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#🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🌊गंगा सप्तमी 🌸 #🙏🙏bhkti bhvnay💥🙏 #💥💥आस्था💥💥👃 #🌷शुभ गुरुवार
🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 - नमो भगव्ते वासुदिवाय " सप्रभात BhagwanBhajan Com नमो भगव्ते वासुदिवाय " सप्रभात BhagwanBhajan Com - ShareChat
#🌷शुभ गुरुवार #💥💥आस्था💥💥👃 #🙏🙏bhkti bhvnay💥🙏 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🌊गंगा सप्तमी 🌸
🌷शुभ गुरुवार - ShareChat
#👏भगवान विष्णु😇 #🌊गंगा सप्तमी 🌸 #🙏🙏bhkti bhvnay💥🙏 #💥💥आस्था💥💥👃 #🌷शुभ गुरुवार
👏भगवान विष्णु😇 - गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे तुलसी' साथी विपति के, विद्या, विनय, विवेक। साहस, सुकृत, सुसत्य-्व्रत, राम-्भरोसो एक।। अर्थः विद्या, विनय, विवेक, साहस, पुण्य और सत्य जैसे गुण विपत्ति में साथ देने वाले होते हैं, और ये सभी गुण भगवान राम के भरोसे से ही प्राप्त होते हैं। Bhakti Bhavnal 2025 Bhakti Bhavna Powered by @Bablu_dwivedi418 गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे तुलसी' साथी विपति के, विद्या, विनय, विवेक। साहस, सुकृत, सुसत्य-्व्रत, राम-्भरोसो एक।। अर्थः विद्या, विनय, विवेक, साहस, पुण्य और सत्य जैसे गुण विपत्ति में साथ देने वाले होते हैं, और ये सभी गुण भगवान राम के भरोसे से ही प्राप्त होते हैं। Bhakti Bhavnal 2025 Bhakti Bhavna Powered by @Bablu_dwivedi418 - ShareChat
#🌷शुभ गुरुवार #💥💥आस्था💥💥👃 #🙏🙏bhkti bhvnay💥🙏 #🌊गंगा सप्तमी 🌸 #👏भगवान विष्णु😇
🌷शुभ गुरुवार - भजो , माया तज माधव तजो जगत की आस| जो स्वामी का हो गया, सब जग उसक पास।। संसारी वस्तुएँ नश्वर हैं, जो ईश्वर का हो गया, उसकी बनाई हर वस्तु उसकी हो जाती है। दोनों में बहुत अंतर है।॰ ईश्वर को चाहना और ईश्वर से चाहना.. भजो , माया तज माधव तजो जगत की आस| जो स्वामी का हो गया, सब जग उसक पास।। संसारी वस्तुएँ नश्वर हैं, जो ईश्वर का हो गया, उसकी बनाई हर वस्तु उसकी हो जाती है। दोनों में बहुत अंतर है।॰ ईश्वर को चाहना और ईश्वर से चाहना.. - ShareChat
#👏भगवान विष्णु😇 #🌊गंगा सप्तमी 🌸 #🙏🙏bhkti bhvnay💥🙏 #💥💥आस्था💥💥👃 #🌷शुभ गुरुवार
👏भगवान विष्णु😇 - गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे बिनु, परमारर्थ की आस। যাম নাম ঔনলন बरषत वारिद-बूँद गहि, चाहत चढ़न अकास।। अर्थः राम-्नाम के बिना परमार्थ की इच्छा करना, मानो वर्षा की बूँद पकड़कर आकाश चढ़ना है। बिना राम-्नाम मोक्ष संभव नहीं। Bhakti Bhavnal Powered by @Bablu_dwivedi418 2025 Bhakti Bhavna गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे बिनु, परमारर्थ की आस। যাম নাম ঔনলন बरषत वारिद-बूँद गहि, चाहत चढ़न अकास।। अर्थः राम-्नाम के बिना परमार्थ की इच्छा करना, मानो वर्षा की बूँद पकड़कर आकाश चढ़ना है। बिना राम-्नाम मोक्ष संभव नहीं। Bhakti Bhavnal Powered by @Bablu_dwivedi418 2025 Bhakti Bhavna - ShareChat
