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#🤲अल्लाह हु अक़बर #🕌मस्जिद 🤲 #🤲 दुआएं #🤲 इबादत #❤️अस्सलामु अलैकुम
🤲अल्लाह हु अक़बर - جار کِا یقخ U@> ںایتەر ح توآ ارالذ *(" /I ೯Juy ارایپ ەمحا ەو تہوس ح توآ دللا الِا اراگ ےن ںالِغ ءدللا مِب بّج اہک ےن ںوروخ دللاءاشام اهک ےۓ بر دوخ <೬T   , بوبحم EJuc}wiele idz ; رادرس ےڑھک ؤاجوہ بسوک ممظعت ~eu نهکنآ همشرکاک هط سی نتاد کمچىک نیسای TJ೯೮ / "೮೬ ೮೯ 8 ೯ % ; ٔهنٹپاک سمشلاو ےرجت نین هلحَکاک غاز ا ےلتس ےرہس ٹھگنوھگ اک ( اک بر ەو اراونس توآ 3}Us6 U Uti ti < U/; j 6Z ৬ ) & <3 ) <೬1u Jr ۓوبشسوخ مالك یریرس ; ششیپ جار کِا یقخ U@> ںایتەر ح توآ ارالذ *(" /I ೯Juy ارایپ ەمحا ەو تہوس ح توآ دللا الِا اراگ ےن ںالِغ ءدللا مِب بّج اہک ےن ںوروخ دللاءاشام اهک ےۓ بر دوخ <೬T   , بوبحم EJuc}wiele idz ; رادرس ےڑھک ؤاجوہ بسوک ممظعت ~eu نهکنآ همشرکاک هط سی نتاد کمچىک نیسای TJ೯೮ / "೮೬ ೮೯ 8 ೯ % ; ٔهنٹپاک سمشلاو ےرجت نین هلحَکاک غاز ا ےلتس ےرہس ٹھگنوھگ اک ( اک بر ەو اراونس توآ 3}Us6 U Uti ti < U/; j 6Z ৬ ) & <3 ) <೬1u Jr ۓوبشسوخ مالك یریرس ; ششیپ - ShareChat
#🤲अल्लाह हु अक़बर #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲 इबादत #🤲 दुआएं #🕌मस्जिद 🤲
🤲अल्लाह हु अक़बर - یقو گآ تبحم یک مرحمان < تسودیهپک مرحمان ~suz هراگزااک منجای بساتوم پناساک ربق هووتای ت مزمز بآ ےساچ تپحم ےلہپ س حاکن ~೫೮೮೧೭ಲ131 ;!xUxU : 9 DS <(I?-<೬;<J ೪x< Ul; ~605 < 6b4 یقو گآ تبحم یک مرحمان < تسودیهپک مرحمان ~suz هراگزااک منجای بساتوم پناساک ربق هووتای ت مزمز بآ ےساچ تپحم ےلہپ س حاکن ~೫೮೮೧೭ಲ131 ;!xUxU : 9 DS <(I?-<೬;<J ೪x< Ul; ~605 < 6b4 - ShareChat
#🤲 दुआएं #🤲 इबादत #🕌मस्जिद 🤲 #🤲अल्लाह हु अक़बर #❤️अस्सलामु अलैकुम
🤲 दुआएं - ےاکن بیع ںوراژ ںیپ مہ ەو بجەک ۓاجاچچوپ ےسلولاو ینوکوت ںیہےتسآ ںیعیگدنز یرامہ ! ںیہےتآ رک ھیسد یبوخ ےاکن بیع ںوراژ ںیپ مہ ەو بجەک ۓاجاچچوپ ےسلولاو ینوکوت ںیہےتسآ ںیعیگدنز یرامہ ! ںیہےتآ رک ھیسد یبوخ - ShareChat
#🤲 इबादत #🤲 दुआएं #🕌मस्जिद 🤲 #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲अल्लाह हु अक़बर
🤲 इबादत - शबे-बारात में क्या पढ़ना चाहिए? और दुआ  शबे-बारात (१५ शाबान की रात) मग़फ़िरत , रहमत क़बूल होने की रात है। इस रात में नफ़्ल इबादत, दुआ और इस्तिग़फ़ार ज़्यादा करना चाहिए। )१ कुरआन की तिलावत जो आसानी हो उतना पढ़़ेंः  মামীন (1 যা 3 [గగక वाक़िआ या जितना बन सके बार) - सूरह मुल्क - सूरह रहमान - ক্ষু নিলাবিনও कुरआन   हो) हर 2 रकअत के २ नफ़्ल नमाज़ 2 या 4 रकअत नफ़्ल ( जितनी तौफ़ीक़ दुआ करें। कोई ख़ास तय नमाज़ साबित नहीं, बस नफ़्ल पढ़ें। da उ इस्तिग़फ़ार ( गुनाहों की माफ़ी) कम से कम १०० बारः अस्तग़फिरुल्लाह radf जंबिन व अतूबु इलैह कुल्ली ४4 दुरूद शरीफ कम से कम १०० बारः अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मद व अला आलि मुहम्मद र दुआ दिल से तौबा करें औँर ये दुआ करेंः अल्लाहुम्मा इन्नका  >5নীনা সীয अप्रूव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अफु अन्नी ६ अपने और दूसरों के लिए दुआ अपने गुनाहों की माफ़ी वालिदैन (ज़िंदा हों या इंतिक़ाल कर चुके होँ) तमाम मुस्ॅलमानों की मग़फ़िरत बीमारी , की दुआ परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत  सूरह रसूल से ज़रूरी बात शबे-बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या खास ঘ্রালিকন(ভ্রিবা্নী  साबित नहीं। जो भी पढ़ढ़ें , सुन्नत के मुताबिक़, सादगी से पढ़ें हँट्ैतमअममुसुलामोन ६ अपने और दूसरों के लिए की माफ़ी तमाम मुस्लमानों की मग़फ़िरत बीमारी, इंतिक़ाल कर चुके যা की दुआ  परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत ज़रूरी बात शबे बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या ख़ास सूरह মৈুলমী साबित नहीं। जो भी पढ़ें , सुन्नत के मुताबिक़, सादगी से पढ़ें। शबे-बारात में क्या पढ़ना चाहिए? और दुआ  शबे-बारात (१५ शाबान की रात) मग़फ़िरत , रहमत क़बूल होने की रात है। इस रात में नफ़्ल इबादत, दुआ और इस्तिग़फ़ार ज़्यादा करना चाहिए। )१ कुरआन की तिलावत जो आसानी हो उतना पढ़़ेंः  মামীন (1 যা 3 [గగక वाक़िआ या जितना बन सके बार) - सूरह मुल्क - सूरह रहमान - ক্ষু নিলাবিনও कुरआन   हो) हर 2 रकअत के २ नफ़्ल नमाज़ 2 या 4 रकअत नफ़्ल ( जितनी तौफ़ीक़ दुआ करें। कोई ख़ास तय नमाज़ साबित नहीं, बस नफ़्ल पढ़ें। da उ इस्तिग़फ़ार ( गुनाहों की माफ़ी) कम से कम १०० बारः अस्तग़फिरुल्लाह radf जंबिन व अतूबु इलैह कुल्ली ४4 दुरूद शरीफ कम से कम १०० बारः अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मद व अला आलि मुहम्मद र दुआ दिल से तौबा करें औँर ये दुआ करेंः अल्लाहुम्मा इन्नका  >5নীনা সীয अप्रूव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अफु अन्नी ६ अपने और दूसरों के लिए दुआ अपने गुनाहों की माफ़ी वालिदैन (ज़िंदा हों या इंतिक़ाल कर चुके होँ) तमाम मुस्ॅलमानों की मग़फ़िरत बीमारी , की दुआ परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत  सूरह रसूल से ज़रूरी बात शबे-बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या खास ঘ্রালিকন(ভ্রিবা্নী  साबित नहीं। जो भी पढ़ढ़ें , सुन्नत के