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#astro #जोतिष शास्त्र #🕵ASTRO TIPS #Astrology Solutions
astro - सीता नवमीः वैशाख मास স থুনল ' पक्ष की नवमी तिथि को सीता माता का जन्म हुआ था। उनके जन्म दिवस को सीता नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखती हैं। मोहिनी एकादशीः वैशाख माह २०२६ স থুবল  पक्ष को आने वाली एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस एकादशी पर व्रत रखने से क्लेश समाप्त होते हैं और मनुष्य मोह के बंधन से मुक्त हो जाता है। नृसिंह जयंतीः माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यपु का वध करने के लिए नृसिंह अवतार लिया था। इस्कॉन और वैष्णव संप्रदाय के लोग इस तिथि को श्री नृसिंह चतुर्दशी के रूप में मनाते हैं। बुद्ध पूर्णिमाः मान्यता है कि भगवान बुद्ध विष्णु जी के नौवें अवतार थे। उन्होंने मनुष्यों को सत्य, अहिंसा, करुणा , दया एवं परम शांति का मार्ग दिखाया था। कूर्म जयंतीः इस दिन भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार लिया था। विष्णु जी के दस अवतारों में से द्वितीय अवतार को कूर्म अवतार के रूप में जाना जाता है। सीता नवमीः वैशाख मास স থুনল ' पक्ष की नवमी तिथि को सीता माता का जन्म हुआ था। उनके जन्म दिवस को सीता नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखती हैं। मोहिनी एकादशीः वैशाख माह २०२६ স থুবল  पक्ष को आने वाली एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस एकादशी पर व्रत रखने से क्लेश समाप्त होते हैं और मनुष्य मोह के बंधन से मुक्त हो जाता है। नृसिंह जयंतीः माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यपु का वध करने के लिए नृसिंह अवतार लिया था। इस्कॉन और वैष्णव संप्रदाय के लोग इस तिथि को श्री नृसिंह चतुर्दशी के रूप में मनाते हैं। बुद्ध पूर्णिमाः मान्यता है कि भगवान बुद्ध विष्णु जी के नौवें अवतार थे। उन्होंने मनुष्यों को सत्य, अहिंसा, करुणा , दया एवं परम शांति का मार्ग दिखाया था। कूर्म जयंतीः इस दिन भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार लिया था। विष्णु जी के दस अवतारों में से द्वितीय अवतार को कूर्म अवतार के रूप में जाना जाता है। - ShareChat
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जोतिष शास्त्र - परशुराम जयंतीः माना जाता है कि इस दिन भगवान परशुराम का प्रादुर्भाव हुआ था। इस दिन को भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि आज भी भगवान परशुराम महेंद्र पर्वत पर तपस्या कर रहे हैं।  तृतीयाः हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को बहुत 3&4 शुभ माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु एवं माता की पूजा ` की जाती है। भगवान विष्णु को লঃসী  के लिए इस प्रसन्न करने और अक्षय पुण्य की प्राप्ति दिन हवन, पूजा, तर्पण और दान आदि किया जाता 81 इस दिन का संबंध गंगा जी के पुनर्जन्म गंगा सप्तमीः : 4351 है। पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार गंगा जी के वेग से एक ऋषि का आश्रम नष्ट हो गया था। इससे कूपिक होकर ऋषि ने अपने तपोबल से समस्त नदी के जल को पी लिया था। इसके बाद देवताओं के आग्रह पर उ९ ऋषि ने पुनः गंगा जी को मुक्त किया। यही वजह है कि गंगा जी को ऋषि जाह्नु की पुत्री जाह्नवी कहा जाता है। परशुराम जयंतीः माना जाता है कि इस दिन भगवान परशुराम का प्रादुर्भाव हुआ था। इस दिन को भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि आज भी भगवान परशुराम महेंद्र पर्वत पर तपस्या कर रहे हैं।  तृतीयाः हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को बहुत 3&4 शुभ माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु एवं माता की पूजा ` की जाती है। भगवान विष्णु को লঃসী  के लिए इस प्रसन्न करने और अक्षय पुण्य की प्राप्ति दिन हवन, पूजा, तर्पण और दान आदि किया जाता 81 इस दिन का संबंध गंगा जी के पुनर्जन्म गंगा सप्तमीः : 4351 है। पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार गंगा जी के वेग से एक ऋषि का आश्रम नष्ट हो गया था। इससे कूपिक होकर ऋषि ने अपने तपोबल से समस्त नदी के जल को पी लिया था। इसके बाद देवताओं के आग्रह पर उ९ ऋषि ने पुनः गंगा जी को मुक्त किया। यही वजह है कि गंगा जी को ऋषि जाह्नु की पुत्री जाह्नवी कहा जाता है। - ShareChat
