बिनोद कुमार शर्मा
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बिनोद कुमार शर्मा
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#🙏कृष्ण वामन द्वादशी📿
🙏कृष्ण वामन द्वादशी📿 - शभ 9[9[ १४ अप्रैल मंगलवार प्रिभात आप सभी को कृष्पावाप्षनद्वादृशी पैषसकान्ति सोळरदववर्ष राम शैम जी [Edu@] एवं मंगलवार की हार्दिक शुभकामनाएं (ouజ Goo( Rinodkumar Sharma ^^ शभ 9[9[ १४ अप्रैल मंगलवार प्रिभात आप सभी को कृष्पावाप्षनद्वादृशी पैषसकान्ति सोळरदववर्ष राम शैम जी [Edu@] एवं मंगलवार की हार्दिक शुभकामनाएं (ouజ Goo( Rinodkumar Sharma ^^ - ShareChat
#सतुआन की हार्दिक बधाई
सतुआन की हार्दिक बधाई - १४ अप्रैल সীষ্স ঙ্গনু ক ম্পাযন মী मनाए जाने वाले लोक-संस्कृति के पावन पर्व शतुँआनु की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं Birod kumav Shaua १४ अप्रैल সীষ্স ঙ্গনু ক ম্পাযন মী मनाए जाने वाले लोक-संस्कृति के पावन पर्व शतुँआनु की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं Birod kumav Shaua - ShareChat
#भीम राव अंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं
भीम राव अंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं - a संविधन जिय भीम जय भारत आप सभी देशवासियों को बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर जी की जयंती पर हार्दिक शुभकामनाए Binod kumar Sharma   a संविधन जिय भीम जय भारत आप सभी देशवासियों को बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर जी की जयंती पर हार्दिक शुभकामनाए Binod kumar Sharma - ShareChat
*आज दिनांक 14/04/26* #श्री रामलला दर्शन अयोध्या
श्री रामलला दर्शन अयोध्या - ब्रह्म मुहूर्त में जग गए हैं तो आज की पहली हाजिरी प्रभु श्री राम जी के चरणों में जय श्री राम प्रभु ब्रह्म मुहूर्त में जग गए हैं तो आज की पहली हाजिरी प्रभु श्री राम जी के चरणों में जय श्री राम प्रभु - ShareChat
#जय माँ विंध्यवासिनी🙏🏻🚩
जय माँ  विंध्यवासिनी🙏🏻🚩 - जय माँ विंध्यवासिनी धाम, मिर्जापुर *आज प्रातःकाल मां की मंगला आरती का भव्य श्रृंगार दर्शन* फ वैशाख, कृष्ण पक्ष, तिथि - द्वादशी, संवत् २०८३, दिन मंगलवार, १४ अप्रैल २०२६८ * *जय जय मैय्या विंध्यवासिनी की* जय माँ विंध्यवासिनी धाम, मिर्जापुर *आज प्रातःकाल मां की मंगला आरती का भव्य श्रृंगार दर्शन* फ वैशाख, कृष्ण पक्ष, तिथि - द्वादशी, संवत् २०८३, दिन मंगलवार, १४ अप्रैल २०२६८ * *जय जय मैय्या विंध्यवासिनी की* - ShareChat
*श्री राम और श्री हनुमान जी का अद्वितीय संबंध और भक्ति* *हमारे धर्म में श्रीराम और श्रीहनुमान का संबंध एक अत्यंत पवित्र और आदर्श भक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करता है। श्री रामचन्द्र जी, जो भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, और उनके परम भक्त श्री हनुमान जी के बीच का संबंध न केवल एक आदर्श गुरु-शिष्य संबंध का प्रतीक है, बल्कि यह भगवान राम के प्रति निःस्वार्थ भक्ति और समर्पण का सर्वोत्तम उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।* *राम-हनुमान का संबंध: एक आदर्श भक्ति संबंध* *श्री हनुमान जी का जन्म पवन देवता के आशीर्वाद से हुआ था, और उनका जीवन भगवान राम के प्रति अपनी समर्पण भावना और भक्ति के कारण ही प्रसिद्ध हुआ। श्री हनुमान का सम्पूर्ण जीवन भगवान राम की सेवा में समर्पित था, और उन्होंने कई अवसरों पर राम के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग किया। राम और हनुमान के बीच संबंध की गहरी समझ और विश्वास था, जिसे कई पौराणिक कथाओं से समझा जा सकता है।