*मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।*
*वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥*
*_अर्थ:_*
*मनोजवम:* जिनका वेग मन के समान है।
*मारुत तुल्य वेगम:* जिनका वेग (गति) वायु के समान है।
*जितेन्द्रियं:* जिन्होंने अपनी सभी इंद्रियों को वश में कर लिया है।
*बुद्धिमतां वरिष्ठम्:* जो बुद्धिमानों में सबसे श्रेष्ठ हैं।
*वातात्मजं:* पवन पुत्र।
वानरयूथमुख्यं: वानर सेना के मुख्य (सेनापति)।
*श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये:* उन श्रीरामदूत (हनुमान जी) की मैं शरण लेता हूँ।
*_मंत्र के लाभ और महत्व:_*
*मानसिक शांति और शक्ति:* इस मंत्र का पाठ मन में सकारात्मकता लाता है और एकाग्रता बढ़ाता है।
*डर से मुक्ति:* हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, इस मंत्र के जाप से जीवन के कष्टों और भयों से मुक्ति मिलती है।
*शक्ति और बुद्धि:* यह मंत्र साहस, बल और ज्ञान प्रदान करता है।
*प्रतिदिन पाठ:* इस मंत्र का नियमित जाप या श्रवण _(विशेषकर सुबह)_ अत्यंत शुभ माना गया है। #💫ध्यान के मंत्र🧘♂️