kaushik Samarjeet Singh "Raaz"
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मैं फिर ना मिलुगा कही ढुढ लेना!तेरे दर्द का असर आख
#😢अखिलेश यादव पर टूटा दुखों का पहाड़ क्या अपर्णा… तुमसे रोया भी ना गया ! अपर्णा यादव अपना चेहरा अपने दिवंगत पति से 90 डिग्री पूर्व की ओर रखकर...18 के डेसिबल पर चीखी होतीं...2 मिनट 53 सेकेंड तक आंखो से 5 मिलीलीटर आंसू निकाले होते...तो शायद वो आदर्श पत्नी होती। या क्या पता इससे भी कुछ और नपा तुला तय है जो उन्हें करना चाहिए और वो नहीं कर पाई इसलिए वो आदर्श पत्नी नहीं रह गईं। मुझे डर है उन पर सवाल उठाने वाले कहीं अपने घरों में परिजनों की मृत्यु की मॉक ड्रिल्स ना करवाते हों...ताकि सब उनके तय हिसाब से हो। पर ईश्वर के तय हिसाब का आज तक कौन हिसाब लगा पाया है। और आपके घर की मृत्यु पर आपके परिजन आपके हिसाब से रोएंगे ना। अपर्णा यादव आपके फूफा की मृत्यु के हिसाब से कैसे आपकी भूमिका निभा सकती हैं? उनसे ये अपेक्षा क्यों? कई लोग सवाल उठा रहे हैं जब पति बीमार थे तो वो असम क्यों गई…यहां क्यों गई… वहां क्यों गई? बड़ी साधारण सी बात है कि वो पत्नी और मां होने के साथ ही महिला आयोग की अध्यक्ष भी हैं, बीजेपी की नेता भी हैं...वो असम इसीलिए गईं क्योंकि उन्हें ये दायित्व भी निभाना था। गिद्ध की तरह स्क्रूटनी पर बैठे समाज की जींस कभी मंदिरा बेदी की जींस से मैच नहीं खाती इसलिए वो कहता है कि उन्हें अपने पति के अंतिम संस्कार पर जींस नहीं पहननी चाहिए थी। अपर्णा यादव महिला आयोग की अध्यक्ष हैं। जब उनके शोक पर सवाल उठ रहे हैं तो वो समझ सकती हैं उन्हें कैसे समाज से महिलाओं की रक्षा के लिए...उनके कल्याण के लिए... अपनी आवाज उठानी है। दरअसल पति के जाने पर छाती पीटती औरतें इस समाज के लिए एक सुकून होती हैं...आश्वासन होती हैं। घूंघट के पीछे गश खाती रिरियाती औरतें समाज को उसके प्रति बेचारगी से भर देती हैं। लेकिन बड़ा डराती है समाज को फिर से उठ खड़ी होती...उसके खांचे को मानने से इनकार करने वाली, उसकी बेड़ियों में ना बंधने वाली औरतें। याद है आपको... पहलगाम हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी की 29 साल की पत्नी ऐशान्या को कहना पड़ा...बस मैं ये चाहती हूं कि अब मैं कभी हंसू तो लोग ये ना कहें कि बताओ इसके पति की तो हत्या हो गई थी और ये हंस रही है। बड़ी साधारण बात है। दुख दुख होता है। कोई छाती पीट के रो लेता है कोई पथराई आंखो के पीछे सब सोख लेता है। निजी दुख पर किसी के लिए परफार्म नहीं करना होता और कैमरे के लिए तो हरगिज नहीं। उसे रोने दीजिए , समझने दीजिए , संभलने दीजिए, संभालने दीजिए, दोबारा चलने दीजिए.. पुरुष के साथ भी तो आप ऐसा ही करते हैं ना.. पत्नी की मृत्यु पर अगर पति विधुर होता है तो पत्नी भी पति की मृत्यु पर विधवा ही होती है अपाहिज नहीं। संवेदना की स्थिति में पुरूष को भी कंधा चाहिए होता है स्त्री को भी कंधा ही चाहिए होता है गोद नहीं। जब आप एक स्त्री को ऐसे हालात से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें तो नीयत इतनी साफ रखे कि वो आगे बढ़े तो आगे आकर खुद ही ना खड़े हो जाएं। बाकी हाय हाय बेचारी की उपमा वाली स्त्री आत्मनिर्भर होने के बाद कहलाती तो बड़ी तेज ही है। इसलिए स्त्री का तेज सहने की क्षमता रखने वाला समाज बनिए। राजा राम मोहन राय और ईश्वर चंद विद्या सागर की आत्मा को भी शांति मिलेगी। . ##कौशिक-राज़... ✍️
