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#☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
☝अनमोल ज्ञान - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' धन के अभाव में मनुष्य को गरीबी का जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है,पर देखा गया है कि यदि अन्य सद्गुण उसके पास हैं तो वह गरीबी का जीवन अभिशाप नहीं है, बल्कि संतोष और शांति प्रदान करताहै। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' धन के अभाव में मनुष्य को गरीबी का जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है,पर देखा गया है कि यदि अन्य सद्गुण उसके पास हैं तो वह गरीबी का जीवन अभिशाप नहीं है, बल्कि संतोष और शांति प्रदान करताहै। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
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🌸 सत्य वचन - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' प्रेम की एक-एक बूंद के लिए यह दुनियां तरस रही है। अनावृष्टि काल में पानी का जैसा अकाल रेगिस्तानों में दिखता है वैसा ही प्रेम दुर्भीख आज सर्वत्र छाया हुआ है। प्रेम के नाम पर साझीदार चापलूसी वासना और शोषण की प्रवंचना तो बहुत बढ़िया है पर सच्चा प्रेम - उद्देश्य आत्मन्दान और निःस्वार्थ सेवा में ही समावेश होता है पर वो आज कहीं देखने को नहीं मिलता है। इस आध्यात्मिक विभूति के अभाव में जीवन नीरस ही बने रहते हैं। सब ओर कुछ खोया- खोया सा सब ओर अभाव ही अभाव सा दिखाई देता है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' प्रेम की एक-एक बूंद के लिए यह दुनियां तरस रही है। अनावृष्टि काल में पानी का जैसा अकाल रेगिस्तानों में दिखता है वैसा ही प्रेम दुर्भीख आज सर्वत्र छाया हुआ है। प्रेम के नाम पर साझीदार चापलूसी वासना और शोषण की प्रवंचना तो बहुत बढ़िया है पर सच्चा प्रेम - उद्देश्य आत्मन्दान और निःस्वार्थ सेवा में ही समावेश होता है पर वो आज कहीं देखने को नहीं मिलता है। इस आध्यात्मिक विभूति के अभाव में जीवन नीरस ही बने रहते हैं। सब ओर कुछ खोया- खोया सा सब ओर अभाव ही अभाव सा दिखाई देता है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' मनुष्यता सीखने की सबसे बडी पाठशाला अपना घर है। स्नेह और त्याग क्षमा और तत्परता की भावनाओं के विकास के जितने भी सुन्दर अवसर घर में मिलते हैंउतने और कहीं भी नहीं मिल सकते। हमारी सबसे पहली धर्म शिक्षा यह होनी चाहिए कि अपने आचरण से अपने घर को स्वर्ग बनावें। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' मनुष्यता सीखने की सबसे बडी पाठशाला अपना घर है। स्नेह और त्याग क्षमा और तत्परता की भावनाओं के विकास के जितने भी सुन्दर अवसर घर में मिलते हैंउतने और कहीं भी नहीं मिल सकते। हमारी सबसे पहली धर्म शिक्षा यह होनी चाहिए कि अपने आचरण से अपने घर को स्वर्ग बनावें। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हमारा छोटा सा जीवन है लगभग ७० या ८० वर्ष। उसमें से आधा= ४० वर्ष तो सोने में बीत जाता है। और उसका आधा=२० वर्ष बचपन और बुढ़ापे में खत्म हो जाता है। बचा बाकी का २० वर्ष-उसमें कभी योग कभी वियोग कभी पढाई ,कभी परीक्षा  नौकरी व्यापार तथा जीवन की अनेकों समस्याएं घेरे रहती हैं। अब बचा ही कितना ? यदि हम थोडे से जीवन के लिए बुरे कर्म करके संपत्ति जमा करें और यहीं छोड़ जाएं तो बताओ इतना मूल्यवान जन्म लेकर क्या लाभ हुआ। स्वयं विचार कीजिए? धन्यवादा बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः " हमारा छोटा सा जीवन है लगभग ७० या ८० वर्ष। उसमें से आधा= ४० वर्ष तो सोने में बीत जाता है। और उसका आधा=२० वर्ष बचपन और बुढ़ापे में खत्म हो जाता है। बचा बाकी का २० वर्ष-उसमें कभी योग कभी वियोग कभी पढाई ,कभी परीक्षा  नौकरी व्यापार तथा जीवन की अनेकों समस्याएं घेरे रहती हैं। अब बचा ही कितना ? यदि हम थोडे से जीवन के लिए बुरे कर्म करके संपत्ति जमा करें और यहीं छोड़ जाएं तो बताओ इतना मूल्यवान जन्म लेकर क्या लाभ हुआ। स्वयं विचार कीजिए? धन्यवादा बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - सदगुरूदेवाय नमः " "श्री इंसानियत की जिम्मेदारी बहुत बडी है, इंसानियत के गौरव की रक्षा करना हर इंसान का कर्तव्य होना चाहिए। मानव की पदवी हमें परमात्मा परमेश्वर की असीम अनुकंपा से मिलती है। और उस परमपिता परमेश्वर प्रत्येक मानव प्राणी से एक ही प्रश्न पूछता है कि आपने मनुष्यता का कद बढाने के लिए क्या कर्म किया ? यदि हम मनुष्यता के कर्ता -धर्ता हैं धर्म को रत्ती भर भी पहचानते हैं तो विवेकपूर्ण विचार करना होगा कि हम अपने आदर्शों के सिद्धांतों के लिए क्या करते हैं? क्या कर सकते हैं॰और क्या करेंगे ? धर्म काल्पनिक नहीं व्यवहारिक होना चाहिए। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरूदेवाय नमः " "श्री इंसानियत की जिम्मेदारी बहुत बडी है, इंसानियत के गौरव की रक्षा करना हर इंसान का कर्तव्य होना चाहिए। मानव की पदवी हमें परमात्मा परमेश्वर की असीम अनुकंपा से मिलती है। और उस परमपिता परमेश्वर प्रत्येक मानव प्राणी से एक ही प्रश्न पूछता है कि आपने मनुष्यता का कद बढाने के लिए क्या कर्म किया ? यदि हम मनुष्यता के कर्ता -धर्ता हैं धर्म को रत्ती भर भी पहचानते हैं तो विवेकपूर्ण विचार करना होगा कि हम अपने आदर्शों के सिद्धांतों के लिए क्या करते हैं? क्या कर सकते हैं॰और क्या करेंगे ? धर्म काल्पनिक नहीं व्यवहारिक होना चाहिए। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - सदगुरुदेवाय नमः " "श्री का अनादर अविश्वास प्रबलता विचार भेद रखना विश्वास की दूसरे : राग द्वेष क्लेश और अन्य बुराई के बीज बोना है। दुनियां में आज की गुटबंदी दलबंदी, अलग-्अलग वादों का आक्रमण और विभिन्न एकांगी निर्णय आदि जिन लोगों में एकता विनाश की तैयारी हो रही है और हिंसा की भावना प्रबल है वे सभी धारणाओं को दूर करके मानवता को नष्ट-भ्रष्ट सब एक दूसरे के लिए प्रेमट आदर की कमी के कारण seacta(a होताहै। बाबूलाल बाबूलाल . सदगुरुदेवाय नमः " "श्री का अनादर अविश्वास प्रबलता विचार भेद रखना विश्वास की दूसरे : राग द्वेष क्लेश और अन्य बुराई के बीज बोना है। दुनियां में आज की गुटबंदी दलबंदी, अलग-्अलग वादों का आक्रमण और विभिन्न एकांगी निर्णय आदि जिन लोगों में एकता विनाश की तैयारी हो रही है और हिंसा की भावना प्रबल है वे सभी धारणाओं को दूर करके मानवता को नष्ट-भ्रष्ट सब एक दूसरे के लिए प्रेमट आदर की कमी के कारण seacta(a होताहै। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरूदेवाय नमः " भावना के अभाव में प्रगति की सारी प्रक्रियाएं निर्जीव और प्रदर्शन सामग्री बनकर रह जाती हैं। हमें जन मानस में कर्तव्य पालन की नीति धर्म और सदाचार की आस्तिकता और परमार्थ की पचण्ड भावनाएं उत्पन्न करनी चाहिए। ज्ञान से कर्म और कर्म से समृद्धि की उपलब्धि होतीहै। जैसे विचार मन में उठेंगे शरीर से वैसे ही कर्म बन पड़ेंगे और जैसे कर्म होंगे वैसा ही प्रतिफल सम्मुख उपस्थित होगा। इसलिए हमें ज्ञान का भावना का महत्वपूर्ण बोझ चाहिए और उसके विकास का आवश्यक प्रयास करना चाहिए। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरूदेवाय नमः " भावना के अभाव में प्रगति की सारी प्रक्रियाएं निर्जीव और प्रदर्शन सामग्री बनकर रह जाती हैं। हमें जन मानस में कर्तव्य पालन की नीति धर्म और सदाचार की आस्तिकता और परमार्थ की पचण्ड भावनाएं उत्पन्न करनी चाहिए। ज्ञान से कर्म और कर्म से समृद्धि की उपलब्धि होतीहै। जैसे विचार मन में उठेंगे शरीर से वैसे ही कर्म बन पड़ेंगे और जैसे कर्म होंगे वैसा ही प्रतिफल सम्मुख उपस्थित होगा। इसलिए हमें ज्ञान का भावना का महत्वपूर्ण बोझ चाहिए और उसके विकास का आवश्यक प्रयास करना चाहिए। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#🌸 सत्य वचन #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍 #👉 लोगों के लिए सीख👈
🌸 सत्य वचन - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' दुष्प्रवृत्तियां जहां कहीं भी रहती हैं वहां अशांति और विनाश का माहौल पैदा होता है। श्रीकृष्ण जी का विशाल यदुकुल मित्रता - द्वेष के कारण आपस में लकडी से कट-्कट कर नष्ट हो गया। दूसरे को द्वेष देना वैकल्पिक है वास्तविक द्वेष तो हमारी दुर्बुद्धि और दुर्बलता का हीहै। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' दुष्प्रवृत्तियां जहां कहीं भी रहती हैं वहां अशांति और विनाश का माहौल पैदा होता है। श्रीकृष्ण जी का विशाल यदुकुल मित्रता - द्वेष के कारण आपस में लकडी से कट-्कट कर नष्ट हो गया। दूसरे को द्वेष देना वैकल्पिक है वास्तविक द्वेष तो हमारी दुर्बुद्धि और दुर्बलता का हीहै। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #👌 अच्छी सोच👍 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन
👉 लोगों के लिए सीख👈 - "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' अपने स्वभाव की बुराईयां स्पष्ट रूप से किसी की समझ में नहीं आतीं पर अधिक ध्यान दिया जाए तो वे गलतियां पकड में आ सकती हैं जिससे दुष्प्रवृत्ति  अज्ञान और असहयोग का वातावरण उत्पन्न होता है। उनके स्वभाव को मधुर आकर्षक शिष्ट और उदार बनाने से उनके सहयोगियों , प्रशंसकों और दोस्तों की संख्या में आशातीत वृद्धि हो सकती है। भविष्य को उच्चवल बनाने में. प्रगति का मार्ग सुधारने में सन्मित्रों का भारी हाथ होता है और वे उन्हें ही प्राप्त होते हैं जिन्हें अपने स्वभाव के सुधार में आवश्यकता होती है। क्रोधी तृष्णालु निंदक स्वार्थी छिद्रान्वेषी, डरपोक प्रवृत्ति के लोगों को तो दोस्तों से ही अरुचि होती है। बाबूलाल बाबूलाल . "श्री सदगुरुदेवाय नमः ' अपने स्वभाव की बुराईयां स्पष्ट रूप से किसी की समझ में नहीं आतीं पर अधिक ध्यान दिया जाए तो वे गलतियां पकड में आ सकती हैं जिससे दुष्प्रवृत्ति  अज्ञान और असहयोग का वातावरण उत्पन्न होता है। उनके स्वभाव को मधुर आकर्षक शिष्ट और उदार बनाने से उनके सहयोगियों , प्रशंसकों और दोस्तों की संख्या में आशातीत वृद्धि हो सकती है। भविष्य को उच्चवल बनाने में. प्रगति का मार्ग सुधारने में सन्मित्रों का भारी हाथ होता है और वे उन्हें ही प्राप्त होते हैं जिन्हें अपने स्वभाव के सुधार में आवश्यकता होती है। क्रोधी तृष्णालु निंदक स्वार्थी छिद्रान्वेषी, डरपोक प्रवृत्ति के लोगों को तो दोस्तों से ही अरुचि होती है। बाबूलाल बाबूलाल . - ShareChat