ALOK KUMAR SHARMA
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Akshara Gupta ने महिला अंडर-19 क्रिकेट में ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान खींच लिया है. बिहार की इस युवा बल्लेबाज ने सिर्फ 126 गेंदों में नाबाद 306 रन ठोक दिए.अपनी तूफानी पारी में अक्षरा ने 55 चौके और 8 छक्के लगाए. खास बात यह है कि हाल ही में बिहार के ही युवा स्टार Vaibhav Sooryavanshi ने सुर्खियां बटोरी थीं और अब अक्षरा ने अपने बल्ले से नया इतिहास रच दिया है.उनकी इस पारी को महिला घरेलू क्रिकेट की सबसे यादगार पारियों में से एक माना जा रहा है. #aksharagupta #biharcricket #womencricket #cricketnews #sportsnext #cricket
cricket - जागरण Jagran com; (35) ५५ चौके , 8 छक्के और ३०६ रन वैभव सूर्यवंशी के बाद क्रिकेट में बिहार की बेटी की विस्फोटक एंट्री जागरण Jagran com; (35) ५५ चौके , 8 छक्के और ३०६ रन वैभव सूर्यवंशी के बाद क्रिकेट में बिहार की बेटी की विस्फोटक एंट्री - ShareChat
सीमावर्ती शहर रक्सौल की बेटी और उभरती क्रिकेट प्रतिभा अक्षरा गुप्ता (Bihar Cricket Akshara Gupta) ने बिहार क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। Vaibhav Suryavanshi एक तरफ जहां बिहार के वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) क्रिकेट में धमाल मचा रहे हैं। वहीं, अब महज 15 वर्ष की उम्र में अक्षरा ने बिहार महिला अंडर-19 एकदिवसीय क्रिकेट टूर्नामेंट (Bihar Women Under-19 ODI Cricket Tournament) में नाबाद तिहरा शतक लगाकर ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। भागलपुर में 18 जून 2026 को आयोजित बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के महिला अंडर-19 वनडे मुकाबले में अक्षरा ने विस्फोटक बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए मात्र 126 गेंदों पर नाबाद 306 रन बनाए। उनकी इस यादगार पारी में 55 चौके और 8 छक्के शामिल रहे। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 242.86 रहा, जिसने दर्शकों और क्रिकेट प्रेमियों को रोमांचित कर दिया। अक्षरा की इस उपलब्धि को बिहार क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि बिहार के महिला क्रिकेट इतिहास में इतनी कम उम्र में किसी खिलाड़ी ने नाबाद तिहरा शतक नहीं लगाया था। अक्षरा की इस सफलता पर रक्सौल सहित पूरे पूर्वी चंपारण में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों और स्थानीय संभावना के संस्थापक अध्यक्ष भरत प्रसाद गुप्ता, राजद नेता, रवि मस्करा, वार्ड पार्षद उर्फ जलदूत सोनू गुप्ता, कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष पंडित मनोरंजन तिवारी आदि ने हर्ष व्यक्त किया। कहा कि प्रतिभा, अनुशासन और कठिन मेहनत का शानदार परिणाम है। #AksharaGupta #BiharCricket #WomensCricket #dainikjagrannews #क्रिकेट
क्रिकेट - जागरण Jagran com; Alok sharma (3ಖ) ५५ चौके , 8 छक्के और ३०६ रन वैभव सूर्यवंशी के बाद क्रिकेट में बिहार की बेटी की विस्फोटक एंट्री जागरण Jagran com; Alok sharma (3ಖ) ५५ चौके , 8 छक्के और ३०६ रन वैभव सूर्यवंशी के बाद क्रिकेट में बिहार की बेटी की विस्फोटक एंट्री - ShareChat
