🙏🇮🇳वंदे मातरम्🇮🇳🙏
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🙏🇮🇳🇮🇳जय विधान जय संविधान🇮🇳🇮🇳🙏
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आज 1 मई को भारत समेत दुनिया के कई देशों में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जा रहा है।दुनिया के कई देशों में 1 मई के दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है।भारत में भी कई राज्य सरकारें अपने यहां अवकाश ( May day holiday in India )घोषित करती हैं।भारत में मजदूर दिवस को श्रमिक दिवस (International Labour Day or May Day ),लेबर डे, मई दिवस, कामगार दिन,इंटरनेशनल वर्कर डे,वर्कर डे के नाम से भी जाना जाता है।भारत में मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत चेन्नई में 1 मई 1923 ई में हुई।भारत में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने 1 मई 1923 ई को मद्रास में इसकी शुरुआत की थी।यही वह मौका था जब पहली बार लाल रंग झंडा मजदूर दिवस के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया था।यह दिन दुनिया के मजदूरों और श्रमिक वर्ग को समर्पित है।आज मजदूरों व श्रमिक वर्ग की उपलब्धियों को और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को सलाम करने का दिन है।इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य मजदूरों की उपलब्धियों का सम्मान करना और उनके द्वारा किये गए योगदान को याद करना है।यह दिन मजदूरों को संगठित कर आपसी एकता मजबूत करने के लिए और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए भी है।यही वजह है कि बहुत सारे श्रमिक संगठन आज के दिन रैलियां निकालते हैं, सम्मेलन,सभाएं व कई तरह के कार्यक्रम करते हैं। दरअसल मजदूर दिवस की जड़े अमेरिका में 1886 में हुए एक श्रमिक आंदोलन से जुड़ी हैं। आज जो रोजाना काम करने के 8 घंटे निर्धारित हैं और सप्ताह में एक दिन की छुट्टी का अधिकार है, वो सब इसी आंदोलन की देन है।1880 का दशक अमेरिका समेत विभिन्न पश्चिमी देशों में औद्योगीकरण का दौर था।इस दौरान मजदूरों से 15-15 घंटे काम लिया जाता है।सूर्योदय से सूर्यास्त तक उन्हें काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।अमेरिका और कनाडा की ट्रेड यूनियनों के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑर्गेनाइज्ड ट्रेड्स एंड लेबर यूनियन ने तय किया कि मजदूर 1 मई,1886 ई के बाद रोजाना 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करेंगे।जब वो दिन आया तो अमेरिका के अलग-अलग शहरों में लाखों श्रमिक शोषण के खिलाफ हड़ताल पर चले गए।यहीं से बड़े श्रमिक आंदोलन की शुरुआत हुई।पूरे अमेरिका में श्रमिक सड़कों पर उतर आए थे।इस दौरान कुछ मजदूरों पर पुलिस ने गोली चला दी थी जिसमें कई मजदूरों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए।इसके बाद 1889 ई में जब पेरिस में इंटरनेशनल सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस हुई तो 1 मई को मजदूरों को समर्पित करने का फैसला किया।इस तरह धीरे-धीरे पूरी दुनिया में 1 मई को मजदूर दिवस या कामगार दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई।आज अगर कामकाजी वर्ग के लिए दिन में काम के 8 घंटे तय हैं तो वह अमेरिका में हुए इसी आंदोलन की ही देन है।🙏🙏श्रमेव जयते🙏🙏👩🔧👩🔧👩🔧
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Wishing you the Happiest Birthday the king of melodious song Arijit Singh Sirji.
हर दिल की धड़कन,अब दुनिया का NO-1
151 मिलियन से भी ज़्यादा फॉलोअर्स के साथ,अरिजीत सिंह अब Spotify पर दुनिया के नंबर 1 आर्टिस्ट बन चुके हैं।
उन्होंने न सिर्फ Taylor Swift (139.6M), Ed Sheeran (121M), Billie Eilish (114M), और The Weeknd (107.3M) जैसे इंटरनेशनल म्यूज़िक दिग्गजों को पीछे छोड़ा है,बल्कि एक बार फिर भारत के संगीत को ग्लोबल मैप पर सबसे ऊपर पहुंचा दिया है। 'Tum Hi Ho' से लेकर 'Kesariya' तक, अरिजीत की आवाज़ में जादू है जो सीधे दिल को छूता है।चाहे रोमांस हो,दर्द हो या सुकून उनके हर गाने में एक एहसास होता है।ये उपलब्धि सिर्फ एक सिंगर की नहीं, बल्कि हर उस भारतीय का गर्व है जो अपनी भाषा,संस्कृति और आवाज़ को दुनिया तक पहुंचते देखना चाहता है.आप को इस उपलब्धि के लिए मैं हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाइयां देता हूं।The king of Romantic songs.♥️Love u Arijit Sir.Congratulations for this achievement Sirji.♥️🎸🎙️🪕🎧🎻🎺🎷🥇🥇🥇🙏
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आज राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस है।
भारत की आत्मा गांवों में बसती है।
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प्रक्रिया पर ध्यान दीजिए,
परिणाम अपने आप आ जायेगा.