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🕵ASTRO TIPS - वरुथिनी एकादशीः हिंदू पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी और अमांत हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी पड़ती है। इस एकादशी पर व्रत एवं पूजन करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। वरुथिनी एकादशीः हिंदू पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी और अमांत हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी पड़ती है। इस एकादशी पर व्रत एवं पूजन करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। - ShareChat
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जोतिष शास्त्र - वरुथिनी एकादशी १३ अप्रैल, २०२६, सोमवार मेष संक्रांति १४ अप्रैल, २०२६, मंगलवार सोलर नववर्ष १४ अप्रैल , २०२६, मंगलवार परशुराम जयंती १९ अप्रैल, २०२६, रविवार १९ अप्रैल , २०२६, रविवार নূনীয়া अक्षय गंगा सप्तमी २३ अप्रैल , २०२६ गुरुवार सीता नवमी २५ अप्रैल , २०२६, शनिवार मोहिनी एकादशी२७ अप्रैल , २०२६, सोमवार नृसिंह जयंती ३० अप्रैल , २०२६, गुरुवार ०१ मई, २०२६, शुक्रवार !fuf J वैशाख पूर्णिमा ०१ मई, २०२६, शुक्रवार वरुथिनी एकादशी १३ अप्रैल, २०२६, सोमवार मेष संक्रांति १४ अप्रैल, २०२६, मंगलवार सोलर नववर्ष १४ अप्रैल , २०२६, मंगलवार परशुराम जयंती १९ अप्रैल, २०२६, रविवार १९ अप्रैल , २०२६, रविवार নূনীয়া अक्षय गंगा सप्तमी २३ अप्रैल , २०२६ गुरुवार सीता नवमी २५ अप्रैल , २०२६, शनिवार मोहिनी एकादशी२७ अप्रैल , २०२६, सोमवार नृसिंह जयंती ३० अप्रैल , २०२६, गुरुवार ०१ मई, २०२६, शुक्रवार !fuf J वैशाख पूर्णिमा ०१ मई, २०२६, शुक्रवार - ShareChat
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Astrology Solutions - १२ भावों में मंगल ग्रह का किस प्रकार के फल देता 8? ग्यारहवां भाव ग्यारहवें भाव में मंगल आय के नए स्रोत बनाता है। मित्रों से लाभ और इच्छाओं की पूर्ति के अवसर मिलते हैं। बारहवां भाव बारहवें भाव में मंगल खर्च बढ़ा सकता है और विदेश से जुड़ी संभावनाएं देता है। गुप्त से सावधानी शत्रुओं रखनी चाहिए। आध्यात्मिक झुकाव भी बढ सकता 81 १२ भावों में मंगल ग्रह का किस प्रकार के फल देता 8? ग्यारहवां भाव ग्यारहवें भाव में मंगल आय के नए स्रोत बनाता है। मित्रों से लाभ और इच्छाओं की पूर्ति के अवसर मिलते हैं। बारहवां भाव बारहवें भाव में मंगल खर्च बढ़ा सकता है और विदेश से जुड़ी संभावनाएं देता है। गुप्त से सावधानी शत्रुओं रखनी चाहिए। आध्यात्मिक झुकाव भी बढ सकता 81 - ShareChat
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🕵ASTRO TIPS - १२ भावों में मंगल ग्रह का किस प्रकार के फल देता নীবা সাব नौवें भाव में मंगल भाग्य को कर्म के माध्यम से मजबूत करता है। पिता या गुरु से विचारों में मतभेद संभव है। धार्मिक और साहसिक यात्राओं का योग बनता है। दसवां भाव दसवें भाव में मंगल करियर में ऊंचा पद और प्रशासनिक क्षमता देता है। व्यक्ति मेहनती और प्रभावशाली होता है। पुलिस , सेना, इंजीनियरिंग या तकनीकी क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। १२ भावों में मंगल ग्रह का किस प्रकार के फल देता নীবা সাব नौवें भाव में मंगल भाग्य को कर्म के माध्यम से मजबूत करता है। पिता या गुरु से विचारों में मतभेद संभव है। धार्मिक और साहसिक यात्राओं का योग बनता है। दसवां भाव दसवें भाव में मंगल करियर में ऊंचा पद और प्रशासनिक क्षमता देता है। व्यक्ति मेहनती और प्रभावशाली होता है। पुलिस , सेना, इंजीनियरिंग या तकनीकी क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। - ShareChat
