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#Astrology Solutions #🕵ASTRO TIPS #astro #जोतिष शास्त्र
Astrology Solutions - १२ भावों में शुक्र ग्रह का महत्व नवम भाव इस भाव में शुक्र भाग्य का साथ, धार्मिक रुचि और लंबी यात्राओं से लाभ मिलता है। जीवन में सुख ्समृद्धि आती है। दशम भाव दसवें भाव में शुक्र करियर में सफलता, खासकर मीडिया, फैशन या ग्लैमर से जुड़े क्षेत्रों में कला उन्नति होती है। एकादश भाव ग्यारहवें भाव में शुक्र आय में वृद्धि, अच्छे मित्र और इच्छाओं की पूर्ति होती है। नेटवर्किंग से लाभ मिलता 81 द्वादश भाव बारहवें भाव में शुक्र विदेश यात्रा , खर्चों में वृद्धि और भोग विलास की ओर झुकाव रहता है। निजी जीवन gq मिल सकता है, लेकिन संतुलन जरूरी होता 8 १२ भावों में शुक्र ग्रह का महत्व नवम भाव इस भाव में शुक्र भाग्य का साथ, धार्मिक रुचि और लंबी यात्राओं से लाभ मिलता है। जीवन में सुख ्समृद्धि आती है। दशम भाव दसवें भाव में शुक्र करियर में सफलता, खासकर मीडिया, फैशन या ग्लैमर से जुड़े क्षेत्रों में कला उन्नति होती है। एकादश भाव ग्यारहवें भाव में शुक्र आय में वृद्धि, अच्छे मित्र और इच्छाओं की पूर्ति होती है। नेटवर्किंग से लाभ मिलता 81 द्वादश भाव बारहवें भाव में शुक्र विदेश यात्रा , खर्चों में वृद्धि और भोग विलास की ओर झुकाव रहता है। निजी जीवन gq मिल सकता है, लेकिन संतुलन जरूरी होता 8 - ShareChat
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astro - १२ भावों में शुक्र ग्रह का महत्व Iq छठ शुक्र रिश्तों में थोड़ी परेशानियां आ सकती हैं। से सावधानी रखनी पडती है। स्वास्थ्य और शत्रुओं ` सातवां भाव fag' शुक्र विवाह और पार्टनरशिप के बहुत शुभ माना जाता है। जीवनसाथी आकर्षक और सहयोगी होता 81 आठवां भाव इस भाव में शुक्र गुप्त सुख, अचानक धन लाभ और गहरे भावनात्मक संबंध देता है, लेकिन उतार चढ़ाव भी ला सकता है। १२ भावों में शुक्र ग्रह का महत्व Iq छठ शुक्र रिश्तों में थोड़ी परेशानियां आ सकती हैं। से सावधानी रखनी पडती है। स्वास्थ्य और शत्रुओं ` सातवां भाव fag' शुक्र विवाह और पार्टनरशिप के बहुत शुभ माना जाता है। जीवनसाथी आकर्षक और सहयोगी होता 81 आठवां भाव इस भाव में शुक्र गुप्त सुख, अचानक धन लाभ और गहरे भावनात्मक संबंध देता है, लेकिन उतार चढ़ाव भी ला सकता है। - ShareChat
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जोतिष शास्त्र - १२ भावों में शुक्र ग्रह का महत्व पहला भाव शुक्र व्यक्ति आकर्षक व्यक्तित्व वाला, सुंदर और मिलनसार होता है। लोग इसकी ओर आसानी से आकर्षित होते हैं। दूसरा भाव शुक्र वाणी होती है और धन संपत्ति की प्राप्ति मधुर ` में सुख होती है। परिवार और समृद्धि रहती है। fI HIq में निपुणता देता शुक्र रचनात्मकता , कला और संचार है। भाई-बहनों से अच्छे संबंध रहते हैं। चौथे भाव शुक्र घर, वाहन और भौतिक  की प्राप्ति होती सुखों है। माता से प्रेम और घर का माहौल सुखद रहता है। पांचवां भाव शुक्र प्रेम संबंधों में सफलता , रोमांस और क्रिएटिविटी बढ़ती है। संतान सुख भी अच्छा रहता 8 १२ भावों में शुक्र ग्रह का महत्व पहला भाव शुक्र व्यक्ति आकर्षक व्यक्तित्व वाला, सुंदर और मिलनसार होता है। लोग इसकी ओर आसानी से आकर्षित होते हैं। दूसरा भाव शुक्र वाणी होती है और धन संपत्ति की प्राप्ति मधुर ` में सुख होती है। परिवार और समृद्धि रहती है। fI HIq में निपुणता देता शुक्र रचनात्मकता , कला और संचार है। भाई-बहनों से अच्छे संबंध रहते हैं। चौथे भाव शुक्र घर, वाहन और भौतिक  की प्राप्ति होती सुखों है। माता से प्रेम और घर का माहौल सुखद रहता है। पांचवां भाव शुक्र प्रेम संबंधों में सफलता , रोमांस और क्रिएटिविटी बढ़ती है। संतान सुख भी अच्छा रहता 8 - ShareChat