😢अखिलेश यादव पर टूटा दुखों का पहाड़ - SUMIT KUMAR SUMIT KUMAR - ShareChat
#राहुल गांधी, RAHUL GANDHI, वाय ही इज माई फेवरिट!! तमाम चुनावी हार और सांगठनिक समस्याओं के बावजूद यह शख्स मेरा फेवरिट पोलटिशियन है। लोग कहते है कि तुम्हे इसमे दिखता क्या है?? ओके, तो आज बताता हूँ, कि मुझे राहुल में क्या नजर आता है। ●● गिनीज बुक वाले अगर चेक करें, तो पाएंगे, कि मानव इतिहास के 5000 साल मे, किसी का सबसे ज्यादा अपमान, लानत- मलामत की गई, तो वह शख्स राहुल है। जबकि वे कोई हिटलर, चंगेज या ईदी अमीन नही। उसने कोई अमानवीय, अकरणीय काम नही किया। कमी यही कि एक खास खानदान में जन्मे है। उन्हें हटाने, हिलाने, गिराने के लिए, एक वेल फंडेड, वेल कोर्डिंनेटेड, ऑर्गनाइज्ड कैम्पेन- बरसों बरस से जारी है। और भीतर की मजबूती देखिए.. बंदा हिलता नही। ●● दुनिया मे कौन है जिसके पिता, माता, बहन, के साथ दादा, दादी, परनाना और लकड़नाना तक जाकर गालियां दी गयी। पुरखो की गंदी कहानियां बनाई। और जवाब छठी पीढ़ी के बालक से मांगा??? अनप्रिसिडेंट इन ह्यूमन हिस्ट्री!!! लेकिन यह शख्स हंसता रहता है। पलटकर जवाब नही दिया, तल्खी नही दिखाई। किसी के लिए मुंह से एब्यूज न निकाला, बदला नही चुकाया। मोहब्बत की दुकान की बात करता है। गाली देने वालो को गले लगाता है। धोखा देने वालो को भी शुभकामनाएं देता है। ऐसे व्यक्ति से कोई नफरत कैसे कर सकता है? मैं तो नही। लेकिन कारण और भी है। ●● आप इमरजेंसी को क्यो याद करते हैं, क्यो?? इसलिए कि राहुल डेमोक्रेटिक है। अपनी मर्जी पर भी दूसरों की इच्छा चलने देते हैं। मित्रों की सुनते मानते हैं। सामने वाले की तानाशाही को जस्टिफाई करने के लिए यह कहना सम्भव नही कि- अरे, तुम खुद भी तो तानाशाह हो। क्या करें? तो याद दिलाओ, इमरजेंसी.. "कि अरे, तुम नही तो क्या, तुम्हारी दादी तानाशाह थी" ●● नेहरू की औरतों के साथ तस्वीरे लगाते हैं, क्यो? क्योकि स्नूपिंग करने वाले, अपनी बीवी को छोड़, दूजी महिलाओं को गंदी निगाह से ताड़ने वाले नेता के बचाव में, आप ये नही कह सकते- कि राहुल, तुम भी तो चरित्रहीन हो!! उसके दो दशक के राजनीतिक कॅरियर में चरित्रहीनता का लेशमात्र भी आरोप नही। अब अगर तुम चरित्रहीन नही- तो तुम्हारा परनाना तो था। ये देख फेक फ़ोटो। ●● 1947 से लेकर बोफोर्स तक घोटालों की लम्बी सूची दिखाते है। क्यो?? इसलिए कि 2004 से लेकर केंद्र और राज्यो की तमाम सरकारों को एक फोन लगाकर, बड़े से बड़ा काम करवाने की हैसियत राहुल की थी- एंड डोंट माइंड- 2014 के बाद भी है। लेकिन ठेका, रुपया, कमीशन, आय से अधिक सम्पत्ति