उत्कर्ष !!
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उत्कर्ष !!
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#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - प्रेम हो या भोजन.. किसी को ज़्यादा दे दो तो वो अधूरा छोड़ कर चला আনা ট. प्रेम हो या भोजन.. किसी को ज़्यादा दे दो तो वो अधूरा छोड़ कर चला আনা ট. - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - যোয়া ক্রা अभ्यास कर लो ٦٦٤ का असर ख़त्म हो जाएगा. যোয়া ক্রা अभ्यास कर लो ٦٦٤ का असर ख़त्म हो जाएगा. - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - जिंदगी उस से गुजर रही है..! সীভ जिसमें नींद कम और टेंशन ज्यादा रहता है...! जिंदगी उस से गुजर रही है..! সীভ जिसमें नींद कम और टेंशन ज्यादा रहता है...! - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - Feelings  My तेरे न होने का मुझको मलाल एक तरफ . तू मेरा क्यूँ न हुआ ये सवाल एक तरफ. ? मैं खुश ৪ুঁ সযাং লু তন সঁা থা যন্ধান সান वो पल वो दिन वो महीना वो साल एक तरफ गुलाब पर ये चटख रंग चढेग़ा कैसे भला मैं बैठा सोचने रख के गुलाल एक तरफ॰ जहान भर के हैं मंजर मेरी नजऱ में मगर उस एक शख्स़ का दिल में ख्य़ाल एक तरफ हजार शिकवे - शिकायत मुझे है तुझसे मगर वो कुछ दिनों की तेरी देखभाल एक तरफ. Tere 4~^ ஈபப^ Feelings  My तेरे न होने का मुझको मलाल एक तरफ . तू मेरा क्यूँ न हुआ ये सवाल एक तरफ. ? मैं खुश ৪ুঁ সযাং লু তন সঁা থা যন্ধান সান वो पल वो दिन वो महीना वो साल एक तरफ गुलाब पर ये चटख रंग चढेग़ा कैसे भला मैं बैठा सोचने रख के गुलाल एक तरफ॰ जहान भर के हैं मंजर मेरी नजऱ में मगर उस एक शख्स़ का दिल में ख्य़ाल एक तरफ हजार शिकवे - शिकायत मुझे है तुझसे मगर वो कुछ दिनों की तेरी देखभाल एक तरफ. Tere 4~^ ஈபப^ - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - बहुत शानदार लाइन तेरी इस दुनिया में ये मंज़र क्यों है.. कहीं अपनापन तो कहीं पीठ पीछे खंजर क्यों है.. 643 संसार के हर जर्रे में रहता है , सुना फिर ज़मीन पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यों है.. जब रहने वाले दुनिया के हर बन्दे तेरे हैं , फिर कोई दोस्त तो कोई दुश्मन क्यों है लिखता है हर किसी का मुकद्दर , तू ही फिर कोई बदनसीब , और कोई मुकद्दर का सिकंदर क्यों है बहुत शानदार लाइन तेरी इस दुनिया में ये मंज़र क्यों है.. कहीं अपनापन तो कहीं पीठ पीछे खंजर क्यों है.. 643 संसार के हर जर्रे में रहता है , सुना फिर ज़मीन पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यों है.. जब रहने वाले दुनिया के हर बन्दे तेरे हैं , फिर कोई दोस्त तो कोई दुश्मन क्यों है लिखता है हर किसी का मुकद्दर , तू ही फिर कोई बदनसीब , और कोई मुकद्दर का सिकंदर क्यों है - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - कुछ तो शेष है मुझमें अभी नही हूँ मैँ अभी हारा एक दिन चमकना है मुझको भी भले ही तारा नही हूँ मै॰ ! मेरे भीतर भी प्रवाहृ रहता है धारा नही हूँ मैं ! पर 07 57 मैं  किस्मत को दोष नही देता क्योंकि किस्मत का मारा नही हूँ मैं ! मेरे हृदय में भी प्यार पलता है भले ही सूरत का प्यारा नही हूँ मैं ! सबके सामने अक्सर खुश ही नजरआताहूँ {77487ಕ್ನಷ೫ %! खुश भी सारा का पर 94&/ १७ सितम्बर २०२४ aa कुछ तो शेष है मुझमें अभी नही हूँ मैँ अभी हारा एक दिन चमकना है मुझको भी भले ही तारा नही हूँ मै॰ ! मेरे भीतर भी प्रवाहृ रहता है धारा नही हूँ मैं ! पर 07 57 मैं  किस्मत को दोष नही देता क्योंकि किस्मत का मारा नही हूँ मैं ! मेरे हृदय में भी प्यार पलता है भले ही सूरत का प्यारा नही हूँ मैं ! सबके सामने अक्सर खुश ही नजरआताहूँ {77487ಕ್ನಷ೫ %! खुश भी सारा का पर 94&/ १७ सितम्बर २०२४ aa - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - सुख मनुष्य को नाव बनाना सिखाता है और दुख तैरना सुख मनुष्य को नाव बनाना सिखाता है और दुख तैरना - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - अहंकारी को लगता है है, वह सब जानता पर ज्ञानी जानता है कि उसे अभी बहुत कुछ सीखना है.! Tlलफ़्ज अहंकारी को लगता है है, वह सब जानता पर ज्ञानी जानता है कि उसे अभी बहुत कुछ सीखना है.! Tlलफ़्ज - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - कर्मों का फल सीधा সা ই,, छल का फल छल आज नहीं तो कल कर्मों का फल सीधा সা ই,, छल का फल छल आज नहीं तो कल - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - मैं उस भीड़ से दूर रहता हूँ जहां लोग अपना होने का नाटक करते हॅ। $ 1@ 0 मैं उस भीड़ से दूर रहता हूँ जहां लोग अपना होने का नाटक करते हॅ। $ 1@ 0 - ShareChat