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#जोतिष शास्त्र #🕵ASTRO TIPS #astro #Astrology Solutions
जोतिष शास्त्र - সিথুন ' राशि में गोचरः ग्रहों के राजकुमार के बुध का नाम से प्रसिद्ध बुध ग्रह २९ मई, २०२६ की सुबह ೫ಶ೯: राशि में गोचर करेंगे। 11 چ সিথুন ' राशि में गोचरः ग्रहों के राजकुमार के बुध का नाम से प्रसिद्ध बुध ग्रह २९ मई, २०२६ की सुबह ೫ಶ೯: राशि में गोचर करेंगे। 11 چ - ShareChat
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Astrology Solutions - बुध का वृषभ राशि में गोचरः वर्ष २०२६ में १५ मई को रात्रि ००:१ 8 बजे , बुध ग्रह मेष राशि को छोड़कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। वृषभ राशि में सूर्य का गोचरः सूर्य १५ मई, शुक्रवार को प्रातः ०६:०० बजे अपनी उच्च राशि मेष से निकलकर शुक्र ग्रह की स्वामित्व वाली वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। #ge बुध का वृषभ राशि में उदयः वैदिक ज्योतिष को बुद्धि, वाणी , तर्क और संचार कौशल का कारक माना जाता है जो २६ मई २०२६ की रात ११ बजकर १९ मिनट पर वृषभ राशि में उदित होने जा रहे हैं। बुध का वृषभ राशि में गोचरः वर्ष २०२६ में १५ मई को रात्रि ००:१ 8 बजे , बुध ग्रह मेष राशि को छोड़कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। वृषभ राशि में सूर्य का गोचरः सूर्य १५ मई, शुक्रवार को प्रातः ०६:०० बजे अपनी उच्च राशि मेष से निकलकर शुक्र ग्रह की स्वामित्व वाली वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। #ge बुध का वृषभ राशि में उदयः वैदिक ज्योतिष को बुद्धि, वाणी , तर्क और संचार कौशल का कारक माना जाता है जो २६ मई २०२६ की रात ११ बजकर १९ मिनट पर वृषभ राशि में उदित होने जा रहे हैं। - ShareChat
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🕵ASTRO TIPS - बुध मेष राशि में अस्तः ०१ मई, २०२६ को रात्रि ११ मिनट पर बुध मेष राशि में अस्त होने जा बजकर ०८ रहे हैं। मंगल का मेष राशि में गोचरः ११ मई २०२६, सोमवार को दोपहर १ २:५० बजे मंगल ग्रह अपने मित्र बृहस्पति की मीन राशि से निकलकर अपनी स्वामित्व वाली मेष राशि में प्रवेश करेंगे| मिथुन : राशि में गोचरः वर्ष २०२६ में १४ मई शुक्र का ' को प्रातः १०:३५ बजे शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि वृषभ को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। बुध मेष राशि में अस्तः ०१ मई, २०२६ को रात्रि ११ मिनट पर बुध मेष राशि में अस्त होने जा बजकर ०८ रहे हैं। मंगल का मेष राशि में गोचरः ११ मई २०२६, सोमवार को दोपहर १ २:५० बजे मंगल ग्रह अपने मित्र बृहस्पति की मीन राशि से निकलकर अपनी स्वामित्व वाली मेष राशि में प्रवेश करेंगे| मिथुन : राशि में गोचरः वर्ष २०२६ में १४ मई शुक्र का ' को प्रातः १०:३५ बजे शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि वृषभ को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। - ShareChat
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Astrology Solutions - व्रतः २८ मई, २०२६ को गुरुवार के दिन पूर्णिमा पूर्णिमा व्रत है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखता है। नए कार्यों की शुरुआत के लिए पूर्णिमा के दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रदोष व्रत (शुक्ल)ः २८ मई, २०२६ को शुक्रवार के ही दिन शुक्ल पक्ष में आने वाला प्रदोष व्रत भी है। यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित होता है। प्रदोष व्रत से जातक को दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। व्रतः २८ मई, २०२६ को गुरुवार के दिन पूर्णिमा पूर्णिमा व्रत है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखता है। नए कार्यों की शुरुआत के लिए पूर्णिमा के दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रदोष व्रत (शुक्ल)ः २८ मई, २०२६ को शुक्रवार के ही दिन शुक्ल पक्ष में आने वाला प्रदोष व्रत भी है। यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित होता है। प्रदोष व्रत से जातक को दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। - ShareChat
