषातन आपका दिन मंगलमय रहे। Gouudu Il आध सक्रत स्वराज करूपेश कैवल कर्ता त्वदमाभैि ]] ಮತಟ್ರತಾತ್ತಾ এ্ইঙ্ীড্ঙ্ঘঙ্ঞ্টজভীীক্টম্বভুভ্ঙ্ঘভ্ঐ্ট वीनढाकैजैह्ीवहीनविडडी ढीनकरुदुष्टवनायै॰ D५० ஸச @aleilieias| ద 24eq8-e-feqgeuis@si-I/ eue4e 8e-detiadaqeleda8qe81 இிதவீதிலிBி Sி ிக3e? stgediassru31*12/ केवल साहेब I शुकष ध्रथषातन आपका दिन मंगलमय रहे। Gouudu - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ પરમાત્મા. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર વ
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - सन कैवल स्ाहेब ज्छोसक 4 - अद्वैता द्वैत नर्ख्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अंग মত্মক্লব্কীক্ : कीऐ आगु  वरतत ऐक उपजकी। जब हम वरती हवित रुपजकी।।१४ पीछे विखरीत भये eIgale %ेथी भें २ुगाG सर्वनु Gत्पत्ति थाने वतन थेs% छेथेभ 8ह्युं छे. पछीँथी शौ विख्शर्छ गथाा थ्यने q@8s44e- | सार कुवेरस्वामी ने पहले कहाथाकिप्रत्येक अंश, चाहेवह सामान्य हो, विशेषहोयासर्वोच्च, का उद्गम ओरमूल एकही केवलधाम हे। इसके उद्गम केवाद, सभी अंश ब्रह्मभूमिर्मेविलीन हो गए। केवलधाम से अलग होने परवे सभी शुद्ध, अविकसित रूपर्मेथे। ब्रह्मांउर्मे आनेकेवाद, अंशोने स्थूल, सूक्ष्म, कारण, महाकारण ओर सर्वोच्चकारण पिं्डों केसंपर्कर्में आनेकेकारण वस्तुर्ओंका अनुभवकरना शुरूकरदिया, जिससे उनका सहज रूप देहधारी होगया। सत् कैवल परमात्मा Govindji सन कैवल स्ाहेब ज्छोसक 4 - अद्वैता द्वैत नर्ख्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अंग মত্মক্লব্কীক্ : कीऐ आगु  वरतत ऐक उपजकी। जब हम वरती हवित रुपजकी।।१४ पीछे विखरीत भये eIgale %ेथी भें २ुगाG सर्वनु Gत्पत्ति थाने वतन थेs% छेथेभ 8ह्युं छे. पछीँथी शौ विख्शर्छ गथाा थ्यने q@8s44e- | सार कुवेरस्वामी ने पहले कहाथाकिप्रत्येक अंश, चाहेवह सामान्य हो, विशेषहोयासर्वोच्च, का उद्गम ओरमूल एकही केवलधाम हे। इसके उद्गम केवाद, सभी अंश ब्रह्मभूमिर्मेविलीन हो गए। केवलधाम से अलग होने परवे सभी शुद्ध, अविकसित रूपर्मेथे। ब्रह्मांउर्मे आनेकेवाद, अंशोने स्थूल, सूक्ष्म, कारण, महाकारण ओर सर्वोच्चकारण पिं्डों केसंपर्कर्में आनेकेकारण वस्तुर्ओंका अनुभवकरना शुरूकरदिया, जिससे उनका सहज रूप देहधारी होगया। सत् कैवल परमात्मा Govindji - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ સાહેબ. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - सन केवल र्घाहेब அ< अद्वैता द्वैत नर्ख्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अंग ஈகனக कीऐ आगु  वरतत ऐक उपजकी। जब हम वरती हवित रुपजकी।।