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#✨WhatsApp शायरी🖤 #📖 शायरी स्टेटस #✨हमार विचार
✨WhatsApp शायरी🖤 - कीमत जो व्यक्ति तुम्हारी गर्भावस्था में ना समझे X उससे कभी कोई उम्मीद मत रखना कि जिंदगी में कभी वो g5RI दर्द समझ पायेगा कीमत जो व्यक्ति तुम्हारी गर्भावस्था में ना समझे X उससे कभी कोई उम्मीद मत रखना कि जिंदगी में कभी वो g5RI दर्द समझ पायेगा - ShareChat
#✨हमार विचार #✨WhatsApp शायरी🖤 #📖 शायरी स्टेटस
✨हमार विचार - बैेदर्दसे बन गएहैंदर्द सहते सहते, बहुत कुछदिल में ही दफना लिया "सब ठीक है" कहते कहते..!! बैेदर्दसे बन गएहैंदर्द सहते सहते, बहुत कुछदिल में ही दफना लिया "सब ठीक है" कहते कहते..!! - ShareChat
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📖 शायरी स्टेटस - "कड़वा सच " चुप रहना समझदारी तो है, पर ये दुनिया  ক্ধী चुप्पी  கசி है। तुम जितना सहोगे , उतना समझती लिए  কী নুদ্ক মন্কন ক छोड़ दिया जाएगा। "कड़वा सच " चुप रहना समझदारी तो है, पर ये दुनिया  ক্ধী चुप्पी  கசி है। तुम जितना सहोगे , उतना समझती लिए  কী নুদ্ক মন্কন ক छोड़ दिया जाएगा। - ShareChat
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📖 शायरी स्टेटस - लोग आपसे नहीं ' आपके अच्छे वक्त से हाथ मिलाते ह !! लोग आपसे नहीं ' आपके अच्छे वक्त से हाथ मिलाते ह !! - ShareChat
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✨हमार विचार - हर गुजरता हुआ वक्त शिखा रहा है कि अगर तुम..! कामयाब नहीं हुई तो तुम्हारा कोई अपना नहीं होगा हर गुजरता हुआ वक्त शिखा रहा है कि अगर तुम..! कामयाब नहीं हुई तो तुम्हारा कोई अपना नहीं होगा - ShareChat
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✨हमार विचार - घमंड किस बात 56 99 का यार जिंदगी एक अनजान किताब जैसी है अगले पन्न्ने पे क्या लिखा किसी को नहीं पता ४४ घमंड किस बात 56 99 का यार जिंदगी एक अनजान किताब जैसी है अगले पन्न्ने पे क्या लिखा किसी को नहीं पता ४४ - ShareChat
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✨WhatsApp शायरी🖤 - कम में खुश रहो तो खुशी में कमी नहीं होगी कम में खुश रहो तो खुशी में कमी नहीं होगी - ShareChat
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✨WhatsApp शायरी🖤 - मंडप में बैठी थी तो किसी की बुआ, किसी की दीदी किसी की मौसी॰ किसी की प्रेमिका और सबसे बढ़कर पापा की छोटी सी बेटी थी। भी थी॰ शोर भी था हँसी पर दिल कहीं चुप-चुप सा था. फेरे लेकर उठी, Ua की बहू तो किसी की पत्नी॰ किसी किसी की भाभी किसी की चाची बन गई और उसी भीड़ में खडे खड़े मैंने खुद ' को बदलते देखा. उस पल समझ आया- कि विदाई सिर्फ घर की नहीं होती बचपन की भी होती है.. 3iR # अपना एक हिस्सा वहीं छोड़ आई. Poetrynook / मंडप में बैठी थी तो किसी की बुआ, किसी की दीदी किसी की मौसी॰ किसी की प्रेमिका और सबसे बढ़कर पापा की छोटी सी बेटी थी। भी थी॰ शोर भी था हँसी पर दिल कहीं चुप-चुप सा था. फेरे लेकर उठी, Ua की बहू तो किसी की पत्नी॰ किसी किसी की भाभी किसी की चाची बन गई और उसी भीड़ में खडे खड़े मैंने खुद ' को बदलते देखा. उस पल समझ आया- कि विदाई सिर्फ घर की नहीं होती बचपन की भी होती है.. 3iR # अपना एक हिस्सा वहीं छोड़ आई. Poetrynook / - ShareChat