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#❤️अस्सलामु अलैकुम #Islam ki pyari baten 🤲🤲🤲🌃🌃🌃🕋🕋🕋🤲🤲🤲⭐⭐⭐ ameen ya rabbul alamin 🤲✨🤲♥️
❤️अस्सलामु अलैकुम - এভী ؟٢ दुआ या रब्बाना या रब्बाना या रहमान या रहमान या रहीम या रहीम या ग़फूर या ग़फूर। ऐ अल्लाह! तुझे तेरे महबूब का वास्ता में जितने भी लोग बीमार हैं या परेशान हैं पूरी दुनिया सब पर अपना करम फरमा - उन्हें माफ़ कर दे और उनकी बीमारियों और तकलीफों को दूर कर दे। या अल्लाहः जिसने मुझे यह दुआ भेजी है उसे और उसके वालिदैन को अच्छी सेहत और सलामती अता फरमा और उनकी सारी परेशानियां खत्म कर दे और जो भी इस दुआ को आगे पहुंचाए उसे हर जायज़ काम में कामयाबी अता फरमा। आमीन এভী ؟٢ दुआ या रब्बाना या रब्बाना या रहमान या रहमान या रहीम या रहीम या ग़फूर या ग़फूर। ऐ अल्लाह! तुझे तेरे महबूब का वास्ता में जितने भी लोग बीमार हैं या परेशान हैं पूरी दुनिया सब पर अपना करम फरमा - उन्हें माफ़ कर दे और उनकी बीमारियों और तकलीफों को दूर कर दे। या अल्लाहः जिसने मुझे यह दुआ भेजी है उसे और उसके वालिदैन को अच्छी सेहत और सलामती अता फरमा और उनकी सारी परेशानियां खत्म कर दे और जो भी इस दुआ को आगे पहुंचाए उसे हर जायज़ काम में कामयाबी अता फरमा। आमीन - ShareChat
#❤️अस्सलामु अलैकुम besak #Islam ki pyari baten 🤲🤲🤲🌃🌃🌃🕋🕋🕋🤲🤲🤲⭐⭐⭐
❤️अस्सलामु अलैकुम - बीवी का मकाम अल्लाह ने औरत को मर्दकी पेशानी से नहीं बनाया कि वह मर्द पर हुकूमत करे और ना ही उसके पांव से बनाया कि वह उसकी गुलामी करे X बल्कि मर्द की पसली से बनाया ताकि वह उसके दिल के करीब रहे बीवी का मकाम अल्लाह ने औरत को मर्दकी पेशानी से नहीं बनाया कि वह मर्द पर हुकूमत करे और ना ही उसके पांव से बनाया कि वह उसकी गुलामी करे X बल्कि मर्द की पसली से बनाया ताकि वह उसके दिल के करीब रहे - ShareChat
#❤️अस्सलामु अलैकुम #Islam ki pyari baten 🤲🤲🤲🌃🌃🌃🕋🕋🕋🤲🤲🤲⭐⭐⭐ subhanallah subhanallah subhanallah ❤️❤️❤️❤️
❤️अस्सलामु अलैकुम - वह गिलाफ -ए॰काबा का हुस्न, वो जमजम का पानी , वो मदीने কী যালিয়া নী ক্ূান কী Follow/ Malbb Alied ठंडी ठंडी हवाएं अल्लाह हम सबको नसीब फ़रमाए, आमीन वह गिलाफ -ए॰काबा का हुस्न, वो जमजम का पानी , वो मदीने কী যালিয়া নী ক্ূান কী Follow/ Malbb Alied ठंडी ठंडी हवाएं अल्लाह हम सबको नसीब फ़रमाए, आमीन - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - । बीबी से झगड़ा करने के बाद | जो मर्द अपनी बीबी को रुलाकर सो हैं वो ये भूल जाता हैं कि जाता अल्लाह उस औरंत कि हर आह सुनता हैं जो अपने शौहर के सिवा किसी और नहीं कहती इस्लाम कहता हैं से कुछ अगर झगड़ा भी हो जाए तो सोने से माफ़ कर देनी चाहिए पहले क्योंकि कौन जानता हैं सुबह दोनों में से कौन जिंदा रहेगा रोजाना इस्लामिक बातें जानने के लिए हमें फॉलो करें । बीबी से झगड़ा करने के बाद | जो मर्द अपनी बीबी को रुलाकर सो हैं वो ये भूल जाता हैं कि जाता अल्लाह उस औरंत कि हर आह सुनता हैं जो अपने शौहर के सिवा किसी और नहीं कहती इस्लाम कहता हैं से कुछ अगर झगड़ा भी हो जाए तो सोने से माफ़ कर देनी चाहिए पहले क्योंकि कौन जानता हैं सुबह दोनों में से कौन जिंदा रहेगा रोजाना इस्लामिक बातें जानने के लिए हमें फॉलो करें - ShareChat
