बिनोद कुमार शर्मा
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बिनोद कुमार शर्मा
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अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस #🌍अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस
🌍अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस - आप सभी को अंतरराष्ट्रीय  दिवस योग की हार्दिक शुभकामनाएं योग अपनाएं, स्वस्थ जीवन पाएं। Binod kumar Sharma A A आप सभी को अंतरराष्ट्रीय  दिवस योग की हार्दिक शुभकामनाएं योग अपनाएं, स्वस्थ जीवन पाएं। Binod kumar Sharma A A - ShareChat
#😍हैप्पी फादर्स डे🌹
😍हैप्पी फादर्स डे🌹 - 21 সুন मुझे रख दिया छाँव में खुद जलते रहे धूप में, मैँने देखा है ऐसा एक फरिश्ता अपने पिता के रूप में ! पितृ दिवसु की हार्दिक शुभकामनाएं <%c> Binodkumar Sharma 4 4 21 সুন मुझे रख दिया छाँव में खुद जलते रहे धूप में, मैँने देखा है ऐसा एक फरिश्ता अपने पिता के रूप में ! पितृ दिवसु की हार्दिक शुभकामनाएं <%c> Binodkumar Sharma 4 4 - ShareChat
#श्री रामलला दर्शन अयोध्या
श्री रामलला दर्शन अयोध्या - २१ जून २०२६ आज का सर्थन ஈ: श्रीसमनना अयोध्या धाम Binodkumar Sharma २१ जून २०२६ आज का सर्थन ஈ: श्रीसमनना अयोध्या धाम Binodkumar Sharma - ShareChat
#जय मां चिंतपूर्णी जी 💐🙏
जय मां चिंतपूर्णी जी 💐🙏 - *सिद्ध शक्तिपीठ माँ चिंतपूर्णी धाम जिला ऊना देवभूमि हिमाचल प्रदेश* *माँ चिंतपूर्णी जी की पिंडी स्वरुप के प्रातः श्रृंगार प्राकृतिक డ9TT* ख शुद्ध ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष, तिथि सप्तमी, संवत् २०८३, दिन रविवार, २१ जून २०२६८ * चिंतपूर्णी की* *जय माता JMD *सिद्ध शक्तिपीठ माँ चिंतपूर्णी धाम जिला ऊना देवभूमि हिमाचल प्रदेश* *माँ चिंतपूर्णी जी की पिंडी स्वरुप के प्रातः श्रृंगार प्राकृतिक డ9TT* ख शुद्ध ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष, तिथि सप्तमी, संवत् २०८३, दिन रविवार, २१ जून २०२६८ * चिंतपूर्णी की* *जय माता JMD - ShareChat
#जय महाकाल दर्शन।।
जय महाकाल दर्शन।। - जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन* ख शुद्ध ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष, तिथि सप्तमी, संवत् २०८३, दिन - रविवार, २१ जून २०२६८ * 3ঁ নম: থিনাম* श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  = 7 ٥ 7 जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन* ख शुद्ध ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष, तिथि सप्तमी, संवत् २०८३, दिन - रविवार, २१ जून २०२६८ * 3ঁ নম: থিনাম* श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  = 7 ٥ 7 - ShareChat
*🍁ईश्वर का धन्यवाद🍁* *एक राजा थे सूर्यसेन। वह बहुत बड़े दानी थे। उनका प्रतिदिन का नियम था सवेरे जल्दी उठते नदी में स्नान करके पूजा-पाठ करते तथा उसके बाद निर्धनों को दान दिया करते तब जाकर वह अन्न-जल ग्रहण किया करते थे।* . *उनकी दयालुता की भावना देखकर उनके आस-पड़ोस के शत्रु राजा भी मन ही मन बहुत प्रभावित थे।* . *राजा सूर्यसेन के राज्य में प्रतिदिन सैंकड़ों की संख्या में भिक्षुक आते थे, उन भिक्षुकों में दो व्यक्ति जिनका नाम रोहन व सोहन था कई वर्षों से लगातार राजमहल में आते थे।* . *अब तो राजा उनको नाम से भी पहचानने लगे थे वे दोनों बहुत ईमानदार थे अर्थात जितना एक दिन के लिये पर्याप्त होता उतना ही दान लिया करते थे।* . *कई बार राजा ने उनको अधिक दान देने का प्रयास भी किया किन्तु वे दोनों सिर्फ उतना ही दान स्वीकारते जिससे उनको दो वक्त का भोजन मिल जाये।* . *दोनों में एक विशेष बात यह थी कि दान लेने के बाद रोहन तो राजा का धन्यवाद करता किन्तु सोहन कहता था हे ईश्वर! आपका धन्यवाद (ईश्वर का धन्यवाद) करता।* . *राजा को लगता कि दान तो इसे मैं देता हूं, लेकिन सोहन ने कभी मुझे धन्यवाद नहीं करता बल्कि हर बार यही कहता है कि ईश्वर का धन्यवाद।* . *यहां पर राजा का अहंकार जाग जाता था, वह चाहता था कि सोहन भी रोहन की भाँति उनको धन्यवाद दे।