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केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई है।राज्य विधानसभा ने भी इस प्रस्ताव को पहले सर्वसम्मति से पारित किया था। अब इसे लागू करने के लिए संविधान में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रस्ताव के अनुसार, “केरलम” नाम राज्य की मलयालम भाषा में प्रचलित रूप को दर्शाता है।इस बदलाव को भाषा और सांस्कतिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।वहीं, इस मुद्दे पर राजनीतिक और भाषाई स्तर पर चर्चा भी जारी है।🙏 #🥰मोटिवेशन वीडियो #🌞 Good Morning🌞 ##viral #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡
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क्रिकेटर रिंकू सिंह जी के पिताजी का निधन अत्यंत दुखद है।
एक पिता की ज़िद ने अपने बेटे को बनाया स्टार क्रिकेटर।
एक पिता की प्रेरणादायक कहानी का विडियो आप सभी तुरंत देखिए।😭🫡🙏
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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ.यह दिवस हर साल 28 फरवरी को मनाया जाता है.राष्ट्रीय विज्ञान दिवस हम लोग इसलिए मनाते है क्योंकि इस दिन रमन इफैक्ट नाम की वैज्ञानिक खोज हुई थी जिसकी खोज महान वैज्ञानिक सर सी वी रमन जी ने किया था जो प्रकाश की फोटोन थ्योरी से जुड़ी एक अहम खोज थी जिसकी पूरी दुनिया लोहा मानती है इसलिए आप को नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। 🙏🔭National Science Day 🔭 🙏
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भारत माता के वीर सपूत एवं क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद जी के 95वे बलिदान दिवस पर मैं आप को कोटिश: नमन करता हूं।
"मैं मर जाऊं तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना,लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना।"
भारत मां के सपूत की कहानी आप सभी जरुर देखिए।👇👇👇🙏🇮🇳शत् शत् नमन 🇮🇳🙏 ##viral #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🌞 Good Morning🌞 #👍 डर के आगे जीत👌 #🥰मोटिवेशन वीडियो
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अमन और भाईचारे के इस भारतवर्ष में कुछ लोग ऐसे हैं जो गंगा जमुनी तहजीब को थामे हुए हैं। हम बात कर रहे हैं दिल्ली की रहने वाली नेहा भारती की।
धर्म से हिंदू होने के बाद भी नेहा भारती रमजान के पाक महीने में रोज़ अपने घर में इफ्तारी का सामान बनाती हैं, और उसे लेकर जामा मस्जिद पहुँच जाती हैं। हर रोजेदार को वह न केवल इफ्तार कराती हैं, बल्कि मोहब्बत और एकता की एक खास मिसाल भी पेश कर रही हैं।
नेहा भारती पुरानी दिल्ली की रहने वाली हैं और अपना एक NGO चलाती हैं। उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में M.A. किया है और वर्तमान में वह PhD की तैयारी कर रही हैं। बचपन से ही उन्हें लोगों की सेवा के लिए कुछ करने की इच्छा थी। इसलिए वह ऐसे नेक काम करती रहती हैं।
वह बताती हैं, "ऐसा करने से मुझे खुशी मिलती है, मैं रोज अलग-अलग चीजें बना कर लाती हूं, ताकि लोग एक चीज खा कर बोर न हो जाएं। जैसे कभी ब्रेड पकोड़ा, पकोड़े, चाउमीन और फ्रूट्स.. इसको बनाने में मेरे माता-पिता, भाई, बहन और दोस्त मदद करते हैं। सुबह से ही सभी मिलकर इफ्तारी का सामना बनाना शुरू कर देते हैं। शाम को इफ्तार से 30 मिनट पहले मैं जामा मस्जिद पहुंच जाती हूँ।"
नेहा बीते 3 सालों से यह काम कर रही हैं; और लगातार 30 दिनों तक लोगों को इफ्तारी करवाती हैं। वह दिन लगभग 300 -350 लोगों का पेट भरती हैं। वह चाहती हैं कि और भी युवा इस नेक काम में उनका साथ दें, ताकि हर देशवासी तक भाईचारे और एकता का पैगाम पहुँचे।
उनकी यह मुहिम सच में तारीफ के काबिल है! नेहा रोज़ाना अपने सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट डालती हैं, ताकि लोगों को यह संदेश दिया जा सके कि कोई कितनी भी नफरतों को बढ़ाने की कोशिश कर ले, लेकिन उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। लोगों के बीच मोहब्बतें जिंदा थी और रहेंगी।
" कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी,सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा,सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा।"🫡🫡🫡👍🇮🇳🙏🙏🙏
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भारत के पहले शिक्षा मंत्री, जो ‘ज्ञान’ को आज़ादी से भी बड़ा मानते थे!
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद — एक ऐसा नाम जिसने भारत को केवल आज़ादी ही नहीं, बल्कि एक सोच दी कि “विकास की असली कुंजी है शिक्षा।”
उन्होंने कम उम्र में ही धर्म, दर्शन, इतिहास और विज्ञान की गहरी समझ विकसित की। सर सैय्यद अहमद ख़ान की शिक्षा-नीति से प्रेरित होकर उन्होंने पश्चिमी विचारों का अध्ययन किया और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए ‘अल-हिलाल’ और ‘अल-बलाग़’ जैसे अख़बार निकाले। इन लेखों ने ब्रिटिश सत्ता को हिला दिया — और एक युवा मौलाना को बना दिया आज़ादी की आवाज़।
स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में, आज़ाद ने समझा कि देश की असली ताक़त उसके शिक्षित नागरिकों में है। उन्होंने 14 वर्ष की आयु तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की नींव रखी, जिसे आज भी भारत का संविधान मान्यता देता है। ग्रामीण इलाकों, महिलाओं और वयस्कों की शिक्षा को उन्होंने समान प्राथमिकता दी। उनके नेतृत्व में बने संस्थान केन्द्रीय शिक्षा संस्थान (Central Institute of Education), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), साहित्य अकादमी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) — आज भी देश के शिक्षा ढांचे की रीढ़ हैं।
1945 में उन्होंने भारत के पहले प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) की नींव रखी, और बेंगलुरु में Indian Institute of Science तथा दिल्ली विश्वविद्यालय में Faculty of Technology के विकास पर विशेष ज़ोर दिया। उनका मानना था कि “तकनीकी शिक्षा ही आधुनिक भारत का भविष्य तय करेगी।”
यही दृष्टि आज देश को वैज्ञानिक और तकनीकी ताक़त बना रही है। उनके योगदानों के सम्मान में, 1992 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया और 11 नवंबर उनके जन्मदिवस को मनाया जाने लगा ‘राष्ट्रीय शिक्षा दिवस’ के रूप में।
मौलाना आज़ाद केवल एक नेता नहीं, बल्कि उस भारत के पहले सपने देखने वाले थे जहाँ हर बच्चा पढ़ सके, सोच सके और अपने भविष्य को खुद गढ़ सके।🙏🙏🙏
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