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जय गुरु देव नाम प्रभु का RJ
#सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है #🙏गुरु महिमा😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #❤️जीवन की सीख #🙏शुभ दोपहर
सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है - जय गुरु देव नाम प्रभु का जयणुरुदव जयगुरुदेव नाम प्रभु का र्सन उमाकान्त जी मह्वाराज  समय का संदेश ने। अब भी उनकी जरूरत है। शरीर तो अब कमजोर गुरु देव  01.05.2026 प्रातः 8 ३० बजे जय हो गया, मैं बुलाऊंगा तो बहुत से टाटधारी तो चाहते जय गुरु देव नगर, उज्जैन, गुरु देव নানা সম आश्रम प्रदेश हुए भी यहाँ भंडारे में नहीं आ पाएंगे लेकिन वो जो मथ्य उनका संकल्प है, अब काम करेगा। टाटधारियों १. टाटधारी भंडारे कार्यक्रम में आ जाएं हम उनके लिए कुछ सोच रहे हैं। उन्होंने काम करेगा। जो तपस्या का संकल्प अब 6.54-9.34 अभी तक की है, जब से पहनाया गया तब से जितने भी टाटधारी हो॰ चाहे यहां ( उज्जैन) आाप जो किया है॰चो अब काम करेगा। उसकी अब को सुन रहे हो, आप लोग हो या आवाज टाटधारियों को बता दो हमारा नाम ले कर के कि जरूरत है लेकिन जो चल फिर सकते हैं॰ जो बाचा उमाकान्त जी ने कहा हे कि उनकी नज़र বিম্ব বিোন দমে মন नाचा जगगुरुदेतजी महाराज को परिवार के लोग हैं उनको ला सकते हैं उनको में आपकी कीमत है और आपसे कुछ काम की १ववां वार्पिक भंगरा कार्य्रम  13 74 75 డెకే 2026   चो अपेक्षा करते हे। अपेक्षा मतलब इच्छा करते हें भंडारे में ले आवें। जो उनको मान देय मिलता है, किये कुछ  जम्हूरियत के कर्रें अब। जो आम काम মখান - TITEபHH सम्मान राशि मिलती है॰ लोकतंत्र सेनानियों को लिए कफ़न गुरु महाराज ने बताया, वो कफ़न पहन -[ - =77 3=7ர7 ^ா लिया। कफ़न जो पहन लेता है उसको शमशान घाट पेंशन मिलता है॰ अकेले कोई नहीं खा सकता है॰ जाना रहता है॰चो मर जाता है। ऐसे ही कफ़न पहनने নত ২৭  इतना खर्चा नहीं है उनका , किस पर खर्चा होता । हे कि हम मुर्दा हो गए। अब हमारी कोई কা সনলন 1~T5 3 इच्छा नहीं रह गईः अपनी कोई इच्छा नर्ही रह गई। है? परिवार पर खर्चा होता है। तो परिवार के लोगों দুব দরবিবরা ব্রা  गुरु के आदेश पर इसको पहना, " जाहि विधि राखे का यह फ़र्ज़ बनता है कि उनको इस भंडारे में ले विधि रहिये ' जैसा शी चो कहें उसी तरह रे गुरु वाहि | =+ஈ ాT +r | 4!ப5141111I1111 आवें। मैं उनके लिए कुछ सोच रहा हूं॰ उनसे कुछ करो। जैसा अभी आपको बताया, "चाहे कार्टों पर मुझे चलना हो, चाहे अग्नि में मुझे जलना हो, चाहे कराना चाहता हूं॰ उनसे कुछ कहना चाहता চুঁl নী छोड़ के देश निकलना हो॰ रहे ध्यान चरणों में' नुम्हारे गुरु न छूटें। तो जब यह संकल्प बनाया टाटधारियों टाटधारियों को ले आवें। ने। अब भी उनकी जरूरत है। शरीरतो अब कमजोर 19 जयगुरुदेव जी महाराज के पावन वार्षिक भंडारे पर सभी सादर बाबा आमंत्रित हैं। दिनांक १३  १४ और २५ मई २०२६ को बाबा जयगुरुदेव आश्रम पिंगलेश्वर रेलवे स्टेशन के सामने मक्सी रोड़ उज्जैन मध्य प्रदेश) जय गुरु देव नाम प्रभु का जयणुरुदव जयगुरुदेव नाम प्रभु का र्सन उमाकान्त जी मह्वाराज  समय का संदेश