भ्रष्टाचार का चिन्दी भर भी आरोप राहुल पर नही। तब आप 1957 और 1987 के आरोप दोहराते हो- तू नही.. तेरा बाप तो करप्ट था। अब अलग बात की वे केस भी हवाई निकले थे। ●● आप 84 के दंगे याद करते हो-क्यो? क्योकि UPA से लेकर अब तक MP, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, हिमाचल जैसी सरकारे दंगामुक्त रही। झारखंड महाराष्ट्र में उसकी समर्थंक सरकारों पर भी दाग नही। याने दंगाई संस्कृति के लोग, राहुल की सरकारों पर दंगापरस्त होने का आरोप नही लगा सकते। तो जा- तेरा बाप तो दंगापरस्त था। ●● जो अवगुण राहुल में नही, वो पुरखो में खोजे जाते हैं। और पुरखो पर इतने सारे अवगुण थोपे गए है, शायद कोई अपकर्म शायद बचा न होगा। रिट्रोस्पेक्ट मे आप मान लें, की हर वो मानवीय, या राजनीतिक अवगुण, जिस जिसकी कोई कल्पना कर सकता है- एक भी राहुल में नही मिला।। इनफैक्ट, बार बार नेहरू, इंदिरा, राजीव, औरंगजेब, गजनवी, गौरी, पृथ्वीराज चौहान के गीत गाने का मतलब ही यही है.. कि सामने खड़े राहुल में कोई कमी, तो उनके चैलेंजर्स भी नही खोज पा रहे। ●● वो भी तब, जबकि ये लोग 12 साल से दिन रात राहुल के इर्द गिर्द आईबी, रॉ और फूल छाप कांग्रेसी घुसाकर निगरानी रखते है। पेगागस लगाकर उसके फोन तक में घुसे रहते है- उन्हें अगर 12 साल के बाद भी कोई चारित्रिक, भ्रष्टाचार, पैसे के लेनदेन या और कोई भी लूज पॉइंट नही मिल सका। तो मान लीजिये कि ऐसे शख्स के जोड़ का मनुष्य .. इस धरती पर तो मौजूद नही। ●● ऐसे में भारतीय राजनीति के राक्षसी जंगल मे.. गन्दे दांतो, लम्बी दाढ़ी, और टकले सर वाले तमाम रक्तपिपासु दैत्यों के बीच, यदि कोई एक श्वेतवर्णी मुनि दिखाई देता है- तो वह राहुल है। एंड दैट इज वाय ही इज माई फेवरिट!! ❤️ ##कौशिक-राज़... ✍️
राहुल गांधी,
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#📢BJP में शामिल हुए राघव चड्ढा पोज एज ए फ्रेंड एक्ट एज आ स्पाई!! रॉबर्ट ग्रीनी की किताब पढ़ता हुआ शख्स, पॉवरफुल हो सकता है। लेकिन मित्र, सहयोगी, प्रेमी या किसी का वेल विशर नही हो सकता। ●● यह किताब जो सिखाती है, वह 48 नियम इस तरह है- 1- मालिक से ज्यादा होशियार मत दिखना 2- दोस्त पर भरोसा नहीं, दुश्मनों को यूज करें। 3- इरादे छुपाकर रखो। 4- बात साफ हो जाये, उतना न बताओ। 5- छवि बनाकर रखो, हर कीमत पर बचाओ 6- ड्रामा करो, ध्यान खींचो। 7- काम दूसरों से करवाओ, क्रेडिट खुद लो 8- चारा फेंककर लोगो को अपने दायरे में लाओ। 9- बात बहस नहीं, एक्शन करो, निपटा दो। 10- नाखुश और बदकिस्मत लोगों से दूर रहें। 11- लोगों को अपने पर निर्भर बनाये रखो। 12- सलेक्टिव ईमानदारी और उदारता दिखाओ। 13- मदद मत मांगो, सौदा करो। 14- दोस्त बनकर रहो, जासूसी करते रहो। 15- दुश्मन को पूरी तरह कुचलकर खत्म कर दें। 16- महत्वपूर्ण अवसर पर गायब हो जाएं, इंपोर्टेंस बनेगी। 17- दूसरों को टेटर में रखें। अप्रत्याशित व्यवहार करें। 18- सुरक्षित किले मत बनाएं, अकेलापन खतरनाक है। 19- अपने से वजनी पहलवान से पंगा न लें। 