* . *एक बार जब राजा दान दे रहे थे तो सदैव की भांति रोहन ने कहा – महाराज आपका बहुत-बहुत धन्यवाद तो सोहन ने दान लेने के बाद कहा ईश्वर का बहुत-बहुत धन्यवाद।* . *उस दिन राजा ने सभी भिक्षुओं को तो जाने दिया किन्तु उन दोनों को राजमहल में रुकने को कहा। और सोहन से पूछा तुम्हे दान तो में देता हूँ किन्तु तुमने मेरा धन्यवाद कभी नही किया, सोहन ने कहा राजन ये आप समझते हैं कि आप दे रहे हैं देने वाला तो ईश्वर है आप तो निमित्त है, आप अपनी इच्छा से किसी को कुछ नही दे सकते, सोहन की बात सुनकर राजा ने मन ही मन निश्चय किया कल में इसके साथी रोहन को धनवान बना दूंगा तब इसे पता लगेगा कि कोंन है देने वाला..* *अगले दिन राजा ने दोनो को अपने बाग में घूमने का अवसर दिया, पहले रोहन को अपने बाग में भेजा। रोहन बड़ा प्रश्नन था कि राजा ने मुझे अपने बाग में जाने का अवसर दिया वह बाग की सुंदरता में इतना खो गया कि आस पास का ध्यान ही ना रहा।* . *वहां पर राजा ने धन से भरी एक पोटली रखी थी जिसकी ओर उसका ध्यान ही ना गया। अब वह वापस आ गया राजा ने पूछा कि क्या तुम्हें वहां कुछ मिला ?* . *रोहन बोला नहीं महाराज, मुझे तो कुछ भी नहीं मिला लेकिन बाग बहुत ही अच्छा था।* . *अब सोहन की बारी थी। वह मन ही मन ईश्वर को धन्यवाद देता हुआ बाग में घूम रहा था कि उन्होंने उसे यह अवसर दिया कि आज राजा के बाग में घूमने का मौका मिला।* . *वह बड़ा सतर्क होकर वहां चल रहा था तभी उसकी दृष्टि उस पोटली पर पड़ी जिस पर रोहन की दृष्टि नहीं पड़ी थी।* . *वह वापस आया और राजा को वह धन से भरी पोटली राजा को दे दी।* . *अगले दिन राजा ने रोहन को एक बड़ा सा कटहल दिया और सोहन को मात्र कुछ रूपये दे दिये सोहन ने सदैव की भांति ईश्वर को धन्यवाद दिया।* . *अब रोहन बेमन से उस कटहल को लेकर चल दिया और सोचने लगा कि राजा ने आज आखिर यह क्या दिया है, और उसने बाजार में जाकर वह कटहल सब्जी वाले को बेच दिया।* . *सोहन ने उन रूपयों का कटहल उसी सब्जी वाले से खरीदा और संयोग से ये वही था जिसे रोहन ने बेचा था।* . *घर जाकर जब उसने वह काटा तो उसकी आंखे खुली की खुली रह गईं उस कटहल में से सोने की कुछ अशर्फियां निकलीं* . *अगले दिन भिक्षा के लिए अकेला रोहन ही राजमहल पहुंचा तो राजा ने उससे सोहन के बारे में पूछा।* . *रोहन ने राजा से बताया कि वह अब नहीं आयेगा उसे कहीं से सोने की अशर्फियां मिल गयी हैं अब वह एक धनवान व्यक्ति बन चुका है।* . *राजा ने अपना माथा पकड़ लिया। राजा ने सोचा कि मैंने कितना प्रयास किया कि रोहन दान के लिये हमेशा मुझे ही धन्यवाद देता है उसको धनवान किया जाये किन्तु सोहन ठीक कहता था देने वाला ईश्वर ही है हम तो केवल निमित्त है...* . *सोहन ठीक ही हर बात के लिए ईश्वर का धन्यवाद करता था।* . *राजा का घमण्ड टूट चुका था अब राजा ने कहा हे ईश्वर! मुझे सही मार्ग दिखाने के लिए आपका धन्यवाद।* . *शिक्षा :- हमारे पास जो कुछ भी है वह ईश्वर की कृपा से ही प्राप्त हुआ है इसलिए हमें घमण्ड तथा दूसरों से ईर्ष्या कभी नहीं करनी चाहिये।* *-रामकृपा-* #किस्से-कहानी
🌹🌷🙏 #शुभ रविवार 🙏🌷🌹
शुभ रविवार - शुक्षु खविवार रामकृप सुप्रुभातुरवंदनुमू 81 M 8020 ग्रहाणामादिरादित्यो লীব্ধ লঃতা कारक | विषम स्थान संभूतां पीड़ां दहतु मे रवि।। ಯದ್ರೀನ ऊँसूर्यदेवायुनुमु३ आपका्हरपलशुझए्वर्मगलमयही ०० शुक्षु खविवार रामकृप सुप्रुभातुरवंदनुमू 81 M 8020 ग्रहाणामादिरादित्यो লীব্ধ লঃতা कारक | विषम स्थान संभूतां पीड़ां दहतु मे रवि।। ಯದ್ರೀನ ऊँसूर्यदेवायुनुमु३ आपका्हरपलशुझए्वर्मगलमयही ०० - ShareChat
#जमाई षष्ठी पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
जमाई षष्ठी पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं - 20577 ೬೦೦೧೦೦ Gul@ सम्मान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! सास के स्नेह की छांव , दामाद के मान सम्मान और परिवार की मुस्कान यही है जमाई षष्ठी की सच्ची पहचान ! Bincd laumur ghurmu  ) 20577 ೬೦೦೧೦೦ Gul@ सम्मान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! सास के स्नेह की छांव , दामाद के मान सम्मान और परिवार की मुस्कान यही है जमाई षष्ठी की सच्ची पहचान ! Bincd laumur ghurmu  ) - ShareChat