ने। अब भी उनकी जरूरत है। शरीर तो अब कमजोर गुरु देव  01.05.2026 प्रातः 8 ३० बजे जय हो गया, मैं बुलाऊंगा तो बहुत से टाटधारी तो चाहते जय गुरु देव नगर, उज्जैन, गुरु देव নানা সম आश्रम प्रदेश हुए भी यहाँ भंडारे में नहीं आ पाएंगे लेकिन वो जो मथ्य उनका संकल्प है, अब काम करेगा। टाटधारियों १. टाटधारी भंडारे कार्यक्रम में आ जाएं हम उनके लिए कुछ सोच रहे हैं। उन्होंने काम करेगा। जो तपस्या का संकल्प अब 6.54-9.34 अभी तक की है, जब से पहनाया गया तब से जितने भी टाटधारी हो॰ चाहे यहां ( उज्जैन) आाप जो किया है॰चो अब काम करेगा। उसकी अब को सुन रहे हो, आप लोग हो या आवाज टाटधारियों को बता दो हमारा नाम ले कर के कि जरूरत है लेकिन जो चल फिर सकते हैं॰ जो बाचा उमाकान्त जी ने कहा हे कि उनकी नज़र বিম্ব বিোন দমে মন नाचा जगगुरुदेतजी महाराज को परिवार के लोग हैं उनको ला सकते हैं उनको में आपकी कीमत है और आपसे कुछ काम की १ववां वार्पिक भंगरा कार्य्रम  13 74 75 డెకే 2026   चो अपेक्षा करते हे। अपेक्षा मतलब इच्छा करते हें भंडारे में ले आवें। जो उनको मान देय मिलता है, किये कुछ  जम्हूरियत के कर्रें अब। जो आम काम মখান - TITEபHH सम्मान राशि मिलती है॰ लोकतंत्र सेनानियों को लिए कफ़न गुरु महाराज ने बताया, वो कफ़न पहन -[ - =77 3=7ர7 ^ா लिया। कफ़न जो पहन लेता है उसको शमशान घाट पेंशन मिलता है॰ अकेले कोई नहीं खा सकता है॰ जाना रहता है॰चो मर जाता है। ऐसे ही कफ़न पहनने নত ২৭  इतना खर्चा नहीं है उनका , किस पर खर्चा होता । हे कि हम मुर्दा हो गए। अब हमारी कोई কা সনলন 1~T5 3 इच्छा नहीं रह गईः अपनी कोई इच्छा नर्ही रह गई। है? परिवार पर खर्चा होता है। तो परिवार के लोगों দুব দরবিবরা ব্রা  गुरु के आदेश पर इसको पहना, " जाहि विधि राखे का यह फ़र्ज़ बनता है कि उनको इस भंडारे में ले विधि रहिये ' जैसा शी चो कहें उसी तरह रे गुरु वाहि | =+ஈ ాT +r | 4!ப5141111I1111 आवें। मैं उनके लिए कुछ सोच रहा हूं॰ उनसे कुछ करो। जैसा अभी आपको बताया, "चाहे कार्टों पर मुझे चलना हो, चाहे अग्नि में मुझे जलना हो, चाहे कराना चाहता हूं॰ उनसे कुछ कहना चाहता চুঁl নী छोड़ के देश निकलना हो॰ रहे ध्यान चरणों में' नुम्हारे गुरु न छूटें। तो जब यह संकल्प बनाया टाटधारियों टाटधारियों को ले आवें। ने। अब भी उनकी जरूरत है। शरीरतो अब कमजोर 19 जयगुरुदेव जी महाराज के पावन वार्षिक भंडारे पर सभी सादर बाबा आमंत्रित हैं। दिनांक १३  १४ और २५ मई २०२६ को बाबा जयगुरुदेव आश्रम पिंगलेश्वर रेलवे स्टेशन के सामने मक्सी रोड़ उज्जैन मध्य प्रदेश) - ShareChat
#🚩प्रेमानंद जी महाराज🙏 #सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है #शुभ शुक्रवार #😍स्टेटस की दुनिया🌍 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं
🚩प्रेमानंद जी महाराज🙏 - ShareChat
00:52
#सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌃 तारों संग शुभ रात्रि ✨ #🌙चंदा संग गुड नाईट #🌙 गुड नाईट
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00:35
#सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है #🙏गुरु महिमा😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏शाम की आरती🪔 #🌜 शुभ संध्या🙏
