दुर्गा विजयकांत झा
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#जय श्री कृष्णा #राधे राधे
जय श्री कृष्णा - विष्णु ' ச3ளி II भगवान जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे। 3 md जर्नों के संकट दास जर्नों के संकट क्षण में दूर करे ।l  भक्त ।१ ३० जय जगदीश हरे.  पावे दुःख  बिनसे मन का स्वामी दुःख विनसे मन का। थ्यावे फल सुख सम्पति घर आवे,सुख सम्पति घर आवे,कष्ट मिटे तन का Il Il 3ঁ লব ল্যাতীহা ৮tIl  मात पिता तुम मेरे,शरण गहूं किसकी, स्वामी शरण गहूं ्में किसकी |  ओर न दूजा तुम बिन ओर न दूजा आस करू में जिसकी ११  नुम बिन  Il 3 m v 1 ನೆ. Il ' तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी स्वामी तुम अन्तर्यामी |  पारब्रह्म परमेश्वर पारब्रह्म परमेश्वर तुम सब के स्वामी Il ।I ३० जय जगदीश हरे॰।  के सागर तुम पालनकर्ता स्वामी तुम पालनकर्ता | तुम करुणा  स्वामी, कृपा करो भर्ता।।  ৭ সুতে फलकामी में सेवक तुम " ।। ३० जय जगदीश हरे. हो एक अगोचर सवके प्राणपति स्वामी सबके प्राणपति । किस विथि मिलूं दयामय,किस विथि मिलूं दयामय तुमको में कुमति II  II 33 STu STTఓTaT గో . Il दीन बऱ्धु दुःख हर्ता ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे।  अपने हाथ उठाओ अपने शरण लगाओ द्वार पड़ा तेरे । ११ ३० जय जगदीश हरे..। विपय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा स्वमी पाप(कट ) हरो देवा ।  श्रद्घा भक्ति बढ़ाओ श्रद्वा भक्ति बढ़ाओ सन्तन की सेवा ।१ Il ತ m4 m1n೫a1 ೯ೆ . Il' धन सव है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा  तनमन সণতা, নযা अर्पण क्या लागे मेरा ।। గౌ तुझको  तुझको  ।I ३० जय जगदीश हरे- श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।स्वामी जो कोई नरगावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे।।  Il 3০ লত লযতীহ ব২.Il  जय जगदीश हरे, स्वामी जय दीनानाथ हरे भक्तजनो के दासजनो के संकट क्षण रमे दूर करे ಸೌ೭ ।। ओ० जय जगदीश हरे..।।  विष्णु ' ச3ளி II भगवान जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे। 3 md जर्नों के संकट दास जर्नों के संकट क्षण में दूर करे ।l  भक्त ।१ ३० जय जगदीश हरे.  पावे दुःख  बिनसे मन का स्वामी दुःख विनसे मन का। थ्यावे फल सुख सम्पति घर आवे,सुख सम्पति घर आवे,कष्ट मिटे तन का Il Il 3ঁ লব ল্যাতীহা ৮tIl  मात पिता तुम मेरे,शरण गहूं किसकी, स्वामी शरण गहूं ्में किसकी |  ओर न दूजा तुम बिन ओर न दूजा आस करू में जिसकी ११  नुम बिन  Il 3 m v 1 ನೆ. Il ' तुम पूरण परमात्मा तुम अन्तर्यामी स्वामी तुम अन्तर्यामी |  पारब्रह्म परमेश्वर पारब्रह्म परमेश्वर तुम सब के स्वामी Il ।I ३० जय जगदीश हरे॰।  के सागर तुम पालनकर्ता स्वामी तुम पालनकर्ता | तुम करुणा  स्वामी, कृपा करो भर्ता।।  ৭ সুতে फलकामी में सेवक तुम " ।। ३० जय जगदीश हरे. हो एक अगोचर सवके प्राणपति स्वामी सबके प्राणपति । किस विथि मिलूं दयामय,किस विथि मिलूं दयामय तुमको में कुमति II  II 33 STu STTఓTaT గో . Il दीन बऱ्धु दुःख हर्ता ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे।  अपने हाथ उठाओ अपने शरण लगाओ द्वार पड़ा तेरे । ११ ३० जय जगदीश हरे..। विपय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा स्वमी पाप(कट ) हरो देवा ।  श्रद्घा भक्ति बढ़ाओ श्रद्वा भक्ति बढ़ाओ सन्तन की सेवा ।१ Il ತ m4 m1n೫a1 ೯ೆ . Il' धन सव है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा  तनमन সণতা, নযা अर्पण क्या लागे मेरा ।। గౌ तुझको  तुझको  ।I ३० जय जगदीश हरे- श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।स्वामी जो कोई नरगावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे।।  Il 3০ লত লযতীহ ব২.Il  जय जगदीश हरे, स्वामी जय दीनानाथ हरे भक्तजनो के दासजनो के संकट क्षण रमे दूर करे ಸೌ೭ ।। ओ० जय जगदीश हरे..।। - ShareChat