१४ पीछे विखरीत भये a్alG ஞவி அஅடுad5G 4(அ ed ஒீ@ Belusej8.ueelai @duriovpu21-1 वृत्ति हैषभथु कानी. सार कुवेरस्वामीने पहले कहा थाकि प्रत्येक अंश, चाहेवह सामान्य हो, विशेषहोया सर्वोच्च, का उद्गम ओर मूल एकही केवलधाम हे। इसके उद्गम केवाद, सभी अंश ब्रह्मभूमि र्मेविलीन हो गए। कैवलथाम से अलग होने परवे सभी शुद्ध अविकसित रूपर्मेथे। त्रह्मांउर्मे आनेकेवाद, अंशोने स्थूल, सूक्ष्म, कारण महाकारण ओर सर्वोच्चकारण पिं्ठोंके संपर्कर्मेंआनेकेकारण वस्तुर्ओंका अनुभवकरना शुरूकरदिया, जिससे उनका सहज रूप देहधारी होगया। सत् कैवल परमात्मा Govindiu सन केवल र्घाहेब அ< अद्वैता द्वैत नर्ख्वेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अंग ஈகனக कीऐ आगु  वरतत ऐक उपजकी। जब हम वरती हवित रुपजकी।।१४ पीछे विखरीत भये a్alG ஞவி அஅடுad5G 4(அ ed ஒீ@ Belusej8.ueelai @duriovpu21-1 वृत्ति हैषभथु कानी. सार कुवेरस्वामीने पहले कहा थाकि प्रत्येक अंश, चाहेवह सामान्य हो, विशेषहोया सर्वोच्च, का उद्गम ओर मूल एकही केवलधाम हे। इसके उद्गम केवाद, सभी अंश ब्रह्मभूमि र्मेविलीन हो गए। कैवलथाम से अलग होने परवे सभी शुद्ध अविकसित रूपर्मेथे। त्रह्मांउर्मे आनेकेवाद, अंशोने स्थूल, सूक्ष्म, कारण महाकारण ओर सर्वोच्चकारण पिं्ठोंके संपर्कर्मेंआनेकेकारण वस्तुर्ओंका अनुभवकरना शुरूकरदिया, जिससे उनका सहज रूप देहधारी होगया। सत् कैवल परमात्मा Govindiu - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ પરમાત્મા. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - ಟರಪ್ರರೊತ सव अद्वैता द्वैत नर्खेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अँग ११३ तेही अरस ऐही कीये जो बरनन  रहन सदाई। खुदके पुनि पुनि प्रसरन करीत कालको , जबँते हवील उमाई।।१३ ٥١٩١٤ ते रथंतशीक्षनु % वर्ऐॉन g्र्थु तभi gता uौd २EIने भाटे २७ छे. %्या२ Gभञ 4el थाथ छे. त्थारे त्थारे sloनl ५२ा२े 8२ छे. ٦ जेसा कि ऊपर वर्णित हे, महाशून्य र्में स्थित महान कैवलघाम ्मे, परम केवल पुरुष, महान आत्मा के रूप र्मे, पूर्ण चेतना र्में| शाश्वत रूप से निवास करते हे। जब भी वे उत्तेजित होते ्हेॅ॰ वे अपने शुद्घ संकल्प के ब्रह्मांड की यात्रा करते ्हे। साथ बारबार सत् कैवल परमात्मा Govindji ಟರಪ್ರರೊತ सव अद्वैता द्वैत नर्खेद चिंतामणी ग्रंथ अखंड कैवलधामकी सत्य पहचानको अँग ११३ तेही अरस ऐही कीये जो बरनन  रहन सदाई। खुदके पुनि पुनि प्रसरन करीत कालको , जबँते हवील उमाई।।१३ ٥١٩١٤ ते रथंतशीक्षनु % वर्ऐॉन g्र्थु तभi gता uौd २EIने भाटे २७ छे. %्या२ Gभञ 4el थाथ छे. त्थारे त्थारे sloनl ५२ा२े 8२ छे. ٦ जेसा कि ऊपर वर्णित हे, महाशून्य र्में स्थित महान कैवलघाम ्मे, परम केवल पुरुष, महान आत्मा के रूप र्मे, पूर्ण चेतना र्में| शाश्वत रूप से निवास करते हे। जब भी वे उत्तेजित होते ्हेॅ॰ वे अपने शुद्घ संकल्प के ब्रह्मांड की यात्रा करते ्हे। साथ बारबार सत् कैवल परमात्मा Govindji - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ સાહેબ. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - Il आध सक्रत स्वराज करू्पेश केवल करताववे दृसामि उवाचछ @3F424 அவ்த पडयपढ में र्साम्रथ सदू जेही; ಿತಹತೊ ಋಶಔಕತiದ; uತ ಔತವ ಕತಣ II3Il   =ச QQeQaeeeiaas elle-dc Gial Ba ؟٤؟