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00:47
#सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है #💫ध्यान के मंत्र🧘‍♂️ #🙏कर्म क्या है❓ #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏 भजन संग्रह 🎵
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00:15
#सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है #❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस #📜 Whatsapp स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस #❣️🐰Whatsapp Status🐰❣️
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00:15
#सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP #🙏शुभ दोपहर
सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है - इस समीकरण को उलट का एक ऐसा बाजार सज गया लिए मीडिया घरानों को अब जनसरोकार ही रहेगी। सन्तों के पास की छोटी चीजों की కగాTా इच्छा के बजाय बड़ी चीज की इच्छा, यानी साधना में तरक्की की इच्छा लेकर के जाना चाहिए बाबा उमाकान्त जी महाराज মী ব৪্ক হাব্বিন থা নানী ঔ মাখনা देच రాశె নিমক লিব কল্কা যমা কি, "নী বৃত্তা कीन्हीं मन माहिं, हरि प्रताप कछु 7" दुर्लभ २ कोलफील्ड मिरर २६ अप्रैल (रुद्रपुर उतराखंड)ः परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 2 अप्रैल २०२६ के सतसंग में कहा कि जन्मते और मरते बड़ी तकलीफ होती है। मरते समय समय तो इतनी तकलीफ होती है जितनी तकलीफ हजारों बिच्छुओं के डंक मारने पर होती है। सहजो बाई ने कहा "सहजो मौत के समय पीड़ा उठे अपार बिच्छू 7 साठ हजार ज्यों॰ डंक मारें एक साथ" अगर उस पीडा से आप बचना चाहते होे तब तो जो बताया जा रहा है उसको करो। जी महाराज सत 17 उसाक्ल ా अभी तक आपने जो गलती की॰ सो तो তীম বক মুক্নর্ম ম তীন যমা নী ওমকী कीः चाहे शरीर से आपने पाप करके शारीरिक कर्म इकट्ठा किया, चाहे मन से हिम्मत बढ़ गई और दूसरा मुकदमा जो भजनानंदी हो जाते हैं. जो अपने अंदर सेवक का भाव लेे आते हैं और वे कायम कर लेता है और कहता है कि हम गलत सोचकर मन के कहने पर पाप सुख को त्याग देते हैं करके मनसा पाप इकट्ठा किया। लेकिन इसमें भी जीत जाएं ताकि हमारा नाम हो जो भजनानंदी हो जाते हैं जो अपने अंदर आज आप उस पाप की माफी मांग लो जाएगा| तो बस इन्हीं सब चीजों में वह सेवक का भाव ले आते हैं उन्हें सुख फंस जाता है। और कान पकड़ लो कि अब गलती नहीं वह सिर्फ छोटी चीजें ही मांगता हैः दुनिया  करेंगे और नामदान लेकर साधना करेंगें| कहां? कहा गया है "सेवक सुत पति मातु भरोसें । रहइ की चीजें मांगता है। लेकिन जो बड़ी चीज ऋषि-मुनि जब योग साधना करते थे असोच बनइ प्रभु पोसें Il  की इच्छा लेकर के आता है कि हमको चाहे रुपया- पैसा में बरकत मिले या ना तब उनमें कौन सी शक्ति आ जाती व्यसनी धन सुख गति व्यभिचारी। इनहि सुखद नहिं जगत मझारी II " मिले बस हमारी साधना में बरकत मिल ೫? तो वे सुख को त्याग देते हैं और इच्छा जो यह पाने के लिए सन्तों के पास जाए। तो उसके लिए वह चीज आसान हो खत्म हो जाती है। जब उसकी इच्छा खत्म जाता