Gurcharan singh
ShareChat
click to see wallet page
@gurcharn8293
gurcharn8293
Gurcharan singh
@gurcharn8293
ਹਰ ਘਰ ਸੁੱਖ ਹੋਵੇ
#🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ
🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ - इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोज्नुविधीयते। वायुरनावमिवाम्भसि। हरति प्रज्ञा तदस्य [ क्योंकि जैसे जल में चलने वाली नाव को वायु हर लेती है, वैसे ही विषयों में विचरती हुई इन्द्रियों में से मन जिस इन्द्रिय के साथ रहता है, वह एक ही इन्द्रिय इस अयुक्त पुरुष की बुद्धि को हर लेती है इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोज्नुविधीयते। वायुरनावमिवाम्भसि। हरति प्रज्ञा तदस्य [ क्योंकि जैसे जल में चलने वाली नाव को वायु हर लेती है, वैसे ही विषयों में विचरती हुई इन्द्रियों में से मन जिस इन्द्रिय के साथ रहता है, वह एक ही इन्द्रिय इस अयुक्त पुरुष की बुद्धि को हर लेती है - ShareChat
#📝 ਅੱਜ ਦਾ ਵਿਚਾਰ ✍
📝 ਅੱਜ ਦਾ ਵਿਚਾਰ ✍ - ईश्वर को आखिरी उम्मीद नहीं, पहला भरोसा बनाइये। <16 शुभ प्रभात वदन সান: ईश्वर को आखिरी उम्मीद नहीं, पहला भरोसा बनाइये। <16 शुभ प्रभात वदन সান: - ShareChat
#🌙 ਗੁੱਡ ਨਾਇਟ
🌙 ਗੁੱਡ ਨਾਇਟ - 9   ~Toteams Sweel 7id] Qood Nilt 9   ~Toteams Sweel 7id] Qood Nilt - ShareChat
#🌞ਸਵੇਰ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ #🌅 ਗੁੱਡ ਮੋਰਨਿੰਗ
🌞ਸਵੇਰ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ - O०d oning O०d oning - ShareChat
#🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ
🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ - नास्ति बुद्धिसुक्तस्प न चापुक्तस्प भावना। न चाभावयतः शान्तिरशान्तस् कुतः सुखम्। जीते हुए मन और इन्रिपों वाले पुरुष में निश्चयाम्िका बुद्धि 7 नहीं होती और उस अयुक्त मनुष्प के अन्तःकरण मे भावना भी नहों होती तथा भावनाहीन मनुष्प को शान्ति नहीं मिलती और शन्तिरहित मनुष्प को सुख कैसे मिल सकता हैः नास्ति बुद्धिसुक्तस्प न चापुक्तस्प भावना। न चाभावयतः शान्तिरशान्तस् कुतः सुखम्। जीते हुए मन और इन्रिपों वाले पुरुष में निश्चयाम्िका बुद्धि 7 नहीं होती और उस अयुक्त मनुष्प के अन्तःकरण मे भावना भी नहों होती तथा भावनाहीन मनुष्प को शान्ति नहीं मिलती और शन्तिरहित मनुष्प को सुख कैसे मिल सकता हैः - ShareChat
#🌞ਸਵੇਰ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ #🌅 ਗੁੱਡ ਮੋਰਨਿੰਗ
🌞ਸਵੇਰ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ - @mng @ @mng @ - ShareChat
#🌞ਸਵੇਰ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ #🌅 ਗੁੱਡ ਮੋਰਨਿੰਗ
🌞ਸਵੇਰ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ - Goodlelorning ( Goodlelorning ( - ShareChat
#🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ
🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ - प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते। प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते।। अन्तःकरण की प्रसननता होने पर इसके सम्पूर्ण का अभाव हो जाता है और उस प्रसन्नचित्त दुःखा वाले कर्मयोगी की बुद्धि शीघ्र ही सब ओर से हटकर एक परमात्मा में ही भलीभाँति स्थिर हो जाती है प्रसादे सर्वदुःखानां हानिरस्योपजायते। प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठते।। अन्तःकरण की प्रसननता होने पर इसके सम्पूर्ण का अभाव हो जाता है और उस प्रसन्नचित्त दुःखा वाले कर्मयोगी की बुद्धि शीघ्र ही सब ओर से हटकर एक परमात्मा में ही भलीभाँति स्थिर हो जाती है - ShareChat
#🌙 ਗੁੱਡ ਨਾਇਟ
🌙 ਗੁੱਡ ਨਾਇਟ - Good Night: Good Night: - ShareChat
#📝 ਅੱਜ ਦਾ ਵਿਚਾਰ ✍
📝 ਅੱਜ ਦਾ ਵਿਚਾਰ ✍ - সিসিন হাল ৪ী সাং সমীসিন সথ ৪ী লকিন হ্ননা ৪ী ৪ী कि शब्द से कष्ट न हो থুম সমান সিসিন হাল ৪ী সাং সমীসিন সথ ৪ী লকিন হ্ননা ৪ী ৪ী कि शब्द से कष्ट न हो থুম সমান - ShareChat