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#📢नए सुप्रीम लीडर का ऐलान!🗞️
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#😱नागपुर में विस्फोट, 17 की मौत, 17 गंभीर🤕
😱नागपुर में विस्फोट, 17 की मौत, 17 गंभीर🤕 - लोकसत्ता.com नागपूर हादरलं! काटोल तालुक्यातील राऊळगावमध्ये स्फोटक कारखान्यात भीषण स्फोट; मृत्यूसंख्या १५ वर 5 B  Limited Energy (0X0 @Loksattalive Follow Us: लोकसत्ता.com नागपूर हादरलं! काटोल तालुक्यातील राऊळगावमध्ये स्फोटक कारखान्यात भीषण स्फोट; मृत्यूसंख्या १५ वर 5 B  Limited Energy (0X0 @Loksattalive Follow Us: - ShareChat
#😲दुबई में फंसे कई मशहूर सेलेब्स😮
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#😊होलिका दहन मुहूर्त एवं कथाएं🙏🔥
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#😊होलिका दहन मुहूर्त एवं कथाएं🙏🔥
😊होलिका दहन मुहूर्त एवं कथाएं🙏🔥 - 332 फाल्गुन मास की शीतल संध्या थी। गाँव के प्राचीन मंदिर र्मे अग्नि के पास बैठे वृद्ध लोग कहते हैं कि होली से पहले आचार्य से एक जिज्ञासु युचक ने पूछा = गृरुदव आठ दिन कटे फटे होते है इन्हें होलाष्टक कहते है। चया ये दिन अशुभ है? होलाष्टक रहस्य क्या इनका संबंध नकारात्मक शक्तियों से ह२ बत्स. जिस रतस्प को लोग भप मानते 7 चती आत्मजागरण का अवसर त। आाचायपुसकुराए  होलाष्टक कब से कब तक? से प्रारम्भ होकर होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी ठकाषार फलफूर्तयहकालसारमहीता हकारमूणिमा कटे-फटे दिन का आध्यात्मिक संकेत हौता पृहर्णमा आठ दिन पूर्व यह काल आरम्भ होता है की रात्रि में अग्नि के साथ इसका समापन होता लेखक सुरदर्शन कुमार पौराणिक आधार ।तनपाने पीत्न आचार्य ने कथा प्रारम्भ की = जिब असुरराज हिरण्यकशिपु ने प्रह्वाद को भगवान भक्ति से रोकना चाहा, तब उसने अनेक यातनाएँ इन अंतिम आठ दिनों में प्रह्लाद को विशेष कष्ट दिए गए। अग्नि में बैठी - परतु दहन स्वयं अंततः उसकी बहन होलिका ' उसका हुआ और भक्ति की विजय हुई। इसी घटना की स्मृति में होलाष्टक को संघर्ष और तपस्या का काल माना गया। कुछ ग्रंथों में उल्लेख है कि इन दिनों नवग्रहों की उग्र स्थिति रहती हे - सूर्य चंद्र, मंगल, शनि आदि ग्रह अपनी तीव्र दृष्टि से पृथ्वी पर मानसिक और ऊर्जात्मक हलचल उत्पन्न करते हें। इसलिए इसे ग्रहों की तप्त अवधि भी कहा गया। " कटे फटे दिन " क्यों? पुराने कर्मों ' ओर अहंकार कट फट " शब्द का अर्थहन বাবন] ये दिन बाह्य उत्सव से अधिक आंतरिक तप के होते ह। 9WIII इसलिए बिवाह गृहप्रवेश जेस मांगलिक कार्य स्थगित रखे जाते ह। यह नकारात्मक शक्तिरयों का भय नही, बल्कि आत्मशुद्धि का संकेत हे। ऊ। क्या इसका सम्बन्ध नकारात्मक शक्तियों से है? "वत्स , नकारात्मकता बाहर नहीं भीतर होती आचार्य बोले है।" होलाष्टक में मन की दुर्बलताएँ तीव्र हो सकती है = काथ अहंकार, असंतुलन।  