है कि हमको धन मिल जाती है क्योंकि भजन से वह शक्ति आ जाए हम मुकदमा जीत जाएं हमारी लॉटरी निकल हो जाती है तब भी वह संतुष्ट हो जाता है जाती है जिसके लिए कहा गया जाए, हमारे लड़के की नौकरी लग जाए. "जो इच्छा कीन्हीं मन माहिं हरि प्रताप और जिस चीज की यानी साधना में और मांगता ही रहता है। जैसे अगर तरक्की की इच्छा लेकर सन्तों के पास नाहिं" ব্ুলম  कछु इच्छा पूरी हो जाए तो भी लड़के की नौकरी लग गई तो आ कर जैसे ऋषि मुनि जब योग साधना करते थे गया अगर वह संतुष्ट हो जाता है। कहते हैं कि उसका प्रोमोशन हो जाए। तब उनमें वह शक्ति आ जाती थी। इस समीकरण को उलट का एक ऐसा बाजार सज गया लिए मीडिया घरानों को अब जनसरोकार ही रहेगी। सन्तों के पास की छोटी चीजों की కగాTా इच्छा के बजाय बड़ी चीज की इच्छा, यानी साधना में तरक्की की इच्छा लेकर के जाना चाहिए बाबा उमाकान्त जी महाराज মী ব৪্ক হাব্বিন থা নানী ঔ মাখনা देच రాశె নিমক লিব কল্কা যমা কি, "নী বৃত্তা कीन्हीं मन माहिं, हरि प्रताप कछु 7" दुर्लभ २ कोलफील्ड मिरर २६ अप्रैल (रुद्रपुर उतराखंड)ः परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 2 अप्रैल २०२६ के सतसंग में कहा कि जन्मते और मरते बड़ी तकलीफ होती है। मरते समय समय तो इतनी तकलीफ होती है जितनी तकलीफ हजारों बिच्छुओं के डंक मारने पर होती है। सहजो बाई ने कहा "सहजो मौत के समय पीड़ा उठे अपार बिच्छू 7 साठ हजार ज्यों॰ डंक मारें एक साथ" अगर उस पीडा से आप बचना चाहते होे तब तो जो बताया जा रहा है उसको करो। जी महाराज सत 17 उसाक्ल ా अभी तक आपने जो गलती की॰ सो तो তীম বক মুক্নর্ম ম তীন যমা নী ওমকী कीः चाहे शरीर से आपने पाप करके शारीरिक कर्म इकट्ठा किया, चाहे मन से हिम्मत बढ़ गई और दूसरा मुकदमा जो भजनानंदी हो जाते हैं. जो अपने अंदर सेवक का भाव लेे आते हैं और वे कायम कर लेता है और कहता है कि हम गलत सोचकर मन के कहने पर पाप सुख को त्याग देते हैं करके मनसा पाप इकट्ठा किया। लेकिन इसमें भी जीत जाएं ताकि हमारा नाम हो जो भजनानंदी हो जाते हैं जो अपने अंदर आज आप उस पाप की माफी मांग लो जाएगा| तो बस इन्हीं सब चीजों में वह सेवक का भाव ले आते हैं उन्हें सुख फंस जाता है। और कान पकड़ लो कि अब गलती नहीं वह सिर्फ छोटी चीजें ही मांगता हैः दुनिया  करेंगे और नामदान लेकर साधना करेंगें| कहां? कहा गया है "सेवक सुत पति मातु भरोसें । रहइ की चीजें मांगता है। लेकिन जो बड़ी चीज ऋषि-मुनि जब योग साधना करते थे असोच बनइ प्रभु पोसें Il  की इच्छा लेकर के आता है कि हमको चाहे रुपया- पैसा में बरकत मिले या ना तब उनमें कौन सी शक्ति आ जाती व्यसनी धन सुख गति व्यभिचारी। इनहि सुखद नहिं जगत मझारी II " मिले बस हमारी साधना में बरकत मिल ೫? तो वे सुख को त्याग देते हैं और इच्छा जो यह पाने के लिए सन्तों के पास जाए। तो उसके लिए वह चीज आसान हो खत्म हो जाती है। जब उसकी इच्छा खत्म जाता है कि हमको धन मिल जाती है क्योंकि भजन से वह शक्ति आ जाए हम मुकदमा जीत जाएं हमारी लॉटरी निकल हो जाती है तब भी वह संतुष्ट हो जाता है जाती है जिसके लिए कहा गया जाए, हमारे लड़के की नौकरी लग जाए. "जो इच्छा कीन्हीं मन माहिं हरि प्रताप और जिस चीज की यानी साधना में और मांगता ही रहता है। जैसे अगर तरक्की की इच्छा लेकर सन्तों के पास नाहिं" ব্ুলম  कछु इच्छा पूरी हो जाए तो भी लड़के की नौकरी लग गई तो आ कर जैसे ऋषि मुनि जब योग साधना करते थे गया अगर वह संतुष्ट हो जाता है। कहते हैं कि उसका प्रोमोशन हो जाए। तब उनमें वह शक्ति आ जाती थी। - ShareChat