मुताबिक़, सादगी से पढ़ें हँट्ैतमअममुसुलामोन ६ अपने और दूसरों के लिए की माफ़ी तमाम मुस्लमानों की मग़फ़िरत बीमारी, इंतिक़ाल कर चुके যা की दुआ  परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत ज़रूरी बात शबे बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या ख़ास सूरह মৈুলমী साबित नहीं। जो भी पढ़ें , सुन्नत के मुताबिक़, सादगी से पढ़ें। - ShareChat
#🕌मस्जिद 🤲 #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲 दुआएं #🤲 इबादत #🤲अल्लाह हु अक़बर
🕌मस्जिद 🤲 - बेहतरीन कलाम नात ए मुस्तफ़ा सुन कर रूह जब मचलती है के चेहरे से चाँदनी निकलती है। ७ 3fl೫i: उन के सदक़े खाते हैं उन के सदक़े पीते हैं मुस्तफ़ा की चौखट से काएनात पलती है [ शह ए दीं की रहमतों की ऊँगली को थाम कर जन्नत ए मोहब्बत में ज़िंदगी टहलती है. काश वो नज़र आते ख़्वाब के दरीचे से मेरी दीद ए हसरत " आँख मलती है पहरों लफ़्ज़ ए कुन के जल्वे में मुस्तफ़ा च J8 नूरे ए मुस्तफ़ाई में काएनात ढलती है. बेहतरीन कलाम नात ए मुस्तफ़ा सुन कर रूह जब मचलती है के चेहरे से चाँदनी निकलती है। ७ 3fl೫i: उन के सदक़े खाते हैं उन के सदक़े पीते हैं मुस्तफ़ा की चौखट से काएनात पलती है [ शह ए दीं की रहमतों की ऊँगली को थाम कर जन्नत ए मोहब्बत में ज़िंदगी टहलती है. काश वो नज़र आते ख़्वाब के दरीचे से मेरी दीद ए हसरत " आँख मलती है पहरों लफ़्ज़ ए कुन के जल्वे में मुस्तफ़ा च J8 नूरे ए मुस्तफ़ाई में काएनात ढलती है. - ShareChat
#❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲अल्लाह हु अक़बर #🤲 इबादत #🤲 दुआएं #🕌मस्जिद 🤲
❤️अस्सलामु अलैकुम - 0) ےاکن بیع ںوراز ںیہ مہ ەو بجەک ۓاجاھچ وی ےس لولاو ینوکوت ںیےتآ ںیعیگدنز یرامہ ! u೭1 8೦: 0) ےاکن بیع ںوراز ںیہ مہ ەو بجەک ۓاجاھچ وی ےس لولاو ینوکوت ںیےتآ ںیعیگدنز یرامہ ! u೭1 8೦: - ShareChat
#❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲अल्लाह हु अक़बर #🕌मस्जिद 🤲 #🤲 दुआएं #🤲 इबादत
❤️अस्सलामु अलैकुम - ज़माने के हर इक वली ने कहा K४ ಶ೩ मुझे तो अली चिािहए जो हैं हर ज़माने के मुश्किल कुशा मुझे तो अली चिािहए ७ ১৮৫১ अली का है ईमान बचपन से कामिल वो मेरा अली पंज तन में है शामिल ' मिलेगा जहाँ से नबी का पता [ मुझे तो अली चिािहए मैं सुन्नी हूँ मुझ को ये निस्बत मिली है ৫১ Lk ಶ೩ निगाहों में मेरे नजफ़ की गली है मुबारक हो तुझ को तेरा रहनुमा मुझे तो अली चिहए K४ अली की मोहब्बत है ईमाँ काहिस्सा ১৮ ೬೩ वहाँ काम आएगा मेरा भरोसा उठूंगा लहद से ये कहता हुआ मुझे तो अली নািঙ্য ये ज़िक्र ए अली है नहीं बंद होगा ৫ मेरे बाद सारा ज़माना कहेगा ! ये मीसम ने सूली