٤ 284 2184] ककीशडदाा eघीथे भने %७ शभर्थ Rூப Ga க &ஸ aaono ಊ38 91 6.533 [31ವಞ3 सना कैवल साहेब शुथ प्रभात ಊಂಣೊಞರu3] Govidji Il आध सक्रत स्वराज करू्पेश केवल करताववे दृसामि उवाचछ @3F424 அவ்த पडयपढ में र्साम्रथ सदू जेही; ಿತಹತೊ ಋಶಔಕತiದ; uತ ಔತವ ಕತಣ II3Il   =ச QQeQaeeeiaas elle-dc Gial Ba ؟٤؟٤ 284 2184] ककीशडदाा eघीथे भने %७ शभर्थ Rூப Ga க &ஸ aaono ಊ38 91 6.533 [31ವಞ3 सना कैवल साहेब शुथ प्रभात ಊಂಣೊಞರu3] Govidji - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ પરમાત્મા. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - GஏSவேடுஏ 3@R@) अद्वैता द्वैत दर्खेद चिंतामणी ग्नथ अखँंड कैवलधामकी सत्य पहैच्चानकौ अँगः१३ निहालन काल सहीत कीन कोई। ज्तबा दवर्नहुतशेून्युननी  जब उतईत कोउ सरजन , ऐकल अरस अमोई। ।१२ ಖಸ್ತ್ರರ[ಠ 92u2 iaeds 8 eaedlsui sla &led] [ತ[@ u[@ Sl೫ ಭ3] ಠ (9 ೧೮[೩ ತ[ಇ್ಡನ೫iಿ' 2<- 2430 ی<لام ೩೦- (ತ[2 ೫S@[ 450} सार मृत्युलोक र्मे किसी भी प्रकार की अचल जब या चल वस्तु का निर्माण नर्ही ಕ ೯್ಕ" q चौदह लोकों के देवी देवताओं  और उन सभी पर शासन करने वाले समय र्मे, किसी भी प्राणी का निर्माण नर्ही हुआ। [ೇಕೆಗ್] तब महाशून्य र्मे, कैवल पुरुष चेतना के रूप र्में कैवललोक र्में अकेले थे। सतू केवल परमात्मा Govundju GஏSவேடுஏ 3@R@) अद्वैता द्वैत दर्खेद चिंतामणी ग्नथ अखँंड कैवलधामकी सत्य पहैच्चानकौ अँगः१३ निहालन काल सहीत कीन कोई। ज्तबा दवर्नहुतशेून्युननी  जब उतईत कोउ सरजन , ऐकल अरस अमोई। ।१२ ಖಸ್ತ್ರರ[ಠ 92u2 iaeds 8 eaedlsui sla &led] [ತ[@ u[@ Sl೫ ಭ3] ಠ (9 ೧೮[೩ ತ[ಇ್ಡನ೫iಿ' 2<- 2430 ی<لام ೩೦- (ತ[2 ೫S@[ 450} सार मृत्युलोक र्मे किसी भी प्रकार की अचल जब या चल वस्तु का निर्माण नर्ही ಕ ೯್ಕ" q चौदह लोकों के देवी देवताओं  और उन सभी पर शासन करने वाले समय र्मे, किसी भी प्राणी का निर्माण नर्ही हुआ। [ೇಕೆಗ್] तब महाशून्य र्मे, कैवल पुरुष चेतना के रूप र्में कैवललोक र्में अकेले थे। सतू केवल परमात्मा Govundju - ShareChat
શુભ સવાર ના સત્ કૈવલ સાહેબ. #📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ પરમગુરૂ શ્રીમંત કરુણાસાગર.
📝આધ્યાત્મિક ગુરૂ - कवष रक्रत स्वरज कल्पेश केवल कर्ता त्व दसाभि ]० कृपासिंधु उवाचः अज उमीयापति द्वार नंदके, गये दरस वछ हरना; तेतो नही कोई गये न आये, वरथा कीये विवखा॰ II3 [ भावर्थु @lellleeigleiae2s] 83[೯t[  Is8aru &9 3 cell d2 %i52 -e1 / ے3 दर्शन ४२वा तथा वाछिश्डाजुी @२@ा 8२व० जथा Gdl ஒ1 dt  கினஆீ ஒி 2ி sSulle. 529 ಅ. वर्रन ২০ @ গপত 9থাা 422193 eid 530121131? GGCGTEI(ేGT शुकष ध्रकषान आपका दिन आनंदित रहे। Govindji कवष रक्रत स्वरज कल्पेश केवल कर्ता त्व दसाभि ]० कृपासिंधु उवाचः अज उमीयापति द्वार नंदके, गये दरस वछ हरना; तेतो नही कोई गये न आये, वरथा कीये विवखा॰ II3 [ भावर्थु @lellleeigleiae2s] 83[೯t[  Is8aru &9 3 cell d2 %i52 -e1 / ے3 दर्शन ४२वा तथा वाछिश्डाजुी @२@ा 8२व० जथा Gdl ஒ1 dt  கினஆீ ஒி 2ி sSulle. 529 ಅ. वर्रन ২০ @ গপত 9থাা 422193 eid 530121131? GGCGTEI(ేGT शुकष ध्रकषान आपका दिन आनंदित रहे। Govindji - ShareChat