#बड़ी_खबर Aजमेर dरगाह का घिनौना कांड 1992: 250 से ज्यादा स्कूली-कॉलेजी लड़कियों का नरक!
Khaदिम chiश्ती परिवार के दरिंदों ने raप, गैंगraप और ब्लैकमेलिंग से मचाया तहलका!
21 अप्रैल और 15 मई 1992 को राजस्थान के aजमेर शहर में स्थानीय अखबार दैनिक नवज्योति ने ऐसी भयानक खबर छापी कि पूरा शहर सन्न रह गया।
घिनौनी तस्वीरों और कहानियों वाली ये रिपोर्ट देखकर लोग यकीन करने को तैयार नहीं थे। लेकिन जब खबर एक-दूसरे तक पहुंची तो सच्चाई सामने आ गई – Aजमेर dरगाह के khदिम chiश्ती परिवार ने स्कूल-कॉलेज पढ़ने वाली 100 से ज्यादा (कुछ रिपोर्ट्स में 250 तक) नाबालिग और युवा लड़कियों का यौन शोषण,गैंगraप और ब्लैकमेलिंग का सिलसिला चला रखा था!
शहर के सबसे रईस, ताकतवर और प्रभावशाली परिवार का ये हिस्सा था – khवाजा moइनुद्दीन chiश्ती dरगाह के खादिम!
मुख्य आरोपी?
Faरूक chiश्ती और nफीस चिश्ती – दोनों यूथ कांग्रेस के बड़े नेता!
Faरूक तो aजमेर यूथ conग्रेस के अध्यक्ष थे,mफीस वाइस प्रेसिडेंट।
conग्रेस की छत्रछाया में ये दरिंदे खुलेआम घूमते थे। शहर के रईस खानदान, dर्गाह के खादिम और पॉलिटिकल पावर – तीनों का खतरनाक कॉम्बिनेशन!
कैसे चला ये शैतानी सिलसिला?
ये लोग स्कूल-कॉलेज की लड़कियों को बहला-फुसलाकर दूर-दराज के फार्महाउस या बंगलों पर ले जाते।
फिर गैंगरेप!
एक के बाद एक कई दरिंदे बारी-बारी से हवस की आग बुझाते। नग्न फोटो और रीलें (उस जमाने की फिल्म रील्स) खींच ली जातीं।
लैब वाले कारीगर भी इस गैंग का हिस्सा बन गया था – वो रील धोकर फोटो निकालता और खुद भी raप में शामिल हो जाता!
एक लड़की फंस गई तो उसे अपनी सहेलियों को लाने के लिए मजबूर किया जाता।
“अगर नहीं लाई तो फोटो पूरे शहर में बांट देंगे!” – ये ब्लैकमेलिंग का जाल इतना मजबूत था कि महीनों तक ये सिलसिला चलता रहा।
एक लड़की दूसरी को, वो तीसरी को… इस तरह 100 से ज्यादा लड़कियां इन वहशियों के शिकार बन गईं।
ज्यादातर लड़कियां अच्छे घरानों से थीं – पिता सरकारी नौकरी में, परिवार सम्मानित।
खबर सुर्खियों में आते ही कई परिवारों ने aजमेर छोड़ दिया। शर्म और डर के मा रे कई पीड़ित लड़कियां आत्मhत्या कर बैठीं।
तब के डीआईजी ओमेंद्र भारद्वाज ने खुद कहा था कि आरोपी परिवारों की सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक ताकत इतनी भारी थी कि लड़कियां मुंह खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाती थीं।
सनसनीखेज खुलासा: फोटो-वीडियो (रील्स) हाथों-हाथ बंटने लगे तो राज खुला।
पूरा अजमेर बेचैन हो उठा। स्कूल-कॉलेज की मासूम लड़कियां… और शहर के सबसे बड़े नाम वाले लोग!
हिंदू लड़कियों पर इस gहादी ग्रूमिंग का पैटर्न नासिक जैसा ही था – एक को फंसाओ, सहेलियों को लाओ, ब्लैकमेल करो और चेन बनाओ।
हिंदू परिवारों में दहशत फैल गई – बेटियों की सहेलियों पर नजर रखने की सलाह दी जाने लगी।
ये कांड इतना बड़ा था कि देश स्तब्ध रह गया। 18 आरोपियों पर केस चला, एक ने जेल में सुसाइड कर लिया।
दशकों बाद 2024 में आखिरकार नफीस चिश्ती, सलीम चिश्ती, इकबाल भाटी, सोहेल गनी, नसीम उर्फ टार्जन और सैयद जमीर हुसैन को उम्रकैद की सजा मिली।
लेकिन फारूक chiश्ती समेत कई पहले ही कम सजा काटकर बाहर निकल चुके।
Aजमेर का पैटर्न आज भी चेतावनी है: हिंदू कन्याओं को बहला-फुसलाकर, उनकी सहेलियों के जरिए जाल फैलाना।
एक बार फंस गई तो पूरा सिलसिला शुरू! ग्रूमिंग गैंग का ये हथियार आज भी सक्रिय है।
ये कोई साधारण कांड नहीं था – darगाह की छत्रछाया में चलने वाला शहर का सबसे बड़ा सेक्स स्कैंडल!