20- किसी से वादा/कमिटमेंट न करें। 21- सामने वाले को मूर्ख दिखे, और फंसा लें। 22- लड़ाई जीतकर, रुक जायें, ओवर्स्टेप नहीं 23- सरेंडर का नाटक करें, मौका पाकर हमला करें। 24- अपनी ताकत को केंद्रित रखें, रिसोर्स न बिखराएँ। 25- परफेक्ट दरबारी बनें। 26- खुद को री इन्वेंट् करते रहें। 27- अपने हाथ साफ रखें। गन्दा काम दूसरे से करायें। 28- पर्सनालिटी कल्ट बनायें। 29- एक्शन में हिम्मत और साहस से उतरें। 30- अंत बिंदु तक की प्लानिंग करें। 31 - उपलब्धियों को दिखायें की बड़ा आसान था 32- शत्रु के विकल्प नियंत्रित करें, अपने दिए विकल्प से ही खेलने दे। 33- दूसरों की इच्छाओं से खेलें। 34- कमजोरी तलाश करें, उसी से चूड़ी टाइट करें। 35- खुद को राजसी तरीके से पेश करें, राजा जैसा बर्ताव करें। 36- टाइमिंग की कला में माहिर बनें। 37- जो नहीं मिल सकता, उसे घटिया कहो। 38- नयनाभिराम इवेंट रचो 39- सोचें जैसा चाहें, लेकिन बर्ताव वो सुंदर हो। 40- पानी में बवंडर बनाकर मछली पकड़ें। 41- मुफ्त के माल के ट्रेप दूर रहें। 42- महान व्यक्ति के जूतों में पैर न डालें। 43 - चरवाहे को मार डालो, भेड़ें बिखर जाएंगी। 44- दूसरों के दिल और दिमाग से खेले। 45- नकल (मॉक) करके गुस्सा दिलाएं। 46- बदलाव का उपदेश दें, लेकिन ज्यादा सुधार न करें। 47- कभी बहुत परफेक्ट न दिखें। 48- आकारहीन बनें। ●● किताब पॉवरफुल है, प्रैक्टिकल है। पर आप कितना प्रैक्टिकल होना चाहते है, आप पर निर्भर है। मेरी समझ में यह बेईमान, धोखेबाज, स्वार्थी, क्रूर, ड्रामेबाज, नकली आदमी- असली रोबोट बनाने की किताब है। इसे पढ़ने वालों से सावधान रहिये। उसे अपनी कीमती चीज- धन, भरोसा, वोट, बिजनेस पार्टनरशिप, या राज्यसभा की सीट कतई मत दीजिये ●● आम आदमी पार्टी के मितरों से क्षमा, यह पोस्ट जरा पहले लिखनी चाहिए थी। लेकिन आपको जब से झाड़ू मिली है.. कचरा ही बटोर रहे हो। भाजपा वाले न पढ़ें। तुम्हारे तो गैंग में सबई पैदाइशी इस कैटगरी के हैं। शाखा में यही तो बौध्दिक चलता है। तुम धोखेबाजी में प्राकृतिक प्रतिभा के इतने धनी हो कि ये लल्ला किताब पढके तुमको क्या ही धोखा देगा। खिखिखि!! 😂 . ##कौशिक-राज़... ✍️
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#🎨होली की मस्ती 🤣 #😘रोमांटिक सॉन्ग #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ ##कौशिक-राज़... ✍️
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#एपस्टिन फाइल्स:नवा खुलासा #मोदी है ....... खून में ही व्यापार है #✋राहुल गांधी 🔵 मंत्री ने इस्तीफ़ा नहीं, सफ़ाई दी! दुनिया के कई देशों में जेफरी एपस्टीन जैसे यौन अपराधी से रिश्ते सामने आते ही मंत्री अपनी कुर्सी छोड़ रहें हैं। अभी तक क़रीब डेढ़ दर्जन से ज़्यादा लोगों ने इस्तीफ़े दिए हैं क्योंकि शर्म, नैतिकता और जवाबदेही अब भी कुछ देशों में ज़िंदा हैं। लेकिन भारत में तस्वीर कुछ अलग है। यहाँ इस्तीफ़ा कोई नैतिक कदम नहीं, बल्कि ऐतिहासिक वस्तु बन चुका है। जो संग्रहालय में रख दी गई है, उसे देखने