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🕵ASTRO TIPS - मिथुन ` राशि में गोचर : तिथि और समय থুক্ধ ক্ূা वर्ष २०२६ में १४ मई की सुबह १० बजकर ३५ मिनट पर शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि वृषभ को छोड़कर সিথুন ' राशि में प्रवेश करेंगे। यह गोचर ज्योतिषीय से सामान्य रूप से शुभ और सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जा रहा है। शुक्र ग्रह का ٨؟٩ राशि में गोचर इसलिए भी विशेष है क्योंकि সিথুন ' राशि के स्वामी बुध हैं, जो शुक्र के मित्र ग्रह माने जाते हैं। मिथुन ` राशि में गोचर : तिथि और समय থুক্ধ ক্ূা वर्ष २०२६ में १४ मई की सुबह १० बजकर ३५ मिनट पर शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि वृषभ को छोड़कर সিথুন ' राशि में प्रवेश करेंगे। यह गोचर ज्योतिषीय से सामान्य रूप से शुभ और सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जा रहा है। शुक्र ग्रह का ٨؟٩ राशि में गोचर इसलिए भी विशेष है क्योंकि সিথুন ' राशि के स्वामी बुध हैं, जो शुक्र के मित्र ग्रह माने जाते हैं। - ShareChat
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जोतिष शास्त्र - সিথুন ' राशि में गोचरः ग्रहों के राजकुमार के बुध का नाम से प्रसिद्ध बुध ग्रह २९ मई, २०२६ की सुबह ೫ಶ೯: राशि में गोचर करेंगे। 11 چ সিথুন ' राशि में गोचरः ग्रहों के राजकुमार के बुध का नाम से प्रसिद्ध बुध ग्रह २९ मई, २०२६ की सुबह ೫ಶ೯: राशि में गोचर करेंगे। 11 چ - ShareChat
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Astrology Solutions - बुध का वृषभ राशि में गोचरः वर्ष २०२६ में १५ मई को रात्रि ००:१ 8 बजे , बुध ग्रह मेष राशि को छोड़कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। वृषभ राशि में सूर्य का गोचरः सूर्य १५ मई, शुक्रवार को प्रातः ०६:०० बजे अपनी उच्च राशि मेष से निकलकर शुक्र ग्रह की स्वामित्व वाली वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। #ge बुध का वृषभ राशि में उदयः वैदिक ज्योतिष को बुद्धि, वाणी , तर्क और संचार कौशल का कारक माना जाता है जो २६ मई २०२६ की रात ११ बजकर १९ मिनट पर वृषभ राशि में उदित होने जा रहे हैं। बुध का वृषभ राशि में गोचरः वर्ष २०२६ में १५ मई को रात्रि ००:१ 8 बजे , बुध ग्रह मेष राशि को छोड़कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। वृषभ राशि में सूर्य का गोचरः सूर्य १५ मई, शुक्रवार को प्रातः ०६:०० बजे अपनी उच्च राशि मेष से निकलकर शुक्र ग्रह की स्वामित्व वाली वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। #ge बुध का वृषभ राशि में उदयः वैदिक ज्योतिष को बुद्धि, वाणी , तर्क और संचार कौशल का कारक माना जाता है जो २६ मई २०२६ की रात ११ बजकर १९ मिनट पर वृषभ राशि में उदित होने जा रहे हैं। - ShareChat
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🕵ASTRO TIPS - बुध मेष राशि में अस्तः ०१ मई, २०२६ को रात्रि ११ मिनट पर बुध मेष राशि में अस्त होने जा बजकर ०८ रहे हैं। मंगल का मेष राशि में गोचरः ११ मई २०२६, सोमवार को दोपहर १ २:५० बजे मंगल ग्रह अपने मित्र बृहस्पति की मीन राशि से निकलकर अपनी स्वामित्व वाली मेष राशि में प्रवेश करेंगे| मिथुन : राशि में गोचरः वर्ष २०२६ में १४ मई शुक्र का ' को प्रातः १०:३५ बजे शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि वृषभ को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। बुध मेष राशि में अस्तः ०१ मई, २०२६ को रात्रि ११ मिनट पर बुध मेष राशि में अस्त होने जा बजकर ०८ रहे हैं। मंगल का मेष राशि में गोचरः ११ मई २०२६, सोमवार को दोपहर १ २:५० बजे मंगल ग्रह अपने मित्र बृहस्पति की मीन राशि से निकलकर अपनी स्वामित्व वाली मेष राशि में प्रवेश करेंगे| मिथुन : राशि में गोचरः वर्ष २०२६ में १४ मई शुक्र का ' को प्रातः १०:३५ बजे शुक्र ग्रह अपनी स्वराशि वृषभ को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। - ShareChat