कोई था जो विकेटों के पीछे से मैच पलट देता था।
Such a cute bond between MSD Sir and Deepak Chahar...
What a memorable picture.
Love,Respect,Dedication ❤️❤️Love u Mahi Sir❤️❤️🇮🇳🙏
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विश्व पृथ्वी दिवस की मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। पृथ्वी को "नीला ग्रह" कहा जाता है क्योंकि इसकी सतह का लगभग 70% हिस्सा पानी से ढका हुआ है।पहला पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल, 1970 ई को मनाया गया और इसे आधुनिक पर्यावरण आंदोलन की शुरुआत का श्रेय दिया जाता है।पृथ्वी दिवस अब 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है,जिससे यह विश्व के सबसे बड़े धर्मनिरपेक्ष उत्सवों में से एक बन गया है।पृथ्वी दिवस पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्थन प्रदर्शित करने के लिए दुनिया भर में मनाया जाने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम है।यह हमें भविष्य की पीढ़ियों के लिए अपने ग्रह की सुरक्षा करने की हमारी ज़िम्मेदारी की याद दिलाता है।पृथ्वी दिवस पर्यावरण संबंधी मुद्दों जैसे प्रदूषण,वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन और लुप्तप्राय प्रजातियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह व्यक्तियों,समुदायों और सरकारों को पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित करता है।आज देश में पेड़ो को काटा जा रहा है ताकि फैक्ट्रियों और इमारतें बनाई जा सके लेकिन इसके बदले हम पृथ्वी की उर्वरता क्षमता और पेड़ों को काट कर मृदा अपरदन को बढ़ावा दे रहे हैं जो बिल्कुल भी ठीक नहीं है।अभी कुछ साल पहले ही हैदराबाद में विकास के नाम पर 400 एकड़ में फैले जंगल को काटा जा रहा था ताकि विकास हो सके लेकिन इस विकास के लिए न जाने कितने जानवरो और पेड़ो की बलि चढ़ा दी गई जो किसी भी तरह से ठीक नहीं है।अगर किसी का विनाश कर के विकास होगा तो यह बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है तथा यह निंदनीय भी है। तेलंगाना सरकार इसे तुरंत रोके ताकि जानवरो के आश्रय गृह को बचाया जा सके तथा मृदा अपरदन को भी रोका जा सके।यही कारण है कि भारत पर्यावरण प्रदूषण सूचकांक में बुरी तरह से 180 देशों की सूची में 176 वे स्थान पर है। पृथ्वी तभी बचेगी जब पेड़ पौधे बचेंगे और पेड़ पौधे बचेंगे तभी आक्सीजन मिलेगा और आक्सीजन मिलेगा तभी मनुष्य भी बचेगा अन्यथा सब कुछ नष्ट हो जाएगा।आइए हम सभी संकल्प ले कि इस कुकृत्य के खिलाफ आवाज उठाएंगे तथा सुन्दर लाल बहुगुणा जी जैसे एक बार फिर पेड़ो से चिपकर चिपको आंदोलन शुरू करेंगे तब जाकर पृथ्वी बचेगी और पर्यावरण शुद्ध होगा अन्यथा सब कुछ बर्बाद हो जाएगा।विश्व पृथ्वी दिवस 2026 की थीम "हमारी शक्ति, हमारा ग्रह" (Our Power, Our Planet) है।😭दुखद😭🌍🌍🌍🪐🪐🪐🌳🌳🌳🌴🌴🌴🙏World Earth Day🙏
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वैशाली रमेशबाबू ने फिर रचा इतिहास!