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Islam ki pyari baten 🤲🤲🤲🌃🌃🌃🕋🕋🕋🤲🤲🤲⭐⭐⭐ - @Sh ఓ 9%>% مم আচান ಬಂಃಯ್ು @Sh ఓ 9%>% مم আচান ಬಂಃಯ್ು - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - 999U9UU -999 C+ هكرابم ثییدح %್; ೭ ೧೫ ಪIJy ) &-,/~ ہصغ (1.ర) [ ಛಕUಿ% ಲ _ ںیھر ںیوباقوک ےصغ (೨೦ ِمْلِحْلِل ِینِدْها َّمُهّللَا -امرفاطع یرابدرپ ےجم !دللا ےا : ہمجەرت 0601 - ںیئاجو< شوماخوق ۓآ ہصغ ೬v೦೮ ییدرک لح لئاسم یک یشوماخ -< Nisar Wri 999U9UU -999 C+ هكرابم ثییدح %್; ೭ ೧೫ ಪIJy ) &-,/~ ہصغ (1.ర) [ ಛಕUಿ% ಲ _ ںیھر ںیوباقوک ےصغ (೨೦ ِمْلِحْلِل ِینِدْها َّمُهّللَا -امرفاطع یرابدرپ ےجم !دللا ےا : ہمجەرت 0601 - ںیئاجو< شوماخوق ۓآ ہصغ ೬v೦೮ ییدرک لح لئاسم یک یشوماخ -< Nisar Wri - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - नमाज़ कबूल होने की शर्त क्या है? हम रोज़ नमाज़ पढ़ते हैं... लेकिन क्या कभी सोचा कि हमारी नमाज़ सच में कबूल हो रही है? क्या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः " अल्लाह उस नमाज़ को कबूल नहीं करता जिसमें दिल हाज़िर न हो। " यानी सिर्फ जिस्म का खडा होना काफी नहीं, नमाज़ में दिल का जुड़ना भी जरूरी है। जब नमाज़ में दिमाग  इधर उधर भागता रहे, जल्दी जल्दी रुकू॰सज्दा हो जाए, तो नमाज़ सिर्फ एक आदत बन जाती है, इबादत नहीं। असली नमाज़ वह है जिसमें इंसान महसूस करे कि वह अपने रब के सामने खडा है और 46 उससे बात कर रहा है। इसलिए अगली नमाज़ से कोशिश करेंः धीरे पढ़़ें , समझकर पढ़़ें , और दिल को भी साथ लेकर खड़े हों। क्योंकि... कबूल वही नमाज़ होती है, जिसमें दिल भी शामिल हो। ऐ अल्लाह! हमारी नमाज़ों को कबूल फरमा और हमें दिल से नमाज़ पढ़ने की तौफ़ीक़ दे। आमीन। नमाज़ कबूल होने की शर्त क्या है? हम रोज़ नमाज़ पढ़ते हैं... लेकिन क्या कभी सोचा कि हमारी नमाज़ सच में कबूल हो रही है? क्या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः " अल्लाह उस नमाज़ को कबूल नहीं करता जिसमें दिल हाज़िर न हो। " यानी सिर्फ जिस्म का खडा होना काफी नहीं, नमाज़ में दिल का जुड़ना भी जरूरी है। जब नमाज़ में दिमाग  इधर उधर भागता रहे, जल्दी जल्दी रुकू॰सज्दा हो जाए, तो नमाज़ सिर्फ एक आदत बन जाती है, इबादत नहीं। असली नमाज़ वह है जिसमें इंसान महसूस करे कि वह अपने रब के सामने खडा है और 46 उससे बात कर रहा है। इसलिए अगली नमाज़ से कोशिश करेंः धीरे पढ़़ें , समझकर पढ़़ें , और दिल को भी साथ लेकर खड़े हों। क्योंकि... कबूल वही नमाज़ होती है, जिसमें दिल भी शामिल हो। ऐ अल्लाह! हमारी नमाज़ों को कबूल फरमा और हमें दिल से नमाज़ पढ़ने की तौफ़ीक़ दे। आमीन। - ShareChat
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