Avadi Sadam
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क्या तेरा दिल भी ऐसे धड़कता हैं ..
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naats status - या नबी सलाम अलैका या रसूल सलाम अलैका हबीब सलाम अलैका या যা মলবানুলাম ওলব্ধা के ताज वाले रहमतों दो जहाँ के राज वाले अर्थ की मेराज वाले आसियों की लाज वाले तलअल बद्रु अलैना मिन सनिय्यतिल वदाइ वजब श्शुक्रु अलैना मा दआ लिल्लाहि दाई जान कर काफ़ी सहारा ले लिया है दर तुम्हारा a ख़ल्क़ के वारिस   ख़ुदारा লী মলাম ওন নী কমাহ 8_ अज़ तुफ़ैल ए ग़ौस ए आज़म बादशाह ए हर दोआलम सदक़ा ए इमाम ए आज़म 1,109 दूर हों सभी के रंज ओ ग़म ज़िंदगी है उन का सदक़ा बंदगी है उन का सदक़ा 8१४६  ruha Iaelt 052 CT Salam रौशर्न। ह उने सदक़ा urood 0 हर ख़शी है उन क 3 क्ा सदक़ा या नबी सलाम अलैका सलाम ऐसी॰ या नबी सलाम अलैका या रसूल सलाम अलैका हबीब सलाम अलैका या যা মলবানুলাম ওলব্ধা के ताज वाले रहमतों दो जहाँ के राज वाले अर्थ की मेराज वाले आसियों की लाज वाले तलअल बद्रु अलैना मिन सनिय्यतिल वदाइ वजब श्शुक्रु अलैना मा दआ लिल्लाहि दाई जान कर काफ़ी सहारा ले लिया है दर तुम्हारा a ख़ल्क़ के वारिस   ख़ुदारा লী মলাম ওন নী কমাহ 8_ अज़ तुफ़ैल ए ग़ौस ए आज़म बादशाह ए हर दोआलम सदक़ा ए इमाम ए आज़म 1,109 दूर हों सभी के रंज ओ ग़म ज़िंदगी है उन का सदक़ा बंदगी है उन का सदक़ा 8१४६  ruha Iaelt 052 CT Salam रौशर्न। ह उने सदक़ा urood 0 हर ख़शी है उन क 3 क्ा सदक़ा या नबी सलाम अलैका सलाम ऐसी॰ - ShareChat
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mera प्यारा इस्लाम😊😍 - रूला देने वाली नात > शाह-ए मदीना! सुनें इल्तिज़ा मदीना बुला लीजिए कहीं मर न जाए तुम्हारा गदा. मदीना बुला लीजिए. सताती है मुझ को, रुलाती है मुझ को ये दुनिया बहुत आज़माती है मुझ को हूँ दुनिया की बातों से टूटा हुआमदीना बुला लीजिए बड़ी बेकसी है, बड़ी बे॰क़रारी न कट जाए, आक़ा ! यूँही उम्र सारी हाँ ज़िंदगानी का कुछ है पता मदीना बुला लीजिए ये एहसास है मुझ को, मैं हूँ कमीना हुजूर ! आप चाहें तो आऊँ मदीना गुनाहों के दलदल में मैं हूँ फँसा मदीना बुला लीजिए मैं देखूँ वो रौज़ा, मैं देखूँ वो जाली बुला लीजे मुझ को भी, सरकार-ए-आली कहाँ जाए, आक़ा ! ये मँगता भला मदीना बुला लीजिए वो रमज़ान तेरा, वो दालान तेरा वो अज्वा वो ज़मज़म, ये मेहमान तेरा लीजिए तेरे दर पे इफ़्तार का वो मज़ा मदीना बुला रूला देने वाली नात > शाह-ए मदीना! सुनें इल्तिज़ा मदीना बुला लीजिए कहीं मर न जाए तुम्हारा गदा. मदीना बुला लीजिए. सताती है मुझ को, रुलाती है मुझ को ये दुनिया बहुत आज़माती है मुझ को हूँ दुनिया की बातों से टूटा हुआमदीना बुला लीजिए बड़ी बेकसी है, बड़ी बे॰क़रारी न कट जाए, आक़ा ! यूँही उम्र सारी हाँ ज़िंदगानी का कुछ है पता मदीना बुला लीजिए ये एहसास है मुझ को, मैं हूँ कमीना हुजूर ! आप चाहें तो आऊँ मदीना गुनाहों के दलदल में मैं हूँ फँसा मदीना बुला लीजिए मैं देखूँ वो रौज़ा, मैं देखूँ वो जाली बुला लीजे मुझ को भी, सरकार-ए-आली कहाँ जाए, आक़ा ! ये मँगता भला मदीना बुला लीजिए वो रमज़ान तेरा, वो दालान तेरा वो अज्वा वो ज़मज़म, ये मेहमान तेरा लीजिए तेरे दर पे इफ़्तार का वो मज़ा मदीना बुला - ShareChat