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सब बाबा जयगुरूदेव जी महाराज की देन है - इस समीकरण को उलट का एक ऐसा बाजार सज गया लिए मीडिया घरानों को अब जनसरोकार ही रहेगी। सन्तों के पास की छोटी चीजों की కగాTా इच्छा के बजाय बड़ी चीज की इच्छा, यानी साधना में तरक्की की इच्छा लेकर के जाना चाहिए बाबा उमाकान्त जी महाराज মী ব৪্ক হাব্বিন থা নানী ঔ মাখনা देच రాశె নিমক লিব কল্কা যমা কি, "নী বৃত্তা कीन्हीं मन माहिं, हरि प्रताप कछु 7" दुर्लभ २ कोलफील्ड मिरर २६ अप्रैल (रुद्रपुर उतराखंड)ः परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 2 अप्रैल २०२६ के सतसंग में कहा कि जन्मते और मरते बड़ी तकलीफ होती है। मरते समय समय तो इतनी तकलीफ होती है जितनी तकलीफ हजारों बिच्छुओं के डंक मारने पर होती है। सहजो बाई ने कहा "सहजो मौत के समय पीड़ा उठे अपार बिच्छू 7 साठ हजार ज्यों॰ डंक मारें एक साथ" अगर उस पीडा से आप बचना चाहते होे तब तो जो बताया जा रहा है उसको करो। जी महाराज सत 17 उसाक्ल ా अभी तक आपने जो गलती की॰ सो तो তীম বক মুক্নর্ম ম তীন যমা নী ওমকী कीः चाहे शरीर से आपने पाप करके शारीरिक कर्म इकट्ठा किया, चाहे मन से हिम्मत बढ़ गई और दूसरा मुकदमा जो भजनानंदी हो जाते हैं. जो अपने अंदर सेवक का भाव लेे आते हैं और वे कायम कर लेता है और कहता है कि हम गलत सोचकर मन के कहने पर पाप सुख को त्याग देते हैं करके मनसा पाप इकट्ठा किया। लेकिन इसमें भी जीत जाएं ताकि हमारा नाम हो जो भजनानंदी हो जाते हैं जो अपने अंदर आज आप उस पाप की माफी मांग लो जाएगा| तो बस इन्हीं सब चीजों में वह सेवक का भाव ले आते हैं उन्हें सुख फंस जाता है। और कान पकड़ लो कि अब गलती नहीं वह सिर्फ छोटी चीजें ही मांगता हैः दुनिया  करेंगे और नामदान लेकर साधना करेंगें| कहां? कहा गया है "सेवक सुत पति मातु भरोसें । रहइ की चीजें मांगता है। लेकिन जो बड़ी चीज ऋषि-मुनि जब योग साधना करते थे असोच बनइ प्रभु पोसें Il  की इच्छा लेकर के आता है कि हमको चाहे रुपया- पैसा में बरकत मिले या ना तब उनमें कौन सी शक्ति आ जाती व्यसनी धन सुख गति व्यभिचारी। इनहि सुखद नहिं जगत मझारी II " मिले बस हमारी साधना में बरकत मिल ೫? तो वे सुख को त्याग देते हैं और इच्छा जो यह पाने के लिए सन्तों के पास जाए। तो उसके लिए वह चीज आसान हो खत्म हो जाती है। जब उसकी इच्छा खत्म जाता है कि हमको धन मिल जाती है क्योंकि भजन से वह शक्ति आ जाए हम मुकदमा जीत जाएं हमारी लॉटरी निकल हो जाती है तब भी वह संतुष्ट हो जाता है जाती है जिसके लिए कहा गया जाए, हमारे लड़के की नौकरी लग जाए. "जो इच्छा कीन्हीं मन माहिं हरि प्रताप और जिस चीज की यानी साधना में और मांगता ही रहता है। जैसे अगर तरक्की की इच्छा लेकर सन्तों के