वैशाली ने दबाव, उम्मीदों और दुनिया के सबसे मजबूत खिलाड़ियों के बीच से रास्ता निकालते हुए FIDE Women’s Candidates Tournament 2026 का ख़िताब हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बन गयी हैं।
ये जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं है, ये उस सफर की कहानी है जो छोटे शहर के चेसबोर्ड से शुरू होकर दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुँचा।
वैशाली का बचपन शतरंज के बीच ही बीता—घर में इस खेल को सिर्फ खेल नहीं, बल्कि अनुशासन और सोचने की ताकत माना गया। उनके पिता ने उन्हें और उनके भाई प्रज्ञानानंद को इस खेल से जोड़ा, और माँ ने हर मुश्किल मोड़ पर साथ खड़े रहकर उन्हें संभाला, प्रेरित किया और मजबूत बनाया।
हर टूर्नामेंट, हर हार, हर जीत—इन सबने मिलकर उस खिलाड़ी को गढ़ा जिसने आज दुनिया को दिखा दिया कि भारत सिर्फ हिस्सा नहीं लेता इतिहास लिखता है और जब मंच पर “जन गण मन” गूंजा तो वो सिर्फ एक जीत का जश्न नहीं था,
वो एक पूरे देश की मेहनत, सपनों और विश्वास की आवाज़ थी।
यह पल भारतीय शतरंज के लिए एक नया अध्याय है… जहाँ भारत अब सिर्फ उभर नहीं रहा, बल्कि शिखर पर खड़ा है 🇮🇳🙏🙏🙏
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लोकप्रिय समाजवादी जननेता एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री रहे स्व चन्द्रशेखर जी की जयंती पर मैं आप को कोटिशः नमन तथा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।श्री चन्द्रशेखर जी का जन्म 17 अप्रैल 1927 ई को उत्तर प्रदेश के बागी बलिया जिले में स्थित इब्राहिमपट्टी गांव में एक किसान परिवार में हुआ था।आप ने कहा था कि, " नफरत की राजनीति से केवल सरकार बनाई जा सकती है देश नहीं।आप न तो केंद्र में मंत्री बने न ही राज्य मंत्री।आप बिना इन पदों को ग्रहण किए बिना सीधे देश के प्रधानमंत्री बने।आप ने राष्ट्रीय मसलों और जनता के सवालों पर सत्ता धारी सरकारों का विरोध किया और आवश्यक सहयोग भी।आप 1951 में सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकता बन गये।आप ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डीग्री प्राप्त की।आप 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।आप एक ऐसे ‘युवा तुर्क’ नेता के रूप में सामने आए जिसने दृढ़ता,साहस एवं ईमानदारी के साथ निहित स्वार्थ के खिलाफ लड़ाई लड़ी।आप 1969 में दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘यंग इंडियन’ के संस्थापक एवं संपादक थे।इसका सम्पादकीय अपने समय के विशिष्ट एवं बेहतरीन संपादनों में से एक हुआ करता था।आपातकाल (मार्च 1977 से जून 1975) के दौरान ‘यंग इंडियन’ को बंद कर दिया गया था।फरवरी 1989 से इसका पुनः नियमित रूप से प्रकाशन शुरू हुआ।आप इसके संपादकीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष थे।श्री चन्द्र शेखर अपने छात्र जीवन से ही राजनीति की ओर आकर्षित थे और क्रांतिकारी जोश एवं गर्म स्वभाव वाले वाले आदर्शवादी के रूप में जाने जाते थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (1950-51) से राजनीति विज्ञान में अपनी मास्टर डिग्री करने के बाद वे समाजवादी आंदोलन में शामिल हो गए। उन्हें आचार्य नरेंद्र देव के साथ बहुत निकट से जुड़े होने का सौभाग्य प्राप्त था। वे बलिया में जिला प्रजा समाजवादी पार्टी के सचिव चुने गए एक साल के भीतर वे उत्तर प्रदेश में राज्य प्रजा समाजवादी पार्टी के संयुक्त सचिव बने। 1955-56 में वे उत्तर प्रदेश में राज्य प्रजा समाजवादी पार्टी के महासचिव बने।1962 में वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए। वे जनवरी 1965 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। 1967 में उन्हें कांग्रेस संसदीय दल का महासचिव चुना गया। संसद के सदस्य के रूप में उन्होंने दलितों के हित के लिए कार्य करना शुरू किया एवं समाज में तेजी से बदलाव लाने के लिए नीतियाँ निर्धारित करने पर जोर दिया। इस संदर्भ में जब उन्होंने समाज में उच्च वर्गों के गलत तरीके से बढ़ रहे एकाधिकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई तो सत्ता पर आसीन लोगों के साथ उनके मतभेद हुए।
वे एक ऐसे ‘युवा तुर्क’ नेता के रूप में सामने आए जिसने दृढ़ता, साहस एवं ईमानदारी के साथ निहित स्वार्थ के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वे 1969 में दिल्ली से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘यंग इंडियन’ के संस्थापक एवं संपादक थे। इसका सम्पादकीय अपने समय के विशिष्ट एवं बेहतरीन संपादनों में से एक हुआ करता था। आपातकाल (मार्च 1977 से जून 1975) के दौरान ‘यंग इंडियन’ को बंद कर दिया गया था। फरवरी 1989 से इसका पुनः नियमित रूप से प्रकाशन शुरू हुआ। वे इसके संपादकीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष थे।
श्री चन्द्र शेखर हमेशा व्यक्तिगत राजनीति के खिलाफ रहे एवं वैचारिक तथा सामाजिक परिवर्तन की राजनीति का समर्थन किया। यही सोच उन्हें 1973-75 के अशांत एवं अव्यवस्थित दिनों के दौरान श्री जयप्रकाश नारायण एवं उनके आदर्शवादी जीवन के और अधिक करीब ले गई। इस वजह से वे जल्द ही कांग्रेस पार्टी के भीतर असंतोष का कारण बन गए।आपातकाल (1975-1977) के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी को आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (MISI) के तहत गिरफ्तार करके जेल में रखा गया था।आप तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी का हिस्सा होने के बावजूद अपनी मुखरता के कारण गिरफ्तार किए गए और अधिकांश समय कारावास में रहे।
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