#naats status #Islamic Naats And Sad Shayari #Khubsurat Naats status #Naats only #mera प्यारा इस्लाम😊😍
naats status - रूला देने   वाली नात दुनिया के ऐ मुसाफ़िर मंज़िल तेरी क़बर है तय कर रहा है जो तू दो दिन का ये सफ़र है जब से बनी है लाखों करोड़ों आए॰ दुनिया बाक़ी रहा न कोई मिट्टी में सब समाए को न भूलो सब का यही हशर है इस बात आँखों से तू ने अपनी देखे कई जनाज़े हाथों से तू ने अपने दफ़नाए कितने मुर्दे अंजाम से तू अपने क्यूँ इतना बे ख़़बर है ये आलिशान बंगले किसी काम के नहीं हैं महलों में सोने वाले मिट्टी में सो रहे हैं का टुकड़ा छोटा सा तेरा घर है दो गज़ ज़मीं मख़मल पे सोने वाले मिट्टी में सो रहे हैं शाह ओ गदा यहाँ पर सब एक हो रहे हैं दोनों हुए बराबर ये मौत का असर है. रूला देने   वाली नात दुनिया के ऐ मुसाफ़िर मंज़िल तेरी क़बर है तय कर रहा है जो तू दो दिन का ये सफ़र है जब से बनी है लाखों करोड़ों आए॰ दुनिया बाक़ी रहा न कोई मिट्टी में सब समाए को न भूलो सब का यही हशर है इस बात आँखों से तू ने अपनी देखे कई जनाज़े हाथों से तू ने अपने दफ़नाए कितने मुर्दे अंजाम से तू अपने क्यूँ इतना बे ख़़बर है ये आलिशान बंगले किसी काम के नहीं हैं महलों में सोने वाले मिट्टी में सो रहे हैं का टुकड़ा छोटा सा तेरा घर है दो गज़ ज़मीं मख़मल पे सोने वाले मिट्टी में सो रहे हैं शाह ओ गदा यहाँ पर सब एक हो रहे हैं दोनों हुए बराबर ये मौत का असर है. - ShareChat
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islamic naats - रुला देने वाली नात अफ़सोस सर से बाप का साया चला गया बे फ़िक्र ज़िंदगी का सहारा चला गया बरकत थी जिस के दम से हमारे मकान में यानी वो बरकतों का ख़ज़ीना चला गया वो जिस के दम से मेरे चमन में बहार थी खुल्द ए बरीं का करने नज़ारा चला गया रौशन थीं जिस को देख कर आँखों की पुतलिय अफ़सोस वो करम का सितारा चला गया कुछ भी न कह सका वो बेटों से अपने आह तो चुप के से तन्हा चला गया आई क़ज़ा इक पल मुझे क़रार नहीं है तेरे बगैर रोता सिसकता छोड़ के कैसा चला गया सब सो रहे थे रात की तन्हाई में शकील गुलशन उजाड़ कर कोई साया चला गया रुला देने वाली नात अफ़सोस सर से बाप का साया चला गया बे फ़िक्र ज़िंदगी का सहारा चला गया बरकत थी जिस के दम से हमारे मकान में यानी वो बरकतों का ख़ज़ीना चला गया वो जिस के दम से मेरे चमन में बहार थी खुल्द ए बरीं का करने नज़ारा चला गया रौशन थीं जिस को देख कर आँखों की पुतलिय अफ़सोस वो करम का सितारा चला गया कुछ भी न कह सका वो बेटों से अपने आह तो चुप के से तन्हा चला गया आई क़ज़ा इक पल मुझे क़रार नहीं है तेरे बगैर रोता सिसकता छोड़ के कैसा चला गया सब सो रहे थे रात की तन्हाई में शकील गुलशन उजाड़ कर कोई साया चला गया - ShareChat