की अनुमति नहीं है। मोदी सरकार के एक कैबिनेट मंत्री का नाम एपस्टीन से मिलने वालों में आया तो न कुर्सी हिली, न रीढ़। मंत्री ने इस्तीफ़ा नहीं दिया, सफ़ाई दी। और सफ़ाई भी ऐसी कि लगे कि गलती नहीं, कोई बड़ी उपलब्धि हो। जैसे कह रहे हों कि “मिलना तो पड़ेगा ही, हम अंतरराष्ट्रीय लोग हैं।” यहाँ जवाबदेही अब शब्दकोश में नहीं, सिर्फ़ टीवी डिबेट में पाई जाती है। सवाल पूछो तो देशद्रोह, जवाब मांगो तो एजेंडा, और इस्तीफ़े की बात करो तो कहा जाता है कि “इतना भी क्या नैतिक हो जाना?” चंदभक्तों की दलील तो और भी ऐतिहासिक है कि “कुछ तो दे रहे हैं, सफ़ाई ही सही। अगर वो भी नहीं देंगे तो क्या उखाड़ लोगे?” यानी अब लोकतंत्र में नागरिक का अधिकार सवाल पूछना नहीं, उखाड़ने की क्षमता पर निर्भर करता है। पहले नेता छोटी सी गलती पर इस्तीफ़ा देते थे। फिर गलती पर सफ़ाई देने लगे। लेकिन अब हाल यह है कि सफ़ाई न देना भी विशेषाधिकार बन गया है। इसलिए पहली बार किसी मंत्री के सफ़ाई देने पर चर्चा हो रही है। दरअसल देश में इस्तीफ़ा अब राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, विदेशी संस्कृति घोषित कर दी गई है। और नैतिकता? वो ‘मेक इन इंडिया’ की सूची में कभी थी ही नहीं। . #कौशिक-राज़... ✍️
एपस्टिन फाइल्स:नवा खुलासा - [   ~ ತಹ ~ 'एपस्टीन से ३ ४ बारमिला... राहुल गांधी के आरोपों पर मंत्री हरदीप पुरी ने दी सफाई [   ~ ತಹ ~ 'एपस्टीन से ३ ४ बारमिला... राहुल गांधी के आरोपों पर मंत्री हरदीप पुरी ने दी सफाई - ShareChat
#मोदी है ....... खून में ही व्यापार है जो गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक, नेहरू, भगत सिंह के नहीं हुए, वे राम के भी नहीं होंगे। वे किसी के नहीं हैं। वे बस व्यापारी हैं। जो जितना बिक रहा है, उसे उतना बेच रहे हैं। पुतिन आएंगे तो वे गांधी के शिष्य बन जाएंगे। राजघाट जाएंगे। फूल चढ़ाएंगे। पुतिन के जाते ही मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने का बिल ले आएंगे। विदेश जाएंगे तो गांधी का नाम बेचेंगे। देश में आएंगे तो गांधी के मुकाबले राम का नाम बेचेंगे। वे गांधी को फूल भी चढ़ाएंगे, गोडसे की पूजा करने वालों को संसद भी ले जाएंगे। वे अमेरिका यूरोप में गांधी का नाम लेंगे, लेकिन उनके आईटी सेल वाले हर गांधी जयंती पर गोडसे जिंदाबाद और गांधी मुर्दाबाद ट्रेंड करवाएंगे। आपका देश, आपका धर्म, आपकी संस्कृति, आपकी सभ्यता, आपकी धरती, आपकी हर भावना जिसके प्रति आप संवेदनशील हैं, वह हर चीज उनके लिए तिजारत की चीज है। उन्हें लाभ होगा तो एक दिन आपको भी बेच देंगे। जितना जल्दी आप समझ जाएं, उतना अच्छा है। . ##कौशिक-राज़... ✍️