* *हनुमान जी की पहली मुलाकात* *जब हनुमान जी ने राम के साथ पहली बार मुलाकात की, तब राम ने उन्हें पहचानने की कोशिश की। लेकिन हनुमान जी की भक्ति और श्रद्धा ने राम को चमत्कृत कर दिया। हनुमान जी ने भगवान राम से कहा, “मैं आपका सेवक हूं और आपकी पूजा और सेवा के लिए ही जीवित हूं।” इस समय श्रीराम ने हनुमान जी से कहा, “तुमसे बड़ा भक्त कोई नहीं है, तुम मेरे परम भक्त हो।”* *राम के संदेश वाहक के रूप में हनुमान जी* *जब माता सीता का हरण रावण ने किया और श्रीराम उन्हें खोज रहे थे, तब हनुमान जी ने उनके संदेशवाहक का कार्य किया। उन्होंने लंका जाकर सीता माता से मिलकर राम का संदेश उन्हें पहुंचाया। यही नहीं, उन्होंने रावण के महल में भी घुसकर राम के लिए शरणागत वत्सलता का परिचय दिया। हनुमान जी ने अपने बल, बुद्धि और साहस से राम के कार्य को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।* *राम के प्रति अनन्य भक्ति* *श्री हनुमान जी की भक्ति केवल बाहरी कार्यों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनके हृदय में भगवान राम के लिए अत्यधिक प्रेम और श्रद्धा थी। हनुमान जी ने राम के चरणों में अपनी सम्पूर्ण आत्मा को समर्पित किया था। उनका जीवन राम के गुणगान करने, उनकी पूजा करने और उनके नाम का जाप करने में समर्पित था। यही कारण था कि राम के लिए उनकी भक्ति अपार और अपार थी।* *हनुमान जी की भक्ति: श्रीराम के प्रति निःस्वार्थ प्रेम* *हनुमान जी की भक्ति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि उनके जीवन का हर पहलू राम के प्रति निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण से भरा था। उनका प्रेम केवल शब्दों में नहीं था, बल्कि उनकी हर क्रिया में भगवान राम के लिए भक्ति का एक गहरा इशारा था।* *राम का नाम जाप* *हनुमान जी का यह प्रसिद्ध कथन है – “राम का नाम हर संकट में काम आता है।” वह हमेशा राम के नाम का जाप करते थे, और यही उनकी शक्ति का स्रोत था। हनुमान चालीसा में भी यह उल्लेख है कि राम के नाम के जप से जीवन में सभी दुखों का नाश होता है।* *राम के आदर्शों का पालन* *हनुमान जी ने राम के आदर्शों को अपने जीवन में पूरी तरह से अपनाया। भगवान राम के जीवन के हर पहलू को वह अपने जीवन का आदर्श मानते थे। राम के द्वारा दिखाए गए धर्म, सत्य, कर्तव्य, और भक्ति के सिद्धांतों को उन्होंने अपने जीवन में आत्मसात किया।* *राम के बिना हनुमान जी का अस्तित्व नहीं* *श्री हनुमान जी ने स्वयं कहा है कि “राम के बिना मेरा कोई अस्तित्व नहीं है।” उनका जीवन राम के आदेशों का पालन करने और उनकी भक्ति में लीन रहने के लिए था। हनुमान जी का हर कार्य राम के लिए था और उनके बिना उनका जीवन अधूरा था।* *राम-हनुमान का भव्य उदाहरण* *राम और हनुमान का संबंध एक आदर्श भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। हनुमान जी ने कभी भी राम के आदेशों से एक कदम भी पीछे नहीं हटाया। यह संबंध हमें यह सिखाता है कि जब तक हम अपने हृदय में निःस्वार्थ भक्ति और समर्पण के भाव रखते हैं, तब तक हमें जीवन में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए शक्ति मिलती है।* *निष्कर्ष-* *श्री राम और श्री हनुमान जी का संबंध एक शाश्वत भक्ति का प्रतीक है। हनुमान जी ने अपने सम्पूर्ण जीवन को राम की सेवा में समर्पित किया और राम के प्रति उनका प्रेम आज भी हम सभी के दिलों में जीवित है। हनुमान जी की भक्ति और राम के प्रति उनका समर्पण हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति वह है जो निःस्वार्थ, निरंतर और किसी भी परिस्थिति में भगवान के प्रति अनन्य प्रेम से भरी हो। राम और हनुमान की भक्ति की यह अनमोल सीख हमें जीवन में शांति, शक्ति, और सफलता की ओर अग्रसर करती है।* *-रामकृपा-* #किस्से-कहानी