#🌷शुभ गुरुवार #💥💥आस्था💥💥👃 #🙏🙏bhkti bhvnay💥🙏 #👏भगवान विष्णु😇 #🌊गंगा सप्तमी 🌸
🌷शुभ गुरुवार - ShareChat
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#🌊गंगा सप्तमी 🌸 #👏भगवान विष्णु😇 #🙏🙏bhkti bhvnay💥🙏 #💥💥आस्था💥💥👃 #🌷शुभ गुरुवार
🌊गंगा सप्तमी 🌸 - ನಾ[( सप्तमी की हार्दिक शुभकामनाएं माँ गंगा की कृपा से आपके जीवन में शांति, सुख और समृद्धि बनी रहे। हर हर गंगे! 3 ನಾ[( सप्तमी की हार्दिक शुभकामनाएं माँ गंगा की कृपा से आपके जीवन में शांति, सुख और समृद्धि बनी रहे। हर हर गंगे! 3 - ShareChat
#💥💥आस्था💥💥👃 #🌷शुभ गुरुवार #🙏🙏bhkti bhvnay💥🙏 #🌊गंगा सप्तमी 🌸 #👏भगवान विष्णु😇
💥💥आस्था💥💥👃 - गृद्दारी का सबक हमें अपनों ने सिखाया பிசவி कुत्तै की वृषत्रदारी पर थषी भरोसा 474<74 गृद्दारी का सबक हमें अपनों ने सिखाया பிசவி कुत्तै की वृषत्रदारी पर थषी भरोसा 474<74 - ShareChat
#👏भगवान विष्णु😇 #🌊गंगा सप्तमी 🌸 #🙏🙏bhkti bhvnay💥🙏 #🌷शुभ गुरुवार #💥💥आस्था💥💥👃
👏भगवान विष्णु😇 - गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे तुलसी' साथी विपति के, विद्या, विनय, विवेक। साहस, सुकृत, सुसत्य-्व्रत, राम-्भरोसो एक।। अर्थः विद्या, विनय, विवेक, साहस, पुण्य और सत्य जैसे गुण विपत्ति में साथ देने वाले होते हैं, और ये सभी गुण भगवान राम के भरोसे से ही प्राप्त होते हैं। Bhakti Bhavnal 2025 Bhakti Bhavna Powered by @Bablu_dwivedi418 गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे तुलसी' साथी विपति के, विद्या, विनय, विवेक। साहस, सुकृत, सुसत्य-्व्रत, राम-्भरोसो एक।। अर्थः विद्या, विनय, विवेक, साहस, पुण्य और सत्य जैसे गुण विपत्ति में साथ देने वाले होते हैं, और ये सभी गुण भगवान राम के भरोसे से ही प्राप्त होते हैं। Bhakti Bhavnal 2025 Bhakti Bhavna Powered by @Bablu_dwivedi418 - ShareChat
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💥💥आस्था💥💥👃 - गोस्वामी तुलसीदासु जी के दोहे नहीं नैनन नहीं सनेह। आवत हिय हरषै 'तुलसी ' तहाँ न जाइए, कंचन बरसे मेह।। अर्थः जहाँ जाने पर लोग प्रसन्न न हों और आँखों में प्रेम न हो, ऐसे स्थान पर कभी नहीं जाना चाहिए, चाहे वहाँ कितना ही धन क्यों न हो। Bhakti Bhavna 0 2025 Bhakti Bhavna Powered by @Bablu_dwivedi418 गोस्वामी तुलसीदासु जी के दोहे नहीं नैनन नहीं सनेह। आवत हिय हरषै 'तुलसी ' तहाँ न जाइए, कंचन बरसे मेह।। अर्थः जहाँ जाने पर लोग प्रसन्न न हों और आँखों में प्रेम न हो, ऐसे स्थान पर कभी नहीं जाना चाहिए, चाहे वहाँ कितना ही धन क्यों न हो। Bhakti Bhavna 0 2025 Bhakti Bhavna Powered by @Bablu_dwivedi418 - ShareChat