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Astrology Solutions - व्रतः २८ मई, २०२६ को गुरुवार के दिन पूर्णिमा पूर्णिमा व्रत है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखता है। नए कार्यों की शुरुआत के लिए पूर्णिमा के दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रदोष व्रत (शुक्ल)ः २८ मई, २०२६ को शुक्रवार के ही दिन शुक्ल पक्ष में आने वाला प्रदोष व्रत भी है। यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित होता है। प्रदोष व्रत से जातक को दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। व्रतः २८ मई, २०२६ को गुरुवार के दिन पूर्णिमा पूर्णिमा व्रत है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखता है। नए कार्यों की शुरुआत के लिए पूर्णिमा के दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रदोष व्रत (शुक्ल)ः २८ मई, २०२६ को शुक्रवार के ही दिन शुक्ल पक्ष में आने वाला प्रदोष व्रत भी है। यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित होता है। प्रदोष व्रत से जातक को दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। - ShareChat
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जोतिष शास्त्र - ज्येष्ठ अमावस्याः १६ मई, २०२६ को ज्येष्ठ अमावस्या है। ज्येष्ठ माह में आने वाली अमावस्या को ज्येष्ठ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन शनि जयंती का पर्व भी मनाया जाता है। उत्तर भारत में सुहागिन महिलाएं ज्येष्ठ अमावस्या के दिन अपने पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री का व्रत करती हैं। पद्मिनी एकादशीः २७ मई, २०२६ को बुधवार के दिन पद्मिनी एकादशी है। इसे कमला या पुरुषोत्तमी भी कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत एकादशी रखने के लिए कोई चंद्र मास तय नहीं है। इस दिन की पूजा होती है। विष्णु : भगवान ज्येष्ठ अमावस्याः १६ मई, २०२६ को ज्येष्ठ अमावस्या है। ज्येष्ठ माह में आने वाली अमावस्या को ज्येष्ठ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन शनि जयंती का पर्व भी मनाया जाता है। उत्तर भारत में सुहागिन महिलाएं ज्येष्ठ अमावस्या के दिन अपने पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री का व्रत करती हैं। पद्मिनी एकादशीः २७ मई, २०२६ को बुधवार के दिन पद्मिनी एकादशी है। इसे कमला या पुरुषोत्तमी भी कहा जाता है। इस एकादशी का व्रत एकादशी रखने के लिए कोई चंद्र मास तय नहीं है। इस दिन की पूजा होती है। विष्णु : भगवान - ShareChat
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जोतिष शास्त्र - বৃষ্ণ্ যক্কানি: 15 সং, 2026 ক্ষী থুক্কণাৎ ক্ষী वृषभ संक्रांति है। इस दिन सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। जब-जब सूर्य अपनी राशि परिवर्तन करते हैं, वह दिन सभी तरह के शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ होता है। मासिक शिवरात्रिः १५ मई, २०२६ को शुक्रवार के दिन वृषभ संक्रांति के साथ ही मासिक शिवरात्रि भी है। मासिक शिवरात्रि हर महीने आती है। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित होता है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। বৃষ্ণ্ যক্কানি: 15 সং, 2026 ক্ষী থুক্কণাৎ ক্ষী वृषभ संक्रांति है। इस दिन सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। जब-जब सूर्य अपनी राशि परिवर्तन करते हैं, वह दिन सभी तरह के शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ होता है। मासिक शिवरात्रिः १५ मई, २०२६ को शुक्रवार के दिन वृषभ संक्रांति के साथ ही मासिक शिवरात्रि भी है। मासिक शिवरात्रि हर महीने आती है। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित होता है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि का व्रत किया जाता है। - ShareChat