पर यह समय उन्हे देखने और त्यागने का है। जेसे अग्नि रमें काष्ठ जलकर प्रकाश बनता हे॰ चेसे ही इन आठ दिरनों र्में साधना करने वाला व्यक्ति अपने भीतरकी होलिका जला सकता हे। वर्तमान में इसका महात्म्य युग में होलाष्टक आत्मनिरीक्षण का समय हे= पिवारह य्रा तःए श्ुभ সাত ক कार्य टाल  सं्यमित वाणी र्ख॰ सात्त्विक आहार ग्रहण कर्र प्रातष नमो भगवते वासुदेवाय" या " नृसिंह कवच का पाठ कर्रे घर में दीपक और धूप प्रज्चलित करे ॰  नृ्द्धों और गौसेना का संकल्प रले, पूर्णिमा की रात्रि मे होलिका दहन के समय, अपनी एक बुरी आदत कागज़ परलिखकर, अग्नि र्मे अर्पित करे = यही सच्चा शमन है। दार्शनिक रहस्य आचार्य ने अंतर्म कहा - होलाष्टक अशुभ नर्ही चेतावनी है। यह काल ह्में याद दिलाता है कि भीतर का प्रह्लाद जीचित रहे और अहकार की होलिका जले। जो व्यक्ति इन आठ दिनों में संयम ओर साधना करता हे॰ उसके @sudaarshanikaa @SudershanKumar_ मानर हेष्ू ख्बकीने ; लिए यह काल अमृत समान हे।" प्रणाम किया। अग्नि की ज्वाला आकाश की मानो कह रही हो "भय नही, आत्मशुद्धि ही होलाष्टक का सत्य है।" sudershan kumar_ srisudaarshanikaa ٦ https:/ / wwwfacebookcom/share/ 1KNQZXeZRal होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक का आठ दिवसीय काल है। यह पौराणिक रूप से प्रह्लाद की परीक्षा और भक्ति की विजय का प्रतीक है। यह नकारात्मक शक्तियों का भय न्हीं॰ बल्कि आत्मशुद्धि . संयम https:/ /whatsapp com/channel/0029VbBCWJuFXUuUIL3JJHHO2  पूर्णिमा की रात्रि में होलिका ओरतप का अवसर ह। जव तक तब तक सावधानी , संयम ओर साधना बनाए रखें। दहन नही सुदर्शन https: /tame/ srisudaarshanikaarachanaen dHR https /laratt ai/@srisudarshanikarachanae ; 332 फाल्गुन मास की शीतल संध्या थी। गाँव के प्राचीन मंदिर र्मे अग्नि के पास बैठे वृद्ध लोग कहते हैं कि होली से पहले आचार्य से एक जिज्ञासु युचक ने पूछा = गृरुदव आठ दिन कटे फटे होते है इन्हें होलाष्टक कहते है। चया ये दिन अशुभ है? होलाष्टक रहस्य क्या इनका संबंध नकारात्मक शक्तियों से ह२ बत्स. जिस रतस्प को लोग भप मानते 7 चती आत्मजागरण का अवसर त। आाचायपुसकुराए  होलाष्टक कब से कब तक? से प्रारम्भ होकर होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी ठकाषार फलफूर्तयहकालसारमहीता हकारमूणिमा कटे-फटे दिन का आध्यात्मिक संकेत हौता पृहर्णमा आठ दिन पूर्व यह काल आरम्भ होता है की रात्रि में अग्नि के साथ इसका समापन होता लेखक सुरदर्शन कुमार पौराणिक आधार ।तनपाने पीत्न आचार्य ने कथा प्रारम्भ की = जिब असुरराज हिरण्यकशिपु ने प्रह्वाद को भगवान भक्ति से रोकना चाहा, तब उसने अनेक यातनाएँ इन अंतिम आठ दिनों में प्रह्लाद को विशेष कष्ट दिए गए। अग्नि में बैठी - परतु दहन स्वयं अंततः उसकी बहन होलिका ' उसका हुआ और भक्ति की विजय हुई। इसी घटना की स्मृति में होलाष्टक को संघर्ष और तपस्या का काल माना गया। कुछ ग्रंथों में उल्लेख है कि इन दिनों नवग्रहों की उग्र स्थिति रहती हे - सूर्य चंद्र, मंगल, शनि आदि ग्रह अपनी तीव्र दृष्टि से पृथ्वी पर मानसिक और ऊर्जात्मक हलचल उत्पन्न करते हें। इसलिए इसे ग्रहों की तप्त अवधि भी कहा गया। " कटे फटे दिन " क्यों? पुराने कर्मों ' ओर अहंकार कट फट " शब्द का अर्थहन বাবন] ये दिन बाह्य उत्सव से अधिक आंतरिक तप के होते ह। 