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💚 जय श्री कृष्णा 💚
#👍स्पेशल शायरी🖋
👍स्पेशल शायरी🖋 - जैसा कल था, है वैसा आज नहीं औरजैसा आज वैसा कल नहीं रहेगा , enjoy your life and smile ஒஜழ जैसा कल था, है वैसा आज नहीं औरजैसा आज वैसा कल नहीं रहेगा , enjoy your life and smile ஒஜழ - ShareChat
#🔱हर हर महादेव
🔱हर हर महादेव - शुभ सोमवार 18*05*26 ओम नमो भयवते रुद्राय! sril त्र्यंबकं यजामहे सुगंधि वर्धनम! gfe 30 उर्वारुकमिव बनधनातूं मृत्युयोमुक्षीय मामृतात् सुदरस्मयल स्ष्कान शुभ सोमवार 18*05*26 ओम नमो भयवते रुद्राय! sril त्र्यंबकं यजामहे सुगंधि वर्धनम! gfe 30 उर्वारुकमिव बनधनातूं मृत्युयोमुक्षीय मामृतात् सुदरस्मयल स्ष्कान - ShareChat
#🛕बाबा केदारनाथ📿
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#👍स्पेशल शायरी🖋
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#🧑‍🤝‍🧑दोस्ती पर शायरी🎙️
🧑‍🤝‍🧑दोस्ती पर शायरी🎙️ - .मैं यादों का किस्सा खोलूँ तो, ...कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं. .मैं गुजरे पल को सोचूँ तो, ...कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं. . .अब जाने कौन सी नगरी में आबाद हैं जाकर 3&7#, जागूँ तो, .मैं देर रात तक ...कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं... ...कुछ बातें थीं जैसी फूलों ...कुछ लहजे खुशबू जैसे थे, .मैं शहर ए-चमन में टहलूँ तो, ...कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं सबकी जिंदगी बदल गयी ..एक नए सिरे में ढ़ल गयी, .किसी को नौकरी से फुरसत नहीं ..किसी को दोस्तों की जरुरत नहीं.. सारे यार गुम होे गये हैं "तू" से "तुम" और " आप" हा गये हैं... .मैं गुजरे पल को सोचूँ तो, ...कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं. .मैं यादों का किस्सा खोलूँ तो, ...कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं. .मैं गुजरे पल को सोचूँ तो, ...कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं. . .अब जाने कौन सी नगरी में आबाद हैं जाकर 3&7#, जागूँ तो, .मैं देर रात तक ...कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं... ...कुछ बातें थीं जैसी फूलों ...कुछ लहजे खुशबू जैसे थे, .मैं शहर ए-चमन में टहलूँ तो, ...कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं सबकी जिंदगी बदल गयी ..एक नए सिरे में ढ़ल गयी, .किसी को नौकरी से फुरसत नहीं ..किसी को दोस्तों की जरुरत नहीं.. सारे यार गुम होे गये हैं "तू" से "तुम" और " आप" हा गये हैं... .मैं गुजरे पल को सोचूँ तो, ...कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं. - ShareChat
#👍स्पेशल शायरी🖋
👍स्पेशल शायरी🖋 - दिल बहीं लौटना चाहता है जहां दुबारा जाना मुमकिन नहीं बचपन, मासूमियत दोस्त्त घर पुराने पुराना क्योंकि उम्र चाहे जितनी भी हो सुना है दिल पर कभी नहीं पड़ती झुर्रियां दिल बहीं लौटना चाहता है जहां दुबारा जाना मुमकिन नहीं बचपन, मासूमियत दोस्त्त घर पुराने पुराना क्योंकि उम्र चाहे जितनी भी हो सुना है दिल पर कभी नहीं पड़ती झुर्रियां - ShareChat