#❣️जीवन की अभिलाशा ♥️
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#❣️जीवन की अभिलाशा ♥️
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#❣️जीवन की अभिलाशा ♥️
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जीवन के बारे में सबसे अधिक सिखाने वाली 8 जगहें 1. अस्पताल (Hospital) आपको सिखाता है कि जीवन कितना नाज़ुक है। एक बीमारी, एक दुर्घटना या एक अप्रत्याशित घटना अचानक यह एहसास करा देती है कि स्वास्थ्य कोई गारंटी नहीं है। बिना दर्द के सांस लेना, चलना और हर सुबह जागना वास्तव में एक आशीर्वाद है। 2. जेल (Prison) आपको निर्णयों का महत्व सिखाती है। एक गलत फैसला पूरे जीवन की दिशा बदल सकता है। यह हमें याद दिलाता है कि स्वतंत्रता उतनी ही मूल्यवान है, जितना अधिकांश लोग समझ नहीं पाते। 3. श्मशान या कब्रिस्तान (Cemetery) आपको बताता है कि वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है। पद, प्रतिष्ठा और धन यहीं रह जाते हैं। अंत में केवल यह मायने रखता है कि आपने लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया, कितना प्रेम किया और कैसे जीवन जिया। 4. प्रसूति कक्ष (Delivery Room) आपको सिखाता है कि जीवन एक चमत्कार है। अव्यवस्था और चुनौतियों से भरी दुनिया में एक नए जीवन का जन्म यह याद दिलाता है कि आशा हर दिन जन्म लेती है। 5. अनाथालय (Orphanage) आपको प्रेम का वास्तविक अर्थ सिखाता है। बच्चों को परिपूर्ण लोगों की आवश्यकता नहीं होती। उन्हें चाहिए अपनापन, देखभाल, निरंतरता और कोई ऐसा व्यक्ति जो उन्हें अपना समझे। 6. वृद्धाश्रम (Nursing Home) आपको सिखाता है कि समय कितनी तेजी से बीत जाता है। बुज़ुर्ग अक्सर इस बारे में कम बात करते हैं कि उन्होंने क्या पाया, और अधिक इस बारे में कि उन्होंने किन चीज़ों की कद्र समय रहते नहीं की। 7. न्यायालय (Courtroom) आपको सिखाता है कि हर कर्म का परिणाम होता है। हमारे शब्द, निर्णय और कर्म एक दिन हमारे पास लौटकर आते हैं। जीवन हमेशा हिसाब रखता है, चाहे हमें लगे कि कोई देख नहीं रहा। 8. विद्यालय (School) आपको सिखाता है कि सीखने की यात्रा कभी समाप्त नहीं होती। सबसे सफल लोग वे नहीं होते जो सब कुछ जानते हैं, बल्कि वे होते हैं जो सीखना कभी नहीं छोड़ते। यदि आप जीवन को वास्तव में समझना चाहते हैं... उन जगहों पर जाइए जहाँ लोग जन्म लेते हैं। उन जगहों पर जाइए जहाँ लोग संघर्ष करते हैं। उन जगहों पर जाइए जहाँ लोग वृद्ध होते हैं। और उन जगहों पर जाइए जहाँ लोग इस संसार को छोड़कर जाते हैं। क्योंकि ये स्थान चुपचाप ऐसे सबक सिखाते हैं... जो कोई पुस्तक, कोई डिग्री, और कोई भी धन-संपत्ति कभी पूरी तरह नहीं सिखा सकती। जीवन का सबसे बड़ा विद्यालय स्वयं जीवन है। #जीवन