मनमोहन सिंह की योजनाओं का नाम बदल-बदलकर 11 साल से काम चला रहे हैं। लिस्ट देखिए👇 ▪️महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना 👉पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना ▪️डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर फॉर LPG (DBTL) 👉PAHAL ▪️बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट अकाउंट 👉 जन धन खाता ▪️निर्मल भारत अभियान 👉स्वच्छ भारत मिशन ▪️राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन -NULM 👉दीनदयाल अंत्योदय योजना ▪️प्राइम मिनिस्टर्स रिसर्च फेलोशिप स्कीम 👉प्राइम मिनिस्टर फेलोशिप स्कीम ▪️नेशनल आप्टिक फाइबर नेटवर्क 👉भारत नेट ▪️नेशनल मैन्युफै​क्चरिंग पॉलिसी 👉मेक इन इंडिया ▪️इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना 👉प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना ▪️स्वावलंबन योजना 👉अटल पेंशन योजना ▪️नेशनल स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम 👉स्किल इंडिया ▪️गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन 👉प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ▪️संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS) 👉प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ▪️राजीव आवास योजना 👉सरदार पटेल नेशनल मिशन फॉर अर्बन हाउसिंग ▪️नेशनल गर्ल चाइल्ड डे प्रोग्राम 👉बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना ▪️राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता प्रबंधन परियोजना (NPMSF) 👉सॉइल हेल्थ कार्ड ▪️जनऔषधि योजना 👉प्रधानमंत्री जनऔ​षधि योजना ▪️जन औषघि 👉प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) ▪️राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं अन्य कार्यक्रम 👉परंपरागत कृषि विकास योजना ▪️त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP) 👉प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना ▪️आम आदमी बीमा योजना 👉प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना ▪️नेशनल ईगवर्नेंस प्लान 👉डिजिटल इंडिया ▪️नेशनल मैरीटाइम डेवलपमेंट प्रोग्राम 👉सागरमाला ▪️नेशनल रूरल लिवलीहुड मिशन (आजीविका) 👉दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण योजना ▪️राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतिकरण योजना 👉दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना ▪️जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिनेवल मिशन 👉AMRUT ▪️विरासत क्षेत्रों का विकास (Sub-Mission under JNNURM) 👉HRIDAY ▪️नीम कोटेड यूरिया 👉पीएम प्रणाम ▪️न्यू डील फॉर रूरल इंडिया 👉ग्राम उदय से भारत उदय ▪️भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) 👉मिशन इंद्रधनुष ▪️इंदिरा आवास योजना 👉प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना ▪️एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना 👉राष्ट्रीय पोषण अभियान नया सोचने की कूवत नहीं है। आज इनकी ​जितनी योजना ये गिना सकते हैं वह सब मनमोहन सिंह की है जिसका नाम ​बदला गया है। जो हो चुका है, उसी में लंगड़ी मार रहे हैं, नाम बदल रहे हैं, फीता काट रहे हैं, और शिलापट्ट पर अपना नाम गोदवा रहे हैं। एक स्मार्टसिटी योजना लाए थे, उसकी नोटबंदी हो गई। . ##कौशिक-राज़... ✍️