विदित है कि गांधी जी का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था और चूँकि उनके पिता दीवान थे, इसलिये उन्हें अन्य धर्मों के लोगों से मिलने का भी काफी अवसर मिला, उनके कई इसाई और मुस्लिम दोस्त थे। साथ ही गांधी जी अपनी युवा अवस्था में जैन धर्म से भी काफी प्रभावित थे। कई विश्लेषकों का मानना है कि गांधी जी ने ‘सत्याग्रह’ की अवधारणा हेतु जैन धर्म के प्रचलित सिद्धांत ‘अहिंसा’ से प्रेरणा ली थी।
गांधी जी ने ‘भगवान’ को ‘सत्य’ के रूप में उल्लेखित किया था। उनका कहना था कि “मैं लकीर का फकीर नहीं हूँ।” वे संसार के सभी धर्मों को सत्य और अहिंसा की कसौटी पर कसकर देखते थे, जो भी उसमें खरा नहीं उतरता वे उसे अस्वीकार कर देते और जो उसमें खरा उतरता वे उसे स्वीकार कर लेते थे। गांधी जी के अनुसार, हमने धर्म को केवल खानपान का विषय बनाकर उसकी प्रतिष्ठा कम कर दी है। वे चाहते थे कि सभी धर्म के लोग अपने धर्म के साथ-साथ दूसरे धर्म के ग्रंथों और उनके अनुयायियों का भी आदर करें। #✍मेरे पसंदीदा लेखक #👌रियलिटी शो
महात्मा गांधी के सत्याग्रह को युद्ध के नैतिक विकल्प के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने आम जन को यह सिखाया कि सत्याग्रह का प्रयोग समस्या तथा संघर्ष के समाधान हेतु किस प्रकार किया जाता है। गांधी का सत्याग्रह राजनीतिक मुद्दों के निवारण हेतु एक प्रभावी साधन साबित हुआ है। युद्ध और शांति, आतंकवाद, मानवाधिकार, सतत विकास, जलवायु परिवर्तन, सामाजिक-राजनीतिक अशांति और राजनीतिक-प्रशासनिक भ्रष्टाचार से संबंधित समकालीन चुनौतियों में से कई को गांधीवादी तरीके से हल किया जा सकता है। अतः 21वीं सदी के लोगों के पास अभी भी गांधीवाद से सीखने के लिये बहुत कुछ सीखना बाकी है। #✍मेरे पसंदीदा लेखक
गांधी और सत्याग्रह
गांधी जी ने अपनी संपूर्ण अहिंसक कार्य पद्धति को ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया। उनके लिये सत्याग्रह का अर्थ सभी प्रकार के अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ शुद्ध आत्मबल का प्रयोग करने से था। गांधी जी का कहना था कि सत्याग्रह को कोई भी अपना सकता है, उनके विचारों में सत्याग्रह उस बरगद के वृक्ष के समान था जिसकी असंख्य शाखाएँ होती हैं। चंपारण और बारदोली सत्याग्रह गांधी जी द्वारा केवल लोगों के लिये भौतिक लाभ प्राप्त करने हेतु नहीं किये गए थे, बल्कि तत्कालीन ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण रवैये का विरोध करने हेतु किये गए थे। सविनय अवज्ञा आंदोलन, दांडी सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन ऐसे प्रमुख उदाहरण थे जिनमें गांधी जी ने आत्मबल को सत्याग्रह के हथियार के रूप में प्रयोग किया। #👌रियलिटी शो #✍मेरे पसंदीदा लेखक
भारत में गांधी जी का आगमन
दक्षिण अफ्रीका में लंबे समय तक रहने और अंग्रेज़ों की नस्लवादी नीति के खिलाफ सक्रियता के कारण गांधी जी ने एक राष्ट्रवादी, सिद्धांतवादी और आयोजक के रूप में ख्याति अर्जित कर ली थी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोपाल कृष्ण गोखले ने गांधी जी को ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता हेतु भारत के संघर्ष में शामिल होने के लिये आमंत्रित किया। वर्ष 1915 में गांधी भारत आए और उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की रणनीति तैयार करने हेतु देश के गाँव-गाँव का दौरा किया। #✍मेरे पसंदीदा लेखक
दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी
दक्षिण अफ्रीका में गांधी ने अश्वेतों और भारतीयों के प्रति नस्लीय भेदभाव को महसूस किया। उन्हें कई अवसरों पर अपमान का सामना करना पड़ा जिसके कारण उन्होंने नस्लीय भेदभाव से लड़ने का निर्णय लिया। उस समय दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों और अश्वेतों को वोट देने तथा फुटपाथ पर चलने तक का अधिकार नहीं था, गांधी ने इसका कड़ा विरोध किया और अंततः वर्ष 1894 में 'नटाल इंडियन कांग्रेस' नामक एक संगठन स्थापित करने में सफल रहे। दक्षिण अफ्रीका में 21 वर्षों तक रहने के बाद वे वर्ष 1915 में वापस भारत लौट आए। #✍मेरे पसंदीदा लेखक
"क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है"। #😎मोटिवेशनल गुरु🤘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #👌रियलिटी शो
गांधीजी का जीवन सत्य और अहिंसा का संगम था। उनका मानना था कि अहिंसा किसी भी हथियार से अधिक शक्तिशाली है। गलत साधनों का उपयोग करके सही लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। #👌रियलिटी शो #😎मोटिवेशनल गुरु🤘
ऐसा अधिकारी पहली बार,जो जनता के बीच खुल के दिखाऔर आज उनको माननीय राष्ट्रपति जी के द्वारा सम्मानित किया गया! आप ऐसे ही लोगों के दिल पर राज करते रहे जिलाधीश महोदय जी 🫡🫡 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #😎मोटिवेशनल गुरु🤘 #👌रियलिटी शो













