Gurcharan singh
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@gurcharn8293
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Gurcharan singh
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ਹਰ ਘਰ ਸੁੱਖ ਹੋਵੇ
#🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ
🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ - बन्धुरात्मात्मनस्तस पेनालैवाल्मना जितः| अनातमनसु शत्रुत्वे वर्तेतालमैव शत्रुवत्। जिस जीवातमा द्वारा मन और इन्रिपों सहित शरीर जीता हुआा है, उस जीवात्मा का तो वह आाप ही मित्र है और जिसके द्वारा मन तथा इन्रिपों सहित शरीर नहीं जीता गया है, उसके लिए वह आप ही शत्रु के सदृश शत्रुता में बर्तता है बन्धुरात्मात्मनस्तस पेनालैवाल्मना जितः| अनातमनसु शत्रुत्वे वर्तेतालमैव शत्रुवत्। जिस जीवातमा द्वारा मन और इन्रिपों सहित शरीर जीता हुआा है, उस जीवात्मा का तो वह आाप ही मित्र है और जिसके द्वारा मन तथा इन्रिपों सहित शरीर नहीं जीता गया है, उसके लिए वह आप ही शत्रु के सदृश शत्रुता में बर्तता है - ShareChat
#🌅 ਗੁੱਡ ਮੋਰਨਿੰਗ #🌞ਸਵੇਰ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ
🌅 ਗੁੱਡ ਮੋਰਨਿੰਗ - @ood motingy @ood motingy - ShareChat
#🌅 ਗੁੱਡ ਮੋਰਨਿੰਗ #🌞ਸਵੇਰ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ
🌅 ਗੁੱਡ ਮੋਰਨਿੰਗ - GOOD MORNNG Olave & 8Bteaaet OJedneAday GOOD MORNNG Olave & 8Bteaaet OJedneAday - ShareChat
#🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ
🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ - उद्धरेदात्मनाण्त्मान नात्मानमवसादपेत् रिपुरात्मनः || "TRRa| आात्मेव ह्यात्मनो  अपने द्वारा अपना संसार समुद्र से उद्धार करे और अपने को अधोगति में न डाले क्पोकि पह मनुष्प आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है उद्धरेदात्मनाण्त्मान नात्मानमवसादपेत् रिपुरात्मनः || "TRRa| आात्मेव ह्यात्मनो  अपने द्वारा अपना संसार समुद्र से उद्धार करे और अपने को अधोगति में न डाले क्पोकि पह मनुष्प आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है - ShareChat
#🌞ਸਵੇਰ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ #🌅 ਗੁੱਡ ਮੋਰਨਿੰਗ
🌞ਸਵੇਰ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ - Cud JVilg Cud JVilg - ShareChat
#📝 ਅੱਜ ਦਾ ਵਿਚਾਰ ✍
📝 ਅੱਜ ਦਾ ਵਿਚਾਰ ✍ - सुप्रभात माना की ज़िंदगी की रहे आसान नहीं मगर मुस्कुराक चलने गें कोईं नुक्सान नहीं। सुप्रभात माना की ज़िंदगी की रहे आसान नहीं मगर मुस्कुराक चलने गें कोईं नुक्सान नहीं। - ShareChat
#🌅 ਗੁੱਡ ਮੋਰਨਿੰਗ #🌞ਸਵੇਰ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ
🌅 ਗੁੱਡ ਮੋਰਨਿੰਗ - day nice (   Have Morning Good day nice (   Have Morning Good - ShareChat
#🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ
🙏ਧਾਰਮਿਕ ਗੱਲਾਂ - आरतक्षमुनपाग कर्म कारणमुच्यत। पोगारूढस्प तसैव शमः कारणमुच्यत|| होने की इच्छा वले मननशील पुष के लिए पोग न ^6 पोग की प्राप्ति न निष्काम भाव से कर्म करा ही हेतु कह WIi: पोगारूढ़ " जाता है भौर ह। जाने पर उस पुरप का ज सर्वसकन्पों का अभाव है, वही कल्पाण ने हेतु कहा जाता है आरतक्षमुनपाग कर्म कारणमुच्यत। पोगारूढस्प तसैव शमः कारणमुच्यत|| होने की इच्छा वले मननशील पुष के लिए पोग न ^6 पोग की प्राप्ति न निष्काम भाव से कर्म करा ही हेतु कह WIi: पोगारूढ़ " जाता है भौर ह। जाने पर उस पुरप का ज सर्वसकन्पों का अभाव है, वही कल्पाण ने हेतु कहा जाता है - ShareChat