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Astrology Solutions - १२ भावों में मंगल ग्रह का किस प्रकार के फल देता qiqqi HIq पांचवें भाव में मंगल प्रेम संबंधों में तीव्रता और उत्साह देता है। बुद्धि तेज होती है, पर संतान पक्ष में चिंता या देरी की स्थिति बन सकती है। छठा भाव दे सकता है। रिश्तों में भाव में मंगल ব্রুনীনিযা मतभेद या स्वास्थ्य संबंधी छोटी परेशानियां संभव हैं। सातवां भाव सातवें भाव में मंगल वैवाहिक जीवन में तकरार या तनाव की स्थिति बना सकता है। जीवनसाथी ऊर्जावान और प्रभावशाली हो सकता है। व्यापारिक साझेदारी में सावधानी जरूरी है। आठवां भाव आठवें भाव में मंगल अचानक घटनाओं और संकेत देता है। दुर्घटना या जोखिम उतार चढ़ाव का चाहिए। ; से सावधानी रखनी व्यक्ति को गूढ़ विषयों में रुचि हो सकती है। १२ भावों में मंगल ग्रह का किस प्रकार के फल देता qiqqi HIq पांचवें भाव में मंगल प्रेम संबंधों में तीव्रता और उत्साह देता है। बुद्धि तेज होती है, पर संतान पक्ष में चिंता या देरी की स्थिति बन सकती है। छठा भाव दे सकता है। रिश्तों में भाव में मंगल ব্রুনীনিযা मतभेद या स्वास्थ्य संबंधी छोटी परेशानियां संभव हैं। सातवां भाव सातवें भाव में मंगल वैवाहिक जीवन में तकरार या तनाव की स्थिति बना सकता है। जीवनसाथी ऊर्जावान और प्रभावशाली हो सकता है। व्यापारिक साझेदारी में सावधानी जरूरी है। आठवां भाव आठवें भाव में मंगल अचानक घटनाओं और संकेत देता है। दुर्घटना या जोखिम उतार चढ़ाव का चाहिए। ; से सावधानी रखनी व्यक्ति को गूढ़ विषयों में रुचि हो सकती है। - ShareChat
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🕵ASTRO TIPS - १२ भावों में मंगल ग्रह का किस प्रकार के फल देता पहला भाव पहले भाव में मंगल व्यक्ति को साहसी , ऊर्जावान और आत्मविश्वासी बनाता है। ऐसा व्यक्ति नेतृत्व क्षमता वाला, स्पष्टवादी और तेज स्वभाव का होता है। कभी ्कभी जल्दबाज़ी और गु़स्सा भी दिखाई दे सकता RI HIq दूसरे भाव में मंगल वाणी को कठोर बना सकता है, जिससे पारिवारिक विवाद की संभावना रहती है। धन कमाने की क्षमता मजबूत होती है, पर खर्च भी अधिक हो सकता है। নীময সাব तीसरे भाव में मंगल पराक्रम , हिम्मत और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ाता है। व्यक्ति साहसी और कर्मठ alat 81 भाई-बहनों से संबंध में उतार ्चढ़ाव संभव | है, पर प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलती है। १२ भावों में मंगल ग्रह का किस प्रकार के फल देता पहला भाव पहले भाव में मंगल व्यक्ति को साहसी , ऊर्जावान और आत्मविश्वासी बनाता है। ऐसा व्यक्ति नेतृत्व क्षमता वाला, स्पष्टवादी और तेज स्वभाव का होता है। कभी ्कभी जल्दबाज़ी और गु़स्सा भी दिखाई दे सकता RI HIq दूसरे भाव में मंगल वाणी को कठोर बना सकता है, जिससे पारिवारिक विवाद की संभावना रहती है। धन कमाने की क्षमता मजबूत होती है, पर खर्च भी अधिक हो सकता है। নীময সাব तीसरे भाव में मंगल पराक्रम , हिम्मत और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ाता है। व्यक्ति साहसी और कर्मठ alat 81 भाई-बहनों से संबंध में उतार ्चढ़ाव संभव | है, पर प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलती है। - ShareChat
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Astrology Solutions - दर्श अमावस्या २०२६ कब है इस बार १८ मार्च, २०२६ को बुधवार के दिन चैत्र अमावस्या तिथि अमावस्या पर दर्श अमावस्या है। १८ मार्च, २०२६ को सुबह ०८ बजकर २८ मिनट पर शुरू होगी और १९ मार्च, २०२६ को सुबह ०६ बजकर ५५ मिनट पर खत्म होगी। इस दिन शुभ योग बन रहा है। दर्श अमावस्या २०२६ कब है इस बार १८ मार्च, २०२६ को बुधवार के दिन चैत्र अमावस्या तिथि अमावस्या पर दर्श अमावस्या है। १८ मार्च, २०२६ को सुबह ०८ बजकर २८ मिनट पर शुरू होगी और १९ मार्च, २०२६ को सुबह ०६ बजकर ५५ मिनट पर खत्म होगी। इस दिन शुभ योग बन रहा है। - ShareChat
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🕵ASTRO TIPS - सभी १२ भावों में बृहस्पति ग्रह का महत्व ग्यारहवां भाव एकादश भाव में बृहस्पति आय, लाभ और इच्छाओं की पूर्ति कराता है। मित्रों और बड़े नेटवर्क से लाभ FdFT గేI बारहवां भाव द्वादश भाव में बृहस्पति आध्यात्मिकता , दान और विदेश संबंधों को बढ़ाता है। खर्च अधिक होता है लेकिन पुण्य कर्मों से मानसिक संतोष मिलता है। सभी १२ भावों में बृहस्पति ग्रह का महत्व ग्यारहवां भाव एकादश भाव में बृहस्पति आय, लाभ और इच्छाओं की पूर्ति कराता है। मित्रों और बड़े नेटवर्क से लाभ FdFT గేI बारहवां भाव द्वादश भाव में बृहस्पति आध्यात्मिकता , दान और विदेश संबंधों को बढ़ाता है। खर्च अधिक होता है लेकिन पुण्य कर्मों से मानसिक संतोष मिलता है। - ShareChat