9WIII इसलिए बिवाह गृहप्रवेश जेस मांगलिक कार्य स्थगित रखे जाते ह। यह नकारात्मक शक्तिरयों का भय नही, बल्कि आत्मशुद्धि का संकेत हे। ऊ। क्या इसका सम्बन्ध नकारात्मक शक्तियों से है? "वत्स , नकारात्मकता बाहर नहीं भीतर होती आचार्य बोले है।" होलाष्टक में मन की दुर्बलताएँ तीव्र हो सकती है = काथ अहंकार, असंतुलन।  पर यह समय उन्हे देखने और त्यागने का है। जेसे अग्नि रमें काष्ठ जलकर प्रकाश बनता हे॰ चेसे ही इन आठ दिरनों र्में साधना करने वाला व्यक्ति अपने भीतरकी होलिका जला सकता हे। वर्तमान में इसका महात्म्य युग में होलाष्टक आत्मनिरीक्षण का समय हे= पिवारह य्रा तःए श्ुभ সাত ক कार्य टाल  सं्यमित वाणी र्ख॰ सात्त्विक आहार ग्रहण कर्र प्रातष नमो भगवते वासुदेवाय" या " नृसिंह कवच का पाठ कर्रे घर में दीपक और धूप प्रज्चलित करे ॰  नृ्द्धों और गौसेना का संकल्प रले, पूर्णिमा की रात्रि मे होलिका दहन के समय, अपनी एक बुरी आदत कागज़ परलिखकर, अग्नि र्मे अर्पित करे = यही सच्चा शमन है। दार्शनिक रहस्य आचार्य ने अंतर्म कहा - होलाष्टक अशुभ नर्ही चेतावनी है। यह काल ह्में याद दिलाता है कि भीतर का प्रह्लाद जीचित रहे और अहकार की होलिका जले। जो व्यक्ति इन आठ दिनों में संयम ओर साधना करता हे॰ उसके @sudaarshanikaa @SudershanKumar_ मानर हेष्ू ख्बकीने ; लिए यह काल अमृत समान हे।" प्रणाम किया। अग्नि की ज्वाला आकाश की मानो कह रही हो "भय नही, आत्मशुद्धि ही होलाष्टक का सत्य है।" sudershan kumar_ srisudaarshanikaa ٦ https:/ / wwwfacebookcom/share/ 1KNQZXeZRal होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक का आठ दिवसीय काल है। यह पौराणिक रूप से प्रह्लाद की परीक्षा और भक्ति की विजय का प्रतीक है। यह नकारात्मक शक्तियों का भय न्हीं॰ बल्कि आत्मशुद्धि . संयम https:/ /whatsapp com/channel/0029VbBCWJuFXUuUIL3JJHHO2  पूर्णिमा की रात्रि में होलिका ओरतप का अवसर ह। जव तक तब तक सावधानी , संयम ओर साधना बनाए रखें। दहन नही सुदर्शन https: /tame/ srisudaarshanikaarachanaen dHR https /laratt ai/@srisudarshanikarachanae ; - ShareChat
#😮दुकान में घुसी ट्राम, कई मौत, 40 घायल🚆
😮दुकान में घुसी ट्राम, कई मौत, 40 घायल🚆 - Tounuiy toRcpubtra HA8 P 0 Tounuiy toRcpubtra HA8 P 0 - ShareChat
#😮दुकान में घुसी ट्राम, कई मौत, 40 घायल🚆
😮दुकान में घुसी ट्राम, कई मौत, 40 घायल🚆 - 70 UOnF కగా ( 02 0900 LocalG Poliza | @ Francesco EnriquezlPNSipa USA via Reuters Connect Loca Polizia Carruraglilang 70 UOnF కగా ( 02 0900 LocalG Poliza | @ Francesco EnriquezlPNSipa USA via Reuters Connect Loca Polizia Carruraglilang - ShareChat
#😮दुकान में घुसी ट्राम, कई मौत, 40 घायल🚆
😮दुकान में घुसी ट्राम, कई मौत, 40 घायल🚆 - CGTN EUROPE MILAN TRAM DERAILMENT: AT LEAST ONE KILLED 20 INJUREDI SAY POLICE VGU DEL TUO CGTN EUROPE MILAN TRAM DERAILMENT: AT LEAST ONE KILLED 20 INJUREDI SAY POLICE VGU DEL TUO - ShareChat
#🤩राजपाल यादव की 'नई पारी' का ऐलान📢
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