1992 का वो साल अजमेर कभी नहीं भूलेगा।
न्याय मिलने में 32 साल लग गए, लेकिन पीड़ित परिवारों के घाव आज भी ताजा हैं।
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केरल में बिग बॉस का ‘सेकुलर’ चेहरा फट गया!
शियास करीम ने हिंदू बिग बॉस विनर अनुमोल पर गोमांस थोपने की कोशिश की, बार-बार चिल्लाया – “खा लो अनु… खा लो… खा लो!”
जब अनुमोल ने शालीनता से मना कर दिया और कहा कि वो डाइट पर है, तो शियास का गुस्सा फूट पड़ा।
उसने सीधा राजनीतिक तीर चला दिया – “डाइट पर हो या बीजेपी की फॉलोअर हो?”
ये वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।
बिग बॉस मलयालम सीजन 7 की विजेता अनुमोल अनुकुट्टी (हिंदू) और शियास करीम (मुस्लिम मॉडल-एक्टर, जो खुद बीजेपी-विरोधी छवि रखते हैं) एक पब्लिक इवेंट पर थे।
शियास ने बार-बार जबरदस्ती की, चीख-चीख कर गोमांस खिलाने की जिद की।
अनुमोल ने तीन-चार बार मना किया, फिर भी वो नहीं रुका। ये ठीक वही “केरल स्टोरी” है, जिसे लिबरल-सेकुलर “प्रोपगैंडा” बताकर खारिज करते हैं!
सोचिए जरा…
अगर कोई हिंदू लड़का किसी मुस्लिम लड़की को सूअर का मांस खाने के लिए इस तरह चिल्लाता, मजबूर करता और फिर पूछता “डाइट पर हो या पॉलिटिकल हो?” –
तो क्या होता?
मीडिया सड़कों पर उतर आता, “हिंदुत्व का आतंक” चिल्लाती टीवी डिबेट्स होतीं, सेकुलर-लिबरल गैंग ट्रेंडिंग हैशटैग बनाकर रोता-धोता, केस दर्ज होने की मांग करता!
लेकिन यहां?
चुप्पी। पूरी चुप्पी। क्योंकि जब हिंदू अपनी आस्था, अपनी खान-पान की पसंद का सम्मान मांगता है तो वो “असहिष्णु” बन जाता है।
और जब दूसरा जबरदस्ती थोपता है, तो ये “सेकुलरिज्म” और “फ्रेंडली बन्टर” कहलाता है!
शियास करीम पहले से ही 2023 के रेप और चीटिंग केस में फंसे हुए हैं।
अब ये नया विवाद।
फिर भी कुछ लोग “दोस्ती का मजाक” बता रहे हैं।
मजाक?
हिंदू लड़की की धार्मिक भावनाओं पर?
ये धीमा जिहाद है – खाने की प्लेट से शुरू, संस्कृति पर कब्जा करने तक।
केरल की सड़कों पर ये सिलसिला चल रहा है, और “सेकुलर” चेहरों के पीछे असली चेहरा यही है।
वीडियो देखकर खुद फैसला कर लीजिए – ये मजाक था या जबरदस्ती?
हिंदू अब चुप नहीं रहेगा। आस्था पर हमला सहन नहीं होगा!
(तथ्य: वायरल वीडियो + न्यूज रिपोर्ट्स से पुष्टि – इवेंट पर शियास का प्रेशर, अनुमोल का इनकार, BJP वाला कमेंट सब कैमरे में दर्ज।) #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #💝तेरा इंतज़ार #📷 फोटोग्राफी
#👩বিজেপি - BJP🧑
कांग्रेस नेता का सरकार पर तीखा हमला
Kanhaiya Kumar ने महिला आरक्षण मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, पहले से पास कानून को लागू क्यों नहीं किया गया। साथ ही सरकार पर लोकतंत्र से खिलवाड़ का आरोप लगाया। 😁😁
एक्टिव हो गया है टुकडे टुकडे गैंग का काम
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