पास नाहिं" ব্ুলম  कछु इच्छा पूरी हो जाए तो भी लड़के की नौकरी लग गई तो आ कर जैसे ऋषि मुनि जब योग साधना करते थे गया अगर वह संतुष्ट हो जाता है। कहते हैं कि उसका प्रोमोशन हो जाए। तब उनमें वह शक्ति आ जाती थी। इस समीकरण को उलट का एक ऐसा बाजार सज गया लिए मीडिया घरानों को अब जनसरोकार ही रहेगी। सन्तों के पास की छोटी चीजों की కగాTా इच्छा के बजाय बड़ी चीज की इच्छा, यानी साधना में तरक्की की इच्छा लेकर के जाना चाहिए बाबा उमाकान्त जी महाराज মী ব৪্ক হাব্বিন থা নানী ঔ মাখনা देच రాశె নিমক লিব কল্কা যমা কি, "নী বৃত্তা कीन्हीं मन माहिं, हरि प्रताप कछु 7" दुर्लभ २ कोलफील्ड मिरर २६ अप्रैल (रुद्रपुर उतराखंड)ः परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 2 अप्रैल २०२६ के सतसंग में कहा कि जन्मते और मरते बड़ी तकलीफ होती है। मरते समय समय तो इतनी तकलीफ होती है जितनी तकलीफ हजारों बिच्छुओं के डंक मारने पर होती है। सहजो बाई ने कहा "सहजो मौत के समय पीड़ा उठे अपार बिच्छू 7 साठ हजार ज्यों॰ डंक मारें एक साथ" अगर उस पीडा से आप बचना चाहते होे तब तो जो बताया जा रहा है उसको करो। जी महाराज सत 17 उसाक्ल ా अभी तक आपने जो गलती की॰ सो तो তীম বক মুক্নর্ম ম তীন যমা নী ওমকী कीः चाहे शरीर से आपने पाप करके शारीरिक कर्म इकट्ठा किया, चाहे मन से हिम्मत बढ़ गई और दूसरा मुकदमा जो भजनानंदी हो जाते हैं. जो अपने अंदर सेवक का भाव लेे आते हैं और वे कायम कर लेता है और कहता है कि हम गलत सोचकर मन के कहने पर पाप सुख को त्याग देते हैं करके मनसा पाप इकट्ठा किया। लेकिन इसमें भी जीत जाएं ताकि हमारा नाम हो जो भजनानंदी हो जाते हैं जो अपने अंदर आज आप उस पाप की माफी मांग लो जाएगा| तो बस इन्हीं सब चीजों में वह सेवक का भाव ले आते हैं उन्हें सुख फंस जाता है। और कान पकड़ लो कि अब गलती नहीं वह सिर्फ छोटी चीजें ही मांगता हैः दुनिया  करेंगे और नामदान लेकर साधना करेंगें| कहां? कहा गया है "सेवक सुत पति मातु भरोसें । रहइ की चीजें मांगता है। लेकिन जो बड़ी चीज ऋषि-मुनि जब योग साधना करते थे असोच बनइ प्रभु पोसें Il  की इच्छा लेकर के आता है कि हमको चाहे रुपया- पैसा में बरकत मिले या ना तब उनमें कौन सी शक्ति आ जाती व्यसनी धन सुख गति व्यभिचारी। इनहि सुखद नहिं जगत मझारी II " मिले बस हमारी साधना में बरकत मिल ೫? तो वे सुख को त्याग देते हैं और इच्छा जो यह पाने के लिए सन्तों के पास जाए। तो उसके लिए वह चीज आसान हो खत्म हो जाती है। जब उसकी इच्छा खत्म जाता है कि हमको धन मिल जाती है क्योंकि भजन से वह शक्ति आ जाए हम मुकदमा जीत जाएं हमारी लॉटरी निकल हो जाती है तब भी वह संतुष्ट हो जाता है जाती है जिसके लिए कहा गया जाए, हमारे लड़के की नौकरी लग जाए. "जो इच्छा कीन्हीं मन माहिं हरि प्रताप और जिस चीज की यानी साधना में और मांगता ही रहता है। जैसे अगर तरक्की की इच्छा लेकर सन्तों के पास नाहिं" ব্ুলম  कछु इच्छा पूरी हो जाए तो भी लड़के की नौकरी लग गई तो आ कर जैसे ऋषि मुनि जब योग साधना करते थे गया अगर वह संतुष्ट हो जाता है। कहते हैं कि उसका प्रोमोशन हो जाए। तब उनमें वह शक्ति आ जाती थी। - ShareChat