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जोतिष शास्त्र - ज्येष्ठ अमावस्याः १६ मई, २०२६ को ज्येष्ठ अमावस्या है। ज्येष्ठ माह में आने वाली अमावस्या को ज्येष्ठ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन शनि जयंती का पर्व भी मनाया जाता है। उत्तर भारत में सुहागिन महिलाएं ज्येष्ठ अमावस्या के दिन अपने पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री का व्रत करती हैं। पद्मिनी एकादशीः २७ मई, २०२६ को बुधवार के दिन पद्मिनी एकादशी है। इसे कमला या पुरुषोत्तमी भी कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत एकादशी रखने के लिए कोई चंद्र मास तय नहीं है। इस दिन की पूजा होती है। विष्णु : भगवान ज्येष्ठ अमावस्याः १६ मई, २०२६ को ज्येष्ठ अमावस्या है। ज्येष्ठ माह में आने वाली अमावस्या को ज्येष्ठ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन शनि जयंती का पर्व भी मनाया जाता है। उत्तर भारत में सुहागिन महिलाएं ज्येष्ठ अमावस्या के दिन अपने पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री का व्रत करती हैं। पद्मिनी एकादशीः २७ मई, २०२६ को बुधवार के दिन पद्मिनी एकादशी है। इसे कमला या पुरुषोत्तमी भी कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत एकादशी रखने के लिए कोई चंद्र मास तय नहीं है। इस दिन की पूजा होती है। विष्णु : भगवान - ShareChat
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जोतिष शास्त्र - বৃষ্ণ্ যক্কানি: 15 সং, 2026 ক্ষী থুক্কণাৎ ক্ষী वृषभ संक्रांति है। इस दिन सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। जब-जब सूर्य अपनी राशि परिवर्तन करते हैं, वह दिन सभी तरह के शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ होता है। मासिक शिवरात्रिः १५ मई, २०२६ को शुक्रवार के दिन वृषभ संक्रांति के साथ ही मासिक शिवरात्रि भी है। मासिक शिवरात्रि हर महीने आती है। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित होता है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। বৃষ্ণ্ যক্কানি: 15 সং, 2026 ক্ষী থুক্কণাৎ ক্ষী वृषभ संक्रांति है। इस दिन सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। जब-जब सूर्य अपनी राशि परिवर्तन करते हैं, वह दिन सभी तरह के शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ होता है। मासिक शिवरात्रिः १५ मई, २०२६ को शुक्रवार के दिन वृषभ संक्रांति के साथ ही मासिक शिवरात्रि भी है। मासिक शिवरात्रि हर महीने आती है। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित होता है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। - ShareChat
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Astrology Solutions - एकादशीः १३ मई, २०२६ को बुधवार के दिन अपरा एकादशी पड़ रही है। इसे अजला एकादशी के अपरा नाम से भी जाना जाता है अपरा एकादशी हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर आती है। मान्यता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन के समान फल मिलता है। प्रदोष व्रत (कृष्ण): १४ मई, २०२६ को गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा। कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर प्रदोष व्रत रखने का विधान है। यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है। इस व्रत को सच्चे मन से करने पर मनचाहा वर मिलता है। एकादशीः १३ मई, २०२६ को बुधवार के दिन अपरा एकादशी पड़ रही है। इसे अजला एकादशी के अपरा नाम से भी जाना जाता है अपरा एकादशी हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि पर आती है। मान्यता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन के समान फल मिलता है। प्रदोष व्रत (कृष्ण): १४ मई, २०२६ को गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा। कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर प्रदोष व्रत रखने का विधान है। यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है। इस व्रत को सच्चे मन से करने पर मनचाहा वर मिलता है। - ShareChat
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🕵ASTRO TIPS - वैशाख पूर्णिमा व्रतः ०१ मई, शुक्रवार के दिन वैशाख पूर्णिमा पड़ रही है। यह वर्ष में एक बार आती है और इस पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा एवं सत्य विनायक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था इसलिए बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए वैशाख पूर्णिमा का दिन खास महत्व रखता है। संकष्टी चतुर्थीः ०५ मई, २०२६ को मंगलवार के दिन संकष्टी चतुर्थी है। यह तिथि एवं पर्व प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित होती है। श्री गणेश की कृपा पाने के लिए भक्त संकष्टी का व्रत करते चतुर्थी : 81 वैशाख पूर्णिमा व्रतः ०१ मई, शुक्रवार के दिन वैशाख पूर्णिमा पड़ रही है। यह वर्ष में एक बार आती है और इस पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा एवं सत्य विनायक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था इसलिए बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए वैशाख पूर्णिमा का दिन खास महत्व रखता है। संकष्टी चतुर्थीः ०५ मई, २०२६ को मंगलवार के दिन संकष्टी चतुर्थी है। यह तिथि एवं पर्व प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित होती है। श्री गणेश की कृपा पाने के लिए भक्त संकष्टी का व्रत करते चतुर्थी : 81 - ShareChat
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astro - मई २०२६त्योहार शुक्रवार वैशाख पूर्णिमा व्रत 1 चतुर्थी ५ मंगलवार संकष्टी १३ बुधवार अपरा एकादशी १४ गुरुवार प्रदोष व्रत (कृष्ण) 5 शुक्रवार मासिक शिवरात्रि, वृष संक्रां १६ शनिवारज्येष्ठ अमावस्या २७ बुधवार पद्मिनी एकादशी २८ गुरुवार प्रदोष व्रत (शुक्ल) ३१ रविवार पूर्णिमा व्रत मई २०२६त्योहार शुक्रवार वैशाख पूर्णिमा व्रत 1 चतुर्थी ५ मंगलवार संकष्टी १३ बुधवार अपरा एकादशी १४ गुरुवार प्रदोष व्रत (कृष्ण) 5 शुक्रवार मासिक शिवरात्रि, वृष संक्रां १६ शनिवारज्येष्ठ अमावस्या २७ बुधवार पद्मिनी एकादशी २८ गुरुवार प्रदोष व्रत (शुक्ल) ३१ रविवार पूर्णिमा व्रत - ShareChat
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जोतिष शास्त्र - मई २०२६ का ज्योतिषीय तथ्य और हिंदू पंचांग की UIHI ०१ मई, २०२६ को इस मास की शुरुआत शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर चित्रा नक्षत्र में होगी और इसका कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को ज्येष्ठा समापन नक्षत्र में रविवार के दिन ३१ मई, २०२६ को होगा। मई २०२६ का पंचांग जानने के बाद अब हम चर्चा करेंगे इस माह में पड़ने वाले व्रत ्त्योहारों के बारे में । मई २०२६ का ज्योतिषीय तथ्य और हिंदू पंचांग की UIHI ०१ मई, २०२६ को इस मास की शुरुआत शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर चित्रा नक्षत्र में होगी और इसका कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को ज्येष्ठा समापन नक्षत्र में रविवार के दिन ३१ मई, २०२६ को होगा। मई २०२६ का पंचांग जानने के बाद अब हम चर्चा करेंगे इस माह में पड़ने वाले व्रत ्त्योहारों के बारे में । - ShareChat