पे चढ़ कर कहा मुझे तो अली चिहए ज़माने के हर इक वली ने कहा K४ ಶ೩ मुझे तो अली चिािहए जो हैं हर ज़माने के मुश्किल कुशा मुझे तो अली चिािहए ७ ১৮৫১ अली का है ईमान बचपन से कामिल वो मेरा अली पंज तन में है शामिल ' मिलेगा जहाँ से नबी का पता [ मुझे तो अली चिािहए मैं सुन्नी हूँ मुझ को ये निस्बत मिली है ৫১ Lk ಶ೩ निगाहों में मेरे नजफ़ की गली है मुबारक हो तुझ को तेरा रहनुमा मुझे तो अली चिहए K४ अली की मोहब्बत है ईमाँ काहिस्सा ১৮ ೬೩ वहाँ काम आएगा मेरा भरोसा उठूंगा लहद से ये कहता हुआ मुझे तो अली নািঙ্য ये ज़िक्र ए अली है नहीं बंद होगा ৫ मेरे बाद सारा ज़माना कहेगा ! ये मीसम ने सूली पे चढ़ कर कहा मुझे तो अली चिहए - ShareChat
#🤲अल्लाह हु अक़बर #🤲 इबादत #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲 दुआएं #🕌मस्जिद 🤲
🤲अल्लाह हु अक़बर - मनकबते बाप अफ़सोस सर से बाप का साया चला गया बे फ़िक्र ज़िंदगी का सहारा चला गया बरकत थी जिस के दम से हमारे मकान में या'नी वो बरकतों का ख़ज़ीना चला गया कुछ भी न कह सका वो बेटों से अपने आह आई क़ज़ा तो चुप के से तन्हा चला गया अफ़सोस किस के बाप से जा कर कहें ये बात दाग़ ए यतीमी दे के वो हँस्ता चला गया इक पल मुझे क़रार नहीं है तेरे बगैर रोता सिसकता छोड़ के कैसा चला गया सब सो रहे थे रात की तन्हाई में शकील गुलशन उजाड़ कर कोई साया चला गया मनकबते बाप अफ़सोस सर से बाप का साया चला गया बे फ़िक्र ज़िंदगी का सहारा चला गया बरकत थी जिस के दम से हमारे मकान में या'नी वो बरकतों का ख़ज़ीना चला गया कुछ भी न कह सका वो बेटों से अपने आह आई क़ज़ा तो चुप के से तन्हा चला गया अफ़सोस किस के बाप से जा कर कहें ये बात दाग़ ए यतीमी दे के वो हँस्ता चला गया इक पल मुझे क़रार नहीं है तेरे बगैर रोता सिसकता छोड़ के कैसा चला गया सब सो रहे थे रात की तन्हाई में शकील गुलशन उजाड़ कर कोई साया चला गया - ShareChat
#🤲अल्लाह हु अक़बर #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲 दुआएं #🕌मस्जिद 🤲 #🤲 इबादत
🤲अल्लाह हु अक़बर - 030) Mamalaldavud 030) Mamalaldavud - ShareChat
#🤲अल्लाह हु अक़बर #❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲 दुआएं #🤲 इबादत #🕌मस्जिद 🤲
🤲अल्लाह हु अक़बर - हमारे नबी ी७l६ ने फरमाया अगर तुम्हें कोई चीज़ की ज़रुरत हो जैसे सेह़त , रिज़्क़, नौकरी तो ये दुआ पढ़े %8 898|63|08|9 रब्बी इन्नी लीमा अंजलता इलैया मीन खैरीन फकीर हमारे नबी ी७l६ ने फरमाया अगर तुम्हें कोई चीज़ की ज़रुरत हो जैसे सेह़त , रिज़्क़, नौकरी तो ये दुआ पढ़े %8 898|63|08|9 रब्बी इन्नी लीमा अंजलता इलैया मीन खैरीन फकीर - ShareChat