#निमंत्रण_संसारको_सम्मानकेसाथ
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#संतरामपालजीमहाराज_की_अजब_पहल
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#गोबर_गणेश_छोड़ो_आदिगणेश_पूजो
क्योंकि आदि गणेश वह है, जिसने इस सृष्टि को बनाया। जिनकी पूजा सभी देवता भी करते हैं। अमरग्रंथ साहिब के राग जांगड़ा अध्याय के शब्द 2 की पहली पंक्ति में लिखा है :
गणपति गौरि कूँ सौंरि संजम करे, आदि गणेश प्रथम मनावै ।
ब्रह्मा और विष्णु शिव की मदद् संग ले, अलख जगदीश कबीर कै सिर चढ़ावै ।।
जानने के लिए अवश्य पढ़ें संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा।
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#गोबर_गणेश_छोड़ो_आदिगणेश_पूजो
संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं:
आदि गणेश का ध्यान तो सभी देवता लगाते हैं। इसलिए गोबर गणेश छोड़ो, आदि गणेश पूजो ! अमरग्रंथ साहिब के अध्याय आदि गणेश पुराण में लिखा है:
सुरनर मुनिजन ध्यावें, ब्रह्मा विष्णु महेशा । शेष सहंस मुख गावैं, पूजें आदि गणेशा ।। इन्द्र कुबेर सरीखा, वरुण धर्मराय ध्यावै । समर्थ जीवन जी का, मन इच्छा फल पावैं ।। तेतीस कोटि आधारा, ध्यावैं सहंस अठासी । उतरें भवजल पारा, कट हैं जम की फांसी ।। #santrampaljimaharaj
#गोबर_गणेश_छोड़ो_आदिगणेश_पूजो
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया, बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।"
जिसका
यह गुण पूर्ण परमात्मा अर्थात आदि गणेश के हैं प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2, सूक्त 162 मंत्र 5, सूक्त 163 मंत्र 1-3 में है।