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निवेदन है की दो मिनट का टाइम निकाल कर जरूर पढ़े... ये बकवास नहीं है सच्चाई है समाज की... एक कटु सत्य..! रिश्ते तो पहले होते थे। अब रिश्ते नही सौदे होते हैं। बस यहीं से सब कुछ गङबङ हो रहा है। किसी भी माँ बाप मे अब इतनी हिम्मत शेष नही बची कि बच्चों का रिश्ता अपनी मर्जी से कर सकें। पहले खानदान देखते थे। सामाजिक पकङ और सँस्कार देखते थे और अब .... मन की नही तन की सुन्दरता , नोकरी , दौलत , कार , बँगला। साइकिल , स्कूटर वाला राजकुमार किसी को नही चाहिये । सब की पसंद कारवाला ही है। भले ही इनकी संख्या 10% ही हो । लङके वालो को लङकी बङे घर की चाहिए ताकि भरपूर दहेज मिल सके और लङकी वालोँ को पैसे वाला लङका ताकि बेटी को काम करना न पङे। नोकर चाकर हो। परिवार छोटा ही हो ताकि काम न करना पङे और इस छोटे के चक्कर मे परिवार कुछ ज्यादा ही छोटा हो गया है। पहले रिश्तो मे लोग कहते थे कि मेरी बेटी घर के सारे काम जानती है और अब.... हमने बेटी से कभी घर का काम नही कराया यह कहने में शान समझते हैं। इन्हें रिश्ता नही बेहतर की तलाश है। रिश्तों का बाजार सजा है गाङियों की तरह। शायद और कोई नयी गाङी लांच हो जाये। इसी चक्कर मे उम्र बढ रही है। अंत मे सौ कोङे और सौ प्याज खाने जैसा है अजीब सा तमाशा हो रहा है। अच्छे की तलाश मे सब अधेङ हो रहे हैं। अब इनको कौन समझाये कि एक उम्र मे जो चेहरे मे चमक होती है वो अधेङ होने पर कायम नही रहती , भले ही लाख रंगरोगन करवा लो ब्युटिपार्लर मे जाकर। एक चीज और संक्रमण की तरह फैल रही है। नोकरी वाले लङके को नोकरी वाली ही लङकी चाहिये। अब जब वो खुद ही कमायेगी तो क्यों आपके या आपके माँ बाप की इज्जत करेगी.? खाना होटल से मँगाओ या खुद बनाओ बस यही सब कारण है आजकल अधिकाँश तनाव के एक दूसरे पर अधिकार तो बिल्कुल ही नही रहा। उपर से सहनशीलता तो बिल्कुल भी नहीं। इसका अंत आत्महत्या और तलाक घर परिवार झुकने से चलता है , अकङने से नहीं.। जीवन मे जीने के लिये दो रोटी और छोटे से घर की जरूरत है बस और सबसे जरुरी आपसी तालमेल और प्रेम प्यार की लेकिन..... आजकल बङा घर व बङी गाङी ही चाहिए चाहे मालकिन की जगह दासी बनकर ही रहे। आजकल हर घरों मे सारी सुविधाएं मौजूद हैं.... कपङा धोने की वाशिँग मशीन मसाला पीसने की मिक्सी पानी भरने के लिए मोटर मनोरंजन के लिये टीवी बात करने मोबाइल फिर भी असँतुष्ट... पहले ये सब कोई सुविधा नहीं थी। पूरा मनोरंजन का साधन परिवार और घर का काम था , इसलिए फालतू की बातें दिमाग मे नहीं आती थी। न तलाक न फाँसी आजकल दिन मे तीन बार आधा आधा घँटे मोबाइल मे बात करके , घँटो सीरियल देखकर , ब्युटिपार्लर मे समय बिताकर। मैं जब ये जुमला सुनता हूँ कि घर के काम से फुर्सत नही मिलती तो हंसी आती है। बेटियों के लिये केवल इतना ही कहूँगा की पहली बार ससुराल हो या कालेज लगभग बराबर होता है। थोङी बहुत अगर रैगिँग भी होती है तो सहन कर लो। कालेज मे आज जूनियर हो तो कल सीनियर बनोगे। ससुराल मे आज बहू हो तो कल सास बनोगी। समय से शादी करो। स्वभाव मे सहनशीलता लाओ। परिवार में सभी छोटे बङो का सम्मान करो। ब्याज सहित वापिस मिलेगा। आत्मघाती मत बनो। जीवन मे उतार चढाव आता है। सोचो समझो फिर फैसला लो। बङो से बराबर राय लो। उनके उपर और ऊपर वाले पर विश्वास रखो विचार करे की हम कहा से कहा आ गये... क्या आप सब लोग मेरी बात से सहमत हो,,,अगर सहमत हो तो कामेंट बाक्स में जाकर Agree लिख दीजिए #परिवार
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